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सेवा भारतीय संस्कृति का मूल तत्व है – अशोक पांडे

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सेवा भारती हेल्पडेस्क का हुआ शुभारंभ, एक फोन पर पहुंचेगी सहायता

भोपाल. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने सेवा भारती हेल्प डेस्क के शुभारंभ अवसर पर कहा कि  सेवा, भारतीय संस्कृति का मूल तत्व है, यह स्वभाव है! इसलिए किसी भी विकट परिस्थिति में स्वयंसेवक स्वत: स्फूर्त हो कर समाज की सेवा में जुट जाते हैं.

उन्होंने कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान सेवा भारती के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए कार्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संकट के समय में सेवा भारती के स्वयंसेवकों ने पूरे परिवार को अपने समाज का अंग मानते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सेवा के कार्य किए है. आज इसी क्रम में सेवा भारती भोपाल द्वारा हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया जा रहा है, इससे समाज को सीधा लाभ पहुंचेगा.

कार्यक्रम के प्रारंभ में सेवा भारती भोपाल के संयोजक कर्ण सिंह कौशिक ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी. मंच संचालन विभाग सेवा प्रमुख पर्वत सिंह ने किया.

एक फोन पर पहुँचेगी सहायता

सेवा भारती द्वारा समाज के प्रत्येक वर्ग तक सुगमता से सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से हेल्पडेस्क का शुभारंभ किया गया है. किसी भी तरह की सहायता के लिए हेल्प डेस्क नंबर – 7552447102 पर फोन कर अपनी समस्या बतायी जा सकती है.

एंबुलेंस और मुक्ति वाहन सेवा का शुभारंभ

जन सेवा केंद्र के शुभारंभ के अवसर पर सेवा भारती मध्यभारत द्वारा भोपाल महानगर के लिए एंबुलेंस और मुक्ति वाहन सेवा का भी शुभारंभ किया गया.

सेवा भारती आनंदधाम परिसर में आरंभ हुए हेल्प डेस्क शुभारंभ कार्यक्रम अवसर पर हृदय रोग विशेषज्ञ डाक्टर राजेश सेठी, न्यूरो सर्जन डॉ. सुनील मालिक, सेवा भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री रामेंद्र सिंह घुरौया, सेवा भारती प्रांत अध्यक्ष गोपाल कृष्ण गोदानी एवं सेवा भारती प्रांत सचिव विमल जी त्यागी समेत नगर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

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July 23rd 2021, 10:54 am

टीकाकरण का आंकड़ा 42 करोड़ के पार, ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान को लेकर अधिक उत्साह

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नई दिल्ली. कोरोना के खिलाफ जंग में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में चल रहा है. देश में टीकाकरण आंकड़ा 42 करोड़ को पार कर गया है. 23 जुलाई को प्रातः सात बजे तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 51,94,364 सत्रों में कुल 42,34,17,030 वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं.

अभियान के दौरान देखने में आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण की गति तेज है. ग्रामीण स्वयं आगे आकर टीकाकरण करवा रहे हैं. वहीं, अभियान में लगे स्वास्थ्य कर्मी भी परेशानियों का सामना करते हुए दुर्गम क्षेत्रों तक टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति छूट न जाए. यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, अरुणाचल, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कई गांवों में शत-प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है.

अरुणाचल प्रदेश के एक सुदूर गांव के 16 चरवाहे मई में कोरोना टीकाकरण शिविर में शामिल नहीं हो सके. लगभग दो महीने बाद, स्वास्थ्य अधिकारियों ने लुगथांग गांव में उन्हें टीका लगाने के लिए सोमवार को समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई तक पहुंचने के लिए नौ घंटे से अधिक समय तक ट्रैकिंग की.

राज्य के तवांग जिले के डोमस्टांग में 19 मई को आयोजित टीकाकरण शिविर में चरवाहे नहीं पहुंच सके थे. इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने खुद जाने का फैसला किया. टीम ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए थिंगबू हाइडल नामक स्थान पर निकटतम मोटर योग्य सड़क से ट्रैकिंग की.

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के करसोग की दूरदराज पंचायत सरतेयोला में स्वास्थ्य विभाग की टीम को पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. टीम चलने फिरने में असमर्थ लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए सरतेयोला जा रही थी.

सड़क निर्माण कार्य के कारण रास्ता खराब हो गया था. टीम ने टीकाकरण के लिए सरतेयोला जाने की ठानी और जेसीबी के पंजे (बकेट) में बैठकर ढांक को पार किया. टीम ने चलने फिरने में असमर्थ करीब 12 बुजुर्गों को टीका लगाया. घर द्वार पर कोरोना वैक्सीन लगने से बुजुर्गों ने राहत की सांस ली.

बिहार के बाढ़ग्रस्त इलाकों में ‘टीका वाली नाव’ की काफी चर्चा है. मुजफ्फरपुर जिले के सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित प्रखंड कटरा में टीके वाली नाव पानी में तैर कर कई गांवों में घर-घर पहुंची और उस पर सवार टीकाकर्मियों ने लोगों को टीका लगाया. ऐसे ही बाढ़ग्रस्त अन्य जिलों में भी टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है.

झारखंड के सिमडेगा जिला मुख्यालय से लगभग 44 किमी दूर छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा है वनमारा गांव. यहां तक पहुंचने लिए आज भी कच्ची सड़क ही है. इसके बावजूद टीकाकर्मियों ने गांव में जाकर सभी लोगों को कोरोना का टीका लगाया. 442 लोगों के इस गांव में कुल 306 लोगों ने टीका लेकर स्वयं को कोरोना से सुरक्षित कर लिया है. वनमारा सिमडेगा जिले का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां सभी पात्र लोगों को टीका लगा दिया गया है.

पाकिस्तान के साथ लगी नियंत्रण रेखा (एलओसी) के आसपास के कई गांवों में सभी पात्र लोगों को टीका लगाया गया है. एक ऐसा ही गांव है बोबिया. इसे इस क्षेत्र में भारत का अंतिम गांव कहा जाता है. यहां 18 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी लोगों को टीका लग चुका है.

इससे पहले लद्दाख के सभी गांवों में टीकाकरण हो चुका है, जबकि इस सुदूर क्षेत्र में कई तरह की परेशानियां हैं. इसके बावजूद शत-प्रतिशत टीकाकरण होना बड़ी बात है.

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के नौगांव की 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला सोनिया बाई शर्मा की प्रेरणा से पूरे गांव का 100 प्रतिशत टीकाकरण हो गया. पहले अफवाहों के कारण गांव के लोग कोरोना का टीका लगवाने से डरते थे. टीका लगवाने के बाद बुजुर्ग महिला ने बताया कि उन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई तो और लोग टीका लगवाने के लिए तैयार हो गए.

जम्मू-कश्मीर — 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 12 जिले पहले से ही सौ फीसद टीकाकरण कर चुके हैं. इनमें कश्मीर संभाग के आठ जिले अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां, पुलवामा, बडगाम, बारामुला, गांदरबल और बांडीपोरा शामिल है. जम्मू संभाग में जम्मू, राजौरी, पुंछ और सांबा जिलों में सौ फीसद टीकाकरण हुआ है. अन्य आठ जिलों में श्रीनगर जिले में 90.20 फीसद, कुपवाड़ा में 78.49, ऊधमपुर 88.31, कठुआ 94.23, रामबन 95.13, डोडा 90.35 और किश्तवाड़ 96.65 फीसद टीकाकरण हुआ है.

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July 23rd 2021, 5:53 am

पीर पराई जाने रे – कलाकारों की सहायतार्थ अभिनेता अक्षय कुमार ने दी पचास लाख रु की सहयोग राशि

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी से उपजी स्थिति में आर्थिक संकट का सामना कर रहे कलाकारों की सहायता के लिए अभिनेता अक्षय कुमार आगे आकर पचास लाख रुपए का सहयोग करते हुए कला जगत की अन्य तमाम हस्तियों से सहयोग के लिए आगे आने का आग्रह किया.

अक्षय कुमार ने कलाकारों की सहायता के लिए संस्कार भारती द्वारा चलाए जा रहे ‘पीर पराई जाणे रे’ अभियान का समर्थन करते हुए एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि “कोरोना महामारी ने कलाकारों के सामने आर्थिक समस्या पैदा कर दी है, इसलिए पिछले 2 साल से उनके पास कोई काम नही है. कलाकार हमेशा देश के लिए खड़ा रहता है. भारत का समाज भी जरूरत पड़ने पर कलाकारों के साथ खड़ा होगा.”  वीडियो के अंत में कलाकार हैं तो कला है, कला है तो देश है….का संदेश देते हुए उन्होंने कला जगत के साथ साथ समाज से भी इस अभियान में सहयोग करने का निवेदन किया.

महाभारत के ‘मैं समय हूँ’ की आवाज व प्रसिद्ध हिन्दी उद्घोषक हरीश भिमानी ने भी आगे आकर पांच लाख रुपए का सहयोग करते हुए कला जगत की अन्य तमाम हस्तियों से इसके लिए आगे आने की अपील की है. विदित हो कि दिल्ली से सांसद व लोक गायक मनोज तिवारी ने भी इस मुहिम को अपना समर्थन व सहयोग देते हुए 10 लाख रुपए देने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं.

विगत दो सप्ताह पूर्व गीतकार मनोज मुंतशिर और लोक गायिका मालिनी अवस्थी द्वारा संचालित इस आभासी कॉन्सर्ट में संगीत, सिनेमा, नृत्य एवं अन्य कला जगत के कई बड़े नाम अपनी प्रस्तुति के साथ अभियान के समर्थन में जुड़े थे. कलासाधकों की सहायता के लिए निर्मित ‘पीर पराई जाणे रे’ समिति के अध्यक्ष प्रसिद्ध सूफी गायक व सांसद हंसराज हंस हैं.

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July 22nd 2021, 3:11 pm

14 इंजीनियरिंग कॉलेजों में क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम, एआईसीटीई ने भी प्रदान की स्वीकृति

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अपनी मातृभाषा के साथ हम भावनात्मक संबंध साझा करते हैं – उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली. देश के 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रारंभ करने वाले हैं. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने भी 11 भाषाओं में बी-टेक कोर्स आयोजित करने को स्वीकृति प्रदान कर दी है. इंजीनियरिंग संस्थाओं में बी-टेक कोर्स हिन्दी, मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मलयालम, बंगाली, असमी, पंजाबी और उड़िया में कोर्स उपलब्ध होगा.

क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम उपलब्ध करवाने को लेकर इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रयास की उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भी सराहना की. उपराष्ट्रपति ने तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों से इस ओर प्रयास करने का अनुरोध किया. क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम उपलब्ध होना छात्रों के लिए वरदान साबित होगा.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मेरी इच्छा वह दिन देखने की है, जब सभी इंजीनियरिंग, चिकित्सा और कानून जैसे व्यावसायिक और पेशेवर पाठ्यक्रम मातृ भाषा में पढ़ाए जाएंगे. 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेजों द्वारा नए शैक्षणिक वर्ष से क्षेत्रीय भाषाओं में चुनिंदा शाखाओं में पाठ्यक्रम प्रस्तुत करने के निर्णय का भी स्वागत किया.

मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने के लाभों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे समझ और ग्रहण करने का स्तर बढ़ता है. किसी विषय को दूसरी भाषा में समझने से पहले उस भाषा को सीखना और उसमें निपुणता हासिल करनी पड़ती है, जिसमें काफी मेहनत की जरूरत होती है. लेकिन उसी विषय को मातृभाषा में सीखने के दौरान ऐसा नहीं होता है.

देश की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत सैकड़ों भाषाओं और हजारों बोलियों का घर है. हमारी भाषाई विविधता हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की मजबूत आधारशिला है. हमारी मातृभाषा या हमारी मूल भाषा हमारे लिए बहुत महत्व रखती है क्योंकि इसके साथ हम गहरे भावनात्मक संबंधों को साझा करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में हर दो सप्ताह में एक भाषा विलुप्त हो जाती है. भारत में 196 भारतीय भाषाएं संकट में हैं. हमारी मूल भाषाओं के संरक्षण के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने और मातृभाषा में शिक्षण ग्रहण करने को बढ़ावा देने की जरूरत है. उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक भाषाएं सीखने का भी अनुरोध किया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभिन्न भाषाओं में प्रवीणता आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में एक बढ़त प्रदान करती है. सीखने वाली हर भाषा के साथ हम दूसरी संस्कृति के साथ अपने संबंधों को घनिष्ठ बनाते हैं.

नई शिक्षा नीति कम से कम 5वीं कक्षा तक और वांछनीय रूप से 8वीं और उसके बाद तक मातृभाषा/ स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा/घर की भाषा में शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करती है. विश्व में अनेक अध्ययनों ने यह स्थापित किया है कि शिक्षा के शुरुआती चरणों में मातृभाषा में पढ़ने से बच्चे का आत्म-सम्मान बढ़ता है और उसकी रचनात्मकता में भी बढ़ोतरी होती है.

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July 22nd 2021, 3:11 pm

डीआरडीओ ने न्यूनतम रेंज के लिए स्वदेश में विकसित एमपी-एटीजीएम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

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एमपी-एटीजीएम एक कम वज़नी, फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, मिनीएचराइज्ड इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर, सेना और आत्मनिर्भर भारत के लिए बड़ा प्रोत्साहन

नई दिल्ली. आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने और भारतीय सेना को मजबूत करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 21 जुलाई, 2021 को स्वदेशी रूप से विकसित कम वजन वाली, फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटीटैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) का सफल परीक्षण किया. मिसाइल को एक मैन पोर्टेबल लॉन्चर थर्मल साइट के साथ एकीकृत कर लॉन्च किया गया था और लक्ष्य एक टैंक की तरह बनाया गया था. मिसाइल ने सीधा हमला किया और लक्ष्य को सटीक रूप से पहचाना. इस परीक्षण ने न्यूनतम रेंज को सफलतापूर्वक सत्यापित किया. मिशन ने अपने सभी उद्देश्यों को पूरा किया. मिसाइल का अधिकतम रेंज के लिए पहले ही सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया जा चुका है.

मिसाइल को उन्नत एवियोनिक्स के साथ अत्याधुनिक मिनीएचराइज्ड इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर के साथ रखा गया है. इस परीक्षण के बाद देश स्वदेशी तीसरी पीढ़ी के मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल निर्मित करने के अंतिम चरण में पहुंच गया है.

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July 22nd 2021, 6:02 am

आरबीआई ने लोकल डाटा स्टोरेज नियमों की अवहेलना पर मास्टर कार्ड पर लगाया प्रतिबंध, आज से लागू

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नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने मास्टरकार्ड एशिया पैसेफिक पर नए क्रेडिट, डेबिट और प्रीपेड कार्ड ग्राहक बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. आईबीआई के निर्देश 22 जुलाई से लागू हो रहे हैं. कंपनी द्वारा नियमों का अनुपालन नहीं करने के कारण आरबीआई ने यह कार्रवाई की है. आरबीआई की कार्रवाई से मास्टरकार्ड के वर्तमान ग्राहकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

रिपोर्ट्स के अनुसार RBI ने मास्टरकार्ड पर लोकल डाटा स्टोरेज नियमों की अवहेलना पर 22 जुलाई से नए ग्राहकों को ऑन-बोर्ड करने से प्रतिबंधित किया है. RBI ने अप्रैल 2018 को पेमेंट सेवाएं देने वाली सभी कंपनियों, फिनटेक के लिए डेटा स्टोरेज से जुड़े नियम जारी किए थे. 2018 के नियमों के अनुसार, विदेशी कंपनियों को देश में पेमेंट का डेटा लोकल सर्वर पर रखना होगा. मास्टरकार्ड पर इन नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है. कंपनी को पर्याप्त समय और अवसर देने के बाद भी, वह भुगतान प्रणाली आंकड़ों के रखरखाव पर दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रही है.

आरबीआई के अनुसार, भुगतान प्रणाली आंकड़ों के रखरखाव को लेकर छह अप्रैल, 2018 को परिपत्र जारी किया गया था. इसके तहत सभी संबंधित सेवा प्रदाताओं को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि वे छह महीने के भीतर भुगतान व्यवस्था से संबंधित सभी आंकड़े केवल भारत में ही रखने की व्यवस्था करें.

मास्टरकार्ड तीसरी प्रमुख भुगतान प्रणाली परिचालक है, जिस पर भुगतान प्रणाली आंकड़ों के रखरखाव पर आरबीआई के निर्देश का अनुपालन न करने को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है. इससे पहले, आरबीआई ने अमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंग कॉर्प और डाइनर्स क्लब इंटरनेशनल लिमिटेड को मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए एक मई से अपने कार्ड नेटवर्क पर नए घरेलू ग्राहकों को जोड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था.

रिपोर्ट्स के अनुसार मास्टर कार्ड पर प्रतिबंध का सबसे अधिक प्रभाव एक्सिस बैंक (Axis Bank), यस बैंक (Yes Bank), इंडसइंड बैंक, सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और बजाज फिनसर्व पर होगा. ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा (Nomura) की रिपोर्ट के अनुसार, अब करीबन सात ऐसे वित्तीय संस्थान या बैंक हैं जो नए कार्ड नहीं जारी कर पाएंगे.

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July 22nd 2021, 6:02 am

जम्मू कश्मीर – राज्य के बाहर विवाह करने पर जीवनसाथी को भी मिलेगा डोमिसाइल सर्टिफिकेट

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जम्मू-कश्मीर. जम्मू कश्मीर प्रशासन ने मंगलवार को ऐतिहासिक निर्णय लिया. अब जम्मू कश्मीर की स्थायी निवासी युवतियों से शादी करने वाले पुरुषों और पुरुषों से शादी करने वाली बाहरी राज्य की युवतियों को भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट (स्थायी निवासी प्रमाण पत्र) मिल सकेगा. नए नियम के अनुसार राज्य की निवासी और डोमिसाइल सर्टिफिकेट रखने वाली युवती से शादी करने वाले पुरुषों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिलने में आसानी होगी. इसी तरह से प्रदेश के युवकों से विवाह करने वाली दूसरे राज्यों की बेटियों को भी विवाह प्रमाण पत्र देकर आसानी से डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिल सकेगा.

अनुच्छेद 370 निरस्त  होने के बाद जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल व्यवस्था की शुरूआत की थी, तो उसमें यह व्यवस्था रखी गई थी कि केवल 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहने, निर्धारित अवधि तक प्रदेश में सेवाएं देने और विद्यार्थियों के लिए निर्धारित नियमों के अधीन आने वाले लाभार्थी ही डोमिसाइल सर्टिफिकेट के हकदार होंगे. लेकिन उसके बाद सरकार ने अब नियमों में संशोधन किया है.

जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद बनी डोमिसाइल सर्टिफिकेट व्यवस्था में जम्मू-कश्मीर की बेटियों को तो इंसाफ मिल गया था. लेकिन उनके पतियों के अधिकारों को लेकर संशय बना हुआ था. यह विषय कई बार केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया गया, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की बेटियों के परिवारों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था. लेकिन अब जम्मू-कश्मीर सरकार ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनाने संबंधित कानून में संशोधन करके प्रदेश की बेटियों के पतियों को डोमिसाइल प्रमाण पत्र देने का निर्णय लिया है.

उपराज्यपाल प्रशासन के निर्णय से हजारों परिवारों को राहत मिली है, जो जम्मू-कश्मीर की युवतियों से शादी करने के बाद भी प्रदेश में ना तो सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते थे और ना ही अपने नाम से संपत्ति खरीद सकते थे. लेकिन अब संबंधित कानून में संशोधन होने के बाद सुविधा होगी.

जम्मू-कश्मीर सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को अधिसूचना जारी कर डोमिसाइल प्रमाणपत्र नियमों में सातवां नियम शामिल किया है. यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 का प्रयोग करते हुए ही जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज (डीसेंट्रलाइजेशन एंड रिक्रूटमेंट) एक्ट 2010 की धारा 15 के तहत शामिल किया है. हालांकि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में ना तो पति और ना ही पत्नी का जिक्र किया गया है, लेकिन यह अवश्य कहा गया है कि इस श्रेणी में आने वाले आवेदक को डोमिसाइल हासिल करने के लिए केवल अपने जीवनसाथी का डोमिसाइल प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र जमा करवाना होगा. सभी औपचारिकताएं पूरा करने पर संबंधित तहसीलदार डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी कर सकता है.

आंकड़ों के अनुसार मार्च 2021 तक करीब 32 लाख से ज्यादा लोगों का डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी हुआ है. कुल 35 लाख से अधिक लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था. लेकिन आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण कई लाख लोगों का आवेदन रद्द हुआ था.

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July 22nd 2021, 6:02 am

पाकिस्तान – पूर्व राजनयिक की बेटी की हत्या, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल

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नई दिल्ली. पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी नहीं है. पाकिस्तान में उच्च अधिकारियों के परिवार की महिलाएं भी असुरक्षित हैं. मंगलवार को पाकिस्तान में एक पूर्व राजनयिक की बेटी की नृशंसता से हत्या कर दी गई.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दक्षिण कोरिया में पाकिस्तान के राजदूत रहे शौकत मुकादम की बेटी नूर मुकादम की इस्लामाबाद में उनके घर में हत्या कर दी गई. हत्यारे ने पहले नूर मुकादम को गोली मारी और इसके बाद उनका सिर कलम कर दिया. डॉन’ में प्रकाशित समाचार के अनुसार शौकत मुकादम की बेटी नूर मुकादम (27) इस्लामाबाद के सेक्टर एफ-7/4 में मंगलवार को मृत पायी गयी थी. शौकत मुकादम पूर्व में दक्षिण कोरिया और कजाकिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं. पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हत्यारा पीड़िता का ही एक दोस्त है, जिसका नाम जहीर जफर है. वह पाकिस्तान के एक बड़े बिजनेसमैन का बेटा है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

घटना के बाद पाकिस्तान की जनता में आक्रोश बढ़ रहा है, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान की कार्यप्रणाली पहले ही कटघरे में है. सोशल मीडिया पर #JusticeForNoor और #JusticeForNoorMukadam ट्रेंड करवाया. रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जहीद हफीज चौधरी ने नूर मुकादम की मौत पर शोक व्यक्त किया है. कहा कि वह अपने वरिष्ठ सहयोगी और पाकिस्तान के पूर्व राजदूत की बेटी की हत्या पर बेहद दुखी हैं और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं. उन्हें आशा है कि हत्यारों को उनके गुनाह की सजा जल्द मिलेगी.

अभी हाल ही में पाकिस्तान में मौजूद अफगानिस्तान के राजनयिक नजीबुल्लाह की बेटी को अगवा कर लिया गया था. इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान में मौजूद राजनयिकों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहा है. हाल ही में अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके बताया था कि पाकिस्तान में अफगान राजदूत नजीबुल्लाह अलीखील की बेटी सिलसिला अलीखील का बीते 17 जुलाई (शनिवार) को इस्लामाबाद स्थित उनके घर लौटते वक्त अपहरण कर लिया गया था. अगवा करने के बाद उसे कई घंटों तक बुरी तरह से टॉर्चर किया गया, हालांकि अपहरणकर्ताओं के चुंगुल से बच निकली थी.

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July 22nd 2021, 6:02 am

हमें सेकुलरिज्म, सोशलिज्म, डेमोक्रेसी दुनिया से सीखने की आवश्यकता नहीं, ये हमारी परंपरा में है – डॉ.

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गुवाहाटी, असम. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत हमारी भोग भूमि नहीं है. ये तो हमारी कर्मभूमि है, कर्तव्य की भूमि है. यहां रहने वाले प्रत्येक का इस भूमि के प्रति, समाज के प्रति कर्तव्य है और वह उस संस्कृति ने निर्धारित कर दिया है. वह किसी पंथ, संप्रदाय और पूजा पर आधारित नहीं है. सरसंघचालक “Citizenship Debate over NRC & CAA: Assam and Politics of History” पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि सेकुलरिज्म, सोशलिज्म, डेमोक्रेसी, ये बातें दुनिया से हमको सीखनी नहीं हैं. ये हमारी परंपरा में, हमारे खून में है. और इसलिए सबसे अधिक प्रामाणिकता से उसको लागू करके हमारे देश ने उसको जीवंत रखा.

उन्होंने बताया कि पहली बार मेरी प्रणव दा से भेंट हुई थी. उन्होंने ही कहा कि धर्मनिरपेक्षता को लेकर चर्चा चल रही है. धर्मनिरपेक्षता हमें कौन सिखाएगा. हमको दुनिया क्या सिखा सकती है, हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है. फिर उन्होंने कहा कि हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष होगो, फिर हम सेकुलर होंगे ऐसा नहीं है. हमारे संविधान के निर्माता ही इस माइंड सेट के थे, सेकुलर थे. इसलिए वो ऐसा बनाया. फिर कुछ देर रुककर कहा – और ये हमारे संविधान के निर्माता पहले लोग नहीं है भारत में सेकुलर. पांच हजार वर्षों की हमारी संस्कृति उसने हमको यही सिखाया है. दुनिया क्या सिखाएगी हमको सेकुलरिज्म.

मोहन भागवत जी ने कहा कि भाऊराव जी देवरस इंग्लैंड गए थे. वहां राजनयिकों, सांसद, नाइटहुड की उपाधि प्राप्त लोगों के साथ भोजन था. भोजन के समय भाषण होते हैं तो एक ने उनके स्वागत में भाषण दिया – बड़ा अच्छा लगता है कि भारत के साथ हमारा संबंध आया, भारत को प्रजातंत्र हमने दिया है….वगैरह-वगैरह.

तो भाऊराव जी ने उनको कहा कि आपने सब कुछ अच्छा कहा, धन्यवाद. लेकिन एक तथ्यात्मक गलती है. ये गणतंत्र आपने नहीं दिया. शायद हमारे यहां से वाया ग्रीक आपके यहां आया होगा. क्यों जब आपका देश नहीं था तब भी हमारे यहां वैशाली, लिच्छवी, ऐसे अनेक गणराज्य थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि सीएए और एनआरसी किसी भारतीय के नागरिक के विरूद्ध बनाया हुआ कानून नहीं है, भारत के नागरिक मुसलमान को सीएए से कुछ नुकसान नहीं पहुंचने वाला. राजनीतिक लाभ के लिए दोनों विषयों (सीएए-एनआरसी) को हिन्दू मुसलमान का विषय बना दिया, यह हिन्दू मुसलमान का विषय ही नहीं है. अपने देश के नागरिक कौन हैं, ये जानने की प्रत्येक पद्धति प्रत्येक देश में है. उसमें एनआरसी एक पद्धति है. ये किसी के खिलाफ नहीं है.

उन्होंने कहा कि हमें दुनिया की किसी भाषा से, किसी धर्म से, किसी बात से परहेज नहीं है क्योंकि हमारी दृष्टि वसुधैव कुटुंबकम की है. स्वदेशोभुवनत्रयः. हमारे देश में तो कितने अलग-अलग राज्य थे, लेकिन वीज़ा, पासपोर्ट नहीं था. यात्राएं होती थीं. हिमालय से कन्याकुमारी, कच्छ से कामरूप लोगों का आना जाना चलता था. क्योंकि व्यवस्था की दृष्टि से राज्य है, देश है. हमारा तो पूरा देश है, हम तो स्वदेशोभुवनत्रयः मानते हैं. ऐसा मानने वाले हम सब लोग थे.

हमारे यहां पहले से ही पूजाओं की स्वतंत्रता है, कुछ बिगड़ता नहीं हमारा. हम भगवान को एक रूप में देखते हैं, आप किसी दूसरे रूप में देखते हैं ठीक है. अपनी भक्ति में हम पक्के हैं, आपकी भक्ति में आप भी पक्के रहो. हमको कोई दिक्कत नहीं है. एक-दूसरे की भाषा का आदर और सम्मान करके हम रहेंगे, एक-दूसरे की भाषाओं की सुरक्षा की भी चिंता करेंगे. यह सारी बातें सभी कहते हैं, यह बात आदर्श की बात के रूप में कही जाती है. लेकिन, इस आदर्श को चरितार्थ करने वाला केवल हिंदुस्तान की परंपरागत संस्कृति का आचरण करने वाला व्यक्ति है, ये हमारी संस्कृति है.

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि 1930 से योजनाबद्ध रीति से मुसलमानों की संख्या बढ़ाने के प्रयास हुए. उसका कारण जैसा बताया गया अभी कि कोई संत्रास था, इसलिए इधर आ कर यहां संख्या बढ़े इसलिए नहीं था. इकोनॉमिक आवश्यकता थी, ऐसा नहीं है. एक योजनाबद्ध विचार था कि जनसंख्या बढ़ाएंगे, अपना प्रभुत्व, अपना वर्चस्व स्थापित करेंगे. और इस देश को पाकिस्तान बनाएंगे.

यह पूरे पंजाब के बारे में था, यह सिंध के बारे में था, यह असम के बारे में था, यह बंगाल के बारे में था. कुछ मात्रा में सत्य हो गया, भारत विखंडन हो गया पाकिस्तान बन गया. लेकिन जैसा पूरा चाहिए था, वैसा नहीं मिला. असम नहीं मिला, बंगाल आधा ही मिला, पंजाब आधा ही मिला. बीच में कॉरिडोर चाहते थे, वह नहीं मिला. तो फिर जो मांग के मिला वो मिला, अब इसको कैसे लेना ऐसा भी विचार चला.

कुछ लोग पीड़ित संत्रस्त होकर आते थे. वह शरणार्थी थे, रिफ्यूजीस थे. और कुछ लोग आते थे जाने अनजाने होगा, चाहे अनचाहे होगा. लेकिन संख्या बढ़ाने का उद्देश्य लेकर आते थे. वह संख्या बढ़े, इसलिए उनको सहायता भी होती थी, आज भी होती है. जितने भू-भाग पर हमारी संख्या बढ़ेगी, उतने भू-भाग पर सब कुछ हमारे जैसा होगा. जो हमारे से अलग हैं, वह हमारी दया पर वहां रहेगा अथवा नहीं रहेगा. पाकिस्तान में यही हुआ, बांग्लादेश में यही हुआ.

हम यह अनुभव करते हैं कि ऐसे लोग आकर यहां बसते हैं, वहां संख्या अगर बढ़ गई तो जिनकी संख्या कम हो गई उनको सदा चिंता में रहना पड़ता है. यह भारत का अनुभव है, असम का अनुभव है. फिर भी हमारी वृत्ति क्या है, एसिमिलेशन होना चाहिए.

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July 22nd 2021, 1:03 am

डीआरडीओ ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आकाश-एनजी का सफल परीक्षण किया

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नई पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए उच्च स्तरीय गतिशीलता, भारतीय वायु सेना की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ावा

नई दिल्ली. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ओडिशा के तट के करीब एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से सतह से हवा में मार करने वाली नई पीढ़ी आकाश मिसाइल (आकाश-एनजी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. उड़ान का परीक्षण भूमि आधारित प्लेटफॉर्म से दोपहर करीब 12:45 बजे किया गया, जिसमें मल्टीफंक्शन रडार, कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सिस्टम और तैनाती विन्यास में भाग लेने वाले लांचर जैसी सभी हथियार प्रणालियां थीं. यह मिसाइल भारतीय वायु सेना को मजबूत करेगी.

मिसाइल प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), हैदराबाद द्वारा डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया है. प्रक्षेपण को भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधियों ने देखा. उड़ान डेटा को हासिल करने के लिए आईटीआर ने इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री जैसे कई रेंज स्टेशनों को तैनात किया. इन प्रणालियों द्वारा कैप्चर किए गए संपूर्ण उड़ान डेटा से संपूर्ण हथियार प्रणाली के दोषरहित प्रदर्शन की पुष्टि की गई है. परीक्षण के दौरान, मिसाइल ने तेज और फुर्तीले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए आवश्यक उच्चस्तरीय गतिशीलता का प्रदर्शन किया.

एक बार तैनात होने के बाद आकाश-एनजी हथियार प्रणाली भारतीय वायु सेना की हवाई सुरक्षा क्षमता में शानदार इज़ाफ़ा करने वाली साबित होगी. उत्पादन एजेंसियों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने भी परीक्षणों में भाग लिया.

 

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July 22nd 2021, 1:03 am

राज्यों से वन-संसाधन अधिकार मिशन-मोड में लागू करने का आह्वान

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जशपुर नगर. अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 19 जुलाई 2021 को जशपुर नगर (छत्तीसगढ़) में संपन्न हुई. जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खराडी, महामंत्री योगेश जी बापट एवं विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

06 जुलाई, 2021 को केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा एवं तत्कालीन केंद्रीय वन-पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जनजाति समाज को वन संसाधनों के अधिकार देने की घोषणा करते हुए दोनों मंत्रालयों के सचिवों के हस्ताक्षर द्वारा एक संयुक्त-पत्रक जारी किया था. इस ऐतिहासिक निर्णय का अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की कार्यकारी मंडल की बैठक में स्वागत किया गया. विषय से संबंधित प्रस्ताव बैठक में पारित किया गया.

प्रस्ताव में निम्नलिखित मांगें कल्याण आश्रम द्वारा की गईं……

  1. केंद्रीय वन-पर्यावरण मंत्रालय एवं केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त प्रतिबद्धता के अनुसार राज्यों में भी जनजाति विभाग एवं वन विभाग मिलकर सामुदायिक वन-संसाधनों के अधिकारों को राज्य के प्रत्येक गांव तक, ग्राम-सभा तक पहुंचाएं.
  2. इसके क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक राज्य अपनी कालबद्ध कार्य योजना बनाते हुए, हर तीन माह के प्रतिवेदन में धारा 3.1(झ) के तहत प्रबंधन के अधिकारों की वर्तमान स्थिति वेबसाइट पर अपलोड करें.
  3. ग्राम सभा को सामुदायिक वन-संसाधनों के अधिकार पत्र मिलने के उपरांत, उस वन क्षेत्र को वन विभाग अपने नक्शे में “ग्राम-सभा का सामुदायिक वन-संसाधनों के अधिकार का क्षेत्र” इस तरह रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) में दर्ज करें.
  4. नियम 2008 के अनुसार 4.1(e) के तहत ग्राम सभा द्वारा “सामुदायिक वन-संसाधन व्यवस्थापन समिति” (CFRMC) बनाने एवं ग्राम सभा द्वारा उस सामुदायिक वनक्षेत्र में गांव की आवश्यकताओं का अन्तर्भाव करते हुए सुक्ष्म कार्य योजना बनाने हेतु तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग प्रदान करें.
  5. इस कार्ययोजना को क्रियांवित करने हेतु केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा दिनांक 23/04/2015 को भेजे गए पत्र के अनुसार मनरेगा, पंचायत-निधि, कैम्पा-फंड, जनजाति उपयोजना जैसे विविध निधि, ग्राम-सभा द्वारा बनी CFRMC को देते हुए उसे मजबूत बनाए.
  6. उड़ीसा एवं महाराष्ट्र राज्य के अनुसार जिला स्तरीय कन्वरर्जेंस कमेटी स्थापित करते हुए सामुदायिक वन क्षेत्र के पुनर्निर्माण एवं संवर्धन हेतु ग्राम-सभा को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग की व्यवस्था करें.
  7. महाराष्ट्र के मुंबई विश्वविद्यालय ने सामुदायिक वनसंसाधन प्रबंधन नाम से एक डिग्री /डिप्लोमा पाठ्यक्रम का निर्माण किया है, बाकी राज्य भी इस पर विचार करें.
  8. देश में कृषि विकास हेतु प्रत्येक जिले में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बने हैं. उसी तरह जनजाति बहुल जिलों में “वन विज्ञान केंद्र” (VVK) की स्थापना की जा सकती है.
  9. संयुक्त परिपत्र में संयुक्त वन प्रबंध समिति (JFMCs) के अनुभवों का लाभ उठाने की बात कही गई है, अर्थात सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (CFRMCs) के संचालन में इनका उपयोग किया जाए न कि इसकी आड़ में JFMC को प्रायोजित किया जाए.

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July 20th 2021, 4:17 pm

जम्मू कश्मीर – एक दिन में 83 हजार लोगों ने लगावाया टीका

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जम्मू कश्मीर. कोरोना के खिलाफ जंग में जम्मू कश्मीर में टीकाकरण अभियान तेजी के साथ चल रहा है. सोमवार को प्रदेश में एक दिन में 83 हजार से अधिक लोगों ने टीका लगवाया. इसके साथ ही अस्पताल में अन्य सुविधाएं भी जुटाई जा रही हैं.

जिसके बाद प्रदेश में 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पहली डोज लगवाने वालों की संख्या 99.21 फीसद हो गई है. कुल टीकाकरण करवाने वालों की संख्या 56 लाख के आंकड़े को पार कर गई है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को 45 साल से अधिक आयु वर्ग में 82,828 लोगों ने टीका लगवाया.

45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 12 जिले पहले से ही सौ फीसद टीकाकरण कर चुके हैं. इनमें कश्मीर संभाग के आठ जिले अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां, पुलवामा, बडगाम, बारामुला, गांदरबल और बांडीपोरा शामिल है. जम्मू संभाग में जम्मू, राजौरी, पुंछ और सांबा जिलों में सौ फीसद टीकाकरण हुआ है. अन्य आठ जिलों में श्रीनगर जिले में 90.20 फीसद, कुपवाड़ा में 78.49, ऊधमपुर 88.31, कठुआ 94.23, रामबन 95.13, डोडा 90.35 और किश्तवाड़ 96.65 फीसद टीकाकरण हुआ है.

ऑक्सीजन आपूर्ति

प्रदेश में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है. अगस्त तक सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की क्षमता 71650 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) तक पहुंच जाएगी.

प्रदेश में कुल 84 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिसमें मौजूदा समय में आधे से अधिक प्लांट लगा दिए गए हैं. वहीं, पीएम केयर फंड से 34 ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं.

देशभर में डेल्टा सहित अन्य नए वैरियंट की दस्तक से कोविड की तीसरी लहर को खतरनाक माना जा रहा है. जहां देशभर में दूसरी लहर के दौरान अधिकांश जगहों पर ऑक्सीजन की कमी दिखी थी, जम्मू-कश्मीर में ऑक्सीजन आपूर्ति की समस्या नहीं आई थी.

राज्य में कोविड की तीसरी लहर के परिणामों को ध्यान में रखते हुए गंभीर और सामान्य मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जा रही है. सरकारी अस्पतालों में आईसीयू बिस्तरों सहित अन्य आपात सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि लेवल 1, लेवल 2 और लेवल 3 के सभी कोविड अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके.

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July 20th 2021, 4:17 pm

संकल्प दिवस के रूप में मनाई गई वंदनीया मौसी जी की जयंती

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नई दिल्ली. राष्ट्र सेविका समिति के प्रबुद्ध वर्ग (मेधाविनी सिंधु सृजन) दिल्ली प्रांत ने वंदनीय मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर के जन्म दिवस आषाढ़ दशमी (संकल्प दिवस) पर आभासी रूप से वेबिनार आयोजित किया.

सुलभा देशपांडे ने कहा कि अर्ध शक्ति से राष्ट्र निर्माण नहीं हो सकता. डॉक्टर हेडगेवार जी के समक्ष जब लक्ष्मीबाई केलकर जी ने यह प्रश्न किया कि आप के संगठन में केवल पुरुष ही हैं और ऐसी स्थिति में राष्ट्र का निर्माण नहीं होगा क्योंकि आपके पास अर्ध शक्ति है. हेडगेवार जी ने कहा कि अगर आप महिलाओं को जागृत करना चाहती हैं तो स्वयं से ही महिलाओं के लिए संगठन की स्थापना करें.

महात्मा गांधी के आदर्शों का भी लक्ष्मीबाई केलकर पर बहुत प्रभाव रहा और वर्धा में उनके आश्रम में भी जाती थीं और वहीं से उन्होंने रामायण के महत्व को समझ कर बाद में स्थान-स्थान पर माता सीता के चरित्र व रामायण पर व्याख्यान दिए. देश के विभाजन के समय लक्ष्मीबाई केलकर कराची पहुंचीं और सेविकाओं को विषम परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने महिलाओं के जागरण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि साध्वी निरंजन ज्योति जी (राज्यमंत्री उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भारत सरकार), मुख्य वक्ता माननीय सुलभा देशपांडे तथा विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी गौतम, किरण चोपड़ा पंजाब केसरी निदेशक, मनु कटारिया (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद), आशा दीदी (उत्तर क्षेत्र पालक अधिकारी) सहित अन्य उपस्थित रहे.

डॉ. लक्ष्मी गौतम ने लक्ष्मीबाई केलकर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने वैधव्य को अभिशाप न मानकर शक्ति माना और राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुट गईं. तथा वर्धा में समिति की स्थापना की. हम अपनी कमियों को अपनी शक्ति बनाएं और जिस प्रकार भी संभव हो राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें. लक्ष्मीबाई केलकर के जीवन का आदर्श वाक्य था कि प्रत्येक राष्ट्र जो अपनी उन्नति चाहता है, उसे अपनी संस्कृति और इतिहास को कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि भूतकालीन कृतियां व घटनाएं ही भविष्य की पथ प्रदर्शक होती हैं. हम अपनी नींव, अपनी संस्कृति पर अडिग रहकर वर्तमान और भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं तो देश और समाज का निर्माण संभव होगा.

केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति जी ने वंदनीय लक्ष्मीबाई जी के संपूर्ण जीवन को अनुकरणीय बताया. आज अगर संसद में भी मातृशक्ति की गूंज है तो उसमें भी कहीं ना कहीं लक्ष्मीबाई केलकर के विचार को ही प्रधानता मिली है कि उन्होंने 1936 में जिस मातृशक्ति के विषय में सोचा था, आज संसद भवन में उस मातृशक्ति की उपस्थिति प्रत्येक भारतीय के मन में प्रेरणा का संचार करती है.

साध्वी निरंजन ज्योति ने माता मदालसा, गार्गी, मैत्री, लक्ष्मीबाई, पद्मावती, विद्यावती (भगत सिंह की माता जी) आदि कई महिलाओं का उदाहरण देकर कहा कि महिला शक्ति अगर कुछ मन में ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है.

राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापिका और आद्य प्रमुख संचालिका लक्ष्मीबाई को प्यार व असीम श्रद्धा से हम वंदनीय मौसी जी के उपनाम से जानते हैं. आषाढ़ मास दशमी तिथि शुक्ल पक्ष, में नागपुर में जन्मी कमल अर्थात लक्ष्मीबाई साधारण बालकों से भिन्न थी. उन्होंने महिलाओं में छिपी शक्तियों को उस समय पहचाना जब नारी सशक्तिकरण की बात से कोई परिचित भी नहीं था. 25 अक्तूबर, 1936 विजयादशमी के दिन उन्होंने महिलाओं के एक ऐसे संगठन की नींव रखी जो व्यक्ति निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी योगदान दे.

भारत के 2380 शहरों, कस्बों और गांवों में समिति की 3000 शाखाएं चल रही हैं. समिति के 1000 सेवा प्रकल्प चल रहे हैं.

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July 20th 2021, 4:17 pm

उत्तर प्रदेश – आपराधिक तत्वों पर सख्ती, 15 अरब से अधिक की संपत्ति जब्त, 139 अपराधी मुठभेड़ में ढेर

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने आपराधिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. पुलिस ने कुख्यात अपराधियों, विभिन्न माफियाओं व उनके गिरोह के सहयोगियों आदि के विरूद्ध अभियान चलाकर नकेस कसी है. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस मुठभेड़ के दौरान 139 कुख्यात अपराधी ठेर किए गए.

रिपोर्ट्स के अनुसार योगी आदित्यनाथ सरकार ने चार वर्ष से अधिक के कार्यकाल में गैंगस्टर अधिनियम के तहत कुल 15 अरब 74 करोड़ रूपये से अधिक की अवैध सम्पत्तियों को जब्त किया है. इनमें से जनवरी 2020 से लेकर अभी तक सबसे अधिक संपत्तियां जब्त की गई हैं. इस अवधि के दौरान गैंगस्टर अधिनियम के तहत रिकॉर्ड 13 अरब, 22 करोड़ रूपये से अधिक की अवैध सम्पत्ति जब्त की गयी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 13 हजार 7 सौ से अधिक अभियोग गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज किये जा गए हैं, जिनमें 43 हजार से अधिक अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई है. गैंगस्टर अधिनियम की धारा-14(1) के तहत 1431 प्रकरणों में 15 अरब, 74 करोड़, 5 लाख रूपये से अधिक की चल-अचल अवैध सम्पत्तियों पर शिकंजा कसते हुए सरकारी जमीन अवमुक्त कराने, अवैध कब्जे के ध्वस्तीकरण एवं अवैध सम्पत्ति के जब्तीकरण की कार्रवाई की गई है.

रिपोर्ट्स के अनुसार गैंगस्टर अधिनियम में सबसे अधिक वाराणसी जोन में कार्रवाई की गई है, जहां  कुल 420 प्रकरणों में 2 अरब, 2 करोड़, 29 लाख रूपये से अधिक, गोरखपुर जोन में 208 प्रकरणों में 2 अरब, 64 करोड़, 85 लाख रूपये से अधिक तथा बरेली जोन में 1 अरब, 84 करोड़, 82 लाख रूपये से अधिक की सम्पत्ति जब्त की गई है.

अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश अवस्थी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध का सफाया किया गया है. 20 मार्च 2017 से 20 जून 2021 तक की अवधि में कुल 139 अपराधी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए हैं और 3196 घायल हुये हैं. अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस बल के 13 जवान अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन करते हुए वीर गति को प्राप्त हुए तथा 1122 पुलिस कर्मी घायल हुए.

अवस्थी ने कहा कि जनमानस में सुरक्षा की भावना को अधिक सुदृढ़ करने तथा अपराधियों के अन्दर कानून के भय का माहौल पैदा करने के लिए विशेष प्रयास किये गए हैं. इसी कड़ी में प्रदेश के 25 कुख्यात माफिया अपराधियों को चिन्हित कर उनके तथा गैंग के अपराधियों व उनके सहयोगियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की गई है.

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July 20th 2021, 4:17 pm

संत ज्ञानेश्वर की रचना से विश्वव्यापी दृष्टि मिलती है – भय्याजी जोशी

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि “हम जब हिन्दू राष्ट्र या विश्वगुरु भारत की बात करते हैं तो कुछ लोग हमारी भावना को समझ नहीं पाते हैं. मेरा आग्रह है कि वे संत ज्ञानेश्वर की रचना को पढ़ें. उनमें ‘पसायदान’ जरूर पढ़ें.” सोमवार को ‘ज्ञानेश्वरी प्रसाद’ पुस्तक के लोकार्पण समारोह में संबोधित कर रहे थे.

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के नव-निर्मित सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भय्याजी जोशी ने कहा कि सत्ता केंद्रित चिंतन का हमारे लिए कोई स्थान नहीं है. हम लोग एक विचारधारा को लेकर आगे बढ़े हैं. इसका विरोध करने वाले हमारी भावनाओं को नहीं समझ पाते और बार-बार हमें कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करते हैं. मेरा उनसे आग्रह है कि वे ‘पसायदान’ को जरूर पढ़ें, जिससे हमें विश्वव्यापी दृष्टि मिलती है.

कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत कर रहे गोविंदगिरी जी महाराज ने कहा, “ज्ञानेश्वर महाराज संत सम्राट हैं. उनकी वाणी का अध्ययन अनिवार्य है.”

संत ज्ञानेश्वर के रचना कौशल का बारीकी से परिचय कराते हुए उन्होंने कहा कि ‘वे केवल संत ही नहीं थे, बल्कि दार्शनिकों के शिरोमणि रहे हैं.’ आज आषाढ़ शुक्ल दशमी है और इस तिथि का संत ज्ञानेश्वर को लेकर विशेष महत्व है. ऐसे में पुस्तक का विमोचन निश्चित ही दैवीय संयोग है.

‘ज्ञानेश्वरी प्रसाद’ पुस्तक का उल्लेख करते हुए गोविंदगिरी जी महाराज ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ग्रंथ ज्ञान का अथाह भंडार है, लेकिन उसे कहां से पढ़ना है और पढ़ने की पद्धति क्या हो आदि समझ विकसित करने के लिए ‘ज्ञानेश्वरी प्रसाद’ पुस्तक को पढ़ना चाहिए.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि आज पूरी दुनिया में गीता पर सघन कार्य हो रहा है. वर्तमान समय में गीता को देखने की जो दृष्टि है, वह ज्ञानेश्वरी प्रसाद में मिलती है. इस पुस्तक में कर्म-ज्ञान-भक्ति का समन्वय है. यह बात इस पुस्तक को दूसरों से भिन्न और श्रेष्ठ बनाती है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य एवं पूर्व राजनयिक ज्ञानेश्वर मूले ने कहा कि संत ज्ञानेश्वर क्रांतदर्शी संत थे. उन्होंने संस्कृत को छोड़कर सर्व-साधारण की भाषा में अपनी बात कही और समाज में क्रांति लाने का काम किया.

कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि कला केंद्र इस कार्यक्रम के साथ अपने बौद्धिक कार्यक्रम का शुभारंभ करने जा रहा है. यह ईश्वरीय प्रसाद है. कला केंद्र के कला निधि विभाग के अध्यक्ष डॉ. रमेशचंद्र गौड़ ने विभाग के कार्यों से लोगों का परिचय कराया.

कार्यक्रम के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए निश्चित संख्या में लोगों को आमंत्रित किया गया था.

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July 20th 2021, 4:17 pm

19 जुलाई / इतिहास स्मृति – जलियांवाला के प्रतिशोधी ऊधमसिंह, 27 साल बाद भारत आए भस्मावशेष

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नई दिल्ली. ऊधमसिंह का जन्म ग्राम सुनाम ( जिला संगरूर, पंजाब) में 26 दिसम्बर, 1899 को सरदार टहलसिंह जी के घर में हुआ था. मात्र दो वर्ष की अवस्था में ही इनकी माँ का और सात साल का होने पर पिता का देहान्त हो गया. ऐसी अवस्था में किसी परिवारजन ने इनकी सुध नहीं ली. गली-गली भटकने के बाद अन्ततः इन्होंने अपने छोटे भाई के साथ अमृतसर के पुतलीघर में शरण ली. यहाँ एक समाजसेवी ने इनकी सहायता की.

19 वर्ष की तरुण अवस्था में ऊधमसिंह ने 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पर्व पर जलियाँवाला बाग, अमृतसर में हुए नरसंहार को अपनी आँखों से देखा. सबके जाने के बाद रात में वे वहाँ गये और रक्तरंजित मिट्टी माथे से लगाकर इस काण्ड के खलनायकों से बदला लेने की प्रतिज्ञा की. कुछ दिन उन्होंने अमृतसर में एक दुकान भी चलायी. उसके फलक पर उन्होंने अपना नाम ‘राम मोहम्मद सिंह आजाद’ लिखवाया था. इससे स्पष्ट है कि वे स्वतन्त्रता के लिए सब धर्म वालों का सहयोग चाहते थे.

ऊधमसिंह को सदा अपना संकल्प याद रहता था. उसे पूरा करने हेतु वे अफ्रीका से अमेरिका होते हुए वर्ष 1923 में इंग्लैंड पहुँच गये. वहाँ क्रान्तिकारियों से उनका सम्पर्क हुआ. वर्ष 1928 में वे भगतसिंह के कहने पर वापस भारत आ गये, पर लाहौर में उन्हें शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में पकड़कर चार साल की सजा दी गयी. इसके बाद वे फिर इंग्लैंड चले गये. तब तक जलियांवाला बाग में गोली चलाने वाला अनेक शारीरिक व मानसिक रोगों से ग्रस्त होकर 23 जुलाई, 1927 को आत्महत्या कर चुका था, पर पंजाब का तत्कालीन गवर्नर माइकेल ओडवायर अभी जीवित था.

13 मार्च, 1940 को वह शुभ दिन आ गया, जिस दिन ऊधमसिंह को अपना संकल्प पूरा करने का अवसर मिला. इंग्लैंड की राजधानी लन्दन के कैक्स्टन हॉल में एक सभा होने वाली थी. इसमें जलियाँवाला बाग काण्ड के दो खलनायक सर माइकेल ओडवायर तथा भारत के तत्कालीन सेक्रेटरी ऑफ स्टेट लार्ड जेटलैंड आने वाले थे. ऊधमसिंह चुपचाप मंच से कुछ दूरी पर जाकर बैठ गये और उचित समय की प्रतीक्षा करने लगे.

माइकल ओडवायर ने अपने भाषण में भारत के विरुद्ध बहुत विषवमन किया. भाषण पूरा होते ही ऊधमसिंह ने गोली चला दी. ओडवायर वहीं ढेर हो गया. अब लार्ड जैटलैंड की बारी थी, पर उसका भाग्य अच्छा था. वह घायल होकर ही रह गया. सभा में भगदड़ मच गयी. ऊधमसिंह चाहते, तो भाग सकते थे, पर वे सीना तानकर वहीं खड़े रहे और स्वयं को गिरफ्तार करा दिया.

न्यायालय में वीर ऊधमसिंह ने आरोपों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि मैं पिछले 21 साल से प्रतिशोध की आग में जल रहा था. माइकल ओडवायर और जैटलैंड मेरे देश भारत की आत्मा को कुचलना चाहते थे. इसका विरोध करना मेरा कर्तव्य था. इससे बढ़कर मेरा सौभाग्य क्या होगा कि मैं अपनी मातृभूमि के लिये मर रहा हूँ.

ऊधमसिंह को 31 जुलाई, 1940 को पेण्टनविला जेल में फाँसी दे दी गयी. मरते समय उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा – 10 साल पहले मेरा प्यारा दोस्त भगतसिंह मुझे अकेला छोड़कर फाँसी चढ़ गया था. अब मैं उससे वहाँ जाकर मिलूँगा. वह मेरी प्रतीक्षा कर रहा होगा. स्वतन्त्रता प्राप्ति के 27 साल बाद 19 जुलाई, 1974 को उनके भस्मावशेषों को भारत लाया गया. पाँच दिन उन्हें जनता के दर्शनार्थ रखकर ससम्मान हरिद्वार में प्रवाहित कर दिया गया.

 

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July 19th 2021, 12:45 pm

पेड़ लगाना ही महत्वपूर्ण नहीं, उन्हें बचाना भी जरूरी – स्वामी प्रेम परिवर्तन

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संगीत के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प – रिकी केज

नई दिल्ली. ‘पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रभावशाली व्यक्तित्व की भूमिका’ विषय पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा रविवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में ग्रैमी अवार्ड से सम्मानित संगीतकार रिकी केज ने विशिष्ट अतिथि के रूप में हिस्सा लिया. पीपल बाबा के नाम से विख्यात स्वामी प्रेम परिवर्तन जी आयोजन के मुख्य अतिथि थे. इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयोजक गोपाल आर्य भी उपस्थित थे.

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रिकी केज ने पर्यावरण प्रहरी बनने की अपनी कहानी साझा की. उन्होंने कहा कि संगीत और प्रकृति एक दूसरे से जुड़े हैं. संगीत की शुरुआत पशु पक्षियों की आवाज से हुई है. अगर सरल शब्दों में कहूं तो संगीत का जन्म प्रकृति से ही हुआ है. धरती पर रहने वाले सभी जीवों को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें पशु पक्षियों को बचाने के लिए प्रयत्न करने होंगे. मेरी कोशिश है ​कि संगीत के जरिए पर्यावरण को संरक्षित कर सकूं. वसुधैव कुटुंबकम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सभी धर्मों से इतर हमें मनुष्यता के लिए काम करना चाहिए. पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अपनी मातृभूमि को समझना होगा.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी प्रेम परिवर्तन जी ने कहा कि पेड़ लगाना महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि हम उन्हें मरने न दें. उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षिका ने हमें बताया था कि अगर पेड़ मर जाते हैं, तो हमें पाप लगता है. उनकी यह बात ध्यान में रखते हुए मैं आज भी पेड़ों को मरने नहीं देता. 26 जनवरी, 1977 को मैंने पहली बार 9 पेड़ लगाए थे. इसके बाद ये क्रम अनवरत जारी है.

पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयोजक गोपाल आर्य ने पर्यावरण गतिविधि द्वारा देशभर में प्रकृति को बचाने के लिए किए जा रहे तमाम उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे बीच एक इको टेररिज्म खड़ा हो गया है, जो पूरे विश्व के सामने एक चुनौती के रूप में खड़ा है. इस पृथ्वी पर मनुष्य सबसे छोटा हिस्सा है, लेकिन उसने पर्यावरण को बहुत चोट पहुंचाई है. संगोष्ठी में उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आप सबके द्वारा हम घर-घर तक पर्यावरण का विषय लेकर जाएंगे और हर घर को हम हरित घर बनाने का प्रयास करेंगे.

कार्यक्रम में सबसे छोटी पर्यावरण प्रहरी के रूप में उपस्थित एवं राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री द्वारा बाल पुरस्कार से सम्मानित 7 वर्षीय ईहा दीक्षित ने पर्यावरण प्रहरी बनने की अपनी कहानी लोगों के बीच साझा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पर्यावरण संरक्षण पर हुई बातचीत को भी उन्होंने बताया. ईहा ने कहा कि मैं चौथी कक्षा में हूं और मेरे बारे में सातवीं कक्षा की किताब में पढ़ाया जाता है. ईहा दीक्षित हर रविवार को अपनी टीम के साथ पौधे लगाती हैं. ईहा ने बताया कि वह न केवल पौधे लगाती हैं, बल्कि उनका संरक्षण भी करती हैं.

आयोजन के अंत में प्रश्नोत्तर का सत्र भी रख गया. कार्यक्रम में लगभग 300 से ज्यादा इनफ्लुएंसर्स ने हिस्सा लिया. संगोष्ठी का संचालन दीप्ति भारद्वाज ने किया.

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July 19th 2021, 12:45 pm

महाराष्ट्र – प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की 4.20 करोड़ रु की संपत्ति जब्त की

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नई दिल्ली. महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को अनिल देशमुख व उनके परिवार से संबंधित चार करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है. देशमुख के खिलाफ कार्रवाई मनी लांड्रिंग केस के तहत की गई है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएमएलए एक्ट के तहत अनिल देशमुख की कुछ ऐसी संपत्तियों की कुर्की के प्रारंभिक आदेश जारी किए गए हैं, जो सीधे उनके नाम पर तो नहीं हैं, लेकिन इन संपत्तियों पर उनका कब्जा है. इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 4.20 करोड़ रुपये आंकी गई है. इनमें मुंबई के वर्ली स्थित एक फ्लैट भी शामिल है. यह फ्लैट उनकी पत्नी के नाम पर है. इसकी कीमत 1.54 करोड़ रुपये आंकी गई है

प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीसी की धारा 120-बी, 1860 और पीएम अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा अनिल देशमुख और अन्य के खिलाफ अनुचित और गलत तरीके से लाभ प्राप्त करने के मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. मुंबई में तमाम बार, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली के मामले में देशमुख की मुश्किलें पहले से बढ़ी हुई हैं. PMLA के तहत जांच से पता चला कि अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र राज्य के गृहमंत्री के रूप में कार्य करते हुए, गलत तरीके से मुंबई पुलिस के तत्कालीन सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे के माध्यम से तमाम ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों से लगभग 4.70 करोड़ रुपये नकद रिश्वत के तौर पर लिए थे.

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July 19th 2021, 12:45 pm

कोरोना से रक्षा, अवैध मतांतरण पर रोक व मठ-मंदिरों की मुक्ति के संकल्प के साथ पूर्ण हुई विहिप बैठक

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फरीदाबाद. कोरोना से रक्षा, अवैध मतांतरण पर रोक व मठ-मंदिरों की मुक्ति के संकल्प के साथ विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय प्रन्यासी मण्डल व प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक मानव रचना विश्वविद्यालय फरीदाबाद में संपन्न हुई.

बैठक की विस्तृत जानकारी देते हुए विहिप कार्याध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से रक्षा व उसके विरुद्ध युद्ध का आगाज इस बैठक में हुआ है. हम देशभर की हिन्दू शक्तियों के साथ मिलकर भारत के एक लाख से अधिक गावों एवं शहरी बस्तियों में व्यापक जन-जागरण कर न सिर्फ लोगों को इससे बचाव के प्रति जागरुक करेंगे. अपितु, पीड़ित परिवारों की हर सम्भव मदद भी करेंगे. हम महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रहे हैं. संकट के समय पर अकेली सरकार ही नहीं, सम्पूर्ण समाज जुटता है, तभी उससे मुक्ति मिलती है.

उन्होंने कहा कि अवैध मतांतरण एक राष्ट्रीय अभिशाप है, जिससे मुक्ति मिलनी ही चाहिए. इस पर रोक हेतु 11 राज्यों में तो कानून है, किन्तु समस्या व षड्यंत्र राष्ट्रव्यापी है. इसलिए हमारी इस अन्तर्राष्ट्रीय बैठक का सर्व-सम्मत मत है कि इसके लिए केन्द्रीय कानून बनना ही चाहिए. तभी इस अभिशाप से मुक्ति मिल सकती है. सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों व वर्तमान परिस्थितियों से भी यह स्पष्ट हो चुका है कि केन्द्र सरकार को इस बारे में और विलम्ब नहीं करना चाहिए. हमने हिन्दू समाज से भी आह्वान किया है कि मुल्ला-मिशनरियों के भारत विरोधी व हिन्दू द्रोही षड़यंत्रों पर सजग निगाहें रखकर सभी संविधान सम्मत उपायों के माध्यम से इन पर रोक लगाए.

आलोक कुमार ने कहा कि बैठक में देशभर के मठ-मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण से मुक्ति हेतु भी एक प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव में कहा गया है कि मठ-मंदिर न केवल आस्था अपितु, चिरंजीवी शक्ति के केन्द्र व हिन्दू समाज की आत्मा हैं. इन्हें सरकारी नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता. समाज को स्वयं इनकी देख-भाल व संचालन का दायित्व सौंपना चाहिए. चिदम्बरम् नटराज मंदिर मामले सहित कई बार न्यायपालिका ने भी कहा है कि सरकारों को मंदिरों के नियंत्रण का कोई अधिकार नहीं है. इसलिए विश्व भर से जुड़े विहिप कार्यकर्ताओं ने एक स्वर से अपील करते हुए केन्द्र सरकार से मांग की कि इस हेतु भी एक केन्द्रीय कानून बनाकर मठ-मंदिरों व धार्मिक संस्थाओं को सरकार नियंत्रण से मुक्ति दिलाकर हिन्दू समाज को सौंपा जाए ताकि संत और भक्त इनकी धार्मिक व प्रशासनिक व्यवस्थाएं वहां की समाजोन्मुखी व संस्कारक्षम परम्पराओं को पुनः स्थापित कर सकें.

बैठक में लगभग 50 केन्द्रीय व क्षेत्रीय पदाधिकारी कोरोना नियमों का पालन करते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे तथा शेष लगभग 350 प्रांतीय अधिकारी व भारत के बाहर के पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े.

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July 19th 2021, 12:45 pm

कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद पी. विजयन ने ईद के लिए लॉकडाउन में ढील दी

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नई दिल्ली. वर्तमान कोरोना संकट को देखते हुए कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया है. उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले भी चिंताजनक स्थिति में नहीं है. इसके विपरीत केरल की सेकुलर सरकार है. केरल में लगातार कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हो रही है. इसके बावजूद पिनराई विजयन सरकार ने 21 जुलाई को पड़ने वाली बकरीद को देखते हुए तीन दिनों के लिए लॉकडाउन प्रतिबंधों को हटा दिया है. देश में 4.25 लाख सक्रिय कोविड-19 मामलों में से केरल में 1.25 लाख हैं. देश के दैनिक मामलों में राज्य की हिस्सेदारी लगातार 35 प्रतिशत के आसपास है.

केरल में 18, 19 और 20 जुलाई को अनेक क्षेत्रों में लॉकडाउन में ढील देने के राज्य सरकार के आदेश को लेकर चिकित्सकों की संस्था आईएमए ने एतराज जताया है. केरल सरकार के निर्णय पर आईएमए ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए इसे चिकित्सा आपातकाल के समय अनुचित बताया. आईएमए ने कहा, “जब जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे कई उत्तरी राज्यों ने सार्वजनिक सुरक्षा, पारंपरिक और तीर्थ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल ने भीड़ को बढ़ावा देने वाले निर्णय लिए हैं.”

केरल की पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार ने बकरीद के अवसर पर, ए, बी, और सी दर्जे के क्षेत्रों में ‘जरूरी सामान’ बेचने वाली दुकानों को सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी है. प्रतिबंधों में छूट के तहत कपड़ा, जूते-चप्पल, आभूषण, घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों के साथ सभी प्रकार की मरम्मत की दुकानें भी खुली रहेंगी.

मुस्लिम तुष्टीकरण के कारण केरल सरकार ने बकरीद से पहले कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को अनदेखा करते हुए ढील देने की घोषणा कर दी. लेकिन इस पर तमाम राजनीतिक दलों सहित आईएमए ने कड़ी टिप्पणी की  है. केरल सरकार से अपील की है कि कोविड पाबंदियों में ढील देने का आदेश वापस लें.

आईएमए ने पत्र में कहा, ‘आईएमए को यह देखकर अफसोस हुआ है कि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केरल सरकार बकरीद के मजहबी समारोह की आड़ में राज्य में लॉकडाउन में ढील देने का आदेश जारी किया है. ऐसा करना मेडिकल आपातकाल के आज के समय में अनावश्यक और अनुचित है.’

आईएमए का कहना है कि देश के व्यापक हित और मानवता के हित में हम मांग करते हैं कि इस आदेश को वापस लिया जाए. कोविड मानदंडों के उल्लंघन को बिल्कुल भी बर्दाश्त न किया जाए.

 

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July 19th 2021, 12:34 pm

आध्यात्मिक विचारों में है मानवीय जीवन समृद्ध करने की शक्ति – डॉ. मोहन भागवत जी

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नासिक. स्वामी सवितानंद जी के अमृत महोत्सव समारोह में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि “भारतीय संस्कृति आध्यात्मिक और भौतिक विचारों से पिरोई हुई है. दोनों क्रियाओं में एक समान विचार नहीं होता, उसी प्रकार स्वीकार-अस्वीकार भी सर्वथा व्यक्ति पर ही निर्भर होता है. साधु-संतों, महात्माओं के माध्यम से इस विचार तक पहुंच सकते हैं और यही विचार मानवीय जीवन को समृद्ध करते हैं.”

तरसाडा (बार, द. गुजरात) के स्वामी श्री सवितानंद जी अमृत महोत्सव समिति और साधक परिवार की ओर से स्वामी सवितानंद जी के अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में सत्कार समारोह नासिक में संपन्न हुआ. सरसंघचालक जी ने कहा कि “सवितानंद स्वामी जी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बहुत पुराना संबंध है. और कितनी भी आपत्ति क्यों न आये, ये संब॔ध बना रहेगा. यह संबंध अधिक गहरा होता जाएगा.”

“आज का समय प्रवाह हमें ध्यान में रखना होगा. आध्यात्मिक, भौतिक विचारों का स्वीकार-अस्वीकार ये तय करना कठिन है. वैज्ञानिक सत्य दृष्टिकोण भी जो सामने दिखता है, वही बात मान लेगा कि नहीं, ये कहा नहीं जा सकता! सर्वस्व का त्याग करके आध्यात्मिक जीवन स्वीकार करके साधु-महंत अपने विचारों से समाज को सीख देने का काम करते रहते है. प्रपंच तो परमार्थ के बिना नहीं होता, ये सच है, फिर भी परमात्मा के चिंतन, मनन से ही वैराग्य की प्राप्ति हो सकती है, किंतु ये सब परिस्थिति के अनुसार होता है.”

नई पीढ़ी को प्रत्यक्ष अनुभूति चाहिए. भारतीय संस्कृति का बहुत पहले युगों-युगों से प्रारंभ हुआ है, ऐसा हम कह सकते है. लेकिन आज की नयी पीढ़ी बहुत होशियार, जिज्ञासु है. बड़ी सहजता से कुछ भी मान लेने को तैयार नहीं होती. तर्क, सबूत, प्रमाण ये सब बातों के आधार पर उन्हें समझाना पड़ता है, तभी वो विश्वास करते हैं. इसलिए हमें विविध बातों का ज्ञान अगर हो, तो हम उनकी जिज्ञासा पूरी कर सकते हैं. भारतीय विचार, संस्कृति, परंपरा यही हमारी धरोहर है, यही धरोहर संत महात्माओं की देन कीर्तन, प्रवचन के माध्यम से देने का प्रयास हो रहा है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ये कार्य यही भारतीय संस्कृति की परंपरा संभालते हुए राष्ट्र निर्माण का विचार आपने स्वयंसेवकों द्वारा लोकसंग्रहण करते हुए दिखाई पड़ता है.

पैराशूट जैसा काम साधकों को करना होगा

स्वामी सवितानंदजी ने विविध उदाहरणों द्वारा जीवन का महत्व समझाते हुए बताया कि परमात्मा प्रकाश रूप में हर जगह पहुंचता है और हम सिर्फ बल्ब होते हैं. यह बात ध्यान में रखनी होगी. हम अपने विचारों द्वारा व्यक्त होते हैं, ‘यदा यदा ही धर्मस्य..

इस गीता के श्लोक द्वारा जीवन का दर्शन तत्व कहा गया है, परंतु यह स्थिति अलग होती है. पैराशूट जिस प्रकार एक जगह से दूसरी जगह जाकर अपना कार्य करता है, उसी प्रकार साधकों को प्रचार और प्रसारण का कार्य जगह-जगह जाकर करना चाहिए. दो बिंदुओं को जोड़ने के बाद एक रेखा बनती है. इस बिंदु सिद्धांत के अनुसार हमें ईश्वर साधना के साथ राष्ट्र निष्ठा संभालने का काम करना है.

समारोह के प्रारंभ में विद्या नृसिंह भारती शंकराचार्य जी द्वारा अभिवाचन संदेश दिया गया. कार्यक्रम में विविध गणमान्यजनों का स्वागत किया गया. वैद्य योगेश जिरंकल जी ने मानपत्र का अभिवाचन किया. पसायदाना से समारोह  संपन्न हुआ.

ऐसे भी मिले कुछ मदद करने वाले हाथ

वैद्य योगेश जिरंकल जी को पेटंट के रूप में मिले एक लाख रूपयों की रकम और स्वामी जी की सत्कार समिति की तरफ से माजी सैनिकों के लिए तीन लाख रूपयों की मदद का धनादेश डॉ. मोहन भागवत जी के हाथों श्री बालासाहेब उपासनी और सहकारियों को दिया गया. इसी समिति की तरफ से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए न्यास की तरफ से तीन लाख धनराशि दी गई.

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July 19th 2021, 12:34 pm

दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा 108 ग्राम केंद्रों पर आयोजित हो रहा “विद्यारंभ संस्कार”

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चित्रकूट. दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा चित्रकूट क्षेत्र के ग्रामीण केंद्रों पर “विद्यारंभ संस्कार” का शुभारंभ किया गया है. पिछले वर्ष कोरोना के चलते बच्चों का विद्यारंभ संस्कार नहीं हो पाया था, उन बच्चों को भी इस वर्ष शामिल किया गया है. अभी तक अमिलिया, बैहार, चितहरा, पाथर-कछार, रानीपुर, भियामऊ सहित 22 स्वावलंन केंद्र (ग्राम पंचायत स्तर) में कार्यक्रम संपन्न हो चुके हैं, जुलाई माह में 108 केंद्र में संपन्न कराने की योजना है. जिसमें चित्रकूट जनपद के 59 स्वावलंबन केंद्र एवं मझगवॉ जनपद के 49 केंद्र शामिल हैं.

दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह ने बताया कि जो बच्चे पहली बार विद्या अध्ययन हेतु प्राथमिक कक्षा में प्रवेश लेते हैं, उन बच्चों का विद्यारंभ संस्कार के माध्यम से मां सरस्वती के समक्ष पढ़ाई से परिचय कराया जाता है. दीनदयाल शोध संस्थान के समाज शिल्पी दंपति कार्यकर्ता और ग्राम सहयोगी कार्यकर्ताओं द्वारा चित्रकूट के आसपास सभी स्वावलंबन केंद्रों एवं संपर्कित ग्राम आबादियों में कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को विद्यालय में विद्या दर्शन कराया जा रहा है और विद्यालय से परिचित कराया जा रहा है.

दीनदयाल शोध संस्थान के स्वावलंबन अभियान के प्रभारी डॉ. अशोक पांडे ने बताया कि शिक्षा के बारे में भारतरत्न नानाजी देशमुख की कल्पना आम धारणाओं से बहुत भिन्न थी. किताबी शिक्षा को वे व्यवहारिक व मानव प्रदत्त शिक्षा के सामने गौण मानते थे. उनके लिए शिक्षा व संस्कार एक दूसरे के परस्पर पूरक थे. उनका मत था कि शिक्षा व संस्कार की प्रक्रिया गर्भाधान से ही प्रारंभ हो जाती है और जीवन पर्यंत चलती है. नानाजी इस बात पर बल देते रहे कि शिक्षा का मर्म तो देशानुकूल होना चाहिए. लेकिन उसमें गतिशीलता बनी रहनी चाहिए ताकि विद्यार्थी स्वयं को समय के मुताबिक ढाल सकें.

समाज शिल्पी दंपत्ति प्रभारी हरिराम सोनी ने बताया कि स्वावलंबन केंद्रों के अलावा संपर्कित केंद्रों पर भी दीनदयाल शोध संस्थान के सहयोगी कार्यकर्ता ‘विद्यारंभ संस्कार’ को पूर्ण करा रहे हैं. उनके द्वारा विद्यारम्भ संस्कार के लिए सामान्य तैयारियां की जाती हैं. साथ ही गणेश जी और सरस्वती जी का पूजन किया जाता है. इस दौरान बच्चों के हाथ में अक्षत, फूल, रोली देकर फिर मंत्रों का जाप कराया जाता है.

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July 19th 2021, 12:34 pm

गुरु पूर्णिमा और संघ

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अपने राष्ट्र और समाज जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है. व्यास महर्षि आदिगुरु हैं. उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा. विचार तथा आचार का समन्वय करते हुए, भारतवर्ष के साथ उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन किया. इसलिए भगवान वेदव्यास जगत् गुरु हैं. इसीलिए कहा है – ‘व्यासो नारायणम् स्वयं’- इस दृष्टि से गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा गया है.

गुरु की कल्पना

“अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन् चराचरं, तत्पदं दर्शितंयेनं तस्मै श्री गुरुवे नम:” यह सृष्टि अखंड मंडलाकार है. बिन्दु से लेकर सारी सृष्टि को चलाने वाली अनंत शक्ति का, जो परमेश्वर तत्व है, वहां तक सहज सम्बंध है. यानी वह जो मनुष्य से लेकर समाज, प्रकृति और परमेश्वर शक्ति के बीच में जो सम्बंध है. इस सम्बंध को जिनके चरणों में बैठकर समझने की अनुभूति पाने का प्रयास करते हैं, वही गुरु है. संपूर्ण सृष्टि चैतन्ययुक्त है. चर, अचर में एक ही ईश्वर तत्व है. इनको समझकर, सृष्टि के सन्तुलन की रक्षा करते हुए, सृष्टि के साथ समन्वय करते हुए जीना ही मानव का कर्तव्य है. सृष्टि को जीतने की भावना विकृति है -सहजीवन ही संस्कृति है. सृष्टि का परम सत्य-सारी सृष्टि परस्पर पूरक है. सम्पूर्ण सृष्टि का आधार है. देना ही संस्कार है, त्याग ही भारतीय संस्कृति है. त्याग, समर्पण, समन्वय-यही हिन्दू संस्कृति है, मानव जीवन में, सृष्टि में शांतियुक्त, सुखमय, आनन्दमय जीवन का आधार है.

नित्य अनुभव

वृक्ष निरन्तर कार्बन डाइऑक्साइड को लेते हुए ऑक्सीजन बाहर छोड़ते हुए सूर्य की सहायता से अपना आहार तैयार कर लेते हैं. उनके ऑक्सीजन यानी प्राणवायु छोड़ने के कारण मानव जी सकता है. मानव का जीवन वृक्षों पर आधारित है अन्यथा सृष्टि नष्ट हो जाएगी. आजकल वातावरण प्रदूषण से विश्व चिंतित है, मानव जीवन खतरे में है.

इसलिए सृष्टि के संरक्षण के लिए मानव को योग्य मानव, मानवतायुक्त मानव बनना है, तो गुरुपूजा महत्वपूर्ण है. सृष्टि में सभी जीवराशि, प्रकृति अपना व्यवहार ठीक रखते हैं. मानव में विशेष बुद्धि होने के कारण बुद्धि में विकृति होने से प्रकृति का संतुलन बिगाड़ने का काम भी मानव ही करता है.
बुद्धि के अहंकार के कारण मानव ही गड़बड़ करता है. इसलिए ‘गुरुपूजा’ के द्वारा मानव जीवन में त्याग, समर्पण भाव निर्माण होता है.

गुरु व्यक्ति नहीं, तत्व है

अपने समाज में हजारों सालों से, व्यास भगवान से लेकर आज तक, श्रेष्ठ गुरु परम्परा चलती आयी है. व्यक्तिगत रीति से करोड़ों लोग अपने-अपने गुरु को चुनते हैं, श्रद्धा से, भक्ति से वंदना करते हैं, अनेक अच्छे संस्कारों को पाते हैं. इसी कारण अनेक आक्रमणों के बाद भी अपना समाज, देश, राष्ट्र आज भी जीवित है.  समाज जीवन में एकात्मता की, एक रस जीवन की कमी है. राष्ट्रीय भावना की कमी, त्याग भावना की कमी के कारण भ्रष्टाचार, विषमय, संकुचित भावनाओं से, ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार, शोक रहित (चारित्र्य दोष) आदि दिखते हैं.

इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने गुरु स्थान पर भगवाध्वज को स्थापित किया है. भगवाध्वज त्याग, समर्पण का प्रतीक है. स्वयं जलते हुए सारे विश्व को प्रकाश देने वाले सूर्य के रंग का प्रतीक है. संपूर्ण जीवों के शाश्वत सुख के लिए समर्पण करने वाले साधु, संत भगवा वस्त्र ही पहनते हैं, इसलिए भगवा, केसरिया त्याग का प्रतीक है. अपने राष्ट्र जीवन के, मानव जीवन के इतिहास का साक्षी यह ध्वज है. यह शाश्वत है, अनंत है, चिरंतन है.

व्यक्ति पूजा नहीं, तत्व पूजा

संघ तत्व पूजा करता है, व्यक्ति पूजा नहीं. व्यक्ति शाश्वत नहीं, समाज शाश्वत है. अपने समाज में अनेक विभूतियां हुई हैं, आज भी अनेक विद्यमान हैं. उन सारी महान विभूतियों के चरणों में शत्-शत् प्रणाम, परन्तु अपने राष्ट्रीय समाज को, संपूर्ण समाज को, संपूर्ण हिन्दू समाज को राष्ट्रीयता के आधार पर, मातृभूमि के आधार पर संगठित करने का कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है. इस नाते किसी व्यक्ति को गुरुस्थान पर न रखते हुए भगवाध्वज को ही हमने गुरु माना है.

तत्वपूजा – तेज, ज्ञान, त्याग का प्रतीक

हमारे समाज की सांस्कृतिक जीवनधारा में ‘यज्ञ’ का बड़ा महत्व रहा है. ‘यज्ञ’ शब्द के अनेक अर्थ है. व्यक्तिगत जीवन को समर्पित करते हुए समष्टिजीवन को परिपुष्ट करने के प्रयास को यज्ञ कहा गया है. सद्गुण रूप अग्नि में अयोग्य, अनिष्ट, अहितकर बातों को होम करना यज्ञ है. श्रद्धामय, त्यागमय, सेवामय, तपस्यामय जीवन व्यतीत करना भी यज्ञ है. यज्ञ का अधिष्ठाता देव यज्ञ है. अग्नि की प्रतीक है ज्वाला, और ज्वालाओं का प्रतिरूप है – अपना परम पवित्र भगवाध्वज.

हम श्रद्धा के उपासक हैं, अन्धविश्वास के नहीं. हम ज्ञान के उपासक हैं, अज्ञान के नहीं. जीवन के हर क्षेत्र में विशुद्ध रूप में ज्ञान की प्रतिष्ठापना करना ही हमारी संस्कृति की विशेषता रही है.

सच्ची पूजा- ‘तेल जले, बाती जले-लोग कहें दीप जले’

जब दीप जलता है हम कहते हैं या देखते हैं कि दीप जल रहा है, लेकिन सही अर्थ में तेल जलता है, बाती जलती है, वे अपने आपको समर्पित करते हैं तेल के लिए.

कारगिल युद्ध में मेजर पद्मपाणी आचार्य, गनर रविप्रसाद जैसे असंख्य वीर पुत्रों ने भारत माता के लिए अपने आपको समर्पित किया. मंगलयान में अनेक वैज्ञानिकों ने अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक सुख की तिलाञ्जलि देकर अपनी सारी शक्ति समर्पित की.

प्राचीन काल में महर्षि दधीचि ने समाज कल्याण के लिए, संरक्षण के लिए अपने जीवन को ही समर्पित कर दिया था. समर्पण अपने राष्ट्र की, समाज की परंपरा है. समर्पण भगवान की आराधना है. गर्भवती माता अपनी संतान के सुख के लिए अनेक नियमों का पालन करती है, अपने परिवार में माता, पिता, परिवार के विकास के लिए अपने जीवन को समर्पित करती है. खेती करने वाले किसान और श्रमिक के समर्पण के कारण ही सबको अन्न मिलता है. करोड़ों श्रमिकों के समर्पण के कारण ही सड़क मार्ग, रेल मार्ग तैयार होते हैं.

शिक्षक- आचार्यों के समर्पण के कारण ही करोड़ों लोगों का ज्ञानवर्धन होता है. डॉक्टरों के समर्पण सेवा के कारण ही रोगियों को चिकित्सा मिलती है. इस नाते सभी काम अपने समाज में आराधना भावना से, समर्पण भावना से होते थे. पैसा केवल जीने के लिए लिया जाता था. सभी काम आराधना भावना से, समर्पण भावना से ही होते थे. परंतु आज आचरण में हृास दिखता  है.

राष्ट्राय स्वाहा- इदं न मम्

इसलिए प.पू. डॉ. हेडगेवार जी ने फिर से संपूर्ण समाज में, प्रत्येक व्यक्ति में समर्पण भाव जगाने के लिए, गुरुपूजा की, भगवाध्वज की पूजा का परंपरा प्रारंभ की.

व्यक्ति के पास प्रयासपूर्वक लगाई गई शारीरिक शक्ति, बुद्धिशक्ति, धनशक्ति होती है, पर उसका मालिक व्यक्ति नहीं, समाज रूपी परमेश्वर है. अपने लिए जितना आवश्यक है उतना ही लेना. अपने परिवार के लिए उपयोग करते हुए शेष पूरी शक्ति- धन, समय, ज्ञान-समाज के लिए समर्पित करना ही सच्ची पूजा है. मुझे जो भी मिलता है, वह समाज से मिलता है. सब कुछ समाज का है, परमेश्वर का है, जैसे- सूर्य को अर्घ्य देते समय, नदी से पानी लेकर फिर से नदी में डलते हैं. मैं, मेरा के अहंकार भाव के लिए कोई स्थान नहीं. परंतु आज चारों ओर व्यक्ति के अहंकार को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस लिए सारी राक्षसी प्रवृत्तियां- अहंकार, ईर्ष्या, पदलोलुपता, स्वार्थ बढ़ गया है, बढ़ रहा है. इन सब आसुरी प्रवृत्तियों को नष्ट करते हुए त्याग, तपस्या, प्रेम, निरहंकार से युक्त गुणों को अपने जीवन में लाने की साधना ही गुरु पूजा है.

शिवोभूत्वा शिवंयजेत्- शिव की पूजा करना यानी स्वयं शिव बनना, यानी शिव के गुणों को आत्मसात् करना, जीवन में उतारना है. भगवाध्वज की पूजा यानी गुरुपूजा यानी-त्याग, समर्पण जैसे गुणों को अपने जीवन में उतारते हुए समाज की सेवा करना है. संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने स्वयं अपने जीवन को अपने समाज की सेवा में अर्पित किया था, ध्येय के अनुरूप अपने जीवन को ढाला था. इसलिए कहा गया कि प.पू. डॉक्टर जी के जीवन यानी देह आयी ध्येय लेकर.

वैसे प.पू. गुरुजी, रामकृष्ण मिशन में दीक्षा लेने के बाद भी हिमालय में जाकर तपस्या करने की दृष्टि होने के बाद भी “राष्ट्राय स्वाहा, इदं न मम्”, मैं नहीं तू ही- जीवन का ध्येय लेकर संपूर्ण शक्ति को, तपस्या को, अपनी विद्वता को समाज सेवा में समर्पित किया. लाखों लोग अत्यंत सामान्य जीवन जीने वाले किसान, श्रमिक से लेकर रिक्शा चलाने वाले तक, वनवासी गिरिवासी से लेकर शिक्षित, आचार्य, डॉक्टर तक, ग्रामवासी, नगरवासी भी आज समाज जीवन में अपना समय, धन, शक्ति समर्पण करके कश्मीर से कन्याकुमारी तक काम करते दिखते हैं. भारत के अनेक धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों में भी ऐसे समर्पण भाव से काम करने वाले कार्यकर्ता मिलते हैं.

गुरुपूजा – हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा को व्यक्तिश: संघ की शाखाओं में गुरुपूजा यानी भगवाध्वज की पूजा स्वयंसेवक करते हैं. अपने तन-मन-धन का धर्म मार्ग से विकास करते हुए, विकसित व्यक्तित्व को समाज सेवा में समर्पित करने का संकल्प लेते हुए, संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, जीवन भर व्रतधारी होकर जीने के लिए हर वर्ष भगवाध्वज की पूजा करते हैं.

यह दान नहीं, उपकार नहीं, यह अपना परम कर्तव्य है. समर्पण में ही अपने जीवन की सार्थकता है, यही भावना है. परिवार के लिए काम करना गलत नहीं है, परंतु केवल परिवार के लिए ही काम करना गलत है. यह अपनी संस्कृति नहीं है. परिवार के लिए जितनी श्रद्धा से कठोर परिश्रम करते हैं, उसी श्रद्धा से, वैसी कर्तव्य भावना से समाज के लिए काम करना ही समर्पण है. इस भावना का सारे समाज में निर्माण करना है. इस भावना का निर्माण होने से ही भ्रष्टाचार, हिंसा प्रवृत्ति, ईर्ष्या आदि दोष दूर हो जाएंगे.

समर्पण भाव से ही सारे समाज में एकात्म भाव भी बढ़ जाएगा. इस भावना से ही लाखों स्वयंसेवक अपने समाज के विकास के लिए, हजारों सेवा प्रकल्प चलाते हैं. समाज में भी अनेक धार्मिक, सामाजिक सांस्कृतिक संस्थानों के कार्यकर्ता अच्छी मात्रा में समाज सेवा करते हैं. आज सभी समर्पण भाव को हृदय में जगाकर काम करने वालों को एकत्र आना है, एक हृदय से मिलकर, परस्पर सहयोग से समन्वय करते हुए, समाज सेवा में अग्रसर होना है. व्यक्तिपूजा को बढ़ावा देते हुए भौतिकवाद, भोगवाद, के वातावरण के दुष्प्रभाव से अपने आपको बचाना भी महान तपस्या है. जड़वाद, भोगवाद, समर्पण, त्याग, सेवा, निरहंकारिता, सहकारिता, सहयोग, समन्वय के बीच संघर्ष है. त्याग, समर्पण, सहयोग, समन्वय की साधना एकाग्रचित होकर, एक सूत्रता में करना ही मार्ग है. मानव जीवन की सार्थकता और विश्व का कल्याण इसी से  संभव है.

वी. भगैय्या, सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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July 17th 2021, 8:32 pm

मेवात की पुरातन पहचान को पुनर्स्थापित करेंगे – विहिप

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मेवात (हरियाणा) की स्थिति पर विहिप महामंत्री मिलिंद परांडे का वक्तव्य

फरीदाबाद. हरियाणा का मेवात जो कभी भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का स्थान रहा है. दुर्भाग्य से आज जेहादी षड्यंत्रों से त्रस्त होकर अपना चरित्र खो चुका है. मेवात में महाभारत कालीन कई तीर्थस्थल हैं, परन्तु आज वहां हिन्दुओं के मंदिरों पर जिहादियों द्वारा कब्जा किया जा रहा है और कई मंदिरों में हिन्दू प्रवेश भी नहीं कर सकता. वह स्थान जो बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में हिन्दू बहुल था. आज धर्मांतरण के कुचक्र के कारण मुस्लिम बहुल बन गया है और वहां हिन्दू का जीना दूभर हो गया है. जेहादी तत्व अनियंत्रित होकर हिन्दुओं पर अकल्पनीय व अमानवीय अत्याचार कर रहे हैं. हिन्दू महिलाओं के अपहरण, छेड़खानी व शीलभंग की घटनाएं होती रहती हैं. हरियाणा में गो हत्या प्रतिबंध का कानून होने के बावजूद वहां पर खुलेआम गाय काटी जाती है. हिन्दुओं के जबरन धर्मांतरण की घटनाएं तथा हिन्दू लड़कियों के विवाह समारोह पर हमला करके सामान लूट लेना व लड़कियों को उठाने की शिकायतें भी आती रहती हैं.

आज वहां हिन्दू का जीना दूभर हो गया है, इसलिए कई स्थानों से हिन्दू पलायन भी कर रहा है. वहां 103 गांव हिन्दू शून्य हो गए हैं और 90 से अधिक गांव ऐसे हैं जहां 5 से कम हिन्दू परिवार बचे हैं. जेहादी तत्व मेवात को हिन्दू शून्य बनाकर हरियाणा में एक और कश्मीर बनाना चाहते हैं.

मेवात आतंकवादियों, बांग्लादेशी घुसपैठियों और बर्बर रोहिंग्याओं का अभयारण्य बन चुका है. गत वर्ष मेवात में दो जांच आयोग गए थे. दोनों ने पाया कि मेवात में हिन्दुओं की स्थिति बहुत दयनीय है. कमजोर वर्ग में विशेष रुप से अनुसूचित जाति के भाई-बहन यहां पर जिहादियों के निशाने पर हमेशा रहते हैं.

इन अत्याचारों के बावजूद अब वहां हिन्दू आत्मरक्षार्थ खड़ा होने लगा है. मेवात से बाहर का हिन्दू समाज भी अपने भाई-बहनों की रक्षा में साथ दे रहा है, इसके परिणामस्वरूप वहां जिहादियों को चेतावनी देने के लिए हिन्दुओं की कई महापंचायत हो चुकी हैं. विहिप इस जागरण का स्वागत करती है तथा हिन्दू समाज को और अधिक जागृत तथा सबल बनाने के लिए कटिबद्ध है.

मेवात के पीड़ित समाज की हरियाणा के मुख्यमंत्री से समस्याओं के समाधान की अपेक्षाएं हैं. एक वर्ष पहले मुख्यमंत्री मेवात जाकर वहां की स्थिति का स्वयं आकलन करके आए थे तथा कुछ ठोस कदम उठाने का आश्वासन भी दिया था. विहिप यह अपेक्षा करती है कि वे इन घोषित उपायों को शीघ्र क्रियान्वित करेंगे, जिससे मेवात में कानून का राज्य स्थापित हो सके और हिन्दू स्वाभिमान के साथ रह सके. विहिप मेवात के निकटस्थ हिन्दू समाज से अपील करती है कि उन्हें अपने हिन्दू भाई बहनों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए. मेवात के हिन्दुओं से भी विहिप आह्वान करती है कि हिन्दू की पहचान ‘पलायन नहीं पराक्रम’ है. इसलिए अपने धर्म, बेटी और जमीन की रक्षा के लिए उन्हें कटिबद्ध रहना चाहिए. हमारा संकल्प है कि हम मेवात की पुरातन पहचान जो भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी है, को अवश्य पुनर्स्थापित करेंगे.

डॉ. सुरेंद्र जैन, संयुक्त महामंत्री विहिप

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July 17th 2021, 1:47 pm

हल्दीघाटी युद्ध के गलत तथ्यों वाला शिलापट्ट हटा, शीघ्र लगेगा नया

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उदयपुर/राजसमंद. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अकबर की सेना के साथ हल्दीघाटी में हुए युद्ध की दिनांक और हार-जीत के तथ्यों से संबंधित आपत्ति के बाद सरकार ने हल्दीघाटी में लगे शिलापट्ट को हटा दिया है. इस शिलापट्ट पर युद्ध की दिनांक 21 जून, 1576 अंकित की गई थी तथा प्रताप की सेना के पीछे हटने का तथ्य अंकित था. जबकि, विभिन्न इतिहासकारों ने अपने तथ्यों में युद्ध का दिन 18 जून तथा युद्ध में अकबर की सेना के पीछे हटने के तथ्यों को साबित किया है. फिलहाल शिलापट्ट को हटा दिया गया है. शीघ्र ही यहां नया शिलापट्ट लगाया जाएगा.

बहरहाल, स्थानीय समिति की ओर से संशोधित तथ्यों के साथ यहां बोर्ड लगाया गया है, जिसमें युद्ध की दिनांक 18 जून तथा अकबर की सेना के पीछे हटने की बात अंकित की गई है.

प्रसिद्ध हल्दीघाटी संग्रहालय के संस्थापक तथा महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समर्पित मोहन श्रीमाली ने बताया कि इतिहासकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने अपने शोध में विभिन्न तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए हल्दीघाटी युद्ध की तिथि 18 जून एवं युद्ध में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की विजय को स्थापित किया है. श्रीमाली ने बताया कि जब यह तथ्य साबित है कि मुगलों की सेना हल्दीघाटी से खमनोर की तरफ पीछे हटी थी, रक्ततलाई खमनोर की तरफ ही है. मुगलों की सेना पीछे हटी, इस तथ्य को पूर्व के इतिहासकारों ने स्पष्ट नहीं किया. अब यह तथ्यों सहित पुनः स्थापित हो चुका है. हालांकि, रक्ततलाई के शिलापट्ट पर अंकित प्रताप की सेना के पीछे हटने की अभिलेख में काफी पहले अज्ञात लोगों ने प्रताप शब्द को कुरेद कर मुगल लिख दिया गया था. इसे अधिकृत रूप से लिखवाए जाने की मांग लम्बे समय से जारी थी.

इसी वर्ष जून में महाराणा प्रताप जयंती के आयोजनों के दौरान भी रक्ततलाई पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के शिलापट्ट पर अंकित तथ्यों को लेकर विरोध उठा. इतिहासकारों, क्षेत्रवासियों, देशभर के लोगों सहित राजसमंद के विधायक, सांसद, कई सामाजिक संगठनों द्वारा गलत तथ्यों को हटाकर सही तथ्यों वाले शिलापट्ट को लगाने की मांग की गई.

अब केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल के आदेश पर हल्दीघाटी की रक्ततलाई से गलत तथ्यों वाला शिलापट्ट हटा दिया गया है. समूचे मेवाड़ ने इसे महाराणा प्रताप के गौरव को स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है.

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July 17th 2021, 1:47 pm

चुनाव बाद हिंसा की आग में जला बंगाल- एनएचआरसी ने उच्च न्यायालय को सौंपी रिपोर्ट, सीबीआई जांच की सिफा

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नई दिल्ली. एनएचआरसी (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) ने प. बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश की है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि लोगों का राज्य पुलिस पर विश्वास नहीं रह गया है. एनएचआरसी के जांच दल ने अपनी रिपोर्ट 13 जुलाई को कलकत्ता उच्च न्यायालय को सौंपी है. न्यायालय के निर्देश के बाद आयोग ने संबंधित पक्षों को भी जांच रिपोर्ट की प्रति सौंपी है.

राज्य में हिंसा की घटनाओं में पीड़ितों के प्रति राज्य सरकार की भयावह उदासीनता है और प्रदेश में कानून का शासन नहीं चलता, बल्कि शासक का कानून है. यदि बंगाल में हिंसा नहीं रुकी तो वहां गणतंत्र की हत्या तय है.

एनएचआरसी ने 50 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा कि मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों के खिलाफ सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों द्वारा की गई प्रतिशोधात्मक हिंसा थी. हजारों लोगों के जीवन और आजीविका में बाधा उत्पन्न की गई और उनका आर्थिक रूप से गला घोंट दिया गया. रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं.

कई विस्थापित व्यक्ति अभी तक अपने घरों को वापस नहीं लौट पाए हैं और अपने सामान्य जीवन और आजीविका को फिर से शुरू नहीं कर पाए हैं. कई यौन अपराध हुए हैं, पीड़ितों के बीच राज्य प्रशासन में विश्वास की कमी बहुत स्पष्ट दिखाई देती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच आयोग को 1,979 शिकायतें मिलीं. अब तक राज्य में 9,384 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई है और 1,354 लोग बंद हैं. रिपोर्ट में एक अन्य गंभीर बात यह कही गई कि 97 प्रतिशत आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं. आयोग ने सिफारिश की कि बंगाल में हत्या और दुष्कर्म के मामलों की जांच सीबीआई से कराई जाए. अन्य गंभीर अपराधों की जांच के लिए एसआईटी का गठन हो और किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बने.

रिपोर्ट में पीड़ितों के पुनर्वास करने, उन्हें सुरक्षा देने और उनकी आजीविका की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है. आयोग ने कहा कि घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए हर जिले में एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक की तैनाती हो.

रिपोर्ट में कहा गया है कि रविन्द्रनाथ ठाकुर की धरती पश्चिम बंगाल में ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘शासक का कानून’ चल रहा है. यानि सरकार जो बोलती है, उसे ही कानून मानकर राज्य व्यवस्था काम कर रही है. राज्य में संवैधानिक व्यवस्था को ताक पर रख दिया गया है. इसलिए लोग कहने लगे हैं, – ”न कागज, न बही, जो ममता कहे वही सही.”

 

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July 16th 2021, 3:01 pm

चर्च का पादरी अय्याशी का धंधा चला रहा था, पुलिस ने छापा मार गिरफ्तार किया

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चैन्नई. फेडरल चर्च ऑफ इंडिया के एक चर्च का पादरी अय्याशी का धंधा चला रहा था, पादरी चर्च की आड़ में सेक्स रैकेट चला रहा था. लेकिन पादरी के पाप का घड़ा फूट गया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में एन.एस. शाइन सिंह नाम के पादरी और चार महिलाओं सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार को कन्याकुमारी के एसटी मंगडु क्षेत्र के ज्योति नगर में स्थित डायसिस ऑफ क्राइस्ट एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया से जुड़े फेडरल चर्च ऑफ इंडिया में छापा मारा था. पुलिस को जानकारी मिली थी कि चर्च में बड़े-बड़े घरों के पुरुष और महिलाएं महंगी गाड़ियों से यहां आते हैं. और उनके हाव भाव संदिग्ध लगते हैं.

फेडरल चर्च ऑफ इंडिया जिले के सबसे बड़े चर्चों में से एक है और सेक्स रैकेट चलाने का आरोपी पादरी बिशप लाल एन.एस. शाइन चर्च का संस्थापक और अध्यक्ष है. पुलिस जांच में पता चला है कि चर्च के अधिकारियों ने परिसर का इस्तेमाल वेश्यालय चलाने के लिए किया. पुलिस ने चर्च में छापा मारकर कई महिलाओं और पुरुषों को रंगे हाथ पकड़ा. गिरफ्तार आरोपियो में एक 19 साल की लड़की भी शामिल है.

रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस की पूछताछ में आरोपी पादरी और शिबिन नाम के एक व्यक्ति ने सेक्स रैकेट चलाने की बात स्वीकार कर ली है. पादरियों का ये गंदा खेल सिर्फ देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी चल रहा है. जिसमें न सिर्फ महिलाओं या ननों के साथ, बल्कि मासूम बच्चियों को पादरी अपनी हवस का शिकार बनाते हैं.

डायसिस ऑफ क्राइस्ट एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया से संबंधित फेडरल चर्च ऑफ इंडिया कन्याकुमारी जिले का सबसे बड़ा चर्च है.

लगातार मिल रही ऐसी सूचनाओं के बाद पुलिस ने चर्च पर छापा मारा और कुछ महिलाओं और पुरुषों को रंगे हाथों पकड़ लिया.

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July 16th 2021, 3:01 pm

ऑनलाइन क्लास में कांग्रेस का प्रचार, समर कैंप में इस्लामिक मूल्यों को अपनाने का प्रशिक्षण

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जयपुर. असामाजिक, जिहादी तत्व कोरोना संकट काल में विभिन्न माध्यमों से छात्रों को बरगलाने-भड़काने का प्रयास कर रहे हैं. समर कैंप, ऑनलाइन क्लास, व अन्य़ तरीकों से कुत्सित प्रयासों में लगे हैं.

दिल्ली पब्लिक ग्लोबल स्कूल (DPGS) गुरुग्राम की एक शिक्षिका का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कक्षा दस के बच्चों को 2024 में कांग्रेस को वोट देने की सीख दे रही हैं और भाजपा को वोट क्यों न दें, यह भी बता रही हैं. इतना ही नहीं, इसी स्कूल में आयोजित समर कैम्प में बच्चों को इस्लाम का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है. दूसरी तरफ डीपीएस (DPS) ऊधमपुर में ई-समर कैम्प में स्टोरी टेलिंग के लिए विषय रखा गया….‘मूर्ख ब्राह्मण’.

सबसे पहले बात सोशल साइंस की शिक्षिका की. सोशल साइंस पढ़ाते-पढ़ाते कांग्रेस का प्रचार करने लग गईं. 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं, दसवीं क्लास के बच्चे तब तक वोट देने वाली आयु के हो जाएंगे, इसी को ध्यान में रखते हुए बच्चों को कांग्रेस को वोट क्यों दें और बीजेपी को क्यों न दें समझा रही थीं. क्लास ऑनलाइन थी तो एक बच्ची ने पूरा लेक्चर रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो में टीचर कह रही हैं – ‘पॉलिटिक्स एक ऐसी चीज है बेटा कि आप देश बना भी सकते हो और अपना देश बर्बाद भी कर सकते हो और इस समय की यह सरकार देश को बर्बाद कर रही है. आपको पता नहीं चल रहा, पर धीरे-धीरे बर्बाद कर रही है. हमारे देश में 2019 में जो CAA एक्ट आया था, उसमें मुस्लिम कम्युनिटी के जो लोग 1944 के बाद इंडिया में आए थे, उन्हें कह दिया गया कि वे देश छोड़ दें. किसी दूसरे देश में चले जाएं. ऐसे ही कुछ मूर्ख लोग हैं इंडिया में, जो कहते हैं…. मैं तो हिन्दू हूं, मैं तो बीजेपी को ही वोट दूंगा, चाहे वह कुछ भी करे……कभी-कभी बोलते हैं न सरकार बनाओ तो ऐसी बनाओ कि याद रहे, जैसे गवर्नमेंट ऑफ इंदिरा गांधी. लोग आज भी याद करते हैं उस गवर्नमेंट को. बेस्ट गवर्नमेंट मानी जाती है जब नेहरू जी थे तब की, बेस्ट इकॉनॉमी स्ट्रक्चर था जब मनमोहन सिंह थे …….यह जो बीजेपी है, वह कुछ भी कहे सब आंख बंद कर मान लेंगे, अगर बेटा वह हारेगी न! तो उसकी जगह कोई स्ट्रॉंग पार्टी नहीं है…जब आप बड़े हो जाएंगे, जब आप वोट देने लायक हो जाएंगे, तब प्लीज…. वोट देने से पहले दो बार तीन बार सोचिएगा जरूर.’

दूसरी ओर इस्लाम के प्रचार और ब्राह्मणों को मूर्ख बताते हुए सनातन धर्म पर चोट के लिए माध्यम बनाया गया है समर कैम्प को.

दिल्ली पब्लिक ग्लोबल स्कूल (DPGS) गुरुग्राम व मुरादाबाद में 3 और 4 जुलाई को 8-15 साल के बच्चों के लिए एक समर कैम्प का आयोजन किया गया, जिसका विषय था – ‘How to adopt islamic values in personal life.’ यानि व्यक्तिगत जीवन में इस्लामी मूल्यों को कैसे अपनाएं? जिसमें पढ़ाया जा रहा था – इस्लाम क्या है, हम पैदा क्यों हुए हैं, कुरान को कैसे समझें और एक मुस्लिम के दायित्व क्या हैं? स्कूल CBSE से सम्बद्ध है, जहां सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं.

दूसरी ओर दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) ऊधमपुर में सनातन धर्म पर चोट करने के लिए स्टोरी टेलिंग में मूर्ख ब्राह्मण का प्रस्तुतिकरण हुआ. यह आयोजन आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए था.

उल्लेखनीय है कि दिल्ली पब्लिक ग्लोबल स्कूल (Delhi Public Global School) अमतूल एजूकेशनल ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित होता है. जिसके प्रेजीडेंट मोहम्मद अबू बकर मंसूर, सेक्रेटरी छुट्टन खान और कोषाध्यक्ष कासिम अली हैं. ट्रस्ट मुरादाबाद में पंजीकृत है. दिल्ली पब्लिक ग्लोबल स्कूल (DPGS) मुरादाबाद के मैनेजिंग डायरेक्टर अहमद जकारिया और चेयरमैन मंसूर राशिद हैं.

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July 16th 2021, 11:32 am

कोरोना महामारी – भारत में पश्चिमी मीडिया की ‘पक्षपातपूर्ण’ कवरेज, आईआईएमसी के सर्वेक्षण में 82 प्रति

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नई दिल्ली. भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 82 प्रतिशत भारतीय मीडियाकर्मियों का मानना है कि पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत में कोविड-19 महामारी की कवरेज ‘पक्षपातपूर्ण’ रही है. 69% मीडियाकर्मियों का मानना है कि इस कवरेज से विश्व स्तर पर भारत की छवि धूमिल हुई है, जबकि 56% लोगों का कहना है कि इस तरह की कवरेज से विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति नकारात्मक राय बनी है.

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि संस्थान के आउटरीच विभाग द्वारा यह सर्वेक्षण जून 2021 में किया गया. सर्वेक्षण में देशभर से कुल 529 पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और मीडिया स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया. सर्वेक्षण में शामिल 60% मीडियाकर्मियों का मानना है कि पश्चिमी मीडिया द्वारा की गई कवरेज एक पूर्व निर्धारित एजेंडे के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करने के लिए की गई. अध्ययन के तहत जब भारत में कोविड महामारी के दौरान पश्चिमी मीडिया की कवरेज पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो 71% लोगों का मानना था कि पश्चिमी मीडिया की कवरेज में संतुलन का अभाव था.

प्रो. द्विवेदी के अनुसार सर्वेक्षण में यह भी समझने की कोशिश की गई कि महामारी के दौरान पश्चिमी मीडिया में भारत के विरुद्ध यह नकारात्मक अभियान वास्तव में कब शुरू हुआ. इसके जवाब में 38% लोगों ने कहा कि यह अभियान दूसरी लहर के दौरान उस समय शुरू हुआ, जब भारत महामारी से लड़ने में व्यस्त था. जबकि 25% मीडियाकर्मियों का मानना है कि यह पहली लहर के साथ ही शुरू हो गया था. वहीं 21% लोगों का मानना है कि भारत के खिलाफ नकारात्मक अभियान तब शुरू हुआ, जब भारत ने कोविड-19 रोधी वैक्सीन के परीक्षण की घोषणा की. इस प्रश्न के उत्तर में 17% लोगों ने कहा कि यह नकारात्मकता तब शुरू हुई, जब भारत ने ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’ शुरू की.

अध्ययन में पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत में महामारी की पक्षपातपूर्ण कवरेज के संभावित कारणों को जानने का भी प्रयास किया गया. 51% लोगों ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति को बताया, तो 47% लोगों ने भारत की आंतरिक राजनीति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. 34% लोगों ने फार्मा कंपनियों के निजी स्वार्थ और 21% लोगों ने एशिया की क्षेत्रीय राजनीति को इसका कारण बताया.

सर्वेक्षण के दौरान एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि लगभग 63 प्रतिशत लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने वाली पश्चिमी मीडिया की नकारात्मक खबरों को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड या साझा नहीं किया.

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July 16th 2021, 9:30 am

अलवर (मेवात) क्षेत्र में हिन्दू समाज का जीना दूभर, अपराधियों पर नहीं हो रही कार्रवाई

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अलवर. अलवर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्रों में गैर मुस्लिम समाज का रहना दूभर हो गया है. अलवर (मेवात) के रामगढ़, किशनगढ़ बास, तिजारा, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और अलवर ग्रामीण तहसीलों में मेव मुसलमानों की जनसंख्या काफी बढ़ गई है. और देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आती घटनाओं के समान ही यहां भी गैर मुसलमानों की प्रताड़ना का क्रम जारी है. गैर मुस्लिमों की बहन-बेटियों के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़, अनुसूचित जाति समाज की कृषि भूमि पर जबरन कब्जे, उन पर अत्याचार और जबरन मतांतरण जैसी घटनाएं निरंतर सामने आती रहती हैं. प्रताड़नाओं के चलते बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के कमजोर वर्गों के लोग अपने घर छोड़कर पलायन करने को विवश हैं. मेव समुदाय के मुसलमान गोकशी, गो-तस्करी, ओएलएक्स के माध्यम से ठगी, टटलूबाजी (सोने की ईंटों के नाम पर ठगी), ट्रकों में व्यापारियों के माल को भरकर ले जाने और फिर बीच में ही विक्रय कर माल हड़प लेने जैसे अपराधों के लिए कुख्यात है. सरकार, पुलिस एवं प्रशासन की निष्क्रियता के चलते अराजक तत्वों का साहस लगातार बढ़ रहा है. पिछले दिनों पुलिस पर गोली चलाने की भी अनेक घटनाएं अलवर जिले में हो चुकी हैं.

विश्व हिन्दू परिषद जिला अध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा कि अलवर जिले के कई क्षेत्रों में हिन्दू बहन बेटियों के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़, अत्याचार और गो तस्करी की घटनाएं बेतहाशा बढ़ी हैं. ठगी की घटनाओं से अलवर बदनाम हो चुका है. खाली भूखण्डों पर कब्जे हो गए हैं. तुष्टीकरण के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही और अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं.

प्रताड़नाओं से परेशान होकर ही हिन्दू समाज सड़कों पर उतरा और मौन जुलूस निकाला. जूलूस में आमजन से लेकर अनेक समाजसेवी और जन प्रतिनिधि शामिल हुए. कंपनी बाग शहीद स्मारक से लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया और पिछले दिनों हुई दुष्कर्म की निम्न घटनाओं की ओर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित करते हुए उनके नाम एक ज्ञापन भी सौंपा….

  1. ग्राम नाहरपुर, पुलिस थाना रामगढ़, विधानसभा क्षेत्र अलवर ग्रामीण, जून 2021 के अंतिम सप्ताह में ओड समाज की एक नाबालिग 12 वर्षीय बालिका के साथ मेव समाज के 3 युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने की घटना हुई. जिसकी प्राथमिकी संख्या 322/21 है, प्राथमिकी पुलिस थाना रामगढ़ में दर्ज कराई गई.
  2. एमआईए अलवर की एक फैक्ट्री में महिला के साथ 2 वर्ष में कई बार सामूहिक दुष्कर्म हुआ, जिसका वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. महिला ने अलवर के महिला थाने में केस दर्ज कराया है. जिसकी मुकदमा संख्या 206/21 है.
  3. कोटकासिम थाना क्षेत्र में एक नाबालिग का अपहरण कर ढाई माह तक दुष्कर्म किए जाने का मामला, जिसकी मुकदमा संख्या 139/21 है.
  4. खैरथल थाना क्षेत्र में मुकदमा संख्या 365/21 के अंतर्गत अनुसूचित जाति समाज की नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला.
  5. खैरथल थाना अंतर्गत मुकदमा संख्या 370/21, नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला.
  6. भिवाड़ी के चौपानकी थाना क्षेत्र के महिला थाने में दीवानी मुकदमा संख्या 87/21 के अंतर्गत दर्ज 16 वर्षीय बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला.
  7. देसूला में गोचर भूमि पर अवैध कब्रिस्तान का निर्माण कर कब्जा करने का मामला.

ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं लगभग प्रतिदिन ही घट रही हैं, जिन पर कोई ठोस कार्यवाही भी नहीं होती. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधियों को उनके समाज एवं वर्तमान सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों एवं सत्तारूढ़ पार्टी के पदाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है. उनके दबाव के चलते पुलिस प्रशासन कानून का पालन करवा कर अपराधियों को उचित दंड दिलवाने में भी सक्षम दिखाई नहीं दे रहा है.

ज्ञापन में राज्यपाल से निवेदन किया गया है कि वे राज्य सरकार को गो तस्करी रोकने, हिन्दू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करने और हिन्दू समाज की महिलाओं व बालिकाओं को प्रताड़ित करने वालों की पहचान कर उन्हें उचित दंड दिलवाए जाने की व्यवस्था करने हेतु निर्देशित करें ताकि क्षेत्र में हो रहे हिन्दू समाज के पलायन को रोका जा सके.

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July 16th 2021, 9:30 am

भोपाल – बैरागढ़ कपड़ा बाजार के व्यापारियों ने चीन को दिया झटका

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भोपाल. भोपाल के बैरागढ़ थोक कपड़ा बाजार में तीन साल पहले तक चीन में बने कपड़े की भरमार थी. खासतौर पर चादरें, रजाई का कपड़ा, पर्दे एवं हैंडलूम कपड़े पर चीन का वर्चस्व था, लेकिन अब यह बीते दिनों की बात हो गई है. देशी कपड़ा बेचकर व्यापारी आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बना रहे हैं. यहां से पूरे प्रदेश के थोक व फुटकर कारोबारी कपड़ा खरीदते हैं. बैरागढ़ के थोक कपड़ा बाजार में करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना टर्नओवर होता है.

व्यापारियों के अनुसार बाजार में चीनी कपड़े की बिक्री तीन साल में 90 फीसद तक कम हो गई है. एक अनुमान के अनुसार व्यापारियों ने पिछले एक साल में ही चीन को 100 करोड़ रुपये का झटका दिया है.

दरअसल, चीन में बना सामान सस्ता होने के कारण व्यापारी इसकी बिक्री करते रहे. ग्राहक भी सस्ता माल होने के कारण पहले यह नहीं देखते थे कि इसका उत्पादन कहां हुआ है और इसकी खरीद-फरोख्त का क्या परिणाम हो सकता है. लेकिन अब न केवल व्यापारी, बल्कि ग्राहक भी यह समझने लगे हैं कि भारत में बनी वस्तुएं खरीदकर ही हम देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं. भारत के प्रति चीन के नकारात्मक रवैये को देखते हुए लोग स्वप्रेरणा से भारत में निर्मित सामान खरीदने लगे हैं. इसका प्रभाव कपड़ा बाजार पर भी दिख रहा है. हालांकि, चीन से माल की आवक बंद नहीं हुई है पर इसकी खपत कम हो गई है.

थोक वस्त्र व्यवसाय संघ के अध्यक्ष कन्हैया लाल के अनुसार पहले चीन में निर्मित चादरों की बहुत मांग थी. चीनी कपड़ा दिखने में अच्छा, नर्म और सस्ता होता है. पर भारतीय कंपनियों ने इसका विकल्प ढूंढ निकाला. अब भारत में निर्मित कपड़ा ही बिक रहा है.

कन्हैया लाल बताते हैं कि दो साल पहले तक दिल्ली, पानीपत, लुधियाना और सूरत से हैंडलूम, कंबल, शॉल आदि चीन निर्मित कपड़े आते थे. इसका करीब 110-115 करोड़ का सालाना कारोबार होता था. धीरे-धीरे चीन का यह माल मंगवाना कम हुआ और अब महज 10 से 12 करोड़ का माल ही आ रहा है. 90 फीसद हैंडलूम के कपड़े अब भारत निर्मित ही मंगवा रहे हैं.

मुनाफा अधिक फिर भी नहीं बेचते

थोक कपड़ा व्यापारियों के अनुसार चीन से आने वाले कपड़े के दाम भारत में बने कपड़े के मुकाबले कम होते हैं. इसका लाभ ग्राहकों को कम होता है, लेकिन व्यापारियों को चीन के कपड़े पर अधिक मुनाफा होता है. इसके बावजूद व्यापारी अब चीन का कपड़ा बेचना नहीं चाहते. हैंडलूम की चीन में बनी सिंगल बेड की चादर 100 से 200 रुपये तक में मिलती है. भारतीय चादर के दाम 10 फीसद तक अधिक हैं, लेकिन अब व्यापारी और ग्राहक दोनों की पसंद भारतीय कपड़ा है.

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July 16th 2021, 9:30 am

मतांतरण विरोधी केंद्रीय कानून व मठ-मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति विषयों पर होगा मंथन

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फरीदाबाद. विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय प्रबंध समिति व प्रन्यासी मण्डल की दो दिवसीय बैठक शनिवार से हरियाणा के फरीदाबाद में प्रारंभ हो रही है. देश भर के लगभग 275 विहिप पदाधिकारियों के बैठक में भाग लेने की संभावना है. भारत के बाहर की शाखाओं के प्रतिनिधि भी बैठक में भाग लेंगे. विहिप केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने बैठक की विषय सूची के बारे में कहा कि मतांतरण के विरुद्ध केंद्रीय कानून, मठ-मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति, बंगाल में हुई हिंसा तथा कोरोना की तीसरी लहर की पूर्व तैयारी के अतिरिक्त संगठन के षष्टि-पूर्ति वर्ष व संगठन विस्तार के विषय में व्यापक चर्चा होने की आशा है. इसमें विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष व महामंत्री का चुनाव भी होना है.

बैठक में विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश विष्णु सदाशिव कोकजे, कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार, कार्याध्यक्ष (विदेश) अशोक राव चौगुले, उपाध्यक्ष गंगराजू, ओम प्रकाश सिंहल, डॉ. आर.एन. सिंह व हुक्म चंद सांवला तथा कोषाध्यक्ष रमेश गुप्ता सहित सभी केन्द्रीय व क्षेत्रीय पदाधिकारी कोविड नियमों का पालन करते हुए हरियाणा के फरीदाबाद सेक्टर 43 स्थित मानव रचना शैक्षणिक संस्थान में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रह सकेंगे तथा देश-विदेश के शेष पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे. यह बैठक हर छह मास में बुलाई जाती है.

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July 16th 2021, 6:15 am

म.प्र. माध्यमिक शिक्षा मण्डल परीक्षा परिणाम – सरस्वती शिशु मंदिरों ने नौ छात्रों ने 500 में से 500 अ

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जबलपुर. माध्यमिक शिक्षा मण्डल म. प्र. भोपाल द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में विद्याभारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों के अनेक छात्रों ने 500 में से 500 अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा एक बार फिर सिद्ध की है.

स्मरणीय है कि कोरोना महामारी के कारण कक्षाओं का प्रत्यक्ष शिक्षण कार्य संभव नहीं था. विद्याभारती ने इन छात्रों के ऑनलाइन शिक्षण और अभिभावक संपर्क द्वारा निजि परामर्श से कठिनाईयों को दूर करते हुए छात्रों को शिक्षण कार्य से जोड़े रखा. पूरे महाकौशल प्रांत में सरस्वती शिशु मंदिरों ने मोहल्ला पाठशालाओं द्वारा छात्रों की कठिनाईयों का निराकरण किया और उन्हें शिक्षण की गतिविधियों से जोड़े रखा.

इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण मण्डल द्वारा ली जाने वाली हाईस्कूल परीक्षा का आयोजन नहीं किया गया था. छात्रों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा, यूनिट टेस्ट, प्रोजेक्ट वर्क और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर शालाओं द्वारा प्रदत्त अंकों की समीक्षा कर मण्डल द्वारा परीक्षा परिणाम तैयार किया गया है. परिणाम स्वरूप माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा घोषित परीक्षा परिणामों में सरस्वती शिशु मंदिरों के अनेक छात्रों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण कर संस्था का नाम रोशन किया.

इसी क्रम में सरस्वती शिशु मंदिर जेलमार्ग रीवा के 3 छात्र – दीप्ति द्विवेदी, देवांश मिश्रा एवं रुचि पांडेय व पथरिया सागर के 4 छात्र – रिया तिवारी, स्वाति खरे, राम उपाध्याय, विकास दुबे एवं पवई पन्ना के 2 छात्र – सत्येन्द्र पटेल और प्रखर त्रिपाठी ने 500 में से 500 अंक प्राप्त कर माता-पिता, विद्यालय अभिभावकों का गौरव बढ़ाया है.

छात्रों की उपलब्धि पर विद्याभारती महाकौशल प्रांत के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार आचार्य, कुलपति अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा, संगठन मंत्री डॉ. आनंद राव, सचिव डॉ. नरेन्द्र कोष्टी सहित अन्य पदाधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को शुभकामना एवं बधाई प्रेषित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

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July 15th 2021, 3:59 pm

पोखरण – आईएसआई के लिए काम करने वाले हबीबुर को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पोखरण में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान बीकानेर निवासी हबीबुर रहमान के रूप में हुई है. हबीबुर रहमान पोखरण में आर्मी एरिया के अंदर सब्जी आपूर्ति का काम करता था. हबीबुर रहमान आईएसआई को गोपनीय जानकारियां लीक कर रहा था. फिलहाल क्राइम ब्रांच की टीम हबीबुर रहमान को पोखरण से पकड़कर दिल्ली ले आई है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है.

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने जानकारी दी कि राजस्थान के पोखरण से आरोपी हबीबुर रहमान को गिरफ्तार किया गया है. उसके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का दावा है कि वह पाकिस्तान की ISI के लिए काम करता था. पुलिस द्वारा गिरफ्तार आईएसआई के जासूस ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं. उससे लगातार पूछताछ हो रही है.

क्राइम ब्रांच का दावा है कि उसके पास से सेना के गोपनीय दस्तावेज और सेना क्षेत्र का नक्शा बरामद किया गया है. पूछताछ में आरोपी ने कहा कि दस्तावेज उसे आगरा में तैनात सेना की जवान परमजीत कौर ने दिए थे. रहमान को एक कमल को दस्तावेज सौंपने थे. बताया जा रहा है कि हबीबुर के पास सेना के एरिया में सब्जी की आपूर्ति करता था. उसके पास सब्जी की आपूर्ति करने का ठेका था. क्राइम ब्रांच ने कहा कि अभी भी आरोपी से पूछताछ की जा रही है.

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July 15th 2021, 3:59 pm

सेना ने 147 अतिरिक्त भारतीय सेना महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान किया

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नई दिल्ली. भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के परिणामस्वरूप, पीसी के अनुदान के लिए महिला अधिकारियों की स्क्रीनिंग के लिए एक स्पेशल नंबर 5 चयन बोर्ड का गठन सितंबर 2020 में किया गया था और नवंबर 2020 में इसके परिणाम घोषित किए गए. इसके अलावा मार्च 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने महिला अधिकारियों के कुछ मामलों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया था, जिन्हें स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए संशोधित मानदंडों के आधार पर कमीशन प्रदान नहीं किया गया था.

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार महिला अधिकारियों पर फिर से विचार किया गया और नए परिणामों को अब डी-क्लासिफाई किया गया है. नतीजतन 147 और महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान किया जा रहा है, जिसमें कुल 615 अधिकारियों में से 424 को स्थायी कमिशन दिया गया है. कुछ महिला अधिकारियों के परिणाम प्रशासनिक कारणों से रोक दिए गए हैं और सर्वोच्च न्यायालय में यूओआई द्वारा दायर स्पष्टीकरण याचिका के परिणाम की प्रतीक्षा की जा रही है.

स्थायी कमीशन प्रदान की गई सभी महिला अधिकारियों को भारतीय सेना में उच्च नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और चुनौतीपूर्ण सैन्य कार्य से गुजरना होगा. 33 महिला अधिकारियों के एक बैच ने हाल ही में आर्मी वार कॉलेज महू से मिड लेवल टैक्टिकल ओरिएंटेशन कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है.

कुछ महिला अधिकारी जो पहले ही 20 साल से सेवा कर चुकी हैं, उन्हें पेंशन प्रदान कर दी गई है. जबकि अन्य को 20 साल तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाएगी और उन्हें पेंशन प्रदान कर दी जाएगी.

जूनियर बैच में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन दिसंबर 2020 से शुरू हो गए हैं, जिसमें उन्हें अपने 10वें वर्ष की सेवा में पीसी के लिए माना जाता है. स्थायी कमीशन प्रदान करने के साथ महिला अधिकारी लैंगिक समानता के युग में आगे बढ़ रही हैं और अपने पुरुष समकक्षों के समान चुनौतीपूर्ण नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं.

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July 15th 2021, 3:59 pm

ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों पर रखें नजर, जिला पुलिस अधीक्षक ने जारी किया सर्कुलर

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रायपुर. प्रदेश के जनजाति बहुल क्षेत्रों में कई दशकों से ईसाई मिशनरीज़ मतांतरण के कार्य में लगी हैं. जनजाति समाज के भोले-भाले नागरिकों का ईलाज, पढ़ाई-प्रार्थना, और बहला फुसलाकर मतांतरण किया जाता है. इसी कारण पिछले कुछ समय से बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में धर्म परिवर्तित कर चुके ईसाई लोगों और स्थानीय जनजातियों के बीच विवाद होता रहता है.

अब इस मामले को लेकर सुकमा जिला पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थानेदारों को एक सर्कुलर जारी किया है, स्थानीय जनजातीय समाज को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास की वजह से स्थानीय जनजाति समुदाय और धर्म परिवर्तित कर चुके ईसाइयों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है.

इसी कारण निर्देश दिया है कि जिले में निवासरत ईसाई मिशनरी और धर्म परिवर्तित कर चुके जनजातियों की अवांछित गतिविधियों पर कड़ी नजर रखकर उन पर विधि संगत कार्रवाई की जाए.

जिला पुलिस अधीक्षक ने लिखा है कि अंदरूनी क्षेत्रों में स्थानीय जनजातियों को बहलाकर और लालच देकर जनजातियों को धर्म परिवर्तन करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय जनजातियों और धर्म परिवर्तित जनजाति समाज के बीच विवाद की स्थिति निर्मित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि नजर आने पर त्वरित विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पुलिस कंट्रोल रूम को अवगत कराना सुनिश्चित करें.

नोटिस जारी होने के बाद संभावना है कि स्थानीय मिशनरी समूह पूरी तरह से हड़बड़ा चुका हो. दरअसल, इस पूरे क्षेत्र में बीते लंबे समय से जनजाति समाज के लोगों को धर्म परिवर्तित कर ईसाई बनाने का व्यापार मिशनरी चला रहे हैं.

बीते वर्ष कोंडागांव जिले में स्थानीय जनजातीय समुदाय द्वारा बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन को अंजाम दिया गया था. बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग मिशनरी के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए थे.

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July 15th 2021, 3:59 pm

सिक्ख युवक ने पत्नी व ससुराल वालों पर लगाया धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप, कोर्ट में दायर

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चंडीगढ़. एक सिक्ख युवक ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया. युवक ने चंडीगढ़ जिला अदालत में अर्जी दाखिल की है.

अमृतसर के सिक्ख युवक ने चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका लगाई है कि उनकी पत्‍नी और ससुराल वाले उन पर और उनके बेटे पर जबरन इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव डाल रहे हैं. अपनी याचिका में तरलोचन ने मांग की है कि कोर्ट उनके ससुराल पक्ष को निर्देश दे कि जबरन धर्मांतरण के लिए उन्‍हें मजबूर न किया जाए. आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने बेटे को अपने पास रखा हुआ है और वह उसका खतना कर देंगे. इसलिए उन्हें रोका जाए.

पीड़ित सिक्ख ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर रही है. पीड़ित की ओर से एडवोकेट दीक्षित अरोड़ा ने कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि मूल रूप से अमृतसर के रहने वाले युवक ने 17 नवंबर, 2008 को एक मुस्लिम युवती से शादी की थी.

दोनों एक साथ नौकरी करते थे और फिर उन्होंने अमृतसर के गुरुद्वारा साहिब में लव मैरिज कर ली. लड़की के परिवार ने इस्लाम अपनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. उनके दबाव से बचने को वह पत्नी को लेकर दिल्ली चला गया और वहां नौकरी करने लगा. इसके बाद अपने घर अमृतसर आया. वहां वे 2015 तक रहे, लेकिन इस दौरान उसकी पत्नी ने उन्हें वापस चंडीगढ़ जाने के लिए कहना शुरू कर दिया.

कई बार बाल कटवाने का दबाव बनाया

याचिका के अनुसार, साल 2016 में वो चंडीगढ़ आ गए और अपनी पत्नी और उसके परिवार के साथ ही रहने लगा. लड़की के परिवार ने कई बार उन्हें पगड़ी उतारने और बाल कटवाने के लिए मजबूर किया. कहते हैं कि मुस्लिमों की तरह रहो. उनके बेटे को भी मुस्लिम बनाने की कोशिश की गई. झगड़ा बढ़ता रहा और ससुराल पक्ष ने घर से निकाल दिया और उसके बेटे को अपने पास रख लिया. याची का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और उनकी जान को भी खतरा है.

इनपुट – न्यूज18

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July 15th 2021, 3:59 pm

सिंगापुर के बाद भीम-यूपीआई एप अपनाने वाला दूसरा देश बना भूटान

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नई दिल्ली. भूटान भीम-यूपीआई एप को अपनाने वाला दूसरा और भीम यूपीआई क्‍यूआर कोड आधारित भुगतान प्रणाली अपनाने वाला पहला देश बना है. इससे पहले सिंगापुर भीम-यूपीआई एप को अपना चुका है. साथ ही रुपे कार्ड को भी यूएई, सिंगापुर और भूटान अपना चुके हैं.

भूटान ने भीम-यूपीआई को अपने यहां लागू किया है. मंगलवार को एक आभासी कार्यक्रम के दौरान वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण और भूटान के वित्‍त मंत्री ल्योंपो नमगेय शेरिंग ने संयुक्‍त रूप से भूटान में भीम यूपीआई एप को लांच किया.

भूटान दुनिया का पहला देश है, जहां भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के मानकों के आधार पर क्‍यूआर (QR) कोड तैयार किया जाएगा. इसके अलावा दुनिया में केवल भूटान में ही भीम-यूपीआई के साथ भारत का रुपे कार्ड भी प्रयोग किया जाता है. भारत एवं भूटान के बीच रुपे कार्ड की स्वीकार्यता पहले ही क्रियान्वित हो चुकी है. भीम यूपीआई के क्रियान्वित होने से भारत एवं भूटान के भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर एक-दूसरे से अच्छी तरह से जुड़ गए हैं.

एप लॉंचिंग के अवसर पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत से सालाना दो लाख से अधिक लोग भूटान घूमने जाते हैं. भीम एप शुरू होने से उन्‍हें वहां लेन-देन में आसानी होगी. लॉंच के बाद वित्त मंत्री ने भूटानी ओजीओपी आउटलेट से जैविक उत्पाद खरीदने के लिए भीम-यूपीआई से लेन-देन किया. यह आउटलेट भूटान में स्थानीय समुदायों द्वारा जैविक रूप से बनाए गए ताजा कृषि उत्पाद बेचता है. वित्‍त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भीम-यूपीआई भारत में डिजिटल लेनदेन का बड़ा मंच बना. 2020 में यूपीआई के जरिए 457 अरब डॉलर का करोबार हुआ, जो देश के लगभग 15 प्रतिशत जीडीपी के बराबर है.

भूटान में भुगतान

भारत इंटरफेस फॉर मनी (बीएचआईएम) भारत का डिजिटल भुगतान एप्लिकेशन है जो यूपीआई के माध्यम से काम करता है. यह तत्काल रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है. यूपीआई कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल एप्लिकेशन में सक्षम बनाता है. देश के नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीएल) की अंतरराष्‍ट्रीय शाखा एनपीसीएल इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनपीआईएल) ने भूटान की रॉयल मॉनेटरी अथॉरिटी (आरएमए) के साथ साझेदारी की घोषणा की है. इसी के तहत वहां भीम यूपीआई क्‍यूआर आधारित भुगतान किए जा सकेंगे.

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई, 2018 को सिंगापुर में भीम, रुपे कार्ड और एसबीआई एप को लांच किया था. रुपे से सिंगापुर की 33 साल पुरानी नेटवर्क फॉर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स ट्रांसफर्स (एनईटीएस) को जोड़ा गया गया था. यानी रुपे के उपयोगकर्ता सिंगापुर में उन सभी जगहों पर भुगतान कर सकते थे, जहां एनईटीएस स्वीकार्य था. इसके बाद, नवंबर 2019 में पहली बार सिंगापुर फिनटेक महोत्‍सव में क्यूआर कोड आधारित भुगतान सेवा भीम-यूपीआई का वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन किया गया. इससे पहले अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के बाजार में रुपे कार्ड की पेशकश की थी. तब संयुक्त अरब अमीरात पश्चिम एशिया का पहला देश बन गया था, जिसने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की भारतीय प्रणाली को अपनाया.

इनपुट – पाञ्चजन्य

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July 15th 2021, 3:59 pm

लाल किला हिंसा – गोली लगने से नहीं, सिर में गंभीर चोट लगने से हुई थी नवरीत की मौत

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नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस के अवसर पर कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर लाल किला पर हिंसा का खेल रचा गया था. ट्रैक्टर रैली के दौरान एक किसान की मौत भी हो गई थी. आरोप लगाया गया था कि किसान नवरीत की मौत पुलिस की गोली लगने के कारण हुई है. लेकिन, अब झूठ से पर्दा उठ गया है और सच्चाई सामने आ गई है. किसान की मौत गोली से नहीं, बल्कि सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हुई थी.

गणतंत्र दिवस के अवसर पर कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान भारी संख्या में प्रदर्शनकारी लाल किला और आसपास के क्षेत्रों जमा हो गए थे. ट्रैक्टर रैली के दौरान आईटीओ के पास एक किसान की मौत हो गई थी, जिसके पोस्टपार्टम रिपोर्ट की स्टडी कर चिकित्सकों के पैनल ने रिपोर्ट दिल्ली क्राइम ब्रांच को सौंपी है.

रामपुर में किसान का पोस्टमार्टम किया था और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की स्टडी की. क्राइम ब्रांच ने अदालत के आदेश पर परिवार वालों को घटना का सीसीटीवी फुटेज भी दिखाई थी.

ट्रैक्टर पलटने से किसान की मौत

26 जनवरी की हिंसा वाले दिन 24 साल के नवरीत सिंह की मौत हुई थी. दावा किया गया था कि गोली लगने से युवक की मौत हुई है. नवरीत की मौत को लेकर जमकर सियासत भी हुई और मामला दिल्ली उच्च न्यायालय तक पहुंचा. परिवार ने आरोप लगाया कि गोली लगने से युवक की मौत हुई है और कोर्ट की निगरानी में इसकी जांच की जाए.

दिल्ली पुलिस ने जांच के पश्चात बताया था कि नवरीत की मौत ट्रैक्टर पलटने के बाद लगी गंभीर चोट के कारण हुई थी और उसे गोली नहीं लगी थी. अब मौलाना आजाद के चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की स्टडी करने के बाद रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार नवरीत की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई थी.

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July 14th 2021, 7:33 pm

भारत की संपदा उसका ज्ञान है – दत्तात्रेय होसबाले

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भोपाल. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत में हजारों वर्षों से शिक्षा को लेकर उज्ज्वल परंपरा रही है. भारत विश्व गुरु रहा है. भारत की संपदा उसका ज्ञान है. लेकिन वर्तमान में भारत को मूर्धन्य उदाहरण के रूप में नहीं देखा जाता, हमें उस स्थिति में भारत को लाना है. भारत को विश्व गुरु बनाने का कार्य वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को करना है. यह शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से होगा. सरकार्यवाह बुधवार सुबह विद्या भारती मध्यक्षेत्र के शैक्षिक शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान अक्षरा के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने अक्षरा स्मारिका का भी विमोचन किया.

उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में कृषि क्षेत्र को छोड़कर सभी क्षेत्र बाधित हुए हैं. महामारी से सारी मानवता लड़ रही है. हम सब इसका सामना कर रहे हैं. अभी तीसरी लहर की आशंका का भय भी है, हम उसका भी सामना करेंगे. महामारी से लाखों लोग मानसिक, आर्थिक व अन्य प्रकार के संकट का अनुभव कर रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में देश, समाज को एक होकर लड़ना चाहिए. लेकिन समाज में जब भी संकट व आपत्ति आती है, लोग दोष ढूंढने लगते हैं, प्रबुद्ध समाज ऐसा नहीं करता है. यह बीते कई वर्षों से चल रही शिक्षा व्यवस्था का ही दोष है. जबकि विद्या भारती के पूर्व छात्रों ने वैश्विक महामारी में जिस प्रकार से कार्य किया है, वह मन को प्रसन्न करने वाला है. यह कार्य बताता है कि विद्या भारती के विद्यालय अपने विद्यार्थियों को क्या संस्कार देते हैं. पूर्व छात्रों ने हर क्षेत्र में अपने विद्यालय से प्राप्त संस्कारों का प्रदर्शन कर सेवा का कार्य कर इतिहास रचा है और उन्होंने अपने मानव होने का प्रकटीकरण किया है.

एक छोटा देश, फिनलैंड की शिक्षा पद्धति को दुनिया में मॉडल बनाया गया है. अच्छा है हम उसे स्वीकार करें, लेकिन जिस देश में हजारों वर्षों में शिक्षा की परंपरा है, वह देश आज मॉडल बनने से पीछे है, यह अच्छा नहीं है.

भारतीय शिक्षा दुनिया में उदाहरण बने

उन्होंने कहा कि विद्या भारती संस्थान संस्कारवान शिक्षा दे रहा है. मध्य भारत क्षेत्र में अक्षरा शोध व प्रशिक्षण का केंद्र बनेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति जननीति है. इसमें जनता के सुझाव शामिल हैं. भारतीय शिक्षा दुनिया में उदाहरण बने, हिंदुस्तान को वहां ले जाकर खड़ा करना है, जहां हम पहले खड़े थे. हम विश्व गुरु थे, दुनिया की शिक्षा का केंद्र थे, अब हमें इसका उदाहरण प्रस्तुत करना है. जिससे दुनिया हमारा अनुकरण कर सके.

सरकार्यवाह ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि 9/11 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले के बाद पूरा अमेरिका एकजुट खड़ा था. अमेरिका ने पहले उस आपदा से निपटा, फिर हमले के कारणों और ऐसी घटनाओं को रोकने को लेकर समीक्षा की.

उन्होंने कहा कि लोगों में कई प्रकार के दोष आ गए हैं. अपनी जान को जोखिम में डालकर काम करने वाले कम लोग दिखते हैं. कोरोना महामारी के दौरान भी समाज के अंदर के ही कई लोगों ने महंगा सामान दिया. यह हमें किस प्रकार की शिक्षा और संस्कार से प्राप्त हुआ. क्या समाज के संकट के दिनों में इस तरह से कोई लूटता है, कोई ऐसा कार्य करता है, नहीं. लेकिन हुआ, इसका कारण सही शिक्षा व संस्कारों का नहीं मिलना ही मान सकते हैं. शिक्षा व्यक्तित्व को गढ़ने का कार्य करती है. बीते वर्षों में ऐसी शिक्षा दी गई, जिसमें संस्कार कम दिखे. विद्या भारती शिक्षा के साथ संस्कार देती है, अच्छा मनुष्य बनाती है. जिस तरह भारत ने अपने लिए अपना बनाया संविधान दिया है, उसी तरह अपने लिए नई शिक्षा नीति भी बनाई है. सरकार शिक्षा को सुधारने के लिए नई शिक्षा नीति को लागू करने का अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, करेगी भी. केंद्र और राज्य सरकारें प्रयास में लगी हैं, लेकिन सामाज को भी प्रयास करना होगा.

प्रशिक्षण केंद्र के सरकारी उपयोग की बनेगी योजना

अध्यक्षीय उद्बोधन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा का कार्य केवल सरकार के हाथों में हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है. सामाजिक क्षेत्र की संस्थाएं यह कार्य बखूबी निभा रही हैं. जिसमें विद्या भारती एक बड़ी संस्था है. विद्या भारती ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माण में बड़ा योगदान दिया है और क्रियान्वयन में भी यह बड़ी भूमिका निभा रही है. विद्या भारती का यह शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान केवल विद्या भारती के लिए ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि शासकीय स्तर पर भी इसका कैसे उपयोग हो, इसका कैसे प्रशिक्षण में लाभ ले सकें, इस पर योजना बनाई जाएगी. बालक बेहतर मनुष्य कैसे बने, इस पर शैक्षिक संस्थाओं में विचार किया जाता है. छात्र में प्रत्येक सद्गुण का समावेश हो इसका पूरा प्रयास किया जाता है. हमारे सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षा के साथ संस्कार की शिक्षा देने के इस कार्य का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं.

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भमिका रहेगी

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष दू. सी. रामकृष्ण राव ने कहा कि यह शोध, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण का केंद्र बनेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में यह संस्थान बड़ी भूमिका निर्वहन करेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्रों के कौशल विकास पर जोर दिया गया है. इस प्रशिक्षण शोध संस्थान में शिक्षक प्रशिक्षण लेंगे और उस दिशा में कार्य करेंगे. जो आचार्य है, शिक्षक है, वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रथम पंक्ति का योद्धा है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू कराने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करना है. ज्ञानार्जन एक ही दिशा से नहीं, बल्कि कहीं से भी प्राप्त हो सकता है.

रामकृष्ण राव ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य है, हमें जो ज्ञान प्राप्त हुआ है, जो अनुसंधान हमने किया है उसे अगली पीढ़ी को स्थानांतरित करें. सबसे बड़ा महत्वपूर्ण कार्य छात्रों को नागरिक संस्कार देना है. भारतीय परंपरा में यह अनादि काल से किया जा रहा है.

कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती मध्यभारत प्रांत प्रमुख डॉ. राम भावसार ने किया. आभार प्रदर्शन मध्य क्षेत्र के जितेंद्र सिंह ने किया.

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July 14th 2021, 7:33 pm

एनटीपीसी कच्छ के रण में भारत का सबसे बड़ा सोलर पार्क स्थापित करेगी

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नई दिल्ली. एनटीपीसी की सहायक कंपनी, एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड को गुजरात के कच्छ के रण में 4,750 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पार्क स्थापित करने के लिए नवीन-नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से स्वीकृति मिल गई है. यह भारत का सबसे बड़ा सोलर पार्क होगा, जिसका निर्माण देश की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनी करेगी.

मंत्रालय ने एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (एनटीपीसी आरईएल) को 12 जुलाई, 2021 को सोलर पार्क योजना के मोड 8 (अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क) के तहत दी है. एनटीपीसी आरईएल की पार्क से व्यावसायिक स्तर पर हरित हाइड्रोजन उत्पन्न करने की योजना है.

हरित ऊर्जा पोर्टफोलियो संवर्द्धन के एक हिस्से के रूप में, भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा एकीकृत कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड का लक्ष्य 2032 तक 60 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का निर्माण करना है. वर्तमान में, राज्य के स्वामित्व वाली प्रमुख विद्युत कंपनी की 70 विद्युत परियोजनाओं में 66 गीगावॉट की क्षमता है. इसके अतिरिक्त 18 गीगावॉट निर्माणाधीन है.

हाल ही में, एनटीपीसी ने आंध्र प्रदेश के सिम्हाद्री ताप विद्युत संयंत्र के जलाशय पर भारत का सबसे बड़ा 10 मेगावाट (एसी) का फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी प्रारंभ किया है. इसके अतिरिक्त 15 मेगावॉट (एसी) अगस्त, 2021 तक प्रारंभ होगा. इसके अलावा, तेलंगाना स्थित रामागुंडम ताप विद्युत संयंत्र के जलाशय पर 100 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना कार्यान्वयन के अग्रिम चरण में है.

एनटीपीसी आरई लिमिटेड ने हाल ही में केंद्र शासित लद्दाख और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी) के साथ हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और एफसीईवी बसों पर तैनाती के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. एमओयू पर हस्ताक्षर को लेह में सोलर ट्री और सोलर कार पोर्ट के रूप में एनटीपीसी के पहले सोलर इंस्टॉलेशन के उद्घाटन के साथ भी चिह्नित किया गया था.

सहायक कंपनी एनटीपीसी आरईएल को एनटीपीसी के नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार में तेजी लाने के लिए 07 अक्टूबर, 2020 को सम्मिलित किया गया था.

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July 14th 2021, 7:33 pm

नए भारत के निर्माण में आवश्यक समान नागरिक संहिता

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सुखदेव वशिष्ठ

समान नागरिक संहिता को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद देशभर में चर्चा शुरू हो गई है. समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि आधुनिक भारतीय समाज ‘धीरे-धीरे समरूप होता जा रहा है, धर्म, समुदाय और जाति के पारंपरिक अवरोध अब खत्म हो रहे हैं’ और इस प्रकार समान नागरिक संहिता अब उम्मीद भर नहीं रहनी चाहिए. आदेश में कहा गया, ‘भारत के विभिन्न समुदायों, जनजातियों, जातियों या धर्मों के युवाओं को जो अपने विवाह को संपन्न करते हैं, उन्हें विभिन्न पर्सनल लॉ, विशेषकर विवाह और तलाक के संबंध में टकराव के कारण उत्पन्न होने वाले मुद्दों से जूझने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.’

साल 1985 के ऐतिहासिक शाह बानो मामले सहित यूसीसी की आवश्यकता पर सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का जिक्र करते हुए, न्यायालय ने कहा कि, ‘संविधान के अनुच्छेद 44 में उम्मीद जताई गई है कि राज्य अपने नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता को हकीकत में बदलेगा. यह महज एक उम्मीद बनकर नहीं रहनी चाहिए.’

शाह बानो मामले में, शीर्ष अदालत ने कहा था कि समान नागरिक संहिता परस्पर विरोधी विचारधारा वाले कानूनों के प्रति असमान निष्ठा को हटाकर राष्ट्रीय एकता के उद्देश्य को पाने में मदद करेगी. सरकार पर देश के नागरिकों को समान नागरिक संहिता के लक्ष्य तक पहुंचाने का कर्तव्य है. शीर्ष अदालत ने समय-समय पर यूसीसी की जरूरत को रेखांकित किया है, हालांकि, ‘यह स्पष्ट नहीं है कि इस संबंध में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.’

अदालत का निर्देश

अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की एक प्रति कानून और न्याय मंत्रालय के सचिव को उचित समझी जाने वाली आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए. अदालत इस पर सुनवाई कर रही थी कि क्या मीणा समुदाय के पक्षकारों के बीच विवाह को हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 (एचएमए) के दायरे से बाहर रखा गया है. जब पति ने तलाक मांगा तो पत्नी ने तर्क दिया कि एचएमए उन पर लागू नहीं होता क्योंकि मीणा समुदाय राजस्थान में एक अधिसूचित अनुसूचित जनजाति है. अदालत ने महिला के रुख को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान मामले ‘सब के लिए समान’ ‘इस तरह की एक संहिता की आवश्यकता को उजागर करते हैं, जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि जैसे पहलुओं के संबंध में समान सिद्धांतों को लागू करने में सक्षम बनाएंगे.

दोनों पक्षों ने बताया कि उनकी शादी हिन्दू रीति-रिवाजों और समारोहों के अनुसार हुई थी और वे हिन्दू रीति-रिवाजों का पालन करते हैं. अदालत ने कहा कि हालांकि हिन्दू की कोई परिभाषा नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अगर जनजातियों के सदस्यों का हिन्दूकरण किया जाता है, तो उन पर एचएमए लागू होगा.

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में अधिकांश भारतीय कानून, सिविल मामलों में एक समान नागरिक संहिता का पालन करते हैं, जैसे- भारतीय अनुबंध अधिनियम, नागरिक प्रक्रिया संहिता, माल बिक्री अधिनियम, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, भागीदारी अधिनियम, साक्ष्य अधिनियम आदि. हालांकि राज्यों ने कई कानूनों में कई संशोधन किये हैं. परंतु धर्मनिरपेक्षता संबंधी कानूनों में अभी भी विविधता है. हाल ही में कई राज्यों ने एक समान रूप से मोटर वाहन अधिनियम, 2019 को लागू करने से इनकार कर दिया था.

सरला मुद्गल वाद (1995) भी इस संबंध में काफी चर्चित है, जो बहुविवाह के मामलों और इससे संबंधित कानूनों के बीच विवाद से जुड़ा हुआ था.

प्रायः यह तर्क दिया जाता है ‘ट्रिपल तलाक’ और बहुविवाह जैसी प्रथाएं एक महिला के सम्मान और उसके गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं. केंद्र ने सवाल उठाया है कि क्या धार्मिक प्रथाओं को दी गई संवैधानिक सुरक्षा उन प्रथाओं तक भी विस्तारित होनी चाहिये जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं.

समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित संवेदनशील वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि एकरूपता से देश में राष्ट्रीय भावना को भी बल मिलेगा. यह कानूनों का सरलीकरण, समान संहिता विवाह, विरासत और उत्तराधिकार के साथ ही विभिन्न मुद्दों से संबंधित जटिल कानूनों को सरल बनाएगी. परिणामस्वरूप समान नागरिक कानून सभी नागरिकों पर लागू होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म में विश्वास रखते हों.

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द सन्निहित है और एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य को धार्मिक प्रथाओं के आधार पर विभेदित नियमों के बजाय सभी नागरिकों के लिये एक समान कानून बनाना चाहिये. समान नागरिक संहिता को लागू करने से वर्तमान में मौजूद सभी व्यक्तिगत कानून समाप्त हो जाएंगे, जिससे उन कानूनों में मौजूद लैंगिक पक्षपात की समस्या से भी निपटा जा सकेगा.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25, जो किसी भी धर्म को मानने और प्रचार की स्वतंत्रता को संरक्षित करता है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता की अवधारणा के विरुद्ध है.

समाज के सभी वर्गों में परस्पर विश्वास निर्माण के लिये सरकार और समाजसेवियों को प्रयास करने होंगे. नए भारत के निर्माण में समान नागरिक संहिता मील का पत्थर साबित होगी.

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July 14th 2021, 7:33 pm

नासा इंटर्न की फोटो देख हिन्दूफोबिक ब्रिगेड के सीने पर लोटने लगे सांप…

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अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान नासा इंटर्न की फोटो में हिन्दू देवी देवताओं की प्रतिमा व चित्र क्या दिखे, कि हिन्दूफोबिक ब्रिगेड के सीने पर सांप लोटने लगे. फोटो से ऐसे चिढ़े कि बेसिर-पैर की टिप्पणियां करने लगे, मॉडर्न हिन्दू की अपनी परिभाषा बताने लगे. हिन्दू, हिन्दुत्व को लेकर उनके मनों में भरा जहर बाहर आने लगा. हालांकि, फोटो पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी बहुत थीं, लेकिन जैसे सेकुलर ब्रिगेड की दुखती रग किसी ने दबा दी हो, ऐसे तड़प रहे थे.

दरअसल, नासा ने ट्विटर पर अपने एक इंटर्न की तस्वीर साझा की. तस्वीर में प्रशिक्षु प्रमिता रॉय की टेबल पर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और चित्र सजे थे. प्रतिमा की आस्था से तथाकथित बुद्धिजीवियों को त्योरियां चढ़ना स्वाभाविक था. खुद को सेकुलर बताने वाले नास्तिकों और कम्युनिस्टों को प्रतिमा का भक्ति भाव देख पारा चढ़ गया और अनाप-शनाप टिप्पणियां करने लगे, सिर्फ प्रतिमा पर ही नहीं, बल्कि नासा पर भी. उन्होंने प्रतिमा के वैज्ञानिक होने पर ही संदेह जताया. क्योंकि उनके हिसाब से ‘पढ़े-लिखे वैज्ञानिक’ का आस्था से कोई सरोकार ही नहीं होना चाहिए. प्रतिमा ने विज्ञान में अपनी कर्मठता के कारण ही नासा में जगह प्राप्त की है.

नासा ने प्रतिमा के साथ ही तीन अन्य प्रशिक्षुओं की तस्वीरें भी साझा की हैं. लेकिन सेकुलरों ने निशाना साधा सिर्फ प्रतिमा पर क्योंकि उसकी टेबल पर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं थीं. सेकुलरों ने आलोचनाओं की झड़ी लगा दी. किसी ने इस बहाने भगवान राम को लेकर अभद्र टिप्पणी की तो किसी ने अंतरिक्ष में आस्थावान प्रतिमा की प्रतिभा पर ही उंगली उठा दी. कुछ ने कहा कि प्रतिमा को देवी-देवताओं से खुद को घेरे रखने की जरूरत ही क्या है?

नासा ने ऐसी अभद्र टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन एक बात तो पूरी तरफ स्पष्ट है कि यही लोग एक शब्द नहीं बोलते, अगर किसी मुस्लिम या ईसाई प्रशिक्षु की टेबल पर मक्का, मदीना या सलीब लगा होता.

अमेरिका के विश्वविद्यालय हों या इंग्लैंड के, वहां भी बड़े-बड़े प्रोफेसरों ने माहौल में हिन्दू धर्म के प्रति जहर फैलाने में कसर नहीं छोड़ी है. ऑक्सफोर्ड की रश्मि सावंत के साथ जो हुआ, उसे कौन भूला होगा!

हिन्दूफोबिक लॉबी और सेकुलर छात्र गुटों ने पहली बार छात्रसंघ की अध्यक्ष बनी एक छात्रा को विश्वविद्यालय को छोड़कर भारत लौटने पर सिर्फ इसलिए बाध्य कर दिया था कि वह गर्व से जय श्री राम कहती थी.

तथाकथित बुद्धिजीवी अशोक स्वैन को नासा प्रशिक्षु प्रतिमा की आस्था से कुछ ज्यादा ही दिक्कत हुई. उनके ट्वीट को देखकर आपको उनकी बुद्धि का स्तर पता चल जाएगा. वे लिखते हैं, ‘एक हिन्दू बच्ची को हिन्दू देवी-देवताओं से घिरे होने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इनके बिना हम कुछ नहीं कर सकते?’ दिलीप मंडल भी विरोध में शामिल थे. उन्होंने मॉडर्न हिन्दू की परिभाषा गढ़ दी.

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July 13th 2021, 7:48 pm

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया

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चित्रकूट. दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के दौरान अपने आठ दिवसीय प्रवास पर चित्रकूट पधारे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने प्रवास के अंतिम दिन दीनदयाल शोध संस्थान के सभी प्रकल्पों के प्रभारियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन अभियान का काम देख रहे समाजशिल्पी दंपतियों को संबोधित किया.

संस्थान के कार्यकर्ताओं के साथ परिचयात्मक एवं जिज्ञासा बैठक के दौरान संस्थान के कार्यकर्ताओं ने पूछा कि वर्तमान में सामाजिक, आर्थिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, उनमें दीनदयाल शोध संस्थान जैसे संगठन एवं संस्थाओं को क्या करना है, उनके लिए क्या मार्गदर्शन है.

इसका उत्तर देते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि कुछ तो समय बदलता है, उसके अनुसार सब को बदलना होता है. आकांक्षाएं तो पहले भी थीं. यह समाज में चलने वाली मानसिक प्रक्रिया है. प्रवृत्ति हमारी है थोड़ा चिंतन करते रहना चाहिए. कई बातों को तो कोरोना की परिस्थितियों ने बता दिया. ऐसी बातों को पहचानना. उसमें जो शाश्वत है, सत्य है, वही चिरंतन है, वही सस्टेनेबल है. जो असत्य है, वह सत्य की कसौटी पर टिकने वाला नहीं है. अपना परिवार का पालन पोषण किस तरह करना, समाज की व्यवस्था किस तरह चले, सृष्टि ठीक रहे, यह एक अपना तरीका अपने पास है, भारत के पास है.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं वनवासी क्षेत्रों में आज भी संस्कारों का नुकसान नहीं है, वहां संस्कारों में कोई क्षति नहीं हुई है. शिक्षा नहीं पहुंची उसका नुकसान हुआ है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में शिक्षा आ गई उसके कारण कुछ नुकसान भी हुआ है. इसीलिए समाज को प्रबुद्ध बनाना चाहिए. उन्होंने आयुर्वेद का उदाहरण देते हुए कहा कि काल की कसौटी पर जो आयुर्वेद में है, वह एलोपैथी में नहीं है. इसका मतलब यह नहीं कि एलोपैथी ठीक नहीं उसका भी एक अपना महत्व है.

आरोग्यधाम के वरिष्ठ चिकित्सक न्यूरो सर्जन डॉ. मिलिंद देवगांवकर ने बताया कि आरोग्यधाम में आयुर्वेद एवं मॉडर्न मेडिसन के साथ इंटीग्रेटेड थेरेपी का मॉडल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, उस पर अनुसंधान भी चल रहा है. आयुर्वेद में बहुत सारी अच्छी दवाइयां हैं, उनको साइंटिफिक तरीके से बाहर लाने की कोशिश कर रहे हैं.

सरसंघचालक ने कहा कि चिकित्सा में एक और विचार करना चाहिए, जैसे इंटीग्रेटेड थेरेपी एक अलग बात है, वैसे ही स्पेसिफिक थेरेपी भी है. हर व्यक्ति की प्रवृत्ति अलग-अलग होती है. रिलीफ उसमें सब उपलब्ध है. उसकी कुछ हिस्ट्री है, कुछ लक्षण है, उसके आधार पर उपचार किया जाना चाहिए.

हमारा काम है संपर्क के जरिए लोगों को संस्कारवान बनाना. डीआरआई इसी कार्य में लगा हुआ है. इसके सभी कार्यकर्ता इस दिशा में पूरी ईमानदारी से लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि काम हमें अनुभवी बनाता है. लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता तथा विचारों के प्रति समर्पण हमें संगठन में टिकाए रखता है.

मंगलवार की सुबह सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ स्थान के बाद आरोग्यधाम में मंदाकिनी कॉटेज के समीप (पंचवटी) 5 पौधों का रोपण किया. पंचवटी में पांच प्रकार बड़, पीपल, आंवला, अशोक और बेल के पौधे लगाए गए. ये वो पौधे हैं जो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले हैं.

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July 13th 2021, 7:48 pm

पंजाब में लोकतंत्र या गुंडातंत्र?

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सौरभ कपूर

पिछले कई महीनों से पंजाब में किसान आंदोलन के माध्यम से किसानों के रूप में छिपे राजनैतिक गुंडों ने पंजाब में अलग-अलग घटनाओं के माध्यम से पंजाब में लोकतंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. यह तथाकथित किसान अब बहुत ज्यादा अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं, चाहे वह अबोहर में जनप्रतिनिधि अरुण नारंग को निर्वस्त्र करने की घटना हो, चाहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालयों पर हमले की बात हो और चाहे धनौला में फसलों को उखाड़ने की बात हो और चाहे राजपुरा में भाजपा पदाधिकारियों के साथ मारपीट की घटना हो.

इन सब घटनाओं से पंजाब भी अब बंगाल की राह पर चलता दिखाई दे रहा है. क्या पंजाब में सच में अब लोकतंत्र खत्म हो गया है, जो किसानों के रूप में गुंडों द्वारा बार-बार ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. जिला पटियाला के राजपुरा में शहीद परिवार के सुपुत्र भूपेश अग्रवाल, नगर निगम के चुने हुए प्रतिनिधि शांति सपरा, विकास शर्मा के साथ मीटिंग के दौरान तथाकथित किसानों द्वारा की गई मारपीट और रात 4 बजे तक 14 लोगों को एक साथ एक घर में नजरबंद कर घर की बिजली काटने की घटना, रात को फिर मारपीट की घटना कड़ी निंदा योग्य है. रात को हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी नजरबंद लोगों पर घर से निकलते वक्त बुरी तरह से पत्थरबाजी की गई.

अब सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के समर्थक सड़कों पर बैठे हैं और जनता को परेशान कर रहे हैं. असली किसान तो खेत में काम कर रहे हैं. किसान आंदोलन अभी डर और दहशत के दम पर ही चल रहा है. धरने में बंगाल की बेटी के साथ रेप घटना ने भी तथाकथित किसान आंदोलन की कलई खोल दी है. राजपुरा में भी इस तरह जानलेवा हमला करने वाले यह लोग कभी किसान नहीं हो सकते, यह तो गुंडे हैं..

पर, यहां सवाल ये भी पैदा होता है कि

– तथाकथित किसानों का गुंडागर्दी के रूप में ये कैसा विरोध?

– क्या किसान भी कभी दूसरे किसान द्वारा लगाई फसल को नष्ट कर सकता है? (जैसा कि घटना धनौला में हुई)

– क्यों राजपुरा में पुलिस मूकदर्शक बनी रही?

– एसएसपी संदीप गर्ग और डीएसपी टिवाना को मीटिंग की जानकारी होने के बाद भी सुरक्षा नहीं मिल पाना मंशा पर सवाल खड़े करता है…

– ये न्याय मांगने का तरीका नहीं है, पंजाब सरकार मौन क्यों है?

प्रशासनिक जिम्मेवारी एवं कानून व्यवस्था अच्छी देना सरकार का काम, कानून व्यवस्था दुरुस्त करना सरकार की पहली प्राथमिकता होती है. पर, अब लगता है कि कैप्टन सरकार तथाकथित किसानों की गलत नीतियों का वोट के लिए समर्थन कर रही है. पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर नाम की कोई चीज नहीं है.

प्रदेश में जब कांग्रेस सरकार नहीं थी तो क्या कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को इसी तरह दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जाता था और पुलिस कार्रवाई नहीं करती थी? मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपने दायित्वों को निभाना चाहिए, नहीं तो यह उनके लिए बहुत शर्म की बात होगी.

बंगाल में चुनावों के दौरान जो हुआ, यहां भी पंजाब विधानसभा चुनावों (2022) के कारण ही हो रहा है. पंजाब को जनता को डर है कि कही बंगाल जैसा माहौल यहां भी ना बन जाए. किसान आंदोलन की आड़ में दिन प्रतिदिन गुंडागर्दी बढ़ती ही जा रही है. जिस के लिए सीधे तौर पर कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब पुलिस जिम्मेवार है. इन गुंडों के साथ सख्ती से निपटना चाहिए. पंजाब के गवर्नर को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए, और कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए.

पंजाब में विरोधी ताकतों को पलने नहीं देना है. पंजाब की जनता सिर्फ पंजाब का, पंजाबियत का ध्यान रखने वालों का भला चाहती है. पंजाब के लोगों को पंजाब का माहौल ठीक रखने के लिए एकजुट होना पड़ेगा.

“देखना खामोशी नहीं, अब तूफान आएगा.

कल फिर हवाओं का रुख कुछ बदला-बदला सा नजर आएगा.”.

(लेखक, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संभाग संगठन मंत्री हैं)

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July 13th 2021, 10:31 am

प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून का स्वागत, लेकिन एक बच्चे की नीति पर हो पुनर्विचार – आलोक कुमार

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नई दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून का स्वागत किया है, पर साथ ही उसमें से एक बच्चे की नीति को हटाने का आग्रह किया है. राज्य विधि आयोग को भेजे सुझाव में विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और परिवार में दो बच्चों की नीति को प्रोत्साहन देने के प्रस्तावित कानून के उद्देश्य से परिषद सहमत है, किन्तु एक बच्चे के लिए प्रोत्साहन के प्रस्ताव से जनसंख्या में नाकारात्मक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा.

विहिप ने कहा कि प्रस्तावित कानून में निश्चित समय सीमा में कुल प्रजनन दर 1.7 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. विशेष तौर पर एक ही बच्चा होने पर सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को प्रोत्साहन की नीति पर फिर से विचार होना चाहिए.

उनके अनुसार किसी समाज में जनसंख्या तब स्थिर होती है, जब एक महिला से जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या कुल प्रजनन दर 2 से कुछ अधिक होती है. प्रजनन दर यदि 2.1 होगी, तब यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है. प्रजनन दर यदि 2.1 होगी, तब किसी कारणवश एक बच्चे की असामयिक मृत्यु होने पर भी लक्ष्य प्राप्ति में परेशानी नहीं होगी.

प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति पर विचार होना चाहिए. एक महिला के औसतन दो से कम बच्चों की नीति अपनाने से जनसंख्या को लेकर समय के साथ अंतर्विरोध पैदा होंगे. इस कारण कई तरह के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव होंगे. युवाओं और परिवार पर निर्भर लोगों की संख्या का अनुपात गड़बड़ा जाएगा. एक बच्चे की नीति का अर्थ यह है कि एक समय पर परिवार में 2 माता-पिता और बुजुर्ग पीढ़ी के 4 सदस्यों की देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ एक कामकाजी युवा के कंधों पर आ जाएगी.

आलोक कुमार के अनुसार एक बच्चे की नीति उत्तर प्रदेश अलग-अलग समुदायों के बीच जनसंख्या असंतुलन पैदा कर सकती है, क्योंकि परिवार नियोजन और गर्भ निरोध के उपायों को लेकर सबकी सोच अलग है. भारत के कई प्रदेशों में यह असंतुलन पहले से ही बढ़ रहा है. असम और केरल में यह खतरे के स्तर तक बढ़ गया है, जहां जनसंख्या की कुल वृद्ध दर घट गई है. इन दोनों प्रदेशों में हिन्दू समुदाय में प्रजनन दर 2.1 से कम हो गई है. असम में मुस्लिम प्रजनन दर 3.16 और केरल में 2.33 हो गई है. इसलिए उत्तर प्रदेश को इस स्थिति में पहुंचने से बचना चाहिए. जनसंख्या नीति में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए, अन्यथा एक बच्चे की नीति उद्देश्य से भटका सकती है.

आलोक कुमार ने कहा कि चीन ने 1980 में एक बच्चे की नीति अपनायी थी. तकनीकी तौर पर इसे 1-2-4 की नीति कहते हैं. इसके दुष्परिणामों को दूर करने के लिए चीन को उन माता-पिता के लिए इस नीति में ढील देनी पड़ी, जो अपने माता-पिता के अकेले बच्चे थे. कहा जा सकता है कि चीन में एक बच्चे की नीति आधे से अधिक अभिभावकों पर कभी लागू नहीं हो सकी. तीन दशकों के अंदर इस नीति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया.

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July 13th 2021, 10:31 am

राजपुरा घटना – उच्च न्यायालय में स्टेटस रिपोर्ट पेश, तीन ज्ञात लोगों सहित 150 पर केस दर्ज

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चंडीगढ़. राजपुरा में भाजपा की बैठक के दौरान तथाकथित किसानों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया. किसानों ने भाजपा के जिला सचिव डॉ. अजय चौधरी सहित अन्य नेताओं व उनके परिवार को घर में बंधक बना दिया और घर की बिजली काट दी. देर रात उच्च न्यायालय को भाजपा नेताओं को मुक्त करवाने के आदेश देने पड़े. इसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया और भाजपा नेताओं को मुक्त करवाया. पुलिस ने तीन ज्ञात लोगों सहित 150 अज्ञात प्रदर्शनकारी किसानों पर केस दर्ज कर लिया है.

डीएसपी गुरविंदर सिंह ने घटना को लेकर उच्च न्यायालय में स्टेटस रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट के अनुसार भाजपा नेताओं की बैठक की सूचना मिली थी, जिसके बाद 100 के करीब पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. सबको सुरक्षित निकाल लिया गया था और भाजपा नेताओं की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है.

याची पक्ष की ओर से दलील दी गई कि पंजाब में इस तरह की घटनाएं प्रतिदिन हो रही हैं, इन्हें रोकने के लिए न्यायालय प्रशासन को आदेश जारी करे.

न्यायालय ने कहा कि वो इस याचिका का दायरा नहीं बढ़ा सकता, जिस मकसद के लिए यह याचिका दायर की गई थी वह पूरा हो गया है, न्यायालय इसका निपटारा कर रहा है.

केंद्र ने कहा कि, न्यायालय याचिका का निपटारा न करे, यह याचिका रात को जल्दबाजी में दायर की गई थी. सभी पक्षों को पंजाब सरकार के जवाब पर काउंटर जवाब देने का मौका दिया जाए. न्यायालय ने केंद्र की मांग स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को जवाब दायर करने को कहा.

150 अज्ञात लोगों का नाम केस में शामिल

राजपुरा में भाजपा नेताओं के विरोध के बाद हुई झड़प के मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. राजपुरा के सिटी थाना पुलिस ने झड़प के दौरान जख्मी हुए सिपाही भूपिंदर सिंह के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया है. केस में मनजीत घुमाना, हैप्पी हसनपुर और विवेक जीरकपुर के अलावा डेढ़ सौ अज्ञात लोगों को आरोपियों की सूची शामिल किया गया है. फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

जख्मी सिपाही का इलाज राजिंदरा अस्पताल पटियाला में चल रहा है. केस में शामिल उक्त लोगों पर आरोप है कि इन्होंने धरने प्रदर्शन के दौरान भीड़ को हिंसक बनाया. जिस वजह से सरकारी और पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा और सरकारी ड्यूटी में विघ्न डालते हुए सिपाही भूपिंदर सिंह पर जानलेवा हमला किया गया.

पटियाला जिला प्रशासन और पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद किसानों का धरना सुबह करीब चार बजे हटवाया और घर में बंधक बने हुए भाजपा नेताओं को पांच बजे मुक्त कराया. इस दौरान भाजपा नेता करीब 12 घंटे घर में ही बंधक बने रहे. चाहे पुलिस ने इन्हें मुक्त करवाने के लिए प्रयास किए, लेकिन बंधक बनाने वाले किसानों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की.

सीएम से मिले भाजपा नेता

राजपुरा की घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को बंधक बनाए जाने के खिलाफ पार्टी के को ग्रुप का एक शिष्टमंडल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिला. इस मुलाकात में पार्टी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा सहित अन्य पूर्व प्रधान व सीनियर नेता शामिल हुए.

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July 13th 2021, 10:31 am

दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश, लक्ष्मी पुरी के खिलाफ सारे ट्वीट तुरंत हटाएं

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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने साकेत गोखले को संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी के खिलाफ सभी ट्वीट हटाने का निर्देश दिया है. साथ ही न्यायालय ने गोखले के खिलाफ सिविल अवमानना का मामला चलाने की स्वीकृति दी.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने साकेत गोखले को आदेश दिया कि, “संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक लक्ष्मी पुरी के खिलाफ किये गए सारे ट्वीट डिलीट करें.” अगर वे ट्वीट डिलीट नहीं करते तो ट्विटर ट्वीट्स को हटाए. साथ ही न्यायालय ने कहा कि गोखने लक्ष्मी पुरी के खिलाफ किसी भी प्रकार के आधारहीन और बेबुनियाद ट्वीट न करें.

लक्ष्मी पुरी ने साकेत गोखले के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का मामला दाखिल किया था. साकेत गोखले ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की पत्नी लक्ष्मी पुरी के खिलाफ उनकी संपत्ति को लेकर ट्वीट किया था. दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि साकेत गोखले लक्ष्मी पुरी के खिलाफ किए गए ट्वीट तुरंत डिलीट करें.

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी लक्ष्मी पुरी ने अवमानना की याचिका दाखिल की है, जिसमें गोखले के ट्वीट को डिलीट करने और 5 करोड़ के मुआवजे की मांग की गई है. गोखले ने 13 और 26 जून को अपने ट्वीट में स्विट्जरलैंड में पुरी द्वारा कथित तौर पर संपत्ति खरीदने का हवाला दिया था और उनके पति एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी संदर्भ दिया था.

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की थी कि सम्मान के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर स्वीकार किया गया है और गोखले से पूछा कि वह कैसे किसी व्यक्ति को बदनाम कर सकते हैं, खासतौर पर ट्वीट करके जो प्रथम दृष्टया असत्य हैं.

8 जुलाई को सुनवाई के दौरान जस्टिस सी. हरिशंकर ने गोखले के अधिवक्ता सरीम नावेद से पूछा, ‘मुझे स्पष्ट करें कि ट्वीट करने से पहले उसकी सत्यता जांचने के लिए वादी से संपर्क किया गया था.’ इसका जवाब अधिवक्ता ने नहीं में दिया.

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July 13th 2021, 10:31 am

किसान आंदोलन की वजह से अवरुद्ध हो रहा पंजाब का विकास?

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अजय भारद्वाज

किसान आंदोलन को लगभग सात माह हो रहे हैं. लेकिन, किसान आंदोलन के दुष्प्रभावों की चर्चा पंजाब में बिल्कुल नहीं हो रही है. हाल ही में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को एक ज्ञापन देकर इस विषय को उठाया कि किस तरह से किसानों ने पंजाब में कार्पोरेट ऑफिस व आउटलेट्स को बंधक बना रखा है. जिस कारण कोई गतिविधि नहीं हो रही और लाखों का नुकसान हो रहा है.

आज उद्योगों के पलायन और बेरोजगारी की बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है. विभिन्न व्यवसायों के संचालन के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपने परिसर किराए पर देने वाले बिल्डिंग मालिकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अवगत करवाया कि किसान आंदोलन के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने के साथ युवाओं के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है. मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्टोरों को फिर से खोलना सुनिश्चित किया जाए ताकि उनके द्वारा रिलायंस को प्रदत्त परिसरों का किराया वापस मिले और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक हो सके. प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि किसानों द्वारा विरोध किए जाने के कारण रिलायंस कंपनी के सभी स्टोर पिछले कई महीनों से बंद पड़े हैं. इस कारण बिल्डिंग मालिकों को घोर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

इसके अलावा भी व्यवसायिक एवं सामाजिक गतिविधियां आंदोलन के कारण प्रभावित हो रही हैं, उनके बारे में अंदर ही अंदर चर्चा तो जरूर हो रही है. लेकिन कोई इसे सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं कर पा रहा है. बिल्डिंग मालिकों व स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री को उस गहरे वित्तीय संकट से अवगत कराया, जिसके कारण वे दिवालिएपन की ओर जा रहे हैं क्योंकि उन्हें पिछले 7-8 महीनों से किराये के रूप में आय नहीं मिल रही है. रिलायंस के सभी रिटेल आउटलेट्स किसान आंदोलनकारियों ने जबरन बंद करवा दिए हैं.

ये केवल रिलायंस की बात नहीं है. पूरे कॉर्पोरेट क्षेत्र के बारे में है जो राज्य की खुदरा अर्थव्यवस्था का आधार रहा है और मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार प्रदान करता है. प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, एक अनुमान के अनुसार, विभिन्न उपभोक्ता गतिविधियों में लगे कॉर्पोरेट क्षेत्र, राज्य में लगभग पांच लाख युवाओं को रोजगार प्रदान करते हैं. यदि यही स्थिति बनी रही तो उनमें से एक बड़े हिस्से को नियत समय में नौकरियों से निकाल दिए जाने की संभावना है.

रिलायंस के पंजाब में करीब 275 स्टोर हैं और ये सभी बंद हैं. यही हाल अन्य कॉर्पोरेट घरानों का भी है. इसका मतलब यह नहीं है कि किसानों को अपना विरोध बंद करना चाहिए और अपने अधिकारों से पीछे हट जाना चाहिए, बल्कि उन्हें यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि उनके विरोध और आंदोलन के कारण पंजाब की सामाजिक व्यवस्था और अर्थव्यवस्था प्रभावित ना हो क्योंकि उन्हीं किसानों के लड़के भी बेरोजगारी के शिकार होंगे. हम मानते हैं कि किसानों को उन सभी का हर तरह से विरोध करना चाहिए जो उनके हित में ना हो, उन्हें विरोध करने का अधिकार प्राप्त है. लेकिन यह बात अवश्य सोचनी चाहिए कि उनके किस तरह के विरोध का असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, खासकर उन युवाओं पर जो कॉर्पोरेट क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते तलाश रहे हैं?

“हम करोड़ों का नुकसान उठा रहे हैं क्योंकि इमारतें बैंकों से ऋण पर हैं और हमें भारी ईएमआई, नगरपालिका कर, बिजली और पानी के शुल्क आदि का बोझ उठाना पड़ता है. इसके अलावा, लाखों श्रमिकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका पर संकट है.”

पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री कार्यालय को एक ज्ञापन प्रस्तुत करने के बाद एक बिल्डिंग मालिक ने कहा कि “किसान नेताओं ने हमें स्टोर खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है. हमने जिला पुलिस और अन्य स्थानीय अधिकारियों से भी संपर्क किया है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. हम संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेताओं और ‘किसान जत्थेबंदियों’ से भी दो बार मिल चुके हैं और अपनी चिंताओं को उठाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

कंपनी के साथ हुए समझौते के अनुसार, बिलिंग न होने या आंदोलन के कारण स्टोर बंद होने की स्थिति में मालिकों को किराये का भुगतान नहीं किया जा सकता है.

ज्ञापन में कहा गया है, “हम सभी पंजाबी हैं और किसानों का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन दुकानों को जबरन बंद करने से पंजाब को ही नुकसान हो रहा है.” कोई भी कार्पोरेट राज्य में निवेश करने में दिलचस्पी नहीं लेगा, यदि उन्हें शांतिपूर्वक काम करने की अनुमति नहीं दी जाती है. जालंधर के स्टोर मालिकों में से एक, निर्मल सिंह ने कहा, “हमने कर्ज लिया है और अपनी सारी मेहनत की कमाई को संपत्तियों में निवेश किया है, लेकिन इस तरह जबरन बंद करना हमें बर्बाद कर रहा है.” उन्होंने कहा कि अन्य सभी राज्यों में स्टोर खुले हैं. पंजाब में, किसान उन दुकानों को भी खोलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं जो आवश्यक सेवाओं के तहत हैं, इसलिए हम यहां मुख्यमंत्री से सहायता का अनुरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “हम किसान संघों से भी अपील करते हैं कि वे सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखें, लेकिन दुकानों को हमेशा की तरह चलने दें.”

तरनतारन के मानव संधू ने कहा, “रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने पहले ही एक नियामक फाइलिंग में कहा है कि उसकी अनुबंध या कॉर्पोरेट खेती में प्रवेश करने की कोई योजना नहीं है, और उसने अनुबंध खेती के उद्देश्य से भारत में कोई कृषि भूमि नहीं खरीदी है. संयोग से, प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा लक्षित कॉरपोरेट घरानों का कृषि बिलों से कोई लेना-देना नहीं है. राज्य में उनके सभी बुनियादी ढांचे विधेयकों के पारित होने से बहुत पहले आ गए थे. और उस बुनियादी ढांचे ने राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास में इजाफा किया, जिसे किसान अब पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं.

यह बहुत आश्चर्य की बात थी, जब प्रदर्शनकारियों ने राज्य में चारों ओर मोबाइल टावरों को यह मानकर नष्ट कर दिया कि वे एक विशेष कॉर्पोरेट घराने के हैं. वर्तमान संदर्भ में जब मोबाइल टावर देश के भीतर ही नहीं, बल्कि हमारे मित्र देशों और संबंधियों के साथ संचार का एकमात्र साधन हैं, टावरों का विनाश एक ऐसा प्रतिगामी कदम आ रहा था, जिसने हरित क्रांति की शुरुआत की थी और उसे प्राप्त कर लिया था.

यह भी जान लेना जरूरी है कि सड़कों और रेल यातायात को अवरुद्ध करने से पंजाब में कृषि क्षेत्र में निवेश की तलाश कर रहे निवेशकों को भी प्रतिकूल संकेत मिले हैं. खून से लथपथ उग्रवाद के दिनों की पृष्ठभूमि में, इस तरह के विघटनकारी विरोध केवल निवेशकों को दूर रखने के लिए एक लंबा रास्ता तय करेंगे. कोई आश्चर्य नहीं कि पंजाब इन्वेस्टर्स समिट के दौरान निवेशक जो भी वादे करते हैं, निवेश के मामले में राज्य में कुछ भी वापस नहीं आए. इस तरह के सभी घटनाक्रम पंजाब के युवाओं को चौराहे पर छोड़ देते हैं. क्या प्रदर्शनकारी किसान अपने आंदोलन के इस पक्ष को देखेंगे? इस पर चिंतन मंथन करना वर्तमान समय की मांग है.

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July 13th 2021, 10:31 am

असम मवेशी संरक्षण बिल 2021 – हिन्दू, सिक्ख, जैन बहुल इलाकों और धार्मिक स्थलों के पांच किमी के दायरे

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गुवाहाटी. असम विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करने के लिए असम मवेशी संरक्षण बिल-2021 प्रस्तुत किया. बिल के अनुसार हिन्दू, सिक्ख, जैन बहुल क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों के पांच किमी. के दायरे में गोमांस बेचने पर प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, ‘कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उन क्षेत्रों में गोमांस (बीफ) की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाए, जहां मुख्य रूप से हिन्दू, जैन, सिक्ख और बीफ नहीं खाने वाले समुदाय रहते हैं अथवा वे स्थान किसी मंदिर और अधिकारियों द्वारा निर्धारित किसी अन्य संस्था के पांच किमी. के दायरे में आते हैं. कुछ धार्मिक अवसरों के लिए छूट दी जा सकती है.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक नया कानून बनाने और पूर्व के असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950 को निरस्त करने की आवश्यकता थी, जिसमें मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करने के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधानों का अभाव था.

प्रमाण पत्र मिलने पर ही बेच सकेंगे मांस

प्रस्तावित विधेयक किसी व्यक्ति को मवेशियों का वध करने से निषिद्ध करेगा, जब तक कि उसने किसी विशेष क्षेत्र के पंजीकृत पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया हो. इसके अनुसार, पशु चिकित्सा अधिकारी केवल तभी प्रमाण पत्र जारी करेगा, जब उसकी राय में मवेशी, जो गाय नहीं है और उसकी आयु 14 वर्ष से अधिक हो. गाय, बछिया या बछड़े का तभी वध किया जा सकता है, जब वह स्थायी रूप से अपाहिज हो.

विधेयक के अनुसार, उचित रूप से लाइसेंस प्राप्त या मान्यता प्राप्त बूचड़खानों को मवेशियों को काटने की अनुमति दी जाएगी. यदि अधिकारियों को वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो नया कानून राज्य के भीतर या बाहर गोवंश के परिवहन पर रोक लगाएगा. हालांकि, एक जिले के भीतर कृषि उद्देश्यों के लिए मवेशियों को ले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा.

दोषी पाए जाने पर सजा

इस नए कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम तीन साल की कैद या 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है. अगर कोई दोषी दूसरी बार उसी या संबंधित अपराध का दोषी पाया जाता है तो सजा दोगुनी हो जाएगी. कानून पूरे राज्य में लागू होगा और ‘मवेशी’ शब्द बैल, गाय, बछिया, बछड़े, नर और मादा भैंस और भैंस के कटड़ों पर लागू होगा.

 

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July 13th 2021, 10:31 am

विनाशपर्व – अंग्रेजों ने भारतीय वस्त्र उद्योग को तार – तार किया / २

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प्रशांत पोळ

अंग्रेजों ने तय करके भारतीय वस्त्र उद्योग को नष्ट किया. वे इस उद्योग की महत्ता और इसके कारण भारत के वैश्विक महत्व को समझते थे. इसलिए भारत में उनके आगमन के मात्र ५ वर्षों पश्चात, १६१३ में, उन्होंने अपनी पहली मिल (वस्त्रों का कारख़ाना) भारत के दक्षिणी छोर, तमिलनाडु के मछलीपट्टनम में लगाया. उन दिनों मछलीपट्टनम कलमकारी कपड़ों के लिए प्रसिद्ध था. यहां के वस्त्रों को विदेशों में भी अच्छी मांग थी.

अंग्रेजों के आने से पहले, भारतीय वस्त्रों का निर्माण मदुरै, पाटन, सूरत, महेश्वर (मालवा), वाराणसी आदि स्थानों पर होता था, किन्तु बंगाल यह भारतीय वस्त्रों के निर्माण का प्रमुख केंद्र था. दुनिया में सबसे ज्यादा मांग यहां के कपड़ों की होती थी. ‘ढांके की मलमल’ तो दुनिया भर में राजे, रजवाड़ों और अमीरों की पहली पसंद रहती थी. यूरोप में इसका निर्यात बड़े पैमाने पर होता था. किन्तु यह जापान से अमेरिका तक जाती थी. बंगाल में अंग्रेजों की हुकूमत आने से पहले तक (प्लासी के युद्ध के पहले तक), बंगाल का कपड़ा यह पश्चिम में तुर्कस्तान, ईरान, इजिप्त, इटली आदि देशों में जाता था. पूर्व में जावा, चीन और जापान इन देशों में भी बंगाल के मलमल की और अन्य प्रकार के सूती वस्त्रों की अच्छी खासी मांग थी.

शशि थरूर ने अपने पुस्तक ‘एन इरा ऑफ डार्कनेस’ में लिखा है कि १७५० के दशक में कपड़ों की यह निर्यात प्रतिवर्ष एक करोड़ साठ लाख से भी ज्यादा थी. (कल्पना करें, यह एक करोड़ साठ लाख रुपये, आज से पौने तीन सौ वर्ष पहले के हैं. आज के हिसाब से इसकी कीमत हम आंक सकते हैं.) इसके अतिरिक्त बंगाल से रेशम की होने वाली निर्यात यह प्रतिवर्ष ६५ लाख रुपयों की होती थी. लगभग २ करोड़ २५ लाख रुपयों के पूरे निर्यात में से, भारत में अपनी कंपनियां खोल कर बैठे विदेशी व्यापारी (अंग्रेज़, पोर्तुगीज, डच, फ्रेंच आदि) लगभग ६० लाख रुपयों की निर्यात यूरोप को करते थे. इसके कारण, सोलहवीं शताब्दी के मध्य से तो अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक, बंगाल के सूती और रेशम के वस्त्र उद्योग में ३३% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. किन्तु १७५७ में, अंग्रेजों द्वारा प्लासी की लड़ाई जीतने के साथ ही दृश्य बदला.

भारतीय वस्त्र उद्योग को समाप्त करने की शुरुआत अंग्रेजों ने बंगाल से की. वे वहां केवल व्यापारी नहीं, तो क्रूरतम शासक बन गए. १७५७ के पहले तक, अंग्रेज़ ‘ब्रिटिश पाउंड’ में भारतीय माल खरीदते थे. अर्थात हमें विदेशी मुद्रा मिलती थी, जिसके अलग फायदे थे. किन्तु प्लासी की लड़ाई जीतने के बाद, बंगाल की सत्ता पर काबिज होते ही, अंग्रेजों ने ब्रिटिश पाउंड में भारतीय माल खरीदना बंद किया. अब वे बंगाल से मिलने वाले राजस्व से भारतीय माल खरीदकर उसे यूरोप में बेचने लगे. इसलिए भारतीय उत्पादकों को कम कीमत मिलने लगी.

किन्तु इसके बाद भी वैश्विक बाजार में भारतीय कपड़े, स्पर्धा में थे. उनका लागत मूल्य ही कम था. इसलिए बाजार की कीमत भी कम थी. इंग्लैंड में वस्त्र उद्योग प्रारंभिक अवस्था में था. इसलिए वह भारतीय वस्त्र उद्योग से स्पर्धा करने की परिस्थिति में नहीं था. ‘कम कीमतें और अच्छी गुणवत्ता’ यह भारतीय कपड़ों की विशेषता थी, जो इंग्लैंड के उत्पादकों के लिए संभव नहीं थी.

लेकिन अंग्रेज़ व्यापारी, ब्रिटिश सरकार यह सब अपने माल के लिए बाजार चाहते थे. उन्हें भारतीय वस्त्र उद्योग से प्रेम या सहानुभूति रहने का कोई कारण नहीं था. इसलिए अंग्रेजों ने कपड़ा उद्योग में सिरमौर बनने के लिए सभी प्रकार की कुटिल चालें चलीं. गुणवत्ता में सुधार लाकर, भारतीय वस्त्रों की गुणवत्ता से आगे निकल जाना संभव नहीं, ये अंग्रेज़ अच्छे से जानते थे. इसलिए उन्होंने तमाम गलत और अनैतिक हथकंडे अपनाए. ईस्ट इंडिया कंपनी के सिपाहियों ने बंगाल के बुनकरों के करघे (looms) तोड़ दिये. अठारहवीं शताब्दी के अंग्रेज़ व्यापारी विलियम बोल्ट्स ने एक पुस्तक लिखी, ‘कन्सिड्रेशन ऑन इंडियन अफेयर्स’. वर्ष १७७२ में प्रकाशित इस पुस्तक में बोल्ट्स ने ईस्ट इंडिया कंपनी के तमाम गलत और अनैतिक कार्यों का कच्चा चिठ्ठा खोल कर रख दिया. इस पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक १९४ पर बोल्ट्स ने लिखा है कि अंग्रेजों ने देश भर के, और विशेषतः बंगाल के, कुशल कारीगरों के अंगूठे काट दिये, ताकि वे हथकरघा चलाने के काबिल ही न रहें. अंग्रेजों की दुष्टता की और क्रूरता की यह पराकाष्ठा थी..!

इसी बीच अंग्रेजों ने वस्त्र बनाने की भारतीय तकनीक के आधार पर, वर्ष १७६५ के लगभग कुछ यंत्र बनाए. इन यंत्रों में कम समय में ज्यादा वस्त्र बनते थे. बाद में भारत में हुकूमत में आने के बाद, जब कुछ भारतीय व्यापारियों ने उन यंत्रों को भारत में लाने का प्रयास किया, तो अंग्रेजों ने उस यंत्र पर ८०% से ज्यादा आयात शुल्क (कर) लगाया. किन्तु उसी समय, इंग्लैंड में बने वस्त्र भारत में आयात करने पर शुल्क था मात्र ५%. १८१८ के बाद भारत के अधिकतम भूभाग पर अंग्रेजी सत्ता कायम हो गई थी. इसलिए इंग्लैंड से आने वाले माल पर कर या आयात शुल्क लगाने का अधिकार भारतीयों के पास नहीं था.

इंग्लैंड में चल रहा औद्योगीकरण, वहां भांप पर चलने वाले कपड़ों के कारखाने, भारतीय वस्त्रों पर इंग्लैंड में लगा भारी भरकम आयात कर, अंग्रेजी वस्त्र भारत में लगभग करमुक्त, भारतीय हथकरघा उद्योग पर अंग्रेजों द्वारा किए गए क्रूरतापूर्ण हमले…. इन सब का परिणाम यह रहा कि अठारहवीं शताब्दी के प्रारंभ में, वैश्विक कपड़ा उद्योग में जिस भारत का हिस्सा २५% से ज्यादा था, वहां का कपड़ा उद्योग, उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ होते समय रास्ते पर आ गया था. भारतीय बाजार, सस्ते अंग्रेजी कपड़ों से पट जाने लगा. कपास की पैदावार तो अभी भी बंपर हो रही थी. किन्तु वो सारा कपास, इंग्लैंड जा रहा था.

किसी जमाने में भारत के मलमल का डंका दुनिया में बजता था. ढाका के मलमल के बारे में चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (Yuan Chwang) ने ६२९ – ६४५ में, सम्राट हर्षवर्द्धन के राज्य में, लिखा है कि, ‘यह वस्त्र तो इतना महीन हैं, जैसे प्रातः कि धुंध !” पहली शताब्दी के रोमन लेखक पेट्रोनीयस ने सटेरिकॉन (Satyricon) में भारत के मलमल से बने वस्त्रों की खूबियों के बारे में लिखा है.

जिस ‘ढांके की मलमल’ को पहनने के लिए यूरोप के अमीर, उमराव और दक्षिण एशिया के राजे, रजवाड़े लालायित रहते थे, ऐसे ‘ढाका’ के हालात बहुत दयनीय बन गए थे. अनेक कुशल बुनकर भिखारी बन गए थे. जिस ढाका की जनसंख्या १७६० में, जब यह ‘जहाँगीर नगर’ कहलाता था, कुछ लाख थी, उसी ढाका में १८२० के दशक में मात्र ५० हजार लोग बचे थे. (अर्थात बाद में, अन्य कारणों से ढाका फिर गुलजार हुआ.)

इधर इंग्लैंड से भारत को वस्त्रों का निर्यात बढ़ रहा था. वर्ष १८३० में वह ६ करोड़ यार्ड था, तो १८५७ के क्रांतियुद्ध के तुरंत बाद, अर्थात १८५८ के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने इंग्लैंड से १०० करोड़ यार्ड से ज्यादा के वस्त्र आयात किए !

बीसवीं सदी के प्रारंभ में भारत के उद्योगपतियों ने भी कपड़ों के आधुनिक कारखाने खड़े किए. किन्तु फिर भी, पहले विश्व युद्ध से पहले, वर्ष १९१३ के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कारखाने, भारत में खपने वाले कपड़े का मात्र २०% ही उत्पादन कर रही थी. कहां विदेशों में, सभी दिशाओं के देशों को सूती, रेशमी कपड़ों का निर्यात कर के, विश्व के कपड़ा बाजार का एक तिहाई या एक चौथाई हिस्सा काबिज करने वाला भारत…

निर्यात तो दूर की बात, अपने ही देश की आवश्यकताओं को पूरी करने में सक्षम नहीं रहा..!

वैदिक काल से चल रहे, सारी दुनिया को सूती वस्त्र पहनाने वाले, उच्च गुणवत्ता का रेशम / मलमल बनाने वाले इस भारतीय वस्त्र उद्योग को अंग्रेजों ने नष्ट होने के निकट पहुंचा दिया था…!

 

संदर्भ –

  1. Textile in Ancient India – Lallanji Gopal (Published in ‘Journal of the Economic and Social History of the Orient’ Vol 4. No. 1 – February 1961)
  2. Our Oriental Heritage : India and Her Neighbors – Will Durant
  3. Cotton as a World Power : Study in the Economic Interpretation of History – James A. B. Scherer
  4. History of Cotton Manufacturers – Edward Baines (1835)
  5. The Industrial Arts of India – Sir George Birdwood
  6. भारतीय वस्त्र परंपरा में औद्योगिक हस्तक्षेप – प्रमोद भार्गव (हिन्दी विवेक)
  7. Indian Textile Industry in 17th and 18th Centuries : Structure, Organization and Responses – Kanakalatha Mukund
  8. How British destroyed Indian Textile Industry – Shubham Verma in indiafacts.org
  9. Considerations of Indian Affairs – William Bolts (1772)
  10. The Fabric of India – Rosemary Crill
  11. The Story of Dhaka Muslin – Khademul Islam
  12. Ancient Indias Development in Textiles – Stephan Knapp
  13. An Era of Darkness – Shashi Tharoor
  14. History of British India – James Mill
  15. India and World Civilization – Prof D. P. Singhal
  16. भारत में अंगरेजी राज – सुंदरलाल (१९२९ में प्रकाशित)

(आगामी प्रकाशित ‘विनाशपर्व’ पुस्तक के अंश)

#स्वतंत्रता75; #स्वराज्य75; #Swarajya75

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July 11th 2021, 9:47 pm

आगरा – शहर-देहात में बढ़ती लव जिहाद की घटनाएं

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आगरा. लव जिहाद का षड्यंत्र देशभर में चल रहा है. सेकुलर ब्रिगेड इन घटनाओं व षड्यंत्र को दबाने का भले जितना प्रयास करें, लेकिन सत्यता से समाज परिचित है और समाज को सतर्क होना होगा. लव जिहाद का जाल आगरा में भी शहर से देहात तक फैला हुआ है. अल्पसंख्यक समुदाय के युवक अलग-अलग तरीकों से हिन्दू किशोरियों और युवतियों को नाम बदलकर अपने प्रेम जाल में फंसाते हैं. दोस्ती करके उनका भरोसा जीतते हैं और इसके बाद स्वजन से बगावत करने को ब्रेनवॉश कर देते हैं. उन्हें अपने साथ ले जाकर मतांतरण कराते हैं और निकाह भी कर लेते हैं. कुछ दिनों में सच्चाई सामने आ जाती है. मगर, तब तक वे दलदल में फंस चुकी होती हैं.

उत्तर प्रदेश में विधि विरुद्ध मतांतरण प्रतिषेध अधिनियम लागू होने के बाद ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई हो रही है. इसलिए मामले थाने तक भी पहुंचने लगे हैं. फेसबुक या अन्य इंटरनेट मीडिया माध्यम से युवतियों और किशोरियों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं. फ्रेंडशिप होने के बाद अपनी लुभावनी बातों में फंसाते हैं और फिर उनका उत्पीड़न करते हैं.

दैनिक जागरण ने आगरा में घटित लव जिहाद की कुछ घटनाओं को रिपोर्ट किया है…

केस एक

हरीपर्वत क्षेत्र में एक 16 वर्षीय किशोरी के घर नसीराबाद निवासी कासिम का आना-जाना था. नाम बदलकर उसने किशोरी से दोस्ती कर ली. इसके बाद बहलाकर वह अपने साथ ले गया. घर में ही मतांतरण कराने के बाद आरोपित ने निकाह कर लिया. किशोरी के घर पहुंचने पर इसकी जानकारी हुई. आरोपित और उसके स्वजन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया. मुख्य आरोपी अभी फरार है.

केस दो

पूर्व आईएएस अधिकारी की विवाहित बेटी को टिंबर कारोबारी बनकर आरिफ हाशमी ने जाल में फंसाया. पार्टी में मुलाकात हुई. कारोबार साथ करने का झांसा देकर नजदीकी बना ली. नाम बदलकर मंदिर में शादी की. इसके बाद मतांतरण कराके निकाह कर लिया. बाद में घर में पूजा करने पर भी रोक लगा दी. महिला ने अब उसके खिलाफ सदर थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

केस – तीन

सिकंदरा क्षेत्र की एक 17 वर्षीय किशोरी से इंटरनेट मीडिया के माध्यम से एक वर्ष पहले सहारनपुर के युवक से दोस्ती हुई थी. फोन पर दोनों की बात होने लगी. आरोपी का नाम इकरार था. उसने रवि बनकर दोस्ती की. इसके बाद साथ में ले गया. घर ले जाकर उसने किशोरी का मतांतरण कराया. और निकाह कर लिया. पुलिस ने किसी तरह किशोरी को बरामद किया. आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा.

केस – चार

मलपुरा क्षेत्र की 17 वर्षीय किशोरी से पड़ोस में रहने वाले बादल खां ने एक वर्ष पहले बादल बनकर दोस्ती की. इसके बाद मिलने लगा. पिछले वर्ष सितंबर में वह किशोरी को बहला कर अपने साथ ले गया. शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया. करीब एक माह बाद किशोरी को पुलिस ने बरामद कर आरोपी को जेल भेज दिया.

केस – पांच

सदर क्षेत्र की ही एक युवती से मुस्लिम युवक ने दोस्ती कर ली. इसके बाद मतांतरण कराया और उससे निकाह भी कर लिया. कुछ दिन बाद ही युवती के सामने सच्चाई आ गई. इसके बाद उसने पिछले माह सदर थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस अभी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है.

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July 11th 2021, 9:47 pm

सेवा भारती के स्वयंसेवक स्थानीय प्रशासन का सहयोग करना जारी रखें

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भोपाल. सेवा भारती के अ. भा. संगठन मंत्री सुधीर कुमार जी का मध्यभारत प्रांत का 4 दिवसीय प्रवास संपन्न हुआ. कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावनाओं के बीच कार्यकर्ताओं को आगामी कार्ययोजना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त हो, इसलिए राष्ट्रीय संगठन मंत्री का यह दौरा मध्यभारत प्रांत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रवास के क्रम में सुधीर जी ग्वालियर, गुना, डबरा, शिवपुरी और भोपाल के कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शित किया.

सेवा भारती के संगठन मंत्री सुधीर जी ने प्रवास के क्रम में सेवा भारती महानगर ग्वालियर, भोपाल, शिवपुरी, गुना एवं डबरा के पदाधिकारीगण एवं कार्यकर्ताओं से मिले. क्षेत्रीय संगठन मंत्री रामेंद्र जी की उपस्थिति में सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल में किए गए सेवा कार्यों का वृत्त प्रस्तुत किया. सेवा भारती महानगर ग्वालियर एवं भोपाल में दो महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई. जहां कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल में किए गए सेवा कार्यों का वृत्त प्रस्तुत किया. सुधीर जी ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संभावित तीसरी लहर की चुनौतियों से निपटने के लिए मंत्र भी दिए.

बैठक के दौरान बताया कि तीसरी लहर के दुष्प्रभाव से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, अतः हमारी तैयारियां भी उसके अनुसार होनी चाहिए. चूंकि कोरोना का टीका बच्चों के लिए उपलब्ध नहीं हो पाया है, अतः जन जागरण एवं बचाव के लिए हमारा लक्ष्य एवं प्रशिक्षण ग्रामीण अञ्चल एवं सेवा बस्ती तक पहुंचे, ऐसा प्रयास होना चाहिए. उन्होंने विभिन्न स्वास्थ्य सेवकों एवं एनजीओ से संपर्क और उन्हें सूचीबद्ध करके सहयोग में सहभागी करने का भी आह्वान किया.

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान किए गए सेवा कार्यों की समीक्षा एवं आगामी संभावित खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कार्यकर्ताओं को सुझाव दिए. उन्होंने चिकित्सालयों को अपग्रेड करने के हर संभव प्रयास करने के लिए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया.

सुधीर जी ने बताया कि संकट के समय में अनेकों धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने समाज सेवा की है, संभावित तीसरी लहर में ऐसे सभी संस्थाओं को सहयोग करना एवं उन्हें सेवा कार्यों में सहभागी बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए. कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि सेवा भारती के स्वयंसेवक संकट के समय में स्थानीय प्रशासन को सहयोग प्रदान करना जारी रखें, इससे व्यवस्था और सुदृढ़ होती है और सेवा कार्यों को गति मिलती है.

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July 11th 2021, 9:47 pm

प्रांत प्रचारक बैठक – वर्तमान में देश में 39,454 शाखाएँ लग रहीं, जिसमें 12,288 ई-शाखाएं हैं

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चित्रकूट. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोरोना के संभावित तीसरी लहर का सामना करने हेतु देशव्यापी “कार्यकर्ता प्रशिक्षण” का आयोजन करेगा तथा यह प्रशिक्षित कार्यकर्ता लगभग 2.5 लाख स्थानों पर पहुँचेंगे. संघ की 27,166 शाखाएँ अब पुनः मैदान में प्रारंभ हो गयी है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों की चर्चा के साथ ही कोरोना के दूसरी लहर से उत्पन्न परिस्थितियों की व्यापक रूप से चर्चा हुई तथा प्रांतों में हुए सेवा कार्यों की समीक्षा की गयी. स्वयंसेवकों द्वारा संचालित वैक्सीन के टीकाकरण हेतु सुविधा केंद्र व प्रोत्साहन के अभियानों की भी समीक्षा की गयी.

कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए पुरे देश में शासन-प्रशासन का सहयोग करने एवं संभावित पीड़ितों की सहायता हेतु विशेष “कार्यकर्ता प्रशिक्षण” का आयोजन किया जाएगा. ऐसी परिस्थिति में समाज का मनोबल बढ़ाने के लिए आवश्यक सभी जानकारी उचित समय पर लोगों तक पहुँचाने हेतु यह प्रशिक्षित कार्यकर्ता लगभग 2.5 लाख स्थानों तक पहुँचेंगें. यह प्रशिक्षण अगस्त माह में पूर्ण किया जाएगा तथा सितंबर से जनजागरण द्वारा हर गाँव व बस्ती में कई स्वयंसेवी लोगों व संस्थाओं को इस अभियान में जोड़ा जाएगा. इस प्रशिक्षण में कोरोना से बचाव हेतु बच्चों व माताओं के लिए विशेष रूप से आवश्यक सावधानियाँ व उपायों को शामिल किया गया है.

जैसे-जैसे कोरोना के प्रकोप के पश्चात स्थितियाँ सामान्य हो रही है, संघ शाखाओं का संचालन भी मैदान में प्रारंभ हुआ है. बैठक में प्राप्त जानकारी के अनुसार देशभर में वर्तमान में कुल 39,454 शाखाएँ संचालित हो रही है, जिसमें 27,166 शाखाएँ अब मैदान में लग रही है तथा 12,288 ई-शाखाएँ है. साथ ही साप्ताहिक मिलन कुल 10,130 है, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से मैदान में 6510 पुनः प्रारंभ हुए तथा ई-मिलन 3620 है. कोरोना के लॉकडाऊन काल में विशेष रूप से प्रारंभ हुए कुटुंब मिलन देश भर में 9637 है.

सुनील आंबेकर

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

 

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July 11th 2021, 8:32 am

11 जुलाई / जन्मदिवस – पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम

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नई दिल्ली. बाबा कांशीराम का नाम हिमाचल प्रदेश के स्वतन्त्रता सेनानियों की सूची में शीर्ष पर लिया जाता है. उनका जन्म ग्राम पद्धयाली गुर्नाड़ (जिला कांगड़ा) में 11 जुलाई, 1888 को हुआ था. इनके पिता लखनु शाह जी तथा माता रेवती जी थीं. लखनु शाह जी और उनके परिवार की सम्पूर्ण क्षेत्र में बहुत प्रतिष्ठा थी. स्वतन्त्रता आन्दोलन में अनेक लोकगीतों और कविताओं ने राष्ट्रभक्ति की ज्वाला को प्रज्वलित करने में घी का काम किया. इन्हें गाकर लोग सत्याग्रह करते थे और प्रभातफेरी निकालते थे. अनेक क्रान्तिकारी ‘वन्दे मातरम्’ और ‘मेरा रंग दे बसन्ती चोला’ जैसे गीत गाते हुए फांसी पर झूल गये. उन क्रान्तिवीरों के साथ वे गीत और उनके रचनाकार भी अमर हो गये.

इसी प्रकार बाबा कांशीराम ने अपने गीत और कविताओं द्वारा हिमाचल प्रदेश की बीहड़ पहाड़ियों में पैदल घूम-घूम कर स्वतन्त्रता की अलख जगायी. उनके गीत हिमाचल प्रदेश की स्थानीय लोकभाषा और बोली में होते थे. पर्वतीय क्षेत्र में ग्राम देवताओं की बहुत प्रतिष्ठा है. बाबा कांशीराम ने अपने काव्य में इन देवी-देवताओं और परम्पराओं की भरपूर चर्चा की. इसलिए वे बहुत शीघ्र ही आम जनता की जिह्वा पर चढ़ गये.

वर्ष 1937 में गद्दीवाला (होशियारपुर) में सम्पन्न हुए सम्मेलन में नेहरू जी ने इनकी रचनाएं सुनकर और स्वतन्त्रता के प्रति इनका समर्पण देखकर इन्हें ‘पहाड़ी गान्धी’ कहकर सम्बोधित किया. उसके बाद से इसी नाम से प्रसिद्ध हो गये. जीवन में अनेक विषमताओं से जूझते हुए बाबा कांशीराम ने अपने देश, धर्म और समाज पर अपनी चुटीली रचनाओं द्वारा गहन टिप्पणियां कीं. इनमें कुणाले री कहाणी, बाबा बालकनाथ कनै फरियाद ,पहाड़ेया कन्नै चुगहालियां आदि प्रमुख हैं.

उन दिनों अंग्रेजों के अत्याचार चरम पर थे. वे चाहे जिस गांव में आकर, जिसे चाहे जेल में बन्द कर देते थे. दूसरी ओर स्वतन्त्रता के दीवाने भी हंस-हंसकर जेल और फांसी स्वीकार कर रहे थे. ऐसे में बाबा कांशीराम ने लिखा –

भारत मां जो आजाद कराणे तायीं

मावां दे पुत्र चढ़े फांसियां

हंसदे-हंसदे आजादी दे नारे लाई..

बाबा स्वयं को राष्ट्रीय पुरुष मानते थे. यद्यपि पर्वतीय क्षेत्र में जाति-बिरादरी को बहुत महत्त्व दिया जाता है, पर जब कोई बाबा से यह पूछता था, तो वे गर्व से कहते थे –

मैं कुण, कुण घराना मेरा, सारा हिन्दुस्तान ए मेरा

भारत मां है मेरी माता, ओ जंजीरां जकड़ी ए.

ओ अंग्रेजां पकड़ी ए, उस नू आजाद कराणा ए..

उनकी सभी कविताओं में सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक चेतना के स्वर सुनाई देते हैं

काशीराम जिन्द जवाणी, जिन्दबाज नी लाणी

इक्को बार जमणा, देश बड़ा है कौम बड़ी है.

जिन्द अमानत उस देस दी

कुलजा मत्था टेकी कने, इंकलाब बुलाणा..

इसी प्रकार देश, धर्म और राष्ट्रीयता के स्वर बुलन्द करते हुए बाबा कांशीराम 15 अक्तूबर, 1943 को दुनिया से विदा हो गये. हिमाचल प्रदेश में आज भी 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर उनके गीत गाकर उन्हें याद किया जाता है.

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July 10th 2021, 8:30 pm

देश की सरकार में योग्यता और समरसता का सामंजस्य, सबको साथ लेकर चलने की नीति

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पुरु शर्मा

बहुप्रतीक्षित मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का दौर है. राजनीति के गलियारों से लेकर गांव की चौपालों तक विस्तार का शोर सुना जा सकता है. मंत्रीमंडल विस्तार के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि यह सरकार गरीबों, दलितों, पिछड़ों, वंचितों को साथ लेकर चलने वाली और उनके उत्थान के लिए कार्य करने वाली सरकार है. मंत्रिमंडल में देश के 25 राज्यों का प्रतिनिधित्व है. वहीं दूसरी ओर कुशल, उच्च शिक्षित, प्रतिभावान युवाओं को शामिल कर संतुलन साधा है. केंद्रीय मंत्री परिषद के इस व्यापक विस्तार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम कहीं ज्यादा व्यापक आधार वाली, अधिक सक्षम और प्रभावी दिखने लगी है. देश के सर्वांगीण विकास को दृष्टिगत रखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जो समाज में सभी को साथ लेकर चलने का संदेश देता है. सहयोगी दलों की भागीदारी के साथ ही युवाओं का बढ़ता बड़ा हुआ प्रतिनिधित्व लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है. महिलाओं की भागीदारी बड़ी है जो नारी सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष उदाहरण है. साथ ही वंचित और पिछड़े तबकों की हिस्सेदारी बढ़ाकर समरसता स्थापित की गई है.

कुल मिलाकर यह मंत्रिमंडल योग्य, मजबूत, दृढ इच्छाशक्ति वाले, राष्ट्रहितार्थ समर्पित व्यक्तियों का साम्य है. जिनके चयन में योग्यता एवं अनुभव को प्राथमिकता देने के साथ ही क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा गया. पारम्परिक राजनीति से हटकर वरिष्ठ नौकरशाहों को भी आवश्यतानुसार अपनी टीम का हिस्सा बनाकर दूरदृष्टि दृष्टि का परिचय दिया है. मंत्रीमंडल विस्तार से स्पष्ट है ति अब दुगुनी ऊर्जा और उत्साह के साथ भारत विकास के अपने एजेंडे को पूरा करने में जुटेंगे. युवा जोश, वरिष्ठ अनुभव और सामूहिकता के सामजंस्य से विकास की नई राहें खुलेंगी.

जब हम इस केंद्रीय मंत्री परिषद का विश्लेषण करते हैं तो अब तक का सबसे संतुलित मंत्रिमंडल हमे दिखाई देखा है. जिसमें देश के प्रत्येक राज्य, प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक जाति का उचित प्रतिनिधित्व है. यह कहना सार्थक होगा कि यह कैबिनेट अनंत संभावनाओं से युक्त है और भारत को विश्वगुरु के पद पर स्थापित करने में पूर्णतः समर्थ है.

युवाओं को प्राथमिकता

इस बार कैबिनेट युवा उत्साह और जोश से भरपूर है. औसत आयु 61 से घटकर 58 पर पहुँच गई है. मंत्री परिषद में 14 लोग ऐसे हैं, जिनकी आयु 50 वर्ष से कम है. मंत्रिमंडल में युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी एक शुभ संकेत है. निश्चय ही इसका लाभ देश को मिलेगा और व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा.

नारी शक्ति का सम्मान

महिलाओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध मोदी ने अपनी कैबिनेट में भी नारी शक्ति को उचित स्थान दिया है. इस बार मंत्रीमंडल में 2 कैबिनेट मंत्री सहित 11 महिलाओं को शामिल किया गया है जो महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष उदाहरण है. बुधवार को शपथ लेने वाले 43 मंत्रियों में सात महिलाओं ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की.

सभी वर्गों का समावेश

सामाजिक समरसता और सामंजस्य का अद्भुत उदाहरण मोदी मंत्री परिषद है, जिसमें सभी वर्गों को रिकॉर्ड प्रतिनिधित्व दिया गया है. चाहे बात अल्पसंख्यकों की हो, चाहे दलितों की हो, जनजाति समाज की या फिर ओबीसी वर्ग की. सभी वर्गों के योग्य और अनुभवी नेताओं को जगह दी गई है. 2 कैबिनेट मंत्री सहित रिकॉर्ड 12 मंत्री दलित वर्ग से, 3 कैबिनेट मंत्री सहित रिकॉर्ड 8 मंत्री एसटी वर्ग से, 5 कैबिनेट मंत्री सहित रिकॉर्ड 28 मंत्री ओबीसी वर्ग से तथा 3 कैबिनेट मंत्री सहित कुल 5 मंत्री अल्पसंख्यक वर्ग से बनाए गए हैं.

योग्य, कुशल और उच्च शिक्षित नेतृत्वकर्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रीमंडल में विषय विशेषज्ञों सहित कई नौकरशाहों और उच्च शिक्षित लोगों को शामिल किया है. जिनके अनुभव और ज्ञान से योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सुविधा होगी और साथ ही संसाधनों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा. मंत्रीमंडल में इस समय 13 वकील, 6 डॉक्टर, 5 इंजीनियर, 7 सिविल सर्वेंट, 7 पीएचडी डिग्रीधारी, 3 एमबीए व 68 स्नातक डिग्रीधारी मंत्री हैं.

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July 10th 2021, 1:12 pm

आयकर विभाग ने हैदराबाद में छापेमारी की

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भाग्यनगर. आयकर विभाग ने 6 जुलाई, 2021 को हैदराबाद स्थित एक समूह के ठिकानों पर तलाशी एवं जब्ती अभियान चलाया. समूह रियल एस्टेट, निर्माण, अपशिष्ट प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कारोबार करता है. समूह के अपशिष्ट प्रबंधन का कारोबार पूरे भारत में फैला हुआ है. जबकि रियल एस्टेट गतिविधियां मुख्य रूप से हैदराबाद में केंद्रित हैं.

तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, कई सारी शीट आदि जब्त किए गए. जो बेहिसाब लेनदेन में समूह की संलिप्तता को साबित करते हैं. यह पाया गया कि समूह ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान अपनी अधिकतम हिस्सेदारी, समूह की सिंगापुर स्थित एक नॉन रेजिडेंट इकाई को बेच दी थी और बड़ी मात्रा में कैपिटल गेन का फायदा उठाया था. समूह ने बाद में संबंधित पार्टियों के साथ शेयर खरीद/बिक्री/नॉन आर्म लेंथ वैल्यूड सब्सक्रिप्शनऔर बाद में बोनस जारी करने जैसी आकर्षक योजनाओं के जरिए उस लाभ को हस्तांतरित कर दिया. उसने कैपिटल गेन के जरिए अर्जित कमाई को नुकसान के रूप में दिखाने के लिए किया. जो आपत्तिजनक साक्ष्य/दस्तावेज बरामद किए गए हैं, वह साबित करते हैं कि संबंधित कैपिटल गेन को समायोजित करने के लिए कृत्रिम नुकसान दिखाया गया. तलाशी अभियान में लगभग 1200 करोड़ रुपये का कृत्रिम नुकसान का पता चला है. जिस पर कर की देनदारी बनती है.

इसके अलावा तलाशी के दौरान यह भी पाया गया कि समूह ने गलत तरीके से 288 करोड़ रुपये के बैड लोन का दावा किया. इसके लिए रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के जरिए अर्जित किए गए लाभ को छिपाया गया. तलाशी के दौरान इस कृत्रिम/गलत दावे से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज भी पाए गए है. तलाशी की कार्रवाई में समूह के एसोसिएट्स के साथ बेहिसाब नकद लेन देन का भी पता चला है और इसकी मात्रा और तौर-तरीकों की जांच की जा रही है.

तलाशी एवं जब्ती अभियान और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेजों की प्राप्ति के आधार पर समूह की कंपनियों और उसके एसोसिएट ने 300 करोड़ रुपये की बेहिसाब आय होने की बात स्वीकार की है. इसके अलावा समूह बकाया करों का भुगतान करने के लिए भी सहमत हुआ है.

 

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July 10th 2021, 10:27 am

झालावाड़ में कृष्णा की हत्या के मामले में सातवां नाबालिग अभियुक्त निरुद्ध, पीड़ित परिवार को 4 लाख 12

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झालावाड़. झालावाड़ के झालरापाटन में वाल्मीकि समाज के युवक की निर्ममता से पिटाई कर हत्या के मामले में पुलिस ने सातवें अभियुक्त को निरूद्ध कर बाल संप्रेषण गृह भिजवा दिया है. पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी सागर कुरैशी सहित 6 आरोपियों को वारदात के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था. वहीं जिला कलेक्टर हरिमोहन मीणा द्वारा सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग से मृतक के परिवार को कुल 4 लाख 12 हजार 500 रूपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत करवाई गयी है.

अतिरिक्त महानिदेशक अपराध डॉ. रवि प्रकाश ने बताया कि एक जुलाई को झालावाड़ कोतवाली थाना क्षेत्र में हल्दीघाटी रोड पर झालरापाटन के एक वाल्मिकी समाज के युवक कृष्णा पर बदले की भावना से सागर कुरैशी ने अपने साथियों के साथ लाठी, बेसबाल, हॉकी व पत्थरों से हमला कर दिया था. हमले में गंभीर घायल अवस्था में युवक ने पुलिस को दिए बयान में नामजद जानकारी दी थी. बयान में मृतक कृष्णा वाल्मिकी ने मुख्य आरोपी सागर कुरैशी सहित अन्य लोगों का घटना में शामिल होना बताया था. उपचार के दौरान युवक की जयपुर में मौत हो जाने पर हत्या व एससी/एसटी एक्ट में मामला परिवर्तित कर जांच की गई.

डॉ. रवि प्रकाश ने बताया कि झालावाड़ पुलिस अधीक्षक डॉ. किरन कांग सिद्धू के नेतृत्व में तत्परता से कार्रवाई की गई. मामले में घटना के दिन मुख्य अभियुक्त सागर कुरैशी पुत्र मोहम्मद रफीक, रईस उर्फ कालू पुत्र मोहम्मद रफीक, इमरान उर्फ शानू पुत्र मोहम्मद रफीक, सोहेल पुत्र अनवर कुरैशी, शाहिद पुत्र जाहिद कुरैशी एवं अख्तर अली पुत्र खुर्शीद अली को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भिजवाया जा चुका है. गुरुवार को सातवें आरोपी नाबालिग को डिटेन कर बाल संप्रेषण गृह भेजा गया.

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July 10th 2021, 10:16 am

केशव सृष्टी – ग्राम विकास योजना के अंतर्गत क्रियान्वित विभिन्न सामाजिक गतिविधियां

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मुंबई. भारत को स्वतंत्रता मिले काफी समय बीत चुका है, लेकिन जनजाति क्षेत्र अभी भी मूल सुविधीओं से वंचित हैं. उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने तथा उनके आर्थिक उत्थान के लिए सामाजिक विकास संगठन केशव सृष्टी द्वारा विभिन्न रूपों में परियोजनाएं चलाई जा रही हैं. समाज जनों के उद्धार के लिए हर प्रकार के प्रयास करने वाली केशव सृष्टी हर माह लक्ष्य लेकर कार्य को पूरा करती है. केशव सृष्टि द्वारा जून 2021 में पूर्ण किए गए कुछ कार्यों की संक्षिप्त जानकारी….

कोविड से प्रभावित परिवारों के लिए अक्षय सहयोग योजना

केशव सृष्टी ने कोविड से प्रभावित परिवारों की सहायता हेतु अक्षय सहयोग योजना १४ मई २०२१ को प्रारंभ की थी. योजना का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारो को संपर्क करके योग्य समय पर योग्य प्रकार की सहायता प्रदान करना है, जिससे उन्हें अपने जीवन को आगे बढ़ाने में सहायता मिले. योजना के माध्यम से रोजगार, कौशल्य विकास, राशन, शिक्षा, मानव स्वास्थ्य परामर्श, विवाह सहायता, व्यावसायिक शिक्षण, न्यायिक सहायता और मासिक स्कॉलरशिप दी जा रही है. १५० प्रभावित परिवारों से संपर्क किया जा चुका है, उनमें से ३९ परिवारों को योजना का लाभ मिला.

वाडा तहसील के १५ गावों में बढ़ते कोविड संक्रमण को ध्यान में रखते हुए औषधीय वनस्पति की खेती पर जोर दिया गया है. गिलोय प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में अत्यधिक फायदेमंद है. गिलोय को भारत सरकार के तहत स्वस्थ जीवन के लिए आयुष मंत्रालय के औषधीय पौधों के राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा “अमृता फॉर लाईफ योजना” के माध्यम से ३ हजार गिलोय के पौधे लगाए गए. इसी तहसील के अन्य १० गावों में २ हजार पौधे लगाने का योजना है.

आरोग्य रक्षक दांपत्य प्रशिक्षण सत्र

केशव सृष्टी ग्राम विकास योजना वाडा कार्यालय में आरोग्य रक्षक दांपत्य के प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया था. १० चयनित दंपत्तियों में से ७ दंपत्तियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया. आरोग्य प्रमुख डॉ. सुरेश सरवडेकर और डॉ. विशाल झा मार्गदर्शक थे. प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सुरेश सरवडेकरजी ने स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न मुद्दों पर व्याख्यान दिया. कोविड-19 टीकाकरण के बारे में गलत धारणाओं के बारे में बात की. आरोग्य दंपत्तियों के कर्तव्य और दायित्व के बारे में जानकारी दी.

वैश्विक महामारी कोविड के बढ़ते प्रसार को कम करने के लिये सरकार के माध्यम से टीकाकरण करने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार के माध्यम से टीकाकरण शुरु हुआ है, विभिन्न सरकरी टीकाकरण और स्वास्थ केंद्रों की मांग के अनुसार केशव सृष्टी द्वारा हैंड ग्लव्ज़ का वितरण किया गया. वाडा के ग्रामीण रुग्णालय में २ हजार, परली के प्राथमिक आरोग्य केंद्र में १ हजार, प्राथमिक आरोग्य केंद्र में २ हजार, पोशेरी के कोविड केयर सेंटर में १ हजार, वाडा तहसील वैद्यकीय अधिकारी २०००, कुल ८ हजार हैंड ग्लव्ज़ का वितरण किया गया.

५ हजार से अधिक नागरिकों का टीकाकरण

मुंबई के विले पार्ले और अंधेरी में १८ से ४४ वर्ष की आयु के ५ हजार  से अधिक लोगों को टीका लगाया गया.

 वाडा ग्रामीण रुग्णालय में शेड का निर्माण

ग्रामीण रुग्णालय वाडा तहसील में एक मात्र सरकारी रुग्णालय है. बड़ी संख्या में इलाज के लिए पूरे तहसील से नागरिकों का आना जाना रहता है. साथ ही अस्पताल कोविड टीकाकरण का केंद्र भी है, इसी वजह से बड़ी संख्या में नागरिक टीकाकरण के लिए आते है. धूप और बारिश में आने वाले नागरिकों को कोई असुविधा न हो, इसी हेतु से केशव सृष्टी द्वारा शेड का निर्माण किया गया.

सौर लैंप का वितरण अभियान

पालघर जनजातीय जिला है. जिले में आजादी के बाद भी कुछ भागों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है. जव्हार तहसील के पिंपलशेत ग्राम पंचायत के सुदूर और उपेक्षित गांव हुंबरण, माडविहारा और सुकीचा माळ गांव में केशव सृष्टी ने मॉनसून से पहले २६० परिवारों मे सौर लैंप का वितरण किया.

डाहे गाव में ११ शौचालयों का निर्माण

डाहे स्थित बोचलपाडा गांव में शौचालय न होने के कारण ग्रामीणों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता था. उनके सुविधा के लिए केशव सृष्टी ने ११ शौचालयों का निर्माण किया गया.

महिलाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण

केले के पेड से फाइबर का उत्पादन किया जा सकता है. केले के बुंधे से बना धागा मजबूत और मुलायम होता है. इसे आसानी से मनचाहे आकार में मोड़ा जा सकता है. बावली गांव की मंगल फाइबर कंपनी में १० महिलाओं को इसी फाइबर से राखी के लिए धागा, रस्सी, डस्टर जैसी विभिन्न हस्तशिल्प वस्तुओं को बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया. प्रशिक्षण ने महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए.

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July 10th 2021, 10:16 am

पुस्तक समीक्षा – भारत को भारतीय दृष्टि से देखने का प्रयास है ‘भारत-बोध’

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लोकेन्द्र सिंह

भारत में लेखकों, साहित्यकारों एवं इतिहासकारों का एक ऐसा वर्ग रहा है, जिसने समाज को ‘भारत बोध’ से दूर ले जाने का प्रयास किया. उन्होंने पश्चिम की दृष्टि से भारत को देखा और अपने लेखन में वैसे ही प्रस्तुत किया. उन्होंने इस प्रकार के विमर्श खड़े किए, जिनसे उपजे भ्रम के वातावरण में भारतीय समाज अपने मूल स्वरूप को विस्मृत करने की दिशा में बढ़ गया. अपनी लेखनी एवं मेधा का उपयोग इस वर्ग ने देश को उसकी मूल संस्कृति से काटने के लिए किया. परंतु, भारत की वास्तविक पहचान को मिटा देना इतना आसान कार्य भी नहीं है. अनेक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक आक्रमणों के बाद भी भारत अपनी पहचान के साथ उन्नत हिमालय की तरह खड़ा हुआ है. थोड़ी-बहुत जो धुंध छा गई थी, उसे हटाने का प्रयास भारतीयता से ओतप्रोत लेखक वर्ग कर ही रहा है. पत्रकारिता के प्राध्यापक एवं लेखक डॉ. सौरभ मालवीय की नयी पुस्तक ‘भारत बोध’ भारत को भारतीय दृष्टि से देखने के प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रयास है. डॉ. मालवीय ने अपनी पुस्तक में 41 आलेखों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धारा के कुछ आयामों को प्रस्तुत किया है. भारत की संस्कृति, त्योहार एवं उनकी अवधारणा, रीति-रिवाजों में सामाजिक एवं राष्ट्रीय बोध, पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति भारतीय मानस और भारत में राष्ट्र की संकल्पना जैसे समसामयिक विमर्श के अनेक बिन्दुओं पर उनके विचारों का निर्मल प्रवाह दिखाई देता है.

लेखक डॉ. सौरभ मालवीय ने अपनी पीएचडी ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर की है. संभवत: यही कारण रहा होगा कि उनके लेखों से गुजरने पर गहन अध्ययन की अनुभूति होती है. भारतीय वांग्मय से सूत्र और प्रसंग लेकर डॉ. मालवीय ने अपनी बातों को आधार दिया है.

राष्ट्र, संस्कृति, पर्यावरण और मीडिया जैसे विषयों पर भी जब उन्होंने लेखन किया है, तो उनको समझने एवं समझाने के लिए लेखक ने भारतीय वांग्मय के पृष्ठ ही पलट कर देखे हैं. संस्कृति, राष्ट्र और राष्ट्रवाद को समझने के लिए उन्होंने पाश्चात्य विद्वानों एवं पाश्चात्य दृष्टि की अपेक्षा भारतीय मनीषियों के चिंतन को श्रेष्ठ माना है. यही सही भी है. भारत के संदर्भ में जब बात आए, तब हमें अपने पुरखों को अवश्य पढऩा चाहिए कि आखिर उन्होंने भारत की व्याख्या किस तरह की है? उनका भारत बोध क्या था? ‘भारत की अवधारणा’ को समझाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह एवं विचारक डॉ. मनमोहन वैद्य कहते हैं कि “भारत को समझने के लिए चार बिन्दुओं पर ध्यान देने की जरूरत है. सबसे पहले भारत को मानो, फिर भारत को जानो, उसके बाद भारत के बनो और सबसे आखिर में भारत को बनाओ”. लेखक डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक ‘भारत बोध’ इन चार चरणों से होकर गुजरती है. इसलिए यह पुस्तक हमें भारत की वास्तविक पहचान के निकट ले जाने के प्रयास में सफल होती दिखती है.

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अरुण कुमार भगत ने ठीक ही लिखा है कि “डॉ. मालवीय ने इस पुस्तक हेतु अपने जिन निबंधों का चयन किया है, वे सभी भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत की पहचान को सुनिश्चित और संस्थापित करने वाले हैं”. पुस्तक के संदर्भ में एक और बात महत्वपूर्ण है कि इसमें शामिल लेखों की भाषा सहज, सरल और सरस है. भाषा की सरलता के कारण आज की युवा पीढ़ी भी पुस्तक में शामिल विषयों की गहराई में उतर पाएगी. आलेखों में प्रस्तुत विचारों में भी एक प्रवाह है, जो पाठकों को बांधे रखने में सफल रहेगा.

‘भारत बोध’ का प्रकाशन यश पब्लिकेशंस, दिल्ली ने किया है. पुस्तक में 176 पृष्ठ हैं. पुस्तक के संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बिहार क्षेत्र के प्रचारक सूबेदार जी और वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अरुण कुमार भगत ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं, जिन्हें पुस्तक में शामिल किया गया है. ‘भारत बोध’ की प्रस्तावना भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने लिखी है, जिन्होंने स्वयं भी ‘भारत बोध’ के संदर्भ में विपुल लेखन किया है. बहरहाल, डॉ. सौरभ मालवीय की यह पुस्तक भारत को भारतीय दृष्टि से देखने का महत्वपूर्ण प्रयास है. उनका यह प्रयास भारत की वास्तविक संकल्पना को समाज तक पहुँचाने में सफल हो, ऐसी कामना है. इसके साथ ही यह पुस्तक इस दिशा में चल रहे विमर्श में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है.

पुस्तक : भारत बोध

लेखक : डॉ. सौरभ मालवीय

पृष्ठ : 176

मूल्य : 220 रुपये (पेपरबैक)

प्रकाशक : यश पब्लिकेशंस,

1/10753, गली नं. 3, सुभाष पार्क,

नवीन शाहदरा, दिल्ली-32

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July 10th 2021, 7:01 am

कलाकार सहायतार्थ वर्चुअल कॉन्सर्ट “पीर पराई जाणे रे” का सफल आयोजन

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी ने समाज के हर हिस्से को प्रभावित किया है. कला जगत भी इससे अछूता नहीं रहा. कलाकार, विशेष रूप से छोटे कलाकार इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. मंचीय प्रस्तुतियां बंद हैं. ऐसे में कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है. कला-साहित्य, संस्कृति की संवाहिका है और संस्कृति राष्ट्र की आत्मा. कला भविष्य में आने वाले संकटों से सामना करने हेतु समाज को तैयार करती है. लेकिन जब ‘कलाओं’ पर ही संकट के बादल मंडराने लगे तो समाज का संकट में घिरना अवश्यम्भावी है. ऐसे में जरूरतमंद कलाकारों की आर्थिक सहायता के लिए संस्कार भारती दिल्ली प्रान्त द्वारा ‘पीर पराई जाणे रे’ नाम से कन्सर्ट का आयोजन किया गया. जिसमें ख्यातिलब्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अभावग्रस्त कलाकारों की मदद के लिए समाज से अपील की.

वर्चुअल कॉन्सर्ट में सोनू निगम, शंकर महादेवन, उस्ताद अमजद अली खां, उस्ताद वसिफुद्दीन डागर, सुरेश वाडकर, हंसराज हंस, पंडित बिरजु महाराज, अनुप जलोटा, कैलाश खेर, अनुराधा पौडवाल, मनोज तिवारी, सरोजा वैद्यनाथन, दिलेर मेंहदी, मिका सिंह, अनुपम खेर, सोनल मानसिंह, कपिल शर्मा, प्रकाश झा, डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम, डॉ. सोनल मानसिंह, नागराज हवलदार, जानू बरूआ, सुमित्रा गुहा, सुभाष घई, अक्षय कुमार, रवि किशन, जसवीर जस्सी, मधुभट्ट तैलंग, राजेन्द्र गंगानी, अनवर खान मांगणियार, मुकुंद नायक, हरिहरन, साजन मिश्रा, विश्वमोहन भट्ट, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, वासुदेव कामत,चेतन जोशी, ऋचा शर्मा सरीखे कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी और अभावग्रस्त कलाकारों की सहायता की अपील की.

कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं सांसद हंसराज हंस ने बताया कि ‘पीर पराई जाने रे’ संकटकाल में कलाकारों की सहायता के लिए हालिया वर्षों में सबसे बड़ा अभियान है. हम चाहते हैं कि दूर-दराज के छोटे कलाकारों तक सहायता पहुंचे. कार्यक्रम में एवं आगे भी संस्कार भारती कला के उन्नयन व कलाकारों की सहायता के लिए कृतसंकल्पित है. कार्यक्रम का संचालन लोकगायिका मालिनी अवस्थी एवं गीतकार मनोज मुंतशिर ने किया.

संस्कार भारती का यह कॉन्सर्ट आगामी दिनों में देश भर के अभावग्रस्त कलाकारों की मदद की शुरूआत है. आने वाले दिनों में सरकार एवं समाज से राशि इकट्ठा कर ऐसे कलाकारों को बृहद पैमाने पर मदद पहुंचाई जाएगी. ‘संस्कृति पहल’ भविष्य में कलाकारों द्वारा प्रस्तुति के माध्यम से कला संस्कृति को प्रोत्साहन करेगी.

 

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July 10th 2021, 4:00 am

विनाशपर्व – अंग्रेजों ने भारतीय वस्त्र उद्योग को तार-तार किया

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प्रशांत पोळ

हजार – दो हजार वर्ष पहले, जब भारत विश्व व्यापार में सिरमौर था, तब उस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा था – कपड़ा उद्योग का. चाहे सूती वस्त्र हो, या रेशम – मलमल का, भारतीयों का डंका सारी दुनिया में बजता था. यूरोप को सूती वस्त्र पहनाए भारत ने..! उन्हें तो मात्र ऊनी वस्त्र ही मालूम थे. कपास की खेती वे जानते ही नहीं थे. पूर्व और पश्चिम, दोनों दिशाओं के देश, भारतीय वस्त्रों के लिए पागल रहते थे.

वस्त्रोद्योग यह भारत का प्राचीन उद्योग है. ऋग्वेद में इसका उल्लेख आता है. ऋग्वेद के दूसरे मण्डल में वर्णन है कि सबसे पहले ऋषि गृत्स्मद ने कपास का बीज बोया, उससे बने पेड़ से कपास प्राप्त की और फिर उस कपास से सूत बनाया. इस सूत से कपड़ा बनाने के लिए उन्होंने लकड़ी की तकली बनाई. वैदिक भाषा में कच्चे धागे को ‘तन्तु’ कहा गया. यह तन्तु बनाते समय, कपास के बचे हुए हिस्से को ‘ओतु’ कहा गया. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी कपड़ों और बुनकरों का उल्लेख है.

कुछ हजार वर्ष पहले, भारत में कपड़ा बनाने की प्रक्रिया ने एक बड़े उद्योग का स्वरूप धरण किया. कपड़ों को विभिन्न शैली में तैयार करना और उनको रंग लगाना, यह प्रक्रिया भारत में ५,००० वर्ष पहले से, सामान्य रूप से होती थी. डॉ. स्टेनले वोलपर्ट (Dr. Stanley Wolpert) अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया में इतिहास विषय के प्राध्यापक हैं. इन्होंने लिखा है कि ‘भारत सूती वस्त्रों का घर था. सूती वस्त्रों का प्रारंभ भारत से ही हुआ, तथा सूत कातना और उस की बुनाई, यह भारतीयों ने ही विश्व को सिखाया है’. प्रोफेसर डी.पी. सिंघल भी लिखते हैं कि ‘चरखा’ (Spinning Wheel) भारत की विश्व को देन है. मोहन-जो-दरो की खुदाई में, एक कपड़े का टुकड़ा और रस्सी मिली. दोनों का परीक्षण करने पर ध्यान में आता है कि उस हड़प्पा कालीन संस्कृति के समय (अर्थात् लगभग पांच से सात हजार वर्ष पूर्व) भारत में उन्नत किस्म के कपड़े बनते थे.

इंग्लैंड के ‘थ्रोप कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी’ के अध्यक्ष रहे, प्रोफेसर जेम्स ऑगस्टीन ब्राउन स्केरर (Prof. James Augustin Brown Scherer : 1870 – 1944) ने एक पुस्तक लिखी है, ‘कॉटन एज ए वर्ल्ड पावर’. १९१६ में यह पुस्तक अमेरिका में प्रकाशित हुई. कपास के वैश्विक महत्व को लेकर उन दिनों यह पुस्तक प्रमाण मानी जाती थी. इस पुस्तक के दो भाग हैं. पहले भाग का शीर्षक है – ‘फ्रॉम इंडिया टू इंग्लैंड. इस भाग में प्रोफेसर जेम्स स्केरर ने एक पूरा अध्याय भारत में कपास और कपड़ों के निर्माण पर विस्तार से लिखा है. इस अध्याय का शीर्षक है – ‘हिन्दू स्किल’. इस अध्याय में भारत में कपास से बने कपड़ों का उद्योग कितना प्राचीन और परिपक्व है, इसके बारे में विस्तार से लिखा है. प्रोफेसर स्केरर इस पुस्तक में लिखते हैं कि ‘उस जमाने में हिन्दू कारीगरों द्वारा बनाए गए कपड़े, आज की हमारी उन्नत मशीनों पर बनाए गए कपड़ों से भी अच्छे थे’. Thousands of years before the invention of cotton machinery in Europe, Hindu gins were separating fiber from seed, Hindu wheels were spinning the lint in to yarn and frail Hindu looms weaving these yarns in to textiles. (यूरोप में सूती वस्त्र बनाने वाली मशीनों का आविष्कार होने के हजारों वर्ष पहले, हिन्दू तकलियों से कपास की बीजों से धागा निकाला जाता था. चरखे और कताई के उपकरणों से इन धागों से तागा बनाया जाता था और हिन्दू करघे, उन तागों का वस्त्र बनाते थे. पृष्ठ – १९)

प्रो. स्केरर ने अनेक विदेशी प्रवासियों के अनुभवों का भी उल्लेख किया है. वे आगे लिखते हैं, ‘अरब के दो प्रवासियों ने कुछ सौ वर्ष पहले लिखा है कि हिन्दू कारीगरों (जुलाहों) द्वारा बनाए गए वस्त्र इतने उत्तम प्रकार के एवं उच्च गुणवत्ता (extraordinary perfection) के होते हैं, कि ऐसे कहीं भी नहीं मिलते. वे इतने नाजुक होते हैं, कि एक छोटी सी अंगूठी में से भी निकाल सकते हैं’. प्रो. स्केरर ने जीन बैप्टिस्ट टैवर्नियर इस फ्रेंच प्रवासी का उद्धरण भी दिया है.

सत्रहवीं शताब्दी में जीन टैवर्नियर हीरे के व्यापारी ने अनेकों बार पर्शिया (आज का ईरान) और भारत की यात्राएं कीं. १६६० में उसने भारतीय वस्त्रों की गुणवत्ता के बारे में लिखा कि ‘कुछ वस्त्र इतने तलम और मुलायम थे कि हाथों को उनके अस्तित्व का अनुभव ही नहीं होता. कुछ वस्त्र तो इतने पारदर्शक थे कि पहनने पर भी, कपड़े पहने हैं, ऐसा लगता ही नहीं था.

टेवर्नियर ने भारतीय वस्त्रों के बारे में एक अनुभव साझा किया है – ‘एक पर्शियन राजदूत जब अपने देश वापस गया, तब उसने अपने सुलतान को एक नारियल भेंट दिया. दरबारियों को अचरज लगा, कि अपने सुलतान को इस राजदूत ने मात्र एक नारियल दिया? किन्तु उनके आश्चर्य कि कोई सीमा नहीं रही, जब उन्होंने देखा कि उस नारियल में २३० यार्ड (अर्थात २१० मीटर) का मलमल का तलम और अत्यंत मुलायम कपड़ा, बड़े ही संजो कर रखा है..!’

ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी विल्किंस जब वापस इंग्लैंड गए, तो उन्होंने सर जोसेफ बेक को भारत से लाया मलमल का कपड़ा भेंट दिया. सर जोसेफ बेक ने इस कपड़े के बारे में आश्चर्य व्यक्त करते हुए लिखा है, “मेरे मित्र विल्किंस ने मुझे दिया हुआ भारतीय कपड़ा अत्यंत तलम, मुलायम और आकर्षक है. इस ५ यार्ड ७ इंच (अर्थात १५ फीट ७ इंच) लंबे कपड़े का वजन है मात्र ३४.३ ग्रेन (१५.५ ग्रेन का १ ग्राम होता है. अर्थात उस कपड़े का वजन था मात्र २ ग्राम) !

इस मलमल की गुणवत्ता कि एक और बानगी –

सर जोसेफ बेक ने जिस मलमल के कपड़े के बारे में लिख रखा है, उस का थ्रेड काउंट था २४२५. (थ्रेड काउंट का अर्थ होता है, १ वर्ग इंच / सेंटीमीटर में कितने थ्रेड, यानि धागे होते हैं. ज्यादा थ्रेड अर्थात वो धागे ज्यादा महीन, ज्यादा मुलायम और ज्यादा शान-शौकत वाले होते हैं) आज के अत्याधुनिक मशीन्स पर बने कपड़ों के थ्रेड काउंट ६०० के ऊपर नहीं होते. अर्थात आज की अत्याधुनिक मशीनरी भी, उन दिनों के भारतीयों के हाथों से बुने वस्त्रों की गुणवत्ता नहीं ले सकती !

उन्नीसवीं सदी के एक अंग्रेज़ विद्वान, सर जॉर्ज बर्डवुड (१८३२ – १९१७) ने भारत पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं. इनका अधिकतम समय भारत में बीता. ८ दिसंबर १८३२ में, उस समय के ‘बॉम्बे प्रेसीडेंसी’ के बेलगांव (वर्तमान में कर्नाटक का ‘बेलगावी’ शहर) में इनका जन्म हुआ था. वे डॉक्टर बने, पर्शियन युद्ध में हिस्सा लिया, ग्रांट मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर रहे और बाद में बॉम्बे के शेरिफ़ भी बने. १८६८ में वे इंग्लैंड गए. वहां भारत संबंधी कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम किया. इनके द्वारा लिखी कुछ प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है, ‘द इंडस्ट्रियल आर्ट्स ऑफ इंडिया’. यह पुस्तक इन्होंने ‘सेक्रेटरी ऑफ स्टेट – इंडिया अफेयर्स’ के अनुरोध पर लिखी. इस पुस्तक में पृष्ठ ७३ पर वे लिखते हैं, ‘बताया जाता है कि जहाँगीर के काल में पंद्रह गज लंबी और एक गज चौड़ी ढाका की मलमल का वजन मात्र १० ग्रेन (१ ग्राम से भी कम) होता था’.

इसी पुस्तक के पृष्ठ ९५ पर इन्होंने लिखा है, ‘अंग्रेज़ और अन्य युरोपियन लेखकों ने तो यहां के मलमल, सूती और रेशमी वस्त्रों को ‘बुलबुल की आँख’, ‘मयूर कंठ’, ‘चांद सितारे’, ‘पवन के तारे’, ‘बहता पानी’, ‘संध्या की ओस’ जैसी अनेक काव्यमय उपमाएं दे डाली हैं.‘

सर एडवर्ड बैंस (Sir Edward Baines : 1800 – 1890) इंग्लैंड के एक समाचारपत्र के संपादक थे और ब्रिटिश पार्लियामेंट के सदस्य भी रहे. वर्ष १८३५ में उन्होंने एक पुस्तक लिखी – ‘हिस्ट्री ऑफ कॉटन मैनुफेक्चरर’. इस में सर बैंस लिखते हैं. ‘अपने वस्त्र उद्योग में भारतीयों ने प्रत्येक युग के अतुलनीय, सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ मानदंडों को बनाए रखा. उनके कुछ मलमल के वस्त्र तो मानो मानवों के नहीं, अपितु परियों और तितलियों द्वारा तैयार किए हुए लगते हैं.‘

यही कारण था कि इस्लामी आक्रांताओं की ज़्यादतियों के बाद भी अंग्रेजों का शासन आने से पहले तक, भारतीय वस्त्र उद्योग का प्रदर्शन अच्छा था. वर्ष १८११ – १२ में (अर्थात अंग्रेजों के हाथ में पूरे भारत की सत्ता आने के थोड़े पहले), भारत से होने वाले निर्यात में सूती वस्त्रों का हिस्सा ३३% था. दुर्भाग्य से अंग्रेजों की नीतियों के कारण, वर्ष १८५० – ५१ तक, वह मात्र ३% रह गया था.

(क्रमशः)

#स्वतंत्रता75; #स्वराज्य75 #Swarajya75

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July 10th 2021, 4:00 am

10 जुलाई / जन्मदिवस – संकल्प के धनी जयगोपाल जी

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परम्परा में अनेक कार्यकर्ता प्रचारक जीवन स्वीकार करते हैं, पर ऐसे लोग कम ही होते हैं, जो बड़ी से बड़ी व्यक्तिगत या पारिवारिक बाधा आने पर भी अपने संकल्प पर दृढ़ रहते हैं. जयगोपाल जी उनमें से ही एक थे. उनका जन्म अविभाजित भारत के पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त स्थित डेरा इस्माइल खां नगर के एक प्रतिष्ठित एवं सम्पन्न परिवार में 10 जुलाई, 1923 को हुआ था. अब यह क्षेत्र पाकिस्तान में है. वे चार भाइयों तथा तीन बहनों में सबसे बड़े थे. विभाजन से पूर्व छात्र जीवन में ही वे संघ के सम्पर्क में आ गये थे. जयगोपाल जी ने लाहौर से प्रथम वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके बाद उन्होंने हीवेट पॉलीटेक्निक कॉलेज, लखनऊ से प्रथम श्रेणी में स्वर्ण पदक के साथ अभियन्ता की परीक्षा उत्तीर्ण की. यहीं उनकी मित्रता भाऊराव देवरस जी से हुई. उसके बाद तो दोनों ‘दो देह एक प्राण’ हो गये.

घर में सबसे बड़े होने के नाते माता-पिता को आशा थी कि अब वे नौकरी करेंगे, पर जयगोपाल जी तो संघ के माध्यम से समाज सेवा का व्रत ले चुके थे. अतः शिक्षा पूर्ण कर वर्ष 1942 में वे संघ के प्रचारक बन गये. भारत विभाजन के समय उस (पाकिस्तान) ओर के हिन्दुओं ने बहुत शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संकट झेले. जयगोपाल जी के परिवारजन भी खाली हाथ बरेली आ गये. ऐसे में एक बार फिर उन पर घर लौटकर कुछ काम करने का दबाव पड़ा, पर उन्होंने अपने संकल्प को लेशमात्र भी हल्का नहीं होने दिया और पूर्ववत संघ के प्रचारक के रूप में काम में लगे रहे.

संघ कार्य में नगर, जिला, विभाग प्रचारक के नाते उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई स्थानों विशेषकर शाहजहांपुर, बरेली, लखनऊ तथा प्रयाग आदि में संघ कार्य को प्रभावी बनाया. उन्होंने तीन वर्ष तक काठमाण्डू में भी संघ-कार्य किया और नेपाल विश्वविद्यालय से उपाधि भी प्राप्त की. वे वर्ष 1973 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रान्त प्रचारक बने. वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू होने पर उन्होंने भूमिगत रहकर अत्यन्त सक्रिय भूमिका निभाई और अन्त तक पकड़े नहीं गये. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रान्त प्रचारक माधवराव देवड़े जी की गिरफ्तारी के बाद वे पूरे उत्तर प्रदेश में भ्रमण कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते रहे.

जयगोपाल जी ने वर्ष 1989 में क्षेत्र प्रचारक के नाते जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली का कार्य संभाला. उनका केन्द्र चण्डीगढ़ बनाया गया. उस समय पंजाब में आतंकवाद चरम पर था और संघ की कई शाखाओं पर आतंकवादी हमले भी हुए थे. इन कठिन परिस्थितियों में भी वे अडिग रहकर कार्य करते रहे. स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी वे लेह-लद्दाख जैसे क्षेत्रों में गये और वहां संघ कार्य का बीजारोपण किया. वर्ष 1994 में उन्हें विद्या भारती (उत्तर प्रदेश) का संरक्षक बनाकर फिर लखनऊ भेजा गया. यहां रह कर भी वे यथासम्भव प्रवास कर विद्या भारती के काम को गति देते रहे. वृद्धावस्था तथा अन्य अनेक रोगों से ग्रस्त होने के कारण दो अगस्त, 2005 को दिल्ली में अपने भाई के घर पर उनका देहान्त हुआ.

जयगोपाल जी ने जो तकनीकी शिक्षा और डिग्री पाई थी, उसका उन्होंने पैसा कमाने में तो कोई उपयोग नहीं किया, पर लखनऊ में संघ परिवार की अनेक संस्थाओं के भवनों के नक्शे उन्होंने ही बनाये. इनमें विद्या भारती का मुख्यालय निराला नगर तथा संघ कार्यालय केशव भवन प्रमुख हैं.

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July 10th 2021, 4:00 am

गौहत्या के विरोध में हिन्दू समाज का प्रदर्शन

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श्रीगंगानगर. श्रीगंगानगर जिले के जैतसर थाना क्षेत्र के सरदारगढ़ गांव में पिछले दिनों गाय के बछड़े को काट कर उसका मांस बेचने के मामले में हिंदू समाज में आक्रोश व्याप्त है. दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, गौरक्षा दल के कार्यकर्ताओं सहित हिंदू समाज ने प्रदर्शन किया. हिंदू समाज ने मांग की कि गौहत्या करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, जिससे कोई इस तरह का विभत्स कृत्य करने की चेष्टा ना करे.

जानकारी के अनुसार जैतसर के सरदारगढ़ में जीव रक्षा बिश्नोई सभा और गोरक्षा दल के सदस्यों ने पुलिस को, गाय के बछड़े को मार कर उसका मांस बेचने की सूचना दी थी. पुलिस ने सूचना के अनुसार जाल बिछाया तो एक घर में पुलिस ने चार लोगों को मांस की बिक्री करते पाया. पुलिस ने पशुपालन विभाग की टीम को मौके पर बुलवाकर मांस की जांच की तो वह बछड़े का होना पाया गया. विभाग ने मौके से जरूरी जानकारियां एकत्र कर ली हैं. मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया एवं दो लोग भागने में सफल रहे.

मामले को लेकर आक्रोशित हिन्दू समाज एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने विश्व हिंदू परिषद एवं गौरक्षा दल के कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में दुर्गा मंदिर परिसर में गोरक्षा सभा की. सभा में घटना को लेकर विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे क्षेत्र में अशांति फैलाने वाला कृत्य बताया.

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सह कार्यवाह सुरेन्द्र कुमार गोयल, विहिप के पूर्व अध्यक्ष मदनलाल जांगिड़, बजरंग दल के संयोजक कमल सोनी, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष शिव बागड़ी, भाजपा मंडल अध्यक्ष अशोक गोयल, श्री कृष्ण गौशाला के अध्यक्ष राजू चौधरी सहित अन्य लोगों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में इस प्रकार की घटना परस्पर वैमनस्यता को बढ़ावा देने का कार्य करती है. इस तरह का मामला कानून, शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है.

उन्होंने कहा कि गौ हत्या करने वालों एवं बछड़े के मांस को खाने के लिए ले जाने वाले ग्रामीणों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. सभा में संयुक्त व्यापार संघ के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे.

सैकड़ों लोगों ने निकाला रोष मार्च

सभा के बाद सैकड़ों की संख्या में उपस्थित गौ सेवकों एवं सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुरानी धानमंडी, गांधी चौक, मुख्य बाजार, हंसमुख चौक, सुपर बाजार व अन्य रास्तों से होते हुए रोष मार्च निकाला एवं धरना दिया. मार्च में उपस्थित लोगों ने गौ हत्यारों को फांसी देने की मांग के नारे लगाए.

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July 9th 2021, 11:13 am

इस्लामिक देशों में बदलाव की बयार में भारतीय मुसलमानों से अपेक्षा

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प्रणय कुमार

परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है. युगीन आवश्यकता एवं वर्तमान परिस्थिति-परिवेश के अनुकूल परिवर्तन सतत चलते रहना चाहिए. इसी में अखिल मानवता और जगती का कल्याण निहित है. परिवर्तन की यह प्रक्रिया चारों दिशाओं और सभी पंथों-मज़हबों में देखने को मिलती रही है. इतना अवश्य है कि कहीं यह प्रक्रिया तीव्र है तो कहीं थोड़ी मद्धम, पर यदि हम जीवित हैं तो परिवर्तन निश्चित एवं अपरिहार्य है.

इस्लाम में यह प्रक्रिया धीमी अवश्य है, पर सतह के नीचे वहाँ भी परिवर्तन की तीव्र कामना और बेचैन कसमसाहट पल रही है. इस्लाम सुधार एवं बदलावों से भयभीत और आशंकित होकर अपने अनुयायियों पर भी तरह-तरह की बंदिशें और पाबन्दियाँ लगाकर रखता है. इन बंदिशों एवं पाबंदियों के कारण उसको मानने वाले बहुत-से लोग आज खुली हवा, खिली धूप में साँस लेने के लिए तड़प उठे हों तो कोई आश्चर्य नहीं! तमाम इस्लामिक देशों और उनके अनुयायियों के दिल और दिमाग़ में जमी सदियों पुरानी काई आज कुछ-कुछ छंटने लगी है, उनके ज़ेहन के बंद-अंधेरे कोने में सुधार, बदलाव और उदारता की उजली किरणें दस्तक देने लगी हैं. संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों में पिछले कुछ वर्षों में आए बदलाव इसकी पुष्टि करते हैं.

हाल ही में कई इस्लामिक देशों में कुछ ऐसे बदलाव हुए जो सुधार एवं परिवर्तन, उदारता एवं सहिष्णुता, सहयोग एवं समन्वय की उम्मीद जगाते हैं. 2015 में सऊदी अरब में महिलाओं को मत देने का अधिकार सौंपा गया तो पूरी दुनिया में उसकी प्रशंसा हुई. सऊदी अरब सबसे अंत में महिलाओं को मताधिकार सौंपने वाला देश बना. वर्ष 2018 में जब उसने महिलाओं को कार चलाने की इजाज़त दी तो उसकी भी चारों ओर प्रशंसा हुई. ऐसे अनेक सुधार पिछले कुछ महीनों-वर्षों से वहाँ देखने को मिल रहे हैं. चाहे महिलाओं के अकेले यात्रा करने का मुद्दा हो या अपनी रुचि एवं मर्ज़ी के परिधान पहनने का, ये सभी बदलाव इस्लाम के युग विशेष से आगे बढ़ने की ओर संकेत करते हैं. इसमें जो सबसे ताजा एवं उल्लेखनीय बदलाव है- वह है कुछ दिनों पूर्व सऊदी अरब के विभिन्न मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों पर नमाज के वक्त ऊँची आवाज़ में दिए जाने वाले अज़ान पर कुछ पाबंदियों का लगना. एक वहाबी विचारधारा वाले देश में ऐसी पाबन्दियां एवं शर्त्तें एक युगांतकारी निर्णय एवं घटना है. इसमें भविष्य के उजले संकेत निहित हैं.

वहाँ के इस्लामिक मामलों के मंत्री डॉक्टर अब्दुल लतीफ़ बिन अब्दुल्ला अज़ीज अल-शेख ने अपने आदेश में लिखा – ”मस्ज़िदों पर लगे लाउडस्पीकरों का प्रयोग सिर्फ़ धर्मावलंबियों को नमाज़ के लिए बुलाने (अजान के लिए) और इक़ामत (नमाज के लिए लोगों को दूसरी बार पुकारने) के लिए ही किया जाए और उसकी आवाज़ स्पीकर की अधिकतम आवाज़ के एक तिहाई से ज़्यादा न हो.” उन्होंने यह भी लिखा – ” इस आदेश को न मानने वालों के ख़िलाफ़ प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.” शरीयत एवं पैग़ंबर मोहम्मद की हिदायतों का हवाला देते हुए उन्होंने आगे कहा – “हर इंसान चुपचाप अपने रब को पुकार रहा है. इसलिए किसी दूसरे को परेशान नहीं करना चाहिए और ना ही पाठ में या प्रार्थना में दूसरे की आवाज़ पर आवाज़ उठानी चाहिए.”

सऊदी प्रशासन ने अपने आदेश में तर्क दिया है कि “इमाम नमाज़ शुरू करने वाले हैं, इसका पता मस्जिद में मौजूद लोगों को चलना चाहिए, ना कि पड़ोस के घरों में रहने वाले लोगों को. बल्कि यह क़ुरान शरीफ़ का अपमान है कि आप उसे लाउडस्पीकर पर चलाएं और कोई उसे सुने ना या सुनना ना चाहे.”

यह सऊदी अरब की सरकार का बिलकुल उचित एवं समयानुकूल फ़ैसला है कि एक निश्चित समय के बाद एवं निश्चित ध्वनि से ऊंची आवाज़ में मस्जिदों पर लाउडस्पीकर न बजाई जाए. कितने बुजूर्ग-बीमार, बूढ़े-बच्चे, स्त्री-पुरुष मस्ज़िदों में बजने वाले लाउडस्पीकरों की ऊँची आवाज़ से अनिद्रा एवं अवसाद के शिकार हो जाते हैं. अलग-अलग शिफ़्ट में काम करने वाले लोग दो पल चैन की नींद नहीं ले पाते. भारत जैसे देश, जहाँ रोज नई-नई मस्ज़िदों की कतारें खड़ी होती जा रही हैं, वहाँ की स्थितियाँ तो और भयावह एवं कष्टप्रद हैं. ऊपर से आए दिन होने वाले जलसे-जनाज़े, धरने-प्रदर्शन, हड़ताल-आंदोलन ने उनके दिन का चैन और रातों की नींद पहले ही छीन रखी है, जो थोड़ा-बहुत सुकून रात्रि के अंतिम प्रहर और भोर की शांत-स्निग्ध वेला में नसीब होता है, लाउडस्पीकर उनसे वह भी छीन लेते हैं. और यदि किसी ने पुलिस-प्रशासन में शिकायत भी की, तो अव्वल तो उसकी शिक़ायत दर्ज ही नहीं की जाती और कहीं जो वह मीडिया के माध्यम से सुखियाँ बन जाए तो बात दंगे-फ़साद, मार-काट, फ़तवे-फ़रमान तक पहुँच जाती है. शिक़ायत दर्ज कराने वाला या विरोध का वैध स्वर बुलंद करने वाला स्वयं को एकाकी-असहाय महसूस करता है. कथित बौद्धिक एवं छद्म धर्मनिरपेक्षतावादी वर्ग उसका सहयोग करने के स्थान पर सुपारी किलर की भूमिका में अधिक नज़र आता है. पूरा इस्लामिक आर्थिक-सामाजिक तंत्र (ईको-सिस्टम) हाथ धोकर उसके पीछे पड़ जाता है. पक्ष बदलते ही बहुतों के लिए अभिव्यक्ति के अधिकार के मायने भी बदल जाते हैं. विरोध या शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति की सार्वजनिक छवि को येन-केन-प्रकारेण ध्वस्त करने का कुचक्र व षड्यंत्र रचा जाता है. कुछ वर्षों पूर्व प्रसिद्ध गायक सोनू निगम एवं अभिजीत भट्टाचार्या या हाल के दिनों में कंगना रनौत को ऐसी ही मर्मांतक पीड़ा एवं यातनाओं से गुज़रना पड़ा है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संविधान-प्रदत्त अधिकारों का उचित एवं मुद्दा-आधारित उपयोग मात्र करने के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रॉल का भयानक शिकार होना पड़ा, इमामों-मौलानाओं के फ़तवे-फ़रमान का सामना करना पड़ा. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि क़ानून-व्यवस्था से संचालित, संविधान-सम्मत, धर्मनिरपेक्ष देश में कुछ ताक़तवर-मज़हबी लोगों, इमामों-मौलानाओं और समुदायों को ”किसी का गला रेतने, किसी को चैराहे पर टाँगने” जैसे अवैधानिक, बल्कि आपराधिक फ़तवे-फ़रमान ज़ारी करने की खुली छूट मिली हुई है. जहाँ ऐसे फ़तवे-फ़रमान ज़ारी करने वालों के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, वहीं छद्म धर्मनिरपेक्षता की आड़ में उनके ज़हरीले बयानों, फ़तवे-फ़रमानों का बचाव किया जाता है, खुलेआम किया जाता है, अख़बारों और टेलीविज़न पर आयोजित प्राइम टाइम बहस में किया जाता है.

यदि इस्लामिक देश सऊदी अरब वर्तमान की आवश्यकता, सभ्य एवं उदार समाज की रचना-स्थापना और अपने नागरिकों के सुविधा-सुरक्षा-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मस्जिदों में ऊँची आवाज़ में बजने वाले लाउडस्पीकरों पर शर्त्तें और पाबन्दियाँ लगा सकता है तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

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July 9th 2021, 11:13 am

महिला ने पति पर धर्मांतरण गिरोह में शामिल होने का लगाया आरोप, एफआईआर दर्ज

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लखनऊ. इंदिरानगर थाने में एक महिला ने अपने पति हसनैन अशरफ और सास के खिलाफ विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है. आरोप लगाया कि हसनैन धर्मांतरण करवाने वाले गिरोह में शामिल है. महिला ने दहेज प्रताड़ना का भी आरोप लगाया है. महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि पति विदेशियों की सहायता से जबरन धर्म परिवर्तन करवाता है और कई युवतियों का धर्मांतरण करा चुका है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंदिरानगर निवासी महिला का निकाह साल 2019 में कर्नाटक निवासी सैयद हसनैन अशरफ से हुई थी, जो दरगाह खानकाहे अशरफिया हुसनिया कुतबे कर्नाटक के सज्जादानशीन हैं. महिला के अनुसार, निकाह के बाद से ही हसनैन उसे शारीरिक यातनाएं देता था. आरोपी ने कई बार दूसरे धर्म की महिलाओं से दोस्ती कर उन्हें धर्मांतरण के लिए तैयार करने का दबाव डाला था. महिला ने बताया कि इस काम में कई विदेशी भी शामिल हैं. बात नहीं मानने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी. हसनैन ने पत्नी को भी कट्टरपंथियों से मिलाते हुए जिहाद के लिए उकसाया था, लेकिन वह इस रास्ते पर जाने को तैयार नहीं हुई.

इसके अलावा पीड़िता ने बताया कि गर्भवती होने पर हसनैन ने अल्ट्रासाउंड कराया, जिससे महिला की कोख में बेटी होने की बात सामने आई. पता चलने पर हसनैन ने गर्भपात कराने का दबाव बनाया, उसने 2 लोगों को बुलाकर जबरन गर्भपात कराने की कोशिश भी की.

विरोध करने पर मारपीट करते हुए दहेज में 25 लाख रुपये लाने का दबाव डाला गया. लंदन में रहने वाले महिला के भाई से भी साढ़े सात लाख रुपये लिए गए. हसनैन ने मां के साथ मिलकर महिला को घर से निकाल दिया. मायके आने के बाद महिला ने बेटी को जन्म दिया.

इसी बीच हसनैन ने रिचा पाहवा नाम की युवती से शादी कर ली, जिसका धर्म बदलकर रिचा से मादिहा कर दिया. पीड़िता के अनुसार, अब रिचा पर भी दूसरी युवतियों को धर्मांतरण के लिए तैयार करने का दबाव डाल रहा है.

इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

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July 9th 2021, 11:13 am

सेवादूत – हम रहें या ना रहें, भारत ये रहना चाहिये

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विजयलक्ष्मी सिंह

कभी-कभी सच में मनुष्य पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ता है. भोपाल में अरेरा कॉलोनी के पॉश इलाके में किराये पर एक कमरा लेकर रहने वाली कल्पना विश्वकर्मा की कहानी भी कुछ ऐसा ही दर्द बयां करती है. एक पैर में गैंगरीन की वजह से लगभग अपाहिज हो चुकी गर्भवती कल्पना के लिए कोरोना काल अनगिनत मुसीबतें लेकर आया. एक तरफ उसके ससुर द्वारका प्रसाद विश्वकर्मा कोरोना संक्रमित होने के बाद जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहे थे, तो दूसरी तरफ ऑटो चालक पति सोनू का रोजगार लॉडाऊन ने छीन लिया था. पेट में नन्हीं-सी जान लिए कल्पना के लिए ससुर के इलाज का खर्च जुटाना मुश्किल था, वहीं वो खुद भी दाने-दाने के लिए तरस रही थी. जब उसकी ये व्यथा भोपाल में सेवा भारती की महानगर महिला संयोजिका आभा दीदी तक पहुंचीं तो मानो सेवा भारती के रूप में साक्षात ईश्वर के द्वार उसके लिए खुल गये. सेवा के लिए संकल्पित सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने कल्पना के परिवार की सारी जिम्मेदारी उठा ली. पहले उनके ससुर का इलाज करवाने के प्रयास किए, किन्तु जब वे नहीं रहे तो उनके अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक के सारे कर्तव्य निभाए. इतना ही नहीं, लॉकडाउन खत्म होने तक परिवार को राशन व गर्भवती कल्पना को समुचित आहार मिले इसकी व्यवस्था भी की.

“मैं रहूं ना रहूं, भारत ये रहना चाहिए ” मणिकर्णिका फिल्म के प्रसिद्ध गीत की ये पंक्तियां मानो संघ के स्वयंसेवकों के लिए ही लिखी गयी हैं. सीधी जिले के जिला सेवा प्रमुख आशीष जी की कहानी सुनकर तो यही लगता है.

कोरोना-काल में निरंतर सेवा के काम में लगे आशीष जी जब कोरोना पाजिटिव होने के बाद कुशाभाऊ ठाकरे हॉस्पिटल, रीवा में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे  तभी एक नर्स से उन्हें पता चला कि एक गंभीर रूप से बिमार मरीज को चंद घंटों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है, तब अपनी जिंदगी खतरे में डालकर आशीष जी ने खुद का सिलेंडर 3 घंटे के लिए उस मरीज को दे दिया एवं स्वयं कपूर के सहारे कृत्रिम सांस लेते रहे. आज आशीष जी भी सकुशल हैं और वो महिला भी जिन्हें बचाने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी.

इन दारुण कहानियों में एक कहानी ज्योति की भी थी, जिसकी 8 साल की बेटी मनीषा कैंसर से जूझ रही थी.

इंदौर की बाढ़ कॉलोनी में रहने वाली ज्योति जगह-जगह चौका-बासन कर अपना घर चलाती थी तो पति रिक्शा चालक थे. लॉकडाउन ने दोनों का ही रोजगार छीन लिया. कैंसर जैसी भयानक बीमारी से जूझ रही बच्ची जब अन्न के दाने-दाने के लिए तरसने लगी, तब ज्योति ने इंदौर सेवा भारती के हेल्पलाइन पर प्रान्त संयोजिका सुनीता दीदी को राशन की जरूरत बताई. सुनीता दीदी बताती हैं कि वे आज भी फोन पर ज्योति के करुण क्रंदन को भुला नहीं पाई हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने पूरे लॉकडाउन में इस परिवार को न सिर्फ राशन दिया, बल्कि यथासंभव हर प्रकार की मदद भी की.

मध्यक्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह अशोक अग्रवाल जी बताते हैं कि “सम्पूर्ण क्षेत्र में हर मोर्चे पर स्वयंसेवक समाज के साथ खड़े रहे. 589 हेल्पलाइन सेंटर्स ,123 आइसोलेशन केंद्र 17 कोविड केयर सेंटर के साथ, 649 जगहों पर 40,624 भोजन पैकेट बांटने जैसे कार्यों में 11077 कार्यकर्ताओं ने पूरे मनोयोग से अपना योगदान दिया.

रतलाम के पंचेड़ गांव में शत प्रतिशत वैक्सीनेशन करवाकर स्वयंसेवकों ने इतिहास रच दिया. जब उनके गांव में कोरोना से मौत का आंकड़ा 30 पार हो गया तो वर्षों से वहां चल रही शाखा से जुड़े तरूण स्वयंसेवकों ने प्रण लिया कि वे अपने गांव को कोरोना से सुरक्षित रखने के हरसंभव प्रयास स्वयं करेंगे. पहले उन्होंने गांव को सील कर दिया और किसी को भी आने-जाने से रोक दिया, जिसके कारण कोरोना की संक्रमण दर वहां शून्य हो गयी. बाद में पूरे गांव में घर- घर संपर्क कर जितने भी वैक्सीनेशन के योग्य लोग थे, सभी का वैक्सीनेशन, कैंपों में ले जाकर करवाया.

कोरोना की इस बार की लहर में बीहड़ जंगलों में भी कोरोना पहुंच गया. मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में महामारी रोकने के लिए एक नया व सफल प्रयोग किया गया. खंडवा के विभाग सेवा प्रमुख अतुल शाह जी के अनुसार वनवासी बहुल इलाकों में ना तो कोई व्यक्ति अस्पताल आने को तैयार था और ना ही कोरोना की जांच करवाने के लिए राजी. सर्दी खांसी बुखार से मौतों का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा था. ऐसे में इंदौर के प्रसिद्ध हॉस्पिटल गोकुलदास के सीनियर डॉक्टरों ने ग्रामीण डॉक्टरों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी ताकि वे गांव में ही जांच कर सकें व संगठन ने इन्हें जांच के बाद प्राथमिक इलाज के लिए दवाइयां भी उपलब्ध करवाई. इन ग्रामीण डॉक्टरों के माध्यम से गुड़ी, सिंगोट, बोरगांव, गुलाई माल, रोशनी, पटाजन, झिंझरी, गोलखेड़ा, झुम्मरखली, एवं आस पास के अन्य गांवों में 14 ओपीडी द्वारा निरंतर वनवासी इलाकों में जांच व प्राथमिक उपचार का कार्य करते हुए हजारों वनवासियों की जान बचा ली गई.

https://www.sewagatha.org/know_more_slide3.php?id=2&page=109

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July 9th 2021, 11:13 am

अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत क़ानून 1996 प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने की माँग

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नई दिल्ली. 73वें संविधान संशोधन अधिनियनम-1992 के अधीन 1996 में बने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, जिसे पेसा क़ानून भी कहा जाता है, को 25 वर्ष बीतने के बाद भी अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है. पाँचवीं अनुसूची के 10 राज्यों; महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हि.प्र; म.प्र; छ.ग; झारखंड व उड़ीसा में से आख़िरी 4 राज्यों ने तो इस क़ानून के नियम भी अभी तक नहीं बनाए हैं. इस कारण राज्य के जनजाति लोग इसके लाभ से अभी तक वंचित हैं.

वनवासी कल्याण आश्रम ने केंद्र सरकार से माँग की कि इस क़ानून के रजत जयंति वर्ष में सभी 10 राज्यों से मिलकर, उनको निर्देश देकर मिशन मोड में लागू किया जाए. कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाक्टर एचके नागू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 6 जुलाई को पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से उनके कार्यालय में मिला. चर्चा के समय केंद्रीय पंचायत सचिव सुनील कुमार भी उपस्थित रहे. शिष्टमंडल में वनवामी कल्याण आश्रम के संयुक्त महामंत्री विष्णु कांत-दिल्ली, जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर-हैदराबाद और कालूसिंह मुजाल्दा-इंदौर भी सम्मिलित थे.

क़ानून ने जनजातियों को ग्रामसभा के जरिये अपने गाँव में शासन-प्रशासन की स्वायत्तता दी है, लघु-खनिज व लघु जल-स्रोतों के प्रबंधन और उपयोग तथा लघु-वनोपजों पर मालिकाना हक़ दिया है. इस क़ानून ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का चयन, बजट के उपयोग का प्रमाणन, नशाबंदी पर रोक या उसे विनियमित करने, अपने परस्पर के छोटे झगड़े परम्परागत ढंग से निपटाने, अपनी संस्कृति के संरक्षण, साहूकारी व्यवसाय-ब्याजखोरी पर नियंत्रण, स्थानीय हाट-बाज़ारों के प्रबंधन, भूमि हस्तांतरण जैसे 29 विषयों का अधिकार निचली पंचायत – ग्राम सभाओं को दिये हैं. पर, इन राज्यों ने राजस्व गाँवों को ही पेसा गाँव घोषित कर दिया, जबकि इस क़ानून में टोला, पाडा या बस्तियों को अलग पेसा गाँव घोषित करना होता है.

ग्राम सभाओं को पंचायत कोष में से निश्चित राशि स्थानीय विकास हेतु देने का नियम है. परंतु इन्हें कोई धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जाती. कानून लागू नहीं होने से कुछ स्वार्थी तत्व इसकी आड़ में लोगों को भ्रमित कर पत्थलगढी जैसे कामों से अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं.

शिष्टमंडल ने मांग की कि केंद्र को इन 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों व राज्यपालों का अलग सम्मेलन बुलाकर इसके रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करना चाहिये. जैसी प्रतिबद्धता वन व जनजाति मंत्रालय ने गत दिनों एक संयुक्त परिपत्र जारी कर वनाधिकार क़ानून को लागू करके प्रकट की है, वैसा ही संयुक्त परिपत्र इसे लागू करने के लिये भी जारी किया जाए.

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July 9th 2021, 11:13 am

वाल्मिकी समाज के युवक की बेरहमी से पिटाई, घायल युवक की मौत

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झालावाड़. झालावाड़ के झालरापाटन में निर्ममता से पिटाई कर वाल्मिकी समाज के युवक की हत्या को लेकर पूरे प्रदेश के लोगों ने नाराजगी प्रकट की है. नामजद अभियोग दर्ज होने के बाद भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में रोष है.

शहर के हल्दीघाटी रोड पर एक जुलाई को दिनदहाड़े जानलेवा हमले में युवक कृष्णा वाल्मिकी गंभीर रूप से घायल हो गया था. कृष्णा की मंगलवार सुबह साढ़े 8 बजे जयपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई. परिवारजनों ने बताया कि मृतक कृष्णा वाल्मिकी पर एक दर्जन से अधिक युवाओं ने हत्या करने की नियत से हमला किया था. उनका कहना है कि समाज में दहशत फैलाने के उद्देश्य से आरोपियों ने मारपीट का वीडियो भी वायरल किया. हमले में गंभीर घायल कृष्णा को उपचार के लिए जिला एसआरजी अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे चिंताजनक हालत में कोटा और वहां से जयपुर रेफर कर दिया गया था. पुलिस ने मुख्य आरोपी सागर कुरैशी, रईस, इमरान, सोहेल, शाहिद और अख्तर अली को गिरफ्तार कर लिया था और सभी जेल में हैं. हालांकि हमले के कई आरोपी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं.

युवक की मौत से जिले भर में आक्रोश

वाल्मिकी समाज के युवक कृष्णा की मौत का समाचार सुनकर पूरे जिले में माहौल गरमा गया. समस्त समाज ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने मामला दर्ज कर छह युवकों को गिरफ्तार किया है. मृतक का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लोग कर रहे हैं. सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होने तक लोगों ने शांत नहीं बैठने की चेतावनी दी है.

युवक की शव यात्रा में काफी संख्या लोग एकत्रित हुए. शवयात्रा जिस रास्ते से जा रही थी, वहां खड़े लोग अपने आप ही उसके साथ होने लगे. इतनी भीड़ देखकर पुलिस प्रशासन के भी हाथ- पांव फूलने लगे. जिले में किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं होने पाए, इसके लिए झालावाड़ व झालरापाटन में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया. पुलिस बल की मौजूदगी में ही मृतक का अंतिम संस्कार किया गया. पुलिस- प्रशासन ने ड्रोन कैमरे से पूरी शव यात्रा पर नजर रखी. पुलिस द्वारा पूरे जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया था. बड़ी संख्या में भीड़ एकत्रित होने के कारण जगह- जगह शव यात्रा को रोकना पड़ा. पुलिस द्वारा मात्र 20 लोगों को ही शवयात्रा में जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन गलियों से निकल कर लोग शामिल होते गए और भीड़ बढ़ती गई.

घटना के विरोध में बाजार रहे बंद

घटना के विरोध में व्यापारियों ने स्वेच्छा से झालरापाटन और खानपुर के बाजार बंद कर रखे और शवयात्रा में शामिल हुए. कृष्णा का शव जैसे ही उसके घर पहुंचा लोग वहां पहुंचना शुरू हो गए. मृतक के घर के पास भीड़ जमा होती देख पुलिस ने जब लोगों को रोकना चाहा तो लोग आक्रोशित हो गए और वहां माहौल गर्माने लगा. जिले भर में लोगों ने आरोपियों को फांसी देने की मांग को लेकर ज्ञापन भी दिए.

भारी पुलिस बल और प्रशासन रहा तैनात

झालरापाटन में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए एसडीएम के अलावा झालावाड़, अकलेरा एवं भवानीमंडी के डीएसपी भी मौजूद रहे. इनके अलावा सात थानों के एसएचओ एवं भारी पुलिस बल जिले भर में तैनात रहा. प्रशासन ने हर गतिविधि पर ध्यान रखा जिससे किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना ना होने पाए.

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July 9th 2021, 12:28 am

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ गुंडा एक्ट लगा

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लखनऊ. करीब डेढ़ साल पहले नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वाले दंगाइयों के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है. पुलिस ने हिंसा में शामिल 67 आरोपियों पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की है. सभी को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं. प्रशासन की कार्रवाई से आरोपियों में हलचल है.

21 दिसंबर, 2019 को रामपुर में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जमकर बवाल हुआ था. एक युवक की जान चली गई थी, जबकि उपद्रवियों-दंगाइयों ने हिंसा करते हुए कई सरकारी और निजी वाहनों को जला दिया था. इस दौरान बैरीकेडिंग को भी तोड़ दिया था. साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ की गई थी. हिंसा को लेकर पुलिस ने गंज व कोतवाली में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे, जिसमें 278 लोगों के नाम सामने आए हैं. पुलिस हिंसा में शामिल करीब दो सौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. करीब साठ से ज्यादा लोग जमानत पर रिहा भी हो चुके हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस की सख्ती शुरू से ही देखने को मिली थी. हिंसा के आरोपियों से एक ओर जहां सरकारी संपत्ति के नुकसान पहुंचाने वालों से भरपाई की कार्रवाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर शिकंजा और कसा है. पुलिस ने जांच के बाद 142 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. अब 67 आरोपियों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है. शेष पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. इन सभी को डीएम और एडीएम कोर्ट से नोटिस जारी करने शुरू कर दिए गए हैं.

रामपुर के एसपी शगुन गौतम ने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हुई हिंसा के 142 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. इनमें से 67 आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है. शेष पर कार्रवाई की जा रही है.

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में डेढ़ साल पहले रामपुर में हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपियों की संपत्ति को कुर्क करने के मामलों की सुनवाई के लिए सभी मामले मेरठ स्थानांतरित हो चुके हैं. मेरठ में ट्रिब्यूनल कोर्ट गठित किया गया है, जहां पर सुनवाई होगी.

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 278 लोगों के नाम हिंसा में सामने आए थे. इनमें से कुछ नाम कॉमन हैं. इस तरह कुल 206 आरोपी हैं, जिनमें से 142 पर आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, शेष पर जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी. वहीं, इस केस में अभी कुछ आरेापी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी.

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July 9th 2021, 12:28 am

अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक चित्रकूट

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चित्रकूट (ज़िला- सतना) मध्य प्रदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक चित्रकूट में आयोजित हो रही है. प्रतिवर्ष यह बैठक सामान्यतः जुलाई माह में होती है, परंतु पिछले वर्ष चित्रकूट में ही आयोजित बैठक कोरोना की परिस्थितियों में नहीं हो पायी थी. स्वाभाविक रूप से इस वर्ष चित्रकूट में ही यह बैठक हो रही है. इस वर्ष भी कोरोना के नियमों के अनुसार संख्या को नियंत्रित करने हेतु कुछ कार्यकर्ता यहाँ प्रत्यक्ष रूप से व कुछ आभासी (ऑनलाइन) माध्यम से जुड़ रहे हैं.

दिनांक 9-10 जुलाई को 11 क्षेत्रों के ‘क्षेत्र प्रचारक’ तथा सह क्षेत्र प्रचारकों की बैठक चित्रकूट में होने जा रही है. इसमें विशेष रूप से डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले एवं सभी पाँचों सह सरकार्यवाह उपस्थित रहेंगे. साथ ही संघ के सातों कार्य विभाग के अखिल भारतीय प्रमुख व सह प्रमुख सहभागी होंगे.

दिनांक 12 को देशभर के संघ रचना के अनुसार सभी 45 प्रांतों के प्रांत प्रचारक एवं सह प्रांत प्रचारक आभासी (ऑनलाइन) माध्यम से जुड़ेंगे. 13 जुलाई को विविध संगठन के अखिल भारतीय संगठन मंत्री आभासी माध्यम से बैठक में सहभागी होंगे.

यह बैठक सामान्यतः संगठनात्मक विषयों पर केंद्रित रहेगी. साथ ही कोरोना के संक्रमण से पीड़ित लोगों की सहायता हेतु स्वयंसेवकों द्वारा किये गये देशव्यापी सेवा कार्यों की समीक्षा की जाएगी. तथा संभावित तीसरी लहर के प्रभाव का आकलन करते हुए, इस हेतु आवश्यक कार्य योजना पर विचार होगा. इस दृष्टि से आवश्यक प्रशिक्षण एवं तैयारी पर भी विचार किया जाएगा.

अनलॉक की प्रक्रिया में धीरे-धीरे सामान्य हो रहे जनजीवन को देखते हुए संघ शाखाओं के संचालन की समीक्षा तथा योजनाओं पर बैठक में चर्चा अपेक्षित है. संघ शिक्षा वर्ग तथा विभिन्न प्रकार के संघ कार्यों का आकलन करते हुए नई योजनाओं पर विचार किया जाएगा. बैठक में सरसंघचालक एवं सभी प्रमुख अधिकारीयों के प्रवास की निश्चित योजना बनायी जाती है.

सुनील आंबेकर

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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July 8th 2021, 10:09 am

आजाद, वसीम, जफ्फार ने नाबालिग को बनाया हवस का शिकार

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अलवर. राजस्थान अपनी आन, बान और शान के लिए जाना जाता था. लेकिन आज हर दिन औसतन 16 बच्चियां, युवतियां, महिलाएं दुराचार का शिकार हो रही हैं और देश भर में सर्वाधिक रेप दर 15.9 (IPC Crime 2019 की रिपोर्ट) वाले राजस्थान की पहचान रेपिस्थान के रूप में बन चुकी है. घटनाओं पर अंकुश लगाने में वर्तमान सरकार विफल साबित हो रही है. राज्य में छोटी-छोटी बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं. हालात ऐसे हैं कि घर से बाहर पांव रखना भी खतरे से खाली नहीं.

ताजा घटनाक्रम अलवर जिले के रामगढ़ का है. 29 जून की शाम एक 12 साल की नाबालिग बच्ची घर के बाहर बने बाड़े में पशुओं को चारा डालने निकली, वहां आजाद पुत्र जुबेर ने उसे पकड़ लिया और मुंह दबाकर खेत में उठा ले गया. जफ्फार व वसीम पहले से ही वहां मौजूद थे. तीनों ने उसके साथ रेप किया और घटना के बारे में किसी को बताने पर नाना व भाई को जान से मार देने की धमकी दी. इसके बाद तीनों उसे बेहोशी और लहूलुहान अवस्था में खेत में ही छोड़कर भाग गए. बच्ची किसी तरह घर पहुंची, लेकिन उसने रात में परिजनों को कुछ नहीं बताया. सुबह तक वह दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाई और परिजनों के सामने पूरा मामला खुल गया.

जानकारी में आया है कि बच्ची बहुत निर्धन परिवार से है. पिता ट्रक ड्राइवर है और मां भटिंडा में मजदूरी करती है. नाबालिग, छोटे भाई के साथ रामगढ़ में अपने नाना के पास रहती है. आरोपी दुष्कर्मी भी पीड़िता की ननिहाल के ही रहने वाले हैं. घटना का समाचार मिलने पर पिता बच्ची के पास अपनी ससुराल आया और उसने 2 जुलाई को पुलिस में मामला दर्ज कराया. तीनों आरोपियों के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत सुनवाई होगी. लेकिन आरोपी आजाद, जफ्फार व वसीम बच्ची के परिवार को धमकाकर समझौते के प्रयास में लगे हैं.

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July 8th 2021, 9:57 am

राष्ट्र प्रथम की अवधारणा का संदेश

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सिद्धार्थ शंकर गौतम

”हम समान पूर्वजों के वंशज हैं, ये विज्ञान से भी सिद्ध हो चुका है. 40 हजार साल पूर्व से हम भारत के सब लोगों का डीएनए समान है.” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी के ये उद्गार भले ही गूढ़ अर्थ लिये हों, किन्तु विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है. यह विज्ञान सम्मत तथ्य है कि भारत में रहने वाले सभी निवासियों का डीएनए समान है. इसी विज्ञान सम्मत तथ्य ने आर्य-द्रविड़ थ्योरी को भी सिरे से नकार दिया, जिसमें आर्यों को विदेशी आक्रमणकारी बताकर भारत में विभेद का षड्यंत्र होता था.

दरअसल, जिन्होंने मोहन जी के पूरे भाषण को नहीं सुना, वे सबसे अधिक प्रलाप कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘कुछ काम ऐसे हैं जो राजनीति बिगाड़ देती है. मनुष्यों को जोड़ने का काम राजनीति से होने वाला नहीं है.’ चूँकि संघ समाज में समाज के लिए कार्य करता है, अतः उनकी सोच को संघमय समाज का प्रतिबिम्ब समझना चाहिए.

महात्मा गाँधी ने भी हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए प्रयास किये, किन्तु उनके प्रयास सदा एकतरफा हो जाते थे. जिसका परिणाम नोआखली से लेकर पंजाब तक में देखा गया. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने संघ स्थापना के समय राष्ट्रीयता, भारतीयता व संघमय समाज की कल्पना की थी. उनका संघ कभी मुस्लिम विरोध को आश्रय नहीं देता था. हालांकि, अंग्रेजों की ‘बांटों और राज करो’ की नीति ने हिन्दू-मुस्लिम में भेद किया. यहाँ तक कि मुस्लिम लीग और खिलाफत आन्दोलन ने भी मुस्लिम समुदाय को भ्रमित किया, जिसका परिणाम पाकिस्तान के रूप में सबके सामने है.

श्रीगुरुजी ने कहा था, ‘भारतीयकरण का अर्थ सभी लोगों को हिंदू धर्म में परिवर्तित करना नहीं है. हम सभी को यह एहसास कराएं कि हम इस मिट्टी की संतान हैं, हमें इस धरती के प्रति अपनी निष्ठा रखनी चाहिए. हम एक ही समाज का हिस्सा हैं और हमारे पूर्वज एक ही थे. हमारी आकांक्षाएं भी समान हैं. इसी भाव को समझना ही वास्तविक अर्थों में भारतीयकरण है. भारतीयकरण का मतलब यह नहीं है कि किसी को अपना संप्रदाय त्यागने के लिए कहा जाए. हमने न तो यह कभी कहा है और न ही कहेंगे. बल्कि हमारा मानना है कि संपूर्ण मानव समाज एक ही पंथ-प्रणाली का पालन करे, यह कतई उपयुक्त नहीं.’

बालासाहब देवरस जी के कालखंड में भी मुस्लिम समुदाय को भारतीयता से जोड़ने के प्रयास हुए. सुदर्शन जी के कालखंड में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का गठन हुआ, जिसके नाम में ही ‘राष्ट्रीय’ है. अब यदि मोहन जी उसी सोच को वृहद् स्तर पर बढ़ा रहे हैं तो यह राष्ट्रहित में ही है. फिर जो गुट उनके इस वक्तव्य में राजनीति खोज रहे हैं तो वे मूर्खता का प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि हिन्दू-मुस्लिम राजनीति से दूर होते हैं; ऐसा कहकर उन्होंने तो स्वयं राजनीति को आईना दिखा दिया है.

हाल ही में सर्वे में यह तथ्य निकलकर आया है कि हिन्दुओं की भांति मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग राष्ट्र को सर्वोपरि मानता है. अपवादों को परे रखते हुए इसे ऐसे समझें कि सेना से लेकर पुलिस प्रशासन तक में मुस्लिम समुदाय की प्राथमिकता राष्ट्र व समाज हित की होती है. सर्वे के दौरान 64 प्रतिशत हिन्दुओं ने माना था कि हिन्दू होने के लिए भारतीय होना अनिवार्य है. भारतीय होना किसी बंधन या शर्त का भाग नहीं है. दरअसल, कट्टरता मुस्लिम समुदाय में अधिक है और उसी कट्टरता की प्रतिक्रियावादी स्थिति हिन्दुओं में निर्मित होती है. मुस्लिमों की इस कट्टरता को राजनीति भी खाद-पानी देती रही है. मुस्लिमों के थोकबंद वोटों के लिए राजनीतिक दलों ने सेक्युलरिज्म की तमाम सीमाओं को लांघ दिया है. जिसके प्रति-उत्तर में हिन्दू समुदाय के एक बड़े वर्ग में मुस्लिमों के प्रति नफरत व गुस्से की भावना होना स्वाभाविक है. और यह नफरत मुस्लिम होने से नहीं उनके पाकिस्तान जिंदाबाद कहने से है. उनके लव जिहाद करने से है. देश से ऊपर मजहब को मानने को लेकर है. अपने मजहब को दूसरों पर थोपने से है.

दरअसल, कुछ लोगों ने इस्लाम की अवधारणा को अपने हितों के लिए तोड़ा-मरोड़ा है. यदि कोई कुरआन का ज्ञाता हो तो दारुल उलूम देवबन्द में प्रकाशित साहित्य पढ़ने पर दोनों में अंतर समझ आएगा. पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चिन्तक स्व. मुज़फ्फर हुसैन जी ने एक बार अपने मुंबई स्थित निवास पर चर्चा करते हुए मुझसे कहा था कि चूँकि मैं मुस्लिम समुदाय को कुरआन, दीन और ईमान के अनुसार चलना सिखाता हूँ. अतः मेरे निवास पर सैकड़ों मौलवी समर्थक मुस्लिम हमले कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि एक बार रात के हमले में उनके घर में आग भी लगा दी गई थी. अब आप समझ सकते हैं कि एक मुस्लिम भी यदि मुस्लिम समुदाय में व्याप्त कठमुल्लेपन का विरोध करे तो उसके प्रति कैसा व्यवहार अपनाया जाता है? देखा जाए तो मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग की यही कट्टरता उसे राष्ट्र की मुख्यधारा से अलग-थलग करती है. परिवर्तन सृष्टि का नियम है और यह भी सत्य है कि जो जड़ होता है, उसका विकास नहीं हो सकता. हिन्दुओं ने अपने आप को इस जड़ता से बाहर निकाला है. सैकड़ों जाति, उपजाति, वर्ण इत्यादि के बाद भी आज यदि हिन्दू सहिष्णु हैं तो उसका कारण जड़ता का न होना है, जबकि मुस्लिम समुदाय में मुल्ले-मौलवी इसी जड़ता का लाभ उठाकर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं. वैसे भी झूठे आख्यानों की बुनियाद पर मुस्लिम समाज का भला तो नहीं ही हो सकता है.

मोहन भागवत जी ने अपनी ओर से अद्भुत प्रयास किया है एकता और सामंजस्य का. डीएनए हमारा एक है, किन्तु अब यह मुस्लिम समुदाय को तय करना है कि उनकी सोच क्या है? क्या वे अब भी अरब, तुर्की के इस्लाम को मानेंगे जो उन्हें दोयम दर्जे का मानता है या स्वयं में भारतीयता के अनुसार बदलाव लाकर सामाजिक सद्भाव की मिसाल पेश करेंगे? यह वर्गों को तय करना है कि वे किस रूप में भविष्य में याद रखे जाएंगे. मुस्लिम समाज यदि कट्टरपन से बाहर निकल आए और राष्ट्रीयता को खुलेमन से स्वीकार करे तो उनके नाम पर चलने वाली राजनीतिक दुकानदारी भी बंद होगी और भारत पुनः विश्व गुरू के रूप में स्थापित हो सकेगा. राष्ट्र प्रथम-भारतीयता प्रथम की अवधारणा का यह खुले मन से बड़ा प्रयास है, जिसकी सराहना होनी चाहिए.

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July 8th 2021, 9:57 am

केंद्र में सहकारिता मंत्रालय के गठन पर सहकार भारती ने जताया आभार

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नई दिल्ली. सहकार भारती द्वारा सहकारिता क्षेत्र के समग्र विकास हेतु केंद्र में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय बनाने की मांग पिछले लंबे समय से की जा रही थी. स चिरप्रतीक्षित मांग को पूरा करने के लिए सहकार भारती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन करती है.

सहकार भारती के अखिल भारतीय महामंत्री डॉ. उदय जोशी ने कहा कि सहकार भारती की 27-28 फरवरी, 2021 को राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक दिल्ली में सम्पन्न हुई थी. बैठक में केंद्र सहकारिता मंत्रालय के गठन करने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था. सहकार भारती का यह मानना रहा है कि, समाज का स्थायी विकास करने की सर्वाधिक क्षमता सहकारिता क्षेत्र में ही है. समाज के दलित / शोषित / असमर्थ /निर्धन / दुर्बल समाज घटकों का स्थाई आर्थिक विकास करने का सहकारिता एक मात्र साधन है. सहकारिता इन वर्गों के विकास का अलग प्रकार के स्वामित्व वाला मॉडल है.

97वें संविधान संशोधन द्वारा सहकारिता क्षेत्र में संस्था गठन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त हुआ है. इससे सभी क्षेत्रों में सहकारिता के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ. अतः स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की आवश्यकता अनिवार्यतः बनी है. “सहकारिता से समृद्धि की ओर” की केंद्र सरकार की सोच / दृष्टि का सहकार भारती खुले दिल से स्वागत करती है. सहकार भारती का पूर्ण विशवास है कि सहकारिता के लिए स्वतंत्र मंत्रालय गठित होने से, सहकारिता क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होगा और सहकारिता क्षेत्र देश में और अधिक समृद्ध होगा.

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July 8th 2021, 9:57 am

गिलोय को लीवर की खराबी से जोड़ना भ्रामक, गिलोय लीवर-धमनियों को सुरक्षित करने में सक्षम – आयुष मंत्रा

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नई दिल्ली. जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरीमेंटल हेपेटॉलॉजी में गिलोय को लेकर प्रकाशित एक अध्ययन के आधार पर उसे नुकसानदायक साबित करने के प्रयास शुरू हुए हैं. मीडिया व सोशल मीडिया में इसे आधार बनाकर समाचार प्रकाशित किए जा रहे हैं.

आयुष मंत्रालय ने गिलोय को लेकर किए जा रहे प्रचार को भ्रामक बताया है. मंत्रालय ने कहा कि उपरोक्त मामलों का सिलसिलेवार तरीके से आवश्यक विश्लेषण करने में लेखकों का अध्ययन नाकाम रहा है. इसके अलावा, गिलोय या टीसी को लीवर खराब होने से जोड़ना भी भ्रामक और भारत में पारंपरिक औषधि प्रणाली के लिये खतरनाक है, क्योंकि आयुर्वेद में गिलोय का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है. तमाम तरह के विकारों को दूर करने में टीसी बहुत कारगर साबित हो चुकी है.

यह अध्ययन इंडियन नेशनल एसोसिएशन फॉर दी स्टडी ऑफ दी लीवर (आईएनएएसएल) की समीक्षा पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि टिनोसपोरा कॉर्डीफोलिया (टीसी), जिसे आम भाषा में गिलोय या गुडुची कहा जाता है, उसके इस्तेमाल से मुम्बई में छह मरीजों का लीवर फेल हो गया था.

आयुष मंत्रालय की ओर से कहा गया कि अध्ययन का विश्लेषण करने के बाद, यह भी पता चला कि अध्ययन के लेखकों ने उस जड़ी के घटकों का विश्लेषण नहीं किया, जिसे मरीजों ने लिया था. यह जिम्मेदारी लेखकों की है कि वे यह सुनिश्चित करते कि मरीजों ने जो जड़ी खाई थी, वह टीसी ही थी या कोई और जड़ी. ठोस नतीजे पर पहुंचने के लिये लेखकों को वनस्पति वैज्ञानिक की राय लेनी चाहिये थी या कम से कम किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिये था.

ऐसे कई अध्ययन हैं, जो बताते हैं कि अगर जड़ी-बूटियों की सही पहचान नहीं की गई, तो उसके हानिकारक नतीजे निकल सकते हैं. टिनोसपोरा कॉर्डीफोलिया से मिलती-जुलती एक जड़ी टिनोसपोरा क्रिस्पा है, जिसका लीवर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. लिहाजा, गिलोय जैसी जड़ी पर जहरीला होने का ठप्पा लगाने से पहले लेखकों को मानक दिशा-निर्देशों के तहत उक्त पौधे की सही पहचान करनी चाहिये थी, जो उन्होंने नहीं की. इसके अलावा, अध्ययन में भी कई गलतियां हैं. यह बिलकुल स्पष्ट नहीं किया गया है कि मरीजों ने कितनी खुराक ली या उन लोगों ने यह जड़ी किसी और दवा के साथ ली थी क्या. अध्ययन में मरीजों के पुराने या मौजूदा मेडिकल रिकॉर्ड पर भी गौर नहीं किया गया है.

अधूरी जानकारी के आधार कुछ भी प्रकाशित करने से गलतफहमियां पैदा होती हैं और आयुर्वेद की युगों पुरानी परंपरा बदनाम होती है. यह कहना बिलकुल मुनासिब होगा कि ऐसे तमाम वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं, जिनसे साबित होता है कि टीसी या गिलोय लीवर, धमनियों आदि को सुरक्षित करने में सक्षम है.

उल्लेखनीय है कि इंटरनेट पर मात्र ‘गुडुची एंड सेफ्टी’ टाइप किया जाये, तो कम से कम 169 अध्ययनों का हवाला सामने आ जाएगा. इसी तरह टी. कॉर्डफोलिया और उसके असर के बारे में खोज की जाए तो 871 जवाब सामने आ जाएंगे. गिलोय और उसके सुरक्षित इस्तेमाल पर अन्य सैकड़ों अध्ययन भी मौजूद हैं. आयुर्वेद में सबसे ज्यादा लिखी जाने वाली औषधि गिलोय ही है. गिलोय में लीवर की सुरक्षा के तमाम गुण मौजूद हैं और इस संबंध में उसके सेवन तथा उसके प्रभाव के स्थापित मानक मौजूद हैं. किसी भी क्लीनिकल अध्ययन या फार्मा को-विजिलेंस द्वारा किये जाने वाले परीक्षण में उसका विपरीत असर नहीं मिला है.

अखबार में छपे लेख का आधार सीमित और भ्रामक अध्ययन है. इसमें तमाम समीक्षाओं, प्रामाणिक अध्ययनों पर ध्यान नहीं दिया गया है, जिनसे पता चलता है कि टी. कॉर्डीफोलिया कितनी असरदार है. लेख में न तो किसी प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह ली गई है और न आयुष मंत्रालय की.

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July 8th 2021, 9:57 am

वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण की नीति – नियमों के विरुद्ध जल स्रोत की भूमि मदरसे के लिए आवंटित

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जोधपुर. राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण की राह पर चल रही है. यह सरकार के निर्णयों से स्पष्ट दिख रहा है. मजहबी शिक्षा देने वाले मदरसों को सरकारी पैसे पर फलने फूलने का अवसर देने के लिए मदरसा बोर्ड के गठन के बाद अब मनमाने तरीके से उन्हें जल स्रोतों की जमीन भी आवंटित की जा रही है. सरकार के निर्णय के विरोध में विभिन्न संगठनों ने आवाज उठाना प्रारंभ कर दिया है.

ताजा मामला जोधपुर तहसील के राजवा गांव का है. गांव के खसरा नंबर 225, रकबा 470.16 बीघा में गैर मुमकिन पहाड़ स्थित है, जो राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत प्रतिबंधित भूमि है, जिसका किसी प्रयोजन के लिए आवंटन नहीं किया जा सकता. खसरा नंबर 225 एवं 227 की भूमि खसरा नंबर 228 में स्थित गैर मुमकिन तालाब के कैचमेंट एरिया में आते हैं और तालाब में पानी की आवक का एकमात्र स्रोत है.

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित निर्णय जगपाल सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब व उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय श्री गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान राज्य के निर्देशानुसार प्राकृतिक जल स्रोत, कैचमेंट एवं पहाड़ी क्षेत्र की भूमि किसी भी प्रकार से आवंटन के योग्य नहीं है. लेकिन सरकार ने 9 अप्रैल, 2021 को एक बैठक में प्रस्ताव संख्या 5 द्वारा खसरा संख्या 225 ग्राम राजवा की भूमि इस्लामिक मदरसा दारुल उलूम फलाहे दारेन को आवंटित करने की अनुशंषा की जो पूर्णतया गैर कानूनी है.

जानकारी सामने आने के बाद विश्व हिन्दू परिषद सहित 25 से अधिक संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन देकर जमीन आवंटन का विरोध किया है. पोपावास के सरपंच रामचंद्र चौधरी का कहना है कि सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण करने से बाज नहीं आ रही. नियमों के विरुद्ध जमीन आवंटन गलत है. इससे सभी ग्रामीणों में आक्रोश है. यदि समय रहते सरकार ने यह आवंटन रद्द नहीं किया तो आसपास के गांव के लोग मिलकर आंदोलन करेंगे.

पूनिया की प्याऊ सरपंच राजकुमार ने बताया कि इस जमीन से तालाबों में पानी आता है. ये तालाब जमीन के जल स्तर को नीचे नहीं जाने देते और न जाने कितने पक्षियों और पशुओं की प्यास बुझाते हैं. पास में गांव के ऐतिहासिक पाबूजी महाराज का पवित्र स्थान है. इस तरह असंवैधानिक रूप से जमीन आवंटन का हम सब ग्रामवासी विरोध करते हैं.

आवंटन के विरोध में 10 से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य शासन एवं नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को ज्ञापन सौंपे, जिनमें कहा गया कि जेडीए द्वारा जिस संस्था को भूमि आवंटित की जा रही है, वह संस्था अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के अनुसार शिक्षण संस्था की श्रेणी के अंतर्गत नहीं आती है. उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय राजस्थान निजी शिक्षण संस्था बनाम भारत संघ के अनुसार मदरसा शिक्षण संस्था नहीं है. मदरसा का प्रयोजन इस्लाम की शिक्षा देने मात्र से है, इसलिए ऐसे मजहबी संस्थानों को शिक्षण संस्था के लिए भूमि आवंटित किया जाना कतई स्वीकार्य नहीं है. यदि यह आवंटन निरस्त नहीं किया जाता है तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा एवं जन आक्रोश के परिणाम सरकार को भुगतने होंगे.

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July 8th 2021, 9:57 am

केंद्र सरकार में महिला शक्ति पर विश्वास, 7 महिला राज्य मंत्रियों ने ली शपथ, केंद्रीय मंत्रीमंडल में

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नई दिल्ली. सबकी सरकार — वर्ष 2019 में सत्ता में वापसी के पश्चात नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बने मंत्रीमंडल व सरकार की योजनाओं में भी इसकी झलक देखने को मिलती है. वहीं, बुधवार शाम को हुए मंत्रीमंडल विस्तार के पश्चात केंद्र सरकार में महिलाओं की भूमिका व संख्या दोनों में बढ़ोतरी हुई है. मंत्रीमंडल विस्तार में अनुभव, युवा, प्रोफेशनल्स सहित समस्त वर्गों का प्रतिनिधित्व देखने को मिला है.

बुधवार शाम को 43 नए मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की, उनमें 7 महिलाएं भी शामिल रहीं. सात महिला सांसदों ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की. महिला शक्ति की बात करें तो केंद्रीय मंत्रीमंडल में महिला मंत्रियों की कुल संख्या 11 हो गई है. इनमें 2 कैबिनेट मंत्री पहले से ही शामिल हैं, जिनमें निर्मला सीतारमण वित्त मंत्रालय संभाल रही हैं और समृति ईरानी भी कैबिनेट मंत्री हैं. साध्वी निरंजन ज्योति और रेणुका सिंह पहले से ही राज्य मंत्री के रूप में शामिल हैं. बुधवार को शपथ लेने वाली 7 महिला मंत्रियों में अनुप्रिया पटेल, मीनाक्षी लेखी, अन्नपूर्णा देवी, दर्शना विक्रम जरदोश, शोभा करंदलाजे, प्रतिमा भौमिक और डॉ. भारती पवार शामिल हैं.

पूर्वोत्तर को महिला प्रतिनिधित्व – पश्चिम त्रिपुरा की सांसद प्रतिमा भौमिक ने केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली. 52 वर्षीय प्रतिमा भौमिक 2019 में पश्चिम त्रिपुरा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुनी गईं. प्रतिमा भौमिक लोकसभा सदस्य सलाहकार समिति की सदस्य भी हैं.

जनजाति समाज से महिला मंत्री – महाराष्ट्र के डिंडोरी क्षेत्र से सांसद डॉ. भारती पवार को भी कौबिनेट में स्थान दिया गया है. डॉ. भारती जनजाति समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं. पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंची हैं. सार्वजनिक जीवन में आने से पहले डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रही थीं. उनके पास एमबीबीएस की डिग्री है.

अनुप्रिया पटेल – मिर्जापुर विध्यांचल क्षेत्र से अपना दल की अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में जगह मिली, जो ओबीसी वर्ग से आती हैं. करीब 40 वर्षीय पटेल यूपी के मिर्जापुर से सांसद हैं. 2014 में बनी मोदी सरकार में भी अनुप्रिया को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया गया था.

मीनाक्षी लेखी – नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद मीनाक्षी लेखी को कैबिनेट में शामिल किया गया है. पेशे से अधिवक्ता मीनाक्षी लेखी पार्टी और सरकार का पक्ष संसद से लेकर समाचार चैनलों तक मजबूती से रखती रही हैं. 54 वर्षीय लेखी को मंत्रीमंडल में शामिल कर एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. मीनाक्षी लेखी ने 2014 में नई दिल्ली सीट से कांग्रेस के अजय माकन को हराया था.

पहली बार सांसद बनीं अन्‍नपूर्णा देवी – झारखंड से बीजेपी की सांसद अन्‍नपूर्णा देवी को भी मंत्रीमंडल में स्थान मिला है. अन्‍नपूर्णा देवी को केंद्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया है. सांसद के रूप में उनका यह पहला कार्यकाल है. वह झारखंड और बिहार से 4 बार विधायक भी रह चुकी हैं. उन्होंने झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया है. अन्‍नपूर्णा देवी सिंचाई, महिला एवं बाल कल्याण जैसे विभागों की मंत्री रह चुकी हैं.

दर्शन विक्रम जरदोश – गुजरात के सूरत से लोकसभा सांसद हैं. वह लगातार तीसरी बार संसद पहुंची हैं. सांसद के रूप में यह उनका तीसरा कार्यकाल है. दर्शन विक्रम जरदोश सूरत नगर निगम की पार्षद भी रह चुकी हैं और गुजरात समाज कल्याण बोर्ड की सदस्य भी. जरदोश को भी केंद्र में राज्य मंत्री का जिम्मा सौंपा गया है.

शोभा करंदलाजे – शोभा करंदलाजे कर्नाटक बीजेपी की दिग्गज नेता मानी जाती हैं. शोभा ने अपना राजनीतिक जीवन 1994 में शुरू किया था. शोभा करंदलाजे को 2004 में एमएलसी बनाया गया था. इसके बाद 2008 में यशवंतपुर (बेंगलुरु) से विधायक चुनी गईं. भाजपा सरकार में उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया. इसके बाद साल 2014 में सांसद बनी. 2019 में पुनः लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंची.

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July 8th 2021, 2:13 am

08 जुलाई / इतिहास स्मृति – टाइगर हिल पर फहराया तिरंगा

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नई दिल्ली. पाकिस्तान अपनी मजहबी मान्यताओं के कारण जन्म के पहले दिन से ही भारत विरोध का मार्ग अपनाया है. जब भी उसने भारत पर हमला किया, उसे मुंह की खानी पड़ी. ऐसा ही एक प्रयास उसने 1999 में किया, जिसे ‘कारगिल युद्ध’ कहा जाता है. भारतीय सेना ने पाक सेना को बुरी तरह से धूल चटाई थी, टाइगर हिल की जीत युद्ध का एक महत्वपूर्ण अध्याय है.

सियाचिन भारत की सर्वाधिक ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है. चारों ओर बर्फ ही बर्फ होने के कारण यहां भयानक सर्दी पड़ती है. शीतकाल में तो तापमान पचास डिग्री तक नीचे गिर जाता है. उन चोटियों की सुरक्षा करना कठिन ही नहीं, बहुत खर्चीला भी है. इसलिए दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी थी कि गर्मियों में सैनिक यहां रहेंगे, लेकिन सर्दी में वे वापस चले जायेंगे. वर्ष 1971 के बाद से यह व्यवस्था ठीक से चल रही थी.

पर, वर्ष 1999 की गर्मी में जब हमारे सैनिक वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में सामरिक महत्व की अनेक चोटियों पर कब्जा कर बंकर बना लिये हैं. पहले तो बातचीत से उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया, पर जनरल मुशर्रफ कुछ सुनने को तैयार नहीं थे. अतः जब सीधी उंगली से घी नहीं निकला, तो फिर युद्ध ही एकमात्र उपाय था. तीन जुलाई की शाम को खराब मौसम और अंधेरे में 18 ग्रेनेडियर्स के चार दलों ने टाइगर हिल पर चढ़ना प्रारम्भ किया. पीछे से तोप और मोर्टार से गोले दागकर उनका सहयोग किया जा रहा था. एक दल ने रात को डेढ़ बजे उसके एक भाग पर कब्जा कर लिया.

कैप्टेन सचिन निम्बालकर के नेतृत्व में दूसरा दल खड़ी चढ़ाई पर पर्वतारोही उपकरणों का प्रयोग कर अगले दिन सुबह पहुंच पाया. तीसरे दल का नेतृत्व लेफ्टिनेण्ट बलवान सिंह कर रहे थे. इसमें कमाण्डो सैनिक थे, उन्होंने पाक सैनिकों को पकड़कर भून डाला. चौथे दल के ग्रेनेडियर योगेन्द्र यादव व उनके साथियों ने भी साहस दिखाकर दुश्मनों को खदेड़ दिया. इस प्रकार पहले चरण का काम पूरा हुआ.

अब आठ माउण्टेन डिवीजन को शत्रु की आपूर्ति रोकने को कहा गया, क्योंकि इसके बिना पूरी चोटी को खाली कराना सम्भव नहीं था. मोहिन्दर पुरी और एमपीएस बाजवा के नेतृत्व में सैनिकों ने यह काम कर दिखाया. सिख बटालियन के मेजर रविन्द्र सिंह, लेफ्टिनेण्ट सहरावत और सूबेदार निर्मल सिंह के नेतृत्व में सैनिकों ने पश्चिमी भाग पर कब्जा कर लिया. इससे शत्रु द्वारा दोबारा चोटी पर आने का खतरा टल गया.

इसके बाद भी युद्ध पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ था. यद्यपि दोनों ओर के सैनिक हताहत हो चुके थे. सूबेदार कर्नल सिंह और राइफलमैन सतपाल सिंह चोटी के दूसरी ओर एक बहुत खतरनाक ढाल पर तैनात थे. उन्होंने पाक सेना के कर्नल शेरखान को मार गिराया. इससे पाकिस्तानी सैनिकों की बची हिम्मत भी टूट गयी और वे वहां से भागने लगे.

तीन जुलाई को शुरू हुआ यह संघर्ष पांच दिन तक चला. अन्ततः 2,200 मीटर लम्बे और 1,000 मीटर चौड़े क्षेत्र में फैले टाइगर हिल पर पूरी तरह भारत का कब्जा हो गया. केवल भारतीय सैनिक ही नहीं, तो पूरा देश समाचार को सुनकर प्रसन्नता से झूम उठा. आठ जुलाई को सैनिकों ने विधिवत तिरंगा झण्डा वहां फहरा दिया. इस प्रकार करगिल युद्ध की सबसे कठिन चोटी को जीतने का अभियान पूरा हुआ.

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July 7th 2021, 7:27 pm

अलवर – राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त युवक गिरफ्तार

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अलवर. राजस्थान के अलवर में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त युवक को तिजारा से पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार तिजारा के बैंगनहेडी गांव में पुलिस की स्पेशल टीम द्वारा 30 वर्षीय युवक असरूद्दीन को पकड़ा है. जो टेलीग्राम पर इस्लामिक मीडिया ग्रुप बनाकर आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद, अलकायदा एवं आईएसआई की नीतियों को प्रसारित करने का काम किया करता था. पुलिस ने बताया कि उसका ध्येय दूसरे लोगों को भी आतंकी संगठनों की नीतियों से प्रभावित करना और उन आतंकी संगठनों से जोड़ना रहता था. युवक के पास पाकिस्तान, ईरान एवं बर्मा सहित अन्य देशों के नंबर भी मिले हैं. पुलिस युवक के बाहरी देशों में संपर्क खंगालने को लेकर जांच कर रही है.

एएसपी सिद्धांत शर्मा ने बताया कि भिवाड़ी व जयपुर की स्पेशल टीम ने बैंगनहेड़ी गांव में दबिश देकर युवक को गिरफ्तार किया. युवक असरुद्दीन टेलीग्राम व वाट्सअप ग्रुप बनाकर देश विरोधी एक्टिविटी के जरिए दूसरे लोगों का ब्रेन वॉश करने का काम कर रहा था. आंतकी संगठनों के विचारों को अपने ग्रुप में साझा करता था. प्रभावित कर दूसरे लोगों को देश विरोधी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रहा था. उन्होंने बताया कि युवक देश की एकता अखण्डता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने को लेकर लोगों को दुष्प्रेरित कर रहा था. युवक पहले महाराष्ट्र जमात में गया, वहीं से कश्मीर के कुछ लोगों के सम्पर्क में आया. जिनके विचारों से प्रभावित होकर सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ने लगा. इसी के बाद वह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर आतंकी संगठनों के विचारों को ग्रुप में डालकर दूसरे लोगों का ब्रेन वाश करने का काम कर रहा था.

इस मामले में भिवाड़ी पुलिस गहनता से जांच करने में जुटी हुई है. ग्रुप के अन्य मैंबर व उनके जरिए साझा किए गए पोस्ट सहित अन्य जानकारी जुटाने में लगी है. उनके अन्य लोगों से सम्पर्क का भी पता लगाया जा रहा है. ताकि एंटी नेशनल एक्टिविटी में शामिल होने की पुष्टि हो सके.

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July 7th 2021, 10:57 am

जनजाति समाज को वनों पर अधिकार देने हेतु केंद्र सरकार की पहल

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जनजाति एवं वन मंत्रालय की संयुक्त गाइडलाइन जारी, अब ग्राम सभा को मिलेंगे प्रबंधन के अधिकार.

नई दिल्ली. केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा एवं केंद्रीय वन-पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जनजाति समाज को वनों पर अधिकार देने की घोषणा करते हुए, दोनों मंत्रालयों के प्रमुख सचिवों के हस्ताक्षर द्वारा एक संयुक्त पत्रक जारी किया. इसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि, वन अधिकार कानून के तहत सामुदायिक वन संसाधनों का अधिकार ग्राम सभा को दिया जाए. वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति समाज यह मांग कई वर्षों से कर रहा है. केंद्र सरकार के निमंत्रण पर दिल्ली पहुंचे कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. एच के नागू – हैदराबाद, जनजाति हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर, देवगिरी-महाराष्ट्र के प्रदेशाध्यक्ष चेतरामजी पवार व गुजरात, छत्तीसगढ़, म.प्र; झारखंड व असम के जनजाति सामाजिक नेता इस महत्वपूर्ण समारोह के साक्षी रहे.

विलम्ब से ही सही पर सही दिशा में पहल के लिए अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम केंद्र सरकार विशेषकर वन एवं पर्यावरण मंत्री  प्रकाश जावड़ेकर और जनजाति कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा का अभिनंदन करता है. आशा है आगे भी समय-समय पर किसी राज्य में इसके क्रियान्वयन के स्तर पर कोई समस्या निर्माण होती है तो दोनों मंत्रालय इसी तरह संयुक्त पत्रों के माध्यम से उस समस्या का समाधान करेंगे.

कुछ ही माह पूर्व अर्जुन मुंडा ने ट्वीट किया था कि वन पर्यावरण मंत्रालय के साथ मिलकर आगामी दो वर्षों में सामुदायिक वनों पर अधिकार देने का कार्य एक अभियान चलाकर पूरा करेंगे. आज की कार्रवाई इस संकल्प को पूरा करने की तरफ पहला कदम है.

कानून का क्रियान्वयन करने का कार्य जनजाति विभाग का है, जो इसका नोडल विभाग है. केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में उचित मार्गदर्शक बिंदु भेजे हैं. किंतु अनेक राज्यों में जनजाति मंत्रालय के साथ वन मंत्रालय का तालमेल नहीं होने के कारण जनजाति समाज आज भी वन संसाधनों से वंचित है. इस वन अधिकार कानून-2006 के लागू होने के बावजूद वन विभाग के अलग-अलग नियम और कानून होने के कारण, राज्यों की फोरेस्ट ब्यूरोक्रेसी द्वारा कानून की मनमानी व्याख्या के कारण अनेक राज्यों ने जनजाति समाज को अपने परंपरागत वन क्षेत्र के पुनर्निर्माण, संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के अधिकारों से वंचित रखा. इसी कारण 2007 से अब तक इस सामुदायिक वन अधिकार का क्रियान्वयन 10% भी नहीं हुआ है.

महाराष्ट्र और उड़ीसा जैसे कुछ राज्यों ने इस सामुदायिक वन अधिकार – CFRR (Community Forest Resource Right) को देते हुए ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन क्षेत्र की सूक्ष्म कार्य योजना बनाने हेतु वित्तीय सहयोग प्रदान किया है. महाराष्ट्र में ग्राम सभाओं को सक्षम करते हुए सामुदायिक वन प्रबंधन का एक डिप्लोमा कोर्स भी प्रारंभ किया है. उड़ीसा एवं महाराष्ट्र में जिला स्तरीय कनवर्जेंस कमेटी स्थापित करते हुए सामुदायिक वन क्षेत्र के पुनर्निर्माण एवं संवर्धन हेतु ग्राम सभा को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग देना शुरू किया है. आज की पहल से देश के अन्य राज्यों में भी अब यह सामुदायिक अधिकार देने का कार्य गति पकड़ेगा.

वनवासी कल्याण आश्रम देश के सम्पूर्ण जनजाति समाज को, विशेषतः जनजाति समाज के जन प्रतिनिधियों, सामाजिक नेताओं और जनजाति समाज के शिक्षित युवाओं से आवाहन करता है कि, वन क्षेत्र पर निर्भर जनजाति समाज के गांव, टोला, पाडा, बस्ती को इकट्ठे लाएं, उनकी ग्राम सभाओं के जरिये इस कानून के तहत सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार प्राप्त करने हेतु उचित प्रक्रिया से आवेदन करवाएं. गांवों में जनजागरण और उन्हें संगठित कर वन संसाधनों का पुनर्निर्माण-संवर्धन करते हुए वनों की रक्षा करें. इससे वन पर्यावरण एवं जैव विविधता की रक्षा होगी, ग्रामीण जनजातियों को उपलब्ध स्थानीय आजीविका भी सुरक्षित होगी, जिससे पलायन भी रोका जा सकेगा.

हम सभी राज्य सरकारों का भी आह्वान करते हैं कि आज की इस संयुक्त गाइडलाइन के अनुसार राज्योंमें भी वन एवं जनजाति विभाग मिलकर इस सामुदायिक वन संसाधनों के अधिकारों को राज्य के प्रत्येक गाँव तक – ग्रामसभा तक पहुंचाए. ग्राम सभा को मजबूत बनाते हुए उन्हें तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग दें ताकि देश के सम्पूर्ण जनजाति समाज को स्वावलंबी एवं स्वाभिमानी बनाया जा सके.

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July 7th 2021, 10:57 am

विहिप ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, जेहादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए निर्देश देने की मांग

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पटना. बिहार में बढ़ रहे जेहादी आक्रमण, बम विस्फोट की घटनाओं पर सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई करने की मांग को लेकर विश्व हिन्दू परिषद, दक्षिण बिहार के पदाधिकारियों ने बिहार के राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन दिया और शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया. विहिप प्रतिनिधिमण्डल में केशव राजू जी, क्षेत्र संगठन मंत्री, पद्मश्री डॉ. आर एन सिंह जी, केंद्रीय उपाध्यक्ष, परशुराम जी, प्रांत मंत्री, अशोक श्रीवास्तव, क्षेत्र विशेष सम्पर्क प्रमुख एवं संजय कुमार, कोषाध्यक्ष, विहिप – सह – मंत्री, बिरसा सेवा प्रकल्प शामिल रहे.

महामहिम का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बताया कि बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में हिन्दुओं पर जेहादी आक्रमण बढ़ रहे हैं. कहीं पर लव जेहाद में हिन्दू लड़कियों को जबरन उठाया जा रहा है तो कहीं धर्मांतरण कराया जा रहा है, कहीं मंदिरों में मूर्ति तोड़ी जा रही है तो कहीं हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठान और पारिवारिक उत्सवों पर भी इस्लामिक आक्रमण हो रहे हैं. बिहार में जगह जगह बम विस्फोट हो चुके हैं. और पुलिस प्रशासन इस्लामिक गतिविधियों के सामने बौना नजर आ रहा है या यूँ कहे कि जेहादियो के सामने घुटने टेक रहा है. लव जेहाद, गौ हत्या और हिन्दुओं पर आक्रमण के विरूद्ध यदि कहीं एफआईआर हुई भी है तो पुलिस एक्शन में नहीं आ रही है, अधिकांश जगह एफआईआर तक नहबीं हुई है.

दरभंगा रेलवे स्टेशन, बांका के मदरसा में बम विस्फोट, अररिया में बम विस्फोट, ये सब इस्लामिक आतंकवाद का ही हिस्सा हैं. आज बिहार का संपूर्ण सीमांचल क्षेत्र इस्लामिक आतंकवादियों के निशाने पर है. किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, भागलपुर, मोतिहारी का ढाका प्रखंड, बेतिया, बगहा सहित बिहार के अनेक जिले खासकर भारत नेपाल और बंगलादेश से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रतिदिन लव जेहाद, धर्मांतरण, गौ हत्या, मठ मंदिरों पर आक्रमण, हिंदुओं के धार्मिक अनुष्ठानों पर हमले हो रहे हैं. लव जेहाद के मामलों में पुलिस अभियुक्त को पकड़ने और लड़की को बरामद करने में रूचि नहीं दिखा पा रही है, जिस कारण जेहादियों का मनोबल काफी ऊंचा है.

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हिन्दू समाज अपने को असहाय महसूस कर रहा है और वो ऐसे क्षेत्रों से पलायन करने को मजबूर हो रहा है. कहीं ऐसे राष्ट्र विरोधी कार्यों के खिलाफ खड़ा होते हैं तो उन पर पुलिस द्वारा झूठे मुकदमे कर उन्हें तबाह किया जाता है. पूर्णिया के वायसी और मोतिहारी के ढाका प्रखंड की घटना ज्वलंत उदाहरण है कि अनुसूचित जातृजनजाति समाज निशाने पर है.

विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में रोहिंग्या, बंगलादेशी घुसपैठियों और पी.एफ.आइ. जैसे आतंकी संगठनों के कारण इस प्रकार की घटनाएं घट रही हैं और स्थानीय जेहादी मानसिकता के लोग साथ दे रहे हैं. यदि इस प्रकार की घटनाओं पर सरकार और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संज्ञान लेकर अविलंब रोक नहीं लगाया गया तो बिहार की स्थिति भी पश्चिम बंगाल और कश्मीर जैसी हो जाएगी.

प्रतिनिधिमंडल ने बम विस्फोट की घटनाओं की जांच एनआईए से कराने, अनुसूचित जाति के लोगों पर हो रहे अत्याचार की जांच के लिए राज्य स्तरीय आयोग का गठन, लव जेहाद और धर्मांतरण के विरुद्ध गुजरात जैसा कठोर कानून बनाने तथा हिंदुओं पर दर्ज फर्जी केस वापस लेने के निर्देश देने की मांग राज्यपाल से की.

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July 7th 2021, 10:57 am

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी पर लगाया पांच लाख का जुर्माना

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कोलकत्ता. कलकत्ता उच्च न्यायालय से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

न्यायालय ने कहा कि ममता बनर्जी के बयान ने न्यायालय को बदनाम किया है. ममता बनर्जी ने न्यायमूर्ति कौशिक चंदा के भाजपा के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर टिप्पणी करते हुए मामले से अलग होने की मांग की थी. न्यायालय ने कहा कि ममता बनर्जी से जुर्माने के रूप में प्राप्त राशि को कोरोना काल में जान गंवाने वाले वकीलों के परिवार को वितरित किया जाएगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कौशिक चंदा नंदीग्राम विधानसभा सीट से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई से अलग हो गए. अब ये मामला किस कोर्ट में जाएगा, इसका फैसला उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश करेंगे.

ममता बनर्जी के वकील का दावा था कि जस्टिस कौशिक चंदा को अक्सर भाजपा के नेताओं के साथ देखा गया था. हालांकि, जस्टिस कौशिक चंदा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.

क्या है पूरा मामला?

दो मई को चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे. इस दौरान ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी से 1956 मतदानों से हार गई थीं. नतीजे के दिन ममता बनर्जी ने दोबारा वोटों की गिनती की मांग की थी, लेकिन चुनाव आयोग ने नहीं माना. इसके बाद ममता बनर्जी ने उच्च न्यायालय का रुख किया और शुभेंदु अधिकारी पर धर्म के नाम पर वोट मांगने, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए और चुनाव रद्द करने की मांग की.

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July 7th 2021, 10:57 am

ट्विटर को दिल्ली उच्च न्यायालय से फटकार, 8 जुलाई तक बताएं कब होगी शिकायत अधिकारी की नियुक्ति

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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्विटर द्वारा स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति न करने पर नाराजगी व्यक्त की तथा ट्विटर इंडिया को फटकार लगाई. कहा कि आपको मनमानी की इजाजत नहीं दी जा सकती.

न्यायालय ने कहा कि “21 जून को अधिकारी के हटने के बाद आपको उनकी जगह दूसरे की नियुक्ति कर देनी चाहिए थी, पर आपने अब तक ऐसा नहीं किया. आप इस प्रोसेस में कितना वक़्त लेंगे. अगर आपको लगता है कि हिंदुस्तान में आप इसके लिए मनचाहा वक़्त ले सकते हैं तो न्यायालय इजाजत नहीं देगा.”

उच्च न्यायालय ने ट्विटर को आठ जुलाई तक यह बताने का आदेश दिया कि नए आईटी नियमों के अनुपालन में वह स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति कब तक करेगा. वहीं, ट्विटर ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसके द्वारा स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है.

सोमवार को केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि ट्विटर ने नए आईटी नियमों का अनुपालन नहीं किया है. अपने हलफनामे में, केंद्र ने उच्च न्यायालय को बताया कि, “सभी SSMI को आईटी नियम 2021 का पालन करने के लिए 3 महीने का समय देने और 26 मई को डेडलाइन समाप्त होने के बावजूद, ट्विटर इंक अनुपालन करने में विफल रहा है.” आईटी नियम, 2021 देश का कानून है और ट्विटर को इसका पालन करना अनिवार्य रूप से आवश्यक है.

नए आईटी नियम?

25 फरवरी को केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए थे और सभी कंपनियों को इसका पालन करने के लिए तीन महीनों का वक्त दिया था, जिसकी समय अवधि 25 मई को पूरी हो गई. इन दिशानिर्देशों में भारत में मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी और शिकायत अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करना और भारतीय कानून का पालन करने की बात कही गई है.

गाइडलाइन का अनुपालन न करने पर कंपनियों को प्रदत्त छूट समाप्त हो जाएगी. जिस कारण कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है. ट्विटर ने अब तक केंद्र सरकार की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया, इस वजह से ट्विटर के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मामलों में अपराधिक मामले भी दर्ज हुए हैं.

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July 7th 2021, 7:56 am

कारगिल का शेर परमवीर कैप्टन विक्रम बत्रा

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कारगिल युद्ध के हीरो परमवीर कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी के कारण ही उन्हें भारतीय सेना ने शेरशाह तो पाकिस्तानी सेना ने शेरखान नाम दिया था. मात्र 24 साल की उम्र में देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले जांबाज की बहादुरी के किस्से आज भी याद किए जाते हैं. उनकी वीरता को देखते हुए ही कै. विक्रम बत्रा को भारत सरकार ने परमवीर चक्र से अलंकृत किया था. उन्हें ‘कारगिल का शेर’ भी कहा जाता है.

कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में सेना ने दुश्मन की नाक के नीचे से प्वाइंट 5140 छीन ली थी. उन्होंने अकेले ही 3 घुसपैठियों को मार गिराया था. उनके साहस ने यूनिट के जवानों में जोश भर दिया था और प्वाइंट 5140 पर भारत का झंडा लहरा दिया. उनके साथ रहे जवान ही उनकी बहादुरी के किस्से सुनाते हैं. माना भी जाता है कि यदि कमांडर बेहतर तरीके से टुकड़ी का नेतृत्व करता है तो साथियों के हौसले बुलंद रहते हैं.

ठुकरा दी थी मर्चेंट नेवी की नौकरी

1997 में विक्रम बत्रा को मर्चेंट नेवी से नौकरी का ऑफर आया, लेकिन उन्होंने लेफ्टिनेंट की नौकरी को चुना. 1996 में इंडियन मिलिट्री अकादमी में मानेक शॉ बटालियन में उनका चयन हुआ. उन्हें जम्मू कश्मीर राइफल यूनिट, श्योपुर में बतौर लेफ्टिनेंट नियुक्त किया गया. कुछ समय बाद कैप्टन रैंक दिया गया. उन्हीं के नेतृत्व में टुकड़ी ने 5140 पर कब्जा किया था.

..…यह दिल मांगे मोर

पहली जून 1999 को उनकी टुकड़ी को कारगिल युद्ध में भेजा गया. हम्प व राकी नाब स्थानों को जीतने के बाद उसी समय विक्रम को कैप्टन बना दिया गया. इसके बाद श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने का जिम्मा भी कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया. बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून, 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को अपने कब्जे में ले लिया था.

शेरशाह के नाम से प्रसिद्ध विक्रम बत्रा ने जब चोटी से रेडियो के जरिए अपना विजय उद्घोष ‘यह दिल मांगे मोर’ कहा तो सेना ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में यह शब्द गूंजने लगा था. इसी दौरान विक्रम के कोड नाम शेरशाह के साथ ही उन्हें ‘कारगिल का शेर’ की भी संज्ञा दे दी गई. अगले दिन चोटी 5140 में भारतीय झंडे के साथ विक्रम बत्रा और उनकी टीम का फोटो मीडिया में आया तो हर कोई उनका दीवाना हो उठा.

इसके बाद सेना ने चोटी 4875 को भी कब्जे में लेने का अभियान शुरू किया. इसकी बागडोर भी विक्रम को सौंपी गई. उन्होंने जान की परवाह न करते हुए लेफ्टिनेंट अनुज नैयर के साथ कई पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा. अंतिम मिशन लगभग पूरा हो चुका था, जब कैप्टन अपने कनिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट नवीन को बचाने के लिए लपके.

लड़ाई के दौरान एक विस्फोट में लेफ्टिनेंट नवीन के दोनों पैर बुरी तरह जख्मी हो गए थे. जब कैप्टन बत्रा लेफ्टीनेंट को बचाने के लिए उनको पीछे घसीट रहे थे, उसी समय उनके सीने पर गोली लगी और वे ‘जय माता दी’ कहते हुए वीरगति को प्राप्त हुए. अदम्य साहस और पराक्रम के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को 15 अगस्त, 1999 को परमवीर चक्र के सम्मान से नवाजा गया जो उनके पिता जीएल बत्रा ने प्राप्त किया.

दो वर्ष पूर्व एक समाचार पत्र से बातचीत में कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता गिरधारी लाल बत्रा ने कहा कि वह उस फोन कॉल को कभी नहीं भूल सकते, जो उनके बेटे ने बंकर पर कब्जा करने के बाद की थी. कारगिल युद्ध के जांबाज योद्धाओं की यादों को ताजा रखने के लिए उनके बारे में पाठ्य पुस्तकों में पढ़ाया जाना चाहिए. हमने भी पूर्व योद्धाओं के बारे में पुस्तकों में पढ़ा है.

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July 7th 2021, 1:27 am

बदल रही तस्वीर – पंचायतों में अकाउंट असिस्टेंट के पदों के लिए अंतिम सूची जारी, अनुच्छेद 370 हटने के

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जम्मू-कश्मीर. राज्य से अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद तस्वीर बदल रही है. विकास की विभिन्न योजनाओं की गति तेज हुई है. साथ ही प्रदेश में पहली बार सरकारी नौकरियों में सबसे बड़ी भर्ती हुई है. जम्मू-कश्मीर सर्विस सिलेक्शन बोर्ड ने ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग में अकाउंट असिस्टेंट (पंचायत) के पदों की नियुक्ति की अंतिम सूची जारी कर दी है. सूची जिला कैडर के पदों के अनुसार जारी की गई है. कुल 1889 अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन हुआ है.

रिपोर्ट्स के अनुसार सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ओर से जारी चयन सूची के अनुसार, ओपन मेरिट में 946, रिजर्व बैकवर्ड एरिया (आरबीए) में 196, एससी में 160, एसटी में 188, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) में 180, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एएलसी) में 73, पहाड़ी भाषाई लोग (पीएसपी) में 74 और सामाजिक श्रेणी में 72 उम्मीदवार शामिल हैं.

सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की 184वीं बैठक में अकाउंट असिस्टेंट पंचायत पद के चयनित उम्मीदवारों की सूची को स्वीकृति दी गई. बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के चेयरमैन खालिद जहांगीर ने की. अकाउंट असिस्टेंट पंचायत के पदों के लिए 1.92 लाख उम्मीदवारों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसमें से 1.62 लाख उम्मीदवारों ने लिखित परीक्षा दी.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर से पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह सबसे बड़ी भर्ती है, जो नए कानूनी ढांचे के तहत हुई है. इसमें जम्मू कश्मीर का कोई भी डोमिसाइल अन्य औपचारिकताएं पूरी करने वाला इन पदों के लिए आवेदन करने का हकदार था. बैठक में बोर्ड के सदस्यों में मोहम्मद शफीक चक, नजीर अहमद ख्वाजा, प्रीतम लाल अत्री, हरविंद्र कौर, आशिक हुसैन लिल्ली, प्रो. तस्लीमा पीर, बोर्ड के कंट्रोलर अशोक कुमार, सचिव सचिन जम्वाल शामिल रहे.

ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग ने 15 मई, 2020 को पद भरने के लिए सर्विस सिलेक्शन बोर्ड को रेफर किए थे. बोर्ड ने 6 जुलाई, 2020 को पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की थी. अकाउंट असिस्टेंट पंचायत के पदों को भरने के लिए सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर नियुक्तियां करने का फैसला किया गया. लिखित परीक्षा 10 नवंबर, 2020 को हुई थी और बोर्ड ने 25 दिसंबर को परिणाम घोषित कर दिया. उसके बाद दस्तावेज जांच की प्रक्रिया चली.

जम्मू-कश्मीर में थ्री टियर सिस्टम लागू हो चुका है. सरकार ने पंचायतों के कामकाज को बेहतर तरीके से चलाने के लिए अकाउंट असिस्टेंट की भर्ती की है. इससे पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिला है. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद हजारों पदों पर भर्ती के लिए अभियान तेजी से चल रहा है.

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July 5th 2021, 6:39 pm

धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए चैम्बर का उपयोग करने की शिकायत पर बार काउंसिल ने एडवोकेट इकबाल मलिक का

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नई दिल्ली. कड़कड़डूमा न्यायालय परिसर में अपने चैम्बर का उपयोग धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए करने के आरोप में दिल्ली बार काउंसिल ने एक एडवोकेट का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है.

बार काउंसिल के सचिव पीयूष गुप्ता ने बताया कि बार काउंसिल ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की है, आरोप है कि वकील निकाह कराने के लिए अपने चैम्बर का इस्तेमाल कर रहा था. काउंसिल ने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, संबंधित जिला न्यायाधीश और संबंधित क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त से सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करने और कमेटी को समर्थन देने का आग्रह किया है.

दिल्ली बार काउंसिल द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए और कानूनी बिरादरी की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए, मैं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 43 और धारा 6 (1) (डी) के तहत प्रदत्त विशेष शक्तियों का प्रयोग करना उचित समझता हूं. अधिवक्ता अधिनियम, 1961, इस मामले को विशेष अनुशासन समिति को एक अंतर उपाय के रूप में संदर्भित करते हुए, अनुशासन समिति द्वारा किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उनके लाइसेंस को निलंबित करना आवश्यक और उचित समझता है.

काउंसिल ने अधिवक्ता इकबाल मलिक को नोटिस की प्राप्ति के सात दिनों के भीतर विशेष अनुशासन समिति के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने और 16.07.2021 को शाम 4.00 बजे समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से दिल्ली बार काउंसिल के कार्यालय में प्रस्तुत होने का निर्देश दिया है. इसमें विफल रहने पर विशेष अनुशासन समिति एक पक्षीय कार्यवाही करेगी और आगे उचित कार्रवाई करेगी. कमेटी इस मामले में एक जांच करेगी और जितनी जल्दी हो सके निर्णय लेगी.

बार काउंसिल ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां स्वीकार्य नहीं है और ना ही एक एडवोकेट की पेशेवर गतिविधियों का हिस्सा हैं और निकाह कराने में उसका आचरण और धर्मांतरण और निकाहनामा / विवाह प्रमाण पत्र जारी करना पूरी तरह से शर्मनाक है और कानूनी पेशे की गरिमा के खिलाफ है.

शिकायत और प्राप्त दस्तावेजों के तथ्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया चैम्बर/कोर्ट परिसर में निकाह कराने की गतिविधियों को एक वकील या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अनुमति नहीं दी जा सकती है.

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए और उनके चैम्बर से संबंधित शिकायत के साथ संलग्न दस्तावेजों और निकाहनामा/ विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के लिए, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष रमेश गुप्ता ने दस्तावेजों की सामग्री पर ध्यान दिया और तीन सदस्यीय एक विशेष अनुशासन कमेटी के गठन का आदेश दिया.

 

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July 5th 2021, 6:39 pm

शिक्षा आम जनता के लिए होनी चाहिए – सीताराम व्यास

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फरीदाबाद. कोरोना वैश्विक महामारी में अनेक तरह की परेशानियों का सामना समाज कर रहा है. कोरोना के प्रकोप से शिक्षा क्षेत्र सर्वाधिक रूप से प्रभावित है. विद्यार्थी शिक्षा समाज व राष्ट्र की प्रगति का एक मूल आधार स्तंभ है. वर्तमान में शिक्षा पद्धति में संसाधनों व तकनीक की समस्या के कारण विद्यार्थी को शिक्षा संबंधित अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा. ऐसे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो और कोई भी विद्यार्थी किसी भी विषय का शिक्षक न मिलने के कारण अपने आपको शिक्षा से वंचित न समझे. इसी के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हरियाणा प्रांत में विवेकानंद ई- लर्निंग गुरुकुल का शुभारंभ किया है.

संघ द्वारा संचालित विद्यार्थी शिक्षा सेवा आयाम का मूलमंत्र होगा – ‘कोरोना से न डरेंगे, हर हाल में पढ़ेंगे’. इसमें कोरोना शिक्षक योद्धा की महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. जिसमें कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों हेतु अपने-अपने स्थान पर प्रत्यक्ष कक्षा और कक्षा 9 से 12 तक के सभी संकाय के विद्यार्थियों को विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, राजनीतिक विज्ञान, गणित, अंग्रेजी सहित अन्य विषयों की ऑनलाइन पढ़ाई होगी.

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विवेकानंद ई- लर्निंग गुरुकुल का शुभारंभ किया गया है. जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र संघचालक सीताराम जी व्यास का उद्बोधन प्राप्त हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर ऋषि गोयल, निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा की गई. वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता सीताराम जी व्यास ने कहा कि संकटकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना-रचना से शुरु किए गए विवेकानंद ई-लर्निंग गुरुकुल बहुत ही प्रशंसनीय है. भावी पीढ़ी बिना अवरोध के निरंतर ज्ञान प्राप्त करती रहे. यही गुरुकुल के अंतर्गत गुरु-शिष्य के संबंध की व्याख्या है. उन्होंने लघु कथाओं और प्रसंग संस्मरण के माध्यम से गुरुकुल की परिभाषा अभिव्यक्त करते हुए संवेदना और संस्कार को शिक्षा का महत्वपूर्ण तत्व बताया. विद्यार्थियों के लिए देशभक्ति का भाव जागृत कर उसे आचरण में लाना, कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करना, स्वच्छता के प्रति जागरूक रहना आवश्यक बताया. जैसे सीमा पर सैनिक, खेत में  किसान, प्रशासन का सेवाभाव वैसे ही विद्यार्थी का कक्षा में और शिक्षक के शिक्षण कार्य में कार्यरत रहने से ही देश भक्ति जागृति संभव है. देश के स्वावलंबन के लिए विद्या दान आवश्यक है.

कोरोना शिक्षक योद्धा निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

विद्यार्थी शिक्षा सेवा आयाम में शिक्षक कोरोना योद्धा के रूप में प्रत्येक जिला केंद्र से अध्यापकों की सूची तैयार की गई है. शिक्षा सेवा केंद्र में दसवीं कक्षा, ग्यारहवीं, बारहवीं, बीएड, जेबीटी, स्नातकोत्तर विद्यार्थी, अध्यापक, सेवानिवृत अध्यापक, ज्वाइन आरएसएस की सूची, कॉलेज विद्यार्थी कार्य से जुड़े स्वयंसेवक और राष्ट्र सेविका समिति के साथ मिलकर माताओं और बहनों को भी इस कार्य से जोड़ा गया है. 9 से 12वीं कक्षाओं को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए 120 शिक्षकों ने और शिक्षण प्राप्त करने वाले 1400 विद्यार्थियों ने गूगल फार्म पर पंजीकरण कराया है.

 

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July 5th 2021, 6:39 pm

जनसंख्या नियंत्रण पर मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ बैठक, असम के मुख्यमंत्री ने कहा – कोई कुछ भी कहे, म

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गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जनसंख्या नियंत्रण नीति को लेकर गंभीर हैं और इसके लिए उन्होंने बातचीत, विमर्श की पहल प्रारंभ की है. रविवार (04 जुलाई) को मुख्यमंत्री ने 150 के लगभग बुद्धिजीवियों और मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित नागरिकों से जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन के बारे में चर्चा की. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह मुस्लिम समुदाय के साथ चर्चा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण पर उनका रुख स्पष्ट है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ बैठक में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी. बैठक में बुद्धिजीवियों ने माना कि जनसंख्या विस्फोट राज्य के विकास के लिए खतरा है. अगर असम विकसित राज्यों की सूची में शामिल होना चाहता है तो उसे जनसंख्या विस्फोट को रोकना होगा.

मुस्लिम समुदाय के लोगों की सदस्यता वाले आठ उप-समूह गठित किये जा रहे हैं, जो समुदाय के विकास पर अगले तीन महीने में रिपोर्ट पेश करेंगे. रिपोर्ट के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के विकास के लिए एक मसौदा तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर काम किया जाएगा.

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “असम की जनसंख्या में अल्पसंख्यकों का योगदान 37% है. इस जनसंख्या का एक बड़ा भाग वंचित और अशिक्षित है. बीते कुछ वर्षों में असम आर्थिक और सामाजिक पैमाने पर और भी बेहतर स्थिति में हो सकता था. आप महिलाओं को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि उनके ऊपर परिवार का दबाव है. हालांकि, यह समय है कि महिलाएं अपना विरोध दर्ज करें और समाज के तौर पर हम उनके सशक्तिकरण का प्रयास करें.”

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जनसंख्या नियंत्रण नीति को लेकर स्पष्ट हैं, इसके लिए वे समाज के हर वर्ग से लगातार चर्चा कर रहे हैं और उनका मानना है कि नीतिगत फैसले में सभी की सहमति शामिल होनी चाहिए. इस मुद्दे पर युवाओं से चर्चा भी की थी और उन्होंने यह भी दावा किया है कि उन्हें ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट यूनियन (AAMSU) के दोनों धड़ों का समर्थन प्राप्त है.

वह मुस्लिम समुदाय के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करते रहेंगे और उनसे बातचीत जारी रहेगी, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट है.

इस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध पर उन्होंने कहा, “वह मुझे कुछ भी बता सकते हैं. आप मुझ पर एक विशेष समुदाय के खिलाफ काम करने का आरोप भी लगा सकते हैं, लेकिन मुझे परवाह नहीं है. मेरी सरकार ने जो किया वह तार्किक था. मुस्लिम महिलाओं का सशक्तिकरण मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है.”

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July 5th 2021, 6:39 pm

जम्मू कश्मीर – अनाधिकृत रूप से सुरक्षा बलों की वर्दी बेच रहे दुकानदारों के खिलाफ मामला दर्ज, गिरफ्ता

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जम्मू कश्मीर. पुलिस ने अनाधिकृत रूप से सुरक्षा बलों की वर्दी बेच रहे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की है. बाग-ए-बाहू पुलिस ने रेलवे स्टेशन के बाहर शिव मार्केट में अचानक छापा मारकर चार दुकानदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने वर्ष 2015 में सांबा में सैन्य छावनी में आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों की वर्दियों की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. हमले के बाद सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश जारी कर अनाधिकृत दुकानदारों को सुरक्षाबलों की वर्दियां न बेचने के निर्देश दिए थे.

बाग-ए-बाहू पुलिस स्टेशन के एसएचओ दीपक पठानिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की और बिना प्रशासन की अनुमति व रिकार्ड के वर्दियां बेच रहे चार दुकानदारों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने सभी के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है. पुलिस ने यह कार्रवाई पिछले कुछ समय से जम्मू में आतंकियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए की है. पुलिस को आशंका है कि आतंकी सुरक्षाबलों की वर्दियों को पहन आतंकी वारदात को अंजाम दे सकते हैं. ऐसे में पुलिस ने अनाधिकृत तरीके से सेना की वर्दियों को बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. पुलिस के अनुसार आरोपी दुकानदारों को कोर्ट में पेश कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

जिला मजिस्ट्रेट ने सेना की वर्दियों के लिए अधिकृत निजी कंपनियों, दुकानदारों को अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में इस बारे जानकारी देने और हर पंद्रह दिन बाद उनके पास से वर्दियों को खरीदने वालों का ब्योरा देने के निर्देश भी दिए थे. जिन सुरक्षाकर्मियों को वर्दियां दी जाएं, उनका नाम पता, रैंक, यूनिट का नंबर, रैंक नंबर आदि का ब्योरा भी लेने और उसे संबंधित पुलिस स्टेशन में जमा करवाने के निर्देश दिए गए थे. इन निर्देशों के बाद भी कई जगहों पर दुकानदार गैर कानूनी तरीके से वर्दियां बेच रहे हैं. पुलिस ने उन दुकानदारों के खिलाफ अभियान शुरू किया है, शनिवार की कार्रवाई उसी की एक कड़ी थी.

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July 5th 2021, 6:39 pm

ऑपरेशन मॉनसून – सुरक्षा बलों ने 7 नक्सलियों को ढेर किया, 10 गिरफ्तार, ढाई दर्जन ने किया आत्मसमर्पण

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फोटो – प्रतीकात्मक

नई दिल्ली. मॉनसून के दौरान सुरक्षा बलों पर हमला कर छिपने के लिए दुर्गम जंगलों में बनाए ठिकाने भी नक्सलियों के लिए सुरक्षित नहीं बचे हैं, क्योंकि सुरक्षा बल नई रणनीति के तहत कार्रवाई कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मॉनसून सीजन में नई रणनीति के तहत ऑपरेशन में सफलता भी मिल रही है.

पूर्व के वर्षों में मॉनसून सीजन के दौरान हावी रहने वाले नक्सलियों के लिए स्थितियां अब बदल गई हैं. एक जून से जारी ऑपरेशन मॉनसून में अब तक सात हार्डकोर नक्सली ढेर किए जा चुके हैं. नक्सलियों से एके-47 और एसएलआर जैसे अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक व अन्य सामान भी बरामद हुआ है.

दरअसल, बारिश में नक्सल गतिविधियां कम रहने का लाभ उठाते हुए धुर नक्सल क्षेत्रों में भीतर तक सड़कें बना दी गई हैं. सुरक्षा बलों के कैंप भी खुल गए हैं. इसके चलते नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों तक फोर्स का पहुंचना आसान हो गया है, जिसका लाभ भी मिल रहा है. नक्सलियों को चौतरफा घेरने के लिए बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों और सीमावर्ती राज्यों की फोर्स के बीच समन्वय बनाया गया है. इसी के तहत ऑपरेशन मॉनसून अभी दो महीने और चलेगा.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एक जून को ऑपरेशन मॉनसून के पहले ही दिन कोंडागांव जिले के भंडारडीह पहाड़ी के नक्सली कैंप पर धावा बोलकर दो नक्सलियों को मार गिराया था. ओडिशा की सीमा से सटे चांदामेटा, पयारभांट के जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सुकमा व बस्तर दोनों ओर से फोर्स रवाना हुई और 18 जून को एक महिला नक्सली को ढेर कर दिया. जिले के इतुल के पास मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए थे. 27 जून को दंतेवाड़ा जिले के नीलावाया गांव में मुठभेड़ में पांच लाख का इनामी नक्सली संतोष मरकाम मारा गया था. वहीं, 30 जून को बस्तर जिले के दरभा इलाके के एलंगनार में मुठभेड़ में तीन लाख के इनामी नक्सली जोगा को मार गिराया था.

आत्मसमर्पण ऑपरेशन मॉनसून के दौरान ढाई दर्जन से अधिक नक्सिलों ने आत्मसमर्पण भी किया है. चार जून को बीजापुर में तीन नक्सली, सात जून को दंतेवाड़ा में चार, 11 जून को सुकमा में आठ, इसी दिन दंतेवाड़ा में पांच, 12 जून को बीजापुर में दो, 15 जून को दंतेवाड़ा में तीन, 22 जून को दंतेवाड़ा में तीन और 28 जून को दंतेवाड़ा में तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया.

अभियान के दौरान आठ जून को गंगाराम मंडावी, दो जून को नक्सली कमांडर सोबराय, तीन जून को पोलमपल्ली में दो नक्सली, 16 जून को बीजापुर में दो और 20 जून को सुकमा में चार नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया.

आईजी बस्तर सुंदरराज पी. ने कहा कि मॉनसून में अलग-अलग बलों के समन्वय से ऑपरेशन चलाया जा रहा है. यह अभियान अभी दो महीने और चलेगा. अब तक सात नक्सलियों के शव व भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं.

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July 5th 2021, 6:39 pm

“पीर पराई जाने रे” – कलाकारों की सहायता के लिए संस्कार भारती आयोजित करेगी वर्चुअल कन्सर्ट

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नई दिल्ली. संस्कार भारती द्वारा “पीर पराई जाने रे” अभियान के तहत कलाकारों की सहायता के लिए वर्चुअल कन्सर्ट का आयोजन किया जाएगा. संस्कार भारती की 82वीं अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी की दो दिवसीय वार्षिक बैठक के निर्णय अनुसार 09 जुलाई को वर्चुअल कन्सर्ट का आयोजन होगा, जिसमें देश के कला, साहित्य, संगीत, नृत्य एवं सिनेमा जगत के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे और जरूरतमंद कलाकारों की सहायता के लिए समाज से अपील भी करेंगे.

समारोह में सर्व श्री पंडित बिरजू महाराज, अमजद अली खान, डॉ. सोनल मानसिंह, सुभाष घई, मधुर भंडारकर, डॉ. कुमार विश्वास, राजेन्द्र गंगानी, नागराज हवलदार, हरिहरण, शंकर महादेवन, सोनू निगम, कैलाश खेर, अनुपम खेर, सुश्री कविता सेठ, सुश्री मधु श्री, दलेर मेहंदी, अनूप जलोटा, प्रकाश झा, सुरेश वाडेकर, श्रीमती मधु तैलंग, श्रीमती अनुराधा पौडवाल, हंसराज हंज, वसिफुद्दीन डागर, अनवर खान आदि श्रेष्ठ कलाकार भाग लेने वाले हैं.

संस्कार भारती, दिल्ली प्रांत द्वारा विभिन्न कला विधाओं के अग्रणी कलाकारों द्वारा कला क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों एवं कलाकारों के संघर्ष पर ‘पीर पराई जाने रे’ नाम से कलाकारों की सहायता के लिए पहल की शुरुवात की है. जिसमें कलाकारों की आर्थिक सहायता हेतु धनराशि एकत्रित करने पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है. साथ ही महामारी के कठिन समय में केंद्र सरकार एवं विभिन राज्य सरकारों को भी संस्कृति कर्मियों की समस्याओं से अगवत करवाने हेतु ज्ञापन भी सौंपे गए हैं.

इसी सन्दर्भ में अभियान के संरक्षक मंडल एवं अन्य पदाधिकारियों का मनोनयन किया गया है, संरक्षक मंडल में कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज, नृत्यांगना एवं कला विदुषी तथा राज्यसभा सांसद डॉ. सोनल मानसिंह, प्रख्यात सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खां, सुप्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार, पंडित साजन मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा, भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. सरोजा वैधनाथन, नाटक लेखक एवं निर्देशक तथा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डी.पी. सिन्हा का नाम सम्मिलित है. समारोह का सञ्चालन प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं प्रसिद्ध लेखक मनोज मुन्तसिर करने वाले हैं.

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July 5th 2021, 6:39 pm

यादों में आपातकाल – राहुकाल से लोकतंत्र के निकलने की शेषकथा..!

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जयराम शुक्ल

चाटुकारिता भी कभी-कभी इतिहास में सम्मान योग्य बन जाती है. आपातकाल के उत्तरार्ध में यही हुआ. पूरे देश भर से चाटुकार कांग्रेसियों और गुलाम सरकारी मशीनरी ने इंदिरा गांधी को जब यह फीडबैक दिया कि आपकी लोकप्रियता चरम पर है, जनता आपको अपना भाग्यविधाता मानने लगी है. तब इंदिरा गांधी का मानस बना कि क्यों न लगे हाथ आम चुनाव करवा लिए जाएं….वे संजय गांधी के हठ के बावजूद चुनाव करवाने के फैसले पर डटी रहीं. यदि वे संजय गांधी के चुनाव न करवाने व इमरजेंसी जारी रखने की राय को मान लेतीं तो संभवतः आज भी हम हिटलरी युग में जी रहे होते. पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने अपनी किताब “द जजमेंट” के लिए एक इंटरव्यू में संजय गांधी ने बेबाकी से ये बातें कहीं थी. यद्यपि नैय्यर ने उस इंटरव्यू के अंश “द जजमेंट” की बजाय “बियांड द लाइंस” में छापे हैं.

कुलदीप नैय्यर लिखते हैं – इमरजेंसी पर मैं एक किताब लिख रहा था, एक दिन कमलनाथ मुझसे मिले. उन्होंने कहा कि संजय गांधी से मिले बिना इमरजेन्सी के बारे में कैसे लिख सकता था. कमलनाथ मुझे 1 सफदरजंग ले गए और संजय से अकेले में मुलाकात कराई. उन्होंने मुझसे पहले जनता पार्टी के भविष्य के बारे में बात की, फिर इमरजेन्सी को लेकर बातें हुईं. नैय्यर की “बियांड द लाइंस” में इंटरव्यू का सार संक्षेप जस का तस कुछ यूँ है –

“मेरा पहला प्रश्न यह था कि उन्हें इतना भरोसा क्यों था कि उन्हें इमरजेन्सी, अधिकारवादी सत्ता और इनसे जुड़ी ज्यादतियों का फल नहीं भुगतना पड़ेगा?

संजय गांधी ने जवाब दिया – उन्हें कोई चुनौती दिखाई नहीं दे रही थी. वे 20-25 या इससे भी ज्यादा वर्षों तक इमरजेन्सी को जारी रख सकते थे, जब तक कि उन्हें भरोसा न हो जाता कि लोगों के सोचने का तरीका बदल गया है.

संजय ने मुझसे कहा – उनकी योजना के अनुसार कभी कोई चुनाव न होते और वे बंशीलाल जैसे क्षेत्रीय सरदारों और आज्ञाकारी प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से दिल्ली से ही पूरा देश चलाते रहते. यह एक अलग तरह की सरकार होती और सब कुछ दिल्ली से ही नियंत्रित होता.

मुझे याद आया कि इमरजेंसी के दौरान कमलनाथ ने मुझे एक किताब की पांडुलिपि दी थी, जिसमें इसी तरह के विचारों को व्यक्त करते हुए इस शासनतंत्र का विस्तार से वर्णन किया गया था.

तो फिर आपने चुनाव क्यों करवाए? मैंने संजय गांधी से पूछा.

“मैंने नहीं करवाए” उन्होंने कहा. वे शुरू से इसके खिलाफ थे. लेकिन उनकी माँ नहीं मानी. “आप उन्हीं से पूछिए” उन्होंने कहा.

संविधान और मौलिक अधिकारों को देखते हुए इस तरह की व्यवस्था कैसे चल सकती थी? मैंने संजय से पूछा. उन्होंने कहा इमरजेन्सी हटाई ही न जाती और मौलिक अधिकार स्थगित ही रहते.”

इमरजेन्सी के दरम्यान ऐसा पहली बार हुआ, जब इंदिरा जी ने संजय गांधी के हठ के सामने सरेंडर नहीं किया. सुदीर्घ अनुभव से वे जानती थीं कि वे वास्तव में शेर की सवारी कर रही हैं और इसका कहीं न कहीं तो कोई मुकाम तय है. दूसरे संभवतः उन्हें संजय की मंडली से अज्ञात भय भी लगने लगा था कि बेटे की ये चंडाल-चौकड़ी न जाने देश को कहां ले जाकर छोड़ेगी.

नैय्यर “बियांड द लाइंस” में लिखते हैं – इंदिरा गांधी इस आधिकारिक खुफिया रिपोर्ट से प्रभावित थीं कि उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर है. संजय गांधी ने जब सुना कि वे चुनाव करवाने की सोच रहीं हैं तो वे आगबबूला हो गए. वे आने वाले कई वर्षों तक चुनाव नहीं चाहते थे. माँ बेटे के बीच इस विषय को लेकर काफी गरमागरमी भी हुई, लेकिन इंदिरा तो इंदिरा थीं, जो ठान लिया सो किया. संजय गांधी ढीले पड़ गए. नैय्यर लिखते हैं – चुनाव कराने की जो भी बाध्यताएं रही हों, लेकिन इस बात की स्वीकृति थी कि कोई भी व्यवस्था लोगों की सहमति और प्रोत्साहन के बिना नहीं चल सकती थी.

संजय गांधी सत्ता के समानांतर केंद्र नहीं, बल्कि धुरी बन चुके थे. इसलिए वे समय-समय पर यह अहसास दिलाने से नहीं चूकते थे कि पीएमओ उनके इशारे पर चलता है. पीएन हस्कर पीएमओ में सचिव व एएन धर प्रमुख सचिव थे. ये दोनों ही जब संजय के प्रभाव में नहीं आए तो इन्हें सबक सिखाया गया. हस्कर को न सिर्फ पीएमओ से दफा करवा दिया, अपितु उनके रिश्तेदारों के यहां छापे भी डलवाए.

दरअसल, संजय ने इमरजेंसी घोषित होने के साथ ही लगाम अपने हाथों में ले ली थी. पहला सफल दांव सूचना प्रसारण मंत्री इंद्र कुमार गुजराल पर आजमाया. इमरजेन्सी लागू होने के चौबीस घंटे के भीतर ही उन्हें “प्रेस को ठीक” करने का सबक दिया. गुजराल ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि वे उनकी माँ के सहकर्मी हैं, न कि उनके गुलाम. गुजराल के इस जवाब के बाद उन्हें कैबिनेट से हटवाने में बारह घंटे भी नहीं लगे. 28 जून को विद्याचरण शुक्ल देश के सूचना प्रसारण मंत्री बन गए. फिर प्रेस संस्थाओं का जो हाल हुआ, वह दुनिया ने देखा. संजय के दूसरे पट्ठे बंशीलाल थे, जिन्हें हरियाणा से लाकर उनके मुंह मांगा रक्षामंत्री पद दे दिया. साथ ही बनारसी दास को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाते हुए कहा कि वास्तविक निर्देश बंशीलाल के ही चलेंगे.

देश के गृहमंत्री थे ब्रह्मानंद रेड्डी, पर चलती थी ओम मेहता की, जो इसी मंत्रालय में राज्यमंत्री थे. देश के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों का इंटरव्यू आरके धवन और संजय गांधी खुद लेते थे तथा स्वामीभक्ति के संकल्प के अनुसार उन्हें प्रभावी पदों पर बैठाया जाता था.

राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर लगाम कसने का काम यशपाल कपूर का था, जो इंदिरा जी के ओएसडी थे. कुल मिलाकर संजय गांधी, विद्याचरण शुक्ल, बंशीलाल, ओम मेहता, आरके धवन और यशपाल कपूर ही देश के नियंता थे, और मोहम्मद यूनुस इंदिरा जी के एम्बसडर एट लार्ज जो इंदिरा जी के निजी दुश्मनों की खबर रखा करते थे.

कैबिनेट के अन्य सदस्य इस कदर भयभीत थे, मानों बस उनकी गिरफ्तारी होने ही वाली है. अस्सी साल के बुजुर्ग उमाशंकर दीक्षित कैबिनेट से निकाले जा चुके थे. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पीसी सेठी पर किसी बात को लेकर संजय गांधी का नजला गिरा, उन्हें रातों-रात हटाकर श्यामाचरण शुक्ल को मुख्यमंत्री बना दिया गया. इमरजेंसी का डर कांग्रेस के भीतर भी गहराई से बैठ गया था. सबके सब संजय गांधी से डरे और सहमे हुए थे, उन्हें यह मालूम था कि इंदिरा गांधी संजय के सामने विवश हो चुकी हैं.

इमरजेन्सी काल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की जो गत की गई, यदि संविधान मनुष्य रूप में जीवंत होता तो निश्चित ही संसद भवन के कंगूरे से कूदकर आत्महत्या कर लेता. विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका सभी की भूमिका किसी सामंत के दरवाजे पर खड़े कारिंदों जैसी थी.

प्रेस झुकी ही नहीं अपितु रेंग रहे थे. इंडियन एक्सप्रेस और रामनाथ गोयनका जरुर कुछ दिनों तक तने रहे. बिडला का हिंदुस्तान टाइम्स समूह इमरजेन्सी का प्रवक्ता बन चुका था. टाइम्स ऑफ इंडिया और स्टेट्समैन जैसे समूह संजय की चौकड़ी के सामने हुक्का भरते थे. कौन संपादक हो यह विद्याचरण शुक्ल तय करते थे. देश की चारों न्यूज़ एजेंसियों पीटीआई, यूएनआई, समाचार भारती, हिंदुस्तान समाचार को विलोपित कर सरकार नियंत्रित एजेंसी “समाचार” बन चुकी थी. बड़े अखबार समूह खुद ही पाँवों में बिछ चुके थे जो खड़े थे, उन्हें अधिग्रहित करने की पूरी तैयारी थी. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भंगकर निष्प्रभावी बनाया जा चुका था. सब कुछ संजय गांधी की योजना के अनुरूप ही चल रहा था, जिस पर इंदिरा गांधी की पूरी सहमति थी. जनता सरकार आने के बाद सूचना प्रसारण मंत्री बने लालकृष्ण आड़वाणी ने ठीक ही फटकारा था – आपको झुकने के लिये कहा गया तो आप रेंगने लगे.

संसद में 42वां संशोधन लाकर हाईकोर्ट को रिटपिटीशन जारी करने के अधिकार सीमित कर दिए गए. आर्टिकल 368 में बदलाव करके यह व्यवस्था बना दी कि संविधान के बदलाव पर ज्यूडिशियल रिव्यू न किया जा सके. इमरजेन्सी की घोषणा ही अपने आप में संसद नाम की लोकतांत्रिक संस्था पर संहातिक प्रहार था. इंदिरा गांधी ने 25 जून को शाम 5 बजे राष्ट्रपति से भेंट की, रात 11.30 बजे इमरजेन्सी की घोषणा कर दी गई. पत्र में राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को कैफियत दी गई कि कैबिनेट बुलाने का वक्त ही नहीं मिला पाया, जबकि बात यह नहीं थी. दूसरे दिन 26 जून को 90 मिनट की सूचना पर कैबिनेट आहुत की गई, जिसमें इमरजेन्सी लागू करने की स्वीकृति ली गई, किसी के चूँ चपड़ करने की हिम्मत तक न हुई.

पिछले दिनों राजनीति से ज्यूडीशियरी के प्रभावित होने की तल्ख बहस व चर्चाएं गूँजती रहीं. सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की ऐतिहासिक प्रेस कान्फ्रेंस हुई. कांग्रेस ने सीजेआई दीपक मिश्र के खिलाफ महाभियोग की मुहिम चलाई. राजनीतिक गलियारों में राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से जजों की नियुक्ति और पदोन्नति की भी अनुमानित खबरें-चर्चाएं भी चलती रहीं. इनके बरक्स इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलेगा कि इमरजेंसी काल में तो लगभग समूची ज्यूडीशियरी ही बंधक बनी हुई थी. तबादले, नियुक्तियों और पदोन्नतियों का ऐसा भी कुत्सित खेल हुआ, यह जानने के लिए बीती बातों को सामने लाना और भी जरूरी हो जाता है.

12 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी के निर्वाचन के खिलाफ फैसला दिया था. अपील की मियाद 15 दिन की रखी. कुलदीप नैय्यर अपनी किताब में लिखते हैं – फैसले के कई महीनों बाद जब मैं जस्टिस सिन्हा से मिला तो उन्होंने बताया कि एक कांग्रेस के सांसद ने इंदिरा गांधी के पक्ष में फैसला देने के लिए रिश्वत की पेशकश की थी. इसी तरह न्यायालय के एक सहकर्मी ने भी उन्हें उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाने का प्रलोभन दिया था.

इमरजेंसी के दरम्यान जस्टिस सिन्हा किस यातना से गुजरे ये तो एक अलग कहानी है. लेकिन खुद को इंदिरा गांधी का वफादार साबित करने के लिए दिल्ली के एक स्थानीय वकील वीएन खेर ने खुद ही सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी, इसी अपील को स्वीकार करते हुए जस्टिस कृष्णा अय्यर ने स्टे दे दिया. बाद में खेर साहब के ऐसे भाग्य खुले कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद तक पहुंच गए.

कुलदीप नैय्यर जो स्वयं इमरजेन्सी में गिरफ्तार किए गए थे, उनकी गिरफ्तारी को दिल्ली हाईकोर्ट की जिस खंडपीठ ने अवैध घोषित किया था. उसके जज रंगराजन साहब को गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया, दूसरे जज आरएन अग्रवाल को पदावनत कर पुनः सेशन जज बना दिया गया. नैय्यर के अनुसार यह इनकी सत्ता की मंशा के खिलाफ गुस्ताखी की सजा थी.

इमरजेंसी की वैधता का सवाल भी सुप्रीम कोर्ट में आया. सीजेआई एएन रे ने एक पीठ गठित कर उसे यह मामला सौंपा. इस पीठ में एचआर खन्ना, एमएच बेग, वायबी चंद्रचूड़ और पीएन भगवती थे. खन्ना को छोड़ सभी ने इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेन्सी के पक्ष में अपने मत दिए. बाद में परिणाम यह हुआ कि एचआर खन्ना को सुपरसीड कर बेग को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. अन्य भी बारी-बारी से देश के प्रधान न्यायाधीश बने. इमरजेन्सी में न्यायपालिका का जो भी न्यायाधीश आड़े आया उसे हटाया गया, ग्यारह जजों के तबादले किए गए.

इमरजेन्सी में लोकतांत्रिक संस्थाओं की जैसी गति बनाई गई और जिस पार्टी की स्वेच्छाचारी सरकार ने ऐसा किया कम से कम आज उसका हक तो नहीं ही बनता कि वह शुचिता की दुहाई दे. इमरजेन्सी के कलंक के काले धब्बे इतने गहरे हैं कि भारत में जब तक लोकतंत्र जिंदा बचा रहेगा, तब तक वे काले धब्बे बिजुरके की भाँति टँगे दिखाई देते रहेंगे. इमरजेंसी वाकयी दूसरी गुलामी थी, इसकी दास्तान को जीवंत बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है, जिससे आने वाली सरकारों को कभी ऐसा कदम उठाने की हिम्मत न पड़े.

 

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July 1st 2021, 9:37 pm

विदेश में पढ़ रहे चीनी छात्र भी संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से डरते हैं

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नई दिल्ली. चीन से बाहर अन्य देशों में पढ़ने वाले लोकतंत्र समर्थक छात्र भी संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से डरते हैं, उन्हें डर रहता है कि उन्होंने कुछ कहा तो चीन में उनके परिजनों को अंजाम भुगतना होगा. चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन कितना लोकतांत्रिक है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है. ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले लोकतंत्र समर्थक छात्र भी संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से डरते हैं. बीबीसी ने छात्रों की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट की है. वहीं, दूसरी ओर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी 100 साल पूरे होने का जश्न मना रही है.

ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि ये छात्र कक्षा में स्वयं पर कई तरह की पाबंदियां लगाए रहते हैं.

चीन से जुड़े पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले अध्यापक भी कहते हैं कि वो भी स्वयं को सेंसर करने का दबाव महसूस करते हैं. ये कथित दबाव ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी आज़ादी को खतरे में डाल रहा है.

ऑस्ट्रेलिया के उच्च शिक्षा के संस्थान काफी हद तक चीन पर निर्भर रहने लगे हैं. कोविड-19 के पहले के दौर में ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में से करीब 40 फ़ीसदी चीन के छात्र होते थे. ऑस्ट्रेलिया के विश्व विद्यालयों में अभी करीब एक लाख 60 हज़ार छात्र पंजीकृत हैं. ऑस्ट्रेलिया में विश्वविद्यालय कैंपसों में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की जाती है.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि उसने ऑस्ट्रेलिया में छात्रों और अध्यापकों से बात की और पाया कि उनके बीच ‘डर का माहौल है.’ हाल के वर्षों में ये स्थिति खराब हुई है.

एक मामले में चीन के एक छात्र ने जब ऑस्ट्रेलिया में ट्विटर पर अकाउंट बनाकर लोकतंत्र के समर्थन में संदेश पोस्ट किया तो उसे चीन के अधिकारियों ने जेल भेजने की धमकी दी. लोकतंत्र का समर्थन करने वाले कई छात्रों ने ये भी बताया कि उन्हें इस बात का भी डर लगता है कि उनके साथी छात्र चीन के अधिकारियों से उनकी शिकायत कर सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार “लोकतंत्र का समर्थन करने वाले जिन भी छात्रों का इंटरव्यू किया गया, उनके दिमाग में डर ने पुरजोर तरीके से घर किया हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया में वो जो कुछ करेंगे, उसके बदले चीन के अधिकारी उनके माता-पिता को या तो दंडित करेंगे या फिर उनसे पूछताछ कर प्रताड़ित करेंगे.”

बीबीसी के अनुसार रिपोर्ट की लेखिका सोफी मैक्नील ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन “चीन से आए छात्रों के अधिकार बरकरार रखने का अपना कर्तव्य निभा नहीं पा रहा है.”

अध्यापक और लेक्चरर भी ऐसा दबाव महसूस करते हैं. जितने लोगों से बात की गई, उनमें से आधे से ज़्यादा चीन के बारे में बोलते समय खुद पर सेंसर लगा लेते हैं.

कुछ ने ये भी कहा कि कुछ मौकों पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी पाबंदी लगाई. चीन के बारे में सार्वजनिक तौर पर चर्चा करने से मना किया गया.

ऑस्ट्रेलिया में बीते कई वर्षों से यूनिवर्सिटी कैंपस में चीन के कथित तौर पर बढ़ते दखल को लेकर चर्चा हो रही है. चीन के अधिकारी और मीडिया इसे दुष्प्रचार बताते हुए खारिज कर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया में चीन के राजदूत ने चीनी छात्रों के बर्ताव पर नज़र रखे जाने के आरोप को ‘आधारहीन’ कहते हुए खारिज कर दिया था. साल 2019 में ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने “अभूतपूर्व विदेशी हस्तक्षेप” पर रोक लगाने के लिए टास्क फोर्स बनाई थी और नई गाइडलाइन्स जारी की थी.

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July 1st 2021, 6:36 pm

वनवासी कल्याण आश्रम की मांग – बंगाल की हिंसा की निष्पक्ष जाँच हो, पीड़ितों को मुआवजा मिले

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नई दिल्ली. वनवासी कल्याण आश्रम का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष से मिला. प्रतिनिधिमंडल ने बंगाल में चुनाव परिणाम बाद की हिंसक घटनाओं में बड़ी संख्या में शिकार हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के लोगों को मुआवजा देने, घटनाओं की जाँच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जाँच दल बनाने, शिकायतकर्ताओं और गवाहों को केन्द्रीय सुरक्षाबलों की सुरक्षा देने, न्याय हित में पड़ोसी राज्य असम व बिहार में विशेष न्यायालय बनाकर उनमें इन मामलों की सुनवाई करने की मांग की.

राष्ट्रपति, बंगाल के राज्यपाल को भेजे गए और दिल्ली में दिए गए ज्ञापनों में कहा गया है कि 9 ज़िलों के 45 गांवों में 100 से भी अधिक हुई हिंसक घटनाओं में 500 से भी अधिक जनजाति परिवार मारपीट, आगजनी और लूट के शिकार हुए. दो जनजाति युवकों की हत्या कर दी गई, जिसे पुलिस ने बाद में आत्महत्या और दुर्घटना का मामला बता दिया. कई महिलाएं बलात्कार का शिकार हुईं. गत दिनों जनजाति आयोग के दौरे में भी ये बातें सामने आई हैं. इन हमलों में बच्चों, बूढों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. लुटेरों ने चाय-बागान की फसल और घरों में अनाज भी नहीं छोड़ा.

कुल मिलकर 16 जिलों के 3662 गांवों के 40 हज़ार लोग हिंसा के शिकार हुए, 30-35 लोगों की हत्या हुई, सैकड़ों मकान जला दिए गए, हजारों लोगों को अपनी जान बचाने पड़ोसी राज्यों या जंगलों में भागना पड़ा. हमले और डराने-धमकाने का काम अभी भी रुका नहीं है. उन्हें राशन की दुकानों से अनाज लेने के लिए भी उन्हीं गुंडों की सिफारिश करानी पड़ती है. पुलिस भी राज्य सरकार के दबाव और समुदाय विशेष के गुंडों के भय से कोई क़ानूनी कार्रवाई नहीं कर रही. राज्य में संवैधानिक विफलता का यह स्पष्ट प्रमाण है.

ज्ञापन में मांग की गई कि अभियुक्तों की जल्द गिरफ़्तारी हो और जब तक मुकदमों की सुनवाई चले तब तक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग अपना कैंप कार्यालय बंगाल में खोलें जो इन मामलों की निगरानी करे ताकि लोगों को न्याय मिल सके. राज्य में जान-माल-आगजनी से हुए नुकसान के आंकलन का काम राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग और रामकृष्ण मिशन जैसे निष्पक्ष संगठनों को सौंपा जाए. जिसकी रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित लोगों को केंद्र या राज्य सरकार समुचित मुआवजा दे. मारे गए लोगों के आश्रितों में से एक-एक सदस्य को केंद्र सरकार के उपक्रमों में नौकरी या उनके माँ-बाप को मासिक पेंशन देने और गंभीर रूप से घायल लोगों को मुआवजा देने की भी मांग की गई.

वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खराडी की अध्यक्षता में शिष्टमंडल में बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान से वरिष्ठ पदाधिकारी सम्मिलित थे.

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July 1st 2021, 2:23 pm

राजनीतिक स्वार्थ के कारण अनर्गल आरोप लगाए जा रहे, कानून सम्मत कार्रवाई के विकल्प खुले – हनुमान सिंह

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जयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षेत्र के कार्यवाह हनुमान सिंह राठौड़ ने राजस्थान एसीबी द्वारा दर्ज प्रकरण और मीडिया में आए समाचार के सम्बन्ध में कहा कि बीवीजी इंडिया लिमिटेड कंपनी के प्रतिनिधि निम्बाराम जी के पास प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर में अपने सीएसआर फंड से सहयोग करने का प्रस्ताव लेकर आए थे. निम्बाराम जी ने उनसे आग्रह किया था कि वे इस केंद्र का स्वयं दौरा करें और वहां की आवश्यकताओं को समझ कर यदि उचित लगे तो इसमें सहयोग देने का तय करें.

प्रताप गौरव केंद्र राष्ट्रीय तीर्थ है तथा इसका महत्व इसे देखने पर ही ध्यान में आता है कि देश का गौरव बढ़ाने के लिए कितनी बड़ी परियोजना पर समाज बंधुओं के सहयोग से काम कर रहे हैं.

पत्रकारों व मीडिया कर्मियों से भी आग्रह है कि स्वयं जाकर इस केंद्र का अवलोकन करें. इसीलिए कंपनी के प्रतिनिधियों से केंद्र पर जाकर देखने का आग्रह किया था. कंपनी के प्रतिनिधियों ने दौरे की तिथि तय की, किन्तु वहां पर गए ही नहीं. अतः सीएसआर फंड से किसी राशि या अन्य किसी भी रूप में सहायता का प्रश्न ही नहीं उठता.

20 अप्रैल को निम्बाराम जी से कंपनी के प्रतिनिधियों की भेंट या बातचीत हुई वह सामान्य सामाजिक शिष्टाचार के नाते ही थी. क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम जी से समाज क्षेत्र के बहुत से लोग स्वाभाविक ही मिलने आते हैं. उनकी इस सामान्य शिष्टाचार भेंट को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में उनकी भूमिका से जोड़ना निंदनीय है. अलग-अलग समय और सन्दर्भों में हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कर, उन्हें जोड़कर राजनीतिक कारणों से उसके अन्य अर्थ लगाए जा रहे हैं. ये तथ्यों से विपरीत है और सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए जारी किये गए हैं. कानून का पालन करने वाले एक जिम्मेदार नागरिक के नाते निम्बाराम जी हर तरह की जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं. राजनीतिक निहित स्वार्थों के चलते तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है, जबकि इस मामले में किसी प्रकार की राशि का कोई आदान-प्रदान नहीं हुआ है. इसलिए इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर अनर्गल आरोप लगाना समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति के चरित्र हनन के समान है. वैचारिक द्वेष एवं दुर्भावना से लगाए जा रहे झूठे आरोपों एवं लांछनों का हम खंडन करते हैं और कानून सम्मत कार्यवाही करने के सभी प्रकार के विकल्प हमारे सामने खुले हैं.

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July 1st 2021, 2:23 pm

ट्विटर के खिलाफ कसता कानूनी शिकंजा, उत्तर प्रदेश के बाद मध्यप्रदेश में भी एफआईआर दर्ज

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नई दिल्ली. ट्विटर की मनमानी के बाद अब उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है. ट्विटर की वेबसाइट पर भारत के नक्शे से छेड़छाड़ कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग दिखाने का मामला लगातार बढ़ा रहा है. ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी के खिलाफ विभिन्न राज्यों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. मध्यप्रदेश पुलिस ने भी माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है. इस संबंध में राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने डीजीपी को कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जिसके बाद भोपाल साइबर सेल ने ट्विटर इंडिया के एमडी के खिलाफ केस दर्ज किया है. पिछले साल भी गलत नक्शा दिखाया था. बाल संरक्षण आयोग और महिला आयोग ने भी ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है. वहीं, भारत सरकार द्वारा जारी नए आईटी नियमों की पालना न करने पर आईटी एक्ट के तहत प्रदत्त कानूनी संरक्षण को वापिस ले लिया गया है.

कितने मामले दर्ज?

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का गलत नक्शा दिखाने के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की साइबर सेल ने ट्विटर इंडिया के एमडी के खिलाफ आईटी एक्ट के सेक्शन 505 के तहत केस दर्ज किया है. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी माहेश्वरी के खिलाफ केस दर्ज हुआ है. वहीं, दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ट्विटर के खिलाफ चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेट के मामले में केस दर्ज किया है. इससे पहले लोनी गाजियाबाद प्रकरण में ट्विटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है, इस मामले में मनीष माहेश्वरी को कर्नाटक उच्च न्यायालय से राहत मिली थी. हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है. ट्विटर के खिलाफ अब तक चार मामले दर्ज हो चुके हैं.

ट्विटर ने नए आईटी नियम लागू करने में आनाकानी की तो भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया. ट्विटर मामले को दिल्ली उच्च न्यायालय लेकर गया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली. इसके बाद 6 जून को ट्विटर ने उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू सहित कई लोगों के प्रोफाइल से ब्लू टिक हटा दिए. इस मामले में विवाद बढ़ा तो ट्विटर ने अपना फैसला वापस ले लिया.

गाजियाबाद केस से बिगड़े हालात

गाजियाबाद के लोनी में एक मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया. इस घटना का वीडियो ट्विटर पर काफी तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी सहित नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. उन पर घटना को गलत तरीके से पेश करने और उसे सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगा. मामले में गाजियाबाद पुलिस ने मनीष माहेश्वरी को 17 जून को समन भेजा, लेकिन उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय की शरण ली. वहां से उन्हें राहत मिली और अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. इस आदेश को उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

25 जून को ट्विटर ने कॉपीराइट का हवाला देते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का अकाउंट करीब एक घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया. इस मामले ने जब तूल पकड़ा तो ट्विटर को अपने कदम एक बार फिर पीछे खींचने पड़े.

इसके बाद 28 जून को ट्विटर ने अपनी वेबसाइट पर भारत का गलत नक्शा लगा दिया. इस नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग दिखा दिया. इसके बाद से ही ट्विटर की मुसीबत लगातार बढ़ रही है. नए आईटी कानूनों का पालन नहीं करने के चलते ट्विटर को मिला कानूनी संरक्षण भी खत्म कर दिया गया है. ऐसे में उसके खिलाफ आईपीसी के तहत केस दर्ज हो रहे हैं.

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July 1st 2021, 2:23 pm

12 साल के अभिमन्यु ने बनाया रिकॉर्ड, सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बने

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नई दिल्ली. भारतीय मूल के अमेरिकी बालक अभिमन्यु मिश्रा ने इतिहास रचा है. वे शतरंज के इतिहास में सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बने हैं. उन्होंने 19 साल पहले बने रूस के ग्रैंडमास्टर सर्जी कर्जाकिन रिकॉर्ड को तोड़ा. अभिमन्यु मिश्रा 12 साल 4 महीने और 25 दिन की आयु में ग्रैंडमास्टर बने हैं. जबकि अगस्त 2002 में जब कर्जाकिन सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने थे, तब उनकी उम्र 12 साल और 7 महीने थी. यानि उम्र में 3 महीने के अंतराल से रूसी ग्रैंडमास्टर का रिकॉर्ड तोड़ा.

ग्रैंडमास्टर बनने के लिए 100 ELO पॉइंट और 3 GM नॉर्म्स की जरूरत होती है. अभिमन्यु को इस बात का अच्छे से पता था. अप्रैल में अभिमन्यु ने अपना पहला GM नॉर्म हासिल किया. मई में दूसरा GM नॉर्म हासिल किया था. और, अब तीसरा GM नॉर्म भी हासिल कर ग्रैंडमास्टर बने हैं. इससे पहले साल 2019 में मात्र 10 साल की उम्र में दुनिया के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय मास्टर का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं.

अभिमन्यु मिश्रा ने बुडापेस्ट में आयोजित ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट में लियॉन मेनडोंका को हराकर ये उपलब्धि हासिल की. समाचार पत्र से बातचीत में अभिमन्यु ने कहा कि “लियॉन के खिलाफ मुकाबला मुश्किल था. पर आखिर में उन्होंने जो गलती की, उसका मुझे फायदा मिला. मैंने उन गलतियों का अच्छे से फायदा उठाया. जीत के साथ सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बनने की उपलब्धि हासिल कर मैं खुश हूं.”

अभिमन्यु मिश्रा के पिता अमेरिका के न्यू जर्सी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. और, उन्होंने ही अपने बेटे के यूरोप जाकर ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट में खेलने का बड़ा फैसला लिया था, जिसका परिणाम यह हुआ कि अभिमन्यु सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बना है.

हेमंत ने कहा – हम जानते थे कि ये हमारे लिए बड़े मौके की तरह है. हम बैक टू बैक टूर्नामेंट खेलने अप्रैल के पहले हफ्ते में बुडापेस्ट पहुंचे थे. ये मेरा और मेरी पत्नी स्वाति का सपना था कि हमारा बेटा अभिमन्यु सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने. आज ये सपना साकार हुआ. हम अपनी खुशी को बयां नहीं कर सकते.

अभिमन्यु का जन्म 5 फरवरी, 2009 में हुआ था. अभिमन्यु ने कई महीने बुडापेस्ट, हंगरी में गुजारे. जहां एक के बाद एक टूर्नामेंट खेले. इस दौरान कई पुरस्कार जीते और रिकॉर्ड बनाए.

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July 1st 2021, 2:23 pm

बंगाल हिंसा – सुनियोजित रूप से हिंसा को अंजाम दिया गया, पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई

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नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में विस चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा को लेकर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी. कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि बंगाल में सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा को अंजाम दिया गया. हिंसा के दौरान एक दल विशेष के समर्थकों को निशाना बनाया गया. हिंसा में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को साथ ही गुंडे और माफिया भी शामिल थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कमेटी ने कहा कि जिन लोगों ने वोट नहीं दिया, उनके साथ मारपीट की गई. महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और लोगों के घर तोड़ दिए गए. इतना ही नहीं हिंसा के बाद पीड़ितों को पुलिस के पास जाने से भी रोका गया. जांच कमेटी ने बंगाल सरकार से पीड़ितों को राहत पैकेज देने की बात कही है. साथ ही पुलिस हिंसा के सभी मामलों में केस दर्ज करे.

बंगाल में चुनाव बाद भारी हिंसा, आगजनी और लूटपाट हुई थी. हिंसा में करीब 14 लोगों की मौत हुई थी. हिंसा को लेकर सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर आरोप लगे थे. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा के कारणों की पड़ताल करने और राज्य में जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया था.

कमेटी के सदस्यों ने 63 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट तैयार करने के लिए टीम पश्चिम बंगाल गई थी, जहां 200 से ज्यादा तस्वीरें, करीब 50 से ज्यादा वीडियो एनालिसिस करके यह रिपोर्ट तैयार की गई है. इतना ही नहीं, यह टीम ग्राउंड पर लोगों से भी मिली. कमेटी ने CRPF की सुरक्षा लेकर पश्चिम बंगाल में जाकर अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें हिंसा प्रभावित कई गांवों का दौरा किया.

कमेटी की रिपोर्ट

– कमेटी ने पाया कि राज्य सरकार नागरिकों के मूल अधिकार के संरक्षण में पूरी तरीके से फेल रही.

– चुनाव बाद हुई हिंसा संगठित हिंसा (प्रीमेडिटेटेड हिंसा) थी.

– जो निर्दोष लोगों पर अटैक कर रहे थे वे क्रिमिनल, माफ़िया डॉन, पुलिस रिकॉर्ड में क्रिमिनल

– एक खास पार्टी के लोगों पर टारगेट करके हमले किए गए.

– पुलिस ने बड़ी लापरवाही की. शिकायत करने वाले को न्याय ना देकर, उल्टा उनके ऊपर ही केस दर्ज किए गए.

– शिकायत के बावजूद पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया.

– कई लोग घर छोड़कर पलायन कर गए उनके घरों को जला दिया गया.

– एक खास पार्टी के लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड छीन लिए गए. उनसे कार्ड वापसी के लिए तोलाबाजी (प्रोटेक्शन मनी) भी लेने की धमकी दी गई.

– कई जगहों पर क्रूड बम और पिस्टल की अवैध फैक्ट्री भी मिलीं.

रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य सरकार कमेटी को राज्य में आने से लगातार मना कर रही थी. कमेटी के चेयरमैन ने मुख्य सचिव को ग्राउंड रियलिटी के लिए 11 मई को पत्र लिखा था, 12 मई को मुख्य सचिव ने जवाब दिया और कहा कि कोरोना के चलते आप ग्राउंड में नहीं आ सकते हैं. अभी मामले पर कोर्ट में सुनवाई होनी है, इसलिए अभी राज्य में आना ठीक नहीं है.

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June 30th 2021, 4:07 pm

मंदिर की प्रतिमा नाबालिग बच्चे के समान और न्यायालय उसका संरक्षक

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चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा कि मंदिर की संपत्ति पर कब्‍जा कानून की दृष्टि से ‘अशिष्ट’ है. मंदिर की प्रतिमा एक नाबालिग बच्‍चे के समान होती है और न्‍यायालय नाबालिग बच्‍चे और संपत्ति का संरक्षक होता है. पलानी मंदिर की जमीन पर अवैध कब्‍जे को लेकर सुनवाई के दौरान मद्रास उच्‍च न्‍यायालय ने महत्‍वपूर्ण फैसला दिया.

मद्रास उच्‍च न्‍यायालय ने आदेश में कहा कि मंदिर की प्रतिमा नाबालिग बच्‍चे के समान है और इसकी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी न्‍यायालय की है. इसी के साथ न्‍यायालय ने पलानी के प्रसिद्ध श्री धनदायुधापानी मंदिर की जमीन पर अवैध कब्‍जा हटाने का निर्देश दिया. यह तमिलनाडु के अमीर मंदिरों में से एक है.

न्‍यायमूर्ति आर.एम.टी टीका रमन ने अपने फैसले में कहा, ‘न्‍यायालय एक व्‍यक्ति के नाबालिग बच्‍चे और संपत्ति, दोनों का अभिभावक होता है. उसी तरह, न्‍यायालय मंदिर की प्रतिमा की संपत्तियों का संरक्षक भी है. न्‍यायालय को एक नाबालिग बच्‍चे की तरह ही प्रतिमा की संपत्तियों सुरक्षा करनी होती है. हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पलानी में भगवान सुब्रमण्‍यम स्‍वामी यानि कार्तिक नाबालिग बच्‍चे के रूप में निवास करते हैं. इसलिए न्‍यायालय को प्रतिमा की संपत्ति की रक्षा एक नाबालिग बच्‍चे की तरह करनी होती है.’

चार हफ्ते में कब्‍जा हटाना होगा

इसी के साथ उन लोगों की याचिकाएं खारिज कर दीं, जो पीढ़ियों से मंदिर की जमीन पर कब्‍जा जमाए बैठे हुए थे. न्‍यायालय ने कहा कि ब्रिटिश सरकार से ‘अनुदान’ में मिली मंदिर की जमीन पर प्रतिवादी पीढ़ियों से जमे हुए थे. मंदिर को 60 वर्षों तक उसकी संपत्ति का उपयोग नहीं करने दिया.

न्‍यायमूर्ति रमन ने कहा, ‘‘प्रतिमा का संरक्षक होने के नाते इस न्‍यायालय को लगता है कि प्रतिवादी पीढ़ियों से संदिग्‍ध तरीके अपनाकर संपत्ति का आनंद ले रहे थे, इसलिए उन्‍हें बेदखल किया जाना चाहिए.’’ इसके अलावा, न्‍यायालय ने हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्‍ती विभाग के आयुक्‍त और सचिव को आदेश दिया कि वे मंदिर के कार्यकारी अधिकारी को चार सप्‍ताह के भीतर पूर्व के आदेश के अनुसार संपत्ति का कब्‍जा लेने के लिए उपयुक्‍त निर्देश दें. कार्यकारी अधिकारी के विफल रहने पर आयुक्‍त को अपनी निगरानी में जल्‍द से इसका निपटारा करना होगा.

क्‍या था मामला

तिरुपुर जिले के धारापुरम स्थित पेरियाकुमारपालयम गांव में श्री धनदायुधापानी मंदिर की 60.43 एकड़ जमीन है. 1863 में ब्रिटिश सरकार ने यह जमीन कुछ लोगों को ‘इनाम’ के तौर पर दे दी थी. बाद में तमिलनाडु में ‘इनाम अबॉलिशन एक्ट’ भी लाया गया, पर इसके तहत तहसीलदार स्तर पर समझौते के बाद कब्‍जाधारी मंदिर की संपत्ति पर बने रहे. इसके लिए वे संदिग्ध माध्यमों का सहारा लेते रहे. बचाव पक्ष का कहना था कि कई पीढ़ियों से जमीन पर उनका मालिकाना हक रहा है. लेकिन वे अपना दावा साबित नहीं कर सके. इसलिए न्‍यायालय ने इसे मुरुगन स्‍वामी की संपत्ति मानते हुए बचाव पक्ष को संपत्ति में किसी भी पट्टे पर मालिकाना दावा करने से रोक दिया. अब उन्‍हें यह जमीन खाली करनी पड़ेगी.

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June 30th 2021, 4:07 pm

धर्मांतरण – समस्या या साज़िश

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डॉ. नीलम महेंद्र

कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में लगभग एक हजार लोगों के धर्मांतरण का मामला सामने आया था. रिपोर्ट्स के अनुसार इन लोगों में मूक बधिर बच्चों से लेकर युवा और महिलाएं भी शामिल हैं. मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि धर्मांतरित लोगों में ज्यादातर पढ़े लिखे युवा थे. सरकारी नौकरी करने वाले से लेकर बीटेक कर चुका शिक्षक और एमबीए पास युवक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, एमबीबीएस डॉक्टर तक शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ 2020 में ही एक सख़्त कानून लागू कर दिया गया था. लेकिन हमारे देश में धर्मांतरण की समस्या केवल एक प्रदेश तक सीमित नहीं है. देश के विभिन्न राज्यों में जबरन व धोखाधड़ी से धर्मांतरण के मामले सामने आना सामान्य हो गया है. हमारे देश में धर्मांतरण की समस्या काफी पुरानी है. यही कारण है कि इस विषय में महात्मा गांधी कहते थे कि “मैं विश्वास नहीं करता कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का धर्मांतरण करे. दूसरे के धर्म को कम करके आँकना मेरा प्रयास कभी नहीं होना चाहिए. मेरा मानना है कि मानवतावादी कार्य की आड़ में धर्म परिवर्तन रुग्ण मानसिकता का परिचायक है.”

दरसअल, कभी मानवता के नाम पर तो कभी गरीबी और लाचारी का फायदा उठाकर, कभी बहला फुसलाकर तो कभी लव जिहाद के धोखे से हमारे देश में बड़ी तादाद में लोगों का धर्मांतरण कराया जाता रहा है. किंतु उत्तर प्रदेश के ताजा घटनाक्रम से विषय की संवेदनशीलता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि अब तक अधिकतर गरीब मजलूम और कम पढ़े लिखे लोग ही धर्मांतरण का शिकार होते थे. लेकिन इस बार धर्मांतरण करने वाले लोगों में पढ़े लिखे डॉक्टर, इंजीनियर और एमबीए डिग्रीधारक युवा हैं.

यहाँ कुछ कथित उदारवादी यह तर्क दे सकते हैं कि धर्म अथवा पंथ एक निजी मामला है और हर किसी को अपना धर्म चुनने का अधिकार है. तो प्रश्न यह कि मूक और बधिर बच्चे भी क्या उनकी इस परिभाषा के दायरे में आते हैं? प्रश्न यह भी कि अगर कोई एक व्यक्ति अपना धर्म अथवा पंथ बदलता है तो वो उसका निजी मामला हो सकता है, लेकिन जब लगभग एक हज़ार लोग धर्मांतरण करें तो भी क्या वो निजी मामला रह जाता है? एक व्यक्ति की आस्था बदलना उसका निजी मामला हो सकता है, लेकिन सुनियोजित रूप से एक हज़ार लोगों की आस्था में परिवर्तन निजी मामला कतई नहीं हो सकता. क्योंकि आस्था में परिवर्तन के साथ जिस धर्मांतरण को अंजाम दिया जाता है वो कहानी का अंत नहीं शुरुआत होती है. एक सुनियोजित षड्यंत्र शुरू होता है नाम बदलने के साथ, लेकिन व्यक्तित्व और विचार भी बदल देता है. जब कोई आदित्य अब्दुल्ला बनता है या बनाया जाता है तो सिर्फ नाम ही नहीं खान-पान और पहचान भी बदल जाती है. उपासना पद्धति ही नहीं बदलती, उसके त्योहार और उसकी आस्था भी बदल जाती है. अभी कुछ दिन पहले ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश में सामने आया था, जब एक महिला की मृत्यु के बाद उसके बेटे ने हिंदू रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था क्योंकि उसने धर्मांतरण कर लिया था. जाहिर है इस प्रकार की घटनाएं समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं.

यही कारण है कि इस विषय में स्वामी विवेकानंद का कहना था कि एक हिंदू का धर्मांतरण केवल एक हिंदू का कम होना नहीं, बल्कि एक शत्रु का बढ़ना है. और शायद उनके इस कथन का उत्तर प्रदेश के इस मामले से बेहतर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता. क्योंकि इस मामले को देखें तो घटना का मुख्य आरोपी उमर गौतम खुद धर्मांतरण से पूर्व श्याम प्रसाद सिंह गौतम था, जिसने लगभग एक हज़ार लोगों के धर्मांतरण को अंजाम दिया. इस व्यक्ति का एक तथाकथित वीडियो सामने आया है, जिसमें स्वयं स्वीकार कर रहा है कि कैसे स्वयं धर्मांतरण करके श्याम प्रसाद सिंह गौतम से मौलाना उमर गौतम बना और कैसे एक हज़ार लोगों का धर्मांतरण करके न जाने कितने ही सौरभ शर्मा को मोहम्मद सूफियान बनाया है.

इसे क्या कहा जाए कि भारत में धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के नाम पर जिस धर्मांतरण को अंजाम दिया जा रहा है, उसी धर्मांतरण को इस्लामी देशों में गैर कानूनी माना जाता है. यह जानना रोचक होगा कि इस्लामी कानून पालन करने वाले कई इस्लामी देशों जैसे सऊदी अरब, सूडान, सोमालिया जोर्डन, इजिप्ट में पंथ परिवर्तन गैर कानूनी है और इसके लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है. मालदीव में तो अगर कोई मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति अपना पंथ बदलता है तो उसकी नागरिकता ही समाप्त हो सकती है.

कहने को धर्मांतरण रोकने के लिए गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, सहित देश के नौ राज्यों में लागू है. ओडिशा में तो यह 1967 से लागू है. लेकिन धर्मांतरण रोकने में यह कानून कितना कारगर है, इस प्रकार की घटनाएं गवाही दे देती हैं. स्थिति की गंभीरता की ओर भी इशारा करती हैं. कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है उसे कठोरता से लागू करना महत्वपूर्ण है.

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June 30th 2021, 9:36 am
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