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केरल में डॉक्टर ने किया CAA का समर्थन, अस्पताल ने नौकरी से निकाला

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थरूर ने कहा – मैं क्या करूँ, कोर्ट जाओ, पलक्कड़ में डॉक्टर को CAA का समर्थन पड़ा भारी

केरल में एक डॉक्टर को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करना महंगा पड़ गया. वहीं वामपंथ का दोगला चेहरा भी सबके समक्ष आ गया. इसका उदाहरण सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आया है. सोशल मीडिया पर CAA (The Citizenship Amendment Act, 2019) का समर्थन करने वाले लगातार उन्हें होने वाली असुविधाओं के बारे में बता रहे हैं. जैसे कि यदि आप केरल में रहकर CAA का विरोध नहीं करते हैं तो आपको डॉक्टर या अस्पताल इलाज नहीं देगा.

हाल ही में केरल के एक डॉक्टर को सिर्फ इस वजह से नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वह CAA के समर्थन में सरकार और कानून के साथ खड़ा था. इससे पहले भी केरल में ही एक डॉक्टर इस्लामिक जिहादियों की नजरों में सिर्फ CAA का समर्थन करने की वजह से आ चुके हैं. यह इसी तरह का दूसरा प्रकरण सामने आया है.

ट्विटर पर @vedvyazz नाम से ट्विटर अकाउंट चलाने वाले एक डॉक्टर ने अपनी कहानी लिखी है कि किस तरह से उनकी पूरी पहचान और उनके कार्यस्थल से लेकर उसके घर तक की गोपनीय जानकारी को कुछ CAA विरोधियों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया और आखिर में उन्हें नौकरी से निकाले जाने के बाद डर के कारण अपने ही पैतृक शहर से भागने को मजबूर कर दिया गया.

इसके बाद जब कुछ लोगों ने ट्विटर पर VedVyazz के समर्थन में केरल के तिरुअनंतपुरम से कॉन्ग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर से मदद मांगनी चाही, तो शशि थरूर ने यह कहकर किनारा कर लिया कि यह उस संस्थान का व्यक्तिगत निर्णय है.

ट्वीट के जवाब में शशि थरूर ने लिखा – “मुझे एक निजी अस्पताल द्वारा एक कर्मचारी के सम्बन्ध में लिए गए निर्णय पर हस्तक्षेप करने का कोई आधार नजर नहीं आ रहा है. उसे अनैतिक रूप से निकाले जाने के खिलाफ कोर्ट जाना चाहिए.”

January 24th 2020, 12:03 pm

सिक्ख नेता ने परिवार के साथ पाकिस्तान छोड़ा, इस्लामिक कट्टरपंथी दे रहे थे धमकी

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इस्लामिक कट्टरपंथियों की धमकी के बाद सिक्ख नेता राधेश सिंह टोनी ने परिवार सहित पाकिस्तान छोड़ दिया. बुधवार (22 जनवरी) को उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनका जीवन ख़तरे में था और अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्होंने यह क़दम उठाया.

टोनी ने विदेशों में बसे सिक्ख समुदाय के लोगों से अपील की थी कि वे एक ’सुरक्षित स्थान’ पर पुनर्वास में उनकी मदद करें. टोनी खालसा पीस एंड जस्टिस फाउंडेशन के अध्यक्ष और खैबर पख्तूनख्वा के मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में 2018 में पाकिस्तान में आम चुनावों में भी हिस्सा लिया था.

SAD नेता मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा पाकिस्तानी राजनेता के समर्थन में सामने आने के बाद मीडिया का ध्यान उन पर गया था. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर पाकिस्तानी सरकार से टोनी की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था. उन्होंने सरकार से उनके संरक्षण के लिए “तत्काल क़दम” उठाने का आग्रह किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि हाल के दिनों में सिक्ख समुदाय के कई सदस्यों को सताया जा रहा है.

रधेश सिंह टोनी ने बताया कि पाकिस्तान में, सिक्ख, हिन्दू और ईसाई के धार्मिक अल्पसंख्यक लगातार ख़तरों का सामना कर रहे हैं. इस्लामी कट्टरपंथियों को पाकिस्तान सरकार का समर्थन प्राप्त है.

टोनी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के मुखर आलोचक थे. इससे पहले भी उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा धमकी दी गई थी और दो अज्ञात लोगों द्वारा उन पर हमला किया गया था. कट्टरपंथियों ने टोनी को कुछ समय के लिए ट्विटर छोड़ने तक के लिए भी मजबूर किया. स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय असेंबली के लिए चुनाव लड़ने से पहले पाकिस्तानी राजनेता खैबर पख्तूनख्वा से अल्पसंख्यक पार्षद थे.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा सिक्ख समुदाय के किसी प्रमुख सदस्य को डराया-धमकाया गया है. पिछले साल, इमरान खान की कैबिनेट के एक पूर्व सदस्य बलदेव सिंह ने भारत में शरण मांगी थी. एक अन्य सिक्ख नेता चरणजीत सिंह को मई 2018 में पेशावर में गोली मार दी गई थी. हाल ही में, इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा एक नाबालिग सिक्ख लड़की, के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले के बाद ननकाना साहिब के पवित्र तीर्थस्थल पर हमला किया गया था.

January 24th 2020, 12:03 pm

सीएए के विरोध के नाम पर हिंसा का नंगा नाच अक्षम्य अपराध – मिलिंद परांडे

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नई दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव मिलिंद परांडे जी ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में किए जा रहे कथित प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा का जो नंगा नाच देश भर में किया जा रहा है, वह अब असहनीय बनता जा रहा है. प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जहां एक ओर झारखंड के लोहरदगा जैसे क्षेत्रों में हिन्दुओं पर सरेआम प्राणघातक हमले हो रहे हैं, वहीं, राजधानी दिल्ली भी हिंसा से अछूती नहीं रही. इन कथित प्रदर्शनों के चलते दिल्ली में जगह-जगह लाखों लोगों द्वारा दैनिक प्रयोग के महत्वपूर्ण मार्गों व पार्कों पर अनाधिकृत न सिर्फ कब्जे हो रहे हैं, बल्कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में गैर-मुसलमानों/हिन्दुओं का जीना भी दूभर हो चुका है. उन्होंने कहा कि जिस कानून का किसी भी भारतीय समुदाय की नागरिकता से कोई लेना-देना ही नहीं है, उसके नाम पर, कांग्रेस सहित कुछ अन्य अल्पसंख्यक तुष्टीकरण करने वाले राजनैतिक दल तथा भारत विरोधी शक्तियां जनता को भ्रमित करने का एक खरतनाक खेल खेल रहे हैं, जिसे अविलम्ब रोक कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करना नितांत आवश्यक है.

झारखंड के लोहरदगा कस्बे में, पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान में, इस्लामिक जिहादियों के धार्मिक उत्पीडन के शिकार हिन्दुओं, जिनमें अधिकांशतया एससी/एसटी समुदाय के महिला पुरुष व बच्चे सामिल हैं, के मानवाधिकारों की रक्षार्थ हिन्दू समाज द्वारा निकाली गई शान्ति पूर्ण रैली पर सैंकड़ों जिहादियों द्वारा जान-लेवा हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सत्ता परिवर्तन के साथ ही,  जिहादी मानसिकता कितनी शीघ्रता से हिन्दुओं पर हमलावर हो जाती हैं. झारखंड में ही पत्थलगढ़ी का विरोध करने पर वनवासी समाज के लोगों की निर्मम हत्याओं पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह कांग्रेसी गठबंधन की सरकार की हिन्दुओं के प्रति खतरनाक उदासीनता का ही परिणाम है. झारखंड की कांग्रेस पोषित हेमंत शोरेन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार हमलावरों को अविलम्ब गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दे तथा पीड़ित हिन्दुओं की सुरक्षा, चिकित्सा व जान-माल की हानि की भरपाई हेतु उचित व्यवस्था करे.

दिल्ली के शाहीन बाग़ व खुरेजी का जिक्र करते हुए मिलिंद परांडे ने कहा कि एक ओर शाहीन बाग़ में गत सवा माह से उत्तर-प्रदेश से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग के आवागमन को अवैध रूप से रोक कर वहां हिन्दूद्रोही व देश विरोधी नारे लगा कर लोगों को भड़काया जा रहा है तो खुरेजी के विवेकानंद आश्रम पर पथराव के साथ उसके पास वाले डीडीए पार्क की सरकारी भूमि में गुपचुप तरीके से मस्जिद निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं. इन्हें भी अविलम्ब रोका जाना अत्यंत आवश्यक है.

January 24th 2020, 11:33 am

आरएसएस के वरिष्ठतम प्रचारक धनप्रकाश जी का 102 वर्ष की आयु में निधन

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जयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठतम प्रचारक धनप्रकाश जी का शुक्रवार शाम चार बजे जयपुर में निधन हो गया. उन्होंने संघ कार्यालय भारती भवन में अंतिम सांस ली. इसी माह 10 जनवरी को धन प्रकाश जी का 103वां जन्मदिन मनाया गया था. इस दौरान संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने उनको माला पहनाकर व शॉल भेंटकर शुभकामना दी थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास में धनप्रकाश जी ऐसे पहले प्रचारक हैं, जिन्होंने अपने जीवन के 103 बसंत देखे.

संघ कार्यालय प्रमुख सुदामा शर्मा के अनुसार धनप्रकाश स्वस्थ थे. शुक्रवार सुबह भी प्रतिदिन की तरह सुबह जल्दी उठे और अपने दैनिक कार्य सम्पन्न किए. स्नान पूजा करके दोपहर में भोजन किया था. धनप्रकाश जी का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह नौ बजे किया जाएगा. इससे पहले उनकी पार्थिव देह भारती भवन पर दर्शनाथ रखा जाएगा.

धनप्रकाश जी देश के उन चुनिंदा प्रचारकों में से एक हैं, जिन्हें संघ के सभी सरसंघचालकों का सान्निध्य और उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला है. उम्र के अंतिम पड़ाव तक भी लेखन और अध्ययन में अपना समय व्यतीत करते थे.

सबसे लंबे समय तक स्वस्थ होकर जीने वाले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास में धनप्रकाश ऐसे पहले प्रचारक हैं, जिन्होंने अपने जीवन के 103 बसंत देखे. लगातार काम, प्रवास और अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा के कारण अधिकांश प्रचारक जीवन के आठ दशक भी पूरे नहीं कर पाते. संघ के इतिहास में कई उतार चढ़ाव के साक्षी रहे वरिष्ठ प्रचारक धनप्रकाश जी एक स्वयंसेवकत्व को चरितार्थ करते हुए अंतिम समय तक अपने दैनिक काम स्वयं करते रहे. उन्होंने कभी दूसरों को कष्ट देना उचित नहीं समझा. सुबह पांच बजे से अपनी दिनचर्या की शुरूआत करते थे, शाखा जाना, व्यायाम, प्राणायाम करना और उसके बाद स्वाध्याय करना यह उनके दैनिक कार्यों का अनिवार्य हिस्सा था. संघ कार्यालय पहुंचने वाले सभी स्वयंसेवकों से खुलकर बातचीत करना और सहज भाव से मनोविनोद कर लेना उनकी कला है.

धनप्रकाश त्यागी जी का जन्म 10 जनवरी 1918 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिला स्थित महेपुरा गांव में हुआ. 1942 में दिल्ली से संघ का प्राथमिक शिक्षा वर्ग, 1943 में प्रथम वर्ष, 1944 में द्वितीय वर्ष तथा 47 में संघ शिक्षा का तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लिया था. केन्द्र सरकार में नौकरी त्याग कर अपना पूरा जीवन संघ को दे दिया. वर्ष 1943 में दिल्ली में विस्तारक बने. सहारनपुर नगर, अलीगढ़ नगर, अम्बाला, हिसार, गुरूग्राम, शिमला एवं होशियारपुर में संघ के विभिन्न दायित्वों को निर्वाह किया. संघ पर लगे प्रथम प्रतिबन्ध के समय धनप्रकाश जेल में भी रहे. 1965 से 1971 तक जयपुर विभाग प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी रही. इसके बाद सेवा भारती, विद्याभारती की जिम्मेदारी भी उन पर रही. राजस्थान में भारतीय मजदूर संघ के विस्तार में धनप्रकाश जी की बड़ी भूमिका रही. कठिन चुनौतियों और प्रतिकूलताओं के बीच उन्होंने अपने जीवन का लंबा समय भामसं के काम को खड़ा करने और उसके दृढ़ीकरण में लगाया.

January 24th 2020, 10:59 am

सलमान ने हिन्दू नाम बता युवती को झांसा दिया, असलियत खुली तो युवती की हत्या की

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रचना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद के थाना दारागंज की रहने वाली थी. सलमान ने हिन्दू नाम बताकर उससे जान – पहचान बना ली थी. उसके बाद करीब एक वर्ष तक दोनों का प्रेम – प्रसंग चला. मगर बाद में विवाद हो गया. जब रचना को उसकी असलियत का पता चला तो उसने सलमान से दूरी बना ली. सलमान उसे परेशान करने लगा तो रचना ने उसे थप्पड़ मार दिया था. इसके बाद रचना ने सलमान के खिलाफ छेड़छाड़ करने एवं रूपया हड़पने की एफआईआर दर्ज कराई थी. इस बात से नाराज सलमान ने अपने दोस्त के साथ मिलकर रचना की हत्या की साजिश रची.

पुलिस द्वारा दबोचे गए सलमान ने बताया कि घटना 16 अप्रैल 2016 की है. सलमान ने रचना को धोखे से बुलाया और गला रेत कर उसकी हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद लाश को लेकर सलमान यमुना किनारे गया, मगर वहां पर लाश को ठिकाने लगाना संभव नहीं हो पाया. वहां से लौट कर करीब 40 किलोमीटर दूर नवाबगंज – प्रतापगढ़ हाइवे पर पहुंचा. वहां पर शव को ठिकाने लगा दिया. घर लौट कर उसने यह घटना अपने मामा को बताई, तब उसके मामा ने उसे डांटा कि इस तरह से लाश की शिनाख्त हो जाएगी. घर से लौटकर फिर सलमान वहां पहुंचा और लाश को पेट्रोल डालकर जला दिया ताकि पहचान न हो सके.

इधर, रचना के घर ना लौटने के कारण उसके परिजनों ने कई दिन तक थाना दारागंज के चक्कर लगाए, तब जाकर गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज हुआ. उसके बाद काफी समय बीत जाने के बाद मृतका की मां ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने इस मामले की विवेचना एसटीएफ को सौंपी थी. पुलिस का कहना है कि हत्या में सलमान के दो ममेरे भाई अभी भी फरार हैं.

पाञ्चजन्य

January 22nd 2020, 12:38 pm

सुभाष के सपनों को साकार करने के लिए बनाया गया नागरिकता संशोधन कानून

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वाराणसी. नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में मचे बवाल के बीच विशाल भारत संस्थान एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित सुभाष महोत्सव के पहले दिन ‘नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सपनों के भारत के निर्माण में नागरिकता संशोधन कानून की भूमिका’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार, संघ विचारक विराग पचपोर, डॉ. इरफान अहमद शम्सी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर, दीप प्रज्ज्वलन कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया. विशाल भारत संस्थान की आजाद हिन्द बटालियन ने इन्द्रेश कुमार जी को सलामी दी. पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से आए मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों ने इंद्रेश कुमार जी को सम्मानिचत किया.

कुंवर मोहम्मद नसीम रजा खाँ के 12 पीढ़ियों की वंशावली का विमोचन अतिथियों ने किया, कुंवर नसीम रजा की वंश परम्परा राजा खरसिंह से शुरू होती है जो बिहार के समहुता के सकरवार राजपूत थे. कुंवर नसीम रजा ने बताया कि कुंवर नवल सिंह उर्फ दीनदार खाँ की एक शाखा औरंगजेब के काल में मुसलमान हो गयी और दूसरी आज भी हिन्दू है. हमारे पूर्वज हिन्दू थे, इसमें छिपाने की कौन सी बात है, बल्कि हमें गर्व है.

मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार जी ने नागरिकता संशोधन कानून के सम्मान के लिये मुस्लिम समुदाय को शपथ दिलायी. हम भारत के, हमारी जन्मभूमि भारत. इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि ‘नागरिकता संशोधन कानून पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के जान माल धर्म की हिफाजत के लिए बना है. नागरिकता कानून से किसी भी भारतीय मुसलमान की नागरिकता नहीं जाएगी. इस बात की गारंटी है. जो लोग मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं, उनका मकसद मुसलमानों को भड़काकर हिंसा करवाना है, ताकि मुसलमान बदनाम हो, रोजी रोटी छिन जाए और मुसलमान हमेशा गरीब और लाचार बना रहे, कांग्रेस जैसे दल मुसलमानों को अपने ऊपर आश्रित कर उनका राजनैतिक लाभ उठा सकें. भारत का मुसलमान राष्ट्रभक्त है और उनका जवाब वो खुद ही देगा. सन् 1947 में पाकिस्तान नहीं था. दुनिया में 54 मुस्लिम देश हैं, किसी देश ने रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने की बात नहीं कही. भारत ने कहा – अल्पसंख्यकों को जो उत्पीड़न के शिकार हैं, उनको हम शरण देंगे. बांग्लादेश ने कहा कि हिन्दुस्तान के मुसलमान भ्रम में न रहें, उनके ऊपर जुल्म होता है तो उन्हें हम बांग्लादेश में घुसने नहीं देंगे. केवल दुनिया में एकमात्र देश भारत है, जिसमें मुसलमानों के 72 फिरके अमन चैन से रहते हैं. अल्पसंख्यक केवल हिन्दुस्तान में सुरक्षित हैं. नागरिकता संशोधन कानून नागरिकता देने का कानून है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, अल्पसंख्यकों पर जुल्म बन्द करो. दुनिया में हिन्दुस्तान वह देश है, जिसने आपको गांरटी दी है कि आप हिन्दुस्तानी थे हैं और रहेंगे.’

विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि ‘दुनिया के हर व्यक्ति को अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी रखनी चाहिये. नागरिकता हमारे पूर्वजों का उपहार है. नागरिकता कानून किसी भारतीय मुसलमान को बाहर जाने नहीं देगा और किसी पाकिस्तानी को भारत में आने नहीं देगा.’

पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ, काशी हिन्दू विशवविद्यालय के समन्वयक प्रो. श्याम कार्तिक मिश्रा ने कहा कि ‘नागरिकता संशोधन कानून अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करने वाला कानून है. वैश्विक स्तर पर इससे भारत का सम्मान बढ़ेगा. विश्वविद्यालय पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों पर रिपोर्ट तैयार करेगा और उसको संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजेगा.’

उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद की प्रो. गीता रेड्डी के कहा कि ‘नागरिकता कानून किसी मुसलमान के पहचान पर प्रश्नचिन्ह नहीं खड़ा करता. यह कानून किसी को डराने के नहीं, बल्कि डरे हुए लोगों को डर से बचाने के लिये बना है.’

अध्यक्ष इतिहासकार प्रो, अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ‘अन्य कोई भी देश अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर चिन्तित है तो उसे भी ऐसे कानून लाने चाहिये. विरोध करने वालों का नाम इतिहास में देश के खिलाफ बगावत करने वालों में लिखा जाएगा.’

विराग पचपोर ने कहा कि ‘सदियों से रह रहे भारतीय खून, खानदान, पूर्वजों से एक हैं. उनको दुनिया का कोई कानून अलग नहीं कर सकता.’ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच काशी प्रांत के संयोजक डॉ. इरफान अहमद शम्सी ने कहा कि ‘जब मुस्लिम फातिहा देता है तो अपने पीढ़ियों के सिलसिले को अल्लाह को बताता है तो फिर यहां बताने में क्या परेशानी है. मुसलमान बगावती न बनें, भारत के कानून का पूरी तरह सम्मान करें.’ संगोष्ठी का संचालन मो. फैज खान ने किया एवं धन्यवाद मो. अजहरूद्दीन ने दिया.

January 22nd 2020, 12:38 pm

पश्चिम सिंहभूम – पत्थलगड़ी का विरोध करने पर अगवा किए गए सभी सात लोगों की हत्या

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पश्चिम सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड में पत्थलगड़ी मामले में सात लोगों की हत्या कर दी गई है. ग्रामीणों में मंगलवार को हुए विवाद के बाद यह हत्याकांड हुआ. बताया जा रहा है कि पत्थलगड़ी का विरोध करने के कारण यह हत्याएं हुईं. झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में पत्थलगड़ी का विरोध करने पर अगवा किए गए सभी सात लोगों के शव बुधवार सुबह बरामद हुए. पुलिस ने सभी शव बुरुगुलीकेरा गांव के पास स्थित जंगल से बरामद किए. पुलिस ने सभी मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिए हैं.

जानकारी के अनुसार पत्थलगड़ी समर्थक रविवार को बुरुगुलीकेरा गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक कर रहे थे. वे ग्रामीणों से वोटर कार्ड, आधार कार्ड आदि जमा करने को कह रहे थे. इस दौरान उपमुखिया जेम्स बूढ़ सहित अन्य लोगों ने यह कहकर विरोध किया कि अगर वोटर कार्ड, आधार कार्ड आदि जमा कर देंगे तो बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत होगी. इससे नाराज पत्थलगड़ी समर्थक उपमुखिया जेम्स बूढ़, लुपा बुढ़ और अन्य पांच लोगों के साथ मारपीट करने लगे.

तत्पश्चात पत्थलगड़ी समर्थक उपमुखिया जेम्स बूढ़ और अन्य छह लोगों को उठाकर जंगल की ओर ले गए. रविवार देर रात तक उनके घर वापस नहीं लौटने पर सोमवार को उपमुखिया जेम्स बूढ़ और अन्य छह लोगों के परिजन गुदड़ी थाना पहुंचे. उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी. मंगलवार दोपहर को पुलिस को उपमुखिया जेम्स बूढ़ और अन्य छह लोगों की हत्या कर उनके शव जंगल में फेंके जाने की सूचना मिली. क्षेत्र नक्सलग्रस्त होने के कारण पुलिस मंगलवर रात तक घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी. इसके बाद सुबह पुलिस ने सातों अगवा लोगों के शव बरामद कर लिए.

स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गांव के उप मुखिया की हत्या होने की सूचना मिली है, जिसकी पुष्टि कराई जा रही है. जानकारी के अनुसार, मंगलवार की दोपहर को हत्या के घटना की सूचना मिलने के बाद जिले के कई पुलिस पदाधिकारियों के साथ देर शाम लोढ़ाई पहुंची थीं. घटनास्थल सोनुवा थाना से करीब 35 किलोमीटर दूर है. जिस जगह पर यह घटना हुई है, वह घने जंगल के बीच और नक्सल प्रभावित क्षेत्र है.

हेमंत सोरेन ने झारखंड का मुख्यमंत्री बनते ही पहली बैठक में भाजपा सरकार द्वारा पत्थलगड़ी मामले में किए गए सारे मुक़दमे वापस लेने का फ़ैसला ले लिया. यह जल्दबाज़ी आम जन की समझ के परे थी. इस आंदोलन के बहाने आदिवासी परम्परा को ढाल बनाकर भारत सरकार को अवैध घोषित करने के बाद अलग करेन्सी, अलग स्वास्थ्य सेवा और अलग सेना की घोषणा कर दी गई थी.

पत्थलगड़ी असल में है क्या?

रघुवर सरकार के दौरान झारखंड के खूंटी, गुमला, सिमड़ेगा, चाईबासा और सरायकेला जिलों में पत्थलगड़ी की जा रही थी, जिसपर सरकार और आदिवासी आमने-सामने थे. असल में पत्थलगड़ी आदिवासियों की सदियों से चली आ रही परम्पराओं में से एक है. परम्परागत पत्थलगड़ी और अभी की जा रही पत्थलगड़ी में काफ़ी अंतर है. पत्थलगड़ी वाले इलाक़ों में सरकारी शिक्षा का विरोध कर दिया गया था, वहां खुद की करेंसी लाने की बात की जा रही थी. केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कानूनों को खुले तौर पर चुनौती दी जा रही थी.

परम्परागत पत्थलगड़ी के अनुसार अगर आदिवासी इलाके में कोई भी उल्लेखनीय काम होता था, तो आदिवासी उस इलाके में एक बड़ा सा पत्थर लगा देते थे और उस पर उस काम को दर्ज कर देते थे. अगर किसी की मौत हो जाए या फिर किसी का जन्म हो तो आदिवासी पत्थर लगाकर उसे दर्ज करते हैं. इसके अलावा अगर उनके इलाके का कोई शहीद हो जाए या फिर आजादी की लड़ाई में कोई शहीद हुआ हो, तो इलाके के लोग उसके नाम पर पत्थर लगा देते हैं. अगर कुछ आदिवासी लोग मिलकर अपने लिए कोई नया गांव बसाना चाहते हैं, तो वो उस गांव की सीमाएं निर्धारित करते हैं और फिर एक पत्थर लगाकर उस गांव का नाम, उसकी सीमा और उसकी जनसंख्या जैसी चीजें पत्थर पर अंकित कर देते हैं. इस तरह के कुल आठ चीजों में पत्थलगड़ी की प्रथा रही है और ये प्रथा पिछले कई सौ सालों से चली आ रही है.

रघुवर सरकार के दौरान पत्थलगड़ी राज्य के खूंटी, गुमला, सिमडेगा, चाईबासा और सरायकेला जैसे कुल 13 जिलों के करीब 50 गांवों में चल रही थी. इनमें से भी चार जिले के 34 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित थे. चर्च और नक्सलियों की शह पर उन गांवों में हो यह रहा था कि पत्थलगड़ी करके किसी गांव की सीमा निर्धारित कर दी गई है, तो उसका नियम ये है कि उस गांव की ग्रामसभा की इजाजत के बिना कोई भी शख्स उस गांव में दाखिल नहीं हो सकता है. बाहर से आए किसी भी शख्स को पहले ग्रामसभा से इजाजत लेनी पड़ती है और तभी उसे दाखिला मिलता है. अगर कोई जबरदस्ती उस गांव में दाखिल होता है, तो पूरा गांव मिलकर उसे बंधक बना लेता है. फिर ग्रामसभा उसे दंड देती है.

पत्थलगड़ी पर हाल में सबसे बड़ा विवाद 2017 में सामने आया था. झारखंड की राजधानी रांची से करीब 8 किलोमीटर दूर एक गांव है. इस गांव का नाम है सोहड़ा, जो तुपुदाना ओपी इलाके के नामकुम प्रखंड में पड़ता है. 2017 में दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनी इस गांव के 210 एकड़ जमीन पर कंपनी लगाना चाहती थी. इसके लिए कंपनी के प्रतिनिधियों ने तीन बार गांव का दौरा किया. जमीन को समतल भी करवाया गया, लेकिन मार्च 2017 आते-आते गांव के लोगों ने इस गांव में पत्थलगड़ी कर दी. उन्होंने ऐलान कर दिया कि इस गांव से बाहर का कोई भी आदमी गांव में दाखिल नहीं हो सकता है. उसके बाद कोरियाई कंपनी को पीछे हटना पड़ गया. इस दौरान प्रशासन ने दावा किया था कि जनवरी 2017 से अगस्त 2017 के बीच खूंटी, अड़की व मुरहू इलाके में करीब 50 किलो अफीम बरामद की गई थी. प्रशासन ने गांवों में हो रही अफीम की खेती को बर्बाद कर दिया था, जिससे बौखलाए हुए अपराधियों की शह पर गांववालों ने पत्थलगड़ी करके प्रशासनिक अधिकारियों का विरोध किया.

2017 में ही 25 अगस्त को डीप्टी एसपी रणवीर कुमार खूंटी जिले के सिलादोन गांव में करीब 300 पुलिसवालों के साथ पहुंचे थे. पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव में अफीम की खेती हो रही है. इसी की जांच के लिए पुलिस टीम खूंटी पहुंची थी. लेकिन गांववाले इससे नाराज हो गए और हथियारों से लैस गांववालों ने पुलिस के जवानों को बंधक बना लिया. करीब 24 घंटे बाद जब बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो पुलिस टीम को छुड़ाया जा सका.

फरवरी 2018 में एक बार फिर गांववाले और प्रशासन आमने सामने आ गए. पुलिस की एक टीम 21 फरवरी को कोचांग इलाके में नक्सलियों के खिलाफ सर्च अभियान पूरा कर लौट रही थी. रास्ते में उन्हें कुरुंगा गांव के प्रधान सागर मुंडा मिल गए, जिनपर 2017 में पुलिसवालों को बंधक बनाने का केस दर्ज हुआ था. इसी मामले की पूछताछ के लिए पुलिस ने सागर को हिरासत में ले लिया और थाने लेकर जाने लगी. इसी बीच पुलिस के 25 जवान अपनी टुकड़ी से पीछे छूट गए. जब गांववालों को सागर को हिरासत में लेने और 25 जवानों के पीछे छूटने का पता चला, तो वो हथियारों के साथ बाहर आए और पुलिस के छूटे हुए 25 जवानों को बंधक बना लिया. जब पुलिस ने सागर मुंडा को रिहा किया, तब जाकर ये जवान गांववालों के चंगुल से छूट पाए. 28 फरवरी को विवाद फिर भड़क गया. सीआरपीएफ के जवान नक्सलियों के खिलाफ सर्च अभियान चलाते हुए कुरुंगा पहुंचे, तो गांववालों ने सीआरपीएफ के सर्च अभियान का भी विरोध किया.

January 22nd 2020, 12:38 pm

केरल में एसएफआई गुंडों ने एबीवीपी छात्र पर किया हमला

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केरल के वजूर NSS कॉलेज में एसएफआई के गुंडों ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया. इसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें आई. घायल छात्रों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

कॉलेज में एबीवीपी द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में आयोजित सम्मेलन में छात्रों की जबरदस्त उपस्थिति से एसएफआई छात्र घबरा गए थे. संस्थानों में एबीवीपी की बढ़ती लोकप्रियता से नाराज एसएफआई छात्र माहौल बिगाड़ने की कोशिश में थे.. इसलिए एबीवीपी द्वारा आयोजित सम्मेलनों और कार्यक्रमों में भाग लेने से अन्य छात्रों को रोकने के लिए एसएफआई गुंडों ने एबीवीपी कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला किया..

यह पहली बार नहीं है, जब एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर एसएफआई द्वारा हमला किया गया है… हाल ही में एबीवीपी द्वारा केरल में सीएए का समर्थन करने पर एसएफआई ने गुंडागर्दी की थी, जिसमें एबीवीपी कार्यकर्ताओं की पिटाई की थी… इसके अलावा वर्मा कॉलेज में भी एसएफआई गुंडों ने हंगामा किया था और जेएनयू में भी एबीवीपी छात्रों पर हुए हमले में एसएफआई के गुंडे शामिल थे..

January 22nd 2020, 9:33 am

23 जनवरी – ब्रिटिश साम्राज्य पर अंतिम निर्णायक प्रहार करने वाले नेता जी सुभाष चंद्र बोस

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यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिन्द फौज ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद पर अंतिम निर्णायक प्रहार किया था. 21 अक्तूबर, 1943 को नेता जी द्वारा सिंगापुर में गठित आजाद हिन्द सरकार को जापान और जर्मनी सहित नौ देशों ने मान्यता दे दी थी. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर इस सरकार ने 30 दिसंबर को भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा फहरा कर आजाद भारत की घोषणा कर दी थी. अंडमान और निकोबार के नाम बदल कर ‘शहीद’ और ‘स्वराज’ कर दिए गए. अत: यह कहने में कोई भी अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नेताजी द्वारा गठित सरकार स्वतंत्र भारत की पहली सरकार थी. नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे. 30 दिसंबर, 1943 ही वास्तव में भारत का स्वतंत्रता दिवस है. इसी दिन नेताजी ने अखण्ड भारत की सर्वांग एवं पूर्ण स्वतंत्रता का बिगुल बजाया था. दुर्भाग्य से कांग्रेस द्वारा देश का विभाजन स्वीकार कर लिया गया और 15 अगस्त को खण्डित भारत का स्वतंत्रता दिवस स्वीकृत हो गया. उपरोक्त तथ्यों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में झांक कर देखें तो स्पष्ट हो जाएगा कि स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण एवं निर्णायक अध्याय को जानबूझ कर इतिहास के कूड़ेदान में डाल देने का राष्ट्रीय अपराध किया गया. आजाद हिन्द सरकार के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं, इस अवसर पर देश के नागरिकों, युवा पीढ़ी को ऐतिहासिक तथ्य से अवगत करवाकर गलती को सुधारने का सुनहरा अवसर हमारे पास है. यही ऐतिहासिक अन्याय वीर सावरकर, सरदार भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, रासबिहारी बोस, डॉक्टर हेडगेवार जैसे सैकड़ों देशभक्त क्रांतिकारियों एवं आजाद हिन्द फौज के 30 हजार बलिदानी सैनिकों के साथ किया गया है. आर्य समाज, हिन्दू महासभा इत्यादि के योगदान को भी नकार दिया गया. नेताजी सुभाषचन्द्र बोस कांग्रेस के प्रखर राष्ट्रीय नेता थे. वे किसी भी प्रकार के तुष्टिकरण के घोर विरोधी थे. नेताजी के अनुसार केवल अहिंसक सत्याग्रहों से ही देश आजाद नहीं हो सकता. नेताजी के इसी एक निर्विवाद सिद्धांत के कारण गांधीवादी नेताओं ने उन्हें 29 अप्रैल 1939 को कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया. नेताजी ने 03 मई 1939 को अपने सहयोगियों की सहायता से एक स्वतंत्र संगठन फॉरवर्ड ब्लाक की स्थापना की. उन्होंने समस्त राष्ट्रीय शक्तियों को एकत्रित करने का अभियान छेड़ दिया. सितंबर 1939 में पोलैण्ड पर जर्मनी के हमले के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया. ब्रिटेन और फ्रांस भी युद्ध में कूद पड़े. नेताजी ने इस अवसर का लाभ उठाकर अंग्रेजों की सत्ता उखाड़ने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास प्रारंभ कर दिए. उन्होंने अनेक क्रांतिकारी नेताओं वीर सावरकर, डॉक्टर हेडगेवार एवं डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे स्वातंत्र्य योद्धाओं के साथ मिलकर निर्णायक प्रहार का ऐतिहासिक फैसला किया. इसी उद्देश्य से नेताजी गुप्त रूप से विदेश चले गए. वहां उन्होंने हजारों क्रांतिकारी देशभक्त भारतीय युवाओं की योजनाबद्ध ढंग से इस फौज में भर्ती की. इधर, वीर सावरकर ने भारतीय सेना में विद्रोह करवाने की मुहिम छेड़ दी. आजाद हिन्द फौज अपने उद्देश्य के अनुसार सफलता की ओर बढ़ने लगी. नेताजी के नेतृत्व में आजाद हिन्द फौज ने जिस स्वाधीनता संग्राम का श्रीगणेश किया, उसने तो ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विनाश का बिगुल ही बजा दिया. इस फौज के सेनापति सुभाष चन्द्र बोस ने जैसे ही दिल्ली चलो का उद्घोष किया, भारतीय सेना में विद्रोह की आग लग गई. डॉक्टर हेडगेवार, सावरकर और सुभाष चन्द्र के बीच पूर्व में बनी एक गुप्त योजना के अनुसार भारतीय सेना में भर्ती हुए युद्ध सैनिकों ने अंग्रेज सरकार को उखाड़ डालने के लिए कमर कस ली. यह जवान सैनिक प्रशिक्षण लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ेंगे, इसी उद्देश्य से भर्ती हुए थे. राष्ट्रीय अभिलेखागार में उपलब्ध गुप्तचर विभाग की रपटों में कहा गया है कि “20 सितंबर 1943 को नागपुर में हुई संघ की एक गुप्त बैठक में जापान की सहायता से आजाद हिन्द फौज के भारत की ओर कूच के समय संघ की सम्भावित योजना के बारे में विचार हुआ था.” एक दिन अवश्य ही इस दबी हुई सच्चाई पर से पर्दा उठेगा कि वीर सावरकर एक महान उद्देश्य के लिए तथाकथित माफीनामा लिख कर जेल से बाहर आए थे. यह अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकने जैसा कदम था. अभिनव भारत का गठन, सेना में विद्रोह, और आजाद हिंद फौज की स्थापना इस रणनीति का हिस्सा थे. सन् 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के तुरंत पश्चात ब्रिटिश शासक इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके थे कि अब भारत में उनका रहना और शासन करना संभव नहीं होगा. दुनिया के अधिकांश देशों पर अपना अधिपत्य जमाए रखने की उनकी शक्ति और संसाधन पूर्णतया समाप्त हो चुके हैं. वास्तव में यही वजह थी अंग्रेजों के भारत छोड़ने की. लखनऊ से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘राष्ट्रधर्म’ के नवंबर 2009 के अंक में के.सी. सुदर्शन जी का एक लेख ‘पाकिस्तान के निर्माण की व्यथा’ छपा था. जिसमें लिखा था - “जिस ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली के काल में भारत को स्वतंत्रता मिली, वे 1965 में एक निजी दौरे पर कोलकत्ता आए थे और उस समय के कार्यकारी राज्यपाल और कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी सी.डी. चक्रवर्ती के साथ राजभवन में ठहरे थे. बातचीत के दौरान चक्रवर्ती ने सहजभाव से पूछा कि 1942 का आंदोलन तो असफल हो चुका था और द्वितीय विश्वयुद्ध में भी आप विजयी रहे, फिर आपने भारत क्यों छोड़ा? तब एटली ने कहा था कि हमने 1942 के कारण भारत नहीं छोड़ा, हमने भारत छोड़ा नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के कारण. नेताजी अपनी फौज के साथ बढ़ते-बढ़ते इंफाल तक आ चुके थे और उसके तुरंत बाद नौसेना एवं वायु सेना में विद्रोह हो गया था.” जाहिर है कि अंग्रेज शासकों का दम निकल चुका था. अगर उस समय कांग्रेस ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी और संघ के बड़े अधिकारियों के साथ संयुक्त संग्राम छेड़ा होता तो देश स्वतंत्र भी होता और भारत का दुःखद विभाजन भी नहीं होता. नरेंद्र सहगल पूर्व प्रचारक, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभ लेखक 9811802320

January 21st 2020, 7:04 pm

सनातन धर्म केवल हिन्दुओं के लिए नहीं, मनुष्य मात्र के लिए है – डॉ. मोहन भागवत

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मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि 'राष्ट्र और संस्कृति के प्रति हर नागरिक में प्रेम भाव होता है. हमारे पास विश्व कल्याण की धरोहर है, जिसने हमें अभी तक बनाए रखा है. सुख को लोग बाहर खोजते हैं, पर वह हमारे अंदर है. एक समय के बाद बाहरी सुख फीका पड़ जाता है, जबकि हमारे अंदर उपस्थित सुख कभी फीका नहीं होता. हर धर्म का मूल ही है, सत्य को अपने अंदर खोजना, यही सनातन धर्म की मर्यादा है. सनातन धर्म कहता है कि सत्य सबके अंदर है और वो एक है. हम सब एक ही हैं. इसलिए सनातन धर्म के आचरण को धारण करना सबका कर्तव्य है. सरसंघचालक मोहन भागवत जी  विलेपार्ले (पश्चिम) स्थित संन्यास आश्रम में आयोजित पांच दिवसीय अमृत महोत्सव के अंतिम दिन (20 जनवरी, 2020) संबोधित कर रहे थे. उन्होंने अनुशासन को देशहित में बताते हुए कहा कि समूह में चलने के लिए अनुशासन आवश्यक है, उसके लिए संयम जरूरी है. हम प्रकृति का अभिन्न अंग हैं. उसे भूलने के बाद लोगों ने प्रकृति का गलत तरीके से दोहन किया. साधू संतों का जीवन हमें शिक्षा देता है कि अपने आचरण और शौर्य से धर्म की रक्षा करो. सनातन धर्म केवल हिन्दुओं के लिए नहीं है, वह मनुष्य मात्र के लिए है. इसके समाप्त होने पर संसार समाप्त हो जाएगा. इस सनातन संस्कृति को सदा के लिए प्रवाहमान बनाने के लिए आद्य शंकराचार्य और अन्य कई संतों ने अपने जीवन को झोंक दिया. यही हमारा इतिहास है. सरसंघचालक जी ने कहा कि पूर्व में बनी गलत परंपरा का आदरपूर्वक बहिष्कार होना चाहिए. महापुरुष केवल सिखाते नहीं, बल्कि आचरण द्वारा दिखाते हैं. अगर व्यक्ति सत्य और करूणा रखता है तो उसके आचरण में भी लक्षित होना चाहिए. सत्य का आचरण करना और करूणा का आचरण करना यही धर्म है. परंपरा का निर्वाह सत्य और निर्भयता पूर्वक करो, यही धर्म कहता है. प्रामाणिकता के साथ बिना निःस्वार्थ बुद्धि से तन-मन-धन पूर्वक धर्म के आचरण से स्वरक्षण करो.. संस्कृति को अपने आचरण से चलाओ और संस्कृति पर आक्रमण करने वालों का बहिष्कार करो. प्रामाणिकता के साथ तन-मन-धन से निःस्वार्थ बुद्धि से आचरण करते समय प्राणों की परवाह किए बिना आगे बढ़ो. ये संदेश महापुरूषों के लिए नहीं है, हम सबके लिए है. धर्म सबकी उन्नति एक साथ करता है. इस सनातन धर्म के अनुसार चलकर अपने जीवन को उपयोगी और उज्जवल बनाना है. कार्यक्रम के पांचवें और अंतिम दिन प्रसिद्ध कथावाचकों ने आद्य गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा और उसके पालन पर केंद्रित प्रवचन दिए. इससे पूर्व पहले सत्र में प्रातः 9 से 12 बजे तक भगवान शिव का विशेष अभिषेक एवं अर्चन किया गया. इस दौरान ब्रह्मलीन सूरतगिरि बंगला हरिद्वार नवम् पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद की पुस्तक 'चातुर्वर्ण्य - भारत समीक्षा' के हिंदी अनुवाद का विमोचन हुआ. कार्यक्रम के अध्यक्ष और संन्यास आश्रम के व्यवस्थापक महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि जी ने आभार प्रकट किया.. महामंडलेश्वर स्वामी हृदयानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती और कार्ष्णि आचार्य महामंडलेश्वर गुरुशरणानंद ने प्रवचन दिए. https://youtu.be/OoQHB9oR8ts

January 21st 2020, 3:07 am

भारत के सेवा प्रकल्पों को अध्यात्म का अधिष्ठान है – डॉ. मनमोहन वैद्य

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पुणे (विसंकें). शनिवार, 18 जनवरी को सेवा संगम प्रदर्शनी का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी, पुणे के महापौर मुरलीधर मोहोळ, पुणे महानगर निगम के स्वच्छता  सेवा दूत महादेव जाधव और अभिनेत्री युक्ता मुखी ने किया. पुणे की उपमहापौर सरस्वती शेंडगे और पुणे महानगर संघचालक रवींद्र वंजारवाडकर मंच पर उपस्थित थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से 'सेवा संगम' प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था. सह सरकार्यवाह जी ने उद्घाटन कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. डॉ. मनमोहन जी ने कहा कि "समाज के लिए सेवा भाव से जारी अनेक काम ‘सेवा संगम’ प्रदर्शनी में देखने को मिलते हैं, इसलिए यह प्रदर्शनी देखने वालों को भी सेवा कार्य करने की प्रेरणा निश्चित मिलेगी." सारे विश्व में सेवा प्रकल्प जारी हैं, लेकिन भारत के सेवा प्रकल्पों को अध्यात्म का अधिष्ठान है, इसलिए उनका अलग महत्त्व है. सेवा प्रकल्प चलाने वाली संस्थाओं में विश्वास बना है कि वे समाज को कुछ दे सकती हैं. आध्यात्मिक संस्कारों के कारण अहंकार कम होकर सामाजिक भावना को बड़ा स्थान मिलता है. सेवा करना हमारा धर्म होने के कारण अपने बंधुओं के लिए तथा समाज के लिए कार्य करने की हमारी प्रवृत्ति है. इससे समाज का सेवा धर्म और बढ़ना चाहिए. पुणे नगर निगम द्वारा स्वच्छतादूत के रूप में घोषित महादेव जाधव को उद्घाटन समारोह में मनमोहन जी के हाथों सम्मानित किया गया. पुणे के साथ पश्चिम महाराष्ट्र से 125 संस्थाएं प्रदर्शनी में सम्मिलित हुई थीं. संघ के साथ ही जनकल्याण समिति, सेवा वर्धिनी, सेवा सहयोग, समर्थ भारत और स्पार्क संस्थाओं ने इस प्रदर्शनी का संयोजन किया था. शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, स्वावलंबन, संस्कार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में जारी समाजोपयोगी कार्यों की जानकारी प्रदर्शनी से दी गई. प्रदर्शनी में दो दिनों में हजारों पुणेवासियों उपस्थिति दर्ज करवाई. साथ ही विभिन्न संस्थाओं के कार्यों में सहभागी होने की भी इच्छा व्यक्त की. वारली चित्रकला, पारंपरिक कला, कुम्हार काम के साथ-साथ विभिन्न विषयों पर कार्यशाला में भी नागरिकों से भरपूर प्रतिसाद मिला.

January 21st 2020, 3:07 am

सेवा लेने वाला सेवा करने वाला बने – सुहासराव हिरेमठ

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पुणे (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुहास राव हिरेमठ जी ने कहा कि समाज के पीड़ित और वंचित लोगों के लिए सेवा कार्य चलने चाहिए. सारा समाज सुखी एवं संपन्न होने के लिए सेवा कार्य नितांत आवश्यक है. लेकिन हम आज जिनकी सेवा कर रहे हैं, वह कल सेवा देने वाला कैसे बने, इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित 'सेवा संगम' प्रदर्शनी का रविवार को समापन हुआ. समापन कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. मुकुल माधव फाउंडेशन की अध्यक्षा रितु छाबड़िया जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. प्रांत कार्यवाह डॉ. प्रवीण जी, जनकल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र सातालकर ने स्वागत किया. उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था - 'त्याग और सेवा भारतीयों के सर्वश्रेष्ठ आदर्श हैं, इसलिए भारतीयों को सेवा की सीख देने की आवश्यकता नहीं है'. सुहास जी ने कहा कि स्वयंसेवकों द्वारा पूरे देश में डेढ़ लाख सेवाप्रकल्प चलाए जा रहे हैं. इसके साथ ही सेवा भावना से, कर्तव्य भाव से लगभग 20 से 25 लाख सेवा कार्य विभिन्न व्यक्ति और संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार के आवश्यक सेवा कार्य करने के साथ ही जिनकी सेवा कर रहे हैं, वह स्वावलंबी बनें यह देखना कार्यकर्ताओं का काम है. इससे महत्त्वपूर्ण काम यह है, कि हम आज जिसकी सेवा कर रहे हैं, वह कल सेवा करने वाला बनना चाहिए. रितु जी ने कहा कि समर्पण, समाज के प्रति भक्ति और अनुशासन संघ कार्य की तीन महत्त्वपूर्ण विशेषताएं हैं. सेवा कार्य मन से, त्याग की भावना से और सेवावृत्ति से किया जाना चाहिए. कार्यक्रम की प्रस्तावना शैलेंद्र बोरकर तथा निवेदन सुवर्णा जी ने किया.

January 21st 2020, 3:07 am

केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक परिवारों में हिन्दू संस्कारों के दृढ़ीकरण के संकल्प के साथ सम्पन्न

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नई दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक प्रयागराज में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण, #CAA2019 के बारे में समाज में जागरण व उसके क्रियान्वयन में सहयोग, परिवारों में हिन्दू संस्कारों के दृढ़ीकरण व ईसाई धर्मांतरण के षड्यंत्रों को ध्वस्त करने के संकल्प के साथ सम्पन्न हुई.

पू जगद्गुरू पेजावर पीठाधिश्वर श्री विश्वेशतीर्थजी महाराज जी को पू. संतों ने श्रद्धांजलि अर्पण की. प्रथम सत्र की अध्यक्षता पू. जगद्गुरू शंकराचार्य श्री वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज जी ने की. द्वितीय सत्र की अध्यक्षता, अ. भा. संत समिति के अध्यक्ष पूज्य श्री अविचलदासजी महाराज जी ने की. बैठक में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण, CAA जैसे योग्य कानून के बारे में समाज में जागरण तथा उसके क्रियान्वयन में सहयोग, हिन्दू परिवारों में हिन्दू संस्कारों के दृढ़ीकरण तथा ईसाई धर्मांतरण के षड्यंत्रों को ध्वस्त करने पर चर्चा हुई.

पावन समागम में CAA का कानून लाने के लिए केन्द्र सरकार को साधूवाद देने वाला तथा CAA जैसे योग्य कानून के बारे में समाज में जागरण तथा उसके क्रियान्वयन में सहयोग करने का संकल्प प्रकट करने वाला प्रस्ताव पू. महामंडलेश्वर श्री हरिहरानंद जी महाराज ने प्रस्तावित किया, जिसका समर्थन साध्वी शक्ति परिषद की महामंत्री पू साध्वी सुश्री प्रज्ञाभारती जी ने किया. इसे केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के पूज्य संतों ने साधूवाद देकर पारित किया. समागम में सर्व पूज्य म. मं. युगपुरूष परमानंद जी महाराज, म. मं. श्री अखिलेश्वरानंद जी महाराज, श्री महंत फूलडोल जी महाराज (वृंदावन), श्री गोपालस्वामी जी महाराज, म. मं. श्री शाश्वतानंद जी महाराज, स्वामी रामानंदपूरी जी महाराज (तामिळनाडू ), श्री कन्हैयादास जी महाराज, महंत श्री सुरेशदास जी महाराज (अयोध्या), म. मं. शंकरानंदजी महाराज, श्री. बन्धूगौरव ब्रह्मचारी जी महाराज, श्री नरेंद्रगिरी जी महाराज, म. मं. संतोषदास जी महाराज, महंत श्री रामहृदयदास जी महाराज, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज, जगद्गुरू रामानुजाचार्य श्री राघवाचार्य जी महाराज, श्री सतविंदर हिरा रविदासी महाराज (पंजाब), श्री संग्राम महाराज जी (आंध्रप्रदेश), मद्ध्वाचार्य श्री सुगदेंदूतीर्थ जी महाराज (कर्नाटक), विहिप के केन्द्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार जी, केन्द्रीय प्रबंध समिति के सदस्य दिनेश चंद्र जी, केन्द्रीय उपाध्यक्ष जिवेंश्वर जी मिश्र, केन्द्रीय मंत्री अशोक जी तिवारी उपस्थित रहे.

January 20th 2020, 9:11 am

एटीएस ने वाराणसी से आईएसआई एजेंट को गिरफ्तार किया

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उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस ) ने वाराणसी में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एक एजेंट को गिरफ्तार किया है. आईएसआई के एजेंट का नाम राशिद है. यह पाकिस्तान में आईएसआई के हैंडलर के सीधे संपर्क में था. राशिद, देश के सैन्य ठिकानों की फोटो खींच कर भेजता था. यह उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद के मुगलसराय का रहने वाला है. एटीएस ने आर्मी की इंटेलिजेंस के सहयोग से राशिद को गिरफ्तार किया.

बताया जा रहा है कि राशिद, सीआरपीएफ के कुछ केन्द्रों की रेकी कर चुका है. राशिद को फोटो भेजने के बदले रुपए और उपहार दिए जाते थे. जानकारी के अनुसार 23 वर्षीय राशिद पोस्टर और बैनर लगाने का कार्य करता है. वर्तमान समय में वह वाराणसी के छित्तूपुर में रह रहा था. वर्ष 2018 में वह अपनी मौसी के घर कराची गया था. वहीं पर इसकी मुलाक़ात आईएसआई के लोगों से हुई थी. वर्ष 2019 से राशिद, भारत के सैन्य ठिकानों की फोटो भेजने के कार्य में लगा था. अभी तक राशिद, दो बार पाकिस्तान जा चुका है. राशिद के कब्जे से एक फोन बरामद किया गया है जिसकी छानबीन की जा रही है.

 

January 20th 2020, 4:25 am

संघ का काम समाज से ऊंच-नीच, छुआछूत ख़त्म करना, हिन्दू समाज को एक करना है – डॉ. मोहन भागवत

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मकर संक्रांति उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने मुरादाबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मैदान में स्वयंसेवकों को संबोधित किया. उन्होंने संघ के कार्यों और संघ की पद्धति के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि संघ की शाखा मैदान में चलती है, संघ में हाजिरी के लिए कोई रजिस्टर नहीं होता है. व्यक्ति अपनी मर्जी से शाखा में आता है. सामाजिक समरसता के महत्व पर कहा कि समय बदलता रहता है एवं प्रकृति भी राष्ट्रहित में अपना स्वभाव बदलती है. हमें भी गरीबों के हित में बदलना चाहिए. संघ के अंदर पीढ़ियां बदलती रहती हैं. इसलिए स्वयंसेवकों को समय के संदर्भ में अपने कार्य का क्या स्थान है यह समझना जरूरी है. शाखा व्यक्ति निर्माण का काम है, संघ कार्य के लिए सभी स्वयंसेवकों को पहले से और अधिक समय देने की आवश्यकता है .उन्होंने समन्वय स्थापित कर व्यवहारिक रूप से एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनने का आह्वान किया. उन्होंने कहा “हम भी सही हैं और तुम भी सही हो का भाव रहे”. सरसंघचालक ने कहा कि हम सभी के मन में अपने देश को परम वैभव पर पहुंचाने का दृढ़ संकल्प होना चाहिए. परम वैभव पर पहुंचाने के लिए हमें स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं करना है. हमें अपने देश की सर्वांगीण उन्नति करनी है. उन्होंने इजराइल के लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि इजराइल के लोगों को स्वतंत्रता से पहले प्रस्ताव दिया गया कि वह अफ्रीका में कहीं भी बदले में चार गुनी जगह ले लें और इजराइल को छोड़ दें, लेकिन इजराइल के लोगों ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि हमारी मिट्टी, हमारी संस्कृति इस देश में बसी है, इसलिए हमें इसे नहीं छोड़ सकते. संघ का काम समाज में ऊंच-नीच, छुआछूत ख़त्म करना, हिन्दू समाज को एक करना, अपने देश की उन्नति करना है. भारत का धर्म बड़ा विशेष है, भारत का धर्म अध्यात्म आधारित है, धर्म दिखने में अलग-अलग है, लेकिन सब एक हैं. हमें एकता को अपनाना है, हम सबको अपनी संस्कृति माननी है, समस्त भारत वर्ष हिन्दू है. संघ क्या कहता है, क्या बोलता है, संघ के स्वयंसेवक क्या-क्या करते हैं, इसकी समीक्षा करने के पहले इसको अनुभव से समझना पड़ेगा. तभी संघ को ठीक प्रकार से जाना जा सकता है. मोहन भागवत जी ने आह्वान किया, “समाज के बंधु संघ के अंदर आकर देखें, संघ के कार्यक्रमों, शिविर में आएं एवं स्वयंसेवकों के साथ रहें एवं उनके परिवारों को देखें, तभी संघ के विचार एवं आचरण का अनुभव आपको प्रत्यक्ष रूप से मिलेगा और संघ की सही समझ तब प्रकट होगी. उन्होंने कहा किसी भी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि हिन्दू से होनी चाहिए. इसकी शुरुआत अपने घर और कार्यक्षेत्र से करें. घर में काम करने वाली बाई हो या ड्राइवर, सफाई कर्मचारी या कपड़े धोने वाला. उसे सहजता से हिन्दुत्व की विचारधारा से जोड़ें. मलिन बस्तियों में जाकर उनका दर्द समझें और घुल-मिल जाएं. उनके साथ भोजन करें. उन्हें हिन्दू होने पर गर्व करवाएं. देश में हजारों अरबपति लोग हैं, लेकिन यदि देश का एक व्यक्ति भी भूखा सोता है तो देश भूखा कहलाएगा. सभी शाखा के लिए रोज समय दें. पढ़ाई पूरी करने के बाद, पारिवारिक दायित्व पूरे करने के बाद अधिक समय दें. संघ के पदाधिकारी पहले से ज्यादा समय दें. कार्यक्रम में क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश जी टोंक, क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार, प्रांत प्रचारक धनीराम, सह प्रान्त प्रचारक अनिल कुमार, सहित अन्य उपस्थित रहे.

January 19th 2020, 1:41 pm

प्रेम और सत्य की शक्ति हमारा बचाव करती है – डॉ. मोहन भागवत जी

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संघ के इतिहास में कितने ही प्रसंग आए, संघ को समाप्त करने का प्रयास किया. संघ समाप्त नहीं हुआ, लेकिन संघ को समाप्त करने वाले समाप्त हो गए. क्योंकि ये प्रेम लेकर चलने वाला, सत्य लेकर चलने वाला काम है. उस प्रेम की, सत्य की शक्ति हमारा बचाव करती है. जैसे प्रह्लाद की रक्षा हिरण्यकश्यपु से नरसिंह भगवान ने किया. चलेगा, बढ़ेगा, सबको अपने आगोश में लेकर भारत वर्ष को उन्नत बनाने के अभियान को गति देगा. ऐसा अपना संघ का काम है, हम सबका काम है.

सरसंघचालक जी बरेली में आयोजित भविष्य का भारत – संघ का दृष्टिकोण, प्रबुद्ध नागरिकों के कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

लेकिन इतना अपप्रचार होता है. अपप्रचार करने वाले जितने आरोप हम पर लगाते हैं, वो सब आरोप उन पर लागू होते हैं, हम पर नहीं होते. कौन-कौन हैं, आप देख लीजिए, उनका अध्ययन कर लीजिए, उनके इतिहास का और वर्तमान का, उनका भविष्य भी ध्यान में आ जाएगा. उनकी चाल है कि वहम पैदा करना, वहम का डर दिखाकर अपने पीछे भीड़ एकत्रित करना. हम भीड़ जमा करने पर विश्वास नहीं करते, हमें किसी को हराना नहीं है, हमारा कोई दुश्मन नहीं है. ये सब जो लोग कर रहे हैं, हमें उन्हें भी जोड़ना है, पूरा समाज यानि पूरा समाज, उसमें कोई नहीं छूटेगा. ये सब हमारे अपने हैं. हमारे मन में गुस्सा भी नहीं है.

प्रचार के हथकंडे चलते हैं, कभी-कभी समझ में न आने के कारण भी होता है. मुझे एक प्रश्न पूछा कि कितनी संतान हों. ये छपा है कि मैंने दो बच्चों का कहा. लेकिन मैंने ऐसा कहा ही नहीं कि दो बच्चे होने चाहिए. मैंने कहा कि हमारा संघ का एक प्रस्ताव है जनसंख्या पर, क्योंकि जनसंख्या एक समस्या भी है और एक साधन भी बन सकती है. इन सबका विचार करके एक नीति बननी चाहिए. सबका मन बनाना चाहिए उसके लिए और बाद में लागू करनी चाहिए सब पर….मन बना है तो फिर कठिनाई नहीं आएगी. कैसे समझा पता नहीं, ये भी हो सकता है कि पहले से प्रतिमा बनी हुई हो, इनका अगला एजेंडा…वगैरह-वगैरह बातें…..उसके कारण यह हो रहा है.

अब, इतना होता है कि कभी हम खंडन करते, कभी नहीं करते…. हमको तो मनुष्य बनाना है, हमें सबको प्रेम से जोड़ना है, इस झंझट में हम कहां पड़ें. हमको तो कोई चुनाव नहीं जितना है, हमारे वोट कम ज्यादा होते नहीं, बढ़ते ही रहते हैं. तो इसलिए अगर आपको संघ को समझना है तो सीधा संघ में आकर देखिए. अंदर आकर देखिए, आने जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं, कोई फीस नहीं लगती, कोई मेंबरशिप नहीं. आएये, रहिये, देखिये, अध्ययन कीजिए, संघ कैसा है, क्या है, संघ के शिविरों, कार्यक्रमों में जाइये, संघ के कार्यकर्ताओं को देखिए, उनके परिवारों को देखिए, उनके क्रियाकलापों को देखिए. तो आपको संघ समझ में आएगा. चीनी मीठी होती है, इस पर भाषण हो सकता है. लेकिन ध्यान में नहीं आता, एक चम्मच खा लीजिए, ध्यान में आता है, मीठी यानि क्या.

संघ को अंदर आकर प्रत्यक्ष देखने के बाद जो मन बनाएंगे, मत बनाएंगे, हमारे लिए वह ठीक है. विरोध भी होना है तो वह गलतफहमियों पर आधारित नहीं होना है, सत्य पर आधारित विरोध होता है तो वह हमारे सुधार का कारण बनता है.

कार्यकारी मंडल में पारित प्रस्ताव

देश में जनसंख्या नियंत्रण हेतु किए विविध उपायों से पिछले दशक में जनसंख्या वृद्धि दर में पर्याप्त कमी आयी है. लेकिन, इस सम्बन्ध में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल का मानना है कि 2011 की जनगणना के पांथिक आधार पर किये गये विश्लेषण से विविध संप्रदायों की जनसंख्या के अनुपात में जो परिवर्तन सामने आया है, उसे देखते हुए जनसंख्या नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता प्रतीत होती है. विविध सम्प्रदायों की जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अन्तर,अनवरत विदेशी घुसपैठ व मतांतरण के कारण देश की समग्र जनसंख्या विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में बढ़ रहा असंतुलन देश की एकता, अखंडता व सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकता है.

विश्व में भारत उन अग्रणी देशों में से था, जिसने वर्ष 1952 में ही जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की घोषणा की थी, परन्तु सन् 2000 में जाकर ही वह एक समग्र जनसंख्या नीति का निर्माण और जनसंख्या आयोग का गठन कर सका. इस नीति का उद्देश्य 2.1 की ‘सकल प्रजनन-दर’ की आदर्श स्थिति को 2045 तक प्राप्त कर स्थिर व स्वस्थ जनसंख्या के लक्ष्य को प्राप्त करना था. ऐसी अपेक्षा थी कि अपने राष्ट्रीय संसाधनों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रजनन-दर का यह लक्ष्य समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होगा. परन्तु 2005-06 का राष्ट्रीय प्रजनन एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण और सन् 2011 की जनगणना के 0-6 आयु वर्ग के पांथिक आधार पर प्राप्त आंकड़ों से ‘असमान’ सकल प्रजनन दर एवं बाल जनसंख्या अनुपात का संकेत मिलता है. यह इस तथ्य में से भी प्रकट होता है कि वर्ष 1951 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अन्तर के कारण देश की जनसंख्या में जहां भारत में उत्पन्न मतपंथों के अनुयायिओं का अनुपात 88 प्रतिशत से घटकर 83.8 प्रतिशत रह गया है, वहीं मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 9.8 प्रतिशत से बढ़ कर 14.23 प्रतिशत हो गया है.

इसके अतिरिक्त, देश के सीमावर्ती प्रदेशों यथा असम, पश्चिम बंगाल व बिहार के सीमावर्ती जिलों में तो मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जो स्पष्ट रूप से बंगलादेश से अनवरत घुसपैठ का संकेत देता है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त उपमन्यु हजारिका आयोग के प्रतिवेदन एवं समय-समय पर आये न्यायिक निर्णयों में भी इन तथ्यों की पुष्टि की गयी है. यह भी एक सत्य है कि अवैध घुसपैठिये राज्य के नागरिकों के अधिकार हड़प रहे हैं तथा इन राज्यों के सीमित संसाधनों पर भारी बोझ बन सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनैतिक तथा आर्थिक तनावों का कारण बन रहे हैं.

पूर्वोत्तर के राज्यों में पांथिक आधार पर हो रहा जनसांख्यिकीय असंतुलन और भी गंभीर रूप ले चुका है. अरुणाचल प्रदेश में भारत में उत्पन्न मत-पंथों को मानने वाले जहां 1951 में 99.21 प्रतिशत थे, वे 2001 में 81.3 प्रतिशत व 2011 में 67 प्रतिशत ही रह गये हैं. केवल एक दशक में ही अरूणाचल प्रदेश में ईसाई जनसंख्या में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसी प्रकार मणिपुर की जनसंख्या में इनका अनुपात 1951 में जहां 80 प्रतिशत से अधिक था, वह 2011 की जनगणना में 50 प्रतिशत ही रह गया है. उपरोक्त उदाहरण तथा देश के अनेक जिलों में ईसाईयों की अस्वाभाविक वृद्धि दर कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा एक संगठित एवं लक्षित मतांतरण की गतिविधि का ही संकेत देती है.

अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल इन सभी जनसांख्यिकीय असंतुलनों पर गम्भीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से आग्रह करता है कि –

देश में उपलब्ध संसाधनों, भविष्य की आवश्यकताओं एवं जनसांख्यिकीय असंतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए देश की जनसंख्या नीति का पुनर्निर्धारण कर उसे सब पर समान रूप से लागू किया जाए.

सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जाए. राष्ट्रीय नागरिक पंजिका का निर्माण कर इन घुसपैठियों को नागरिकता के अधिकारों से तथा भूमि खरीद के अधिकार से वंचित किया जाए.

अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सभी स्वयंसेवकों सहित देशवासियों का आवाहन करता है कि वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर जनसंख्या में असंतुलन उत्पन्न कर रहे सभी कारणों की पहचान करते हुए जन-जागरण द्वारा देश को जनसांख्यिकीय असंतुलन से बचाने के सभी विधि सम्मत प्रयास करें.

 

 

January 19th 2020, 9:32 am

वं. प्रमिला ताई जी को SNDT ने दी डी.लिट की मानद उपाधि

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महर्षि कर्वे द्वारा स्थापित और उनके ही सिद्धांतों पर चल रहे सर्वप्रथम महिला विश्वविद्यापीठ SNDT University का 69वां दीक्षांत समारोह मुंबई में संपन्न हुआ.

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं विद्यापीठ के कुलपति भगत सिंह कोश्यारी जी के वरदहस्त से एवं विद्यापीठ के कुलगुरु शशिकला जी वनझारी की उपस्थिति में प्रमिला ताई जी को डी.लिट की मानद उपाधि दी गई.

प्रमिला ताई जी के राष्ट्र एवं समाज कार्य को ध्यान मे रखकर यह सम्मान उनको दिया गया है.
प्रमिला ताई जी ने महर्षि कर्वे और राष्ट्र सेविका समिति के संबंधों का स्मरण किया. कहा कि यह मेरा व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्र सेविका समिति के कार्य का सम्मान है.

January 19th 2020, 9:22 am

भौतिक व आध्यात्मिक तरक्की का समन्वय ही आर्थिक विषय में गांधी-चिंतन है – बजरंग लाल गुप्त जी

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर क्षेत्र संघचालक बजरंग लाल गुप्त जी ने कहा कि गांधी विश्व मानव थे, उन्होंने भारत का ही नहीं वरन पूरे विश्व का मार्ग प्रशस्त किया है. गांधी एक दृष्टा ही नहीं, सृष्टा भी थे. उन्होंने विचार भी दिए, साथ ही उन्हें व्यवहार में लाने का मार्ग भी दिखाया. वे शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा लक्ष्मीबाई महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में “21वीं सदी के भारत में गांधी-चिंतन की प्रासंगिकता” पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे. राम राज्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भौतिक व आध्यात्मिक तरक़्क़ी का समन्वय ही आर्थिक विषय में गांधी-चिंतन है. इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में 21वीं सदी में भारत के सामने की प्रमुख 8 चुनौतियों के संदर्भ में गांधी चिंतन पर 8 सत्रों में चर्चा हुई, इसके साथ ही 50 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए. सामाजिक समरसता, भाषा, पर्यावरण, सांस्कृतिक और भारत बोध, अर्थ बोध में गांधी चिंतन जैसे प्रमुख विषयों पर संगोष्ठी में चर्चा हुई.

दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. राजीव रंजन गिरी ने कहा कि गांधी का सांस्कृतिक चिंतन भारतीय परम्परा की समझ का विस्तार है तथा पीजीडीएवी कॉलेज के डॉ. हरीश अरोड़ा जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि गांधी दर्शन को अपनाते हुए शिक्षा को भारतीय मूल्यों और भारतीय भाषाओं से जोड़ा जाना चाहिए. पर्यावरण में गांधी-चिंतन विषय पर बोलते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के पर्यावरण के राष्ट्रीय सह- संयोजक संजय स्वामी ने कहा कि गांधी जी ने ग्रामोद्योग पर बल दिया था जो गांवों को स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ पर्यावरण की भी रक्षा करते हैं. शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के शोध प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक राजेश्वर कुमार ने संगोष्ठी के हेतु व शोध विषय पर न्यास के कार्यों पर प्रकाश डाला. संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रमिला जी ने किया.

January 19th 2020, 8:37 am

निर्भया के बलात्कारियों व‌ हत्यारों की फांसी की सज़ा के विरुद्ध खड़ा होना दुर्भाग्यपूर्ण – अभाविप

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह द्वारा निर्भया के बलात्कारियों व हत्यारों की फांसी की सज़ा के खिलाफ बयान की कड़ी निंदा करती है. यह बयान एक तरह से अपराधियों के हौसले बुलंद करने जैसा है.

निर्भया के साथ घटी जघन्य एवं क्रूर आपराधिक घटना के उपरांत सम्पूर्ण देश में दुःख मिश्रित आक्रोश की सुनामी आई और उस सुनामी ने एक स्वर में निर्भया के जघन्य और क्रूरतम बलात्कार में लिप्त अपराधियों को फांसी की सज़ा देने की मांग की.

अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री विनीता ने कहा कि, “कथित मानवाधिकारवादियों का इस तरह बलात्कारियों को प्रोत्साहन देने के स्थान पर महिलाओं को प्रोत्साहन देने का प्रयास करना चाहिए. आज महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना प्राथमिकता होना चाहिए. अभाविप ने बीते महीनों में देशभर में ‘मिशन‌ साहसी’ जैसे अभियान के माध्यम से लाखों छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया, जिससे विपरीत परिस्थिति में छात्राएं आत्मरक्षा करने में सक्षम हों, हमें सशक्त कानून और शीघ्र न्याय करने में सक्षम न्याय व्यवस्था के साथ सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए तेजी से प्रयास करने होंगे.”

अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री Nidhi Tripathi ने कहा कि, “इंदिरा जयसिंह ने जब पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित पक्ष की कोई सहायता नहीं की, तो अपराधियों को सज़ा हो जाने पर अपराधियों की सज़ा के विपक्ष में खड़े हो जाने का क्या अर्थ है? ऐसे वामपंथी मानवाधिकारवादियों का मानवता के विरुद्ध में खड़े होना इनके मानवाधिकारवादी होने पर प्रश्नचिन्ह लगाता है. निर्भया के बलात्कारियों को सज़ा जल्द से जल्द मिलें और निर्भया को न्याय मिले.”

January 19th 2020, 8:37 am

फेसबुक पर भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी पर विवाद

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शिमला (विसंकें). शिमला के ठियोग में फेसबुक पर भगवान राम पर टिप्पणी करने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. मतियाना के एक व्यक्ति ने डेढ़ साल पहले फेसबुक पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें भगवान राम का अपमान किया गया था. उस समय इसका स्थानीय स्तर पर विरोध भी किया गया था, लेकिन फिर भी उक्त व्यक्ति ने इसे फेसबुक से नहीं हटाया था. इसी पोस्ट को अभी कुछ दिन पहले किसी व्यक्ति द्वारा शेयर किया गया, जिसके बाद यह सोशल मीडिया में फिर से चलने लगी. इस पोस्ट का पता चलने पर स्थानीय लोगों ने ठियोग थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई है. धर्म जागरण मंच की ठियोग इकाई ने भी इस घटना का विरोध किया है. उनका कहना है कि यहां पर काफी समय से ऐसे कई लोग सक्रिय हैं जो हिन्दू देवी देवताओं पर सोशल मीडिया में आपतिजनक पोस्ट डाल रहे हैं. धर्म जागरण मंच की ओर से बताया गया कि ठियोग थाना में ऐसे मामलों को लेकर पहले भी एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इससे पूर्व देवी दुर्गा पर भी कई प्रकार की आपतिजनक टिप्पणियां कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा की गई थीं.

लोगों को जातिगत विषयों पर भी किया जा रहा गुमराह

मंच के समन्वयक सुन्दर का कहना है कि इस प्रकार के असामाजिक तत्व जातिगत विद्वेषों के नाम पर समाज को तोड़ने में लगे हुए हैं. यही तत्व पहले धर्मांतरण के लिए कार्य कर रहे थे. उन्होंने ठियोग के मन्दिरों में जातिगत स्तर पर प्रवेश न दिये जाने की बात को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग इस प्रकार की बातों को आधार बनाकर अफवाहें फैलाते हैं ताकि समाज को तोड़ा जा सके.

January 18th 2020, 11:20 am

स्वयंसेवकों ने भ्रामक प्रचार को लेकर विभिन्न स्थानों पर पुलिस में दर्ज करवाई शिकायत

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान असामाजिक तत्व संघ के खिलाफ साजिश रच रहे हैं. सरसंघचालक मोहन भागवत जी के नाम से 16 पेज की “नया भारतीय संविधान” नामक एक छोटी किताब प्रकाशित कर प्रचारित की जा रही है. दुष्प्रचार को रोकने के लिए स्वयंसेवकों ने विभिन्न स्थानों पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है. साथ ही प्रशासन से मांग की है कि मिथ्या प्रचार करने वालों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए.

इसी क्रम में नागपुर कोतवाली थाने में 17 जनवरी, 2020 को महानगर कार्यवाह अरविन्द कुकड़े के साथ प्रांत संघचालक राम हरकरे व अन्य स्वयंसेवकों ने शिकायत दर्ज कराई..उसके बाद प्रेसवार्ता कर मीडिया को जानकारी दी.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार के खिलाफ दो स्थानों पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है. लखनऊ के थाना गोमती नगर और थाना हजरतगंज में अलग-अलग एफ.आई.आर दर्ज कराई गई है.

मेरठ में भी सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को बदनाम करने पर अज्ञात लोगों के खिलाफ गुरुवार देर रात एफआईआर दर्ज कराई गई है.. मेरठ प्रांत के प्रचार प्रमुख अजय मित्तल ने एसएसपी से मिलकर शिकायत दर्ज कराई. प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर सरसंघचालक के नाम से झूठा प्रचार किया जा रहा है. यह असामाजिक तत्वों की साजिश है.

उधर, फरीदाबाद में भी अधिवक्ताओं ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा तथा इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान का आग्रह किया. सेंट्रल थाना सेक्टर 12 में महानगर कार्यवाह अधिवक्ता ऋषिपाल जी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई.

January 18th 2020, 9:42 am

फरीदाबाद में उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छवि धूमिल करने व देश का सामाजिक ताना बाना बिगाड़ने के उद्देश्य से कुछ शरारती-असामाजिक एवं देशद्रोही तत्वों  द्वारा ‘नया भारतीय संविधान’ नामक 16 पृष्ठ की पुस्तिका प्रचारित की जा रही है. इस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी की फोटो भी प्रकाशित की है, इसे सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित किया जा रहा है.

इसके विरुद्ध आज फरीदाबाद के जागरूक वकीलों द्वारा उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया. शुक्रवार 17 जनवरी को सेंट्रल थाना सेक्टर 12, फरीदाबाद में एक शिकायत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के फरीदाबाद पश्चिम महानगर कार्यवाह अधिवक्ता ऋषिपाल शर्मा ने दी थी. उनके साथ स्वयंसेवक व अधिवक्ता उपस्थित थे.

January 18th 2020, 9:32 am

सीएए हिंसा – दंगाइयों की गोली से ही हुई थी मुस्लिम युवकों की मौत, जांच में खुलासा

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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुई हिंसा के दौरान मेरठ में 6 मुस्लिम युवकों की मृत्यु हुई थी. उनके परिजनों की ओर से यह आरोप लगाया जा रहा था कि युवकों की मृत्यु पुलिस की गोली लगने से हुई है, जबकि पुलिस ने गोली चलाने की बात से साफ़ इंकार कर दिया था. इस मामले की जांच जब आगे बढ़ी तो खुलासा हुआ कि मुसलमान युवक ही पुलिस पर गोली चला रहे थे. दंगाइयों की तरफ से चलाई गई गोली पुलिस को न लग कर प्रदर्शन कर रहे उन युवकों को लग गई, जिस कारण उनकी मौत हुई.

1987 के दंगे का बदला लेना चाहता था अनीस उर्फ़ खलीफा

पुलिस ने आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को निकलवाया तो उसमें 3 लोग पुलिस पर गोली चलाते हुए दिखाई दिए. इन तीन युवकों की फुटेज निकाल कर जब पुलिस ने छानबीन की तो इन की पहचान अनस, अनीस उर्फ़ खलीफा और नईम के तौर पर हुई. जब पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया के सदस्य एवं 20 हजार रूपए के इनामी अनीस उर्फ़ खलीफा को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो अनीस ने पुलिस को बताया कि वर्ष 1987 में दंगा हुआ था. उस दंगे में उसके भाई रईस की मौत हो गई थी. तभी से वह पुलिस के खिलाफ था. वर्ष 2004 में एक हत्या के मामले में अनीस जेल भी गया था. श्री राम जन्मभूमि विवाद पर फैसला आने के बाद वह पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया से जुड़ गया था. यह संगठन उसे हिंसा करने के लिए उकसा रहा था. नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद भी उकसाया गया था. 20 दिसंबर को जुमे की नमाज के बाद पुलिस पर गोली चलाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी, मगर उस हमले में गोली मुस्लिम युवकों को लगी. मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अजय साहनी ने बताया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने मुसलमानों को हिंसा करने के लिए उकसाया था. कुछ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. अन्य की तलाश में दबिश दी जा रही है.

लखनऊ से सुनील राय

January 18th 2020, 5:57 am

क्या मुस्लिम महिलाएं और बच्चे अब विपक्ष का नया हथियार हैं….?

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सीएए को कानून बने एक माह से ऊपर हो चुका है, लेकिन विपक्ष द्वारा इसका विरोध अनवरत जारी है. बल्कि बीतते समय के साथ विपक्ष का यह विरोध “विरोध” की सीमाओं को लांघ कर हताशा और निराशा से होता हुआ, अब विद्रोह का रूप अख्तियार कर चुका है. शाहीन बाग का धरना इसी बात का उदाहरण है. अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए ये दल किस हद तक जा सकते हैं, यह धरना इस बात का भी प्रमाण है. दरअसल नोएडा और दिल्ली को जोड़ने वाली सड़क पर लगभग एक महीने से चल रहे धरने के कारण लाखों लोग परेशान हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठे हैं कि लोगों के लिए वहां से पैदल निकलना भी दूभर है. लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे, स्थानीय लोगों का व्यापार ठप्प हो गया है, रास्ता बंद होने के कारण आधे घंटे की दूरी तीन चार घंटों में तय हो रही है, जिससे नौकरी पेशा लोगों का कार्यस्थल तक पहुंचने में समय बर्बाद हो रहा है.

जो राजनैतिक दल इस धरने को खुलकर अपना समर्थन दे रहे हैं और इन आंदोलनरत लोगों के जोश को बरकरार रखने के लिए बारी-बारी से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि हवा का यह ज़हर कहीं देश की फ़िज़ाओं में भी ना घुल जाए. क्योंकि हाल ही में बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख ने एक वीडियो साझा किया है, जिसमें एक युवक यह कह रहा है कि यहां पर महिलाओं को धरने में बैठने के पांच सौ से लेकर सात सौ रुपये तक दिए जा रहे हैं. यह महिलाएं शिफ्ट में काम कर रही हैं और एक निश्चित संख्या में अपनी मौजूदगी सुनिश्चित रखती हैं. इतना ही नहीं उस युवक का यह भी कहना है कि वहां की दुकानों के किराए भी मकान मालिकों द्वारा माफ कर दिए गए हैं. इस वीडियो की सत्यता की जांच गंभीरता से की जानी चाहिए क्योंकि अगर इस युवक द्वारा कही गई बातों में जरा भी सच्चाई है तो निश्चित ही विपक्ष की भूमिका संदेह के घेरे में है. क्योंकि सवाल तो बहुत उठ रहे हैं कि इतने दिनों तक जो लोग धरने पर बैठे हैं, इन लोगों का खर्चा कैसे चल रहा है. यह जानना भी रोचक होगा कि वीडियो के वायरल होते ही यह खबर भी आई कि सिक्ख समुदाय ने धरना स्थल पर लंगर की व्यवस्था शुरू कर दी है. यह इत्तेफाक है या सुनियोजित रणनीति का हिस्सा यह तो जांच का विषय है.

दरअसल विपक्ष बेबस है क्योंकि उसके हाथों से चीज़ें फिसलती जा रही हैं. जिस तेजी से वर्तमान सरकार देश के सालों पुराने उलझे हुए मुद्दों को सुलझाती जा रही है, विपक्ष खुद को मुद्दा विहीन पा रहा है. और तो और वर्तमान सरकार की कूटनीति के चलते संसद में विपक्ष की राजनीति भी नहीं चल पा रही, जिससे वो स्वयं को अस्तित्व विहीन भी पा रहा है. शायद इसलिए अब वो अपनी राजनीति सड़कों पर ले आया है.

खेद का विषय है कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए अभी तक विपक्ष आम आदमी और छात्रों का सहारा लेता था, लेकिन अब महिलाओं को मोहरा बना रहा है. जी हाँ, इस देश की मुस्लिम महिलाएं और बच्चे अब विपक्ष का नया हथियार हैं क्योंकि शाहीन बाग का मोर्चा महिलाओं के ही हाथ में है.

अगर शाहीन बाग का धरना वास्तव में प्रायोजित है तो इस धरने का समर्थन करने वाला हर शख्स और हर दल सवालों के घेरे में है. जो लड़ाई आप संसद में हार गए उसे महिलाओं और बच्चों को मोहरा बनाकर सड़क पर लाकर जीतने की कोशिश करना किस संविधान में लिखा है? लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी हुई सरकार के काम में बाधा उत्पन्न करना लोकतंत्र की किस परिभाषा में लिखा है? संसद द्वारा बनाए गए कानून का अनुपालन हर राज्य का कर्तव्य है (अनुच्छेद 245 से 255) संविधान में उल्लिखित होने के बावजूद विभिन्न राज्यों में विपक्ष की सरकारों का इसे लागू नहीं करना या फिर केरल सरकार का इसके खिलाफ न्यायालय में ही चले जाना, क्या संविधान का सम्मान है? जो लोग महीने भर तक रास्ता रोकना अपना संवैधानिक अधिकार मानते हैं, उनका उन लोगों के संवैधानिक अधिकारों के विषय में क्या कहना है जो लोग उनके इस धरने से परेशान हो रहे हैं? अपने अधिकारों की रक्षा करने में दूसरों के अधिकारों का हनन करना, किस संविधान में लिखा है.

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न उन मुस्लिम महिलाओं से जो धरने पर बैठी हैं, आज जिस कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर जैसे नेताओं का भाषण उनमें जोश भर रहा है, उसी कांग्रेस की सरकार ने शाहबानो के हक में आए न्यायालय के फैसले को संसद में उलट कर शाहबानो ही नहीं हर मुस्लिम महिला के जीवन में अंधेरा कर दिया था. यह दुर्भाग्यजनक ही है कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण तीन तलाक से छुटकारा पाने वाले समुदाय की महिलाएं उस विपक्ष के साथ खड़ी हैं जो एक राजनैतिक दल के नाते आज तक उन्हें केवल वोटबैंक समझ कर उनका उपयोग करता रहा और आज भी कर रहा है.

डॉ. नीलम महेंद्र

 

January 18th 2020, 4:57 am

सह सरकार्यवाह जी ने हुसैनीवाला बॉर्डर पर अर्पित की श्रद्धांजलि

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फिरोजपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मुकुंदा जी ने फिरोजपुर विभाग के प्रवास के दौरान 15 जनवरी सेना दिवस के अवसर पर हुसैनीवाला बॉर्डर पर अमर क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त व पंजाब माता की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. समाधि स्थान पर पहले से उपस्थित स्वयंसेवकों ने पुष्पमाला से सज्जा की थी. BSF के डीजीपी संदीप जी ने उनका समाधि स्थान पर स्वागत किया और उन्हें बॉर्डर स्थान पर लेकर गए. उन्होंने BSF के स्थापना व इतिहास के बारे में वीडियो के माध्यम से जानकारी दी. सरहद पर बना म्यूजियम देखा, शहीद भगत सिंह की पिस्तौल आदि जानकारी प्राप्त की. कार्यक्रम में डीजीपी फिरोजपुर पूर्ण समय उनके साथ उपस्थित रहे. सह प्रांत प्रचारक नरेंद्र जी, फिरोजपुर जिले के जिला संघचालक जसवीर सिंह जी, सहित अन्य स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे.

January 18th 2020, 3:42 am

नागपुर महानगर की ओर से पुलिस में दर्ज करवाई शिकायत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर अपने दुष्प्रचार का एजेंडा असफल होता देख असामाजिक तत्वों ने नया हथकंडा अपनाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के नाम से 16 पृष्ठ की ‘नया भारतीय संविधान ‘ नामक एक छोटी PDF पुस्तिका प्रकाशित कर प्रचारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है. संघ या सरसंघचालक जी की ओर से ऐसी कोई पुस्तिका प्रकाशित नहीं की गई है. असामाजिक तत्वों तथा संघ विरोधियों द्वारा सोशल मीडिया व ई मेल के माध्यम से पुस्तिका को प्रसारित किया जा रहा है.
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नागपुर महानगर की ओर 17 जनवरी, 2020 को नागपुर के कोतवाली थाने में शिकायत दी गई. नागपुर महानगर कार्यवाह अरविन्द कुकड़े जी द्वारा यह शिकायत की गयी है. उनके साथ प्रान्त संघचालक राम हरकरे जी, महानगर संघचालक राजेश लोया जी, सह संघचालक श्रीधर राव गाडगे जी एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित थे. इसके पश्चात एक प्रेस वार्ता में पत्रकारों को इस विषय की जानकारी दी गई.

January 18th 2020, 3:42 am

भारत की अवधारणा संक्रांति की है, क्रांति की नहीं – अरुण कुमार

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कोलकत्ता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि हमारी अवधारणा संक्रांति की है, क्रांति की नहीं. परिवर्तन जो सहज (धीरे-धीरे) आता है, वो संक्रांति बनता, स्थायी होता है. जो परिवर्तन एकदम आता है वो प्रलय लाता है. हमारा आधार संस्कृति है. इस समाज की सबसे बड़ी समस्या है आत्मविस्मृति. हम भूल गए कि भारत क्या हैं? हम कौन हैं? हिन्दू क्या है? इस हिन्दू का लक्ष्य क्या है? दुनिया के देशों की तरह भारत का जीवन नहीं है. भारत एक यात्रा है – सनातन यात्रा. यह हमको समझना है कि भारत क्या है? पश्चिम के शिक्षण से समाज का जो एक वातावरण बना, उसमें से हम भूल गए कि भारत क्या है? पश्चिमी शिक्षा की नजर से नहीं समझा जा सकता कि भारत क्या है? अरुण जी कोलकत्ता में भारत विकास परिषद द्वारा “Transformation of Bharat in Context of Current Scenario” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि 400 साल पहले यूरोप से अलग-अलग देशों की सेनाओं ने अमेरिका पर हमला कर दिया. यूरोप के लोगों ने अमेरिका में वहां के 6 करोड़ स्थानीय लोगों की हत्या की. फिर ब्रिटिश ने अमेरिका पर राज किया और यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका बना दिया. आज दुनिया के अंदर लोकतंत्र, मानव के अधिकार, रिलीजन फ्रीडम, बहुलतावाद, मानवतावाद, का उपदेश देने वाले अमेरिका का ये इतिहास है. विश्व युद्ध के बाद 40 नए देश दुनिया के अंदर बने. पूरी दुनिया में भारत एक अद्भुत राष्ट्र है. जहां राष्ट्र पहले बना, फिर राज्य बना. इस राष्ट्र का गठन किसी युद्ध से प्राप्त करके नहीं बना, यह राष्ट्र एक है और राज्य अनेक हैं.

आज कांग्रेस के कपिल सिब्बल उन लोगों के साथ खड़े होते हैं जो देश विरोधी नारे लगाते हैं. भारत तेरे टुकड़े होंगे, बोलने वालों का कांग्रेस समर्थन करती है, उनके साथ खड़ा होती है.

अरुण जी ने कहा कि CAA (नागरिकता संशोधन कानून) में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शोषित लोगों के लिए प्रावधान किया है. फिर भी सबने तरह-तरह की बातें कीं. मैं सारे लोगों को एक ही बात कहना चाहता हूं कि आप ठंडे दिमाग से सोचिए और समझिए. समाज के बुद्धजीवियों को भावना से ऊपर उठ कर तथ्यों पर विचार करना चाहिए. वर्ष 2003 में संसद में मनमोहन सिंह ने भी सीएए की बात कही थी और मांग की थी कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शोषित लोगों को सरकार नागरिकता दे. 2012 में असम कांग्रेस का भी यही प्रस्ताव था कि इन सबको नागरिकता मिले. फिर अब क्या हुआ इन सबको? सन् 1972 में 01 करोड़ 90 लाख लोगों को नागरिकता देने का वादा इंदिरा गांधी ने किया था.

सन् 1947 को देश का एक बड़ा हिस्सा मजहब के आधार पर भारत से अलग हो गया और 15 अगस्त को एक देश बना, जिसका पाकिस्तान पड़ा. वहां पर लोग सोए भारत में थे और सुबह उठे तो पाकिस्तान में थे. फिर वहां अल्पसंख्यक हिन्दुओं, सिक्खों पर अत्याचार हुए उनके घरों और दुकानों को लूटा गया. कुछ भी नहीं छोड़ा और भी बहुत अत्याचार किए. 06 महीने के अंदर वहां के कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल भारत आ गए और यहां शरण ली. 1956 में पाकिस्तान एक इस्लामिक राष्ट्र बन गया, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ गए. बांग्लादेश, जिसे हमने आजादी दिलाई वह भी इस्लामिक राष्ट्र बन गया.

भारत की राष्ट्रीयता विविधता में एकता की है. भारत की एक परंपरा है. भारत किसी के साथ अन्याय नहीं करता, लेकिन कट्टरपंथी लोगों के सामने झुकने वाला भी नहीं है. भारत का विचार कृणवंतो विश्वमार्यम् है, जिसको लेकर आगे बढ़ रहा है.

January 17th 2020, 8:57 am

अध्यात्म और विज्ञान से मिलकर ही जीवन बनता है – डॉ. मोहन भागवत जी

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सेवा कार्य के लिए संघ और जैन आज पहली बार इकट्ठा आए होंगे, लेकिन संघ और जैन समुदाय के संतों द्वारा संचालित सेवा कार्यों का बहुत पुराना संबंध है, यह आज भी चल रहा है. आचार्य तुलसी और द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी का घनिष्ठ संबंध था. इन दोनों के बीच मिलने-जुलने का कार्य चलता आ रहा है और आज भी चल रहा है. सेवा कार्य में जाति-पाति, पंथ-संप्रदाय, पार्टी आदि नहीं देखना चाहिए. सभी को सहभागी होना चाहिए. जैन संप्रदाय की एक विशेषता है कि उनके आचार्यों की तपस्या जैसी कठिन तपस्या का साध्य दूसरा कोई नहीं है. आचार्य विद्यासागर महाराज इतनी ठंड में पैदल चलकर आते हैं. मैं उनसे मिलने गया तो उन्होंने बताया कि जो लोग जेल में हैं, उनको वो स्वरोजगार सिखाते हैं ताकि बाहर जाकर इनके मन अपराध मुक्त हों. और समाज में विश्वासपूर्वक अपनी जिंदगी फिर से जी सकें. सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार स्मारक न्यास तथा भगवान महावीर रिलीफ़ फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा जसोला, नई दिल्ली में संचालित मेडी डायलिसिस सेंटर के उद्घाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इस अच्छे कार्य में संघ आपकी मदद करेगा. स्वाभाविक रूप से अच्छे काम में एक व्यक्ति हाथ लगा रहा है तो उसमें सबको हाथ लगाना चाहिए, क्योंकि सेवा मनुष्य के मनुष्यता की सहज अभिव्यक्ति है, वो कोई बड़ा तीर मार रहा है ऐसा नहीं है. मनुष्य इसलिए मनुष्य है कि वो दुःखितों की सेवा करता है. पशु भी करते हैं, लेकिन वो अपनी सुविधा से करते हैं. मनुष्य अपनी सुविधा से नहीं करता है, जब उसे दुःख-दर्द दिखता है तो उससे रहा नहीं जाता इसलिए वो मनुष्य है. सेवा का काम बहुत स्वाभाविक काम है, उसे स्वाभाविक पूर्ति से ही करना चाहिए. सरसंघचालक जी ने कहा कि आजकल लोग सेवा को पहले सर्विस कहते हैं, फिर सेवा कहते हैं. जबकि सेवा और सर्विस दोनों का अलग-अलग अर्थ है. सर्विस के कई भाव होते हैं. सरकार की तरफ से सरकारी सर्विस होती है, जिसमें वेतन मिलता है, रिटायर होते हैं तो पेंशन मिलती है. लेकिन सेवा में कुछ नहीं मिलता है. सेवा निःस्वार्थ होती है, जो मनुष्य के मन से निकलती है. यह एक संवेदना है, उस संवेदना से हम जिसकी सेवा करते हैं उसके दुःख को समझते हैं और फिर उसका निवारण करते हैं. हम लोग एकता की विविधता को जानने वाले हैं. विज्ञान और अध्यात्म अलग हैं, ये मानना ही गलत है. प्रयोगों से ही अध्यात्म निकला है. हमारे यहां जितने भी आध्यात्मिक संप्रदाय हैं, वहां प्रत्यक्ष साधना करके अंतिम परिणीति तक जाकर अपने अनुभव को बताने वाले लोग हैं. तब भी थे और आज भी हैं जो आंखों देखी बताते हैं क्योंकि प्रयोग, निरीक्षण और उसका अनुभव किए बिना सत्य नहीं माना जाता है. इसलिए यहां उसका प्रत्यक्ष प्रयोग होता है. अगर उस ढंग से चला जाए तो आज भी विज्ञान अपना चमत्कार दिखा सकता है और अध्यात्म भी चमत्कार दिखा सकता है. दोनों को झगड़ा करने की जरूररत ही नहीं है क्योंकि दोनों से मिलकर जीवन बनता है. द्वैत की प्रकृति से जाना ही जाना है, फिर अद्वैत को पाना, इन दोनों का संतुलन साधने वाला हमारा देश है. इसलिए भारत जीवन का मार्ग बताने वाला अकेला देश है. हमारे यहां उपासना का मार्ग है पंथ-संप्रदाय. जिसे हम कहते हैं ये जैन है, बौद्ध है, हिन्दू है. धर्म से कुछ कम हमको स्वीकार नहीं होता है क्योंकि ये ही जीवन का तरीका बताता है. भौतिक जगत से गुजरते हुए कैसे आध्यात्मिक सत्य को पाना है. इस सत्य को टाल नहीं सकते, इसमें आपको जाना ही होगा. शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा एक साथ कैसे विकसित होना, ये हमारे जीवन का तरीका है. इसी के आधार पर व्यवस्थाएं बनती हैं. इन सबको जब तक हम भारत में यशस्वी नहीं करते हैं, तब-तक दुनिया को क्या बताएंगे? भौतिक विज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञान को एक साथ चला कर दुनिया को हमें दिखाना होगा. जिसकी शुरूआत आज यहां से हुई है, ये बहुत सार्थक कार्य है. इस कार्य में मन, धन, तन से सबको लगना चाहिए. https://youtu.be/RNulL7FHpnw

January 17th 2020, 7:11 am

शाहीन बाग – #CAA के विरोध के नाम पर मासूमों के दिमाग में कौन घोल रहा जहर….???

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दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले कई दिनों से #CAA के विरोध के नाम पर प्रदर्शन चल रहा है. पर, यह विरोध प्रदर्शन कम साजिश अधिक दिख रहा है. सोची समझी रणनीति के तहत प्रदर्शन में महिलाओं व बच्चों को आगे रखा गया है. नन्हें मुन्हों से लगवाए जा रहे नारे हैरान कर देंगे, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देख अंदाजा हो जाएगा कि किस प्रकार मासूमों के मन में जहर घोला जा रहा है, उनका उपयोग कर अपना स्वार्थ साधा जा रहा है…….

सीएए  के विरोध के नाम पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में नन्हें मुन्हों बच्चों द्वारा की जा रही नारेबाजी सवाल खड़े करती है… कौन है जो इनसे ….जामिया तेरे खून से, जेएनयू तेरे खून से जैसे नारे लगवा रहा है? इन मासूम बच्चों के साथ कौन खेल रहा है? कौन कच्चे घड़ों पर अपने स्वार्थ की इबारत लिख रहा है? नारेबाजी कर रहे मासूम बच्चों को पता भी नहीं कि वे क्या बोल रहे हैं? जामिया तेरे खून से इंकलाब आएगा, ये भाषा मासूमों की नहीं हो सकती…..महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लिए प्रदर्शन पर बैठ रही हैं, और यह सब हो रहा है #CAA के विरोध के नाम पर….जबकि सरकार कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि यह कानून भारत के नागिरकों पर न ही लागू होता है, और न ही उनके अधिकारों को प्रभावित करता है. तो फिर यह विरोध प्रदर्शन क्यों, कौन महिलाओं को गुमराह कर रहा है, बच्चों से ऐसे नारे लगवा रहा है, इनकी आड़ लेकर, उन्हें आगे रखकर अपने स्वार्थ सिद्ध करने में लगा है? इन प्रश्नों के उत्तर ढूंढना आवश्यक है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो षड्यंत्र की चर्चा को पुख्ता करता है, वायरल वीडियो के अनुसार प्रदर्शनकारियों को पैसे दिए जा रहा हैं. तथा शिफ्ट के अनुसार महिलाएं प्रदर्शन में भाग ले रही हैं. वीडियो के अनुसार प्रदर्शन में भाग लेने के लिए 500 से 700 रुपए दिए जा रहे हैं.

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के नाम पर दिल्ली के शाहीन बाग में (15 दिसंबर) एक महीने से महिलाएं बच्चों को लेकर धरने पर बैठ रही हैं. महिलाओं का धरना दिन-रात चल रहा है और सरकार के खिलाफ लगातार नारेबाजी हो रही है.

सीएए के विरोध में चल रहे प्रदर्शन से दिल्ली-नोएडा मार्ग एक महीने से बंद है..मार्ग बंद होने के कारण दिल्ली-नोएडा-फरीदाबाद आने-जाने वाले लाखों लोगों को कई किलोमीटर का चक्कर काटकर आना-जाना पड़ता है.. इस मार्ग के बंद होने से रिंग रोड, मथुरा रोड व डीएनडी पर ट्रैफिक की समस्या बढ़ रही है… आस-पास के क्षेत्रों में स्कूल बसें तक नहीं पहुंच पा रही हैं… साथ ही कालिंदी कुंज मार्ग भी धरना-प्रदर्शन के कारण एक महीने से बंद है.. कालिंदी कुंज मार्ग बंद होने से सरिता विहार और नोएडा से जोड़ने वाला मार्ग भी एक महीने से बंद है. लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए हर दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है..

हैरान करने वाला विषय है कि इसी प्रदर्शन के मंच से जिन्ना वाली आजादी के नारे भी लग रहे हैं, लेकिन किसी ने भी प्रदर्शनकारियों से नहीं पूछा कि इस जिन्ना वाली आजादी से उनका मतलब क्या है? क्या सीएए के विरोध के नाम लोगों में भ्रम का निर्माण कर देश को तोड़ने के मंसूबे पाले जा रहे हैं? इस साजिश के पीछे छिपे असली चेहरे कौन हैं…क्या इसकी गहराई से जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए…? महिलाओं बच्चों की आड़ लेकर देश के टुकड़े करने के सपने पालने वाले षड्यंत्रकारियों का चेहरा बेनकाब होना चाहिए.

January 16th 2020, 10:10 am

अपनी योग्यता से सफलता हासिल कर सकती है भारतीय महिला – प्रभा राव

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नई दिल्ली. भारत की महिला किसी भी परिस्थिति में अपनी योग्यता से सफलता हासिल कर लेती है और ये साबित कर देती है कि उसमें बहुत कुछ करने की क्षमता है.. पुरूष की तरह महिला भी मानव है..जो पुरूष से भिन्न है..ये प्रकृति का नियम है..

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित विचार गोष्ठी में संबोधित कर रही थीं. गोष्ठी का विषय था Inside The Mind of An Indian Women… प्रभाराव ने कहा कि मेरे समय में कई देशों में पितृसत्ता को लेकर नारीवाद आंदोलन शुरू हुआ.. लेकिन भारत में ऐसा नहीं था क्योंकि पितृसत्ता भारतीय संस्कृति में नहीं आती.. हम क्या पहनें, कहां जाएं, क्या करें? ऐसी सोच हमें बचपन से ही परिवार से मिलती है..उसी के अनुरूप में बन जाते हैं, आधुनिक भारत में पैडमैन जैसी फिल्में पितृसत्ता की प्रतीक हैं…सेनेटरी पैड मुहिम को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए….

रियो पैरालाम्पिक में पदक जीतने वाली भारतीय खिलाड़ी दीपा मलिक ने कहा कि आज स्थिति बदल गई है.. स्त्री की क्षमता, ज्ञान का आंकलन कम होकर उसके देहपिंड का आकर्षण अधिक हो गया है.. जिसके कारण महिला घर, बाजार और कार्यस्थल सहित सभी स्थानों पर मानसिक व शारीरिक हिंसा और प्रताड़ना झेलने को मजबूर है…दीपा मलिक ने बताया कि संपन्नता, उच्च वर्ग होने के बाद भी मुझे बहुत कुछ सहना पड़ा…मेरे ऊपर सवाल उठाए गए, तंज कसे गए, लोगों ने कहा कि मेरे शरीर को लकवा मारा है.. मैंने जवाब दिया – लकवा मेरे शरीर को है, मेरी आत्मा व बुद्धि को नहीं..जब मेरी सफलता दुनिया के सामने आई तब लोगों को अहसास हुआ कि भारत की महिला की सोच कितनी सशक्त है..

January 16th 2020, 8:25 am

सरसंघचालक के नाम पर प्रसारित की जा रही पुस्तिका संघ को बदनाम करने का षड्यंत्र

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मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर अपने दुष्प्रचार का एजेंडा असफल होता देख असामाजिक तत्वों ने नया हथकंडा अपनाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के नाम से 16 पृष्ठ की एक छोटी पुस्तिका प्रकाशित कर प्रचारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है. संघ या सरसंघचालक जी की ओर से ऐसी कोई पुस्तिका प्रकाशित नहीं की गई है. असामाजिक तत्वों तथा संघ विरोधियों द्वारा सोशल मीडिया व ई मेल के माध्यम से पुस्तिका को प्रसारित किया जा रहा है. पुस्तिका में इस प्रकार के तथ्य प्रकाशित किए गए हैं, जिनका संघ से कोई संबंध नहीं है. संविधान को लेकर संघ की स्पष्ट मान्यता है, जिसे सरसंघचालक जी ने विभिन्न स्थानों पर व्यक्त भी किया है.

कोई भी पुस्तिका प्रकाशित की जाती है तो नियमानुसार उस पर प्रकाशक, प्रकाशन संस्था का नाम, आईएसबीएन क्रमांक अथवा पंजीकरण क्रमांक प्रकाशित करना आवश्यक है. लेकिन प्रचारित की जा रही पुस्तिका में ऐसी कोई जानकारी नहीं है. इसी से समझ में आता है कि पुस्तिका को प्रचारित करने का एकमात्र उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना, समाज में विघटन उत्पन्न करना, विशेष वर्ग के लोगों को अन्य के प्रति भड़काना है.

साजिशकर्ताओं ने पुस्तिका को अधिक प्रचारित करने के उद्देश्य से पुस्तिका को लेकर अपने सुझाव प्रधानमंत्री कार्यालय और नागपुर कार्यालय भेजने को कहा है. इतना ही नहीं, उत्कृष्ट सुझाव देने वाले को 10 हजार रुपए के पुरस्कार का लालच भी दिया गया है.

January 16th 2020, 6:20 am

JNU Protest में खुलासा – छात्रों ने कहा, शिक्षकों के दबाव में प्रदर्शन में शामिल होते हैं

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5000 से अधिक छात्रों ने करवाया रजिस्ट्रेशन, अच्छे अंकों के लिए प्रदर्शन में शामिल होते हैं छात्र नई दिल्ली. जेएनयू के मांडवी छात्रावास में रहने वाले छात्र सूरज कुमार पर पांच जनवरी की शाम को 30 से अधिक उपद्रवियों ने हॉस्टल में घुसकर हमला किया था. इस दौरान उसने किसी तरह छुपकर अपनी जान बचाई थी. सूरज का आरोप है कि उसने परीक्षाएं रोकने के विरोध में कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसके विरोध में वामपंथी संगठन के छात्र उसे पीटने के लिए छात्रावास आए थे. उसे पीटने के लिए आई भीड़ उसके कमरे के बाहर चिल्ला रही थी कि यही है संघी का कमरा. सूरज ने बताया कि वह सेंटर फॉर कोरियन स्टडी के तीसरे वर्ष का छात्र है. सूरज ने अंतर्राष्ट्रीय स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया है, जिसमें उन्हें 31 जनवरी तक अपना परीक्षा परिणाम जमा करना है. लेकिन पिछले 80 दिनों से विवि में काम बाधित है, जिसके लिए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट से मामले में दखल देने की अपील की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्वयं हस्तक्षेप से इंकार करते हुए जेएनयू वीसी से जल्द गतिरोध दूर करने के लिए कहा था. इसी बात को लेकर जेएनयू में प्रोफेसर आयशा किदवई लगातार सोशल मीडिया पर उसे टारगेट कर रही थीं. उन्होंने इसको लेकर फेसबुक पर कई पोस्ट भी किए हैं. बेहतर परीक्षा परिणामों के लिए हो रहा प्रदर्शन छात्र का आरोप है कि विवि में पढ़ने वाले छात्र बेहतर परीक्षा परिणामों के लिए ऐसे प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं. क्योंकि, जेएनयू में होने वाली परीक्षाओं में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन जेएनयू के प्रोफेसर ही करते हैं. इस तरह का आरोप लगाने वाले सूरज अकेले छात्र नहीं हैं. परीक्षा में बेहतर अंक पाने के लिए करना पड़ता है प्रदर्शन जेएनयू में ही पढ़ने वाले छात्र शिवम चौरसिया ने बताया कि कई छात्र-छात्राएं प्रदर्शनों में इसलिए शामिल हो जाते हैं कि उन्हें परीक्षा में बेहतर अंक मिल सकें. छात्रों के आरोपों से सहमति जताते हुए संस्कृत विभाग के प्रोफेसर हरीराम मिश्रा ने कहा कि स्वमूल्यांकन की पद्धति को अब बदलना चाहिए. जेएनयू के छात्रों की भी उत्तर पुस्तिकाएं बाहरी प्रोफेसर द्वारा मूल्यांकित की जानी चाहिए. प्रोफेसर ने कहा टीचर्स एसोसिएशन, छात्र संघ के पिछलग्गू की तरह काम कर रहा है. कुछ छात्रों की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए अन्य छात्रों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं. एसोसिएशन का काम टीचर्स की समस्याओं को विवि प्रशासन के सामने उठाने का है न कि विवि छात्रसंघ के पिछलग्गू बनने का. एसोसिएशन को टीचर्स के प्रमोशन, पेंशन, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देना चाहिए, ना कि कुछ छात्रों की क्षुद्र महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देना चाहिए. शिक्षकों को कक्षाओं में अध्ययन और अध्यापन के काम में जोर देना चाहिए, जिसके लिए विवि जाना जाता है.  - प्रोफेसर हरीराम मिश्रा, संस्कृत विभाग छात्र का पक्ष शिक्षकों से परीक्षा में अच्छे अंक और कई बार पढ़ाई में सहयोग के लिए छात्र शिक्षकों के कहने पर प्रदर्शन में हिस्सा लेते हैं. पांच हजार से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिससे स्पष्ट है कि छात्र पढ़ना चाहते हैं. पर, कुछ लोगों के दबाव में वह प्रदर्शन कर रहे हैं.  - उमेश कुमार, शोध छात्र साभार - दैनिक जागरण https://www.jagran.com/politics/state-ncr-jnu-protest-students-allegation-we-join-the-demonstration-jn-jnu-under-pressure-from-teachers-19939034.html

January 16th 2020, 4:54 am

1984 सिक्ख दंगे – केंद्र सरकार ने स्वीकार की जस्टिस ढींगरा आयोग की रिपोर्ट, होगी कार्रवाई

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सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दी जानकारी

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने 1984 सिक्ख दंगों (सिक्ख नरसंहार) पर गठित जस्टिस ढींगरा आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. सरकार रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगी. केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान इसकी जानकारी दी गई. सर्वोच्च न्यायालय में बताया कि 1984 सिक्ख दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर पूर्व जज ढींगरा कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और उसी के अनुसार कार्रवाई करेगी.

केन्द्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने 1984 के सिक्ख विरोधी दंगों के 186 मामलों की जांच करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगरा की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और वह कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगी. मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आर एस सूरी ने सूचित किया कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निन्दा की है. वह 1984 के सिक्ख विरोधी दंगों में कथित रूप में संलिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिये एक आवेदन दायर करेंगे.

केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि उन्होंने इस रिपोर्ट में की गयी सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और इस मामले में उचित कदम उठाएंगे. ‘हमने सिफरिशें स्वीकार कर ली हैं और हम कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे. अनेक कदम उठाने की आवश्यकता है और ऐसा किया जाएगा.’

आरएस सूरी ने कहा, ‘रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कुछ न कुछ कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि इसमें उनकी मिलीभगत थी. ये पुलिस अधिकारी बचने नहीं चाहिए. हम इस रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करेंगे.’

शीर्ष अदालत ने 11 जनवरी, 2018 को जांच दल का गठन किया था, जिसे उन 186 मामलों में आगे जांच करनी थी, जिन्हें पहले बंद कर दिया गया था.

तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की 31 अक्तूबर, 1984 को उनके दो सुरक्षा कर्मियों द्वारा गोली मार कर हत्या किये जाने के बाद दिल्ली सहित देश के अनेक हिस्सों में बड़े पैमाने पर सिक्ख विरोधी दंगे हुए थे. इन दंगों में अकेले दिल्ली में 2,733 व्यक्तियों की जान चली गयी थी.

January 15th 2020, 5:50 am

शुद्धि, दान, यज्ञ व वंचितों की सेवा का पर्व है मकर संक्रांति – विनोद बंसल

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नई दिल्ली. शारीरिक व मन की शुद्धि, दान, यज्ञ व वंचितों की सेवा कर उन्हें गले लगाने का महान पर्व है मकर संक्रांति. आज दक्षिणी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित आर्य समाज संत नगर में आयोजित मकर संक्रांति उत्सव में विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि सम्पूर्ण भारत में कहीं लोहड़ी, कहीं उत्तरायण, कहीं माघ साजी, कहीं पौष-संक्रांति, कहीं पोंगल, कहीं बिहू, कहीं मकराविलक्कू तो कहीं मकर संक्रांति जैसे विविध नामों से मनाया जाने वाला भगवान सूर्य की उपासना का पर्व विविधता में एकता का ही संदेश देता है.

वैदिक विदुषी दर्शानाचार्या विमलेश आर्या ने उपस्थित जन-समूह को यज्ञ में आहूतियां समर्पित करवा कर यज्ञोपदेश करते हुए कहा कि लोहड़ी बृहदयज्ञ का ही एक रूप है, जिसमें, शरदऋतु में आए नवान्न गुड़ तिल मक्का आदि से बने मिष्ठान की आहुति दी जाती है. अतः यज्ञ, देव-पूजा संगतिकरण और दान करते हुए अभावग्रस्त लोगों को पुण्य कार्यों में शामिल कर उनकी आवश्यकता की वस्तुएं वितरण करके ही लोहड़ी या मकर संक्रांति जैसे पर्व को सार्थक किया जा सकता है.

January 15th 2020, 2:34 am

हम ध्येय के लिए कार्य करते हैं, अपने स्वार्थ के लिए नहीं – डॉ. मोहन भागवत

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भारत का किसान, भारत को परम वैभव संपन्न बनाने में योगदान दे भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित कार्यालय "किसान शक्ति" का लोकार्पण नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम सब लोग ध्येय के लिए कार्य करते हैं, स्वार्थ के लिए नहीं करते. न अपना स्वार्थ है, न संगठन के लिए स्वार्थ है. भारत का किसान समर्थ हो, समस्या मुक्त हो. भारत का किसान भारत को परम वैभव संपन्न बनाने में योगदान दे. क्योंकि भारत के परम वैभव संपन्न होने से ही विश्व में शांति आएगी. इसलिए अब विश्व शांति के लिए भारत का परम वैभव संपन्न होना अनिवार्य हो गया है. ये हमारा ध्येय है, इसके लिए काम कर रहे हैं. काम करेंगे, हम बढ़ेंगे. हम एक ध्येय के लिए काम कर रहे हैं, ऐसा भाव रहता है. वे भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित कार्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित प्रशासनिक कार्यालय (नई दिल्ली) "किसान शक्ति" का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि साधन बनते हैं, साधनों का उपयोग जरूर करना चाहिए. पर, साधनों पर निर्भर रहने से गडबड़ होती है. साधनों का भरोसा नहीं है क्योंकि साधन परिस्थिति पर निर्भर करता है. साधन आते-जाते रहते हैं, ये तो समय की देन है. लेकिन साध्य अपना पक्का है और अपनी साधना पक्की है, साधक है तो बाकी सारी बातें होंगी. किसान संघ शुरू हुआ तो कोई साधन नहीं था, न ही कोई मान्यता थी. छोटे-छोटे प्रयोग हुए. संघ के स्वयंसेवक किसानों ने अपनी खेती में प्रयोग किया. तब कुछ ध्यान में आया. उसको लेकर काम शुरू किया. वहां से शुरू करके यहां तक आए हैं. साधनों के भरोसे हम नहीं आए, हम आए हैं अपनी साधना के भरोसे. यह साधना संगठन की साधना है, जोड़ने की साधना है. कार्य करने वाले हम साधक हैं. साधन हमारे स्वामी नहीं, हम साधनों के स्वामी बनेंगे. सरसंघचालक जी ने कहा कि हमारे जीवन का आधार संघर्ष नहीं समन्वय है, संवाद है, बंधुता है. हम संघर्ष भी करेंगे, उसमें से समन्वय, अपनापन भी स्थापित होगा. हम सब को ध्येय की राह पर चलना है. हमको कोई डिगा नहीं सकता है क्योंकि हम अपने मन से चल रहे हैं. हमारा कोई स्वार्थ नहीं है. किसी के भय के कारण काम नहीं कर रहे हैं. अपनी आत्म इच्छा से अपने-अपने विवेक से काम कर रहे हैं. सब साथ मिलकर चले और संगठन का ये कारवां बढ़ता रहे. इसलिए हमने कुछ नियम, विधि बनाकर स्वयं एक होकर स्वीकृत किया है. जिसके कारण किसानों में किसान संगठन के नाते पवित्रता और स्वच्छता है, उसका दर्शन कार्यालय में होना चाहिए. जिसका दर्शन किसान संघ कार्यालय में होता है. उन्होंने कहा कि अभी जो समस्या मानव जाति के सामने है. उनका ठीक से उत्तर देने वाला समाज और समाज को खिलाने वाला, बनाने वाला, अपना पूरा योगदान देने वाले किसान को संघ ही खड़ा करेगा. ये बात हम अभिमान के साथ नहीं कह रहे हैं. अभी अपना समाज तैयार नहीं है. उसको तैयार करने लिए संघ को कर्य करना पड़ेगा. तैयार हो जाने के बाद हम कह सकते हैं कि हमारा समाज कर सकता है. इस प्रकार का वातावरण खड़ा करने वाला भारत और भारत का किसान स्वयं को बलशाली बनाकर भारत को बलशाली बनाने में सहयोग करे. ऐसा संघ का विचार है, इसीलिए हम करेंगे, हम जीएंगे.. मोहन भागवत जी ने कहा कि संगठन में ध्येय निष्ठा है, अनुशासन में रहकर चलता है. एक अनुशासन अपने संगठन का है. एक अनुशासन अपने देश के तंत्र का है. एक अनुशासन मानव हित का है. ये तीनों अनुशासनों का समन्वय से सुसंगत का पालन करके हम आगे बढ़ते हैं. ये बात उतनी ही महत्ववपूर्ण है क्योंकि हमको समस्या ही नहीं सुलझाना, समस्या के लिए किसान को कैसा बनना पड़ता है, इसका उदाहरण भी हमको ही बनना पड़ता है.

January 14th 2020, 7:51 am

मेरठ में बलिदानियों की माटी को नमन कार्यक्रम का आयोजन

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मेरठ. हिन्दू जागरण मंच द्वारा मेरठ के जिमखाना मैदान में बलिदानियों की माटी को नमन कार्यक्रम का आयोजित किया गया. इसमें 64 बलिदानियों के परिवारों को सम्मानित किया गया.

बलिदानियों के परिवारों को पीएल शर्मा स्मारक मैदान से पुष्प वर्षा और बैंड बाजों के साथ जिमखाना मैदान लाया गया. इशकी अगवानी केन्द्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह एवं आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा जी कर रहे थे. आकाश से भी एक ड्रोन लगातार पुष्प वर्षा कर रहा था. अद्भुत दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया. अनेक लोगों की की आँखें भर आईं. बलिदानियों के सभी परिवारों को मंच पर बिठाया गया, स्मृति चिह्न एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया.

मंच पर अमर जवान ज्योति जल रही थी, इसके पीछे इंडिया गेट का चित्र था. कार्यक्रम में बलिदानियों के घरों से लाई गई मिट्टी का तिलक सभी को लगाया गया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि लोग बलिदानियों के के परिवारों को दिन में सिर्फ एक बार प्रणाम कर लें, तभी आयोजन का उद्देश्य सफल होगा. ये ऐसे स्वाभिमानी परिवार हैं, जिन्हें किसी से कुछ नहीं चाहिए. सिर्फ समाज का प्रेम और सम्मान चाहिये. एक सैनिक के दिल में सिर्फ एक ही बात रहती है कि मुझे अपने नाम और निशान को नहीं गिरने देना. इसकी रक्षा के लिये हमारे सैनिकों ने विकट परिस्थितियों में भी लड़ाइयां लड़ीं और जीती हैं. इसलिये हम सब वीर सैनिक और उसके परिवार का सम्मान करें. अगर हम ऐसा कर पाते हैं तो जितना एक सैनिक आज काम कर रहा है, वह इससे भी 15 गुना ज्यादा काम करेगा. आज हम सभी यह प्रण लें कि अगर हमारे शहर, गांव या आसपास के क्षेत्र में किसी सैनिक का परिवार है तो दिन में कम से कम एक बार उसका हालचाल अवश्य लेंगे.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पवन सिन्हा जी ने कहा कि बलिदानियों के परिवारों की तीन महत्वपूर्ण आवश्यकताएं होती हैं, शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों का विवाह. उन्होंने कहा कि देश पर दो तरह के खतरे हैं, सीमा पर व आतंरिक सुरक्षा. वर्तमान में कुछ लोग आतंरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, अलगाववादी संगठन माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. कुछ मुट्ठीभर लोग देश की छवि खराब कर रहे हैं. जिस (भगवा) रंग को गर्व से लहराया जा रहा है, उसे बदनाम करने का प्रयास चल रहा है.

उन्होंने कहा कि पीएफआई, एनडीएफ जैसे संगठन मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर में सक्रिय हैं. ये संगठन धर्म की आड़ में एक जिहादी ताना बाना बुनकर अपने धर्म के ही लोगों को भटकाने का कार्य करते हैं. अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश के अन्दर 68 आतंकवादी संगठन कार्य कर रहे हैं. जिनका सीधा संबंध आईएसआई से है. जातीय संघर्ष के नाम पर लोगों को भड़काया जाता है. समाज में चल रही इन गतिविधियों के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ ही अन्य लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है. कार्यक्रम में मेरठ के 23, शामली के 11, सहारनपुर के 6, बागपत के 6, लक्ष्मीनगर के 12, मेरठ महानगर के 6 बलिदानी परिवारों को सम्मानित किया गया.

January 14th 2020, 5:05 am

सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश पर देश में मनाया जाता है पर्व

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मकर संक्रान्ति पूरे भारत मनाए जाने वाला प्रमुख पर्व है. मकर संक्रांति का पर्व संक्रमण का पर्व है, परिवर्तन का पर्व है….प्रकृति मानवीय जीवन को संकेत करती है अच्छे बदलाव के लिए, व्यक्तिगत जीवन से सामाजिक जीवन की दिशा में ले चलने के लिए….भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति निमित्त दान-पुण्य करने की परंपरा बड़ी पुरातन है…विभिन्न प्रान्तों में इसे अलग-अलग नाम से मनाया जाता है. मकर संक्राति का पर्व भारत के अलावा नेपाल सहित अन्य देशों में भी मनाया जाता है.

पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है. वर्तमान समय में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते हैं.

भारत के दक्षिणी भाग के राज्यों में पोंगल, संक्रांति पर्व के रूप में मनाया जता है. पश्चिमी भारत में उत्तरायण, मध्य भारत में मकर संक्रांति, उत्तर में माघी, मकर संक्रांति, खिचड़ी, लोहड़ी (पंजाब) के रूप में मनाया जाता है. पूर्व में असम में भोगाली बीहु या माघ बीहु के नाम से प्रसिद्ध हैं. कश्मीर घाटी में शिशुर संक्रांत से नाम से जाना जाता है. पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के नाम से मनाया जाता है.

January 14th 2020, 4:17 am

मुनेश्वरा पहाड़ी पर यीशु प्रतिमा के विरोध में उतरे ग्रामीण

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कर्नाटक के कनकपुरा में चरागाह (जहां पशुओं को चराया जाता है) की भूमि पर यीशु की 114 फीट ऊंची प्रतिमा बनाए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया. हिन्दू जागरण मंच द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. स्थानीय लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए चलो कनकपुरा का नारा दिया गया था. विरोध प्रदर्शन में शामिल हजारों लोग रैली के रूप में अय्यप्पा स्वामी मंदिर से तहसीलदार कार्यालय तक गए.

जानकारी के अनुसार कनकपुरा के कपालीबेट्टा में 114 फीट ऊंची यीशु की प्रतिमा लगाई जा रही है जो मुनेश्वरा पहाड़ियों में स्थित है. यह वो जमीन है, जहां घास चराने के लिए पशुओं को लाया जाता है. इसी चरागाह वाली भूमि पर यीशु की प्रतिमा बनाई जा रही है. इसी भूमि पर पहले एक मंदिर भी था, और संन्यासियों का स्थान था. चरागाह वाली इस जमीन को अधिग्रहण करके एक चर्च बनाने की योजना चल रही है. जिसका विरोध हो रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि यीशु की प्रतिमा का निर्माण कांग्रेस विधायक डीके शिवकुमार करवा रहे हैं. लोगों का कहना है कि पवित्र पहाड़ी पर मूर्ति का निर्माण नहीं होने देंगे.

January 14th 2020, 2:59 am

जिहादी भीड़ का तांडव – तेलगांना के भेंसा कस्बे में भीड़ ने हिन्दुओं के घरों में लूटपाट कर आग लगाई

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तेलगांना के भेंसा कस्बे में रविवार को बड़ी हिंसा की साजिश रची गई. रात के समय 400-500 की मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की बस्ती में जाकर उनकी संपत्ति लूटी, पथराव किया और 18 घरों को आग लगा दी. घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस पर भी पथराव किया, जिसमें पुलिस कर्मियों को चोटें आई हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरबा गली के स्थानीय लोगों ने बताया कि एक मुस्लिम युवक खतरनाक ढंग से गाड़ी चला रहा था, स्थानीय लोगों ने रोककर समझाना चाहा तो युवक अपनी गलती स्वीकार न कर स्थानीय लोगों के साथ ही गालियां देने व दुर्व्यवहार करने लगा. झगड़ा करने के पश्चात उस समय तो युवक चला गया, लेकिन रात 9 बजे के बाद 400-500 लोगों की भीड़ साथ लेकर आया, इन लोगों ने आते ही हिंसा शुरू कर दी. वहां खड़े वाहनों को जला दिया और स्थानीय लोगों पर पथराव करने लगे. देखते ही देखते हिन्दुओं के घरों में घुस कर हमला किया. संपत्ति की लूटपाट की और 18 घरों में आग लगा दी. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, भीड़ ने पुलिस पर भी पथराव शुरू कर दिया. इसमें आठ पुलिस कर्मी घायल हुए हैं. आग बुझाने के लिए घटनास्थल पर पहुंची दमकल की पानी की पाइपों को भी भीड़ ने काट दिया, जिससे आग न बुझाई जा सके. स्थानीय लोगों ने बताया कि भीड़ ने विशेष रूप से हिंदू वाहिनी संगठन के सदस्यों के घरों को निशाना बनाया और आपराधिक इरादे से उपद्रव किया. फिलहाल पूरे क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई है. पुलिस बल तैनात किया गया है, इंटरनेट और फोन सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं..             https://www.youtube.com/watch?v=TP_n2QXuvX4  

January 13th 2020, 7:43 am

गांदरबल में एक आतंकी गिरफ्तार, बड़गाम में एनकाउंटर जारी

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आतंकियों को ले जाते हुए गिरफ्तार डीएसपी के खिलाफ भी कार्रवाई तेज

कश्मीर घाटी में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई लगातार जारी है. सोमवार को सुरक्षाबलों ने गांदरबल में एक आतंकी को गिरफ्तार करने में सफलता मिली. बड़गाम में एक आतंकी को घेरे में लेकर एनकाउंटर जारी है. यहां आतंकी का नाम आदिल बताया जा रहा है जो बड़गाम के बहरामपुरा क्षेत्र में ईंटों के भट्टे में छिपा हुआ था. यहीं पर जम्मू कश्मीर पुलिस की एसओजी, सीआरपीएफ और राष्ट्रीय रायफल की संयुक्त टीम ने घेर लिया है. जहां से अब आतंकी का बचकर निकलना मुश्किल है.

इससे पहले जम्मू कश्मीर पुलिस ने गांदरबल में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक ओवर-ग्राउंड-वर्कर को गिरफ्तार किया. जिसका नाम तारिक गनई बताया जा रहा है. पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार तारिक लश्कर की आतंकी गतिविधियों में सक्रिय था और लश्कर के आतंकियों की आतंकी वारदातों में मदद कर रहा था. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

गिरफ्तार डीएसपी पर कार्रवाई तेज़

आतंकियों के साथ पकड़े गए जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी देवेंद्र सिंह पर कार्रवाई के मामले में एनआईए और रॉ की टीम भी अलग से पूछताछ में शामिल होगी. सूत्रों के अनुसार देवेंद्र सिंह को प्रदत्त राष्ट्रपति पदक वापिस लिया जा सकता है. इसके लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. देवेंद्र सिंह पर कार्रवाई के संबंध में सोमवार को जम्मू कश्मीर पुलिस ने गृह मंत्रालय को भी जानकारी दी.

January 13th 2020, 7:43 am

कोलकाता – बांग्लादेशी नागरिकों ने भी सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भाग लिया, एलआरओ ने विदेश मंत्रालय से

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नागरिकता संशोधन कानून पारित होने के बाद विरोध के नाम पर देशभर में हिंसा हुई. हिंसक प्रदर्शनों में विदेशियों के शामिल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं. कुछ स्थानों पर पर्यटक और छात्र द्वारा वीज़ा पर भारत आए लोग भी भारत विरोधी एजेंडे में शामिल हुए हैं. एक जर्मन शिक्षाविद को सीएए के विरोध में आयोजित रैली में शामिल होने पर उसके देश वापिस भेज दिया गया. वहीं कोच्चि में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में नॉर्वे की रहने वाली जॉनसन को नियमों का उल्लघंन करने पर भारत छोड़ने के लिए कहा गया..इसी प्रकार पाकिस्तान से संचालित ट्विटर हैंडल सीएए के विरोध में निरंतर ट्वीट करते रहे हैं.

नए मामले ध्याने में आए हैं, बांग्लादेशी रिपोर्टर ने कोलकाता में सीएए के विरोध में आयोजित रैली में भाग लिया. लेकिन उसके खिलाफ पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है. बांग्लादेशी पत्रकार नूर आलम एसके ने अपने फेसबुक अकाउंट पर सीएए के खिलाफ रैली में भाग लेने की तस्वीरें पोस्ट की थीं, एक तस्वीर में मोदी गो बैक का प्लेकार्ड लिए खड़े हैं. तस्वीरें वायरल होने के पश्चात पुलिस व प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. कैसे एक गैर-भारतीय सीएए विरोधी प्रदर्शन में भाग ले रहा है, और पुलिस को पता ही नहीं.

मामले को गंभीरता से लेते हुए, 12 जनवरी को लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (एलआरओ) ने बांग्लादेशी पत्रकार नूर आलम के सीएए विरोधी प्रदर्शन में भाग लेने और कोलकाता रैली में ‘मोदी गो बैक’ प्लेकार्ड की तस्वीर के साथ विदेश मंत्रालय के पास शिकायत दर्ज कराई है. एलआरओ ने एमईए को तत्काल प्रभाव से उसकी जांच करवाने और निष्कासन का अनुरोध किया है. एलआरओ ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के पास भी शिकायत दर्ज कराई है.. और अनुरोध किया है कि नूर आलम को गिरफ्तार किया जाए, उसके बाद तत्काल भारत से बाहर किया जाए क्योंकि उन्होंने प्रदर्शन में भाग लेकर वीजा नियमों का उल्लंघन किया है.

एलआरओ ने एक अन्य मामले का भी खुलासा किया है. विश्वभारती विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली बांग्लादेशी छात्रा ने सीएए विरोध-प्रदर्शन में भाग लिया, और फेसबुक अकाउंट पर आपत्तिजनक तस्वीरें व कमेंट पोस्ट की हैं. यह छात्र वीज़ा नियमों के खिलाफ है. विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा अफसरा मीम भी बांग्लादेश के खुलना से हैं. एलआरओ ने गृह मंत्रालय से सीएए के विरोध प्रदर्शनों में अफसरा मीम की भूमिका की जांच करने का आग्रह किया है..

January 13th 2020, 6:10 am

नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर चरमपंथियों ने नज़ीर को मस्जिद में पीटा

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कट्टरपंथी गुंडों ने मस्जिद के अंदर की नज़ीर की पिटाई

केरल में नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने पर मस्जिद के अंदर ही नजीर की बेरहमी से पिटाई की गई.. नजीर मस्जिद में नमाज अदा करते रहे और उन पर हमला होता रहा. जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया. नजीर को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया. जहां वो अभी जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार नजीर इडुक्की जिले के थुकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहा था. तभी चरमपंथी इस्लामी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया (SDPI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उन पर हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि नज़ीर को थुकुप्पलम की जुम्मा मस्जिद के अंदर गए एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उन पर अचानक हमला कर दिया गया. नज़ीर का दोष इतना था कि उसने नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में आयोजित रैली में भाग लिया था. रैली का आयोजन कानून को लेकर जनजागरण के निमित्त किया गया था.

हमले के दौरान चरमपंथी संगठन के कार्यकर्ताओं ने नजीर को पीछे से लातें मारीं और फिर 15 मिनट तक उन पर फर्नीचर से हमला किया, जिसके बाद मस्जिद के इमाम ने हस्तक्षेप किया और उन्हें बचाया. एक आरोपी ने धमकी दी कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन हमलावरों की पहचान नहीं की जा सकी है..

 

January 13th 2020, 4:10 am

बैंगलुरू में आरएसएस कार्यकर्ता पर हुए हमले में दो आरोपी गिरफ्तार

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बैंगलुरू में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन में शामिल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता वरूण पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने 12 जनवरी को दो लोगों को गिरफ्तार किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने बताया कि इस मामले में हमने दो लोगों को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के संबंध में जल्द ही विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी. फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के बारे में विवरण देने से मना कर दिया है. पुलिस के एक दल ने दोनों को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया. 22 दिसंबर को टाउन हॉल पर एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया था. बैंगलुरु दक्षिण के भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने प्रदर्शन को संबोधित किया था और आरएसएस कार्यकर्ता वरूण भी इस प्रदर्शन में शामिल हुआ था..प्रदर्शन के बाद जब वरूण अपने घर लौट रहा था, तभी धारदार हथियार से चार लोगों ने उस पर हमला किया था और घटना के बाद आरोपी फरार हो गए थे. हमले के बाद वरूण को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

January 13th 2020, 2:28 am

#CAA के समर्थन में इंदौरवासियों ने निकाली विशाल रैली

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भारत सुरक्षा मंच इंदौर द्वारा #CAA के समर्थन में दशहरा मैदान में आयोजित विशाल तिरंगा यात्रा एवं राष्ट्रगान को इंदौर की जनता का भरपूर समर्थन मिला. CAA के समर्थन में नारे लगाते हुए लोग दशहरा मैदान पर पहुंच रहे थे. हर उम्र का व्यक्ति CAA के समर्थन में सड़कों पर था. अंतिम समय में स्थान बदलने के बाद भी पूरा मैदान भरा हुआ था, इंदौर वासी सपरिवार CAA का समर्थन करने के लिए उपस्थित थे.

कार्यक्रम ठीक 2 बजे प्रारंभ हुआ, देशभक्ति गीतों से पूरा जनसमूह झूम रहा था. कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में बच्चे महापुरुषों एवं क्रांतिकारियों की वेशभूषा में शामिल हुए. महू नाका सड़क मार्ग से दशहरा मैदान को तिरंगा रंग से सजाया गया था. मैदान पर महापुरुषों के चित्रों के बड़े बड़े कटआउट लगाए गए थे. पारसी समाज, सिन्धी समाज, ईसाई समाज, बौद्ध समाज, सिक्ख समाज, जैन समाज, नेपाली समाज, बंगाली समाज, कश्मीरी समाज, मुस्लिम समाज की महिला एवं पुरुष भी CAA के समर्थन में उपस्थित थे.

CAA के समर्थन में घर – घर में परिवारों ने तिरंगा फहराया था, रैली में भाग लेने वालों के लिए परिवारों द्वारा जलपान की व्यवस्था सड़क मार्ग पर की गई थी.

भारत सुरक्षा मंच के संयोजक प्रांजल जी शुक्ल ने बताया कि भारत सुरक्षा मंच राष्ट्र की हर उस नीति का समर्थन करता है जो राष्ट्र सुरक्षा के लिए आवश्यक है, CAA के विरोध में जो हिंसा और अराजकता फैलाई गई, देश का माहौल बिगाड़ा गया, उससे ऐसा प्रतीत हुआ कि राष्ट्र भक्तों को भी राष्ट्रहित में अपनी सहभागिता दिखानी होगी और आज यह जो राष्ट्रप्रेमी उपस्थित हुए हैं, यह प्रमाण है कि पूरा इंदौर CAA के समर्थन में खड़ा है. उन्होंने कहा कि इंदौर वासियों ने इतनी बड़ी रैली के आयोजन के साथ ही अनुशासन और स्वच्छता का ध्यान रखा है. इसके लिए सभी को साधुवाद देता हूं. मंच से समस्त संत समाज एवं राष्ट्र भक्तों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने शासन के सहयोग की भी प्रशंसा की और उनका भी आभार माना.

कार्यक्रम में मुख्य मंच पर संत समाज के विभिन्न संत जैन साध्वी महासती आदर्श ज्योति ठाणा, संत माधवदास जी (सिन्धी समाज), संत ऐश्वर्यानन्द जी महाराज, केसर दस्तूर, एस. पास्टर (पारसी धर्मं गुरु), महंत रघुनन्दन दास जी, दादू महाराज जी, कृष्ण शर्मा जी, संत कमल उदास जी, मोहंती जी कबीरपंथी उपस्थित थे. अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के पश्चात् कार्यक्रम समाप्त हुआ. कार्यक्रम का संचालन राकेश दांगी एवं अमन पाटीदार ने किया.

January 12th 2020, 1:32 pm

स्वरांजलि – घोष नाद के साथ राष्ट्र आराधन

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गुजरात. राष्ट्र सेविका समिति की द्वितीय प्रमुख संचालित वं. सरस्वतीताई आप्टे जी के 25वें स्मृति वर्ष एवं 12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद और जीजामाता जयंती के त्रिवेणी संगम के अवसर पर विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिट के प्रांगण में स्वरांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में विभावरीबेन दवे (महिला और बाल विकास मंत्री, गुजरात) उपस्थित रहीं, राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शान्ताअक्का जी का मार्गदर्शन सेविकाओं को प्राप्त हुआ. राष्ट्र सेविका समिति, गुजरात द्वारा आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से सेविकाओं ने भारत की एकता और अखंडता के शिल्पी सरदार वल्लभभाई पटेल को घोष वादन के साथ वंदन किया. स्वराजंलि कार्यक्रम में गुजरात के 130 स्थानों से 1400 से 1500 सेविकाओं ने सहभाग किया. जिसमें विद्यार्थी, डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, शिक्षिका, प्रोफेसर विविध व्यवसायिक क्षेत्र की महिलाएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं. आयु की दृष्टि से देखें तो 8 साल से 70 साल की सेविकाएं शौर्य प्रदर्शन का हिस्सा बनीं. आज नारी उत्थान, स्त्री संरक्षण और महिला सम्मान को लेकर विविध प्रयास हो रहे हैं. इस कार्यक्रम से महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली. एक स्त्री गृहिणी हो या बिज़नेसवीमन पर समाज और देश के लिए आगे आकर नेतृत्व कर सकती है, यह विश्वास दृढ़ होता हुआ देखने को मिला. प्रमुख संचालिका शांताअक्का जी का उद्बोधन https://www.youtube.com/watch?v=NbhHb4U30NE   https://youtu.be/lhqfEDDSIkQ   https://youtu.be/rSECd_efQWE  

January 12th 2020, 11:29 am

महिला उत्पीड़न की शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई, वामपंथी संगठन SFI से 31 छात्रों का इस्तीफा

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वामपंथ का इतिहास केवल असहिष्णुता और रक्तपात से ही नहीं भरा है, बल्कि इसमें महिला विरोधी, शोषणकारी, लिंगभेद और भोगवाद की धारणा भी बसी हुई है. इसी भोगवादी, महिला विरोधी विचारधारा को नकारते हुए पश्चिम बंगाल के जाधवपुर विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई (SFI) के 31 छात्रों ने सोमवार, 6 जनवरी को संगठन को छोड़ दिया. एसएफआई नेताओं पर छात्रा से यौन दुर्व्यवहार और यौन शोषण के आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण नाराज 31 छात्रों ने इस्तीफा दिया है. इसने वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई की करनी को उजागर कर दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित 31 छात्रों द्वारा हस्ताक्षरित त्याग पत्र में कहा गया है कि शिकायत के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. पत्र में इस्तीफा देने वाले छात्रों ने लड़कियों के साथ होने वाले छेड़छाड़, नेतृत्व में पितृ सत्तात्मक क्रियाकलाप, विद्यार्थियों के बीच लिंग और जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं.

इसके अलावा छात्रों ने “सामाजिक आज़ादी” की बात करने वाले वामपंथी संगठन के बारे में कहा है कि सिगरेट पीने, कपड़े पहनने से लेकर निजी कार्यों में भी लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता था. वामपंथी छात्र संगठन से इस्तीफा देने वाले जाधवपुर विवि के छात्र जयदीप दास ने कहा कि “वामपंथी संगठन एसएफआई जमीनी कार्य को छोड़कर सिर्फ राजनीतिक मुद्दों में लगा हुआ है. इन्हें सिर्फ वोट की राजनीति से मतलब है.” भारत के तमाम विश्वविद्यालयों में वामपंथी नेता और वामपंथी संगठन “आजादी”, “उदारवाद” की बात करते हैं, लेकिन अपने ही संगठन में वह किसी को भी आजादी नहीं देना चाहते.

महिला सुरक्षा और नारीवाद के नाम पर ढेरों वामपंथी संगठन अखबारों और मीडिया में सुर्खियां बनाते रहते हैं. वामपंथ की विचारधारा को महिलाओं के लिए अच्छा बताते हैं. आज वही वामदल अपने ही छात्राओं का शोषण कर रहा है. वामपंथ की इकाई में यह पहली घटना नहीं है. पहले भी कई बार वामपंथी संगठनों में महिला शोषण की बातें सामने आई हैं, ढेरों आरोप लगे हैं.

https://www.republichindi.com/news/education/31-sfi-members-of-jadavpur-university-resign-over-sexual-abuse-inaction/13580.html

January 11th 2020, 8:41 am

संसद कहेगी कि पीओजेके हमारा होना चाहिए तो हम इसे हासिल करने के लिए उचित कार्रवाई करेंगे – सेना प्रमु

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नई दिल्ली. जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने सेना प्रमुख का कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात शनिवार को पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पाक अधिक्रांत जम्मू कश्मीर (पीओजेके) पर उन्होंने कहा, यह एक संसदीय संकल्प है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओजेके) भारत का हिस्सा है. यदि संसद यह संकल्प पारित करेगी कि पीओजेके हमारा होना चाहिए और इस संबंध में हमें आदेश मिलेगा तो हम इसे हासिल करने के लिए उचित कार्रवाई करेंगे.

सीडीएस की नियुक्ति पर सेना प्रमुख ने कहा कि यह महत्वपूर्ण पहल है, सीडीएस के गठन से सेना को मजबूती मिलेगी. इससे तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर होगा और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर प्लानिंग की जा सकेगी. भारतीय सेना पहले के मुकाबले आज ज्यादा शक्ति के साथ तैयार है.

कश्मीर घाटी में तैनात सैन्य अधिकारियों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों पर सेना प्रमुख ने कहा – सीमाओं पर तैनात कमांडर के फैसले का सम्मान करना होगा. जो भी शिकायतें दर्ज हुईं, वे निराधार साबित हुईं. सियाचिन हमारे लिए महत्वपूर्ण है. उसकी निगरानी के लिए पश्चिमी और उत्तरी मोर्चे का गठन किया गया है. यह क्षेत्र हमारे लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

 

January 11th 2020, 6:39 am

मद्रास उच्च न्यायालय का सरकार को आदेश, पुस्तकों से हटाएं RSS से संबंधित तथ्यहीन/आपत्तिजनक सामग्री

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मद्रास उच्च न्यायालय ने 10 जनवरी को तमिलनाडु राज्य सरकार को 10वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में तथ्यहीन/आपत्तिजनक भाग को हटाने का निर्देश जारी किया. सुनवाई की अगली तारीख 22 जनवरी तय की गई है, उस समय सरकार को शपथ पत्र देकर बताना होगा कि कैसे पुस्तकों से सामग्री को हटाया जा सकता है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चैन्नई के स्वयंसेवक पी चंद्रशेखरन ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि 10वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में लिखा है कि “आरएसएस ने मुस्लिम विरोधी रुख अपनाया है.” अदालत में सुनवाई के दौरान चंद्रशेखरन के वकील डॉ. जी बाबू ने दलील दी कि पुस्तक में ऐसा बताया जा है जैसे स्वतत्रंता के लिए संघर्ष में आरएसएस ने मुस्लिम विरोधी रूख अपनाया हो, जिस कारण देश का बंटवारा हुआ. जबकि यह तथ्य पूरी तरह से गलत है. संघ ने कभी भी किसी धर्म के खिलाफ कोई रूख नहीं अपनाया और हमेशा धर्म के आधार पर देश के बंटवारे के फैसले का विरोध किया. इस तरह की तथ्य विद्यार्थियों के मन में गलत राय बनाते हैं, और उनके दिमाग को परिवर्तित करते हैं.

सुनवाई के पश्चात उच्च न्यायालय ने आरएसएस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 10वीं कक्षा की समाजिक विज्ञान की पुस्तक से आपत्तिजनक सामग्री हटाने का आदेश दिया.

January 11th 2020, 6:10 am

महाराष्ट्र – मराठी साहित्य सम्मेलन में पुलिस पर पत्रकार को बेवजह प्रताड़ित करने का आरोप

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धाराशिव, उस्मानाबाद (विसंकें). उस्मानाबाद के धाराशिव में अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन (10, 11, 12 जनवरी) का आयोजन हो रहा है. साहित्य सम्मेलन में पुस्तक प्रदर्शनी के अलग-अलग स्टॉल भी लगाए गए हैं. यहीं दैनिक तरुण भारत मुंबई का स्टॉल भी लगा हुआ है. यहां पत्रकार सोमेश कोलगे बैठ रहे हैं. प्रदर्शनी के दौरान कथित पुलिस उप-निरीक्षक ने मुंबई दैनिक तरुण भारत के स्टॉल पर जाकर पत्रकार सोमेश कोलगे से पूछताछ शुरू कर दी. इतना ही नहीं पत्रकार सोमेश कोलगे का हाथ पकड़कर उन्हें स्टॉल से दूर ले जाने का प्रयास भी किया.

इस दौरान सोमेश कोलगे के साथ विवेक विचार मंच के भारत आमदापुरे भी उपस्थित थे. सोमेश कोलगे को जांच के लिये पुलिस थाने ले जाने लगी, लेकिन पूछने पर पुलिस ने बताया कि वे केवल जांच के लिए आए हैं. किस मामले या घटना की जांच, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे जी ने कहा कि महाविकास आघाडी सरकार में अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर जो आघात किया जा रहा है, ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ को उस पर ध्यान देना चाहिए. सांसग अतुल भातखडकर ने घटना पर विरोध व्यक्त किया. उन्होंने उद्धव सरकार से सवाल पूछा कि पत्रकारों को हाथ लगाने की हिम्मत कहां से आती है.

घटना के बाद ‘लिगल राईट्स ऑब्ज़र्वेटरी’ ने उस्मानाबाद मुख्य पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि पत्रकार सोमेश कोलगे को बेवजह प्रताड़ित करने वाले पुलिस कर्मी को तुरंत निलंबित किया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई हो.

 

यह भी देखें – मराठी साहित्य सम्मेलन फादर दिब्रिटो से कुछ सवाल

January 11th 2020, 5:08 am

आखिर कब जानेंगे भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत का सच !

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11 जनवरी आते ही छोटे से कद-काठी वाला एक ऐसा चेहरा स्मृति में कौंधने लगता है जो अपने जीवन की असंख्य कठिनाइयों से लड़ते हुए देश को तो विजय दिला गया, किन्तु स्वयं अपनी जिंदगी को नहीं बचा पाया. उनकी जीवन यात्रा का वृत्तांत तो सबको पता है, किन्तु जीवन के अंतिम कुछ घंटों में उनके साथ क्या हुआ, यह गोपनीयता के पिटारे में अभी तक बंद है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के करोड़ों नागरिकों द्वारा चुने गए यशस्वी प्रधानमंत्री की एक महान विजय के तुरंत बाद असमय विदेशी धरती पर रहस्यमय मौत गत् 54 वर्षों से मात्र एक पहेली बनी हुई है. जिसे जानने के लिए ना सिर्फ उनकी पत्नी, बेटे, पोते या अन्य परिजन, बल्कि सम्पूर्ण देशवासी उत्सुक हैं.

02 अक्तूबर 1904 को देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी से मात्र सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन, मुगलसराय में स्कूल शिक्षक के घर जन्मे लाल बहादुर शास्त्री जी के सर से मात्र डेढ़ वर्ष की उम्र में ही पिता का साया उठ गया था. घर पर सब उन्हें नन्हें के नाम से पुकारते थे. चाहे कितनी ही भीषण सर्दी, गर्मी या बरसात हो, वे कई मील दूर तक पैदल नंगे पांव ही विद्यालय जाते थे. जब वे 11 वर्ष के थे, तब से ही विदेशी दासता से मुक्ति हेतु राष्ट्रीय स्तर पर कुछ करने का मन बना लिया था.

सन् 1927 में मिर्जापुर की ललिता देवी से उनका विवाह हुआ. सन् 1930 में महात्मा गांधी ने जब नमक कानून को तोड़ते हुए दांडी यात्रा की, शास्त्री जी भी पूरी ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता के इस संघर्ष में कूद पड़े. अनेक विद्रोही अभियानों का नेतृत्व करते हुए वे कुल सात वर्षों तक ब्रिटिश जेलों में भी रहे.

1946 में जब कांग्रेस सरकार का गठन हुआ तो इस ‘छोटे से डायनमो’ को पहले अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश का संसदीय सचिव तथा बाद में गृहमंत्री बनाया गया. भीड़ नियंत्रण हेतु लाठी के स्थान पानी की बौछारों के प्रयोग तथा कंडक्टर के पद पर महिलाओं की नियुक्ति, उन्हीं के कार्यकाल में पहली बार हुई. 1951 में वे दिल्ली आ गए एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई विभागों का प्रभार संभाला – रेल मंत्री; परिवहन एवं संचार मंत्री; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा गृह मंत्री. यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नेहरू जी की बीमारी के दौरान वे बिना विभाग के मंत्री भी रहे.

एक रेल दुर्घटना, जिसमें कई लोग मारे गए थे, के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानते हुए उन्होंने रेल मंत्री के पद से जब इस्तीफा दिया तो सम्पूर्ण देश एवं संसद ने उनकी इस अभूतपूर्व पहल की प्रशंसा की. सन् 1952, 1957 एवं 1962 के आम चुनावों में पार्टी की सफलता में उनकी अद्भुत सांगठनिक क्षमता का बड़ा योगदान था. तीन दशकों तक देश को अपनी समर्पित सेवा, उदात्त निष्ठा, अपूर्व क्षमता, विनम्रता, सहिष्णुता एवं दृढ़ इच्छा-शक्ति के बल पर शास्त्री जी लोगों के दिलो-दिमाग पर छा गए. उनकी प्रतिभा और निष्ठा ने ही नेहरू जी की मृत्यु के बाद 09 जून 1964 को उन्हें प्रधानमंत्री बनाया. 26 जनवरी 1965 को खाद्य के क्षेत्र में देश को आत्म निर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा उन्होंने ही दिया था तथा देश की आर्थिक दशा को देखते हुए उन्होंने देश वासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रख अन्न बचाने का आग्रह किया, जिसे सबसे पहले उन्होंने स्वयं से प्रारम्भ किया. सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिए, मरणोपरांत, 1966 में उन्हें ‘भारत-रत्न’ से सम्मानित किया गया.

शास्त्री जी के नेतृत्व में ही भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 में अप्रैल से 23 सितंबर के बीच 6 महीने तक युद्ध चला. जनवरी, 1966 में दोनों देशों के शीर्ष नेता तब के रूसी क्षेत्र में आने वाले ताशकंद में शांति समझौते के लिए रवाना हुए. पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति अयूब खान वहां गए. 10 जनवरी को दोनों देशों के बीच शांति समझौता भी हो गया, किन्तु इसके मात्र 12 घंटे बाद यानि 11 जनवरी को तड़के 1.32 बजे अचानक उनकी मौत की खबर ने सबको चौंका दिया.

आधिकारिक तौर पर तो कहा जाता रहा है कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. किन्तु एक ऐतिहासिक समझौते के चंद घंटों के अन्दर ही आधी रात को परदेश में प्रधानमंत्री की मृत्यु ने ना सिर्फ उनके साथ गए प्रतिनिधि मंडल, बल्कि, सम्पूर्ण विश्व को सकते में डाल दिया.

कुछ आरटीआई के जवाब, पुस्तकों के उद्धरण, शास्त्री परिवार के लोगों व जनमानस में उठे प्रश्नों पर गौर करें तो पता चलता है कि मरने से 30 मिनट पहले तक, यानि रात्रि 12.30 बजे तक वे बिलकुल ठीक थे. 15 से 20 मिनट में तबियत खराब हुई और वे हमसे विदा हो लिए. यह भी कहा जाता है कि उन्हें उनके साथ गए अधिकारियों व स्टाफ से दूर अकेले में रखा गया. तथा साथ गए कुक को भी ऐन मौके पर बदल दिया गया. उस रात खाना उनके नौकर रामनाथ ने नहीं, बल्कि सोवियत संघ में भारतीय राजदूत टीएन कौल के पाकिस्तानी कुक जान मोहम्मद ने बनाया था. घटना के बाद उस बावर्ची को हिरासत में तो लिया गया, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया. कहते हैं कि वह पाकिस्तान भाग गया, जिसे इंदिरा जी ने आजीवन घर बैठे पेंशन भी दी.

उनका आवास ताशकंद शहर से 15-20  किमी दूर रखा गया तथा उनके कमरे में घंटी व फोन तक नहीं था. शायद, इसी कारण उस आधी रात को जब शास्त्री जी खुद चलकर सेक्रेटरी जगन्नाथ के कमरे में गए, तब वह दर्द से तड़प रहे थे. उन्होंने दरवाजा नॉक कर जगन्नाथ को उठाया और डॉक्टर को बुलाने का आग्रह किया. जगन्नाथ ने उन्हें पानी पिलाया और बिस्तर पर लिटा दिया. उनके निजी चिकित्सक डॉक्टर आरएन चुग ने पाया कि उनकी सांसें तेज चल रही थीं और वो अपने बेड पर छाती को पकड़कर बैठे थे. इसके बाद डॉक्टर ने इंट्रा मस्कूलर इंजेक्शन दिया और उसके तीन मिनट बाद ही शास्त्री जी का शरीर शांत होने लगा और सांस की गति धीमी पड़ गई. सोवियत डॉक्टर को बुलाया गया, किन्तु इससे पहले कि सोवियत डॉक्टर इलाज शुरू करते, 1.32 बजे शास्त्री की मृत्यु हो गई.

कहते हैं कि शास्त्री जी की मौत वाली रात दो ही गवाह मौजूद थे. एक थे – उनके निजी चिकित्सक आरएन चुग और दूसरे थे उनके सेवक रामनाथ. दोनों ही शास्त्री जी की मौत पर 1977 में गठित राजनारायण संसदीय समिति के समक्ष पेश नहीं हो सके क्योंकि दोनों को ही ट्रक ने टक्कर मार दी थी. इसमें डॉक्टर साहब तो मारे गए, जबकि रामनाथ अपनी स्मरण शक्ति गंवा बैठे. बताते हैं कि समिति के सामने गवाही से पहले रामनाथ ने शास्त्री जी के परिजनों से ‘सीने पर चढ़े बोझ’ का जिक्र किया था, जिसे वह उतारना चाहते थे.

यह भी कहा जाता है कि शायद उनके हाथ ताशकंद में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मौत से जुड़ा कोई सुराग मिल गया था! पत्रकार ग्रेगरी डगलस से साक्षात्कार में सीआईए के एजेंट रॉबर्ट क्रोले ने दावा किया था कि शास्त्री जी की मौत का प्लॉट सीआईए ने तैयार किया था. उनके मृत शरीर का ना तो पोस्टमार्टम किया गया और ना ही मौत की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया. शास्त्री जी के बेटे सुनील शास्त्री व अन्य परिजनों ने भी इस हेतु सरकारों से अनेक बार अपील करते हुए कहा था कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक नहीं थी. उनकी छाती, पेट और पीठ पर नीले निशान थे और कई जगह चकते पड़ गए थे, जिन्हें देखकर साफ़ लग रहा था कि उन्हें ज़हर दिया गया है. पत्नी ललिता शास्त्री का भी यही मानना था कि अगर हार्टअटैक आया तो उनका शरीर नीला क्यों पड़ गया था! यहां वहां चकत्ते क्यों पड़ गए. यदि पोस्टमार्टम होता तो उनकी मौत का सच अवश्य सामने आता.

यह आज तक स्पष्ट नहीं है कि शास्त्रीजी की मौत या उनके अंतिम समय से जुड़े दस्तावेज किसके आदेश से गोपनीय करार दिए गए? एक श्रेष्ठ नेता, पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न की विदेश में विस्मयकारी असमय मृत्यु की सच्चाई को जानने से देश को आखिर क्यों वंचित रखा जा रहा है? कम से कम वर्तमान सरकार को इस मामले में पहल कर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की तरह भारत के इस बहादुर लाल से जुड़े दस्तावेजों को भी सार्वजनिक करना चाहिए.

–    विनोद बंसल

प्रवक्ता, विश्व हिन्दू परिषद

January 11th 2020, 2:49 am

12 जनवरी जयंती पर विशेष – राष्ट्र भक्त सन्यासी स्वामी विवेकानंद की भविष्यवाणियां

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भविष्यदृष्टा स्वामी विवेकानंद एक ऐसे युवा सन्यासी हुए, जिन्होंने सारे संसार में भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म की विजय पताका फहरा कर भारत को गौरवान्वित किया था. उन्होंने भारतवासियों में राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान जागृत करके परतंत्रता, अंधविश्वास और गरीबी के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया था.

स्वामी विवेकानंद ने अपना आध्यात्मिक अभियान इन शब्दों से प्रारंभ किया था – “राष्ट्र ही हमारा देवता है, यह सब मनुष्य हमारे देवता हैं. इनकी सेवा ही परमात्मा की पूजा है. हमारे प्रथम उपास्य हमारे देशवासी ही हैं. समस्त देशवासियों को दुर्बलताओं और दरिद्रता से मुक्ति दिलाकर उन्हें राष्ट्र व धर्म के कार्य में लगाने की परम आवश्यकता है”.

कलकत्ता में अपने स्वागत समारोह में स्वामी जी ने गर्जते हुए कहा था – “हमें अपने देश को विदेशी दासता से मुक्ति दिलाने वाले वीर-वीरांगनाओं के शौर्य एवं बलिदान से प्रेरणा लेकर, अपने स्वाभिमान और राष्ट्र की  रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लेना चाहिए. शौर्य, वीरता और बलिदान से ही हम अपने देश को गौरव प्रदान कर सकते हैं.

राष्ट्र भक्त स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन काल में ही चार महत्वपूर्ण संकल्प कर लिए थे. इन संकल्पों को स्वामी जी द्वारा की गई भविष्यवाणियां कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

  1. भारत शीघ्र स्वतंत्र होगा

युवकों को साहस बटोर कर स्वतंत्रता सेनानी बनने का आह्वान करते हुए स्वामी जी ने स्पष्ट कहा था कि परतंत्रता की बेड़ियां टूटने के पश्चात ही परम वैभवशाली भारत का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. स्वामी विवेकानंद ने 19वीं शताब्दी के अंतिम दशक में भारत के युवकों को शक्ति आराधन करने का आह्वान किया था.

इतिहास साक्षी है कि 50 वर्षों में सशस्त्र क्रांति के मार्ग पर चल कर सरदार भगत सिंह, वीर सावरकर, उधम सिंह, मदन लाल ढींगरा, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस, राजगुरु, सुखदेव और सुभाष चंद्र बोस इत्यादि हजारों देशभक्त युवकों ने क्रांति का बिगुल बजाया.

परिणामस्वरूप स्वामी जी की भविष्यवाणी (50 वर्षों में ही देश स्वतंत्र हो जाएगा) सत्य सिद्ध हुई. सन् 1947 में देश आजाद हो गया. परंतु दुर्भाग्य से कांग्रेस की मुस्लिम परस्त नीतियों, अंग्रेजों के भारत विरोधी षड्यंत्र और अधिकांश मुस्लिम समाज की हिन्दुत्व (भारत) विरोधी मानसिकता के कारण सदियों पुराने सनातन राष्ट्र के दो टुकड़े हो गए. अखंड भारत खंडित भारत हो गया.

  1. देशव्यापी आंदोलन शुरू होगा

स्वामी विवेकानंद की दूसरी भविष्यवाणी थी कि स्वतंत्रता आंदोलन का स्वरूप अखिल भारतीय होगा. स्वामी जी की यह भविष्यवाणी भी सत्य साबित हुई. अंग्रेजों की जी हुजूरी करके आजादी की भीख मांगने वाली कांग्रेस का नेतृत्व जब महात्मा गांधी जी के हाथों में आया, तब कांग्रेस का अहिंसावादी आंदोलन सारे देश में फैल गया. कांग्रेस ने पहली बार 1930 में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पारित किया.

देश में कार्यरत सभी धार्मिक, सामाजिक और सुधारवादी संस्थाओं ने गांधी जी द्वारा घोषित सभी आंदोलनों में भाग लिया. उस वक्त भारत की समस्त जनता ने गांधी जी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए अपने तथा अपनी संस्था के नाम से ऊपर उठकर देशव्यापी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया. इस तरह स्वतंत्रता आंदोलन के अखिल भारतीय स्वरूप वाली स्वामी जी की भविष्यवाणी साकार हुई.

यहां ध्यान देने की बात यह है कि यद्यपि महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आर्य समाज और हिन्दू महासभा इत्यादि सभी संस्थाओं की ठोस भागीदारी को स्वीकार किया, तथापि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात कांग्रेस के प्रायः सभी दिग्गजों ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक ही नेता (गांधी जी) और एक ही दल (कांग्रेस) के खाते में डाल दिया. कांग्रेसियों ने तो अंग्रेजों की छाती पर अंतिम सशक्त और निर्णायक प्रहार करने वाले सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज के तीस हजार बलिदानी सैनिकों के बलिदान को भी इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया.

  1. ‘युवा सन्यासी’ तैयार होंगे

स्वामी विवेकानंद जी की तीसरी इच्छा अथवा भविष्यवाणी यह थी कि देश में सैकड़ों की संख्या में ऐसे युवक तैयार हों, जो राष्ट्र के परम वैभव के लिए सर्वस्व-अर्पण के लिए नित्य सिद्ध रहें. स्वामी जी ने धर्मनिष्ठ, राष्ट्रसमर्पित और समाजसेवी युवा सन्यासियों की कल्पना की थी. स्वामी विवेकानंद के अंतर्मन में उठी यह कल्पना चरितार्थ हुई 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के साथ.

संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी द्वारा स्थापित प्रचारक पद्धति – ‘युवा-सन्यासी’ का ही साक्षात स्वरूप है. संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी गोलवलकर ने स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन से प्रेरणा लेकर स्वामी अखंडानंद जी से आध्यात्मिक दीक्षा ली थी. जब श्री गुरुजी ने सन्यासी बनने की इच्छा व्यक्त की तो स्वामी अखंडानंद जी ने यह कहते हुए सन्यास दीक्षा नहीं दी – “आपका कार्य क्षेत्र तो संघ और समाज सेवा ही है. आप उसी के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के द्वारा घोषित उद्देश्य के लिए काम करें”.

यहां उल्लेखनीय है कि स्वामी अखंडानंद जी ने स्वामी विवेकानंद जी का काला कमंडल श्री गुरुजी गोलवलकर को भेंट की करते हुए कहा था – “इस कमंडल से प्रेरणा लेकर आप भारत का भ्रमण करें और अखंड भारत के परम वैभव का लक्ष्य प्राप्त करें”. वर्तमान समय साक्षी है कि श्री गुरु जी ने जीवन पर्यंत परिश्रम करके हजारों प्रचारकों (युवा संन्यासियों) को तैयार किया. स्वामी विवेकानंद का यह संकल्प भी साकार हुआ. देश में एक शक्तिशाली हिन्दू संगठन तैयार हुआ है.

  1. चिरन्तन सिंहासन पर प्रतिष्ठित भारत माता

स्वामी विवेकानंद द्वारा की गई चौथी भविष्यवाणी को उन्हीं के शब्दों में यहां उदृत करते हैं. — “दीर्घ रात्रि अब समाप्त होती हुई जान पड़ती है. — महानिद्रा में निद्रित शव मानों जागृत हो रहे हैं.  — जो अंधे हैं, वह देख नहीं सकते, और जो पागल हैं वह समझ नहीं सकते कि हमारी मातृभूमि अपनी गंभीर निद्रा से अब जाग रही है. अब कोई उसकी उन्नति को रोक नहीं सकता. यह अब नहीं सोएगी, कोई भी बाह्य शक्ति इस समय इसे दबा नहीं सकती”

“हमारे देश में अभी भी धर्म और आध्यात्मिकता जीवित है. यह ऐसे स्रोत हैं, जिन्हें अबाध गति से बढ़ते हुए समस्त विश्व देख रहा है, — हमें पाश्चात्य एवं अन्य देशों को भी नव-जीवन तथा नवशक्ति प्रदान करनी होगी.”

“यह देखो भारत माता धीरे-धीरे आंखें खोल रही है. यह कुछ ही देर सोई थी. उठो, उसे जगाओ और पहले की तरह और भी अधिक गौरमंडित करके भक्तिभाव से उसे उसके चिरंतन सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर दो. उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत. भारत पुनः बनेगा विश्व गुरु. ”

आओ हम सब स्वामी विवेकानंद के संकल्प को पूरा करने के लिए राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुट जाएं.

नरेंद्र सहगल

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार

January 11th 2020, 2:08 am

जेएनयू हिंसा – हिंसा में शामिल आरोपियों की पहचान की गई, रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों को पीटा गया

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नई दिल्ली. जेएनयू हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने प्रेस वार्ता कर घटना से जुड़े तथ्य मीडिया के सामने रखे. दिल्ली पुलिस ने कहा कि सामान्यतया जांच पूरी होने के पश्चात पुलिस जानकारी मीडिया को देती है. लेकिन जेएनयू हिंसा मामले में कुछ दिनों से भ्रामक प्रचार हो रहा था, जिस कारण पुलिस को प्रेस वार्ता करनी पड़ रही है.

आज आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस ने आरोपियों के नाम बताए. फोटो व वीडियो फुटेज के माध्यम से आरोपियों की पहचान की गई है. दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सुबह 11 बजे पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की प्रमुख ज्वाइंट कमिश्नर शालिनी सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

जेएनयू हिंसा में पहचाने गए छात्र

पंकज मिश्रा, आइशी घोष, योगेंद्र भारद्वाज, सुचेता तालुकदार, प्रिय रंजन, चुनचुन कुमार, विकास पटेल, डोलन सामंता के नाम शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि वायरल वीडियो से कुछ लोगों की पहचान की गई. जेएनयू में हिंसा में पहचाने गए आठ छात्रों से जवाब मांगा गया है.

पुलिस का कहना है कि छात्रों के प्रदर्शन की वजह से आम लोगों को परेशानी हो रही है. जब भी हम इन लोगों से कनेक्ट करने की कोशिश करते हैं तो ये लोग कानून का उल्लंघन करते हैं. मामला एक शिक्षण संस्थान का है, जिसमें छात्र शामिल हैं.

पुलिस ने कहा कि जेएनयू में विंटर रजिस्ट्रेशन चल रहा है, जिसका एआईएसएफ, एसएफआई,आईसा, डीएसएफ संगठन विरोध कर रहे थे. ज्यादातर छात्र पंजीकरण कराना चाहते थे. इन संगठनों के सदस्य रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे थे, साथ ही जो पंजीकरण कराना चाह रहे थे उनको धमका रहे थे. पुलिस ने बताया कि तीन जनवरी को भी इन संगठनों से जुड़े सदस्यों ने विरोध के दौरान सर्वर रूम में छेड़छाड़ की.

चार जनवरी को कुछ अराजकतत्व पीछे के रास्ते से घुसते हैं और सर्वर रूम को बुरी तरह डैमेज कर देते हैं. इस संबंध में हमारे पास एक शिकायत भी दर्ज कराई गई है. पांच जनवरी सुबह 11 बजे स्कूल ऑफ सोशल साइंस के बाहर कुछ छात्र पंजीकरण कराने के लिए बाहर बैठे थे तो उनको पीटा गया और बीच- बचाव करने वाले सुरक्षा स्टाफ से भी धक्कामुक्की की गई. पुलिस ने कहा, एआईएसएफ, आईसा, एसएफआई और डीएसएफ के लोगों ने पांच जनवरी को पेरियार हॉस्टल में जाकर हमला किया. उसके बाद पुलिस वहां पहुंची.

दिल्‍ली पुलिस ने कहा, जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के पास मौजूद टी पॉइंट के पास पीस मीटिंग हो रही थी, इस दौरान कुछ नकाबपोश लोगों ने हाथ में लाठी डंडा लेकर साबरमती हॉस्टल पर हमला किया. पुलिस ने बताया कि नकाबपोश जानते थे कि किस-किस रूम में जाना है. पेरियार हॉस्टल में मारपीट की गई. बाहर वालों के लिए जेएनयू के अंदर जाना आसान नहीं. कुछ वाट्सएप ग्रुप भी बनाए गए थे.

January 10th 2020, 8:52 am

डॉक्टर ने गोबर से लिपी SUV से किया बेटी को विदा

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महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में एक डॉक्टर ने गोबर की लेप से सजी गाड़ी में बिठाकर अपनी लाडली बेटी को विदा किया. डॉ. नवनाथ दुधाल ने पेशे से डॉक्टर और वैज्ञानिक हैं. उन्होंने मुंबई के टाटा रिसर्च अस्पताल में वर्षों तक काम किया. साल 2019 के मई महीने में जब पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ रही थी तो उन्हें अपनी एसयूवी गाड़ी के एसी को बार-बार तेज करना पड़ता था, लेकिन फिर भी गर्मी लगती थी.

अस्पताल से रिटायर होने के बाद डॉ. नवनाथ दुधाल ने उस्मानाबाद में गुरुकुल गोशाला शुरू की और गाय के गोबर पर रिसर्च करने लगे. इसी दौरान उन्हें पता चला कि गाय के गोबर से बाहरी तापमान को कम किया जा सकता है. इसी वजह से उन्होंने अपनी एसयूवी गाड़ी पर गोबर का लेप लगवा लिया.

उन्होंने अपने निर्णय को लेकर बताया कि उनकी गाड़ी में लेप लगाने में 30 किलो गोबर का उपयोग हुआ. उन्होंने दावा किया कि गोबर लगाने के बाद गर्मी के दिनों में गाड़ी का तापमान कम करने के लिए उन्हें एसी का ज्यादा उपयोग नहीं करना पड़ा. गोबर के लेप से गर्मी के दिनों में गाड़ी जल्दी ठंडी होती है और सर्दी के दिनों में गाड़ी में ठंड भी कम लगती है. इतना ही नहीं डॉ. नवनाथ ने बताया कि गाड़ी पर गोबर का लेप लगाने के बाद 6 महीने तक उसे धोना नहीं पड़ता है. जिससे प्रतिदिन के हिसाब से 20 लीटर पानी की बचत होती है.

गाड़ी पर गोबर के लेप के अलावा डॉ. नवनाथ दुधाल ने अपने मोबाइल कवर पर भी गोबर का लेप चढ़ाया है, यहां तक कि उन्होंने गाड़ी में गोबर से बना गणपति भी रखा है. डॉ. नवनाथ दुधाल का दावा है कि गोबर के लेप से मोबाइल के रेडिएशन से बचा जा सकता है और गाड़ी में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

https://aajtak.intoday.in/gallery/bride-in-a-cow-dung-car-marathwada-dr-navnath-dudhal-tstk-1-44067.html

January 8th 2020, 8:11 am

गुरू पुत्रों के बलिदान दिवस पर प्रांत में शारीरिक प्रतियोगिताओं का आयोजन

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गुरू पुत्रों की याद में तथा नई पीढ़ी, स्वयंसेवकों को गुरु पुत्रों के बलिदान से परिचित करवाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हरियाणा प्रांत द्वारा बाल शारीरिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. प्रतियोगिताओं के माध्यम से वीरता, बलिदान और त्याग की संजीवनी स्वयंसेवकों को दी गई. गुरू गोबिंद सिंह के साहिबजादों की याद में स्वयंसेवकों को वीरता और बलिदान की जानकारी प्रांत बाल कार्य प्रमुख एवं संघ के वरिष्ठ प्रचारक भूषण कुमार ने अंबाला में आयोजित शारीरिक प्रतियोगिता में दी. स्वयंसेवकों ने त्याग की प्रतिमूर्तियों को नमन कर समाज की उन्नति का संकल्प लिया.

भूषण कुमार ने कहा कि भारत माता की रत्नगर्भा माटी से महापुरूष व वीर योद्धा जन्म लेते हैं. जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कर्तृव्य से न सिर्फ स्वयं को प्रतिष्ठित किया, बल्कि उनके अवतरण से सम्रग विश्व मानवता धन्य हुई है. इन्हीं संतपुरूषों, गुरूओं एवं महामनीषियों की श्रृंखला में एक महापुरूष हैं – गुरू गोबिंद सिंह. दुनिया के महान तपस्वी, महान कवि, महान योद्धा, महान संत आदि के रूप में पहचान है. जिन्होंने कर्तृत्ववाद का संदेश देकर दूसरों के भरोसे जीने वालों को स्वयं महल की नींव खोद ऊंचाई देने की बात सिखाई. गुरू गोबिंद सिंह जी ने मुगलों की सेना से भिड़ने को त्याग, तपस्या, साधना, संगठन व अस्त्र-शस्त्र सभी क्षेत्रों में सिक्खों के आत्मबल को जगाया. जहां पहले के गुरू भक्ति पद्धति में भक्ति की आराधना को समन्वित करते थे, वहीं गुरू गोबिंद सिंह जी ने स्वयं तलवार धारण की. शत्रु के राज्य में शक्ति की उपासना अनिवार्य है, यह उनका मत था.

उन्होंने स्वयंसेवकों को कहानी के माध्यम से बताया कि गुरू गोबिंद सिंह जी ने युद्ध को धर्म से समन्वित किया था और उनके दो पुत्र अजीत सिंह और जुझारू सिंह मुगलों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए. दो पुत्रों जोरावर सिंह व फतेह सिंह को सरहिंद के सूबेदार वजीर खान ने इस्लाम स्वीकार न करने पर दीवार में चिनवा दिया था. चार-चार पुत्रों को खोकर भी गुरू गोबिंद सिंह जी ने वीरता और त्याग का परिचय देते हुए यही कहा कि चार मरे तो क्या हुआ, जीवित कई हजार.

सह प्रांत कार्यवाह प्रताप जी ने हिसार में आयोजित बाल शारीरिक प्रतियोगिता कार्यक्रम में कहा कि बाल स्वयंसेवकों में देश सेवा की भावना से लेकर समाज सेवा के हौसले को बुलंद करने के साथ साहसिकता को बढ़ाना प्रतियोगिता का उद्देश्य था. संघ में बाल्यावस्था से ही बाल स्वयंसेवकों को देश रक्षा व समाज सेवा का पाठ पढ़ाया जाता है. इसी कड़ी में शारीरिक प्रतियोगिता का आयोजन प्रांत भर में किया गया.

बलिदान दिवस पर आयोजित बाल शारीरिक प्रतियोगिता में स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया.

बाल स्वयंसेवकों ने प्रतियोगिताओं में दमखम दिखाने के साथ-साथ करतब भी दिखाए. रीले दौड़, सौ मीटर दौड़, आठ सौ मीटर दौड़, बाधा दौड़, लंबी दौड़, मंडल खो व लक्ष्य भेद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रतियोगिता में प्रांत के 57 नगरों व 27 खंडों के 5636 विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रतियोगिता में कक्षा एक से पांच तक के 1430 शिशु विद्यार्थियों ने भी भाग लिया.

January 8th 2020, 6:18 am

श्री ननकाना साहिब पर हमले के खिलाफ विहिप का पाक उच्चायोग के समक्ष विरोध प्रदर्शन

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नई दिल्ली. पाकिस्तान में सिक्ख समुदाय पर हो रहे हमलों के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के तत्वाधान में बजरंग दल, राष्ट्रीय सिक्ख संगत, हिन्दू मंच एवं अन्य हिन्दू संगठनों ने मंगलवार को पाक उच्चायोग के पास विरोध-प्रदर्शन किया. प्रदर्शन को देखते हुए पाकिस्तान उच्चायोग के समीप दिल्ली पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी. विरोध-प्रदर्शन में विहिप एवं बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए.

विहिप कार्याध्यक्ष आलोक कुमार जी ने कहा कि मुसलमानों के लिए जिस तरह से मक्का और मदीना पवित्र हैं, उसी तरह हम लोगों के लिए ननकाना साहिब पवित्र है. ननकाना साहिब पर हुआ हमला हमारे सब्र का बांध तोड़ता है. हम याद कराना चाहते हैं, जब पूर्वी पाकिस्तान में इसी तरह के अत्याचार हुए तो भारतीय सेना वहां प्रवेश कर कार्रवाई की तो दो दिन में 90 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था. इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों से उसके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है.

पुलिस द्वारा पाकिस्तान उच्चायोग जाने की अनुमति नहीं मिलने पर उन्होंने कहा, हमने अपना विरोध व्यक्त कर दिया है. हम पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं बनना चाहते. हमने संदेश दे दिया है. पाकिस्तान अल्पसंख्यकों की रक्षा करे. अन्यथा हमारे सब्र का बांध टूट सकता है.

आलोक जी ने कहा कि पाकिस्तान के समाज में नफरत की दीवार है. यह केवल हिन्दू और सिक्खों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह नफरत अहमदियों, सुन्नी और शियाओं के भी खिलाफ है.

प्रचार प्रसार प्रमुख महेन्द्र रावत के अनुसार प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी. प्रदर्शन में मुख्य रूप से क्षेत्रीय संगठन मंत्री मुकेश जी, प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना, कार्याध्यक्ष वागीश ईस्सर, प्रांत मंत्री बचन सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष सुरेन्द्र गुप्ता, प्रांत संयोजक बजरंग दल श्याम कुमार, सहित अनेक पदाधिकारियों ने भाग लिया व गिरफ्तारी दी. गिरफ्तारी के दो घण्टे उपरान्त सभी को छोड़ दिया गया.

January 8th 2020, 5:48 am

विहिप का कार्य देश में 60,000 स्थानों पर तथा विश्व में 29 देशों में फैला है – मिलिंद परांडे

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इंदौर. विश्व हिन्दू परिषद का कार्य देशभर में लगभग 60,000 स्थानों तथा विश्व के 29 देशों तक फैला है. हिन्दू समाज के उत्थान के लिये विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा एक लाख से अधिक सेवा प्रकल्प शिक्षा, चिकित्सा, आर्थिक स्वालंबन, महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास के क्षेत्र में चलते हैं. मालवा प्रान्त में भी संगठन के सेवा कार्यों के विकास के बारे मे योजना बनी है.

इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में मिलिंद परांडे जी ने कहा कि केन्द्र सरकार पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान, इस्लामिक देशों से प्रताड़ित होकर आए धार्मिक अल्पसंख्यकों (हिन्दू, जैन, सिक्ख, पारसी, ईसाई आदि) को नागरिकता तथा सुरक्षा प्रदान करने के लिए सी.ए.ए. लेकर आई है. इसके लिए केन्द्र सरकार अभिनन्दन की पात्र है. पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान, तीनों देश इस्लामिक होने के कारण वहां मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हैं. धार्मिक दृष्टि से प्रताड़ित भी नही हैं. सी.ए.ए. का संबन्ध केवल भारत में आए हुए प्रताड़ित शरणार्थियों से है, भारतीय मुसलमानों कानून का कोई सम्बन्ध नहीं है.

उन्होंने कहा कि चार दिन पहले पाकिस्तान में सिक्खों के पवित्र स्थल श्री ननकाना सहिब गुरूद्वारे पर जुम्मे की नमाज के बाद में मुस्लिम भीड़ ने हमला किया, यह घटना हिन्दू-सिक्ख अल्पसंख्यकों पर होने वाली प्रताड़ना का ज्वलंत उदाहरण है. मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व एक ऐसे परिवार ने किया, जिन्होंने उसी गुरूद्वारे के ग्रन्थी की बेटी का अपहरण किया था.

दिल्ली की जामिया की घटनाएं तथा पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश व  गुजरात में मुस्लिमों द्वारा हिंसक आन्दोलन तथा उसमें राष्ट्रीय संपत्ति के नुकसान का विश्व हिन्दू परिषद् कड़े शब्दों में निन्दा करती है. जो सम्यवादी तथा अन्य राजनैतिक दल अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के लिए ऐसी हिंसक घटनाओं का समर्थन कर रहे हैं, यह उनकी समाज विघातक स्वार्थी, राजनीति को दर्शाता है.

मुम्बई में प्रदर्शन के दौरान फ्री कश्मीर के बैनर देश विघातक शक्तियों का आन्दोलनों में सहभाग को दिखाता है. मालवा प्रान्त सहित पूरे देश में विश्व हिन्दू परिषद् सी.ए.ए. के विरू़द्ध चल रहे दुष्प्रचार को दूर करने के लिये जागरण के अनेक कार्यक्रम करेगा. एक हिन्दू संगठन होने के नाते इन शरणार्थियों को नागरिकता दिलाने में हर संभव प्रयास और सहयोग भी करेगा.

आन्ध्र प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा हिन्दू मंदिरों की भूमि को गैर कानूनी रीति से अधिग्रहित करना, ईसाई पादरियों तथा मुस्लिम मौलवियों को करदाताओं के पैसे से वेतन देना, हिन्दू मंदिरों के संचालन तथा सेवा में गैर-हिन्दुओं को सम्मिलित करना, ऐसे अनेक हिन्दू विरोधी असंवैधानिक निर्णय हाल ही में लिए गए हैं. विश्व हिन्दू परिषद् इसकी कड़ी निन्दा करती है. आन्ध्र प्रदेश में इसके विरूद्ध एक विराट आन्दोलन खड़ा किया जाएगा. राज्य सरकार के निर्णायों के विरूद्ध विश्व हिन्दू परिषद् न्यायालय में जाएगी.

मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों में गौ तस्करी की गतिविधियां आए दिन हो रही हैं. झाबुआ में बिना रोक टोक के ईसाई मिशनरी के धर्मांतरण के षड्यंत्र बढ़ते जा रहे है. विहिप ने 47 नए अवैध ईसाई प्रार्थना स्थलों की सूची भी पुलिस प्रशासन को दी है. किंतु, अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई. रतलाम जिले में 7-8 हिन्दू कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या हुई. इन सभी हिन्दू विरोधी घटनाओं के बारे में विहिप राज्य सरकार को आगाह करते हुए दोषियों के विरुद्ध अविलम्ब कार्रवाई की मांग करती है.

January 8th 2020, 5:36 am

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में वर्तमान मकर संक्रांति

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तमसो मा ज्योतिर्गमय – धारा 370 का अंधकार समाप्त

असतो मा सद्गमय – श्रीराम मंदिर का मार्ग प्रशस्त

मृत्योर्मामृतम् गमय – नागरिकता संशोधन अधिनियम, मौत का साया समाप्त

पर्व/त्यौहार भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं. अखंड भारत के विस्तृत भू-भाग में प्रायः वर्ष भर संपन्न होने वाले इन उत्सवों का संबंध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं होता. देश के कोने-कोने में मनाए जाने वाले यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण, राष्ट्र की विजय, सुरक्षा और सामाजिक एकता के परिचायक हैं. अनेक रीति-रिवाजों से परिपूर्ण इन त्यौहारों के समय समूचे विश्व को भारत की विविधता में एकता के साक्षात दर्शन हो पाते हैं. मकर संक्रांति महोत्सव अर्थात् मकर संक्रांति भगवान भास्कर (सूर्य) के तेज, प्रकाश और ऊर्जा से प्रेरणा लेने का अवसर माना गया है. इस दिन सूर्य देव का धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश होता है. दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं. शीत लहरें समाप्त होने लगती हैं. इस समय को भारत में बहुत ही पवित्र माना जाता है. अखंड ब्रह्मचारी भीष्म पितामह ने इसी अवसर पर अपना शरीर छोड़ा था.

मकर संक्रांति के इस पवित्र अवसर पर भारतीय विशेषतया हिन्दू समाज से संबंधित पंथों एवं जातियों के लोग पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान करते हैं. समाज के अभावग्रस्त लोगों में धन, अनाज एवं वस्त्रादि का दान करते हैं. रात्रि में गली-मोहल्ले के लोग एकत्रित होकर सामूहिक यज्ञ करते हैं. अतः यह त्यौहार पारिवारिक, सामाजिक तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का आधार भी है.

भारतीय संस्कृति में इस राष्ट्रीय पर्व की व्यवस्था इस प्रकार की गई है. “तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर, “असतो मा सद्गमय” अर्थात् असत्य से सत्य की ओर. “मृत्योर्मामृतम् गमय” अर्थात् मृत्यु से अमृत (जीवन) की ओर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिव गोलवलकर (श्री गुरु जी) के शब्दों में – “यह राष्ट्रीय पर्व हमारे राष्ट्रीय जीवन में परस्पर स्नेह को पुष्ट करने वाला है. समाज के सारे भेदभाव बुलाकर एकात्मता का साक्षात्कार कराने का उदार सत्कार देने वाला यह दिन है.”

राष्ट्र के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखें तो इस बार मकर संक्रांति का पर्व अनेक परिवर्तन लेकर आया है. अनेक असहाय समस्याएं सुलझ गई हैं. अलगाववादी धारा 370 का हटना, श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना और नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित होना इत्यादि ऐसे महत्वपूर्ण कार्य हैं, जिनसे यह मकर संक्रांति पर्व परिवर्तन का महान अवसर बन गया है. राष्ट्रीय संस्कृति की ऐतिहासिक विजय है.

तमसो मा ज्योतिर्गमय

भारत के अभिन्न भाग कश्मीर में अनुच्छेद 370 का घोर राष्ट्र विरोधी अंधकार छाया हुआ था. गत 73 वर्षों से छाए इस अलगाववादी अंधेरे में पाकिस्तान भी आतंकी केसर की कियारियों में जिहादी आग लगा रहा था. इस अनुच्छेद के काले तम में साधारण नागरिकों के मौलिक अधिकारों को समाप्त कर दिया था. कुछ मुट्ठी भर मजहबी नेता ही मौज मस्ती कर रहे थे.

वर्तमान सरकार ने राजनीति की दिशा बदल कर अनुच्छेद 370 के अंधकार को एक ही झटके में समाप्त कर लोकतंत्र और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के प्रकाश को बिखेर दिया. अब जम्मू कश्मीर ज्योतिर्गमय हो गया है. सारे देश में एक निशान, एक विधान और एक प्रधान का उद्घोष करने वाले अमर बलिदानी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का संदेश है, यह मकर संक्रांति.

असतो मा सद्गमय

एक मकर संक्रांति पर्व सन् 1992 में भी आया था. जब संगठित हिन्दू शक्ति के प्रतीक कारसेवकों ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर आक्रान्ता द्वारा खड़े किए गए ‘बाबरी ढांचे’ को हटाकर असत्य पर सत्य की जीत दर्ज की थी. एक मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष भी आया है, जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करके असत्य से सत्य की ओर जाने का सर्वसम्मत फैसला सुना दिया है.

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर छाए अधर्मी, विदेशी और दहशतगर्दी अंधेरे को मिटाने के लिए हिन्दू समाज गत 494 वर्षों से निरंतर अपने बलिदान दे रहा था. इस कालखंड में हुए संघर्ष में लगभग पांच लाख हिन्दुओं ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं. अब सत्य की विजय हुई है. इस वर्ष यह मकर संक्रांति पर्व निराशा से आशा की ओर, हीनता से श्रेष्ठता की ओर, पराजय से विजय की ओर जाने का गौरवशाली संदेश लेकर आया है.

मृत्योर्मामृतम् गमय

भारत माता के दुर्भाग्यशाली विभाजन के समय पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) में रह जाने वाले हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार हो रहे थे. हिन्दू बहन बेटियों का सतीत्व सुरक्षित नहीं था. यह अत्याचार अभी भी हो रहे हैं. अनेक हिंन्दू परिवार अपने धर्म और सम्मान को बचाने के लिए भारत में शरण लेने आए हैं. मौत के साए में जी रहे इन हिन्दुओं को अमृतमयी जीवन प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाया है. यह मृत्यु पर विजय जीवन की विजय है.

यह मकर संक्रांति पर्व पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में सताए जा रहे हिन्दुओं, सिक्खों, पारसियों, जैनियों, बौद्ध और ईसाइयों के लिए वरदान बन आया है. भारत में शरण लेने वाले इन लोगों को भारत की नागरिकता मिल रही है. जो काम बहुत वर्ष पूर्व हो जाना चाहिए था, वह इस मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हो रहा है. यह धर्म की अधर्म पर विजय है. यह जीवन की मृत्यु पर विजय है. यही मकर संक्रांति का संदेश है.

भविष्य की मकर संक्रांति

इस वर्ष की मकर संक्रांति के हर्षोल्लास में समस्त भारतवासियों में यह विश्वास जागृत हुआ है कि भविष्य में भी प्रत्येक मकर संक्रांति पर राष्ट्र की विजय, सामाजिक एकता और धार्मिक सामंजस्य का कोई ना कोई प्रसंगअवश्य आएगा. भारत के 135 करोड़ नागरिक एक राष्ट्र पुरुष के रूप में खड़े होकर राष्ट्रीय स्वाभिमान का अनुभव करेंगे.

राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनेगा. कश्मीर से भगाए गए लाखों हिन्दू अपने घरों में लौटेंगे. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश सहित अनेक देशों में हिन्दू उत्पीड़न बंद होगा. भारत में समान नागरिक संहिता का स्वर्णिम युग भी आएगा और एक समय ऐसा भी आएगा, जब ‘अखंड भारत’ के कोने कोने में मकर संक्रांति एवं अन्य सभी त्यौहार मनाए जाएंगे. पाठकों से निवेदन है कि मकर संक्रांति के इस संदेश को प्रत्येक भारतवासी तक पहुंचा दें.

नरेंद्र सहगल

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं स्तम्भकार

January 8th 2020, 2:32 am

वामपंथी हिंसा से मुक्त हो जेएनयू – अभाविप

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्र समुदाय से अपील करती है कि वह वामपंथी हिंसा से जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान को बचाने के लिए आगे आए. सामने आए नवीनतम वीडियो में स्पष्ट देखा गया है कि जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रवेश करने के लिए हिंसा में संलिप्त महिलाओं/पुरुषों की मदद की है.

वामपंथियों ने अभाविप कार्यकर्ताओं को बुरी तरह से पत्थर से मारा, जिसमें अभाविप के 25 कार्यकर्ता  गंभीर रूप से घायल हुए हैं. लेफ्ट के नेतृत्व वाले जेएनयूएसयू के सभी फर्जी प्रचार युक्तियों का पर्दाफाश हो गया है. क्योंकि यह पाया गया है कि कुछ व्हाट्सएप ग्रुप, कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर एबीवीपी को बदनाम करने के लिए बनाया गया है. इस तरह की सोच की हर विवेकवान नागरिक द्वारा निंदा की जानी चाहिए.

वामपंथी छात्रों ने एक अघोषित युद्ध शुरू कर दिया है. जो आम छात्र शांति से पढ़ना चाहते हैं, उन्हें वामपंथी विश्वविद्यालयों में हर तरह से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. जब वामपंथियों ने यह देखा कि आम छात्र उनके बहिष्कार के आह्वान को नहीं मान रहे हैं, तो उन्होंने आम छात्रों पर निर्दयतापूर्वक हमला कर दिया. अपने एजेंडे का प्रचार करने के लिए, वामपंथियों ने विश्वविद्यालय को बदनाम करने के लिए कुछ तस्वीरें और स्क्रीनशॉट साझा किए, जो बाद में नकली पाए गए हैं. इस हिंसा की कड़ी निंदा करने का हम सभी नागरिकों और आम छात्रों से आग्रह करते हैं. लेफ्ट से जुड़े लोग पहले छात्रों पर हमला करते हैं और बाद में उन्हीं पीड़ित छात्रों को दोष देते हैं. एबीवीपी ने पहले पुलिस को बुलाया क्योंकि इस हिंसा में एबीवीपी को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है.

अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा, “जेएनयू में अभाविप के कार्यकर्ताओं तथा आम छात्रों पर हमला नैतिक रूप से निंदनीय है. हम छात्रों को आतंकित करने के वामपंथी प्रयासों की कड़ी निंदा करते हैं. हम दिल्ली पुलिस और जेएनयू प्रशासन से अपील करते हैं कि, परिसर में स्थिति को नियंत्रण में लाए तथा पीड़ित छात्रों की चिंताओं को समझकर सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करें.”

January 7th 2020, 6:32 am

जेएनयू में हिंसा के पीछे शहरी नक्सली…!!!

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के नाम पर जमे अर्बन नक्सली रविवार को अपने असली रूप में सामने आ गए. जेएनयू में आम छात्रों के बीच इनकी दाल नहीं गली और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बायकॉट का ऐलान नाकाम होता देख ये वामपंथी गुंडे हिंसा पर उतर आए. ऑनलाइन प्रक्रिया में छात्रों को शामिल होता देख नकाबपोश छात्रों, प्रोफेसरों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों पर टूट पड़े. इन वामपंथी गुंडों ने जमकर कोहराम मचाया. दर्जनों छात्र, एबीवीपी के नेता और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मनीष जांगिड़ भी जख्मी हुए. इस हमले में बाहरी अराजक तत्व भी शामिल थे. घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

वास्तव में चंद वामपंथी गुंडों ने पूरे जेएनयू को बंधक बना रखा है. अपनी विभाजक विचारधारा चलाने वाले ये बहरुपिये छात्र नहीं चाहते कि यूनिवर्सिटी में सेमेस्टर परीक्षा हो. यूनिवर्सिटी में परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है. इसके लिए वाई-फाई की सुविधा दी गई है. बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा देने के इच्छुक हैं. ऐसे में वापमंथियों का एजेंडा ढेर हो जाने का खतरा बन आया है. इस सारे घटनाक्रम की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी. तीन जनवरी को ये नक्सली गुंडे नकाब पहनकर यूनिवर्सिटी के सर्वर रूम में पहुंचे और वाई-फाई बंद कर दिया. वाई-फाई बंद करने का उद्देश्य यही था कि छात्र परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन न करा सकें. चार जनवरी को जेएनयू प्रबंधन ने वाई-फाई चालू कराने का प्रयास किया, तो फिर वापमंथी गुंडे आ भिड़े. इस बार सिक्योरिटी स्टाफ ज्यादा होने के कारण इनकी एक न चली. जब ये वाई-फाई बंद कराने में नाकाम रहे, तो इन्होंने पांच जनवरी को हमले की साजिश रची. पांच जनवरी को सुनियोजित तरीके से ये लोग जेएनयू के सर्वर रूम पर जम गए. जो छात्र परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे, उन्हें खदेड़ दिया. जिसने विरोध किया, उस पर इन्होंने हमला किया.

इन वामपंथी गुंडों ने शाम को स्कूल ऑफ लैंग्वेज़ में प्रोफेसरों पर हमला बोल दिया. ये हमलावर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए हॉस्टलों में जा घुसे. पेरियार हॉस्टल से सुरक्षा कर्मियों ने इन्हें खदेड़ा तो इन्होंने साबरमती हॉस्टल पथराव शुरू कर दिया. जब हॉस्टल के छात्र इन्हें सबक सिखाने के लिए बाहर आए, तो इन वामपंथियों ने सुनियोजित तरीके से वीडियो बनाकर ये दुष्प्रचार शुरू कर दिया कि हमलावर एबीवीपी के हैं. जेएनयू में ताजा टकराव बिल्कुल अलग किस्म का है. यह टकराव वामपंथी गुडों और आम छात्रों के बीच का है. वामपंथियों के कब्जे वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन का बहिष्कार किया है. लेकिन सैकड़ों छात्र परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं. पिछले दिनों आम छात्रों की ओर से भी पोस्टर लगाए गए थे, जिसमें जेएनयूएसयू से मांग की गई थी कि उन्हें रजिस्ट्रेशन कराने दिया जाए.

एबीवीपी ने बयान जारी करके कहा कि वामपंथी गुडों ने जेएनयू के इंटरनेट कम्युनिकेशन पर हमला किया है. जिसके चलते जेएनयू परिसर में वाई-फाई ब्लैकआउट हो गया है. जब आम छात्रों ने इसका विरोध किया, तो वामपंथी गुंडों ने उन पर हमला किया. जेएनयू के वामपंथी नक्सलियों के नक्शे कदम पर हैं. पिछले तीन दिन से वामपंथी जेएनयू परिसर में हिंसा का कुचक्र रच रहे थे. इतना ही नहीं, इनका साथ देने के लिए बाहर से गुंडे भी आए थे. जिस तरह से जामिया मिलिया के छात्रों का एक वर्ग इन वामपंथी गुंडों के समर्थन में सामने आया है, उससे साफ हो गया कि पूरी हिंसा सुनियोजित थी. इसी को भांपते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मामले का संज्ञान लिया. उन्होंने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को जरूरी कदम उठाने की हिदायत दी. इसके बाद ज्वाइंट पुलिस कमिशनर स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी जा रही है.

January 7th 2020, 6:32 am

जेएनयू हिंसा – छात्र संघ अध्यक्ष आईशी घोष सहित 19 के खिलाफ मामला दर्ज

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नई दिल्ली. जेएनयू में हुई हिंसा के मामले में छात्र संघ अध्यक्ष आईशी घोष के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. आईशी पर आरोप है कि उसने गार्ड्स पर हमला किया और तोड़फोड़ की. पुलिस ने जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आईशी घोष और 19 अन्य छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर सर्वर रूम में तोड़फोड़ करने और सिक्योरिटी गार्ड पर हमला करने के मामले में दर्ज की गई है.

जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष भले ही मीडिया के सामने बयानबाजी कर रही हों, लेकिन उनके वीडियो से स्पष्ट हो रहा है कि सुनियोजित तरीके से जेएनयू में वामपंथी गुंडों द्वारा छात्रों पर हमला किया गया. वह टीवी चैनलों पर बेतुके तर्क देकर कह रही हैं​ कि एबीवीपी ने हमला किया, लेकिन सोशल मीडिया व चैनल पर चल रहा वीडियो कुछ और ही बता रहा है. इस वीडियो की बात करें तो यह पांच जनवरी की शाम का है, इसमें आईशी घोष हमलावरों को निर्देश देते हुए यह बता रही हैं कि उन्हें किस तरफ जाना है. आइशी घोष सितंबर 2019 में सीपीएम के समर्थन से जेएनयूएसयू की अध्यक्ष बनी थीं.

#JNUViolence #JNUUnderAttack #LeftAttacksJNU

#LeftAttacksJNU #JNUUnderAttack #JNUViolence #ViralVideo रिपब्लिक टीवी पर चल रही इस विडियो के अनुसार जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष की आयशी घोष JNU में नकाबपोशों के साथ दिख रही हैं….समाचार के अनुसार इस ग्रुप का भी हमले में हाथ था.

Posted by VSK Bharat on Sunday, January 5, 2020

January 7th 2020, 2:46 am

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समर्थन में उज्जैन में उमड़ा जनसमूह

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हम भारत के लोग (CAA) के समर्थन में….

300 मीटर लंबा तिरंगा लेकर 65 जाति समाजों के लोग सड़क पर निकले

हजारों की संख्या में महिलाएं, दिव्यांगजन और किन्नर भी समर्थन में निकले

उज्जैन. राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के आह्वान पर उज्जैन में CAA के समर्थन में रैली आयोजित की गई. रैली सामाजिक न्याय परिसर से राष्ट्रगान के पश्चात प्रारंभ होकर शहीद पार्क पर भारत माता की आरती के साथ सम्पन्न हुई.

मंच के संयोजक चरणसिंह गिल जी ने कहा कि लंबे समय से समाज में CAA के समर्थन की आवाज उठ रही थी, इसे मूर्त रूप देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के माध्यम से नगर में रहने वाले 65 समाजों द्वारा रैली का आयोजन किया गया. रैली में संत समाज, व्यापारी एसोसिएशन और हजारों की संख्या में आम समाज हाथों में तिरंगा झंडा लेकर निकला. तख्तियों पर CAA के समर्थन में नारे लिखे गए थे. रैली सामाजिक न्याय परिसर से राष्ट्रगान और महिलाओं द्वारा शंखनाद के पश्चात चरक अस्पताल चौराहा, कोयला फाटक, निजातपुरा, नरेंद्र टॉकीज, कंठाल, नई सड़क, दौलतगंज, फव्वारा चौक, गोकुल दुग्धालय चौराहा, मालीपुरा, देवास गेट, चामुंडा माता चौराहा, फ्रीगंज ओवर ब्रिज और टावर चौक होते हुए शहीद पार्क पहुंची.

शहीद पार्क पर संतों के सान्निध्य में भारत माता की आरती के पश्चात रैली सम्पन्न हुई. इस रैली को उज्जैन के किन्नर समाज सहित 65 समाजों एवं 25 व्यापारी एसोसिएशन, कोचिंग क्लास एसोसिएशन, मेडिकल एसोसिएशन, ऑटो पार्ट्स एसोसिएशन, कंप्यूटर एसोसिएशन, कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन, अनाज व्यापारी संघ, फूल व्यापारी एसोसिएशन आदि द्वारा सहभागिता कर समर्थन दिया गया.

 

 

January 7th 2020, 1:29 am

दत्तोपंत जी ने कहा था, भारत का विकास का मॉडल 10,000 साल से चलायमान है और आगे भी चलेगा – सतीश कुमार ज

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दत्तोपंत जी मानना था, भारत के विकास का मॉडल समृद्धि युक्त व्यवस्था का घोतक था

जोधपुर.  स्वदेशी जागरण मंच जोधपुर द्वारा 05 जनवरी को कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन महालक्ष्मी बालिका विद्यालय में किया गया.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख व राजस्थान मध्य प्रदेश व उत्तर क्षेत्र के संगठक सतीश कुमार जी ने कहा कि यह वर्ष स्वदेशी जागरण मंच के सभी कार्यकर्ताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वर्ष स्वदेशी जागरण मंच के संस्थापक श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के जन्मशताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. दत्तोपंत जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र चिन्तन तथा भारत भूमि को गौरवान्वित करने में बीता. भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, पर्यावरण मंच, स्वदेशी जागरण मंच सहित अनेक संगठनों के संस्थापक श्रद्धेय दतोपन्त जी एक महापुरुष थे. उन्होंने आज से 50 साल पूर्व, जिस समय पूंजीवाद व वामपंथी विचारधारा का बोलबाला था, इसमें व्याप्त कमियों और दुष्परिणामों को पहचान लिया था. उन्होंने पश्चिम व वाम विचारों का भारतीय परिपेक्ष्य में सरलीकरण किया और उसे भारत के मजदूरों और किसानों को समझाया. 71 वर्ष की आयु में उन्होंने संपूर्ण दुनिया में फैली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ललकारा और उनका मुकाबला करने के लिए स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना की. जिस प्रकार गांधी जी ने चरखे के उपयोग को आजादी का हथियार बनाया, उसी प्रकार दत्तोपंत जी ने पर्चों के माध्यम से देश की जनता को विदेशी और स्वदेशी उत्पादों का परिचय कराया और देश में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया. पश्चिम के अंधाधुंध उपभोग व शोषण की संस्कृति को उन्होंने अच्छी तरह पहचाना और भारत के संदर्भ में अपना भारतीय दर्शन प्रस्तुत किया.

आज संपूर्ण विश्व में आर्थिक असमानता और गरीबी ने पैर पसार लिए हैं. विश्व की 360 करोड़ की आबादी के पास उपलब्ध संपदा और विश्व के 20 सबसे अमीर व्यक्तियों के पास संपदा का जोड़ बराबर है. आप देखेंगे कि भारत में अभी भी गरीबी मिटी नहीं है, लेकिन पिछले एक वर्ष में देश के सबसे अमीर आदमी की संपदा में 18 बिलियन डॉलर की वृद्धि हो गई है. पश्चिम के विकास के मॉडल ने बेरोजगारी पर्यावरण विनाश और आर्थिक असंतुलन को जन्म दिया. पश्चिम के अंधाधुंध आधुनिकीकरण के मॉडल ने सारे जंगल खत्म कर दिए, सारे पहाड़ उड़ा दिए, सारी खानें खोद दीं और आज की तारीख में वह अंतरिक्ष को भी खोदने के लिए तैयारी कर रहा है. इसी मॉडल के परिणामस्वरूप पूरे विश्व में सामाजिक भेदभाव का जन्म हुआ है, जिसकी परिणिति आज संपूर्ण समाज आतंकवाद के रूप में झेल रहा है. इन सब समस्याओं के समाधान के रूप में दत्तोपन्त जी कहते थे कि पूंजीवादी मॉडल 65 साल और वामपंथी मॉडल 74 साल चला, लेकिन भारत का विकास का मॉडल पिछले 10,000 साल से चलायमान है और आगे भी चलेगा.

दत्तोपन्त जी का मानना था कि भारत के विकास का मॉडल समृद्धि युक्त व्यवस्था का घोतक था, जिसकी 6 सबसे बड़ी विशेषताएं थी. पहला, भारत का मॉडल समृद्धि युक्त अर्थव्यवस्था थी, हर घर में चाहे वह अमीर हो या गरीब कुछ मात्रा में सोना और चांदी पाया जाता था, जबकि पश्चिम में हर व्यक्ति के दस दस क्रेडिट कार्ड की किश्तें. दूसरा, भारत की विकास की अवधारणा पूर्ण रोजगार की गारंटी देती थी, हमारे संस्कृत शब्दकोश में बेरोजगारी शब्द के लिए कोई शब्द ही नहीं है.

तीसरा, भारत का विकास मॉडल पर्यावरण हितैषी था, जहां वस्तुओं का दोहन होता था शोषण नहीं. जैसे पीपल और तुलसी की पूजा पेड़ से फल लेना, गाय का दूध दुहना, जबकि पश्चिम में हर चीज को काटा व नष्ट किया जाता है.

चौथा, भारत की अर्थव्यवस्था ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था थी. जिसमें हर इकाई अपने आप में आत्मनिर्भर थी और समाज के प्रत्येक वर्ग का ग्राम के विकास में योगदान रहता था, परिणामस्वरूप प्रत्येक व्यक्ति के पास जीवन के सभी साधन उपलब्ध रहते थे.

भारत के विकास मॉडल की पांचवीं सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह व्यवस्था विकेंद्रीकृत थी, पश्चिम के मास प्रोडक्शन के विचार के विपरीत यह विकेंद्रीकृत व्यवस्था प्रोडक्शन बाय मासेज पर आधारित थी, परिणामस्वरूप संपूर्ण समाज को योगदान करने का मौका मिलता था. भारत के विकास के मॉडल की छठी सबसे बड़ी विशेषता थी कि यह व्यवस्था जीवन मूल्यों पर आधारित थी, जहां पर धर्म नैतिकता व उच्च मूल्यों का हर स्तर पर पालन वह पोषण होता था.

कार्यक्रम के अंत में प्रान्त संयोजक अनिल वर्मा ने नए दायित्वों की घोषणा की, सभी उपस्थित नागरिक बंधु-भगिनी का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम के दौरान मंच पर राष्ट्रीय स्वयंमसेवक संघ के जोधपुर प्रांत कार्यवाह श्याम मनोहर जी, स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. धर्मेंद्र दुबे व अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे.

January 6th 2020, 7:59 am

सिरीफोर्ट में छलका पाक-बांग्ला-अफगान से आए पीड़ितों का दर्द

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विहिप व मोदी के प्रति व्यक्त की कृतज्ञता, अधिनियम का विरोध करने वालों को कोसा

नई दिल्ली. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर हिन्दू, सिक्ख, जैन, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि अब आपके दुख के बादल छंट गए हैं और आप भारत में इज्जत के साथ सिर ऊंचा करके रहो, भारत तुम्हारे साथ खड़ा है. इंद्रप्रस्थ विश्व हिन्दू परिषद द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम पर संभ्रम से सच की ओर विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में कानून मंत्री ने कहा कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों में गैर मुस्लिमों पर अमानवीय जुल्म ढाए गए. दुःखी हो कर वो भारत आए, इन लोगों को नागरिकता देने का विरोध और रोहिंग्या की चिंता कर रहे लोग विशुद्ध रूप से वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं. नागरिकता संशोधन अधिनियम किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता नहीं छीन रहा है. लोकतंत्र में शांति पूर्ण प्रदर्शन और विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा. विश्व हिन्दू परिषद शरणार्थियों के हितों और कल्याण में बरसों से लगी है. परिषद की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है.

दिल्ली के सिरीफोर्ट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में तीनों पड़ोसी देशों से आए शरणार्थी अपने परिवारों के साथ आए हुए थे. वे बीच बीच में ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे लगा कर प्रसन्नता का प्रदर्शन कर रहे थे. कार्यक्रम में राष्ट्रीय नवजागरण की पाक्षिक पत्रिका ‘हिन्दू विश्व’ के ‘नागरिकता कानून’ विशेषांक का विमोचन भी किया गया.

विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार जी ने कहा कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों से प्रताड़ित हो कर भारत आए शरणागतों को भारतीय नागरिकता देना अटल निर्णय है, इसको बदलेंगे नहीं. यदि इसका विरोध करने वालों ने हिंसा करने का मन बना ही लिया है तो भारत सरकार और समाज दोनों ही इसका सामना करने में सक्षम हैं. सीएए का विरोध करने वालों से, पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारे की घटना का जिक्र करते हुए पूछा कि यदि पाकिस्तान की बिटिया जगजीत भारत में शरण मांगेगी तो तुम्हारा क्या जवाब होगा? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन करने वालों के घर उनका हाल चाल पूछने तो जाती हैं, लेकिन आज तक कभी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पीड़ित हिन्दू और सिक्ख शरणार्थी कैंपों में नहीं गयी?

विश्व हिन्दू परिषद के विश्व समन्वय विभाग को देखने वाले केंद्रीय मंत्री प्रशांत हरतालकर ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में गैर मुस्लिमों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहारों के दृष्टांत रखते हुए बताया कि अफगानिस्तान में अब केवल पांच सौ सिक्ख बचे हैं. उनको भी एक दिन भारत आना ही पड़ेगा. सभागार में उपस्थित सभी शरणार्थियों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि अब उन्हें नागरिकता का जो अधिकार मिला है, ये अपने साथ बहुत सारे कर्तव्य भी लेकर आया है. उन्हें भारत के प्रति अपना कर्तव्य भी निभाना है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार जी ने गत 1500 वर्षों के इतिहास का वर्णन करते हुए कहा कि हमने विदेशों से आए अनेक धर्मावलम्वियों व मत-मतान्तर के लोगों को शरण, सहायता व सहोदर के भाव के साथ अंगीकार किया, किन्तु आज बड़ा दुर्भाग्य है कि कुछ लोग मात्र अपने राजनैतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए पीड़ितों को न्याय देने का भी विरोध कर रहे हैं. भगवान उनको सद्बुद्धि प्रदान करे. सीएए को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान सहित किसी भी देश ने यह नहीं कहा कि हमारे यहां अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित नहीं किया जाता. इसके अलावा दुनियाभर के किसी भी यहूदी, क्रिस्चियन, मुस्लिम या बुद्धिस्ट देश ने यह नहीं कहा कि उक्त तीनों देशों के अल्पसंख्यकों को वे अपने यहां की नागरिकता देंगे. जबकि 50 से ज्यादा मुस्लिम,150 से ज्यादा क्रिस्चियन और यहूदी देश हैं. इसके अलावा 30 बुद्धिस्ट देश हैं. केवल भारत ने उन्हें नागरिकता देने का कानून बनाया है. इसकी दुनियाभर में तारीफ होनी चाहिए, जबकि कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शनों की आड़ में कोई हिंसक, अराजक, असंवैधानिक, अशिष्ट या राष्ट्रद्रोही व्यवहार करे तो भारत कदापि स्वीकार नहीं करेगा.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में राजधानी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और बांग्लादेशी हिन्दू और सिक्ख परिवारों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए तथा विश्व हिन्दू परिषद् को उनका संरक्षण, सुरक्षा व अनवरत रूप से हर मामले में सहायता देने हेतु कृतज्ञता व्यक्त की, साथ ही पाकिस्तानी अत्याचारों की अपनी दर्द भरी दास्तानें सुनाईं. दिल्ली के रोहिणी में रहने वाले राहुल ने कहा कि अब हमें कोई पाकिस्तानी ना कहे, हम हमेशा से हिन्दुस्तानी थे, हैं और रहेंगें. क्योंकि हमने पाकिस्तान मांगा ही नहीं था.

मजनूं का टीला में रहने वाले सोनादास ने कहा कि हम बहुत गरीब हैं और साथ ही हमने पाकिस्तान में बहुत जुल्म सहे, अब भारत सरकार की कृपा से नागरिकता मिल गयी तो सब दुख भूल जाएंगे. अफगानी सिक्खों की दीवान खालसा संस्था के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने कहा कि अब हमारी पहचान भारतीय सिक्  के रूप में होगी, हमने और हमारे बच्चों ने दर दर की ठोकरें खाई हैं. निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति के अध्यक्ष बिनय कुमार बिश्वास ने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दू नारकीय जीवन जी रहे हैं. वहां विश्व हिन्दू परिषद एक पंजीकृत संस्था है और 64 जिलों में वीएचपी काम कर रही है. हिन्दुओं के तैंतीस करोड़ देवी देवता हैं, लेकिन हमारा तो एक ही देवता है प्रधानमंत्री. बलोचिस्तान और सिंध पाकिस्तान के ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हिन्दुओं पर सबसे ज्यादा जुल्म ढाए जाते हैं.

January 6th 2020, 6:44 am

दीनदयाल शोध संस्थान प्रतिष्ठित एनसीसी समष्टि सेवा पुरस्कार से सम्मानित

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सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, एनसीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष पद्मश्री एवीएस राजू ने प्रदान किया पुरस्कार

नई दिल्ली. भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान को प्रतिष्ठित एनसीसी समष्टि सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 28 दिसंबर को हैदराबाद में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, एनसीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष पद्मश्री एवीएस राजू ने पुरस्कार प्रदान किया. संस्थान की ओर से संगठन सचिव अभय महाजन ने पुरस्कार स्वीकार किया. प्रशस्ति पत्र के साथ एक करोड़ रुपए की राशि भी पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई.

सरसंघचालक जी ने पुरस्कार प्रदान करते हुए संस्थान के संस्थापक राष्ट्रऋषि नानाजी को भावभीनी श्रद्धांजली दी और कहा कि उन्होंने देश में सेवा व विकास के नए प्रतिमान गढ़े. दीनदयाल शोध संस्थान उन्हीं की कल्पनाशीलता की एक कृति है. समग्र दृष्टिकोण के साथ ग्राम विकास का जो मॉडल नानाजी ने प्रस्तुत किया, वह पूरे देश के लिए अनुकरणीय है. डीआरआई ने समाज जीवन के हर क्षेत्र में काम कर देश के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है. चित्रकूट के आसपास के पांच सौ से अधिक गाँवों में संस्थान के कामकाज से खुशहाली का जो वातावरण बना है, वह भारत में सेवा शब्द की सही अभिव्यक्ति है.

सरसंघचालक जी ने नानाजी के जीवट व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उनके शुरुआती जीवन का एक उद्धरण सुनाया. उन्होंने बताया कि एक बार संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार नानाजी के निवास पर गए. वहां एक स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर के नीचे एक पंक्ति लिखी थी – मैं अपने देश के लिए कैसे मर सकता हूँ? इस पर डॉक्टर जी ने नानाजी से कहा कि इस पंक्ति को बदल दो और स्वयं से पूछो कि मैं देश के लिए कैसे जी सकता हूँ. बस, वहीं से नानाजी ने देश के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया.

नानाजी की पुण्यतिथि पर संस्थान के कार्यक्रम में चित्रकूट में आम गांववासियों की जो सहभागिता रहती है, वही नानाजी के प्रति उनके सम्मान का एक जीता जागता उदाहरण है. वे स्वयं इसके गवाह हैं. उन्होंने संस्थान के सैकड़ों कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया.

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने बताया कि संस्थान समाज के सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर परस्पर पूरकता के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सदाचार, गरीबी एवं बेरोजगारी उन्मूलन के साथ ही कृषिगत विकास, आजीवन स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में सतत प्रयत्नशील है.

महाजन ने कहा कि राष्ट्रऋषि नानाजी देशुमुख ने गांव के विकास में जनता की पहल एवं सहभागिता को अपना ध्येय माना. अपने अभिन्न सखा पं. दीनदयाल उपाध्याय की अकाल मृत्यु के बाद पण्डित जी के विचारों को व्यवहारिक धरातल पर साकार करने की दृष्टि से पण्डित जी के नाम से दीनदयाल शोध संस्थान रुपी बीज 1968 में रोपित किया जो आज वट वृक्ष बनकर विकास की अलख जगा रहा है.

एनसीसी कंपनी व फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री राजू ने डीआरआई के कामकाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी टीम ने संस्थान का चयन देशभर में बहुत से संगठनों की समीक्षा करने के बाद किया है. नानाजी के नेतृत्व में संस्थान ने जिस तरह ग्राम विकास का मॉडल विकसित किया और उसके आधार पर विकास किया, वह अनुकरणीय है.

January 6th 2020, 6:44 am

चित्र भारती फिल्मोत्सव अहमदाबाद – फिल्मोत्सव की ट्रॉफी का अनावरण

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अहमदाबाद. भारतीय चित्र साधना द्वारा आयोजित चित्र भारती फिल्मोत्सव के तीसरे संस्करण के दौरान विजेताओं को दी जाने वाली ट्रॉफी का अनावरण गुजरात विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में हुआ. इस अवसर पर भारतीय चित्र साधना ट्रस्ट के अध्यक्ष बी.के. कुठियाला, महासचिव राकेश मित्तल, आयोजन समिति के अध्यक्ष अजीत शाह, सचिव सुनील भाई, CREDAI के चैयरमेन जक्षय शाह के साथ गुजरात विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. हिमांशु पांड्या उपस्थित थे.

चित्र भारती फिल्मोत्सव के पहले संस्करण का आयोजन 2016 में इंदौर, तथा दूसरे संस्करण का आयोजन 2018 में दिल्ली में हो चुका है. इस वर्ष 21-22-23 फरवरी को तीसरे संस्करण का आयोजन अहमदाबाद में होने जा रहा है. इस अवसर पर भारतीय चित्र साधना के महासचिव राकेश मित्तल ने भारतीय चित्र साधना के बारे में जानकारी दी, उन्होंने कहा कि फिल्मोत्सव का आयोजन देश में राष्ट्रीय एवं सामाजिक सरोकारों को लेकर फिल्म निर्माण करने वाले फिल्मकारों को सहयोग देने के लिए दो वर्ष में एक बार में किया जाता है.

अहमदाबाद फिल्मोत्सव की आयोजन समिति के अध्यक्ष अजीत भाई शाह ने अहमदाबाद में समारोह को लेकर चल रही तैयारियों को लेकर जानकारी दी.

CREDAI के चैयरमेन जक्षय शाह ने फिल्मों के समाज पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में चर्चा की. उन्होंने शोले फिल्म के संवादों के जरिए किस तरह से मैनेजमेंट की पढ़ाई में छात्रों के व्यवहारिक ट्रेनिंग दी जाती है उस पर चर्चा की.

गुजरात विश्वविद्यालय के उप कुलपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि अहमदाबाद में होने वाले इस फिल्मोत्सव के आयोजन का हिस्सा बनकर गुजरात विश्वविद्यालय अपने आपको गौरवांवित महसूस कर रहा है. उन्होंने सुझाव दिया कि अहमदाबाद में हर साल एक फेस्टीवल का आयोजन किया जाए. समारोह समिति के महासचिव सुनील भाई ने तीन दिन चलने वाले फिल्मोत्सव की जानकारी दी.

January 6th 2020, 5:30 am

जेएऩयू – अभाविप कार्यकर्ताओं पर वामपंथियों द्वारा हमला, 25 से अधिक कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े गुंडों ने बहुत क्रूरतम ढंग से लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया. जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं तथा जेएनयू एसयू चुनाव में अभाविप के प्रत्याशी रहे, अभाविप जेएनयू के वर्तमान में सचिव मनीष जांगिड़ का हाथ वामपंथियों के हमले में टूट गया है.

वामपंथी लगातार कुछ फेक व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉट तथा अपने ही नकाबपोश वामपंथी साथियों को अभाविप का बताकर कुछ तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जो झूठी हैं तथा उनके स्वयं के लोगों की हिंसा में लिप्त होने को उजागर कर रही हैं.

पिछले 3 दिनों से जेएनयू में वामपंथी लगातार गतिरोध बनाए हुए थे तथा वामपंथी गुंडों ने जेएनयू के रजिस्ट्रेशन कर रहे आम छात्रों को बुरी तरह से पीटा तथा उनके हाथ से रजिस्ट्रेशन फॉर्म लेकर फाड़ दिए. जेएनयू में वामपंथी गुंडों ने वर्तमान में पढ़ाई लिखाई का माहौल पूरी तरह से खराब कर दिया है तथा पूरा माहौल लेफ्ट की हिंसा की वजह से भयग्रस्त हो गया है.

अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा कि “जेएनयू में पढ़ रहे अभाविप के कार्यकर्ताओं पर जिस तरह हमला हुआ, वह बहुत ही निंदनीय है. हिंसा का परिसरों में बिल्कुल कोई स्थान नहीं है, लेकिन वामपंथी परिसरों में लगातार हिंसा फैला रहे हैं, जिससे आम छात्र भयभीत है. अभाविप प्रशासन से मांग करती है कि हिंसा में संलिप्त वामपंथी गुंडों के खिलाफ त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई की जाए.”

January 6th 2020, 3:57 am

संस्कृत के प्रचार-प्रसार में भारती पत्रिका का अविस्मरणीय योगदान – राघवाचार्य वेदांती जी

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जयपुर (विसंकें). रेवासाधाम अग्रपीठाधीश्वर राघवाचार्य वेदांती जी महाराज ने कहा कि संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है और संगणक के लिए यह सबसे उपयुक्त भाषा है. संस्कृत के प्रचार-प्रसार में भारती संस्कृत पत्रिका का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. राघवाचार्य जी रविवार को भारतीय संस्कृत प्रचार संस्थानम् द्वारा संघ कार्यालय भारती भवन में आयोजित भारती संस्कृत के पाठक सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे.

भारती के संस्थापक संपादक व दादाभाई गिरिराज शास्त्री जी की जन्मशताब्दी पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान समय में जब अधिकांश साहित्यिक व सांस्कृतिक लघु पत्रिकाएं अपना अस्तित्व खो चुकी हैं, ऐसे समय में वर्ष 1950 दीपावली से प्रकाशित संस्कृत पत्रिका आज भी संपूर्ण भारत में पढ़ी जा रही है. यह सब दादाभाई गिरिराज शास्त्री की तपस्या का प्रतिफल है. दादाभाई राजस्थान में संघ कार्य की नींव के पत्थर थे, उन्होंने संस्कृत के प्रचार में अविस्मरणीय भूमिका निभाई है.

सम्मानित संस्कृत विद्वान, डॉ. एस. राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बनवारी लाल जी गौड़ ने कहा कि भारती संस्कृत की एक श्रेष्ठ पत्रिका है, जिसके पठन से जीवन की न्यूनताएं दूर होती हैं. इसमें दैनिक जीवन से जुड़ी अनेक बातें मिलती हैं. इसमें प्रकाशित आयुर्वेद स्तम्भ पाठकों के लिए बहुत ही उपयोगी होता है.

कार्यक्रम अध्यक्ष सम्मानित संस्कृत विद्वान एवं भारती के प्रधान संपादक कलानाथ शास्त्री ने कहा कि भारती इस देश की एकमात्र ऐसी संस्कृत पत्रिका है जो बिना किसी व्यवधान के पिछले 70 साल से लगातार प्रकाशित हो रही है. आपातकाल के दौरान भी यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित होती रही है. इसमें पारम्परिक विषयों के साथ ही समसामयिक विषयों पर निरंतर विमर्श होता रहा है.

इससे पूर्व अतिथियों ने भारती के पूर्व संपादक व राजस्थान शिखर साधना पुरस्कार से सम्मानित आचार्य प्यारे मोहन शर्मा का सम्मान पत्र, श्रीफल व शॉल देकर अभिनंदन किया. आचार्य शर्मा ने दादाभाई के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाए. चलचित्र के माध्यम से दादाभाई का जीवन दर्शन प्रदर्शित किया गया.

अतिथियों ने भारती के नवीन अंक का विमोचन किया. इस दौरान पाठक व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे.

January 6th 2020, 3:11 am

पंचनद शोध संस्थान द्वारा पर #CAA गोष्ठी का आयोजन

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कुरुक्षेत्र. पूर्व न्यायाधीश श्याम लाल जांगड़ा जी ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत के किसी नागरिक के खिलाफ नहीं है. ने कुरुक्षेत्र विवि के बीएड कॉलेज में पंचनद शोध संस्थान द्वारा आयोजित गोष्ठी में संबोधित कर रहे थे. उन्होने कहा कि वर्तमान सरकार की कठोर निर्णय लेने की प्रवृत्ति ने देश को सुदृढ़ बनाया है. जनसंख्या नियंत्रण कानून, सिविल कोड, आय से अधिक संपत्ति पर अंकुश को लेकर भी सख्त निर्णय लेने होंगे.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों से प्रताड़ना के शिकार शरणार्थियों की पीड़ा पहले ही सुनी जानी चाहिए थी, जिससे उन्हें पीड़ा का दंश नहीं झेलना पड़ता. लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका. अब उनकी समस्याओं का समाधान हुआ है.

गोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप चौहान ने कहा कि नागरिकता संशोधन नियम का मतलब अपने देश को मेन्टेन करना है जो नागरिक अपने देश से प्यार करता है, वह इस अधिनियम के पक्ष में है. धर्म निरपेक्षता का लबादा ओढ़े कुछ नेता देश का माहौल खराब करना चाहते हैं. भारत को कम्फर्ट जोन मान कर यहां माहौल खराब करते हैं, इस कानून से घुसपैठियों को ही खतरा है नागरिकों को नहीं व यह कानून 100 प्रतिशत भारतीयों के हक़ में है.

मुस्लिम खिदमत मंच, कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष बी.आर. चौहान ने सीएए लागू करने पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया.

 

January 6th 2020, 2:57 am

गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, सिक्खों के साथ मारपीट, घरों पर पत्थर फैंके

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नई दिल्ली. पाकिस्तान में अल्‍पसंख्‍यकों का दमन थमने का नाम नहीं ले रह है. सिक्खों के पवित्र धर्म स्थलों में से एक श्री ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर शुक्रवार को सैकड़ों लोगों की भीड़ ने पत्थरबाजी की. भीड़ ने श्री ननकाना साहिब में रहने वाले सिक्खों के साथ मारपीट की और उनके घरों पर पत्थरबाजी भी की. वहां पर भारी संख्‍या में पुलिस बल तैनात है, मगर हालात तनावपूर्ण हैं.

सोशळ मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक कट्टरपंथी सिक्खों को ननकाना साहिब से भगाने के बारे में कह रहा है, वहीं इस पवित्र शहर का नाम बदलकर गुलाम अली मुस्तफा करने की धमकी दे रहा है. सिक्ख समुदाय के लोग गुरुद्वारे के अंदर फंसे हुए हैं और ननकाना साहिब पर हमले की आशंका से सिक्ख समुदाय के कई लोग घरों में छिपे हुए हैं.

पिछले साल ज्ञानी भगवान सिंह की बेटी जगजीत कौर का अपहरण कर उसका धर्मांतरण करवाने वाले मोहम्मद हसन के रिश्तेदार राणा मंसूर ने भीड़ को उकसाया और ननकाना साहिब के गेट पर पथराव किया. घटना उस समय हुई, जब मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज अदा करने के बाद घर लौट रहे थे. ननकाना साहिब में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ननकाना साहिब के मुख्य बाजार में हल्ला किया.

भीड़ ने श्री ननकाना साहब में रहने वाले सिक्खों के घरों पर पत्थर मारे. राणा मंसूर ने धमकी दी कि इस शहर का नाम बदल कर ग़ुलाम-ए-मुस्तफा कर दिया जाएगा. राणा मंसूर ने ललकारते हुए कहा कि ननकाना साहिब से सिक्खों को बाहर निकाला जाएगा.

January 4th 2020, 7:11 am

धर्म समन्वित और संतुलित तरीके से जीवन जीने का तरीका है – डॉ. मोहन भागवत

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इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने शांतादेवी रामकृष्ण विजयवर्गीय न्यास का लोकार्पण किया. विजयवर्गीय परिवार द्वारा संचालित न्यास गरीब बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में काम करता है.

लोकार्पण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि ‘हिन्दू समाज ने प्राचीन समय से लेकर आज तक कई बातें झेली हैं, तो कई उपलब्धियां भी हासिल की हैं. गत पांच हजार वर्षों में आए उतार-चढ़ावों के बावजूद हिन्दू समाज के प्राचीन जीवन मूल्य भारत में आज भी प्रत्यक्ष तौर पर देखने को मिलते हैं’.

उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ देशों की संस्कृति के प्राचीन जीवन मूल्य मिट गए. कई देशों का तो नाम ही मिट चुका है. परंतु हमारे जीवन मूल्य अब तक नहीं बदले हैं. जैसा हजारों वर्ष पहले था, वैसा ही आज भी दिखता है. इसलिए इकबाल ने कहा – यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहां से…. कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.

…और यह बात है – हमारा धर्म. यहां धर्म से तात्पर्य किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि मनुष्यों के सह अस्तित्व से जुड़े मूल्यों से है. इतिहास के उतार-चढ़ाव को पार कर समाज चलता है, धर्म का मतलब संप्रदाय से नहीं है, बल्कि उन तत्वों से है, जिससे समाज जुड़ता है.

धर्म समन्वित और संतुलित तरीके से जीवन जीने का तरीका है, जिसमें महत्व इस बात का है कि हम दूसरों को क्या दे रहे हैं और उनके भले के लिए क्या कर रहे हैं? परोपकार की भावना पर बल देते हुए कहा कि भौतिकता के तमाम बदलावों के बावजूद जीवन में देने का महत्व है, भारत में दान की परंपरा हमेशा जीवंत रहनी चाहिए…..

January 4th 2020, 3:41 am

Tamil Nadu – Pakistan link emerges to anti-CAA protests in state

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In Tamil Nadu the DMK let anti-CAA protest has turned quirkier with the hand of Pakistan surfacing after a woman was detained by the police. This is not the first time the involvement of foreign link has been suspected in protests in Tamil Nadu. During Jallikattu protests at Marina, Muslim protesters were seen holding posters eulogizing Osama Bin Laden and were seen performing namaz during the protests. Anti-India and anti-Modi slogans were also raised. Now it seems, the anti-India forces have gained a stronger foothold in Tamil Nadu which are encashing the political vacuum caused by the demise of Jayalalitha.

According to sources in the intelligence agencies, after the abrogation of Article 370 Pak based groups have now set up their shop in Tamil Nadu by exploiting the fringe outfits, power craving DMK, Left, anti- national Tamil fundamentalists and Naxal groups. Christian supported NGOs too pour in their might. Now, the link between these elements and Pak based elements are slowly emerging after the arrest of women who were part of anti-CAA protests in Chennai.

During the month of Markazhi, women in Tamil Nadu in reverence for Saint Andal draw Kolams (Rangoli) early in the morning. But the DMK found this an opportunity to extend their anti-CAA protest. The party gave a call to women to draw “No CAA, No NRC” message before the Kolams. When some women supporters of the DMK indulged in the shameful method of protest using Hindu tradition, the irked house owners lodged a police complaint. The police arrested the women who used a Hindu tradition to make a political statement and disturb the peace in the locality. The DMK which abhors anything that is Hindu shamefully used a Hindu tradition for its cheap politics.

The women who were later released, went straight to DMK headquarters to meet MK Stalin and Kanimozhi and posed for photographs. The Left, VCK, and Congress criticized the police action. This led to Police to come out with an explanation.

Anti-CAA protester linked to Pakistan

In a press conference, City Police Commissioner AK Viswanathan said that they arrested the women activists only after the owner lodged a complaint and they did not act on their own. He then dropped a bomb saying that one of the women activists arrested has a Pakistani link. He said one of the activists, Gayathri Kandhadai, is a researcher for Bytes for All (B4A) Pakistan which is part of The Association of All Pakistan Citizen Journalists (AAPCJ) based in Pakistan. She was among the eight activists who were detained on 29th December by police for drawing political Kolams.

The website of B4A Pakistan says it is human rights organization and a research think tank with a focus on information and communication technologies. Further probe into Gayathri Kandhadai’s antecedents revealed that she is also the project coordinator for Pakistan Advocacy for change through Technology with the Association for Progressive Communications (APC). She also has the support of Welfare Party of India, Arappor Iyakkam (Left based Anti-corruption movement) and Campus Front of India – A Muslim Fundamentalist Organisation.

Speaking to the media, one of her former classmates has informed that she might have been misguided by Pakistani authorities while she was in Costa Rica where she went for PG UNESCO Mission. Her Facebook posts and tweets make it amply clear about her pro-Pak and anti-India agenda. It is now alleged that she has links with the Pakistan foreign office, several foreign NGOs and is also funded by Swedish International Development Cooperation Agency (SIDA).

Courtesy – Organiser

January 4th 2020, 2:34 am

#CAA – विरोध के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता

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शिमला (विसंकें). सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक केसी सडयाल ने कहा कि देश में कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए नागरिकता कानून के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं. नागरिकता संशोधन कानून के कारण किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं छिनेगी, बल्कि इस कानून से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए (पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से) अल्पसंख्यकों को नागरिकता मिलेगी. केसी सडयाल उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे. नागरिकता संशोधन कानून – 2019 को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए संगोष्ठी का आयोजन किया था. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश महाधिवक्ता अशोक शर्मा ने की.

मुख्य वक्ता केसी सडयाल ने कहा कि तीन देशों में हिन्दुओं की संख्या में लगातार गिरावट आई. 1952 में नेहरू लियाकत समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत और पाकिस्तान में इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों देश अपने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करेंगे. भारत ने तो इस समझौते का पालन किया, जबकि पाकिस्तान ने लगातार समझौते के प्रावधानों का उल्लघंन किया. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गयी थी. खुलेआम मानवाधिकारों का उल्लघंन हो रहा था. हिन्दुओं को अगर शादी भी करनी होती थी तो उनको बंद कमरे में सारी रस्मों एवं रिवाजों को पूरा करना पड़ता था. उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए इस कानून का विरोध करने वालों की निंदा की, चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ लोग केवल अपने स्वार्थों की चिंता करते हैं, जिस कारण वे इस कानून के नाम पर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. सीएए के नाम पर उपद्रव करने वाले करीब 2000 उपद्रवियों को नोटिस किए जा चुके हैं, जिनसे भविष्य में नुकसान की वसूली संभव है.

कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक शर्मा ने कानून के प्रावधानों को विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि यह कानून भारत के किसी भी नागरिक के विरोध में नहीं है. देश का संविधान सर्वोच्च है, अगर किसी को इस कानून के प्रावधानों से कोई आपति है तो इसके लिए वह संविधान के तहत शांतिपूर्वक अपना प्रतिरोध जता सकता है. विरोध के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता.

January 3rd 2020, 8:35 am

‘हिन्दुत्व में देश को जोड़ने की ताकत’ – डॉ. कृष्णगोपाल जी

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ब्रेक इंडिया ब्रिगेड देश को तोड़ने में जुटी है – जे. नंदकुमार जी नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि देश को जोड़ने की ताकत केवल हिन्दुत्व में ही है. देश में बोलने की आजादी, बिना डरे सवाल खड़ा करने की आजादी और किसी से असहमति व्यक्त करने की आजादी है क्योंकि इस देश का मूल भाव हिन्दुत्व है. इसीलिए यह संभव हो पाया है. उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व ही भारत को एक रखता है. एकत्व की कमी के कारण ही सोवियत संघ, यूगोस्लाविया बिखर गए और पाकिस्तान के भी दो टुकड़े हुए. पाकिस्तान अभी और टूटेगा, तीन और देश बनेंगे, मगर 560 रियासतों को जोड़कर बना हिन्दुस्तान अभी भी एकजुट है, इसका मूल भी हिन्दुत्व है. वे प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी द्वारा लिखित पुस्तक Hindutva - For the Changing Times के लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन 02 जनवरी को सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में किया गया था. सह सरकार्यवाह ने कहा कि हिन्दुस्तान में किसी को कोई भी पूजा पद्धति अपनाने का अधिकार है. कोई भी किसी भी उपासना पद्धति को अपना सकता है, उसे पूरी आजादी है. उन्होंने कहा कि जो देश और देश के लोगों के हित की बात करता है, उनके बारे में अच्छा सोचता है, मान लेना चाहिए कि वह हिन्दू है. उन्होंने कहा कि जहां प्रश्न करने, निर्भीक सवाल करने की आजादी हो वह हिन्दुत्व है और जहां सवाल करने की आजादी नहीं है, वह हिन्दुत्व नहीं है. अगर कोई यह कहता है कि हिन्दुस्तान में एक ही भाषा, एक ही धर्म, एक ही पूजा पद्धति, एक ही बोली है, तो यह कदापि ठीक नहीं है. यहां अलग-अलग भाषाओं, अलग-अलग पूजा पद्धतियों को मानने वाले लोग रहते हैं. प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि आज देश में हिन्दुत्व और हिन्दू शब्द को जानबूझकर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है. हिन्दुत्व का मतलब सिर्फ हिन्दू धर्म नहीं होता. पश्चिम बंगाल और केरल में हिन्दुओं पर खतरा मंडरा रहा है. पश्चिम बंगाल में सामाजिक बदलाव हो रहा है. नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के नाम पर हो रही हिंसा के पीछे केरल के प्रशिक्षित बौद्धिक लोग काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ब्रेक इंडिया ब्रिगेड देश को तोड़ने में जुटी हुई है. देश के भीतर ही युद्ध छेड़ने की कोशिश की जा रही है. 'Hindutva For The Changing Times' पुस्तक में कुछ भी भावनाओं में बहकर नहीं लिखा गया, बल्कि तथ्यों के आधार पर लिखा गया है. नंदकुमार जी ने कहा कि बंगाल का रंग बदला जा रहा है. एक खास धर्म के लोगों को लाकर बसाया गया है. पाठ्यक्रमों से हिन्दुओं से जुड़े शब्द बदले जा रहे हैं. हिन्दुओं के त्यौहारों पर रोक लगाई जा रही है.  

January 3rd 2020, 7:05 am

नागरिकता संशोधन अधिनियम – संभ्रम से सच की ओर कार्यक्रम 05 जनवरी को

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नई दिल्ली. लोकसभा व राज्यसभा ने दिसम्बर में स्पष्ट बहुमत से नागरिकता संशोधन विधेयक को अधिनियम बनाया…. स्वाभाविक रूप से सम्पूर्ण देश में इस घटना के परिणाम देखने को मिले. विपक्षियों ने जहाँ एक ओर सरकार पर प्रक्रिया उल्लंघन जैसे अन्य गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर देशभर में एक सुनियोजित तरीके से हिंसा एवं द्वेष फैलाने का प्रया भी किया गया. जिनका उद्देश्य देश में अस्थिरता, अराजकता एवं अफवाह फैलाना था, जिससे सरकार की बदनामी हो और इसका राजनीतिक लाभ विरोधी पक्षों को मिले. राजनीतिक लाभ पाने के लिए उन ताकतों ने देश की सामान्य जनता का उपयोग किया. जनता को इस अधिनियम की पूर्णः गलत व भ्रामक जानकारी दी गई, जिससे स्थिति और भी उलझी और तनावपूर्ण होती गई.

विश्व हिन्दू परिषद ने इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए देश के सामाजिक संगठनों से आह्वान किया था कि अपने-अपने स्तर पर सभी संस्थाएं अधिनियम के सन्दर्भ में जन-जागरूकता अभियान चलाएं. इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए विश्व हिन्दू परिषद इन्द्रप्रस्थ प्रांत, दिल्ली ने 05 जनवरी को नागरिकता संशोधन अधिनियम – संभ्रम से सच की ओर कार्यक्रम का आयोजन किया है. सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में दोपहर 12.30 बजे से प्रारम्भ होने वाले कार्यक्रम में सुलगते हुए समकालीन विषय पर संवेदनशील संवाद साधने हेतु केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश जी, विहिप कार्याध्यक्ष अध्यक्ष आलोक कुमार जी, विहिप केन्द्रीय मंत्री प्रशांत हरतालकर जी तथा हिन्दू-सिक्ख-बौद्ध-जैन समाज के पूजनीय संत उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता एलिट सर्किल व साधना टीवी समूह के चेयरमैन राकेश गुप्ता जी करेंगे.

अफगानी-सिक्ख शरणार्थी, बलूचिस्तानी-हिन्दू शरणार्थी एवं मजनूं का टीला, आदर्श नगर, रोहिणी सेक्टर 11, रोहिणी सेक्टर 25 और अंडर सिग्नेचर ब्रिज, 05 शिविरों के पाक-हिन्दू शरणार्थी, विशेष रूप से उपस्थित रह कर अपने मन की बात कहेंगे. साथ ही नागरिकता प्रदान करवाने के सतत प्रयासों के लिए विहिप और सरकार के प्रति आभार प्रकट करेंगे. ऐसा आयोजन देश में संभवतः पहली बार हो रहा है.

संयोजन समिति ने नागरिकों से कार्यक्रम में उपस्थित रहकर नागरिकता संशोधन अधिनियम के सच को जानने और देश विरोधी ताकतों द्वारा फैलाये गए संभ्रम और अफवाहों को जड़ से नष्ट करने की अपील की है.

वागीश इस्सर

कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद्, दिल्ली

January 3rd 2020, 6:05 am

भारत का स्वभाव धर्म है

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2019 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद वामपंथी खेमे के कहे जाने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझसे पूछा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी क्यों हुई? यह आकस्मिक प्रश्न था. मैंने प्रतिप्रश्न किया - कांग्रेस का पूरा नाम क्या है? वे इस प्रश्न के लिए तैयार नहीं थे. थोड़ा सोच कर उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस. मैंने कहा - भारतीय का अर्थ तो हुआ ‘सम्पूर्ण भारत व्यापी’ और भारत के लिए. फिर राष्ट्रीय का अर्थ क्या हुआ? वे कुछ बोल नहीं पाए. मैंने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारतीय संदर्भ में ‘राष्ट्र’ का अर्थ ‘समाज’ होता है. भारतीय समाज की कुछ विशेषताएं हज़ारों वर्षों की सामाजिक यात्रा के कारण, उसकी पहचान बन गयी है. इस पहचान को बनाए रखना और पुष्ट करने का अर्थ है राष्ट्रीय होना. कांग्रेस की स्थापना के करीब 20 वर्ष के बाद कांग्रेस ने ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन का रूप लिया. तब कांग्रेस के सभी नेता इस राष्ट्रीय विचार के थे. इस राष्ट्र की यानि भारत के परम्परागत समाज की विशिष्ट पहचान, जो सदियों की सामूहिक यात्रा के कारण निर्माण हुई थी और अनेक आक्रमण तथा संघर्षों के बाद भी टिकी हुई थी, उसके साथ ये राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता गर्व के साथ खड़े थे. भारत के व्यक्तित्व के चार लक्षण भारत का माने भारत के समाज का एक वैचारिक अधिष्ठान है, जिसका आधार आध्यात्मिक (Spiritual) है. इस के कारण सदियों की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत का एक व्यक्तित्व बना है. और इसी आध्यात्मिकता के कारण भारत का एक स्वभाव बना है. भारत की विशाल एवं बृहत् भौगोलिक इकाई में रहने वाला, विविध जाति-पंथ-भाषा के नाम से जाना जाने वाला यह सम्पूर्ण समाज, भारत की इन विशेषताओं को सांझा करता है. भारत के व्यक्तित्व के चार पहलू हैं. पहला है, “एकम् सत् विप्राः बहुधा वदन्ति”. ईश्वर के नाम और उन तक पहुँचने के मार्ग विभिन्न दिखने पर भी एक हैं, समान हैं. भारत ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया है. इसीलिए स्वामी विवेकानंद ने अपने शिकागो व्याख्यान में यह कहा था कि हम केवल सहिष्णुता नहीं, बल्कि सभी मार्गों को सत्य मानकर उनका सम्मान और स्वीकार करते हैं. आगे उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि मैं ऐसे देश से आया हूँ, जिसकी अपनी भाषा, संस्कृत में ‘Exclusion’ का पर्यायी शब्द ही नहीं है. दूसरा पहलू है, विविधता के मूल में रही एकता की अनुभूति करना. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने लिखा है कि “अनेकता में एकता देखना और विविधता में ऐक्य प्रस्थापित करना, यही भारत का अंतर्निहित धर्म है. भारत विविधता को भेद नहीं मानता और पराए को दुश्मन नहीं समझता. इसीलिए, नए मानव समूह के संघात से हम भयभीत नहीं होंगे. उनकी विशेषता को पहचान कर, उसे सुरक्षित रखते हुए उन्हें अपने साथ लेने की विलक्षण क्षमता भारत रखता है.” तीसरी विशेषता यह कि, भारत मानता है कि प्रत्येक व्यक्ति में, फिर स्त्री हो या पुरुष, ईश्वर का अंश है, और मनुष्य जीवन का लक्ष्य अपने अंतर्गत एवं बाह्य प्रकृति का नियमन कर, इस सुप्त ईश्वरत्व को अभिव्यक्त करना यह है. इसके लिए कर्म, भक्ति, ध्यान या ज्ञान इसमें से कोई भी एक अथवा अनेक अथवा सभी मार्गों का अनुसरण कर ‘मुक्त’ होना यह है. इसीलिए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थ की कल्पना भारत ने की है. यहां अर्थ और काम का निषेध नहीं है; धर्म सम्मत मार्ग से उसका पूर्ण सम्पादन करते हुए ‘मुक्त’ होने को यहां पूर्ण या सार्थक जीवन माना गया है. चौथा लक्षण, यहां प्रत्येक व्यक्ति को अपना अपना ‘मुक्ति’ का मार्ग चुनने का स्वातंत्र्य होना यह है. मेरी रूचि और प्रकृति के अनुसार मैं कर्म मार्ग, भक्ति मार्ग, ध्यान अथवा ज्ञान मार्ग में से कोई भी एक अथवा अनेक या सभी का एकत्र उपयोग कर सकता हूँ. मेरी इच्छा, रुचि और क्षमता के अनुसार इन चारों मार्गों का मेरा सम्मिश्रण (Composition) चुनने का स्वातंत्र्य भारत मुझे देता है. इसीलिए यहाँ, भारत में, आध्यात्मिक लोकतंत्र (Spiritual Democracy) है. इसके बाद की चर्चा जिन बिंदुओं पर बढ़ी वह भारत, इसकी पहचान, इसके स्वभाव और राष्ट्र शब्द की विस्तृत व्याख्याओं से जुड़े थे. भारत का स्वभाव धर्म भारत का स्वभाव धर्म है. यह धर्म ‘Religion’ अथवा उपासना नहीं है. अपनी संवेदनाओं का विस्तार करते हुए ‘अपनेपन’ का दायरा फैलाते हुए, जो अपने लगते हैं (जो रूढ़ार्थ से अपने नहीं है) उनके लिए, उनके भले के लिए कृति करना यह ‘धर्म’ है. ‘धर्म’ यह कोई चिन्ह धारण करना, कोई विशिष्ट पहचान धारण करना या उसका प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि प्रत्यक्ष कृति करना, आचरण करना धर्म कहा गया है. अंतर समझिए - मंदिर में जाना, भगवान की पूजा करना, व्रत करना इत्यादि धर्म नहीं, उपासना है. उपासना करने से धर्म का आचरण करने के लिए शक्ति मिलती है. इसलिए यह उपासना ‘धर्म’ के लिए है, ‘धर्म’ नहीं है. ‘धर्म’ तो समाज को अपना समझ कर देना है. यह धर्म संकल्पना ‘भारत’ की है. भारत की प्रत्येक भाषा के अभिजात और लोकसाहित्य में इसका वर्णन विपुलता से मिलता है. भारत बाह्य किसी भी भाषा में इसके लिए पर्यायी शब्द नहीं है. इसीलिए अंग्रेजी में ’धर्म’ यही शब्द का प्रयोग करना ही ठीक होगा. इसे Religion कहना गलत है. उपासना के विभिन्न प्रकारों को Religion कह सकते है. आंखें खोलिये और ‘मैं’ को छोटा कीजिये तो ‘हम’ का दायरा विस्तृत होते जाता है. इस ‘हम’ की परिधि विस्तृत होते होते, मेरे सिवाय मेरा कुटुंब, परिवार, सगे-सम्बन्धी, मित्र, गांव, जिला, राज्य, देश, मानव समाज, पशु-पक्षी, प्रकृति-निसर्ग, सम्पूर्ण चराचर सृष्टि ऐसा क्रमशः व्यापक होते जाता है. ईशावास्यमिदं सर्वम् यत्किञ्च जगत्यां जगत्. तेन त्यक्तेन भुन्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद धनम्॥ इस भाव और अनुभूति का आधार यही आध्यात्मिकता आधारित अपनापन है. पेड़-पौधे-वनचर सभी हमें अपने सगे लगने लगते है, यह भी इसी की अभिव्यक्ति है. विद्या प्राप्त करने की इच्छा वालों को विद्या देना, प्यासे को पानी, भूखे को रोटी, निराश्रित को आश्रय, रोगी को दवाई देना ये सब धर्म कार्य माना गया है. इसीलिए धर्मशाला, धर्मार्थ अस्पताल ऐसे शब्द प्रचलित हैं. तीर्थ क्षेत्र में घाट बनवाना, तालाब बनवाना, रास्तों पर वृक्ष लगवाना, शारीरिक अक्षम लोगों को सहायता करना ये सब कर्त्तव्य भाव से करना ‘धर्म’ है. इसीलिए धर्म का एक वर्णन कर्तव्य भी कर सकते हैं. धर्म माने बिना भेदभाव परस्पर सहयोग से सामाजिक समृद्धि को बढ़ाना है. भगिनी निवेदिता ने कहा है - जिस समाज में लोग, अपने परिश्रम का पारिश्रमिक अपने ही पास न रखकर समाज को देते हैं, ऐसे समाज के पास एकत्र हुई पूंजी के आधार पर समाज संपन्न और समृद्ध बनता है और परिणामतः समाज का प्रत्येक व्यक्ति संपन्न-समृद्ध बनता है. परन्तु जिस समाज में लोग अपने परिश्रम का पारिश्रमिक समाज को न दे कर अपने ही पास रखते हैं, उस समाज में कुछ लोग तो संपन्न और समृद्ध होते हैं, पर समाज दरिद्री रहता है. जो सहायता करते समय भेदभाव करता है वह ‘धर्म’ हो ही नहीं सकता. धर्म समाज को जोड़ता है, जोड़े रखता है. इसीलिए धर्म की एक परिभाषा ‘जो धारणा करता है वह ‘धर्म’ है’  ऐसी भी की गयी है. धारणाद् धर्ममित्याहुः धर्मो धारयते प्रजाः. समाज से हम जितना लेते हैं, उससे अधिक समाज को लौटाने से धर्म वृद्धिंगत होता है. विवेकानंद केंद्र की प्रार्थना में एक श्लोक है – जीवने यावदादानं स्यात्  प्रदानं ततोऽधिकम्. इत्येषा प्रार्थनास्माकं भगवन् परिपूर्यताम्॥ (जीवन में जितना मैं प्राप्त करता हूँ, उससे अधिक मैं समाज को वापिस लौटा सकूँ यह मेरी प्रार्थना, हे भगवान! तू पूर्ण कर.) रवीन्द्रनाथ टैगोर ने स्वदेशी समाज नामक अपने निबंध में यह स्पष्ट प्रतिपादित किया है कि ‘Welfare State’ कल्याणकारी राज्य यह भारतीय संकल्पना नहीं है. वे आगे कहते हैं - जो समाज अपनी आवश्यकताओं के लिए राज्य पर कम से कम अवलम्बित होता है, वह ‘स्वदेशी समाज’ है. इसलिए भारत में सामाजिक (initiative) पहल तथा सामाजिक सहभागिता का महत्त्व है. इसकी व्यवस्था धर्म करता रहा है. इसीलिए अपना समाज धर्माधिष्ठित था और रहेगा. धर्मनिरपेक्ष नहीं. धर्मचक्रप्रवर्तनाय भारत के संविधान निर्मिति के समय संविधान समिति के सदस्यों को इस ‘धर्म’ तत्व का योग्य आंकलन तथा जानकारी थी, ऐसा स्पष्ट दिखता है. इसीलिए सर्वोच्च न्यायलय का बोधवाक्य यतो धर्मस्ततो जयः यह है. लोकसभा में धर्मचक्र प्रवर्तनाय ऐसा लिखा है. राज्य सभा में सत्यं वद धर्मं चर. यह लिखा है. केवल यही नहीं. अपने राष्ट्रध्वज पर जो चक्र अंकित है, वह ‘धर्म चक्र’ है. चक्र घूमते रहने के लिए ही होता है. उसके घूमते रहने के लिए प्रत्येक व्यक्ति द्वारा ‘धर्म’ आचरण करना, सम्पूर्ण समाज एक है, मेरा अपना है यह मान कर किसी भी प्रकार का भेदभाव किये बिना समाज देते रहना, आवश्यक है. ऐसा प्रत्येक कार्य छोटा सा भले क्यों न हो, धर्मचक्र को घूमता रखने के लिए सहायक है और हरेक को यह करना चाहिए. 1988 में गुजरात के कुछ हिस्से में भीषण अकाल था. मैं तब वड़ोदरा में प्रचारक था. अकालग्रस्त क्षेत्र में भेजने के लिए ‘सुखड़ी’, एक पौष्टिक पदार्थ, घर-घर बनवाकर संघ कार्यालय में एकत्र हो रहा था. एक दिन एक वृद्धा-भिखारन लकड़ी के सहारे चलते हुए वहाँ आयी. वहां कार्यकर्ता ने उससे जब पूछताछ की तो क्षीण आवाज में उसने कहा ‘सुखडी’! उस कार्यकर्ता ने उसे कहा माताजी! यह सुखड़ी, उधर अकालग्रस्त विस्तार में भेजने के लिए है, यहाँ के लिए नहीं है. तब उस वृद्धा ने अपनी साड़ी में समेटी एक पुड़िया निकाल कर देते हुए कहा - बेटा! मैं मांगने नहीं, देने के लिए आयी हूँ. अपनी दिनभर की भिक्षा में से थोड़ी सुखड़ी बनाकर वह देने के लिए आई थी. ऐसे छोटे छोटे कृत्यों द्वारा धर्म पुष्ट होता है और धर्मचक्रप्रवर्तन होता रहता है. कुछ वर्ष पूर्व तमिलनाडु के तिरुपुर शहर में ‘सक्षम’ संस्था द्वारा केंद्र सरकार की सहायता से एक दिव्यांग सहायता शिविर आयोजित हुआ था. ’सक्षम’ दिव्यांग लोगों के लिए उनके बीच कार्य करने वाली संघ प्रेरित संस्था है. दिव्यांगों को सहायता और साधन देने हेतु इस शिविर का आयोजन हुआ था. सहायता देने हेतु शारीरिक परीक्षण का कार्य चल रहा था और सैकड़ों दिव्यांग बंधु-भगिनी बस स्थानक से वहां आ रहे थे. उन्हें लेकर आने वाले एक ऑटो चालक ने जब थोड़ा अंदर झांक कर देखा तो उसकी संवेदना जागी. उसने शिविर में आने वाले दिव्यांगों को दिन भर मुफ्त सेवा दी. राष्ट्र का हिन्दू होना यह जो भारत का वैचारिक अधिष्ठान, उसके कारण बना हुआ उसका व्यक्तित्व और उसका स्वभाव है, इसे दुनिया ‘हिन्दुत्व’ के नाम से जानती है. इसलिए भारत की, भारतीय समाज की माने इस राष्ट्र की पहचान दुनिया में ‘हिन्दू’ यह है. इस अर्थ से यह समाज माने राष्ट्र हिन्दू है. इसलिए यह हिन्दू राष्ट्र है. यह हिन्दुत्व सबको जोड़ने वाला, सबको साथ लेकर चलने वाला, किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने वाला ऐसा ही रहा है और आगे भी रहने वाला है. हिन्दुत्व इस राष्ट्र का विशेषण है. हिन्दुत्व सभी भारतीयों के व्यक्तिगत, पारिवारिक, व्यावसायिक तथा सामाजिक जीवन में अभिव्यक्त होना, सहज आचरण में आना, माने इस राष्ट्र का ‘हिन्दू’ होना है. सामाजिक समृद्धि को बढ़ाते हुए उसका विनियोग किसी भी प्रकार के भेदभाव किये बिना सभी ज़रूरतमन्द लोगों के लिए होता रहे, ऐसा धर्म आचरण करना ही हिन्दू राष्ट्र बनना है. जिन पूर्वज, पराक्रमी पुरुष, समाज सुधारक, साधु-संतों के कारण, अनेक संघर्ष एवं आक्रमणों का सामना करता हुआ यह राष्ट्रीय प्रवाह अबाधित प्रवाहित होता रहा, उनका सम्मान करना, यह ‘हिन्दू’ होना है. जिस भारत की पवित्र भूमि में यह श्रेष्ठ विचार उत्पन्न हुआ, स्थिर हुआ, दृढ़ हुआ और यह श्रेष्ठ संस्कृति विकसित हुई, उस भारत भूमि को ‘मातृवत्’ मानकर भारत की भक्ति करना, यह ‘हिन्दू’ होना है. यह कार्य किसी भी राजनैतिक सत्ता या सरकार का नहीं है, तो समाज के प्रत्येक घटक का है. सर्वेऽपि सुखिनः सन्तु सर्वे सन्तु निरामयाः. सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्‍चित् दुःखमाप्नुयात्॥ इसमें ‘अपि’ में, बाल, वृद्ध, रुग्ण, अशक्त, गुणहीन ये सब आते हैं. ये सभी सुखी हों, इसकी गारंटी ‘धर्म‘ देता है, जिसका प्रत्येक को आचरण करना है. राष्ट्रीय होना भारत का समूचा समाज एक है, मेरा-अपना है. सभी समान है और मुझे मेरे समाज को कर्तव्यभाव से, अपना समझ कर देते रहना है, ऐसा विचार करना और वैसा आचरण करना, माने  राष्ट्रीय होना - हिन्दू होना है. हम हिन्दू होने के कारण, यह समाज माने राष्ट्र ‘हिन्दू’ है, यह कालातीत सत्य है. हमारा हिन्दू राष्ट्र है, ऐसा उद्घोष करने का यही अर्थ है. इस में किसी का अधिक्षेप, अपमान होने का, किसी के भयग्रस्त होने का प्रश्न ही नहीं उठता है. विविधता से सम्पन्न, अनेक भाषा बोलने वाला, विविध उपासना पंथों का अनुसरण करने वाला भारत का यह राष्ट्रीय समाज, हम सब एक है, विविधता यह भेद ना हो कर हमारा वैशिष्ट्य है, ऐसा मान कर, विश्व में आनंद, सौहार्द और सामंजस्य के साथ सैकड़ों वर्षों से रह रहा है. आवागमन के तथा संदेश व्यवहार के आधुनिक साधनों के कारण अब दुनिया बहुत क़रीब आ गयी है. दुनिया में भाषा, वंश, उपासना (रिलिजन) विचार का वैविध्य रहने वाला ही है. इस विविधता के मूल में रही एकता को देखने की दृष्टि भारत के पास है. कारण ईशावास्यमिदं’ यह भारत का ‘घोषवाक्य’ है. ‘तेन त्यक्तेन भुंजीथाः और मा गृधः यह आचरणसूत्र है. इसी के कारण ‘धर्म’ के बलवान बन कर सभी के सुख का प्रावधान हो सकता है. भारत शतकों से ऐसा जीता आ रहा है. इसीलिए, वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्वम् भवत्येक नीडम् यह भारत ने प्रस्थापित किया है. भारत अपने हिन्दुत्व का पूर्ण आचरण करते हुए इसका उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि वैविध्यपूर्ण व विश्वव्यापी मानव समूह के लिए सौहार्द और सामंजस्य के साथ एकत्र कैसे जी सकते हैं, चल सकते हैं. यह भारत का कर्तव्य और दुनिया की आवश्यकता भी है. ऐसा भारत गढ़ना माने भारत विश्वगुरु बनना है. ‘गुरु’ केवल घोषणा करने से नहीं, पर आचरण से सिद्ध होता है. इस श्रेष्ठतम कार्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लगा हुआ है. यही संघ का उद्देश्य और अस्तित्व का कारण भी है. संघ के आरम्भ के एक प्रचारक ने, संघ के बारे में जो कहा वह अत्यंत सार्थक और सारगर्भित है. उन्होंने कहा - RSS is the evolution of the life mission of this Hindu nation. (इस हिन्दू राष्ट्र का माने हिन्दू समाज का जीवन दायित्व पूर्ण करने हेतु उसे सक्षम एवं विकसित करने का कार्य है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.) राष्ट्रीय या राष्ट्रवादी इस “राष्ट्रीय” होने को कुछ लोग “राष्ट्रवादी" होना ऐसा भी कहते हैं, जो अनुचित है. राष्ट्रवाद यह शब्द और संकल्पना भारतीय नहीं है. पश्चिम में 16वीं शताब्दी में जो राष्ट्र संकल्पना निर्मित हुई वह भारतीय ‘राष्ट्र’ संकल्पना से एकदम भिन्न है. वहाँ, राष्ट्र (Nation) राज्याधारित है और उन्होंने अपने राज्य विस्तार के लिए युद्ध, आक्रमण, अत्याचार-हिंसा की है. भारतीय ‘राष्ट्र’ संकल्पना राज्याधारित नहीं, समाजाधारित है, जिसका आधार एक संस्कृति अथवा समान जीवनदृष्टि यह है. इसीलिए राज्यकर्ता अनेक और विविध होने के बावजूद यह समाज माने यह राष्ट्र अपनी जीवनदृष्टि के आधार पर सांस्कृतिक दृष्टि से एक है. इसीलिए यहां राष्ट्रीयता (Nationality) है; राष्ट्रवाद (Nationalism) नहीं है. हम राष्ट्रीय (National) हैं, माने हिन्दू हैं; राष्ट्रवादी(Nationalist) नहीं. स्वातंत्र्यपूर्व काल में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बहुतांश नेता और असंख्य कार्यकर्ता इसी “राष्ट्रीय" वृत्ति के थे. आगे कांग्रेस में, साम्यवाद का प्रभाव बढ़ने से, इस “राष्ट्रीय" नेतृत्व को हाशिये पर धकेलने की वृत्ति बढ़ती गयी. 1969 के कांग्रेस पार्टी के विभाजन से यह प्रक्रिया पूर्ण हो कर साम्यवादी विचारों के पूर्ण प्रभाव में, किसी भी प्रकार से सत्ता में आना अथवा सत्ता में बने रहने की दिशा में, कांग्रेस की यात्रा शुरू हुई. इसी कालखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अनेक लोकनेता और साधु-संतों के प्रयास से “राष्ट्रभाव” जागरण का कार्य अधिक गति से हुआ और उसका प्रभाव समाज में दिखने लगा. एक तरफ “राष्ट्रीय” जागरण हो रहा था, जिसके परिणामस्वरूप समाज जाति, पंथ, प्रान्त, भाषा आदि पहचानों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय दृष्टि से विचार और आचरण करने लगा तो दूसरी तरफ, कांग्रेस जाति, पंथ, प्रान्त, भाषा आदि विविधताओं को भेद की तरह प्रस्तुत कर, भावना भड़का कर सत्ता में टिके रहने या सत्ता प्राप्त करने के प्रयासों में उलझी रही. इसके फलस्वरूप, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘राष्ट्रीयता” से किनारा कर दिया, और राष्ट्र जागरण होने से “राष्ट्रीय - जागृत” जनता ने राष्ट्रीयता से दूर हुई कांग्रेस को किनारे लगा दिया. इस लेख के प्रारम्भ में वामपंथी विचार के एक वरिष्ठ संपादक द्वारा पूछे प्रश्न ‘कांग्रेस की स्थिति ऐसी क्यों हुई’ का उत्तर यही तो है. डॉ. मनमोहन वैद्य सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

January 3rd 2020, 5:16 am

तपस्या, समर्पण भक्ति आदि तत्वों को लेकर चलने वाला व्यक्ति जीवन को सक्षम बनाता है – डॉ. मोहन भागवत जी

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अंबाजोगाई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि तपस्या, समर्पण, आत्मनिवेदन और भक्ति, इन तत्वों को लेकर चलने वाला व्यक्ति जीवन को सक्षम बनाता है. लोकसंग्रह करने वाले कार्यकर्ता जीवन का सही मार्ग दिखाकर स्वयं के अनुकरण व आचरण से समाज को मार्ग दिखाते हैं. आत्मीयता और अपनापन ही विश्व का सत्य है. संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति के महासचिव डॉ. शरद जी हेबालकर का अमृत महोत्सव कार्यक्रम सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी और राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांताक्का जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ. सरसंघचालक जी ने डॉ. शरदजी हेबालकर को शुभकामना देते हुए भारत की संस्कृति  का तत्वज्ञान बताया, कहा कि मानव और पशु में मानव को ही ईश्वर ने विचार करने का वरदान दिया है. यह विचार व्यक्ति को स्वयं के जीवन को समृद्ध करने हेतु आचरण में लाना चाहिए. जीवन का आत्मावलोकन करते हुए हम कहां पर हैं, इसका आत्म परीक्षण करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जीवन में आत्मीयता और अपनेपन का बड़ा महत्व होता है. यह गुण जीवन को आनंददायी और सफल बनाता है. लोकसंग्रह करने वाले कार्यकर्ता व्यक्ति का जीवन  समाज को सही मार्ग दिखाता है. सूर्य जिस प्रकार स्वयं प्रकाशित होकर अंधेरा दूर करता है, इसी तरह मानव को भी सूर्य जैसा आदर्श निर्माण कर धर्म की राह पर चलना चाहिए. तत्वपूर्ण जीवन ही धर्म होता है जो व्यक्ति धर्म के आधार पर जीवन व्यतीत करता है, वह व्यक्ति अर्थ और कामना विरहित सफल जीवन व्यतीत करता है. डॉ.शरदजी हेबालकर ने भी धर्म की राह पर चलते हुए स्वयं के जीवन को सार्थक किया. राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांतक्का जी और शरद हेबालकर जी ने भी विचार रखे. गंगाखेड के सोमयजी यज्ञेश्वर महाराज सेलूकर जी द्वारा शांति यज्ञ संपन्न करवाया गया. हिन्दुओं के इतिहास एवं हिन्दू धर्म के विस्तार की जानकारी देने वाले वेब पोर्टल का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने लोकार्पण किया. सोमवार, 30 दिसंबर को कार्यक्रम संपन्न हुआ. http://hindushistory.com नाम से यह वेबपोर्टल शुरू किया गया है. वेबपोर्टल पर अनुसंधान निबंध, विविध पुस्तकें, फोटोग्राफ्स, चर्चा सत्रों के वीडियो, विविध आलेख, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन पर आलेख आदि सामग्री उपलब्ध है. इतिहास विशेषज्ञों द्वारा सामग्री का अध्ययन करने व संस्तुति के पश्चात यह सामग्री पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है. डॉ. शरद हेबालकर, इतिहास संकलन योजना, भारतीय अनुसंधान परिषद एवं कुछ इतिहास विशेषज्ञ और डॉ. हेबालकर जी से संबंधित कुछ विद्वान व्यक्तियों का वेबपोर्टल के निर्माण में योगदान है. हिन्दू, भारतीय संस्कृति से संबंधित अनेक वेबपोर्टल की जानकारी दी गई है. वेबपोर्टल पर डॉ. शरद हेबालकर द्वारा लिखित कुछ पुस्तकें, अनुसंधान पर निबंध उपलब्ध हैं. वैश्विक स्तर पर हिन्दुओं का इतहास, उनके संदर्भ के छायाचित्र भी विद्यमान हैं. हिन्दू इतिहास से संबंधित आवश्यक नक्शे भी उपलब्ध हैं.

January 3rd 2020, 5:05 am

5, 6, 7 जनवरी को इंदौर में संघ की बैठक

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकर्ता देशभर में लगातार समाज कार्य में निमग्न रहते हैं. यह कार्यकर्ता देश की वर्तमान स्थिति की अनौपचारिक चर्चा हेतु इंदौर में 5, 6, 7 जनवरी को एकत्रित होने वाले हैं. इस चर्चा में कोई भी नीतिगत निर्णय या प्रस्ताव पारित नहीं होते हैं. यह भेंट एवं चर्चा पूर्णतः अनौपचारिक होती है. संघ के अखिल भारतीय अधिकारी सम्पूर्ण देश में समाजहित, देशहित के अपने – अपने अनुभव साझा करते हैं. संघ के औपचारिक विषयों पर यहां कोई निर्णय नहीं होता है. इस अवसर पर अखिल भारतीय कार्यकर्ता उपस्थित रहने वाले हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, सरकार्यवाह भय्याजी जोशी पूरा समय रहने वाले हैं.

January 3rd 2020, 12:47 am

VHP pledges to build a cultured, strong and independent Bharat

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Resolution on status of women adopted & demand raised to extend rights under article 29-30 of the Constitution to all Bhartiya Mangaluru. Addressing the meeting of the Central Management Committee and the Board of trustees of Vishwa Hindu Parishad, RSS Sarkaryavah Suresh (Bhaiyyaji) Joshi said that we should be empowered, cultured, awakened, gentlemanly, self-respecting, honorable and full of scientific temper. There should be such active Hindus who are able to lead the world by building a flawless organized power. He also said that the talk of superiority in terms of birth in Hindu society today is not right because a person is superior on the basis of karma. Somewhere our values ​​have eroded, there is also indifference towards the motherland, which is due to mere change of attitude. We have to create a harmonious society by ending the feeling of high and low within the society. For us, Cow protection is not only animal protection. Shri Ram Janmabhoomi is a matter of self-respect for us, he added. On the second day of the meeting, the Vishwa Hindu Parishad resolved to create a strong and self-supporting India. Expressing concern over the increasing rape and crimes against women in the country, a comprehensive action plan was also prepared to stop these incidents. In addition, VHP also demanded that necessary amendments in Article 29 and 30 of the Indian Constitution be carried out to expand the rights given to minorities, so that the discrimination between minority and majority could be eliminated. VHP demanded that all religious and linguistic communities be included in it. In the meeting, the special issue on "Dharm Jagran" by the fortnightly national revivalist magazine 'Hindu Vishwa' was also released. In Proposal No. 02, passed on the status of women in India, VHP stated that parents, academics, saints, social organizations, media, entertainment & advertisements world will have to come forward along with a wide-ranging campaign to stop the increasing crimes against women and change their attitudes towards safety of women. The Vishwa Hindu Parishad will accelerate the work of developing goodwill and family spirit in Hindu society through Parivar Prabodhan programs. Durga Vahini will intensify its training programs across the country for the self-defense of women, while the Bajrang Dal through its diverse programs will motivate the youth to adopt a healthy attitude towards women and to prevent crimes against them.

December 30th 2019, 6:50 am

Losar Festival – Laddakhi New Year being celebrated with traditional fervor & enthusiasm

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People in Ladakh region are celebrating Ladakhi New Year, Losar with festive fervor. Laddakh Lieutenant Governor RK Mathur participated in the celebrations, organized by the Laddakh Buddhist Association and Leh Hill Council, in Leh.

Speaking on the occasion, he said Ladakh is made Union Territory with an objective of protecting the culture, tradition, ecology and economy of the region. He said, as UT Ladakh will be the Crown of the country.

This is first Losar Laddakh Region celebrating as Union Territory. Daring the minus 20 degrees temperature in Leh, People have gathered at Chokang Vihara for Losar celebrations in traditional attrire.

Celebrations began with a pooja for world peace and brotherhood. LG paid homage to Buddha Dharma.

He also hoisted the Traditional Flag, Tarchen to mark the beginning of New year. Artists from various parts of Laddakh region performed Cultural programmes and traditional events relating to Losar.

As Union Territory, this year Losar is special even after realising the dream of 70 years and several sacrifices. People and administration took pledge for the over all development of Laddakh region on the Losar.

December 30th 2019, 6:50 am

Press Statement of VHP Working President Advocate Alok Kumar

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Mangaluru. While paying homage to Golokvasi Madhwacharya Pejawar Peethadhishwar Pujya Swami Vishweshtirtha ji Maharaj, the International Working President of the Vishva Hindu Parishad (VHP) Advocate Alok Kumar today said that Pujya Swamiji was a frontline leader of the Sri Ram Janma Bhumi movement. In the Dharma Sansad held in Udupi, it was he who gave the key Mantra of ‘Hindavah Sodaraa Sarve, Na Hindu Patito Bhavet’ (‘Hindus belong to a common fraternity, No Hindu can be fallen”). He worked hard throughout his life to remove caste discrimination in the country and to build a harmonious society. In Udupi’s Dharma Sansad itself, Pujya Swamiji had also demanded that the rights mentioned in Articles 29 and 30 of the Constitution of Bharat be extended to all Bharateeyas. VHP always had his blessings and guidance. The VHP would follow the path shown by revered Swamiji.

In the upcoming year, Varsh Pratipada (New Year) is on 25th March, Sri Ram Navami (Sri Ram’s Birthday) is on 02nd April and Hanuman Jayanti (Sri Hanumanji’s Birthday) is on 08th April. The Vishva Hindu Parishad conducts programs of Sri Ramotsav every year throughout the country during this period. Hurdles on the way for construction of Sri Ram’s Janmabhoomi Temple have been overcome. If Sri Ramji wishes, then some work of constructing the grand Sri Ram temple at His haloed birthplace in Ayodhya may start. We urge the Hindu society around the world that this time Shri Ramotsav should be celebrated collectively in every Hindu house, in every temple and in every village. There will be big celebrations in all those villages across the country from where consecrated Sri Ram Shilas (bricks) were sent to Ayodhya.

This Sri Ram Janmabhoomi Temple will take the country towards Rashtra Mandir – Nation Temple. As this temple is constructed, the VHP will –

  1. Work towards establishing a harmonious society in Bharat by eradicating caste and other discriminations;
  2. encourage individuals and families to internalize and emulate the life values at all levels that Sri Ram upheld; develop organized and organic family life; uphold and practise refinement, grace and dignity, which all would also ensure safety and security of women; and it would nevertheless work as a bulwark against the challenge of ‘Love Jihad’, etc.
  3. Work towards encouraging society to patronize service activities that would ensure security for the disadvantaged brethren with regard to food, clothing, shelter, health, education and occupation opportunities; it will work towards eliminating economic and educational disparities.

The Vishva Hindu Parishad will remain untiringly and unceasingly active to achieve these objectives.

VHP Board of Trustees also passed a resolution today in its meeting about the anti-Hindu conspiracies hatched by the governments of Telangana and Andhra Pradesh in Southern Bharat. Giving some examples of the anti-Hindu policies of both the state governments in the resolution, it was said as to how these governments are not only attacking Hindu values and points of reverence, shrines, saints and pilgrimages relentlessly but also, through their Christian and Muslim appeasement policies crossing all the limits. They are also promoting unconstitutional and communal activities. The VHP’s Central Board of Trustees warned these state governments to stop these anti-Hindu policies at the earliest, otherwise Hindu society would be forced to launch massive agitations. At the same time, VHP also called upon the Hindu society to fearlessly oppose these appeasement policies and actions to protect its temples, shrines, culture and self respect.

December 30th 2019, 6:50 am

परमश्रद्धेय स्वामी पेजावर श्री स्वामी विश्वेश तीर्थ जी के वैकुण्ठलीन होने पर संघ की ओर से श्रद्धांजल

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फाइल फोटो

फाइल फोटो

परमश्रद्धेय स्वामी पेजावर श्री स्वामी विश्वेश तीर्थ जी का वैकुण्ठलीन होना हम सब के लिए बहुत बड़ी हानि है. दैवी संपदायुक्त, देश और धर्म की चिंता में नित्य प्रयासरत, उनका सौम्य, शांत, प्रसन्न व शीतल व्यक्तित्व हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए बहुत बड़ा आधार था. उनका स्पष्ट व स्नेहिल परामर्श कितनी ही कठिन समस्याओं को बहुत सरल बना देता था. वट वृक्ष की शीतल छांव जैसा उनका सान्निध्य अब हमको नहीं मिलेगा. उनकी भावनोत्कट इच्छा के सामर्थ्य से श्रीराम मंदिर के निर्माण का पथ तो निष्कंटक हो गया है, परंतु मंदिर का निर्माण प्राम्भ होने के पहले ही वे हमसे दूर चले गए. जिन तपस्वियों की निष्काम तपस्या के कारण भारतवर्ष का प्राणास्वरूप धर्मजीवन सदा तेजस्वी बना रहता है, ऐसे आध्यात्मिक संत को हम पार्थिव रूप में नहीं देख पाएंगे, परंतु उनकी स्मृतियां, प्रेरणा व प्रकाश बन हम सबका पथ-प्रदर्शन करती रहेंगी.

हम उनकी पवित्र स्मृति में अपनी व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओऱ से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

सुरेश (भय्या) जोशी                                                       मोहन भागवत

सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ                          सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

December 29th 2019, 10:53 am

तेलंगाना व आंध्र प्रदेश की सरकारें हिन्दू विरोधी व तुष्टिकरण की नीतियों को बंद करें – विहिप

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विहिप कार्याध्यक्ष एडवोकेट अलोक कुमार जी का प्रेस वक्तव्य

मंगलुरू. पेजावर पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विश्वेशतीर्थ जी महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एडवोकेट अलोक कुमार जी ने कहा कि पूज्य स्वामी जी श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के महानायक थे. उडुपी में हुई धर्मसंसद में उन्होंने ही हिन्दवः सोदराः सर्वे, न  हिन्दू पतितो भवेत् का मूल मंत्र दिया था. देश में जातिगत भेदभाव दूर कर समरस समाज के निर्माण के लिये उन्होंने जीवन भर परिश्रम किया. उडुपी की धर्मसंसद में ही पूज्य स्वामी जी ने संविधान के अनुच्छेद 29 व 30 में वर्णित अधिकारों का विस्तार सभी भारतीयों के लिये किये जाने की मांग भी रखी थी. हमें उनका आशीर्वाद व मार्गदर्शन सदैव मिलता रहा. विहिप उनके बताये हुए रास्ते पर आगे बढ़ेगी.

आगामी 25 मार्च को वर्ष प्रतिपदा अर्थात् नववर्ष, 2 अप्रैल को श्रीराम नवमी तथा 8 अप्रैल को हनुमान जयंती है. विश्व हिन्दू परिषद हर वर्ष सम्पूर्ण देश में इस दौरान श्रीरामोत्सव के कार्यक्रम करती है. मंदिर निर्माण की बधाएं दूर हो चुकी हैं. रामजी चाहेंगे तो तब तक अयोध्या में जन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण का कुछ कार्य प्रारंभ हो सकता है. हम दुनिया भर के हिन्दू समाज से आग्रह करते हैं कि इस बार श्रीरामोत्सव पूरे आनन्द के साथ प्रत्येक हिन्दू घर में, प्रत्येक मंदिर में व हर गांव में सामूहिक तौर पर मनाया जाए. जितने भी गांवों से पूजित शिलाएं अयोध्या गयीं थीं, उन सभी में बड़े-बड़े समारोह होंगे.

यह श्रीराम मंदिर देश को राष्ट्र मंदिर की ओर ले चलेगा. विहिप इसके निर्माण के साथ-साथ :

  1. जातिगत व अन्य भेदभाव मिटाकर भारत में समरस समाज की स्थापना के लिये काम करेगी.
  2. सभी स्तरों पर भगवान श्रीराम के जीवन संस्कार व्यक्ति और परिवार अपनाए. सुगठित परिवार हों. शील व मर्यादा का पालन करें तथा उनके द्वारा महिलाओं के प्रति अपराध व अकेलेपन से उत्पन्न तनाव तथा लव जिहाद जैसी समस्याएं समाप्त होंगी.
  3. सेवा के द्वारा समाज अपने वंचित बंधुओं को भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा व रोजगार के अवसर प्रदान करे तथा आर्थिक व शैक्षणिक असमानताएं समाप्त हों.

इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये विश्व हिन्दू परिषद निरंतर सक्रिय रहेगी.

हम लोगों ने दक्षिण भारत के तेलंगाना व आन्ध्र प्रदेश में हिन्दू विरोधी सरकारी षड्यंत्रों के बारे में भी अपनी बैठक में आज एक प्रस्ताव पारित किया है. प्रस्ताव में दोनों राज्य सरकारों की हिन्दू विरोधी नीतियों के कतिपय उदाहरण देते हुए कहा गया कि किस प्रकार ये सरकारें न सिर्फ हिन्दू मान बिन्दुओं, धर्मस्थलों, संतों व धर्मयात्राओं पर अनवरत रूप से प्रहार कर रहीं हैं, बल्कि, अपनी ईसाई व मुस्लिम तुष्टिकरण की सभी हदें पार करते हुए असंवैधानिक व साम्प्रदायिक गतिविधियों को बढ़ावा भी दे रही हैं. विहिप के केन्द्रीय प्रन्यासी मंडल ने इन राज्य सरकारों को चेतावनी दी है कि वे शीघ्रातिशीघ्र इन हिन्दू विरोधी नीतियों को बंद करें, अन्यथा हिन्दू समाज को जनान्दोलन के लिये विवश होना पड़ेगा. साथ ही हिन्दू समाज से भी आह्वान किया है कि वह निडर होकर इन नीतियों का प्रखर विरोध कर अपने मंदिरों, धर्म स्थलों, संस्कृति व स्वाभिमान की रक्षा करें.

December 29th 2019, 10:53 am

समाज से ऊंच-नीच समाप्त कर हमें समरस समाज बनाना है – भय्याजी जोशी

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विहिप बैठक में संस्कारित, सबल व स्वावलंबी भारत के निर्माण का संकल्प महिलाओं की स्थिति पर प्रस्ताव पारित, संविधान के अनुच्छेद 29-30 में संशोधन की मांग मंगलुरु. विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय प्रबंध समिति व प्रन्यासी मण्डल की बैठक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश (भय्याजी) जोशी ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हमें एक सशक्त, संस्कारित, जागृत, सज्जन, स्वाभिमानी, पुरुषार्थी तथा विज्ञान के साथ चलने वाले, ऐसे सक्रिय हिन्दू चाहिये जो निर्दोष संगठित शक्ति का निर्माण कर विश्व को नेतृत्व देने में समर्थ हों. आज हिन्दू समाज में जो जन्म से श्रेष्ठता की बात हो रही है, वह ठीक नहीं है क्योंकि व्यक्ति कर्म के आधार पर श्रेष्ठ होता है. कहीं न कहीं हमारे मूल्यों का क्षरण हुआ है, मातृभूमि के प्रति उदासीनता भी दिखाई देती है जो मात्र दृष्टिकोण बदलने के कारण हुआ है. समाज से ऊंच-नीच समाप्त कर हमें एक समरस समाज बनाना है. गौरक्षा हमारे लिए केवल पशु रक्षा नहीं है. श्रीराम जन्मभूमि हमारे लिये स्वाभिमान का केन्द्र है. बैठक के दूसरे दिन विश्व हिन्दू परिषद द्वारा संस्कारित, सबल व स्वावलंबी भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया. देश में बढ़ती बलात्कार व महिलाओं के साथ अभद्रता की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए इन घटनाओं को रोकने हेतु एक व्यापक कार्ययोजना भी बनाई गयी. इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 व 30 में आवश्यक संशोधन कर अल्पसंख्यकों को दिये गए अधिकारों का विस्तार कर, अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक के भेदभाव को मिटाने हेतु, उसमें सभी धार्मिक व भाषाई समुदायों को सम्मिलित किये जाने की मांग की. बैठक में राष्ट्रीय पुनर्जागरण की पाक्षिक पत्रिका 'हिन्दू विश्व' के धर्मजागरण विशेषांक का विमोचन किया गया. भारत में महिलाओं की स्थिति पर पारित प्रस्ताव - 02 में कहा गया कि महिलाओं के साथ बढ़ते दुर्व्यवहार को रोकने तथा उनकी सुरक्षा व उनके प्रति देखने के दृष्टिकोण को बदलने के लिये एक व्यापक सर्वस्पर्शी अभियान के साथ अभिभावकों, शिक्षाविदों, संत-महात्माओं, सामाजिक संगठनों, विज्ञापन, मनोरंजन व मीडिया जगत से जुडे़ लोगों के साथ शासन-प्रशासन को आगे आना होगा. विश्व हिन्दू परिषद परिवार प्रबोधन द्वारा हिन्दू समाज में सुसंस्कार व परिवार भावना विकसित करने के कार्य को गति देगा. दुर्गावाहिनी युवतियों के आत्म रक्षार्थ देशभर में चल रहे अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तीव्रता प्रदान करेगी. वहीं बजरंग दल अपने विविध कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण अपनाने व उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकने हेतु युवकों को प्रेरित करेगा.

December 28th 2019, 7:36 am

जम्मू कश्मीर – 26 अक्तूबर अधिमिलन दिवस पर अवकाश घोषित, शेख अब्दुल्ला के जन्मदिन पर नहीं होगा अवकाश

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अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में ऐतिहासिक भूलों को सुधारने की प्रक्रिया जारी है. जम्मू कश्मीर प्रशासन ने साल 2020 के लिए हॉली-डे कैलेंडर (अवकाश की सूची) जारी किया, जिसमें सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए शेख अब्दुल्ला के जन्मदिन यानि 05 दिसंबर और 13 जुलाई के दिन अवकाश को रद्द कर दिया है तथा 26 अक्तूबर को अधिमिलन दिवस के रूप में मनाने के लिए अवकाश की घोषणा की है. 26 अक्तूबर 1947 के दिन ही जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर किये थे. जम्मू कश्मीर के लोग दशकों से इसकी मांग करते आ रहे थे.

13 जुलाई का इतिहास

13 जुलाई का दिन जम्मू कश्मीर में ब्लैक-डे के रूप में मनाया जाता था. जबकि अलगाववादी इस दिन को Martyrs’ day के रूप में मनाते थे. दरअसल 13 जुलाई 1931 की तारीख वो काला अध्याय है, जिस दिन जम्मू कश्मीर के इतिहास में सांप्रदायिक दंगों की शुरूआत हुई थी. ये वो दिन था, जब जम्मू कश्मीर के आधुनिक इतिहास में अलगाववाद, आतंकवाद और सांप्रदायिकता के बीज बोए गए थे.

13 जुलाई 1931 को महाराजा हरि सिंह के डोगरा राज के विरोध में शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में दंगाईयों की एक भीड़ ने पहले श्रीनगर जेल से एक कट्टरपंथी अब्दुल कादिर पठान को छुड़वाने के लिए जेल के दरवाज़े तोड़ने की कोशिश की. इस दौरान सुरक्षा में तैनात सिपाहियों पर जमकर पत्थरबाज़ी हुई… हिंसक भीड़ जब काबू से बाहर हुई तो पुलिस प्रशासन को गोलियां चलानी पड़ी. जिसमें 22 दंगाई मारे गए.

लेकिन दंगा थमा नहीं, बल्कि भड़क गया. पुलिस प्रशासन की कार्रवाई के बाद दंगाईयों की भीड़ ने श्रीनगर में चुन-चुनकर कश्मीरी हिन्दुओं पर हमले किये. हिन्दुओं की दुकानों व घरों में लूटपाट हुई, तोड़फोड़ की गई. पूरी जानकारी अंग्रेजों द्वारा गठित बरजोर दलाल कमेटी की रिपोर्ट में उपलब्ध है.

बाद में इन्हीं दंगाईयों को रोकने की कोशिश में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई में मारे गए लोगों को शहीदों का दर्जा देकर पिछले 70 साल से जम्मू कश्मीर में एक सांप्रदायिक एजेंडा Martyrs’ Day मनाया जाता रहा है. जबकि जम्मू कश्मीर में ज्यादातर लोग इसको ब्लैक डे के रूप में मनाते हैं. जिस दिन महाराजा हरि सिंह के खिलाफ सांप्रदायिक ताकतों ने हिंसा के सहारे पूरे श्रीनगर को दंगों की आग में झोंक दिया था. वो आग जो आज तक नहीं बुझ पायी. सरकार ने अलगाववाद और सांप्रदायिकता के प्रतीक इस दिन की छुट्टी रद्द कर बड़ी भूल-सुधार की है.

05 दिसंबर का इतिहास

पिछले 70 साल से शेख अब्दुल्ला को जम्मू कश्मीर के आधुनिक संस्थापक के तौर पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता रहा है, इसी प्रयास के तहत उनके जन्मदिन 05 दिसंबर को ठीक ऐसे ही मनाया जाता था, जैसे देश में महात्मा गांधी के जन्मदिन 02 अक्तूबर को मनाया जाता है. हालांकि सच ये है कि जम्मू कश्मीर में अलगाववाद के बीज शेख अब्दुल्ला ने ही बोए थे. उनके देशविरोधी बयानों के चलते ही तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने अब्दुल्ला को 09 अगस्त 1953 को गिरफ्तार कर जेल में डाला था. ऐसे शख्स के जन्मदिन को राजकीय अवकाश घोषित करना जम्मू कश्मीर के साथ बड़ा छल था.

26 अक्तूबर का इतिहास

26 अक्तूबर 1947 को जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर किये थे. अधिमिलन के नियमों के अनुसार प्रिंससी स्टेट्स के सिर्फ राजा य़ा नवाब को ये अधिकार था, कि वो अपने राज्य का भविष्य तय करे कि उसे किस देश का हिस्सा बनना है, भारत का या पाकिस्तान का. अंग्रेजी कूटनीति औऱ जिन्ना की तमाम कोशिशों, छल-प्रपंचों के बावजूद महाराज हरि सिंह ने भारत को चुना. उनके एक हस्ताक्षर के चलते ही यूनाइटेड नेशन्स ने भी माना कि अविभाज्य जम्मू कश्मीर सिर्फ और सिर्फ भारत का संवैधानिक राज्य है. इसी अधिमिलन पत्र को अंतिम मानते हुए यूएन ने पाकिस्तान को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर से अपनी सेनाएं वापिस लेने को कहा था. लेकिन ब्रिटेन औऱ अमेरिका की शह पर पाकिस्तान ने यूएन की भी एक नहीं सुनी, और इस तरह जम्मू कश्मीर का आधे से ज्यादा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया.

लेकिन अलगाववादी शक्तियां ऐसे महत्वपूर्ण दिन प्रोपगैंडा चलाती थीं और साबित करने की कोशिश करती थीं कि अधिमिलन पूर्ण नहीं था. इस दिन अवकाश घोषित करने से जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय ताकतों को बड़ा संबल मिलेगा.

December 28th 2019, 6:18 am

बुलंदशहर हिंसा – मुस्लिम समुदाय ने नुकसान की भरपाई के लिए सौंपा 6.27 लाख रुपए का चेक

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उत्तर प्रदेश में सरकार की सख्ती का असर दिखने लगा है. सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हिंसा में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. इसी कड़ी में मुस्लिम समुदाय ने संपत्ति की भरपाई के रूप में 6 लाख रुपए का चेक प्रशासन को सौंपा है. साथ ही माफी भी मांगी है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध लोगों ने जिला प्रशासन को पिछले सप्ताह शुक्रवार को नमाज़ के बाद शहर में हुई हिंसा से हुए नुकसान की भरपाई के रूप में 6.27 लाख रुपये की राशि का चेक सौंपा. साथ ही मुजफ्फरनगर के मौलानाओं ने हिंसा के लिए माफी भी मांगी है.

शुक्रवार को बुलंदशहर में हुई हिंसा में प्रशासन का एक वाहन जल गया था और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे. पुलिस ने मामले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें हिंसा के लिए 22 लोगों को नामजद किया गया है और इसमें 800 अज्ञात लोग भी शामिल हैं.

मुस्लिम समुदाय की ओर से कहा गया कि – ‘पूरे समुदाय ने एकजुट होकर फंड में योगदान दिया. हमने इसे पूरे समुदाय से टोकन के रूप में सरकार को सौंप दिया.

19 से 21 दिसंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में हिंसा भड़की थी. जिस उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि राज्य में सरकारी संपत्ति को जिसने नुकसान पहुंचाया है, उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी और उनकी संपत्ति को बेचकर नुकसान की भरपाई की जाएगी. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान की जा रही है.

December 28th 2019, 5:04 am

सामाजिक, सांस्कृतिक ध्रुवीकरण के दौर में तटस्थता खतरनाक है

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पुणे (विसंकें). प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि ”वर्तमान में देश में एक बहुत बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण हो रहा है. इस स्थिति में विचारकों और बुद्धिजीवियों का तटस्थ होना खतरनाक है और इसलिए उन्हें विशिष्ट भूमिका लेनी चाहिए. जे. नंदकुमार जी ऋतम ऐप और महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी द्वारा आयोजित मीडिया संवाद परिषद के समापन सत्र में संबोधित कर रहे थे. मंच पर विश्व संवाद केंद्र (पुणे) के अध्यक्ष मनोहर कुलकर्णी, ऋतम ऐप के कार्यकारी संचालक अजिंक्य कुलकर्णी और भारतीय विचार साधना के न्यासी प्रदीप नाईक उपस्थित थे.

नंदकुमार जी ने देश की वर्तमान स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता का समर आम नागरिकों ने लड़ा था. आम नागरिक के खड़े रहने के कारण ही यह समर हो सका. यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या परिवार द्वारा नहीं लड़ी गई. अब भी आम नागरिकों को जागरूक होने की आवश्यकता है. राष्ट्र के भविष्य के लिए वैचारिक आंदोलन चल रहा है. यह सत्य – असत्य, न्याय – अन्याय की लड़ाई है. देश में सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में ध्रवीकरण चल रहा है और ऐसी स्थिति में विचारक तथा बुद्धिजीवियों का तटस्थ होना ठीक नही है. तटस्थ भूमिका लेकर कुछ नहीं होता. वैचारिक लड़ाई लड़ने के लिए राष्ट्रीय विचारों का अवलंबन करना होगा. किसी भी स्थिति में निष्पक्ष रहने से काम नहीं होगा, बल्कि अपनी भूमिका तय करने की आवश्यकता है. जब देश के प्रत्येक नागरिक की नस-नस में सर्वधर्म समभाव कूट-कूट कर भरा है तो वास्तव में धर्म निरपेक्षता जैसे शब्दों की हमें आवश्यकता नहीं है. हमारे आसपास क्या चल रहा है, इसका आंकलन हमें करना ही होगा. बदलते समय की आहट हमें लगनी ही चाहिए. उन्होंने मौलिक सलाह दी, कि स्वयंस्फूर्त होकर अपने नैतिक मूल्यों की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय विचारों का प्रसार करने हेतु इकोसिस्टम के रूप में हमें कार्यरत रहना होगा.

गरवारे महाविद्यालय के सभागृह में संपन्न माध्यम संवाद परिषद का उद्घाटन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरू जगदीश उपासने जी ने किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज में विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है और इसका प्रतिबिंब मीडिया में भी दिखाई दे रहा है. ऐसे में मीडिया को समाज को सही विचारधारा की दिशा दिखाने की आवश्यकता है. मीडिया में अब काफी बदलाव हो रहे हैं. ‘प्रेस’ से ‘मीडिया’ तक के परिवर्तन होने का उल्लेख करते हुए जगदीश जी ने कहा, “प्रेस से मीडिया बनने का बड़ा फासला मीडिया ने तय किया है. पाठकों की समझ में आना चाहिए, कि हमें क्या संदेश देना है. एक समय में प्रिंट मीडिया का एकाधिकार था, जिससे एक निश्चित विचारधारा खड़ी रही. पत्रकारिता कई वर्षों तक राजनीति के इर्दगिर्द घूमती रही. उसमें कुछ अनिवार्यताएं भी थीं. अभी भी उस पद्धति में अधिक बदलाव नहीं हुए, बल्कि वही प्रणाली जारी है.

पत्रकारों को अहसास था और कुछ सीमा तक अहंकार भी था, कि हम समाज के लिए विशिष्ट काम करते हैं. बदलते समय में कई विकल्प खड़े होने के कारण पत्रकारिता का अहंकार कम हो गया है. समाज में परिवर्तन होते गए वैसे ही पत्रकारिता में भी परिवर्तन हुए. कम्युनिज़म ने पूरी दुनिया में पत्रकारों को प्रभावित किया था, वह प्रभाव अभी भी है. अब नया साम्यवाद निर्माण हो रहा है. जिन्हें राष्ट्र की अवधारणा पता नहीं है, ऐसे लोग इस क्षेत्र में आ रहे हैं. हमें आज की स्थिति में दिख रहा है, कि उनका खूबी से उपयोग किया जा रहा है. ऐसे में राष्ट्रीय विचारों के पत्रकारों और विचारधारा को मजबूत करने की आवश्यकता है. समाज को कैसे विचार करना चाहिए, यह अधिक बेहतर रूप से बताने का समय आ चुका है.”

प्रस्तावना में विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष मनोहर कुलकर्णी जी ने केंद्र के कार्य और माध्यम संवाद परिषद का उद्देश्य बताया. राजीव सहस्रबुद्धे ने महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी, और अजिंक्य कुलकर्णी ने ऋतम ऐप के बारे में जानकारी दी.

कार्यक्रम में ‘हम और हमारी भूमिका’ विषय पर वार्ता का आयोजन किया गया था. साप्ताहिक ऑर्गनाइज़र के संपादक प्रफुल्ल केतकर, दैनिक सकाल की सहयोगी संपादक मृणालिनी नानिवाडेकर और मुंबई तरुण भारत के संपादक किरण शेलार ने भाग लिया. साप्ताहिक विवेक के निमेश वहालकर और एकता मासिक पत्रिका के देविदास देशपांडे ने उनसे संवाद किया.

सोशल मीडिया भास-आभास और वास्तव विषय पर सत्र में शेफाली वैद्य,  सुशील अत्रे, विवेक मंद्रूपकर और हेतल राच ने भाग लिया. सोशल मीडिया आज समाज में नया आया हुआ शस्त्र है. उसका अच्छा और बुरा दोनों तरह से प्रयोग हो सकता है. सोशल मीडिया की ओर तटस्थता से देखना आना चाहिए. प्रिंट मीडिया के बंधन सोशल मीडिया पर नहीं हैं, लेकिन फिर भी सोशल मीडिया में सतत कुछ होता है, जिसका वास्तव में निश्चित परिणाम होता है. इसलिए वह आभास नहीं बल्कि वास्तव है.

शेफाली वैद्य ने कहा कि सोशल मीडिया के कारण मैं कई परिवारों का हिस्सा बन सकी और उससे पाठकों का प्रेम मिला. ट्रोल होने के प्रसंग कई बार आए तो भी उससे निश्चय ही मार्ग निकल सकता है. सुशील अत्रे ने कहा कि प्रिंट मीडिया में छपी हुई सामग्री के लिए जिम्मेदार कौन है, यह सर्वज्ञात होता है, वैसा सोशल मीडिया के साथ नहीं होता. अनाम रहकर लिखी हुई सामग्री का लेखक ढूंढना कठिन होता है. हेतल राच ने तकनीकी मुद्दों की जानकारी दी.

December 28th 2019, 4:16 am

नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाम गढ़े गए विवाद

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दुनिया में हर विवाद का हल व समस्या का समाधान है. परन्तु गढ़े गए विवादों का जब तक निपटान होता है, तब तक बहुत अनर्थ हो चुका होता है और सिवाए पछतावे के कुछ हाथ नहीं लगता. नागरिकता सन्शोधन अधिनियम पर पैदा हुए विवाद को भी इसी श्रेणी में शामिल किया जा सकता है. लगभग दो दर्जन कीमती जानें गंवाने, करोड़ों-अरबों रूपयों की सार्वजनिक सम्पत्ति फूंकने और एक सप्ताह से भी अधिक समय तक देश को बन्धक बनाए रखने के बाद प्रदर्शनकारियों को भी समझ आ गया कि इससे किसी देशवासी का कुछ नहीं बिगडऩे जा रहा. परिणामस्वरूप प्रदर्शन मद्धम पड़ रहा है, परन्तु एक कृत्रिम विवाद से पैदा आन्दोलन ने देश के कुछ राजनीतिक दलों, मीडिया के एक वर्ग और समाज की सोच को तो चर्चा के केन्द्र में ला ही दिया है.

इस अधिनियम से केन्द्र सरकार ने विभाजन के समय की गलती को सुधारते हुए पड़ोस के तीन इस्लामिक गणराज्यों पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के उन अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रयास किया जो मूल स्थानों पर धार्मिक उत्पीडऩ का शिकार हो कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं. आखिर इनको उत्पीडऩ से मुक्ति और जीवन में आगे बढऩे के अवसर क्यों नहीं मिलने चाहिए? आखिर इनका मूल निवास स्थान तो भारत ही है, यह बात दूसरी है कि विभाजन के बाद इनके मूल स्थान भारत की जड़ों से कट कर अलग हो गए. इनके न्याय में बाधा डालने वालों को सोचना चाहिए कि देश के विभाजन में इन लोगों का न तो कोई हाथ था और न ही कोई कसूर. इनकी चूक केवल इतनी है कि बन्टवारे के समय ये भारत नहीं आ पाए और वहां के बहुसंख्यक समाज पर विश्वास कर वहीं बने रहे.

यहां यह भी बताना जरूरी है कि स्वतन्त्रता के बाद भारत में तो जागीरदारी का वैधानिक व काफी सीमा तक सामाजिक उन्मूलन भी हो चुका है, परन्तु पाकिस्तान में यह कुप्रथा अभी भी जारी है. पाकिस्तान में फंसे हुए अधिकतर हिन्दू दलित समाज से सम्बन्धित हैं और वहां जागीरदारों ने उन्हें विभाजन के समय इसलिए भारत नहीं आने दिया कि अगर ये लोग चले जाएंगे तो उनकी गोबर-बुहारी कौन करेगा. मुस्लिम लीगी खुलेआम कहते थे कि आखिर हमें अपने पखाने साफ करवाने के लिए भी तो हिन्दू चाहिएं. अब अगर इन प्रताड़ित दलितों, पिछड़ों व वञ्चितों को न्याय मिल रहा है तो किसी का पेट क्यों दुखना चाहिए.

पाकिस्तान में हिन्दुओं का उत्पीड़न विभाजन से पहले ही शुरू हो चुका था जो आज भी जारी है. विभाजन के बाद पाकिस्तान में रह गए पण्डित ठाकुर गुरुदत्त नामक वैद्य ने महात्मा गान्धी जी को बताया कि कैसे उन्हें जबरदस्ती लाहौर छोडऩे को मजबूर किया गया. वह गान्धी जी की इस बात से काफी प्रभावित थे कि हर व्यक्ति को अंत तक अपने जन्मस्थान पर रहना चाहिए, लेकिन वो चाह कर भी ये नहीं कर पा रहे थे. इस पर 26 सितम्बर, 1947 को गान्धी जी ने अपनी प्रार्थना सभा में कहा, ”आज गुरु दत्त मेरे पास आए. वो एक बड़े वैद्य हैं. आज वो अपनी बात कहते हुए रो पड़े. वो मेरा सम्मान करते हैं और मेरी कही गई बातों को अपने जीवन में उतारने का सम्भव प्रयास भी करते हैं, लेकिन कभी-कभी मेरी बातों का हकीकत में पालन करना बेहद मुश्किल होता है.” इसी भाषण में गान्धी जी आगे कहते हैं कि ”पाकिस्तान में रह रहे हिन्दू-सिक्ख अगर उस देश में नहीं रहना चाहते हैं तो वापस आ सकते हैं. इस स्थिति में ये भारत सरकार का पहला दायित्व होगा कि उन्हें रोजगार मिले और उनका जीवन आरामदायक हो.”

अगर इस तरह की ऐतिहासिक विसन्गतियों को दूर करने के प्रयासों का भी विरोध हो और वह भी केवल भ्रम के आधार पर तो इसे गढ़ा हुआ विवाद न कहा जाए तो क्या कहें? पञ्चतन्त्र में कहानी है कि कन्धों पर मेमना ले जा रहे एक भले व्यक्ति को चार ठगों ने योजना बना उसे बारी-बारी कहना शुरू कर दिया कि गधा उठा कर कहां जा रहे हो. ठगों के भ्रम में फंस कर वह बेचारा मेमने को ही गधा समझ बैठा और उसे जमीन पर पटक कर चला गया. उसके बाद चारों ठगों ने रात को उस मेमने की दावत उड़ाई. उक्त विधेयक के बाद हुई हिन्सा भी इसी कहानी की नया संस्करण दिखा. एक के बाद एक राजनीतिक दल ने इसे खास समुदाय विरोधी बताना शुरू कर दिया और मीडिया का एक वर्ग भी इस दुष्प्रचार का भौम्पू बन गया. परिणाम हुआ कि पड़ोसी देशों के पीड़ितों को न्याय देने का केन्द्र सरकार का प्रयास अपने ही देश के अल्पसंख्यकों के लिए दमनकारी बताया जाने लगा और समाज एक बार भ्रमित भी होता नजर आया.

केवल यही नहीं इससे पहले भी कभी रफेल सौदा, धारा 370, राम मन्दिर मुद्दे को लेकर विवाद गढ़े जाते रहे हैं और इन कृत्रिम मुद्दों की परिणति क्या हुई वह किसी से छिपी नहीं. लोकतन्त्र में सरकार का विरोध विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है, परन्तु ये काम सत्य व तथ्यों पर आधारित होना चाहिए न कि गढ़े गए विवादों पर. आखिर विपक्ष कब तक मेमने को गधा बताता रहेगा.

– राकेश सैन
32, खण्डाला फार्मिंग कालोनी,
वीपीओ लिदड़ां, जालंधर.
संपर्क – 77106-55605

December 28th 2019, 1:59 am

राष्ट्र विरोधी ताकतों को रोकने के लिए समाज की सज्जन शक्ति आगे आए – रामदत्त चक्रधर

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रांची. नागरिकता संशोधन अधिनियम पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि यह अधिनियम पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के सम्मान के लिए है. सरकार गांधी जी के सपनों को पूरा कर रही है. नेहरू से लेकर ज्योति बसु तक ने अधिनियम की वकालत की थी.

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को लेकर पलाश वन भवन में राष्ट्र संवर्धन समिति के तत्वाधान में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर उपस्थित रहे. ब्रिगेडियर बीजी पाठक मुख्य अतिथि थे. अधिनियम के कानूनी पहलुओं से रूबरू कराने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण जी भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्र संवर्धन समिति के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश जालान ने की.

मुख्य वक्ता रामदत्त चक्रधर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में कहा था कि भारत पूरी दुनिया के पीड़ित-शोषित को संरक्षण देता है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी अपनी कविताओं में कहते थे कि हमने खुद को लुटाकर भी दुनिया भर से आए लोगों को संरक्षण दिया है. इसका साक्षी पूरा विश्व रहा है. रही बात नागरिकता की तो 566 मुसलमानों को भी इस सरकार ने भारत की नागरिकता दी है. शिमला समझौता में भारत के विभाजन का प्रस्ताव आया था. उस वक्त माउंटबेटन, गांधी जी, नेहरू जी, लियाकत और जिन्ना भी थे. तब देश के लोगों को लगा था कि कांग्रेस के प्रस्ताव में इसका विरोध होगा, परन्तु उसी प्रस्ताव पर कांग्रेस ने मुहर लगा दी. उस विभाजन में ढाई करोड़ लोगों का विस्थापन हुआ. 10 लाख से अधिक हिन्दुओं की हत्या हुई. तब नेहरू लियाकत समझौते में दोनों देशों ने अपने-अपने अल्पसंख्यकों को संरक्षण देने की बात कही थी. भारत ने तो इसका बखूबी पालन भी किया, परन्तु पाकिस्तान ने समझौते की धज्जियां उड़ा दी. पाकिस्तान व बांग्लादेश में गैर इस्लामिक नागरिकों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से घटती गई.

आखिर ये गए कहां? या तो इनका धर्मपरिवर्तन हुआ या इनकी हत्या हुई या भगा दिए गए. पूरी दुनिया में हिन्दुओं के लिए एकमात्र देश भारत ही है…. यह अधिनियम बहुत पहले आना चाहिए था, परंतु वोट बैंक के लालच में नेताओं ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

1947 में कांग्रेस के प्रस्ताव में और खुद नेहरू जी ने कहा था कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में जो प्रताड़ित हैं, उनके लिए भारत के दरवाजे हमेशा खुले हैं. ऐसे लोगों की देखरेख व उन्हें हर सहायता प्रदान करना भारत सरकार की पहली प्राथमिकता है. स्वयं सुचेता कृपलानी, कांग्रेस नेत्री ने तब कहा था कि पाकिस्तान के हिन्दू और सिक्ख स्वयं को असहाय न समझें. उनकी पूरी चिंता भारत करेगा. यह भारत की जिम्मेदारी है. देश को आजाद करवाने में उन्होंने भी भूमिका निभाई, परन्तु दुर्भाग्यवश सीमाओं के बंटवारे के कारण वो पाकिस्तान में चले गए. उनका भारत में स्वागत है. वे हमारे लिए परदेसी नहीं हैं.

रामदत्त जी ने कहा कि अब यह बात हमें सोचनी चाहिए कि आखिर यह कौन सी कांग्रेस है जो अपने ही पुरखों की बात को नहीं मानती. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण पश्चिम बंगाल में जनसंख्या अंसतुलन व आंतरिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है.

अधिनियम को लेकर लोगों में बेवजह का भ्रम पैदा किया जा रहा है. धार्मिक उत्पीड़न की बात करें तो सिंध प्रांत में प्रतिवर्ष 1000 लड़कियों का जबरन धर्मान्तरण किया जा रहा है. 1987 से अब तक 1500 लोगों को पाकिस्तान में सिर्फ ईशनिंदा के कारण सजा दी गई. ज्यादातर शिकार बहने और बेटियां होती हैं. सरकार ने यह कानून सिर्फ धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए बनाया है. लियाकत अली ने कहा था कि पाकिस्तान से सफाई कर्मियों को भारत नहीं भेजा जाएगा, वरना पाकिस्तान की सड़कों पर झाड़ू कौन लगाएगा. ऐसे बंधुओं को सम्मान देने के लिए सरकार ने यह कानून बनाया है.

वर्तमान में राष्ट्र विरोधी ताकतें जो काम कर रही हैं, उन्हें रोकने के लिए जरूरी है कि समाज के सज्जन लोग आगे आएं. लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है.

मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर बीजी पाठक ने कहा कि देश में जिस तरह से माहौल बिगाड़ा जा रहा है, इससे बहुत पीड़ा होती है. मैं उस जमात से आता हूं, जहां कोई जाति-धर्म नहीं है, हमारा एक धर्म होता है वो है राष्ट्रधर्म. नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर नार्थ-ईस्ट व शेष भारत में समस्या अलग अलग है. 2003 – 2005 में नार्थ-ईस्ट में सेवा के दौरान मुझे भी कई अनुभव रहे है. वहां के कई क्षेत्रों में स्थानीय निवासी ही अल्पसंख्यक बन गए हैं. अब उनके सामने संकट है कि यदि बाहरी लोगों को नागरिकता मिलती है तो स्थानीय संस्कृति के समक्ष संकट खड़ा होगा. वहां अधिकतर लोग बांग्लादेशी हैं.

वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र कृष्ण ने कहा कि हमारे संविधान के आर्टिकल 15 का हवाला देकर जो लोग इस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं वो बिल्कुल गलत है. संविधान ने हमें इस बात की आजादी दी है कि परिस्थितिजन्य हालातों को देखते हुए सरकार निर्णय ले सकती है. अवैध दो लोगों को कहा गया है. एक वैसे लोग जिनके पास दस्तावेज थे, लेकिन उनकी वैधता समाप्त हो चुकी है और दूसरे वो लोग जिनके पास कोई दस्तावेज थे ही नहीं. ऐसे में सरकार को निर्णय लेना होता है, नीति बनानी होती है कि उन्हें किसके लिए क्या प्रावधान करना है. सरकार ने इसी के तहत ऐसे धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया है, जो पड़ोसी देशों में धार्मिक रूप से शोषित और प्रताड़ित हैं. सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को इसलिए चुना क्योंकि ये देश इस्लामिक देश हैं और वहां हिन्दू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई आदि अल्पसंख्यक हैं.

कार्यक्रम का संचालन शालिनी सचदेव ने किया. धन्यवाद ज्ञापन विवेक भसीन ने किया. कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम के साथ हुआ.

December 27th 2019, 9:26 am

जेके लोन अस्पताल – कोटा के सरकारी अस्पताल में एक माह में काल का ग्रास बने 77 बच्चे

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दो दिन में दस बच्चों की मौत, जनता की आवाज होने का दावा करने वाले मीडिया संस्थान चुप क्यों

वर्ष 2019 में 940 बच्चों की मौत, कारणों का नहीं हुआ खुलासा

जयपुर. पिछले साल गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत पर विपक्ष व एजेंडा मीडिया ने उत्तर प्रदेश सरकार को कोई कसर नहीं छोड़ी थी. कुछ मीडिया संस्थानों ने मुख्यमंत्री के त्याग पत्र के लिए अप्रत्यक्ष अभियान छेड़ दिया था, और स्वयं को जनता का हितैषी, जनता की आवाज बुलंद करने वाला एवं निष्पक्ष होने का दावा किया था. लेकिन, कोटा (राजस्थान) में स्थित सरकारी अस्पताल में एक महीने में 77 बच्चों की मौत के बावजूद इऩ मीडिया संस्थानों ने चुप्पी साध रखी है. रिपोर्ट्स के अनुसार कोटा के जेकेलोन अस्पताल में पिछले 2 दिन में 10 बच्चों की मौत हो गई. ये सभी पीआईसीयू व एनआईसीयू में भर्ती थे. फिलहाल मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है.

गत एक माह की बात करें तो बच्चों की मौत का आंकड़ा 77 पहुंच चुका है. यही नहीं अस्पताल में 2019 में 24 दिसम्बर तक कुल 940 बच्चों की मृत्यु हुई है. इतने बच्चों की मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन की नींद नहीं खुली है और वह इन आंकड़ों को सामान्य बता रहा है. अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है. 48 घंटों में 10 बच्चों की मौत होने के बाद से पीड़ितों में कोहराम मचा हुआ है, अस्पताल प्रशासन बच्चों की मौत की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर खानापूर्ति में जुट गया है. 23 दिसंबर को छह बच्चों की मौत हुई, जबकि 24 दिसंबर को चार बच्चों ने दम तोड़ा. अस्पताल प्रशासन और सरकार स्थिति को सामान्य बताने के प्रयास में लगे हैं.

शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमृतलाल ने मीडिया को बताया कि दो दिन में 10 बच्चों की मौत होने का कारण उनकी गंभीर अवस्था है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा.

मामले को दबा रहा मीडिया

बच्चों की मौत के मामलों में गंभीर बात यह है कि स्थानीय मीडिया ने खानापूर्ति के लिए नाममात्र की खबरें छापकर इतिश्री कर ली. प्रदेश के मेनस्ट्रिम मीडिया ने इतने बड़े मामले को कोई खास तवज्जो नहीं दी और देता भी क्यों? क्योंकि यह सब सरकार द्वारा पिछले दिनों दी गई धमकी का असर जो था और मीडिया को राज्य सरकार से रेवेन्यू भी लेना है.

वहीं गोरखपुर में बच्चों की मौत पर हाहाकार मचाने वाला नेशनल मीडिया भी चुप्पी साधे बैठा है. चर्चा अनुसार मुख्यमंत्री की धमकी के बाद मीडिया की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कोटा में सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद भी इस अत्यंत गंभीर खबर को संजीदगी से रिपोर्ट नहीं किया गया, जो उनकी जनता के प्रति जिम्मेदारी के दावों पर सवाल खड़े करता है.

जून 2019 की घटना

जून 2019

मां का आरोप – डॉक्टर सोता रहाबेटे ने तड़पकर दम तोड़ दिया

मृतक बच्चे मयंक की मां वंशिका ने आरोप लगाया था कि 6 जून को बेटे को दस्त होने की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती करवाया था. देर रात बच्चे की तबियत बिगड़ गई. बेटे के होंठ काले गए, सांस लेने में तकलीफ होने लगी. सुबह 5 बजे बेटे के मुंह से झाग आने लगा. डॉक्टर को कई बार बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर ड्यूटी रूम में सोता रहा. डॉक्टर पर कार्रवाई न होने के कारण गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में प्रदर्शन किया था.

December 27th 2019, 8:04 am

विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय बैठक मंगलुरू में आरंभ

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मंगलुरू. विश्व हिन्दू परिषद् की तीन दिवसीय केन्द्रीय बैठक आज मंगलुरू के संघ निकेतन सभागार में आरंभ हुई. पूज्य विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज, पूज्य धर्माधिकारी वीरेन्द्र जी हेगडे, विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष श्री वीएस कोकजे, कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, अशोक चौगुले जी, विहिप के महामंत्री मिलिन्द परांडे जी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर बैठक का शुभारम्भ किया गया.

इस अवसर पर स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज ने कहा कि सर्वे भवन्तुः सुखिनः हमारी संस्कृति का मूल मंत्र है. भगवान् श्रीराम हमारे आदर्श पुरुष हैं और रामराज्य हमारी संकल्पना है. जिस प्रकार बादलों के छटते ही सूर्य पुनः प्रकाशित होता है, वैसे ही भारतीय संस्कृति का सूर्य पुनः प्रकाशित हो रहा है.

उद्घाटन सत्र में पद्मविभूषण पूज्य वीरेन्द्र हेगडे़ जी ने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण शीघ्र हो. मंदिर हमारे प्रेरणा केन्द्र हैं और ये सेवा के केन्द्र बनने चाहिए. मंदिर द्वारा संचालित सेवाकार्यों से धर्मान्तरण रूकेगा, समाज में सांस्कृतिक जागरण होगा और अब कर्नाटक में कोई भूख और अभाव के कारण धर्मान्तरण नहीं होगा, यह मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं. युवाओं में नैतिक शिक्षण आज देश की आवश्यकता है. विदेशों में भारतीय संस्कृति को मानने वाले लोग तेजी से बढ़ रहे हैं.

विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे जी ने कहा कि तीन दिन की बैठक में गत छह माह के कार्यों की समीक्षा करके आगामी कार्ययोजना बनानी है. 1964 में अपनी स्थापना के समय विश्व हिन्दू परिषद ने जो संकल्प लिया था, वह अभी पूर्ण नहीं हुआ है. सामाजिक समरसता और धर्मान्तरण समाप्त करने का काम अभी शेष है. हिन्दू समाज की समस्याओं के निराकरण में विहिप की महत्वपूर्ण भूमिका है.

December 27th 2019, 6:52 am

पाकिस्तान से आए धार्मिक प्रताड़ना के शिकार शरणार्थियों के साथ वार्ता का आयोजन

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नई दिल्ली. भारत के सिविल सोसायटी संगठनों द्वारा कॉन्सस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में पाकिस्तान से आए धार्मिक प्रताड़ना के शिकार शरणार्थियों के साथ एक वार्ता का आयोजन किया गया.

शरणार्थियों और नागरिक समाज संगठन के साथ मिलकर शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए काम करने वाले सांसद व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून एक सकारात्मक कानून है. इसके बारे में किसी के मन में कोई गलत धारणा नहीं रहनी चाहिए और इसके बारे में गलत प्रचार करके समाज में दरार पैदा करने से लोगों को बचना चाहिए. कानून के दुष्प्रचार के बजाय चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि इस क़ानून को पारित करने में 70 साल क्यों लग गए, जबकि यह कानून अत्याचार से पीड़ित लोगों को शरण देता है, अत्याचार करने वालों को नहीं.

शरणार्थी और घुसपैठिये में अंतर करना जरूरी है. घुसपैठियों को लेकर असम में बहुत संघर्ष हुए हैं, इसलिए घुसपैठी और शरणार्थी अलग-अलग हैं. इस दृष्टि से यह कानून अत्याचार पीड़ित को प्रश्रय देने की सुविधा देता है. पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों की वास्तविकता को हमें समझना होगा. दिल्ली में विभिन्न स्थानों में रह रहे पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों से मिलकर हम यह जान सकते हैं.

लोकसभा सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह बिल वर्षों से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में प्रताड़ना झेलते आए लोगों के लिए है. इन लोगों को नागरिकता तो मिलेगी ही साथ ही इनका जीवन स्तर सुधारने के लिए एक कल्याण बोर्ड भी बनेगा.

वार्ता में पाकिस्तान से शरणार्थी के रूप में आई आरती ने अपनी 20 दिन की नवजात शिशु, जिसका नाम ‘नागरिकता’ रखा गया है, के साथ हिस्सा लिया. उन्होंने उल्लेख किया कि यह कानून उन जैसे शरणार्थियों को न्याय प्रदान करता है तथा साथ ही गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है. इस अवसर पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित हो कर भारत आए 100 से ज्यादा शरणार्थियों ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का आभार जताया.

पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त से आए शरणार्थी गोवेर्धन दास मेघवाल ने कहा कि वह अपनी खुशी से भारत नहीं आए, उनके साथ वहां इतना दुर्व्यवहार किया गया है कि शब्दों में बताना मुश्किल है. वह चाहते हैं कि यहां लोग उनका साथ दें तथा उनके लिए बने नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध न करें. पाकिस्तान के सिंध प्रान्त से आए शरणार्थी भाग चंद बेलजी ने कहा कि सिंध, कराची में महिलाओं का अपहरण कर उनका बलात्कार किया जाता है और वहां बलात्कारियों को संरक्षण प्राप्त है. इसलिए उनकी वहां कोई नहीं सुनता. प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने हमें नया जीवन दिया है. इसके अतिरिक्त पाकिस्तान से आए शरणार्थी चीतन शर्मा, अर्जुन सिंह, दयाल दास अफगानिस्तान से आए प्यारा सिंह ने अपनी व्यथाओं को भावुकता के साथ सबके सामने रखा.

December 27th 2019, 4:16 am

अज्ञात लोगों ने संघ के प्रशिक्षण शिविर स्थल पर पैट्रोल बम फैंका

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रांची स्थित सिकिदरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्राथमिक शिक्षा वर्ग में गुरुवार की रात अज्ञात लोगों ने पेट्रोल बम से हमला किया. इसमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है. पेट्रोल बम से मुख्य द्वार पर लगे प्राथमिक वर्ग के बैनर को जलाने का प्रयास किया गया. हमले के बाद पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध कर दिए हैं, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी है. डीएसपी चंद्रशेखर आजाद मामले की निगरानी कर रहे हैं. मामले की छानबीन की जा रही है. क्षेत्र में पुलिस की गश्त भी बढ़ा दी गई है. घटना को लेकर सिकिदिरी थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

ओरमांझी प्रखंड के सांडी गांव स्थित मोतीराज देवी बीएड कॉलेज में प्राथमिक शिक्षा वर्ग चल रहा है. इसमें रांची जिला के विभिन्न प्रखंडों से 138 स्वयंसेवक प्रशिक्षण ले रहे हैं.

इधर, गुरुवार शाम में पांच युवक पैट्रोल बम लेकर आए व बैनर को निशाना लगाकर पेट्रोल बम फेंका गया. पर, बैनर जल नहीं पाया. इधर, घटना की जानकारी मिलते ही सिल्ली डीएसपी चंद्रशेखर आजाद, ओरमांझी इंस्पेक्टर श्याम किशोर महतो व सिकिदिरी थानेदार चंद्रशेखर चौधरी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. पुलिस ने वर्ग स्थल की सुरक्षा बढ़ा दी है.

December 27th 2019, 4:03 am

#CAA के विरोध के पीछे आईएसआई – तारिक फतेह

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नई दिल्ली. इंडियन सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज द्वारा #CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) पर सेमीनार का आयोजन किया गया. सेमीनार में लेखक, विचारक और इस्लामिक विद्वान तारिक फतेह ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को भारत के कानून और संविधान के हिसाब से चलना चाहिए, तभी वह सच्चे भारतीय कहे जाएंगे. भारत में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जो प्रदर्शन और दंगे हो रहे हैं, उनके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है जो भारत के बड़े शहरों में दंगे कराने का षड्यंत्र रच रही है. भारत के मुसलमानों को इस कानून पर सरकार का खुलकर साथ देना चाहिए और जो दल इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें नकारना चाहिए.

भारत की प्राचीन सभ्यता और गौरवशाली इतिहास पर उन्होंने कहा कि भारत के लोगों की प्राचीन काल से ही यह नीति रही है कि उन्होंने कभी किसी दूसरे समुदाय पर हमला नहीं किया और न ही किसी धर्म का विरोध किया. जबकि आज दुनियाभर में इस्लामिक मुल्कों में भीषण रक्तपात मचा हुआ है जो गैर वाजिब है. तारिक फतेह ने कहा कि भारत के ज्यादातर मुसलमान अल्ला के इस्लाम को न मानते हुए मुल्ला के इस्लाम को मानते हैं जो उन्हें गुनाह के रास्ते पर ले जा रहा है. नागरिकता संशोधन कानून को आवश्यक बताते हुए कहा कि भारत जैसे देश में अगर इस्लामिक देशों के सताए हुए लोगों को शरण नहीं दी जाएगी तो वह कहां जाएंगे. #CAA पर जिस तरह से जामिया, एएमयू और दूसरी यूनिवर्सिटी के छात्र विरोध कर रहे हैं, वह यह दर्शाता है कि मुस्लिम छात्रों को भारत के कानून और सरकार पर भरोसा नहीं है. जबकि वही सरकार लगातार उनकी बेहतरी और शिक्षा के लिए काम कर रही है.

सेमीनार का संचालन टी.वी. पैनलिस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता अंबर जैदी ने किया. इंडियन सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज की तरफ से आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ आशीष भावे ने की. इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार अतुल सिंघल ने कहा कि तारिक फतेह जैसे इस्लामिक विद्वानों से मुस्लिम तबके के लोगों को प्रेऱणा लेनी चाहिए.

December 26th 2019, 8:48 am

विनम्र श्रद्धांजलि – वनयोगी बालासाहब देशपाण्डे

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रमाकान्त केशव (बालासाहब) देशपांडे जी का जन्म अमरावती (महाराष्ट्र) में केशव देशपांडे जी के घर में 26 दिसम्बर, 1913 को हुआ था.

अमरावती, अकोला, सागर, नरसिंहपुर तथा नागपुर में पढ़ाई पूरी करने के 1938 में वे राशन अधिकारी के पद नियुक्त हुए. उन्होंने एक बार एक व्यापारी को गड़बड़ करते हुए पकड़ लिया; पर बड़े अधिकारियों के साथ मिलीभगत के कारण वह व्यापारी छूट गया. इससे बालासाहब का मन खिन्न हो गया और उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने मामा गंगाधरराव देवरस जी के साथ रामटेक में वकालत प्रारम्भ कर दी.

1926 में नागपुर की पन्त व्यायामशाला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी के सम्पर्क में आकर वे स्वयंसेवक बने थे. द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी से भी उनकी निकटता रही. उनकी ही तरह बालासाहब ने भी रामकृष्ण आश्रम से दीक्षा लेकर ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ का व्रत धारण किया था. 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में उन्होंने सक्रिय भाग लिया और जेल भी गए. 1943 में उनका विवाह प्रभावती जी से हुआ.

स्वाधीनता मिलने के बाद बालासाहब फिर से राज्य सरकार की नौकरी में आए. 1948 में उनकी नियुक्ति प्रसिद्ध समाजसेवी ठक्कर बापा की योजनानुसार मध्य प्रदेश के वनवासी बहुल जशपुर क्षेत्र में हुई. इस क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने एक वर्ष में 123 विद्यालय तथा वनवासियों की आर्थिक उन्नति के अनेक प्रकल्प प्रारम्भ करवाए. उन्होंने भोले वनवासियों की अशिक्षा तथा निर्धनता का लाभ उठाकर ईसाई पादरियों द्वारा किये जा रहे धर्मान्तरण के षड्यन्त्रों को देखा. यह स्थिति देख वे व्यथित हो उठे.

नागपुर लौटकर उन्होंने सरसंघचालक श्री गुरुजी से इस विषय पर चर्चा की. उनके परामर्श पर बालासाहब ने नौकरी से त्यागपत्र देकर जशपुर में वकालत प्रारम्भ की. पर, यह तो एक माध्यम मात्र था, उनका उद्देश्य तो निर्धन व अशिक्षित वनवासियों की सेवा करना था. अतः 26 दिसम्बर 1952 में उन्होंने जशपुर महाराजा श्री विजय सिंह जूदेव से प्राप्त भवन में एक विद्यालय एवं छात्रावास खोला. इस प्रकार ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ का कार्य प्रारम्भ हुआ.

1954 में मुख्यमन्त्री रविशंकर शुक्ल ने ईसाई मिशनरियों की देशघातक गतिविधियों की जांच के लिए नियोगी आयोग का गठन किया. इस आयोग के सम्मुख बालासाहब ने 500 पृष्ठों में लिखित जानकारी प्रस्तुत की. इससे ईसाई संगठन उनसे बहुत नाराज हो गए; पर वे अपने काम में लगे रहे.

उनके योजनाबद्ध प्रयास तथा अथक परिश्रम से वनवासी क्षेत्र में शिक्षा, चिकित्सा, सेवा, संस्कार, खेलकूद के प्रकल्प बढ़ने लगे. उन्होंने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए भी अनेक केन्द्र बनाए. इससे सैकड़ों वनवासी युवक और युवतियां पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन कर काम करने लगे.

कार्य की ख्याति सुनकर 1977 में प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई ने जशपुर आकर कार्य को स्वयं देखा. इससे प्रभावित होकर उन्होंने बालासाहब से सरकारी सहायता लेने का आग्रह किया; पर बालासाहब ने विनम्रता से इसे अस्वीकार कर दिया. वे जनसहयोग से ही कार्य करने के पक्षधर थे.

1975 में आपातकाल लगने पर उन्हें 19 महीने के लिए ‘मीसा’ के अन्तर्गत रायपुर जेल में बन्द कर दिया गया. पर, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आपातकाल की समाप्ति पर 1978 में ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के कार्य को राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया. आज पूरे देश में कल्याण आश्रम के हजारों प्रकल्प चल रहे हैं. बालासाहब ने 1993 में स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों से सब दायित्वों से मुक्ति ले ली. उन्हें देश भर में अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया.

21 अप्रैल, 1995 को उनका देहान्त हुआ. एक वनयोगी एवं कर्मवीर के रूप में उन्हें सदैव याद किया जाता रहेगा.

December 26th 2019, 6:18 am

ऊना में ‘जश्न-ए-आजादी जिंदाबाद’ लिखी पाकिस्तानी झंडियां मिलीं

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शिमला (विसंकें). हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पाकिस्तान जिंदाबाद लिखी हुई झंडियां मिली हैं. पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें प्रदेश के विभिन्न भागों में पाकिस्तान समर्थित नारे लिखे हुए मिले हैं, या कई स्थानों पर पाकिस्तान समर्थित प्रतीकों वाले गुब्बारे मिले हैं.

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्यवाही प्रारम्भ कर दी है. घटना बुधवार को ऊना के टाहलीवाल स्थित 33केवी विद्युत सब स्टेशन की है, जहां से यह झंडियां बरामद हुई है. इन पर जश्न-ए-आजादी जिंदाबाद लिखा हुआ था, साथ ही इसमें गुब्बारे भी बंधे हुए थे. संभावना है कि गुब्बारे फटने के पश्चात ये झंडियां नीचे आ गिरीं होंगी.

पुलिस थाना प्रभारी रमन ने घटना की पुष्टि की व कहा कि पाकिस्तान समर्थित झंडियों व गुब्बारों की जांच की जा रही है और पुलिस जल्द ही घटना के पीछे के कारणों का पता लगा लेगी. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि प्रदेश में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृति क्यों हो रही है.

December 26th 2019, 5:59 am

वैदिक गणित पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

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नई दिल्ली. चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वाधान में वैदिक गणित पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हो गया. सम्मेलन के अंतिम दिन का तकनीकी सत्र प्रात:10:30 बजे प्रांरभ हुआ. प्रात: कालीन सत्र का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ. श्रीराम चौथाई वाले, डॉ. कैलाश विश्वकर्मा, डीन शैक्षणिक प्रो. राधेश्याम, डॉ. पी. राजपूत, डीन डॉ. विकास गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ. पवन गुप्ता, डॉ.सुधीर, डॉ. दिनेश कुमार मैदान द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. वैदिक गणित पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश विदेश से लगभग 90 विद्वानों ने पंजीकरण करवाया था. 56 गणित विद्वानों ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया. तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वैदिक गणित पर अपने-अपने शोध पत्र रखे.

समापन समारोह में मुख्यातिथि इग्नू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि भारतीय ज्ञान में गणित और वेद बहुत महत्वपूर्ण हैं, दोनों के ही दम पर हम प्राचीन समय में विश्व का नेतृत्व कर चुके हैं. शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रयास से ही वेद और गणित को मिलाकर विश्व का कल्याण करने वाला ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से वैदिक गणित को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. वेदों और गणित को मिलाकर तैयार किया गया पाठ्यक्रम अद्भुत एवं विश्व के लिए कल्याणकारी है. चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा वैदिक गणित पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर सराहनीय पहल की है, जिसके भविष्य में सार्थक परिणाम मिलेंगे.

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि वैदिक गणित वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य है. हम सबको मिलकर वैदिक गणित के जागृति अभियान में पूर्ण सहभागिता करनी है. प्रत्येक विद्यार्थी तक वैदिक गणित की पहुंच बनाना अनिवार्य है. न्यास और विश्वविद्यालय मिलकर वैदिक गणित के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करेंगे. भविष्य में दोनों के संयुक्त सौजन्य में वैदिक गणित के अनुसंधान के नए मार्ग खुलेंगे. उन्होंने प्रत्येक सहभागी शोधार्थी को तीन लोगों को वैदिक गणित के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.के. मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि वैदिक गणित पर वैश्विक स्तर पर संगोष्ठी, सेमिनार और शोध कार्यों द्वारा चिन्तन हो. वैदिक गणित का नई तकनीकों में जहां-जहां बेहतर उपयोग हो सकता है, उस पर चिन्तन एवं शोध की जरूरत है.

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज ने सभी मुख्यातिथियों, गणित विद्वानों, शोधार्थियों एवं आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले न्यास एवं विश्वविद्यालय के सभी सदस्यों एवं आयोजकों का धन्यवाद किया.

December 26th 2019, 5:48 am

#CAA – भारत की नैतिक जिम्मेदारी है कि विस्थापितों को सम्मान और गर्व के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले

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नागरिकता संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होने बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के पश्चात कानून बन गया है. अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर आए अल्पसंख्यक भारतीय नागरिकता हासिल कर सकते हैं. हालांकि, यह सुविधा कानूनी तौर पर पहले से ही मौजूद थी, लेकिन उसमें अड़चनें अधिक थीं. अब केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है. इस कानून की आवश्यकता पिछले कई साल से महसूस की जा रही थी. विश्व के नेता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी इन तीन देशों में गैर-मुसलमानों के उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त कर चुकी हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग ने 2007 में अफगानिस्तान पर इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसमें वहां के अल्पसंख्यकों के लगातार विस्थापन पर चर्चा की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, “यहां मुश्किल से 3,000 हिन्दू और सिक्ख रहते हैं. कुछ साल पहले तक हिन्दू, सिक्ख, यहूदी, और ईसाई धर्मों के लोग यहां बसे हुए थे, लेकिन तालिबान शासन और गृह युद्ध के बाद अधिकतर लोग पलायन कर चुके है. अब इनकी कुल जनसंख्या में हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है. वर्षों के संघर्ष में लगभग 50,000 हिन्दू और सिक्ख शरण के लिए दूसरे देशों में विस्थापित हो गए हैं.”

‘द टेलीग्राफ’ के अनुसार अफगानिस्तान विश्व का सबसे असहिष्णु देश है. अखबार ने इस सूची में पाकिस्तान को 18वें स्थान पर रखा है. बांग्लादेश में भी गैर-मुसलमानों का जीवन दूभर हो चुका है. अल्पसंख्यकों की जमीनों पर जबरन कब्जा, हमला, अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन, मंदिर तोड़ना, बलात्कार और हत्या एवं नरसंहार जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं. इसका कारण सरकारों का अलोकतांत्रिक रवैया और न्यायिक प्रक्रिया का कमजोर होना है. पाकिस्तान में कई सालों तक तानाशाही रही, जबकि अफगानिस्तान ने लोकतंत्र देखा ही नहीं है. दूसरा, इन देशों के संविधान से भी कई बार छेड़खानी हो चुकी है, जिसे कट्टर धार्मिक आकार दिया गया है. इसलिए इन देशों की पूरी व्यवस्था को धर्मतंत्र ने जकड़ लिया है.

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश आधिकारिक तौर पर इस्लामिक देश हैं. यहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री अथवा राष्ट्राध्यक्ष का मुसलमान होना आवश्यक है. सभी अधिकारियों को इस्लाम के नियमों पर आधारित शपथ की बाध्यता है. राजनैतिक दल चरमपंथी उलेमाओं की सलाह के बिना एक कदम नहीं उठा सकते अथवा उनके खिलाफ नहीं जा सकते. अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान पीआरसी ने 39 इस्लामिक देशों में एक सर्वेक्षण किया था. उन्होंने मुसलमानों से पूछा कि क्या वे अपने देश को शरियत कानून के अनुसार चलाना चाहते हैं? जवाब में अफगानिस्तान के सभी लोगों (99 प्रतिशत), पाकिस्तान के 84 प्रतिशत और बांग्लादेश में 82 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनके यहां आधिकारिक कानून शरियत ही होना चाहिए.

एक अन्य सर्वेक्षण में जब पीआरसी ने सवाल किया कि ISIS के बारे में मुसलमानों का क्या सोचना है? इसके नतीजे भी चौंकाने वाले थे. अधिकतर देशों ने हिंसा को जायज बताया, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या अफगानिस्तान में 39%,  बांग्लादेश में ऐसे लोग 26 प्रतिशत और पाकिस्तान में लगभग 13% थे. ISIS एक आतंकवादी संगठन है जो गैर-मुसलमानों के खिलाफ क्रूर हिंसा के लिए बदनाम है. यह आंकड़े बताते हैं कि इन देशों में गैर-मुसलमानों का बहिष्कार किया जाता है, जिसे राजनैतिक समर्थन हासिल है.

ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मानवाधिकारों के लिए कार्य करती है. इस संस्था ने 22 सितम्बर, 2018 को सयुंक्त राष्ट्र संघ के जिनेवा स्थित मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. जिसका उद्देश्य पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के उत्पीड़न पर अंतरराष्ट्रीय जागरूकता पैदा करना था. सैकड़ों शांतिपूर्ण लोगों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. उन्होंने जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है.

अमेरिका की कॉन्ग्रेस के समक्ष भी यह मुद्दा कई बार उठाया जा चुका है. पिछले साल यानि 25 जुलाई, 2018 को कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक सदस्य, एडम शिफ ने सदन में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा – “मैं पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मानवाधिकारों के हनन पर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ. सालों से, सिंध में राजनैतिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रतिदिन जबरन धर्म परिवर्तन, सुरक्षा बलों द्वारा अपहरण और हत्या के खतरों का सामना करना पड़ता है.”

हवाई से अमेरिकी संसद की सदस्य और वहां राष्ट्रपति उम्मीदवार की दौड़ में शामिल, तुलसी गबार्ड भी 21 अप्रैल, 2016 को बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति का खुलासा कर चुकी हैं. उन्होंने सदन में कहा, “दुर्भाग्य से, बांग्लादेश में नास्तिक, धर्म निरपेक्षतावादियों, हिन्दू, बौद्ध, और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और घातक हिंसा नियमित घटनाएं हो चुकी हैं.”

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न दशकों से हो रहा है. इसलिए, यह लोग भारत में शरण लेने को मजबूर हो गए. पाकिस्तान के सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार ‘द डॉन’ में 20 मार्च, 2015 को प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, “पिछले साल पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों से जबरन धर्म परिवर्तन के 265 मामले सामने आए थे, और भारतीय दूतावास के पास विस्थापन के करीब 3,000 आवेदन लंबित हैं.

यह आंकड़ा आधिकारिक है, लेकिन वास्तविक विस्थापितों की संख्या लाखों में है. एक सच्चाई यह भी है कि इन पीड़ितों को दुनिया के किसी भी देश में आश्रय नहीं मिल सकता, क्योंकि उन देशों के अपने कानूनी प्रतिबंध हैं. उनकी एकमात्र उम्मीद भारत से है क्योंकि इन तीन देशों के साथ हमारे ऐतिहासिक सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं. इसलिए, यह भारत की नैतिक जिम्मेदारी है कि इन विस्थापितों को सम्मान और गर्व के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले, जिसके यह लोग हकदार हैं.

देवेश खंडेलवाल

 

December 26th 2019, 4:47 am

भारत यानि ज्ञान रथ, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है – अरुण कुमार जी

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गुजरात (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गुजरात प्रांत द्वारा 20 दिसंबर से 22 दिसंबर तक आयोजित त्रिदिवसीय “समर्थ भारत युवा संगम” शिविर के समारोप समोराह में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी मुख्य वक्ता रहे. उन्होंने कहा कि आज का यह समापन का कार्यक्रम शायद जीवन में नई शुरुआत भी हो सकता है. देश में एक बड़ा वर्ग है जो मानता है कि विद्यार्थी यानि अनुशासनहीनता, मौज मस्ती आदि यह सामान्य समाज की युवाओं को देखने की एक दृष्टि है. परन्तु संघ ऐसा नहीं मानता. संघ मानता है कि विद्यार्थी की एक विशेष दृष्टि है और वह जो सोचता है, उस पर प्रयोग भी करना चाहता है. किसी भी देश का भविष्य चार बातों पर निर्भर होता है कि युवा के हाथों में किताब कौन सी है, होठों पर गीत कौन सा है, कमरे में चित्र कौन से लगे हैं और वह क्या सोचता है?  रा. स्व. संघ अपने प्रारंभकाल से ही युवाओं के आधार पर कार्य कर रहा है. युवा यहां आता है, संघ को देखता है, जानता है, परखता है और फिर वह संघ को गहराई से समझकर संघ का ही हो जाता है. किसी भी शिविर की सफलता और सार्थकता इन तीन बातों पर निर्भर रहती है यानि शिविर में शिक्षार्थी को यह ध्यान में आना चाहिए कि - मैं कौन हूँ?, मुझे क्या करना है?, और जो करना है, उसकी तैयारी कैसे करनी है? इस देश की सबसे बड़ी समस्या आत्म विस्मृति है. स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि जब आत्म विस्मृति होती है तो आत्म गौरव शून्यता आती है और जब आत्म गौरव शून्यता हो आती है तो आत्महीनता भी आती है. जिस समाज का आत्मविश्वास समाप्त हो जाता है, उस समाज का आत्म कृतत्व भी समाप्त हो जाता है. स्वामी विवेकानंद जी की दो बातें आपको ध्यान में रखनी हैं, एक हम ईश्वर की संतान हैं, दूसरा सृष्टि पर जो कुछ भी है, वह कुछ न कुछ उद्देश्य के साथ है. निश्चित लक्ष्य लेकर हर कोई आता है तथा भगवान ने इंसान को बुद्धि, चेतना अन्य से अधिक दी है ताकि इस सृष्टि का पालन एवं कल्याण कर सके. हम भारत में जन्मे हैं. भारत यानि ज्ञान रथ जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है. भारत दुनिया का ऐसा अदभुत राष्ट्र है, जिसमें राष्ट्र पहले बना राज्य बाद में आया. यहां एक जन एक संस्कृति है. ईश्वर ने भारत को विश्व को मार्ग दिखाने का कार्य सौंपा है. आज हिन्दू समाज स्वाभिमान के साथ खड़ा रहने को तैयार है. हिन्दू राष्ट्र का आत्मविश्वास जग गया है. पिछले दिनों तीन महत्वपूर्ण बातें हुईं - 05, 06, 07 अगस्त 2019 को 370, 35A निष्प्रभावी हुई, 10 नवम्बर 2019 को राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त, और CAA नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू हुआ. परन्तु समाज में अभी भी बहुत सी कुरीतियां शेष हैं, अभी भी समाज में समरसता, एकात्मता की आवश्यकता है. हम अपने जीवन की रचना इस प्रकार करें कि हमारा हरेक कार्य देश सेवा के लिए हो. हमें अपना उत्थान खुद ही करना है, उसके लिए बाहर से कोई आने वाला नहीं है. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ध्रुवभाई शाह ने कहा कि देशभक्ति के संस्कार उन्हें परिवार से ही प्राप्त हुए हैं, मेरे दादा दादी ने आज़ादी की लड़ाई में भाग लिया था. दायित्व मिले न मिले, हमें कुछ न कुछ अच्छा करने का प्रयास करते रहना चाहिए, भले ही उसमें भूल क्यों न हो. कार्यक्रम के दौरान पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाड़ेसिया, प्रांत संघचालक डॉ. भरतभाई पटेल, शिविराधिकारी डॉ. रितेश भाई शाह, प्रसाद उद्योग समूह के प्रमुख ध्रुवभाई शाह, प्रांत कार्यवाह यशवंत भाई चौधरी मंचस्थ थे. शिविर में 1792 शिक्षार्थी, 160 शिक्षक तथा 250 प्रबंधक पूर्ण समय उपस्थित रहे.

December 26th 2019, 1:59 am

संघ सात्विक शक्ति की विजय के लिए कार्यरत है – डॉ. मोहन भागवत जी

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हैदराबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि बड़ा संगठन बनाना संघ का ध्येय नहीं है, बल्कि संघ का ध्येय संपूर्ण समाज को संगठित करना है. भाग्यनगर (हैदराबाद) में विजय संकल्प शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए सरसंघचालक जी ने विजय का अर्थ समझाया. उन्होंने कहा कि विजय तीन प्रकार की होती हैं. असुर प्रवृति के लोग दूसरों को कष्ट देकर सुख की अनुभूति करते हैं और उसे विजय समझते हैं. इसे तामसी विजय कहा जाता है. कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरे लोगों का उपयोग करते हैं और स्वार्थ के लिए लोगों को लड़ाते हैं. ऐसे लोगों की विजय को राजसी विजय कहा जाता है. लेकिन यह दोनों विजय हमारे समाज के लिए निषिद्ध हैं. हमारे पूर्वजों ने सदैव धर्म विजय का आग्रह किया है. सवाल यह है कि धर्म विजय क्या है. हिन्दू समाज ऐसा विचार करता है कि दूसरे के दुखों का निवारण कैसे किया जाए. दूसरों के सुख में अपना सुख मानना और दूसरों के कल्याण की भावना मन में रखना और उसी के अनुसार आचरण करने से धर्म विजय प्राप्त होती है. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे देश में भी राजस और तामस शक्तियों के खेल चल रहे हैं. लेकिन हमें सात्विक विजय चाहिए, जो शरीर, मन, आत्मा और बुद्धि को सुख देने वाली हो. सर्वत्र प्रेम और सबके विकास का साधन बनने से धर्म विजय का मार्ग प्रशस्त होता है. सरसंघचालक जी ने मशाल का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे मशाल को नीचे करने पर भी ज्वाला ऊपर की तरफ ही जाती है, उसी प्रकार सात्विक शक्तियां हमेशा उन्नयन की ओर जाती हैं. राष्ट्रकवि रविंद्र नाथ टैगोर के एक निबंध ‘स्वदेशी समाज का प्रबंध’ का उद्धरण देते हुए उहोंने कहा कि समाज को प्रेरणा देने वाले नायकों की जरूरत है. सिर्फ राजनीति से भारत का उद्धार नहीं होगा, बल्कि समाज में परिवर्तन की आवश्यकता है. रविंद्र नाथ टैगोर ने स्वदेशी समाज का प्रबंध में लिखा है कि अंग्रेजों को आशा है कि हिन्दू मुसलमान लड़कर खत्म हो जाएंगे. लेकिन आपस के संघर्षण में से ही यह समाज साथ रहने का उपाय ढूंढ लेगा और वह उपाय हिन्दू उपाय होगा. उन्होंने कहा कि संघ की दृष्टि में 130 करोड़ का पूरा समाज हिन्दू समाज है. जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और जन, जल, जंगल, जमीन और जानवर से प्रेम करता है, उदार मानव संस्कृति को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करता है और जो सभी का कल्याण करने वाली संस्कृति का आचरण करता है, वह किसी भी भाषा, विचार या उपासना को मानने वाला क्यों न हो, वह हिन्दू है. सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत परंपरा से हिन्दूवादी है. विविधता में एकता नहीं, एकता की ही विविधता है. आस्था, विश्वास और विचारधारा अलग- अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी का सार एक ही है. उन्होंने कहा कि अंधेरा हटाने के लिए दूसरों को पीटना नहीं होता, बल्कि उसके लिए दिया जलाना होता है और दिए की रोशनी से ही अंधेरा हट सकता है. एक नायक से काम नहीं चलेगा, बल्कि गांव और कस्बे में नौजवान नायकों की टोलियां तैयार करनी होंगी, जो समाज के प्रति बिना किसी स्वार्थ के काम करें और जिनका चरित्र निष्कलंक हो. इसी से भारत का भविष्य बदल सकता है. उन्होंने कहा कि विश्व भारत की तरफ देख रहा है और विश्व को सुख शांति का रास्ता दिखाने वाला संगठित हिन्दू समाज चाहिए. https://www.youtube.com/watch?v=g25wwqTwXG8            

December 25th 2019, 10:13 pm

भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है

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नई दिल्ली. हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि भारत ने ही विश्व को सबसे पहले सभ्यता एवं संस्कृति का पाठ पढ़ाया है और विश्व को शून्य व अंक भारत ने ही दिया है. भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है. वे दिल्ली में चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैदिक गणित सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परम्पराओं और संस्कृति को विश्व में अपनाया जा रहा है. वैदिक गणित हमारा अपना है, इसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है. उन्होंने कहा कि वैदिक गणित को प्रोत्साहन के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की सराहना की.

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी जी ने कहा कि भारत में गणित का अभ्युदय वैदिक काल से ही है और गणित के क्षेत्र में भारत ने प्राचीन काल में पूरे विश्व का नेतृत्व किया है. वैदिक गणित से तर्क शक्ति का विकास होता है. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का गणित अच्छा होता है, उसके जीवन का गणित अच्छा हो जाता है.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने कहा कि वह ज्ञान जो मानव कल्याण की बात करता है, वह हमें वेदों से प्राप्त होता है और वैदिक गणित भी हमें वेदों से ही मिला है. विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनकी प्रतिभा को उभारने के लिए 11 हॉबी क्लबों का गठन किया गया है. हॉबी क्लब के माध्यम से विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को बेहतर रूप से प्रदर्शित करने में सक्षम हो सकेंगे.

अमेरिका से आए हिमांशु ने कहा कि अच्छे गणित के बिना गणना का कार्य असंभव है, तो वहीं अच्छी तर्कशक्ति के बिना मानसिक स्तर का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है. किसी आकृति में संख्या मैट्रिक्स के अंतर्गत प्रश्नों में कुछ संख्याएं किसी विशेष नियम के तहत व्यवस्थित होती हैं. यदि आपको नियम ज्ञात है तो ही लुप्त संख्या को ज्ञात कर सकते हैं. गणितीय संक्रियाएं एवं गणितीय ज्ञान से हम तर्कशक्ति परीक्षा में प्रयोग करते हैं. गणितीय नियमों से तात्पर्य सरलीकरण, औसत, अनुपात, साझेदारी, प्रतिशत, लाभ-हानि, ब्याज, क्षेत्रमिति, आयतन आदि से संबंधित नियमों के ज्ञान से है. उन्होंने बताया कि गणित के बिना प्रमाण नहीं बनता, और प्रमाण तर्कशक्ति से प्राप्त होते हैं. तर्कशक्ति के बिना गणित हल नहीं किया जा सकता. वैदिक गणित से हम बड़ी से बड़ी गणनाओं को शीघ्र एवं सही हल कर सकते हैं. वैदिक गणित में शास्त्र, वेद, पुराणों, एवं ऋषि मुनियों द्वारा गणित की गणना के सरल सूत्र बताए गए हैं, जिनकी पालना करने से गणित की गणनाओं को सरलता से हल कर सकते हैं. जीवन में गणित एवं तर्कशक्ति का विशेष महत्व है. मनुष्य का अधिकांश ज्ञान गणित और तर्कशक्ति पर आधारित है. इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को गणित के सामान्य नियम ज्ञात होने चाहिएं.

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की. कुल सचिव डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया. मंच का संचालन  डॉ. सुनीता भरतवाल तथा डॉ. स्नेहलता शर्मा ने किया. विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया.

December 24th 2019, 4:30 am
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