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वो वकील थी, ये प्रोफेसर... हाईराइज सोसाइटी लेकिन इनकी जाहिलियत पर थू करेंगे आप, इन गार्ड्स के हालात

Navbharat Times

नई दिल्ली : वो गरीब था तो उसका सरेआम गिरेबां पकड़ लिया। उसे सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां दी। बिना कुछ सोचे समझे उसे घसीट-घसीट कर मारने लगे। गेट खुलने में देरी से उनका पारा इतना चढ़ गया कि वो इंसान और जानवर के बीच का फर्क ही भूल गए। ऐसा लगा जैसे उनके अंदर का इंसान बिल्कुल ही मर चुका है। वो पढ़े लिखे थे एक वकील तो दूसरी प्रफेसर। हाइराइज सोसायटी में रहने वाले और इस तरह का व्यवहार करने वाले लोगों की जाहिलियत पर आप थू कहेंगे। लोग तो जानवरों के प्रति भी संवेदना का भाव रखते हैं लेकिन ये लोग तो इंसान को इंसान ही नहीं समझ रहे हैं। पहले सेक्टर 126 की वकील भव्या राय और अब क्लियो काउंटी में रहने वाली प्रफेसर सुतापा दास। सिर्फ पढ़ने से ही आदमी इंसान नहीं बन जाता। इनके जैसे लोग अपनी आदतों से लाचार होकर ये भूल जाते है की वो अपने और आस पड़ोस के लोगों से कैसा व्यवहार करते हैं। इसी तरह गुड़गांव के एक महंगे सोसायटी, द क्लोज नॉर्थ में पिछले महीने कुछ मिनटों के लिए लिफ्ट में फंसे एक व्यवसायी ने गार्ड के साथ बदसलूकी की। लिफ्ट में निकलने के बाद उसकी पहली प्रतिक्रिया गार्ड को थप्पड़ मारने की थी। वह गार्ड जिसने दरवाजा खोलने में मदद की थी। सोसायटी के गेट पर खड़े लोगों के साथ एक के बाद इस तरह की जो घटनाएं सामने आ रही हैं उन लोगों का दर्द और पीड़ा कितनी है, इस बात का अंदाजा शायद बहुत से लोगों को ना हो। 12-12 घंटे तक गेट पर खड़े होकर अपनी ड्यूटी कर रहे शख्स का भी आत्मसम्मान है, परिवार है, उसकी जिम्मेदारियां हैं। इन सब के लिए वह सबकुछ सहने को तैयार है। नौकरी खोने के डर से कुछ नहीं कहालिफ्ट से निकलने के बाद जिस गार्ड को थप्पड़ मारा था उसका नाम अशोक कुमार था। अशोक को अगर अपनी नौकरी खोने का डर नहीं होता, तो वह घटना के बाद आसानी से टूट सकता था। अशोक रोज 12 घंटे नौकरी करता है। उसे मुश्किल से सप्ताह में एक दिन की छुट्टी मिल पाती है। महीने के अंत में, वह 15,000 रुपये का वेतन घर ले जाता है। इससे उसे परिवार चलाना होता है। घर में बेटी की शादी के लिए पैसे भी बचाने होते हैं। दो बेटों की ट्यूशन फीस देनी होती है। घटना को अंजाम देने वाले बिजनसमैन के खिलाफ केस दर्ज होने और उसी स्थान पर काम पर लौटने का अपमान सहने के बाद उन्हें माफी मिल गई थी। अशोक के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। अशोक बताते हैं कि वह 10 साल पहले यूपी के औरैया से गुड़गांव आए थे। यहां तब से वह गार्ड के रूप में काम कर रहे हैं। गार्ड की जरूरत बढ़ी लेकिन तव्वजो नहीं मिलतीअशोक को थप्पड़ मारने से लगभग एक हफ्ते पहले, नोएडा के जेपी विश टाउन में अनूप कुमार और उनके कुछ साथी गार्डों के साथ महिला वकील ने बदसलूकी की थी। महिला वकील गेट खोलने में देरी से नाराज थी। घटना के बाद वकील को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। उस दौरान अपमान झेलने वाले अनूप लंबे समय इसे भूल नहीं पाएंगे। एनसीआर में बहुमंजिली इमारतों में रहने वाले लोगों की सोसायटीज का गार्ड एक अनिवार्य हिस्सा है। जैसे-जैसे समाज में लक्जरी सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है, फ्लैट दिन-ब-दिन आलीशान होते जा रहे हैं। ऐसे में गार्ड की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद इन लोगों को वो तव्वजो नहीं मिलती जिसके ये हकदार हैं। कोई भत्ता नहीं, ड्यूटी थका देने वालीअशोक जैसे गार्ड को प्रतिमाह 15 हजार रुपये मिलते हैं। जहां ये लोग रहते हैं वहां औसत रहने का खर्च 8 से 10 हजार रुपये महीना है। छुट्टी का दिन तय नहीं है। काम पर देरी से पहुंचने का मतलब है कि उनके वेतन में कटौती हो जाएगी। इन्हें कोई मेडिकल भत्ता नहीं मिलता है। नौकरी पर, गार्ड को नौकरी के विवरण में कई ऐड-ऑन मिलते हैं - जैसे कि हर बार 'सर' या 'मैडम' चलने पर सलाम करना, कार का दरवाजा खोलना, किराने का सामान ले जाना, ऑटो को बुलाना , स्कूल बस आदि से 'बाबा' को घर ले जाना। नई-नई नौकरी पर आए अंकित कुमार कहते हैं कि उन्होंने जल्दी सीख लिया कि किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए लोगों को सलाम करना होता है। 21 साल का अंकित गुड़गांव में एक कॉन्डोमिनियम में काम करता है। अंकित ने कहा कि मेरे सुपरवाइज को किसी ने शिकायत कर दी थी कि मैं फ्लैट में रहने वाले लोगों के गुजरने पर खड़ा नहीं हुआ। उन्हें नमस्ते नहीं की। कुछ लोगों ने उन्हें ठीक से अभिवादन नहीं करने के लिए डांटा। अंकित का कहना है कि अब, वह यह सुनिश्चित करता है कि वो ऐसा ही करे। हम ईगो की लड़ाई में फंस जाते हैंराजस्थान के दौसा के रहने वाले लोकेश सिंह कहते हैं कि यह एक गार्ड की नींद में उंघते हुए देखना लोगों को सबसे अधिक परेशान करता है। लोकेश कहते हैं कि हममें से कुछ लोग थकान के कारण सो जाते हैं। हमारा सारा समय बाहर, बिना पंखे के और अक्सर सीधी धूप में बीतता है। यह बहुत थकाऊ होता है। सशस्त्र बलों की तैयारी कर रहे 23 वर्षीय लोकेश कहता है कि हम ईगो की लड़ाई में फंस जाते हैं। 50 वर्षीय काली प्रसाद का कहना है कि अगर एक फ्लैट में रहने वाला चाहता है कि मैं उसका बैग ले जाऊं, तो दूसरा पूछेगा कि मैं गेट पर अपनी पोस्ट पर क्यों नहीं हूं। मैं एक ही समय में दो स्थानों पर कैसे हो सकता हूं? लेकिन वापस बात करना कोई विकल्प नहीं है क्योंकि शिकायत मिलने पर एजेंसी मुझे बर्खास्त कर देगी। कम वेतन में काम करने की मजबूरीबहुमंजिला इमारतों और फ्लैटों में फिलहाल 90 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है। साल 2024 तक और 30 लाख कर्मचारियों को इसमें नौकरी मिलने की उम्मीद है। बिजनस रिसर्च एजेंसी फ्रीडोनिया को उम्मीद है कि उद्योग लगभग 15% सीएजीआर (चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर) से बढ़कर 2024 तक 1.6 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह 2019 में 80,000 करोड़ रुपये से दोगुना हो जाएगा। गुड़गांव स्थित ईगल 4 के सलाहकार कर्नल रोहित चौधरी कहते हैं यह क्षेत्र निजी सुरक्षा एजेंसियों (विनियमन) अधिनियम, 2005 द्वारा शासित है। इसके बावजूद लगभग आधे वर्कफोर्स, ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रवासी, छोटे खिलाड़ियों द्वारा नौकरी पर रखे जाते हैं। इन लोगों को बेहद कम वेतन और खराब स्थिति में काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। आम तौर पर, हायरिंग पूल में युवा बेरोजगार और सेवानिवृत्त डिफेंस पर्सनल शामिल होते हैं। वे हेल्थ बीमा, न्यूनतम वेतन और छुट्टी जैसे लाभों के हकदार हैं, लेकिन चूंकि कई खिलाड़ी असंगठित हैं। ऐसे में शोषणकारी रणनीति के माध्यम से पैसा कमाते हैं तो नीतियों का उल्लंघन बहुत आम है। नए एलीट क्लास का विशेषाधिकारहमारे समाज में अभी भी बहुत असमानता है। इस बीच शहरी एलीट क्लास के रूप में एक ऐसा वर्ग सामने आया है जिसे लगता है कि उसके पास विशेषाधिकार है। गार्ड जिस बदसलूकी का सामना कर रहे हैं वह इसी एलीट वर्ग से निकला है। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में समाजशास्त्र की प्रोफेसर नंदनी सुंदर बताती हैं कि जाति व्यवस्था की व्यापकता से उपजे मन की गहरी कंडीशनिंग है, जो लोगों का सामाजिक पदानुक्रम के स्तर से मूल्यांकन करती है। उन्होंने कहा कि यह सामंती मानसिकता, वर्ग विभाजन के साथ, भेदभावपूर्ण व्यवहार का कारण बनती है। यहां कुछ नौकरियों या लोगों को सहकर्मियों या साथी नागरिकों के रूप में नहीं बल्कि एक वर्ग के रूप में देखा जाता है जो पदानुक्रम में उनके ऊपर के लोगों की सेवा करने के लिए होता है।

September 11th 2022, 11:42 am

नेपाल में यूपी से हो रही गेहूं की तस्करी, पुलिस से लेकर कस्टम तक पहुंच रहा पैसा! SDM के हाथ लगी हिसा

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महराजगंज: यूपी के महराजगंज में नौतनवा तहसील के एसडीएम ने सोनौली कोतवाली क्षेत्र के सीमावर्ती गांव शेष फरेंदा के एक गोदाम में छापेमारी की। जहां नेपाल में तस्करी के लिए रखा 80 बोरी गेहूं बरामद किया गया। यह खाद्य एवं रसद विभाग उत्तर प्रदेश के बोरियों में रखा गेहूं था। इसके बाद एसडीएम ने गोदाम को सील करते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश क्षेत्र के सप्लाई इंस्पेक्टर को दिया है। वहीं पूछताछ के लिए पुलिस ने दो लोगों को भी अपने हिरासत में लिया है। भारत नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर आए दिन तस्करी की बातें सामने आती हैं। वहीं जब से भारत सरकार ने नेपाल में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है, तब से इस खुली सीमा का फायदा उठाकर तस्कर गेहूं की तस्करी भारी पैमाने पर कर रहे हैं। रविवार को मुखबिर की सूचना पर नौतनवा एसडीएम ने इंडो नेपाल बॉर्डर के गांव शेष फरेंदा के एक गोदाम में छापेमारी कर नेपाल में तस्करी के लिए सरकारी बोरे में रखा हुआ गेहूं बरामद किया है। एसडीएम ने जब इसकी जांच की तो पता चला कि यह गोदाम नौतनवा के एक कोटेदार का है। काली डायरी में दर्ज है लेन देन का हिसाब रेड के दौरान एसडीएम ने 80 बोरी गेहूं के साथ-साथ एक काली डायरी भी बरामद किया है। इसमें कई एजेंसियों का नाम भी लिखा हुआ है। एसडीएम दिनेश मिश्रा ने बताया कि डायरी की जांच की जा रही है। एसडीएम के हाथ लगी डायरी में लिखा है कि 2 सितंबर 2022 को 20 हजार कस्टम, 15 हजार कोतवाली, 5 हजार मंडी, 2 हजार CO ड्राइवर, 25 सौ पुलिस, 7 सौ की दारू के अलावा कई लोगों से लेन देन का हिसाब भी दर्ज है। आरोपियों के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाईरेड के बाद नौतनवा एसडीएम ने गोदाम को सील करते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए सप्लाई इंस्पेक्टर को निर्देशित किया है। नौतनवा एसडीएम दिनेश मिश्रा ने बताया कि छापेमारी में नेपाल तस्करी के लिए रखी हुई सरकारी बोरे में 80 बोरे गेहूं बरामद हुआ, जिसको साइकिल के माध्यम से तस्कर और कैरियर नेपाल ले जाते हैं। एक कोटेदार का नाम सामने आ रहा है, जिसको लेकर भी जांच की जा रही है। वहीं बरामद काली डायरी की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट - विजय कुमार गुप्ता

September 11th 2022, 11:42 am

बैंकॉक भागने की फिराक में थीं अभिषेक बनर्जी की साली? ED ने कोलकाता एयरपोर्ट पर रोका

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कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी की साली मेनका गंभीर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता हवाई अड्डे पर रोक लिया। वह बैंकॉक जाने वाली थीं लेकिन उससे पहले ही उन्होंने एयरपोर्ट पर रोक कर ईडी ने नोटिस थमा दिया। अधिकारियों ने बताया कि मेनका गंभीर को धन शोधन के एक मामले में जांच में शामिल होने के लिए समन भी जारी किया गया था। मेनका गंभीरस शनिवार को रात करीब 9 बजे बैंकॉक के लिए उड़ान भरने वाले विमान में सवार होने के लिए हवाईअड्डे पर पहुंची थीं। सूत्रों ने रविवार को बताया कि मेनका गंभीर को केंद्रीय जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर आव्रजन मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया। उन्होंने बताया कि गंभीर को आव्रजन प्राधिकारियों ने विमान में सवार होने से रोक दिया और इसके बाद ईडी अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद वे हवाईअड्डे पर पहुंचे, उनसे बात की तथा उन्हें यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया। 12 बजे पेश होने का नोटिस सूत्रों के अनुसार, इसके बाद ईडी अधिकारियों ने धन शोधन के एक मामले में पूछताछ के लिए कोलकाता के सॉल्ट लेक इलाके में स्थित उसके कार्यालय में सोमवार (12 सितंबर) को सुबह 11 बजे उन्हें पेश होने के लिए समन सौंपा। धन शोधन का यह मामला पश्चिम बंगाल में कथित कोयला चोरी के मामले से जुड़ा है। पहले सीबीआई कर चुकी है पूछताछ ऐसी जानकारी है कि वह शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे हवाई अड्डे से कोलकाता में अपने घर के लिए रवाना हो गईं। ईडी ने अभी तक इस मामले में गंभीर से पूछताछ नहीं की है। सीबीआई ने पहले इस मामले में उनसे पूछताछ की थी। कोलकाता में ही पूछताछ का है निर्देश कलकत्ता हाई कोर्ट ने अगस्त में ईडी को दिल्ली के बजाय कोलकाता में अपने क्षेत्रीय कार्यालय में गंभीर से पूछताछ करने का निर्देश दिया था। साथ ही उसने मामले पर सुनवाई की अगली तारीख तक गंभीर के खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई न करने का भी निर्देश दिया था। गंभीर ने ईडी के समन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि उन्हें कथित कोयला घोटाला मामले के संबंध में पांच सितंबर को दिल्ली में पेश होने के लिए कहा गया और उन्होंने अदालत से एजेंसी को कोलकाता में पूछताछ करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। ईडी ने पहले इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे तथा टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी तथा उनकी पत्नी रुजिरा से पूछताछ की थी।

September 11th 2022, 11:42 am

NZ vs AUS: स्मिथ का शतक, फिंच की विदाई, ऑस्ट्रेलिया ने वनडे सीरीज में न्यूजीलैंड का किया 3-0 से सफाय

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केयर्न्स: स्टार बल्लेबाज स्टीव स्मिथ की शतकीय पारी से ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को तीसरे और अंतिम एकदिवसीय में रविवार को 25 रन से हरा दिया। तीन मैच की सीरीज 3-0 से जीतने के साथ ऑस्ट्रेलिया ने अपने कप्तान आरोन फिंच को शानदार विदाई दी। फिंच ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यह उनका आखिरी वनडे होगा और इसके बाद वह इस प्रारूप से संन्यास ले लेंगे। वह हालांकि टी-20 में कप्तान बने रहेंगे और ऑस्ट्रेलिया उनकी अगुवाई में ही अगले माह से शुरू होने वाले टी20 विश्व कप में भाग लेगा। स्टीव स्मिथ ने 131 गेंदों पर 105 रन बनाए, जिसमें 11 चौके और एक छक्का शामिल है। उन्होंने मार्नस लाबुशेन (52) के साथ तीसरे विकेट के लिए 118 रन की साझेदारी करके टीम को शुरुआती झटकों से उतारा। स्मिथ ने एलेक्स कैरी (नाबाद 42) के साथ भी 69 रन की भागीदारी की। इससे आस्ट्रेलिया ने पांच विकेट पर 267 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 49.5 ओवर में 242 रन पर आउट हो गई। इस तरह से ऑस्ट्रेलिया ने तीन मैचों की श्रृंखला 30 से जीती। न्यूजीलैंड का कोई भी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाया। उसकी तरफ से ग्लेन फिलिप्स ने सर्वाधिक 47 रन बनाए। निचले क्रम में जेम्स नीशाम ने 36 और मिशेल सैंटनर ने 30 रन का योगदान दिया लेकिन इससे न्यूजीलैंड हार का अंतर ही कम कर पाया। शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में फिन एलन (35), डेवोन कॉनवे (21) और कप्तान केन विलियमसन (27) अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा पाए। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से मिशेल स्टार्क ने तीन जबकि कैमरन ग्रीन और सीन एबॉट ने दो-दो विकेट लिए। इससे पहले फिंच अपने आखिरी वनडे में टॉस नहीं जीत पाए और इसके बाद उनकी खराब फॉर्म भी जारी रही जिसके कारण उन्होंने इस मैच से पहले ही संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। वह पांच रन बनाकर तेज गेंदबाज टिम साउदी (57रन देकर एक विकेट) की गेंद पर बोल्ड हो गए लेकिन इससे पहले ट्रेंट बोल्ट (25 रन देकर दो विकेट) ने जोश इंगलिस (10) के रूप में न्यूजीलैंड को पहला विकेट दिलाया था। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर एक समय दो विकेट पर 16 रन था। स्मिथ और लाबुशेन ने यहां से बखूबी जिम्मेदारी संभाली और शतकीय साझेदारी निभाई। लॉकी फर्गुसन ने लाबुशेन को आउट करके यह साझेदारी तोड़ी। इसके बाद स्मिथ ने सैंटनर की गेंद पर बोल्ड होने से पहले वनडे में अपना 12वां शतक पूरा किया। यह पिछले दो साल में इस प्रारूप में उनका पहला शतक है। ग्लेन मैक्सवेल ने आठ गेंदों पर 14 और कैमरन ग्रीन ने 12 गेंदों पर नाबाद 25 रन का योगदान दिया।

September 11th 2022, 10:53 am

रक्षा के क्षेत्र में बढ़ी ताकत, भारतीय नौसेना ने लॉन्च किया तारागिरि वॉरशिप, जानिए इसके बारे में सबक

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मुंबई, 11 सितंबर: भारतीय नौसेना ने परियोजना 17-ए के तहत बने तीसरे युद्धपोत ‘तारागिरि’ का रविवार को मुंबई में लॉन्च किया। मझगांव डाक शिपबिल्डर्स (एमडीएल) ने बयान जारी करके इसकी जानकारी दी। बयान में कहा गया कि यह युद्धपोत एक एकीकृत निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है। एमडीएल ने कहा, ‘गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुपालन में, भारत सरकार ने 11 सितंबर को राजकीय शोक घोषित किया (महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के कारण), यह कार्यक्रम एक तकनीकी लॉन्च तक सीमित था। चूंकि यह कार्यक्रम ज्वार पर निर्भर था, इसलिए तय कार्यक्रम में बदलाव संभव नहीं था।’ युद्ध पोत का नाम नेवी वाइव्स वेलफेयर ऐसोसिएशन (पश्चिमी क्षेत्र) की अध्यक्ष चारु सिंह, वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह, एफओसी-इन-सी पश्चिमी नौसेना कमान, की पत्नी ने रखा। अजेंद्र बहादुर इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। 'तारागिरि' का निर्माण 10 सितंबर, 2020 को शुरू किया गया था और इसकी आपूर्ति अगस्त 2025 तक होने की उम्मीद की जा रही है। इस पोत को 3,510 टन के अनुमानित भार के साथ लॉन्च किया गया। है। इसे भारतीय नौसेना के इन-हाउस डिजाइन संगठन, ब्यूरो ऑफ नवल डिजाइन द्वारा डिज़ाइन किया गया है। एमडीएल ने जहाज के विस्तृत डिजाइन और निर्माण का काम किया है, जिसकी देखरेख युद्धपोत निगरानी दल (मुंबई) भी करता है। बयान में कहा गया है कि परियोजना 17ए का कुल मूल्य लगभग 25,700 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट 17A का पहला जहाज 'नीलगिरी', 28 सितंबर, 2019 को लॉन्च किया गया था और वर्ष 2024 की पहली छमाही में इसका समुद्री परीक्षण अपेक्षित है। इस परियोजना के तहत दूसरे युद्धपोत उदयगिरी को इस साल 17 मई को लॉन्च किया गया था और इसका समुद्री परीक्षण वर्ष 2024 की दूसरी छमाही में होने की उम्मीद है। बयान के मुताबिक इस परियोजना के तहत चौथे और अंतिम युद्धपोत का निर्माण 28जून को शुरू किया गया।

September 11th 2022, 10:53 am

अमर हो सकता है इंसान... इस समुद्री जीव में ऐसा क्या दिखा कि वैज्ञानिकों ने कर दिया इतना बड़ा दावा

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वॉशिंगटन: शुरू से ही एक विवादित विषय रहा है। प्राचीन धर्म ग्रंथों में कई ऐसे महापुरुषों का जिक्र है, जिन्हें अमरता प्राप्त थी। लेकिन, यह आज के समय में बिलकुल भी संभव नहीं है। आज न तो हवा शुद्ध बची है और ना ही पानी। धरती पर बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं है। इन सबके बीच वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसे शोध में सफलता पाई है, जिसके आधार पर भविष्य में इंसानों को अमर बनाया जा सकता है। अगर सब कुछ सही चला तो इंसानों की बढ़ती उम्र पर रोक लगाई जा सकेगी यानी वो हमेशा जवान बना रहेंगे यानी उन्हें बुढ़ापा का सामना नहीं करना होगा। इसे अमर जीवन के रहस्य की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जेलिफिश की प्रजाति में उम्र को रोकने की क्षमता इस शोध को स्पेन में ओविएडो यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोकेमेस्ट्री एंड मॉलीक्यूलर बॉयोलाजी की एक टीम अंजाम दे रही है। यह टीम पृथ्वी पर मौजूद अमरता प्राप्त जीवों में से एक का अध्ययन कर रही है। इस जीव का नाम जेलिफिश है, जिसे ट्यूरिटोप्सिस दोहरनी (Turritopsis Dohrnii) के नाम से जाना जाता है। इसमें वयस्क जीवन से दोबारा लार्वा स्टेज में वापस जाने की क्षमता है। हालांकि, किसी बीमारी या दूसरे जीव के खाने के कारण जेलीफिश का अंत हो सकता है। जब तक चाहे, तब तक जीवित रह सकता है जेलिफिश प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन को कंपेरेटिव जीनोमिक्स ऑफ मॉर्टल एंड इम्मोर्टल निडेरियन्स अनवील्स नोवेल कीज बिहाइंड रिजुवेनेशन कहा जाता है। मारिया पास्कुअल, विक्टर क्वेसाडा और ओविएडो यूनिवर्सिटी की टीम ने ट्यूरिटोप्सिस दोहरनी की जिनोम सिक्वेंसिंग की है। यह जेलीफिश की एकमात्र ज्ञात प्रजाति है, जो एक तरह से अमर है। यह जीव उम्र बढ़ने को उलटने की क्षमता रखता है और वास्तव में तब तक जीवित रहता है जब तक वह चाहता है। जेलिफिश के डीएनएन की इंसानों से समानता शोधकर्ताओं ने बताया कि ट्यूरिटोप्सिस डोहरनी एकमात्र ऐसी मेटाज़ोन है जो अपने आप को फिर से बच्चा बना सकता है। मतलब यह जीव खुद का बार-बाक कायाकल्प कर सकता है। यह क्षमता इस जीव के जैविक अमरता की ओर इशारा करता है और उम्र बढ़ने की हमारी समझ को चुनौती देता है। उन्होंने कहा कि हमने रेप्लिकेशन, डीएनए रिपेयर, टेलोमेयर मेंटीनेंस, रेडॉक्स इंवायरमेंट, स्टेम सेल पापुलेशन और इंटरसेल्यूलर कम्यूनिकेशन का पता लगाया है। वे मनुष्यों के समान डीएनए के कुछ हिस्सों को खोजने में भी कामयाब रहे हैं। ऐसे में दशकों बाद इकना इस्तेमाल मनुष्यों में उम्र बढ़ने को उलटने के लिए किया जा सकता है, या कई बीमारियों को ठीक करने में मदद कर सकता है जो हम वर्तमान में नहीं कर सकते हैं।

September 11th 2022, 10:39 am

पहले एक्साइज पॉलिसी, अब DTC बसों की खरीद, समझिए दिल्ली सरकार पर 'CBI फंदे' का ताजा मामला

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नई दिल्ली: दिल्ली की केजरीवाल सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अभी आबकारी नीति को लेकर सीबीआई जांच का सामना कर रही ही थी कि एक और जांच से इस सरकार का पाला पड़ सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने डीटीसी की ओर से 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रस्ताव भेजने को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया है कि शिकायत में कहा गया है कि 1000 लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 में खरीद बोली और मार्च 2020 में बीएस-6 बसों के लिए सालानमा रखरखाव के अनुबंध के लिए लगाई गई दूसरी बोली में अनियिमताताएं हुई हैं। इधर केजरीवाल सरकार पर एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोप लगे उधर भारतीय जनता पार्टी को जैसे फ्रंटफुट पर खेलने का एक और मौका मिल गया। बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूछ लिया कि इतने घोटालों के बाद कैसे कहा जाए कि यह दिल्ली में कट्टर ईमानदार सरकार है। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह और इसपर आम आदमी पार्टी को कितना घाटा और भारतीय जनता पार्टी को कितना फायदा होने वाला है। क्या है डीटीसी बस घोटाले को लेकर लगे आरोप जान लीजिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर आबकारी नीति को लेकर सीबीआई जांच के आदेश के बाद डीटीसी बसों की खरीद को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। आम आदमी पार्टी सरकार पर डीटीसी की 1000 बसों की खरीद और मेंटेनेंस में अनियमितताओं के आरोप हैं। मुख्य सचिव के प्रस्ताव पर दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने जांच सीबीआई को सौंप दी है। असल में एलजी वीके सक्सेना को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि 1000 लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई में 2019 की खरीद बोली और मार्च में 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद और रखरखाव के अनुबंध के लिए लगाई गई दूसरी बोली में भारी अनियमितताएं हुई हैं। इस कथित भ्रष्टाचार पर 22 जुलाई को शिकायत पर दिल्ली सरकार के विभागों की प्रतिक्रयाएं लेने के लिए मुख्य सचिव के पास भेजा गया था। मुख्य सचिव ने 19 अगस्त को एलजी को रिपोर्ट सौंपी जिसके बाद रविवार को दिल्ली के एलजी ने शिकायत सीबीआई को सौंप दी है। डीटीसी बस घोटाले पर आप-बीजेपी आमने-सामने आबकारी नीति पर आम- आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच चल रही जुबानी जंग रविवार को कथित डीटीसी बस घोटाले के आरोपों पर फिर तेज हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम आदमी पार्टी की ओर से आतिशी सिंह, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज ने कमान संभाली और अपनी सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर जवाब दिया। आप नेता आतिशी सिंह ने कहा कि एक बड़े न्यूज़ चैनल ने Survey में देश भर के लोगों से पूछा- क्या 2024 में सीएम केजरीवाल पीएम मोदी के लिए चुनौती हैं? 63% जवाब- हाँ। Modi जी की नींद उड़ गई। LG-CBI-ED को कहा गया-पराने, फ़र्ज़ी केस निकालो, किसी मंत्री को जेल भेजो, केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता रोको। आतिशी ने आगे कहा कि हमें पता है LG पर प्रधानमंत्री का प्रेशर है कि रोज़ अरविंद केजरीवाल जी के ख़िलाफ़ कुछ निकालें,लेकिन इस बार आनन-फ़ानन में ग़लती कर दी वो फाइल भेज दी जो पहले दो बार CBI के पास भेज चुके थे। जब बस ख़रीद का टेंडर नहीं हुआ, बस ख़रीदी नहीं गई तो घोटाला कैसे हुआ? दुर्गेश पाठक ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगे आरोपों पर बोलते हुए कहा कि LG रोज़ एक फ़र्ज़ी जांच बैठा देते हैं। आज जिस DTC बस ख़रीद की जांच CBI को दी, पूर्व LG ने उसमें Clean Chit दी है। इनका मक़सद ठेकेदारों को Message देना है कि हिस्सा कहाँ देना है? LG से विनती है कि हम ईमानदार लोग हैं। हमसे ये नहीं होगा। आप ख़ुद ठेकेदारों से Deal कर लो। पाठक ने आगे कहा कि रोज़ सुबह उठकर Inquiry? जो जाँच हो चुकी, LG ने Clean Chit दे दी, उसपर फिर जाँच? अपनी जाँच भी तो कराइये। आपके Head Cashier ने लिख कर दिया कि आपके ब्लैक के पैसे व्हाइट करता था, बेटी को टेंडर दिए आपने, कोर्ट की अवहेलना कर कैश पेमेंट की उनकी जाँच में मिर्ची लगती है? दिल्ली जल बोर्ड के चेयरमैन सौरभ भारद्वाज ने इन आरोपों पर तंज कसते हुए तीन तोतों वाली तस्वीर ट्वीट की। सौरभ ने कहा कि कितना आसान है - भाजपा की शिकायत, भाजपा का LG,भाजपा की CBI खुद शिकायत करो, LG से चिट्ठी लिखवाओ, खुद CBI को जाँच भेजो, रोज़ बोलो भ्रष्टाचार हो गया एक भाषा बोलने वाले तोते हैं। आम आदमी पार्टी पर लगे आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी खूब निशाना साधा। दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने डीटीसी बस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने का स्वागत किया है। उन्होंने इसके साथ कहा कि आम आदमी पार्टी का भ्रष्टाचार का एक और चेहरा सामने आ गया है। डीटीसी बसों की खरीद के लिए पहले टेंडर जारी किए गए उसके बाद नियमों का उल्लंघन किया गया। कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसी कंपनी को दिया गया जिस कंपनी ने उस बोली में शामिल ही नहीं थी। जांच के बाद पता चलेगा कि कितना बड़ा घोटाला हुआ है। बीजेपी प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा कि अरविंद सरकार का नया घोटाला, पहले हवाला कांड फिर शराब कांड फिर स्कूल कमरों का घोटाला और अब डीटीसी बस घोटाला। केजरीवाल रकार में ऐसा कोई विभाग नहीं है जहां भ्रष्टाचार नहीं हुआ हो। खुराना ने मंत्रियों को भी बर्खास्त करने की मांग की है। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि 'पहले से ही आबकारी विभाग में घोटाला, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में घोटाला और अब ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में घोटाला... फिर कैसे कहा जाए कि दिल्‍ली में कट्टर ईमानदार सरकार है।' बीजेपी को फायदा 'आप' को नुकसान? यह सबको पता है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी सबसे मजबूत है। दिल्ली की जनता आप की ओर से चलाई जा रही स्कीम, स्कूलों में बदलाव के चलते दो बार भारी वोटों से विजयी बनाया है। आम आदमी पार्टी अपने आपको हर मौकों पर कट्टर ईमानदार बताती आई है। दिल्ली के अलावा अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में भी सरकार है। वहीं गुजरात, हिमाचल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में चुनाव हैं। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली मॉडल के चलते पंजाब के बाद बाकी राज्यों में प्रचार के दौरान जोर-शोर से इसे प्रमोट करेंगे। गुजरात में तो उन्होंने इसकी शुरुआत भी कर दी है जिसे वह आगे लेकर जाएंगे। बस भाजपा की नजर इसी दिल्ली मॉडल को निशाना बनाने की है। एबीपी सी-वोटर सर्वे में भी आबकारी नीति से केजरीवाल सरकार को बहुत नुकसान होता हुआ दिखााई नहीं दे रहा है। वहीं कई सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि अरविंद केजरीवाल मोदी को चुनौती देते हुए दिख रहे हैं। इन सबके बाद दिल्ली में बीजेपी इन्हीं कथित घोटालों को लेकर आप को बैकफुट में धकेलना चाहती है। जिस दिल्ली मॉडल की चर्चा केजरीवाल देश ही नहीं विदेशों में भी करते नहीं थकते उसी मॉडल पर भारतीय जनता पार्टी चोट करना चाहती है। आबकारी और अब डीटीसी के माध्यम से भाजपा यह साबित करने में जुटी है कि केजरीवाल सरकार जिस कट्टर ईमानदारी की दुहाई देती हुई नहीं थकती उसकी सच्चाई कुछ और ही है। कई प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बीजेपी यह साबित करने में जुटी है कि इस सरकार की कट्ट्र ईमानदारी वाली बात झूठी है और यह जनता को मूर्ख बना रही है। भाजपा को यह भी पता है कि अगर दिल्ली मॉडल को वह फ्लॉप बताने में सफल हो जाती है तो बाकी राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान उसे फायदा और AAP को नुकसान हो सकता है। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि कौन किसपर भारी पड़ेगा क्योंकि फैसला जनता को करना है।

September 11th 2022, 10:39 am

कोलकाता का वह मार्ग जहां महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ी थी भीड़

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कोलकाता: कोलकाता का चौरंगी मार्ग, जिसे ब्रिटिश शासन का सबसे प्रबल विरोध स्थल माना जाता था, वहां 1961 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की एक झलक पाने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग उमड़ पड़े थे। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), कलकत्ता के प्रोफेसर आलोक कुमार 1961 की सर्दियों की उस एक सुबह को याद कर रहे थे, जब ब्रिटेन की महारानी कलकत्ता (अब कोलकाता) की यात्रा पर आई थीं। उस समय वह 'परियों की कहानी की नायिका' जैसी नज़र आ रहीं थीं। उन्होंने कहा कि लोग 'इस खूबसूरत महिला को सफेद दस्ताने वाले हाथ लहराते और मुस्कुराते हुए देखने के लिए उत्साहित थे।' ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का आठ सितंबर को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 70 साल तक ब्रिटेन पर शासन किया। वह फरवरी 1961 में भारतीय उपमहाद्वीप की अपनी यात्रा के दौरान इस शहर में आई थीं। कलकत्ता शहर कांग्रेस, फॉरवर्ड ब्लॉक, कम्युनिस्ट और अनुशीलन समिति और युगांतर जैसे समूहों के सशस्त्र क्रांतिकारियों का गढ़ था। 'रॉयल कलकत्ता क्लब का किया था दौरा' एलिजाबेथ द्वितीय की यात्रा से महज डेढ़ दशक पहले “वंदे मातरम” और “जय हिंद” के नारों और बम के धमाके से गूंजने वाली सड़कें उस समय महारानी की जय-जयकार करती नज़र आ रहीं थीं। इस दौरान अन्य स्थानों के अलावा, उन्होंने 1921 में उनकी परदादी की याद में बनीं संगमरमर की इमारत यानी विक्टोरिया मेमोरियल हॉल का दौरा किया। उन्होंने 1847 में स्थापित रॉयल कलकत्ता टर्फ क्लब का भी दौरा किया। महारानी के साथ उनके पति प्रिंस फिलिप, ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग भी थे। आरसीटीसी की अपनी यात्रा के दौरान नर्सरी कक्षा के छात्र आलोक को शाही मेहमानों की एक झलक देखने मिली, जो उनकी स्मृति में आज भी ताजा है। 'धूल उड़ने से रोकने की हो रही थी पूरी कोशिश' आलोक की मां उन्हें और उनके भाई-बहनों को मध्य कोलकाता के चौरंगी रोड पर एक रिश्तेदार के घर ले गई थीं क्योंकि महारानी का काफिला वहीं से गुजरने वाला था। कुमार ने बताया, 'ऐसा लग रहा था कि पूरा कलकत्ता उनके घर आ गया है। लेकिन वह इससे नाराज़ नहीं थे। क्या नज़ारा था! जैसे ही हम बैठे, हमने देखा कि सफाईकर्मी सड़क की सफाई कर रहे थे। धूल को उड़ने से रोकने के लिए भिश्ती चमड़े के थैले से सड़क पर पानी छिड़क रहे थे।' 'लोगों को धकेल रही थी पुलिस' पुलिस लोगों को सड़क से फुटपाथ तक धकेलने की पूरी कोशिश कर रही थी। कुमार ने कहा, 'एक व्यक्ति जो सुबह का अखबार पढ़ रहे थे, अचानक उछल पड़े। दरअसल, उन्होंने महारानी के काफिले के मार्ग का पता लगा लिया था। हमें इस बात से राहत मिली कि काफिला हमारी इमारत के सामने से आगे बढ़ेगा।' 'प्रिंस फिलिप भी थे साथ' उन्होंने कहा, 'महारानी ने मुस्कान के साथ अभिवादन किया। प्रिंस फिलिप उनके साथ थे। वह परियों की कहानी की नायिका जैसी लग रही थीं। अचानक मैंने उस खूबसूरत महिला को उनके टियारा और सफेद दस्ताने में हाथ लहराते और मुस्कुराते हुए देखा, और फिर वह चली गईं। मैं थोड़ा निराश हुआ। मुझे नहीं पता कि मैं क्या उम्मीद कर रहा था।'

September 11th 2022, 10:39 am

संजय जायसवाल समेत बिहार BJP के इन 10 नेताओं की Y कैटेगरी की सुरक्षा वापस, केंद्र सरकार का फैसला

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पटना: केंद्र सरकार की ओर से बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 10 नेताओं के दी गई सुरक्षा वापस ले ली है। केंद्र सरकार ने बिहार बीजेपी के नेताओं के यह सुरक्षा, सेना भर्ती की अग्निपथ योजना के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के चलते दी थी। दरअसल बिहार में अग्निपथ योजना का काफी विरोध हुआ था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के निशाने पर बीजेपी के नेता आ गए थे। संजय जायसवाल, तारकिशोर प्रसाद के आवास पर प्रदर्शनकारियों ने हमला बोला और तोड़फोड़ की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने बिहार के कुछ नेताओं को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी थी। केंद्र सरकार ने अब बिहार बीजेपी के 10 नेताओं की वाई श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली है। इन नेताओं से वापस ली गई वाई श्रेणी की सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने बिहार में बीजेपी के 10 नेताओं की वाई श्रेणी सुरक्षा वापस ले ली गई है। यह नेता हैं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जायसवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, अररिया के सांसद प्रदीप सिंह, दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर, किशनगंज के एमएलसी दिलीप जायसवाल, कटिहार से एमएलसी अशोक अग्रवाल, विस्फी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल, दीघा विधायक संजीव कुमार चौरसिया, दरभंगा के विधायक संजय सरावगी है। जानकारी नहीं, मेरे पास अभी सुरक्षा है: हरिभूषण ठाकुर बचौल सुरक्षा वापस लिए जाने पर जब बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल से बात की गई तो उन्होंने कहा- 'अभी इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मेरे पास अभी सुरक्षा है।' जून महीने में बिहार बीजेपी के 10 नेताओं को मिली थी सुरक्षा बता दें, केन्द्र सरकार ने सेना में बहाली के लिए 'अग्निपथ योजना' की घोषणा की थी। तब जून महीने में काफी विरोध हुआ था। विरोध का सबसे बड़ा केंद्र बिहार बना था। यहां ट्रेनों में आगजनी की गई और बीजेपी नेताओं को निशाना बनाया गया था। तब इन सभी बीजेपी नेताओं को वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई गई थी।

September 11th 2022, 10:39 am

Asia Cup Final: श्रीलंका vs पाकिस्तान, यहां देखें LIVE Score

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September 11th 2022, 10:10 am

सोमवार को आएगा ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर फैसला, जानिए अब तक के सारे अपडेट

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वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी के जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश सोमवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाने वाले हैं। राखी सिंह और अन्य चार महिलाओं ने याचिका डाली हुई है। ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन का मामला वाराणसी की अदालत में चल रहा है। जिस पर पूरे परिसर के सर्वे का काम अदालत के आदेश के बाद कराया गया। मई और जून में पूरे देश में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ था। वाराणसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज को सुनवाई पूरी कर फैसला देने के लिए कहा था। इसी मामले पर सोमवार को जिला जज अब फैसला देंगे। इसी बीच 3 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उस टिप्पणी के बाद अब हिंदू पक्ष के लोगों को लग रहा है कि फैसला उनके हक में आएगा। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर संत समाज गदगद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय और अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद ने 1991 के विशेष उपासना स्थल कानून को वैधानिक चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान बीते 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम टिप्पणी की। स्वामी जितेंद्र ने बताया कि सुनवाई के दौरान काशी और मथुरा में चल रहे मामलों का भी जिक्र हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि यह कानून काशी और मथुरा में चल रहे मामलों पर कोई असर नहीं डालता है, वो मामले चलते रहेंगे और सुनवाई जारी रहेगी। इस टिप्पणी को लेकर संत समिति ने अपनी प्रसन्नता जाहिर की थी और इसे एक जीत के तौर पर पेश किया था साथ ही आशा जताई की वाराणसी के अदालत में सोमवार को आने वाला फैसला उनके ही हक में होगा। क्या कहते हैं कानूनी जानकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील सौरभ तिवारी से जब एनबीटी ऑनलाइन ने सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का सोमवार को होने वाले फैसले पर असर की बाबत सवाल किया तो उनका स्पष्ट तौर पर मारना है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट (विशेष प्रावधान), 1991 जो 11 जुलाई वर्ष 1991 को लागू हुआ, कानून की नजरों से देखा जाए तो सीधे तौर पर यह विशेष कानून संविधान के अनुच्छेद 13, 25, 26 और 32 का उल्लंघन करता है। चूंकि, इस कानून को अभी तक सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट द्वारा अमान्य नहीं ठहराया गया है। ऐसे में यह अभी प्रभाव में है। हालांकि, इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। जहां मामला अभी विचाराधीन है। अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद को अलग श्रेणी का मानकर इस विशेष कानून की धारा 5 के तहत इस कानून के दायरे से अलग रखा गया था, लेकिन वर्तमान गौरी श्रृगांर काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद का जहां तक सवाल है तो यहां वर्ष 1991-92 तक गौरी श्रृंगार पूजा होती रही है। ऐसा कहा जाता है। ऐसे में यहां का धार्मिक स्वरूप पूर्णतः परिवर्तित नहीं माना जाएगा। ऐसे में यह विशेष कानून यहां लागू नहीं होगा। फिर भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले में अंतिम होगा। फासले को लेकर प्रशासन मुस्तैद, हर मूवमेंट पर कमिश्नर की सीधी नजर श्रृंगार गौरी में दर्शन मामले में सर्वे को लेकर काशी समेत पूरे देश में बेहद तनाव का माहौल था। अब इस पर फैसला आना है। इसे देखते हुए वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने बताया कि कमिश्नरेट वाराणसी में आगामी कानून व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने की तैयारी की समीक्षा की गई है। सभी धर्मगुरुओं एवं महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे कमिश्नरेट एरिया में धारा 144 लागू कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में एरिया डॉमिनेशन के तहत फ्लैग मार्च एवं फुट पेट्रोलिंग करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। होटल, धर्मशाला और गेस्ट हाउस में रुकने वालो की गहन जांच की जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर भी निगरानी की जा रही है इनपुट- अभिषेक कुमार झा

September 11th 2022, 10:10 am

चिंता मत कीजिए, मदरसों पर नहीं चलेगा बुलडोजर... आशंका और राजनीति के बीच यूपी सरकार ने किया साफ

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में निजी मदरसों के सर्वेक्षण को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं उत्पन्न हो रही है। इस पर राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है। तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से मदरसों पर बुलडोजर चलने का डर दिखाया जा रहा है। इन तमाम आशंकाओं और राजनीति के बीच राज्य सरकार ने इस सर्वेक्षण को सियासत से दूर रखने का आह्वान किया है। सरकार ने साफ किया है कि यह सर्वे सभी मदरसों को मुख्यधारा में लाने के लिए उठाया जा रहा कदम है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गत 31 अगस्त को राज्य में संचालित सभी गैर मान्यता प्राप्त निजी मदरसों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। इसके लिए 10 सितंबर तक टीम गठित करने का काम खत्म कर लिया गया है। आदेश के मुताबिक 15 अक्टूबर तक सर्वे पूरा करके 25 अक्टूबर तक रिपोर्ट सरकार को सौंपने को कहा गया है। प्रदेश में इस वक्त लगभग 16 हजार निजी मदरसे हैं, जिनमें प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षण संस्थान नदवतुल उलमा और दारुल उलूम देवबंद भी शामिल हैं। राज्य सरकार के फैसले के बाद अब इनका भी सर्वे किया जाएगा। इस फैसले को लेकर निजी मदरसों के प्रबंधन और संचालकों ने तरह-तरह की आशंकाएं जाहिर की गई हैं। इसे लेकर गत 6 सितंबर को दिल्ली में जमीयत-उलमा-ए-हिंद की एक बैठक भी हुई थी। इसमें कहा गया कि अगर सरकार सर्वे करना चाहती है तो करे लेकिन मदरसों के अंदरूनी मामलों में कोई दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। जमीयत-उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने रविवार को कहा कि सरकार शौक से सर्वे करे। उन्होंने कहा कि इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस बात का ख्याल रखा जाए कि मदरसों के आंतरिक मामलों में कोई दखलंदाजी न हो। जमीयत ने जारी किया है मदरसों को परामर्श मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत ने मदरसों को परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है कि वे अपने-अपने मदरसों में छात्र-छात्राओं की सुविधाओं को दुरुस्त करें। जमीयत की बैठक में कथित रूप से यह आशंका भी जताई गई कि सरकार इस सर्वे के जरिए अनेक मदरसों को अवैध घोषित करके उन पर बुलडोजर चलवा देगी। इसके लिए असम में कुछ मदरसों पर हुई कार्रवाई का जिक्र किया गया। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने इन सभी आशंकाओं को गलत करार देते हुए आश्वस्त किया कि किसी भी मदरसे पर बुलडोजर नहीं चलाया जाएगा। अंसारी ने कहा कि यह आशंका जताने वाले लोग पहले यह बताएं कि क्या पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य के किस मदरसे पर बुलडोजर चला। किसी मदरसे पर नहीं चलेगा बुलडोजर मंत्री ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाते हैं कि किसी भी मदरसे पर बुलडोजर नहीं चलेगा। दानिश अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार मदरसों को मुख्यधारा में लाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है और सर्वेक्षण का मकसद मदरसों की वास्तविक स्थिति को जानना तथा उनके स्तर को बेहतर बनाने में उनकी मदद करना है। अंसारी ने बताया कि सर्वे के दौरान मदरसा संचालकों से यह भी पूछा जाएगा कि वह सरकार की किन-किन योजनाओं से जुड़ना चाहते हैं। दानिश अंसारी ने कहा कि सर्वे के दस्तावेज के साथ राज्य सरकार की अल्पसंख्यकों से संबंधित विभिन्न योजनाओं की जानकारी से जुड़े कागजात और फार्म भी उन्हें उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे गांव-कस्बों में चल रहे मदरसों तक भी योजनाएं पहुंचाई जा सकेंगी जो अब तक नहीं पहुंची हैं। ओवैसी ने बताया है मिनी एनआरसी मदरसों के सर्वे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मदरसों के सर्वे को 'मिनी एनआरसी' करार दिया है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने भी भाजपा पर मुसलमानों को आतंकित करने के लिए सर्वे के नाम पर निजी मदरसों में भी हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। राज्य मंत्री अंसारी ने आलोचना कर रहे राजनीतिक दलों से कहा है कि मदरसों के सर्वे को सियासत से दूर रखें। दानिश अंसारी ने कहा कि ओवैसी अगर वाकई मुसलमानों के हितैषी हैं तो उन्हें सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे निजी मदरसों के उत्थान के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे इस कदम का समर्थन करना चाहिए। फरंगी महली ने की ओवैसी की आलोचना ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य और लखनऊ के शहर काजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने ओवैसी द्वारा मदरसों के सर्वेक्षण को मिनी एनआरसी करार दिए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हर चीज में सियासत ठीक नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निजी मदरसों का सर्वे करने से पहले राज्य सरकार द्वारा अनुदानित मदरसों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करे। मदरसों से पहले राज्य की सभी प्राथमिक पाठशालाओं में ऐसा सर्वे कराया जाए। जमीयत की बैठक में शामिल हुए निजी मदरसा संचालक उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से निजी मदरसों का सर्वेक्षण कराए जाने के मुद्दे पर जमीयत-उलमा-ए-हिंद की दिल्ली में 6 सितंबर को एक बैठक हुई। इसमें वो मदरसा संचालक शामिल हुए, जो बिना सरकारी मदद के मदरसे चला रहे हैं। बैठक में सर्वे को लेकर तीन बड़े फैसले हुए। इनमें सरकार से मिलकर मुस्लिम समाज का पक्ष रखने, इस पूरे मामले पर नजर रखने के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाने और गलत तरीके से सर्वे हुआ तो उसका विरोध करने का फैसला किया गया। बैठक में यह फैसला किया गया कि आगामी 24 सितंबर को दारुल उलूम देवबंद में संगठन की बैठक होगी। इसमें अगली रणनीति तय की जाएगी। लखनऊ स्थित मदरसा मसूद-उल-उलूम के संचालक मौलाना खलील अहमद ने बताया कि प्रदेश के निजी मदरसों में भी आमतौर पर राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाता है। निजी मदरसों का संचालन और रखरखाव, अमूमन जकात की रकम और लोगों के स्वैच्छिक आर्थिक और खाद्य पदार्थ रूपी सहयोग से किया जाता है। 31 अगस्त को आया था सरकार का आदेश उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 अगस्त को मदरसों में छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के सिलसिले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अपेक्षा के मुताबिक प्रदेश के सभी गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने का आदेश दिया था। सर्वे में मदरसे का नाम, उसका संचालन करने वाली संस्था का नाम, क्या मदरसा निजी या किराए के भवन में चल रहा है, मदरसे में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं की संख्या, पेयजल, फर्नीचर, विद्युत आपूर्ति तथा शौचालय की व्यवस्था, मदरसे में कुल कितने शिक्षक हैं, मदरसे में लागू पाठ्यक्रम, मदरसे की आय का स्रोत और किसी गैर सरकारी संस्था से मदरसे की संबद्धता से संबंधित सूचनाएं इकट्ठा की जाएंगी। प्रदेश में इस समय कुल 16,461 मदरसे हैं। इनमें से 560 को सरकारी अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में पिछले छह साल से नए मदरसों को अनुदान सूची में नहीं लिया गया है।

September 11th 2022, 10:10 am

एशिया कप : मजा तो भारत-पाक टक्‍कर में ही आता...हफीज की 'लाडला' थ्‍योरी की कुढ़न समझिए

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नई दिल्‍ली: एशिया कप 2022 (Asia Cup 2022) में भारतीय क्रिकेट टीम ने प्रशंसकों की तमाम उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया। सुपर 4 में वह पाकिस्‍तान और श्रीलंका से हारकर बाहर हो गई। शर्मा जी के ब्‍वॉय्ज ग्रुप की सबसे कमजोर टीम अफगानिस्‍तान को ही हरा सके। इसने पाकिस्‍तान और श्रीलंका के लिए फाइनल में खेलने का रास्‍ता खोल दिया। आज दोनों देश खिताबी जंग के लिए आमने-सामने हैं। ज्‍यादातर का रिऐक्‍शन यही है कि मजा तो भारत और पाकिस्‍तान की टक्‍कर में आता। फाइनल में भारत नहीं तो क्‍या मजा। लेकिन, सच यह है कि भारतीय क्र‍िकेट टीम (Indian Cricket Team) ने वो खेल ही नहीं खेला जिससे वह अंतिम दो में जगह बना पाती। यह और बात है कि आईसीसी से लेकर बीसीसीआई तक हर कोई यही चाहता है कि भारत हर फाइनल खेले। इसकी वजह है कि जब भारतीय क्रिकेट टीम फाइनल में होती है तो वह रनों की ही नहीं, कमाई की भी मशीन बन जाती है। हाल में पाकिस्‍तान के पूर्व ऑल राउंडर मोहम्‍मद हफीज (Mohammad Hafeez) की यह कुढ़न सामने भी आई थी। उन्‍होंने भारतीय क्रिकेट टीम को 'लाडला' करार दिया था। वह बोले थे कि टीम इंडिया अच्‍छा खेलने की वजह से नहीं बल्कि कमाई कराने के कारण लाडली है। बेशक, हफीज ने जल-भुनकर यह बात कही हो। लेकिन, यह सच है कि क्रिकेटिंग रेवेन्‍यू में भारत की बादशाहत है। इस बात को एशिया कप 2022 में खेले गए मैचों की व्‍यूवरशिप से समझने की कोशिश करते हैं। भारत और पाकिस्‍तान के बीच खेले गए एशिया कप के पहले मैच को टीवी पर 12.5 करोड़ लोगों ने देखा। यह मैच 28 अगस्‍त को खेला गया था। 2018 में हुए एशिया कप के मुकाबले इसे 30 फीसदी ज्‍यादा लोगों ने देखा। एशिया कप के पहले एक हफ्ते के दौरान 20 करोड़ लोगों ने मैच का लुत्‍फ लिया। भारत में क्रिकेट की दीवानगी को हर कोई जानता है। भारत के हर मैच में दर्शकों की संख्‍या इसका सबूत होती है। भारत के नहीं खेलने पर कैसे पड़ता है कमाई पर असर? भारत जब कोई मैच नहीं खेलता है तो कमाई पर कैसे असर पड़ता है, अब इसे समझने की कोशिश करते हैं। टीम इंडिया के किसी मैच में नहीं खेलने पर 10 सेकेंड के एडवर्टाइजिंग स्‍पॉट की कॉस्‍ट घटकर 5 लाख रुपये से कम रह जाती है। भारतीय क्रिकेट टीम के सीन में आते ही सारा गणित बदल जाता है। ऐसा होने पर ऐड स्‍पॉट की कॉस्‍ट बढ़कर 18-20 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं, अगर भारत-पाकिस्‍तान का मुकाबला हो तो यह कीमत 10 सेकेंड के लिए 23-25 लाख रुपये तक हो जाती है। इस तरह क्रिकेटिंग इवेंट में भारत का फाइनल में नहीं पहुंचना ब्रॉडकास्‍टर के रेवेन्‍यू पर बेहद खराब असर डालता है। यही कारण है कि आईसीसी, बीसीसीआई से लेकर ब्रॉडकास्‍टर और प्रशंसक तक हर कोई चाहता है कि फाइनल में कोई भी पहुंचे, लेकिन उनमें से एक टीम भारत जरूर हो। भारत के फाइनल में रहने भर से सबकुछ बदल जाता है। हफीज का तंज पूरी तरह बेबुनियाद नहीं ऐसे में मोहम्‍मद हफीज के तंज को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। उसमें थोड़ा सच भी है। हालांकि, उनका यह कहना बिल्‍कुल फिजूल है कि भारतीय टीम को सिर्फ इसलिए तवज्‍जो मिलती है कि वह रिकॉर्ड रेवेन्‍यू पैदा करने का दमखम रखती है। लगता है कि हफीज ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बिना देखे ही ऐसा मूर्खतापूर्ण बयान दे दिया। पूर्व ऑल राउंडर ने क्‍या कहा था? एक शो में मोहम्‍मद हफीज ने कहा था कि हमारे यहां कमाऊ पूत सबसे प्‍यारा होता है। वह सबसे ज्‍यादा लाडला होता है। उसकी चुम्मियां सबसे ज्‍यादा ली जाती हैं। इंडिया एक रेवेन्‍यू मेकिंग कंट्री है। जब बाइलेट्रल सीरीज भी होती हैं तो उसमें भी सभी को फायदा होता है। जब एंकर ने उनसे पूछा कि वो लाडले सिर्फ इस वजह से हैं कि अच्‍छा खेलते हैं या इसलिए कि वो अच्‍छा कमा कर देते है तो हफीज ने कहा था कि इसकी वजह दूसरी वाली है। उनके मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को धुआंधार कमाई कराती है। बीसीसीआई दुनिया का सबसे दौलतमंद बोर्ड है। यह प्रमुख आईसीसी मेंबर्स में खासा शक्तिशाली है।

September 11th 2022, 10:10 am

किसने बनवाया अमेरिका के लॉस एंजिल्‍स में इतना विशाल स्‍वामीनारायण मंदिर, जानिए इसकी खासियतें

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लॉस एंजिल्‍स: भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को लॉस एंजिल्‍स स्थित प्रसिद्ध के दर्शन किए। इसके बाद उन्‍होंने एक फोटोग्राफ भी ट्वीट की। कैलिफोर्निया के दक्षिण में स्थित लॉस एंजिल्‍स में हॉलीवुड के करीब स्थित यह मंदिर यहां बसे हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) की तरफ से बनवाये गए इस मंदिर की भव्यता और दिव्यता देखते ही बनती है। मंदिर की कई खास बाते हैं जो इसे सबसे अलग बनाती हैं। मंदिर का उद्घाटन दिसंबर 2012 में हुआ था और तब से इसकी लोकप्रियता में खासा इजाफा हुआ है। 100 मिलियन डॉलर की लागत इस मंदिर के निर्माण में करीब 100 मिलियन डॉलर की लागत आई है। मंदिर का उद्घाटन क्रिसमस के मौके पर हुआ था लेकिन हिंदुओं के लिए मौका दिवाली से कम नहीं था। 21 एकड़ से ज्‍यादा के हिस्‍से में फैले इस मंदिर का निर्माण साल 2009 में शुरू हुआ था। खुलने के बाद मंदिर कैलिफोर्निया और लॉस एंजिल्‍स में भारतीय आबादी के लिए प्रमुख अध्‍यात्मिक केंद्र बन गया। BAPS के अधिकारियों के मुताबिक उनकी तरफ से पूरी दुनिया में 100 से ज्‍यादा मंदिर संचालित हो रहे हैं। इनमें से 50 मंदिर यूके और अमेरिका में है। लॉस एंजिल्‍स स्थित स्‍वामीनारायण मंदिर में भव्‍यता का प्रतीक है। राजस्‍थान से आया गुलाबी पत्‍थर मंदिर में लगा गुलाबी पत्‍थर खासतौर पर राजस्‍थान से भेजा गया था। इसके अलावा मंदिर में इटैलियन मार्बल लगा है जिसे मंदिर में खासतौर पर प्रयोग किया गया। मंदिर के अधिकारियों की मानें तो मंदिर को शिल्‍प शास्‍त्र के सिद्धांतों को मानते हुए नागराडी स्‍टाइल में तैयार किया गया है। मंदिर में एक क्‍लासरूम, जिम, एक डाइनिंग हॉल, नाश्‍ते की दुकान, प्रदर्शनी हॉल और लिविंग क्‍वार्ट्स भी हैं। इसके अलावा यहां पर खास शाकाहारी नाश्‍ता मिलता है और साथ ही मिठाई शॉप भी आकर्षण का केंद्र है। उत्‍तरी अमेरिका में यह पांचवां पारंपरिक हिंदु मंदिर है। सोलर सिस्‍टम वाला मंदिर इस मंदिर के निर्माण में 900 कार्यकर्ताओं ने अपना योगदान दिया था। साल 2011 में इसकी ऊंचाई बढ़ाकर इसे 78 फीट तक किया गया। मंदिर को आसानी से चिनो हिल्‍स से देखा जा सकता है। मंदिर में दो विशाल गुबंद, चार बालकनी, 122 खंभे और 129 तोरणद्वार हैं। 1000 साल तक टिक सकने वाला यह मंदिर एक इको-फ्रेंडली मंदिर है और सौर ऊर्जा से संचालित होता है। सोलर सिस्‍टम की वजह से वातावरण में 1556 टन कार्बन डाई ऑक्‍साइड कम होती है।

September 11th 2022, 10:10 am

धरती पर 'प्रलय' का क्या था कारण, कैसे विलुप्त हो गई थीं लाखों प्रजातियां, वैज्ञानिकों ने पता लगाया

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वॉशिंगटन: आज से लाखो साल पहले धरती से एकाएक हजारों प्रजातियां विलुप्त हो गई थीं। इनमें कई तरह के जीव-जंतु और पेड़-पौधे शामिल थे। उन प्रजातियों के अवशेष आज भी कई जगहों पर खुदाई के दौरान मिल जाते हैं। इनके विलुप्त होने के कारणों को लेकर हमेशा से विवाद रहा है। लेकिन, अब एक ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस रहस्य की गुत्थी को सुलझा लिया है। उनका दावा है कि पृथ्वी पर आज से 183 मिलियन वर्ष पहले विनाशकारी ों की एक श्रृंखला शुरू हुई थी। इससे दुनिया में अब तक का सबसे खराब सामूहिक विलोपन हुआ और धरती के हजारों प्रजातियों का अस्तित्व ही मिट गया। इस घटना से पृथ्वी के वायु मंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा भी काफी बढ़ गई थी। महाद्वीपों की गति मंद होने के कारण मची थी तबाही इस घटना को अर्ली टॉर्सियन ओशनिक एनोक्सिक इवेंट (टी-ओएई) के रूप में जाना जाता है। इस घटना ने हमेशा से वैज्ञानिकों के सामने बड़े पैमाने पर विस्फोट का कारणों का पता लगाने की चुनौती पेश की है। अब इस घटना को लेकर प्रसिद्ध साइंस जर्नल साइंस एडवांसेज में शुक्रवार को एक स्टडी प्रकाशित हुई है। इस स्टडी को करने वाली टीम का मानना है कि जीव-जन्तुओं के विलुप्त होने की घटना महाद्वीपों की गति में मंदी के कारण हो सकती है। हालांकि, महाद्वीपों के बीच दूरी आज भी लगातार बढ़ रही है। गति धीमी होने के धरती पर शुरू हो गया था ज्वालामुखी विस्फोट जुरासिक युग के दौरान गति में परिवर्तन होने के कारण धरती के अंदर मौजूद मैग्मा सतह पर आने लगा। इस कारण बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं हुईं। इतना ही नहीं, इससे पृथ्वी की सतह पर ज्वालामुखीय चट्टानों का विस्तार भी हुआ। इसके प्रमाण आज भी अफ्रीका के दक्षिणी हिस्सों और अंटार्कटिका में देखे जा सकते हैं। यह सिद्धांत पूरे इतिहास में कई अन्य प्रमुख ज्वालामुखी घटनाओं के समय के साथ भी फिट बैठता है। शोधकर्ता बोले- भविष्यवाणी करने में भी मिलेगी मदद ट्रिनिटी कॉलेज में तलछट विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर मीका रूहल ने कहा कि हमने कई अन्य ज्वालामुखीय घटनाओं का अध्ययन कर निष्कर्ष निकाला कि इनमें कोई न कोई समानता जरूर है। अतीत में कई ऐसे मौके आए हैं, जब पृथ्वी पर एक सीरीज में ज्वालामुखी विस्फोट हुए हैं। इनका संबंध महाद्वीपों के बीच बढ़ती दूरी से है। यह मॉडल पृथ्वी के इतिहास के काफी बड़े हिस्से पर लागू हो सकता है। नया सिद्धांत अगले बड़े पैमाने पर विलुप्त होने की घटना की भविष्यवाणी करने में भी मदद कर सकता है।

September 11th 2022, 10:10 am

विवादों में रहे स्वामी? राम मंदिर से लेकर बेटियों के तर्पण और पीएम मोदी तक, बयानों पर मचता था हंगामा

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अयोध्या: द्वारकाशारदापीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में उनका निधन हुआ। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पास बद्री आश्रम और द्वारकापीठ की जिम्मेदारी थी। अपने आश्रम में ही उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को उनके बयानों को लेकर खूब चर्चा मिली। राम मंदिर से लेकर बेटियों के तर्पण के मामले में उनके बयान खासे चर्चा में रहे थे। उन्होंने कई बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को भी घेरा था। आरएसएस के स्वरूप को बिगाड़ने पर भी करारा हमला बोला था। साथ ही, ताजमहल के नीचे शिवलिंग होने की बात कही है। राम मंदिर पर दिया था बड़ा बयान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया था। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के लिए पहुंचे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने 6 फरवरी 2021 को बयान दिया था। इस पर खूब विवाद गहराया था। मनकामेश्वर मंदिर में मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर नहीं बन रहा है। वहां आने वाले दिनों में विश्व हिंदू परिषद का कार्यालय बनेगा। मंदिर वह बनाते हैं, जो राम को मानते हैं। राम को आराध्य मानते हैं। राम को महापुरुष मानने वाले लोग मंदिर नहीं बनाते। शंकराचार्य ने कहा था कि भगवान राम महापुरुष नहीं, भगवान हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन पर भी सवाल उठाया था। पैसे जमा करने से लेकर आंदोलन की बात लिखने तक पर विश्व हिंदू परिषद को घेरा था। उन्होंने कहा था कि केवल भगवा पहन लेने मात्र से कोई सनातन धर्म को मानने वाला नहीं बन जाता है। किसान आंदोलन पर सुनाई थी खरी-खरी स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने किसान आंदोलन पर भी अपनी राय रखी थी। इसको लेकर उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को हल निकालने का संदेश दिया था। नोटबंदी से लेकर किसान बिल तक को उन्होंने सरकार का एक पक्षीय फैसला करार दिया था। कोरोना पर भी दिया था बयान कोरोना संक्रमण को लेकर भी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि जहां पर भी दूषित खाना और दूषित जल है, वहां बीमारी का प्रसार हुआ है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे कार्यक्रम पर वे लगातार निशाना साधते थे। उन्होंने कहा कि केवल विभाग बना देने से काम नहीं चलेगा। गंगा जल को शुद्ध करने पर काम नहीं हुआ है। कल्पवासी क्षेत्र में गंगा के किनारे रहने वाले लोग अब बोतलबंद पानी पी रहे हैं। बेटियों को तर्पण का अधिकार देने के थे खिलाफ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बेटियों को तर्पण का अधिकार दिए जाने के खिलाफ थे। एक बार उन्होंने कहा था कि लड़कियां अपने माता- पिता की संपत्ति पर अपना हक जताने के लिए उनका दाह संस्कार और पिंडदान करती हैं। लड़कियों के लिए ऐसे कर्मकांड हिंदू धर्म शास्त्रों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा था कि बेटियों की ओर से इस प्रकार के कर्मकांड से घरों में विवाद बढ़ा है। उन्होंने कहा था कि पितरों को तृप्ति तब मिलती है, उनका पुत्र या पौत्र या फिर पुत्री का बेटा उनका दाह संस्कार और तर्पण करता है। वैसे माता-पिता, जिनकी बेटियां अंतिम संस्कार करती हैं, उन्हें तृप्ति नहीं मिलती। मोक्ष नहीं मिलता है। पीएम मोदी पर साधा था निशाना शंकराचार्य पीएम नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर खूब लेते थे। उन्होंने कहा था कि जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से वे आरएसएस के मूल स्वरूप को बिगाड़ने में लगे हुए हैं। आरएसएस के हिंदुओं की बात करने और ईद मिलन समारोह के आयोजन जैसे मसलों पर करारा हमला बोला था। ताजमहल के नीचे शिवलिंग की कही थी बात शंकराचार्य ने 2015 में आगरा में ताजमहल के नीचे शिवलिंग होने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि ताजमहल के नीचे भगवान शिव का मंदिर है। इसे भक्तों के लिए खोला जाना चाहिए। उन्होंने ताजमहल के नीचे के दो मंजिलों को खोलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिंदू भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकें, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।

September 11th 2022, 8:37 am

टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन...फेस्टिव सीजन के लिए कंपनियों की जोरदार तैयारी, आपको इन स्‍कीमों से लुभाएं

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नई दिल्ली: टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और उपकरण विनिर्माताओं को उम्मीद है कि महंगे उत्पादों की बढ़ती मांग और दामों में बढ़ोतरी के चलते इस त्योहारी सीजन () में उनकी बिक्री 35 प्रतिशत बढ़ सकती है। कुछ कंपनियों को ऐसी उम्मीद है कि देश के दूरदराज के क्षेत्रों में उनके प्रवेश स्तर के व्यापक उत्पादों की बिक्री अच्छी रहेगी। हालांकि, इसे लेकर वे सतर्क रुख भी अपना रही हैं। पैनासॉनिक, एलजी, सोनी, सैमसंग, हायर, गोदरेज अप्लाइंसेज, वोल्टास, थॉमसन और बीएसएच होम अप्लाइंसेज को लगता है कि इस साल त्योहारों के दौरान बिक्री पिछले वर्ष के मुकाबले बेहतर रहेगी और हो सकता है कि यह कोविड-पूर्व के बिक्री आंकड़े को भी पार कर जाए। ओणम से शुरू होने वाले त्योहार दीपावली तक चलते हैं और उद्योग में विभिन्न श्रेणियों में कुल वार्षिक बिक्री में एक-तिहाई बिक्री इसी दौरान होती है। कुल बिक्री 75,000 करोड़ रुपये के लगभग रहने का अनुमान है। उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए विनिर्माता विस्तारित वॉरंटी, आसान ईएमआई और प्रचार गतिविधियों में निवेश जैसी योजनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, प्रवेश स्तर के व्यापक उत्पादों की बिक्री को लेकर उन्हें चिंता है क्योंकि छोटे शहरों के उपभोक्ता अभी भी विवेकाधीन खरीद कर रहे हैं। गोदरेज अप्लाइंसेज के व्यापार प्रमुख एवं कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, ‘व्यापक श्रेणी को लेकर हम सतर्क रहते हुए आशावादी बने हुए हैं लेकिन महंगी श्रेणियों में बिक्री त्योहारों के दौरान अच्छी रहने की उम्मीद है।’ पैनासॉनिक लाइफ सॉल्यूशंस इंडिया के चेयरमैन मनीष शर्मा ने स्मार्ट एसी, बड़े स्क्रीन वाले टीवी और घरेलू उपकरण श्रेणी में इस त्योहारी सीजन के दौरान दहाई अंक की वृद्धि का अनुमान जताया और कहा कि आज उपभोक्ता अपनी पसंद और मूल्य आदि को लेकर सचेत हैं और उनके खरीद निर्णयों में महंगे उपकरण जगह बना रहे हैं। बारिश की कमी और छोटे शहरों में बिक्री को लेकर सवाल पर शर्मा ने कहा कि इसका बिक्री पर असर अंतरिम होगा और उम्मीद है कि तीसरी श्रेणी के बाजारों में नवरात्र के बाद इसमें बदलाव आएगा। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण विनिर्माता संघ (सीईएएमए) के अध्यक्ष एरिक ब्रेगेंजा ने कहा कि उपभोक्ता मांग बढ़ने और इस त्योहारी सीजन में बिक्री में वृद्धि होने का अनुमान है। सोनी इंडिया के प्रबंध निदेशक सुनील नैय्यर ने कहा कि त्योहारी सीजन में अच्छी बिक्री दिख रही है और ओणम तथा गणेश चतुर्थी के दौरान बिक्री उम्मीद से बढ़कर रही है। हायर अप्लाइंसेज इंडिया के अध्यक्ष सतीश एन एस ने कहा, ‘इस त्योहारी सीजन में उद्योग मूल्य से लिहाज से 30-35 प्रतिशत की वृद्धि करेगा।’ एलजी इंडिया के उपाध्यक्ष (घरेलू उपकरण एवं एयर कंडीशनर) दीपक बंसल ने उम्मीद जताई कि बिक्री महामारी से पहले के आंकड़े को पार कर जाएगी। हालांकि, उन्होंने मुद्रास्फीति के दबाव का जिक्र करते हुए कहा कि रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का बढ़ना चिंता का विषय है। सैमसंग इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार) मोहनदीप सिंह ने कहा कि ओणम और गणेश चतुर्थी के दौरान शुरुआत मजबूत रही है और इस दौरान 55 इंच और इससे बड़े स्क्रीन वाले टीवी, 300 लीटर से अधिक के फ्रिज तथा आठ किलो से अधिक क्षमता वाली वॉशिंग मशीन की भारी मांग रही। उन्होंने कहा कि यह बढ़ती मांग दुर्गा पूजा और दीपावली के दौरान और तेज हो जाएगी। विशेषकर महंगे उत्पादों की और यह मांग केवल महानगरों से ही नहीं बल्कि दूसरे और तीसरे दर्जे के बाजारों से भी आएगी।

September 11th 2022, 8:26 am

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का निधन, 99 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

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भोपाल: हिंदुओं के सबसे बड़े धर्मगुरु और द्वारका एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का आज निधन हो गया है। 99 साल की उम्र में स्वामी स्वरूपानंद ने रविवार को आखिरी सांस ली। उनका निधन के जिले में स्थित गोटेगांव के पास बने झोतेश्वर धाम में हुआ है। हाल ही में उनका जन्मदिवस मनाया गया था। इस पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, जो उनके अन्य भक्त माने जाते हैं उन्होंने जाकर उन्हें बधाई दी और उनका आशीर्वाद लिया था। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के पास बद्री आश्रम और द्वारकापीठ की जिम्मेदारी थी। उनका जब निधन हुआ तब वह अपने आश्रम में ही थे। बताया जाता है कि स्वामी स्वरूपानंद पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका नरसिंहपुर जिले में स्थित झोतेश्वर आश्रम में ही इलाज चल रहा था। आज दोपहर बाद अपने आश्रम में उन्होंने अंतिम सांस ली। स्वरूपानंद के आखिरी समय में आश्रम में रहने वाले उनके शिष्य उनके पास थे। इधर जैसे ही स्वरूपानंद के बृह्मलीन में होने की खबर बाहर आई है, आश्रम पर उनके भक्तों की भीड़ जुटने लगी है।

September 11th 2022, 7:55 am

9/11 की 21वीं बरसी... बदल चुका है अमेरिका का दुश्मन, अल-कायदा से भी बड़ा और खतरनाक, लगानी होगी चार ग

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वॉशिंगटन : आज की तारीख, 11 सितंबर, अमेरिका के कैलेंडर में 'काले अक्षरों' में लिखी है। 21 साल पहले साल 2001 में आज के ही दिन न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेनसिल्वेनिया में अपहरण किए गए यात्री विमानों के जरिए सिलसिलेवार हमले किए गए थे जिनमें लगभग 3,000 लोग मारे गए थे। अमेरिका आज 9/11 की 21वीं बरसी मना रहा है और लोग इसमें जान गंवाने वालों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इस हमले ने न सिर्फ वैश्विक भू-राजनीति की दिशा बदल दी बल्कि अमेरिका को भी अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और एक लंबा युद्ध किया। लेकिन आज जब अमेरिका का बदला लगभग पूरा हो चुका है तो उसका फोकस आतंकवाद से हटकर दूसरी चीजों की तरफ है। 9/11 के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अफगानिस्तान पर राज कर रहे तालिबान से हमले के मुख्य साजिशकर्ता अल-कायदा सरगना कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अमेरिका को सौंपने और आतंकवादी संगठन को खत्म करने के लिए कहा। लेकिन तालिबान ने अमेरिका की मांग को अनसुना कर दिया। अमेरिका बातचीत या समझौता करने के मूड में नहीं था और 7 अक्टूबर 2001 को उसने ब्रिटेन के साथ अफगानिस्तान में आजादी के लिए जंग छेड़ दी। आगे चलकर इसमें अन्य सेनाएं भी शामिल हो गईं। तालिबान को चुकानी पड़ी अल-कायदा से दोस्ती की कीमतकुछ ही समय में 17 दिसंबर 2001 को अमेरिका और उसके सहयोगियों ने तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया। तालिबान और अल-कायदा के कई आतंकी भागने में कामयाब हुए और उन्होंने पाकिस्तान में शरण ले ली। अमेरिका का सबसे बड़ा बदला तब पूरा हुआ जब उसने 2 मई 2011 को लादेन को मार गिराया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ऑपरेशन जेरेनिमो चलाया और अमेरिकी मरीन कमांडो ने पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपे लादेन को उसके घर में घुसकर मार गिराया। पूरा हो चुका है अमेरिका का बदलालादेन के मरने के बाद आतंकवादी संगठन की कमान अल जवाहिरी के हाथ में आ गई जो 9/11 हमले की साजिश रचने में शामिल था। पिछले महीने की शुरुआत में अमेरिका ने अफगानिस्तान में छिपे जवाहिरी को ड्रोन हमले में मार गिराया था। 21 साल बाद अमेरिका ने अपनी जमीन पर सबसे भयानक हमले का पूरा बदला ले लिया था। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका काफी हद तक कामयाब साबित हुआ है क्योंकि उसका सबसे बड़ा दुश्मन अल-कायदा अब कमजोर पड़ चुका है और अफगान तालिबान भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते उसे पनाह देने के मूड में नहीं है। 9/11 के साये से बाहर आ रहा अमेरिका अब अमेरिका के 'दुश्मन' बदल चुके हैं जो पहले ज्यादा बड़े और ताकतवर हैं और इनसे निपटने की अमेरिका की तैयारी भी पहले से कहीं ज्यादा बड़ी है। अंतरराष्ट्रीय और सुरक्षा मामलों के जानकार कबीर तनेजा ने अपने ट्वीट में लिखा, '21 साल पहले 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' शुरू कर दिया था जिसने भू-राजनीति की दिशा को बदल दिया था। आज अल-कायदा के दोनों सरगना मारे जा चुके हैं, अफगानिस्तान की जंग हारी जा चुकी है और इराक युद्ध एक धब्बा बना हुआ है। अमेरिका अब चीन और रूस के खतरे से निपटने के लिए 9/11 के साये से बाहर आ रहा है।' चीन के खिलाफ अमेरिका की तैयारी बड़ीअमेरिका के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती चीन और रूस की है जिससे निपटने के लिए उसकी तैयारी भी काफी बड़ी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के खतरे से निपटने के लिए अमेरिका क्वाड जैसे संगठन का सदस्य है जिसमें भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। आगे चलकर साउथ कोरिया जैसे देशों के साथ क्वाड का विस्तार भी हो सकता है जिसके संकेत भी मिल चुके हैं। इतना ही नहीं, ताइवान से औपचारिक संबंध न होने के बाद भी अमेरिका चीन के खिलाफ खुलकर उसका समर्थन कर रहा है, जिसमें शीर्ष नेताओं और अधिकारियों की यात्रा, हथियारों का सौदा और सैन्य प्रशिक्षण जैसी चीजें शामिल हैं। रूस से रिश्तों में स्थायी कड़वाहटएशिया में चीन तो यूरोप में रूस अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है। अमेरिका नाटो के सहारे रूस के पर कतरना चाहता है इसलिए वह ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन के विस्तार पर जोर देता है ताकि रूस का घेराव किया जा सके। अमेरिका रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन को हथियार और सैन्य सहायता देने वाला सबसे बड़ा देश है। उसने रूस पर प्रतिबंध भी लगाए हैं और विदेशों में रूसी कुलीन लोगों की संपत्ति को भी जब्त कर रहा है। वॉशिंगटन में कोई भी रहे लेकिन पुतिन के साथ उसके रिश्ते एक जैसे रहते हैं। बाइडन के आने के बाद इनमें सुधार के बजाय और ज्यादा तल्खी बढ़ी है। अमेरिका जानता है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर तालिबान को अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए मजबूर किया जा सकता है इसलिए अब उसका फोकस रूस और चीन जैसे बड़े दुश्मनों से निपटने पर है।

September 11th 2022, 7:55 am

क्या सट्टेबाजी के चलते एशिया कप से बाहर हुआ भारत, सुब्रह्मण्यम स्वामी का 'मासूमियत' भरा सवाल

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नई दिल्ली: भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी हमेशा अपनी बेबाक और मुखर शैली के लिए पहचाने जाते हैं। इस बार उन्होंने एशिया कप में भारत के हार जाने पर तंज कसा है। साथ ही सीधे-सीधे सट्टेबाजी को इसका कसूरवार ठहर दिया है। स्वामी ने पूछा है कि एशिया कप का आयोजक कौन है? कुछ लोग इसे सीधे-सीधे अमित शाह के बेटे जय शाह से जोड़ रहे हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘एशिया कप क्रिकेट मैचों के आयोजक कौन हैं? और हमें इतनी बुरी तरह क्यों हारे? सट्टेबाजी? मैं मासूमियत से पूछता हूं।' दरअसल, एशिया कप का आयोजन एशियाई क्रिकेट काउंसिल यानी ACC करवाता है। इस संस्था के अध्यक्ष जय शाह हैं, जो देश के गृहमंत्री के अमित शाह के बेटे होने के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव भी हैं। स्वामी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा मचा हुआ है। चारों ओर स्वामी के इस ट्वीट की ही चर्चा है। लोग अपने-अपने हिसाब से इसका मतलब निकाल रहे हैं। बता दें कि बीजेपी नेता स्वामी अक्सर मोदी सरकार की आर्थिक और विदेश नीति को लेकर भी सवाल करते रहे हैं। वह जिस नेता के करीब जाते हैं, जल्द ही उसकी बैंड बजाने का ठेका भी खुद ही ले लेते हैं। एशिया कप की बात करें तो भारत सुपर-4 में पहले पाकिस्तान और फिर श्रीलंका से हार गया। इन लगातार करारी दो हार से वह फाइनल भी नहीं पहुंच पाया। भारत ने अपने आखिरी मैच में अफगानिस्तान को हराया था, इस मुकाबले से विराट कोहली ने फॉर्म में वापसी की। उन्होंने 61 गेंदों में 122 रनों की नाबाद पारी खेली। टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला आज श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा।

September 11th 2022, 7:55 am

रिलायंस कैपिटल, जेपी, यूनिटेक... कभी इंडेक्‍स की थीं शान, आज कोई पूछ तक नहीं रहा इनके दाम

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नई दिल्‍ली: रिलायंस कैपिटल, यूनिटेक, सुजलॉन, रिलायंस कम्‍यूनिकेशंस... फेहरिस्‍त लंबी है। इन कंपनियों के साथ एक चीज कॉमन रही है। कभी ये निफ्टी50 इंडेक्‍स (Nifty50) की शान हुआ करती थीं। इन शेयरों में निवेश करके लोग भूल जाया करते थे। लोगों को लगता था कि कयामत भी आ जाए तो इन शेयरों को कुछ नहीं होने वाला है। लेकिन, यही है। निफ्टी50 में शामिल तमाम ऐसी कंपनियां जिनकी कभी तूती बोलती थी, एक समय आया जब उनकी हैसियत ढेलेभर की नहीं बची। इनमें से कई में तो अब ट्रेडिंग तक नहीं होती है। इसका सबसे ताजा उदाहरण अनिल अंबानी ग्रुप की रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) है। हाल में इस कंपनी के शेयरों को एक्‍सचेंज से हटा दिया गया। इस तरह कह सकते हैं कि इसके शेयरों की वैल्‍यू जीरो हो गई। निफ्टी देश की 50 टॉप कंपनियों का सूचकांक है। इस इंडेक्‍स में वो कंपनियां होती हैं जिनके लिए माना जाता है कि इनके साथ किसी भी तरह की दिक्‍कत नहीं आ सकती है। लेकिन, बीते एक से डेढ़ दशक में निवेशकों (Investors' Confidence) का यह भ्रम टूटा है। निवेशकों के भरोसे को क‍िया चकनाचूर पिछले कुछ सालों में कई दिग्‍गज शेयरों ने निवेशकों को मायूस किया है। सिर्फ मायूस ही नहीं किया, भरोसा तक तोड़ दिया। ये अर्श से फर्श पर आ गई हैं। इनमें से कई तो दिवालिया तक हो गईं। कुछ में कारोबार रोक दिया गया क्‍योंकि उनके शेयरों का मूल्‍य बेमोल हो गया। इन कंपनियों में यूनिटेक, सुजलॉन, वोडाफोन आइडिया, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस कम्‍यूनिकेशंस, रिलायंस पावर, एमटीएनएल, जेपी एसोसिएट्स, यस बैंक शामिल हैं। ये वो शेयर हैं जो कभी निफ्टी50 इंडेक्‍स की शान होते थे। आज नौबत यह है कि कोई इनका भाव तक नहीं पूछने वाला है। इन सभी के नीचे जाने की कहानी भी काफी मिलती-जुलती है। इनमें से ज्‍यादातर मामलों में कंपनियों पर कर्ज का बोझ इतना ज्‍यादा हो गया कि वो उबर नहीं पाईं। कर्ज को उतारने के लिए उन्‍होंने और कर्ज लिया और कर्ज का यह चक्र उन्‍हें फंसाता चला गया। एक दिन आया जब कंपनियों ने हाथ खड़े कर लिए। इसके चलते इनका या तो किसी दूसरी कंपनी ने अधिग्रहण कर लिया या फिर ये कारोबार समेटकर बैठ गईं। इस पूरी कवायद में अगर किसी को सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ तो वे थे रिटेल निवेशक। रिटेल निवेशकों को लगी सबसे ज्‍यादा चपत अनिल अंबानी ग्रुप की रिलायंस कैपिटल का ही उदाहरण लेते हैं। इस कंपनी में पब्लिक शेयर होल्डिंग 94 फीसदी से ज्यादा थी। हाल में कंपनी के शेयरों की वैल्यू जीरो हो जाने के बाद निवेशक पूरी तरह सकते में आ गए। रिलांयस कैपिटल काफी समय से कर्ज में फंसी थी। कर्जदाताओं की एक समिति ने बुधवार को कंपनी के रेजॉल्‍यूशन प्रोसेस की समीक्षा की थी। कंपनी के लिए बोली प्रक्रिया 29 अगस्त को समाप्त हुई थी। रिलायंस कैपिटल के अधिग्रहण के लिए इंडसइंड बैंक, अमेरिका की संपत्ति प्रबंधन कंपनी ओकट्री कैपिटल और टॉरेंट ग्रुप की छह कंपनियों ने बोली लगाई है। कंपनी के शेयरों में कारोबार रोक दिया गया है। डीमैट से सभी शेयर डेबिट कर दिए गए हैं। यही कारण है कि एक्‍सपर्ट्स निवेशकों को किसी शेयर में निवेश करने से पहले उसकी बैलेंसशीट का अध्‍ययन करने की सलाह देते हैं। कंपनी कितनी भी बड़ी हो, उसका कर्ज एक दायरे में ही हो सकता है। अगर कर्ज कंपनी के एसेट्स से ज्‍यादा हो जाए तो उस पर खतरे की घंटी बजने लगती है। ऐसे और भी कई इंडिकेटर्स हैं जो कंपनी की माली हालत के बारे में बताते हैं। दगाबाज रे....
कंपनी शेयर मूल्‍य (रुपये में)
यूनिटेक 2.40
जेट एयरवेज 100.95
सुजलॉन 9.65
वोडाफोन आइडिया 9.65
रिलायंस पावर 19.20
एमटीएनएल 24.65
जेपी एसोसिएट्स 9.10
रिलायंस कम्‍यूनिकेशंस ट्रेडिंग बंद
रिलायंस कैपिटल ट्रेडिंग बंद
यस बैंक 17.50

September 11th 2022, 7:55 am

बाबर को नहीं आई होगी नींद, सिर्फ फॉर्म ही नहीं, श्रीलंका के इस धाकड़ रिकॉर्ड से भी खौफ में होंगे!

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दुबई: सामाजिक-आर्थिक संकट से जूझने और अपने इतिहास में सबसे बुरे लोकतांत्रिक उथल-पुथल को झेलने वाले श्रीलंका को उसकी क्रिकेट टीम जश्न मनाने का कुछ मौका दे सकती है। लेकिन, इसके लिए उसे आज एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान की मजबूत टीम को हराना होगा। दासुन शनाका की अगुआई वाली टीम ने हालांकि टूर्नामेंट में पहले मुकाबले में ही अफगानिस्तान से मिली हार के बाद जिस तरह कि वापसी की है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बाबर आजम की अगुआई वाली पाकिस्तानी टीम के लिए चुनौती किसी भी तरह से आसान नहीं होगी। श्रीलंका ने लगातार चार मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई है। उसने शुक्रवार को सुपर-4 के अंतिम मैच में पाकिस्तान को आसानी से हराया था। इस लिहाज से भी खिताबी मुकाबले में उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है। अब एशिया कप में 3 बार हुई है भिड़ंत, 2 बार श्रीलंका ने मारा मैदान
  • पहली भिडंत: 1986 में दोनों टीमें फाइनल में भिड़ी थीं। इस बार भारत नहीं था। खिताबी मुकाबले में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा था। उसने 191 रन बनाए थे। जवाब में श्रीलंका ने 16 गेंद पहले ही 5 विकेट से मैदान मार लिया था।
  • दूसरी भिड़ंत: 2000 में पाकिस्तान का पलड़ा भारी था। मोईन खान की कप्तानी वाली टीम ने श्रीलंका के खिलाफ 4 विकेट पर 277 रन बनाए। जवाब में श्रीलंकाई टीम 238 रनों पर ऑलआउट हो गई।
  • तीसरी भिड़ंत: 2014 में आखिरी बार फाइनल दोनों के बीच खेला गया, जहां श्रीलंका विजयी रहा था। मैच के हीरो लसिथ मलिंगा ने 5 विकेट झटके थे और यह मुकाबला श्रीलंकाई टीम ने 5 विकेट से ही जीता था।
पाक को अतिरिक्त मदद श्रीलंका एशिया कप का मेजबान है लेकिन सुरक्षा कारणों से वह इसका आयोजन अपने देश में नहीं कर पाया और इसलिए यूएई में टूर्नामेंट आयोजित हो रहा है। मेजबान होने के बावजूद मैच में श्रीलंका से ज्यादा दर्शकों का सपोर्ट पाकिस्तान को मिलेगा क्योंकि दुबई में पाकिस्तान के समर्थक ज्यादा हैं। ऐसे में बाबर आजम, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद नवाज और नसीम शाह जैसे खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे। दूसरी तरफ श्रीलंका की क्रिकेट को पिछले कुछ समय से खराब चयन और बोर्ड के अंदर की राजनीति से जूझना पड़ा लेकिन अब उसके खिलाड़ियों ने टी20 क्रिकेट में अपना रवैया बदल दिया है और उसमें आक्रामकता जोड़ दी है। दुष्मंथा चमीरा जैसे अनुभवी गेंदबाज की अनुपस्थिति के बावजूद श्रीलंका का आक्रमण मजबूत नजर आता है जबकि बल्लेबाजी में उसके पास कुसल मेंडिस और पाथुम निसांका दो शानदार ओपनर हैं। गेंदबाजी में महीष तीक्ष्णा और वानिंदु हसारंगा ने स्पिन विभाग को बखूबी संभाला है जबकि दिलशान मदुशंका ने मुख्य तेज गेंदबाज की जिम्मेदारी काफी सराहनीय रूप से निभाई है। कप्तान की फॉर्म चिंतापाकिस्तान अपने कप्तान और सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बाबर आजम की फॉर्म को लेकर चिंतित है जिन्होंने अब तक पांच मैचों में केवल 63 रन बनाए हैं। वह फाइनल में निश्चित तौर पर बड़ी पारी खेलने की कोशिश करेंगे। गेंदबाजी अभी पाकिस्तान का मजबूत पक्ष नजर आता है। नसीम शाह के खेल में लगातार सुधार हो रहा है जबकि हारिस रऊफ और मोहम्मद हसनैन भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उसके दोनों स्पिनर लेग ब्रेक गेंदबाज शादाब खान और बाएं हाथ के स्पिनर मोहम्मद नवाज ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। टॉस होगा बॉसदुबई में टॉस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को यहां नुकसान होता है। पाकिस्तान का वैसे भी पहले बल्लेबाजी करते हुए प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। उसने भारत और श्रीलंका के खिलाफ जो मैच गंवाए उसमें उसने पहले बल्लेबाजी की थी। दूसरी तरफ श्रीलंका ने जो लगातार चार मुकाबले जीते हैं उसमें उसने बाद में ही बल्लेबाजी की है। ऐसे में टॉस की भूमिका बेहद अहम होने वाली है। आमने-सामने
  • कुल मुकाबले : 22
  • पाकिस्तान जीता : 13
  • श्रीलंका जीता : 9
  • रैंकिंग्स
  • पाकिस्तान 2
  • श्रीलंका 8
नंबर्स गेम
  • 3 बार टूर्नामेंट के फाइनल में दोनों टीमों की भिड़ंत हुई है जिसमें दो बार श्रीलंका ने पाक को हराया है
  • 4 आखिरी टी20 मुकाबलों में हर बार श्रीलंका ने पाकिस्तान को शिकस्त दी है
  • 11 बार अब तक टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा है श्रीलंका जिसमें पांच बार उसने खिताब जीता
संभावित प्लेइंग XI पाकिस्तान: मोहम्मद रिजवान, बाबर आजम (कप्तान), फखर जमां, इफ्तिखार अहमद, शादाब खान, मोहम्मद नवाज, आसिफ अली, खुशदिल शाह, हारिस रऊफ, नसीम शाह, मोहम्मद हसनैन श्रीलंका: पाथुम निसंका, कुसल मेंडिस, चरिथ असालंका, धनुष्का गुणातिलका, भानुका राजपक्षा, दासुन शनाका (कप्तान), चमिका करुणारत्ने, वानिंदु हसारंगा, महीष तीक्षणा, असिथा फर्नांडो, दिलशान मदुशंका पिच और मौसमएक बार फिर बोलर्स का दबदबा देखने को मिल सकता है जिसमें स्पिनर्स की भूमिका अहम हो सकती है। अधिकतम तापमान 38 डिग्री रह सकता है और बारिश की कोई आशंका नहीं है।

September 11th 2022, 7:55 am

पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बाल-बाल बचे, तकनीकी खराबी के चलते प्‍लेन को कराया गया लैं

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कराची: पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान शनिवार को उस समय बाल-बाल बच गए जब उनका प्‍लेन एक बड़े हादसे का शिकार होने से बच गया। इमरान का प्‍लेन चकलाला से गुंजरावाला के रास्‍ते में था तभी इसमें एक तकनीकी खराबी आ गई। इमरान एक चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए स्‍पेशल प्‍लेन से गुंजरावाला जा रहे थे। टेक ऑफ के बाद इसमें तकनीकी खराबी आ गई थी। फ्लाइट के कैप्‍टन ने कंट्रोल टॉवर से कॉन्‍टैक्‍ट किया और प्‍लेन की सुरक्षित लैंडिंग कराई। इसके बाद इमरान ने सड़क के जरिए अपनी गुंजरावाला रैली तक पहुंचे। पार्टी ने खबरों को बताया गलत पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के मुखिया के प्‍लेन में क्‍या खराबी आ गई थी, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। पाकिस्‍तान के अखबार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की तरफ से बताया गया है कि पीटीआई के नेता अजहर मशवानी ने कहा कि टेकऑफ के तुरंत बाद ही इमरान खान इस्‍लामाबाद वापस लौट आए थे। उन्‍होंने बताया कि खराब मौसम की वजह से इमरान ने यह फैसला लिया था। मशवानी की तरफ से ट्विटर पर यह सफाई उस समय दी गई जब पाकिस्‍तानी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इमरान एक बड़े प्‍लेन क्रैश का शिकार होने से बच गए। पाक मीडिया की मानें तो प्‍लेन पंजाब के गुंजरावाला की तरफ जा रहा था और आधे रास्‍ते में था कि इसे लैं‍ड कराना पड़ गया। अशवानी की मानें तो किसी भी तकनीकी खराबी की खबरें पूरी तरह से गलत हैं। इमरान के विरोधी असफल दूसरी तरफ पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बतौर पीएम लोगों के बीच प्रभाव छोड़ने में विफल नजर आ रहे हैं। द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जहां पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, शरीफ की खुलकर आलोचना कर रहे हैं, वहीं सत्ताधारी गठबंधन और संबंधित क्षेत्रों में भी कई लोग हैरान हैं कि शहबाज अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रहे हैं। संघीय राजधानी क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सरकारी विभागों की सेवा वितरण पहले की तरह निराशाजनक है। द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, शहबाज की नौकरशाही पर मजबूत पकड़ थी, लेकिन केंद्र में चीजें उनके नियंत्रण में नहीं हैं। शहबाज के करीबी सहयोगियों में से एक के अनुसार, प्रधानमंत्री का मुख्य फोकस अर्थव्यवस्था पर रहा है, जिसको लेकर अभी तक कोई खास कदम नहीं उठाया गया है। कई लोगों के लिए हैरानी वाली बात यह है कि आईएमएफ सौदे के बाद भी अर्थव्यवस्था बेहतर होने के बजाय लगातार खराब होती जा रही है। बिगड़ रहे हालात इस्लामाबाद में शादियों के लिए वन-डिश पॉलिसी लागू करने की घोषणा की, लेकिन इसके उल्लंघन की खबरें सामने आने लगी। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा खबरें पंजाब प्रांत से सामने आई, जिसके मुख्यमंत्री शहबाज रह चुके हैं। संघीय सरकारी विभागों में पब्लिक डीलिंग में भी कोई सुधार नहीं हुआ है। कहा जाता है कि शहबाज शरीफ ने कठिन परिस्थितियों के दौरान प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली, तब आर्थिक परिस्थितियां काफी कमजोर थीं। वह सत्तारूढ़ गठबंधन पर अधिक निर्भर है।

September 11th 2022, 7:55 am

चीन से जुड़ीं फर्जी कंपनियों का मास्टरमाइंड भारत से भागने की कोशिश में गिरफ्तार

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नई दिल्ली : सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक डॉर्टसे नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि वह देश छोड़ने की फिराक में था। एसएफआईओ के अधिकारियों ने उसे बिहार से गिरफ्तार किया है। इससे पहले उन्होंने डॉर्टसे के गुरुग्राम, बेंगलुरु और हैदराबाद के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की थी। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, डॉर्टसे (अधिकारियों द्वारा बताया गया नाम) एक रैकेट का मास्टरमाइंड है, जिसमें भारत में चीन से जुड़ी शेल कंपनियों को शामिल किया गया है। मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि डॉर्टसे के ठिकानों पर 8 सितंबर को छापेमारी की गई जिसमें जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम में जिलियन हांगकांग लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, बेंगलुरु में फिनिंटी प्राइवेट लिमिटेड और हैदराबाद में एक पूर्व सूचीबद्ध कंपनी हुसिस कंसल्टिंग लिमिटेड शामिल हैं। छापेमारी के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के पास दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार डॉर्टसे ने खुद को हिमाचल प्रदेश के मंडी का निवासी बताया था। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि आरओसी दिल्ली ने जांच के दौरान कई सबूत प्राप्त किए, जो स्पष्ट रूप से कई शेल कंपनियों में दिखावे के रूप में काम करने के लिए जिलियन इंडिया लिमिटेड द्वारा भुगतान किए जा रहे डमी निदेशकों की ओर इशारा करते है। कंपनी की मुहरों से भरे बक्से और डमी निदेशकों के डिजिटल हस्ताक्षर साइट से बरामद किए गए हैं। भारतीय कर्मचारी चाइनीज इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए चीनी समकक्षों के संपर्क में थे। हुसिस लिमिटेड को भी जिलियन इंडिया लिमिटेड की ओर से काम करते हुए पाया गया। बताया जा रहा है कि हुसिस लिमिटेड का जिलियन हांगकांग लिमिटेड के साथ एक समझौता था। कॉपोर्रेट मामलों के मंत्रालय ने 9 सितंबर, 2022 को जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 32 अन्य कंपनियों की जांच एसएफआईओ को सौंपी थी। डॉर्टसे और एक चीनी नागरिक जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं। जांच के आधार पर, यह पता चला कि डॉर्टसे दिल्ली-एनसीआर से बिहार भाग गया था और सड़क मार्ग से भारत से भागने का प्रयास कर रहा था, जिसके बाद एसएफआईओ ने एक विशेष टीम गठित की। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शनिवार को एसएफआईओ ने डॉर्टसे को गिरफ्तार किया। अदालत में उसे ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया।

September 11th 2022, 6:55 am

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर बना बाढ़ प्रभावित मुस्लिम परिवारों का शरणस्थल, हर तरफ हो रही प्रशंसा

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क्वेटा: पाकिस्‍तान के बलूचिस्तान प्रांत के कच्छी जिले में बसा छोटा गांव जलाल खान अभी भी बाढ़ से जूझ रहा है, बाढ़ ने घरों को तबाह कर दिया और बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। डॉन की रिपोर्ट के मुताकिब, नारी, बोलन, और लहरी नदियों में बाढ़ के कारण गांव बाकी प्रांत से कट गया था, जिससे दूरदराज के इलाके के निवासियों को खुद अपनी देखभाल के लिए छोड़ दिया गया था। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, इस कठिन समय के दौरान स्थानीय हिंदू समुदाय ने बाबा माधोदास मंदिर के दरवाजे बाढ़ प्रभावित लोगों और उनके पशुओं के लिए खोल दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा माधोदास एक पूर्व-विभाजन हिंदू दरवेश (संत) थे, जो क्षेत्र के मुसलमानों और हिंदुओं द्वारा समान रूप से पोषित थे। भाग नारी तहसील से गांव में अक्सर आने वाले इल्तफ बुजदार कहते हैं, ‘वह ऊंट पर यात्रा करते थे।’ बुजदार कहते हैं कि उनके माता-पिता द्वारा सुनाई गई कहानियों के अनुसार, संत ने धार्मिक सीमाओं को पार कर लिया। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘वह लोगों के बारे में उनकी जाति और पंथ के बजाय मानवता के चश्मे से सोचेंगे,’ बलूचिस्तान के हिंदू उपासकों का पूजा स्थल अक्सर कंक्रीट से बना होता है और एक बड़े क्षेत्र को कवर करता है। चूंकि यह ऊंची जमीन पर रहता है, इसलिए बाढ़ के पानी से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए उनके सबसे कम समय में एक शरणस्थल के रूप में काम करता है। जलाल खान में हिंदू समुदाय के अधिकांश सदस्य रोजगार और अन्य अवसरों के लिए कच्छी के अन्य शहरों में चले गए हैं, लेकिन कुछ परिवार इसकी देखभाल के लिए मंदिर परिसर में रहते हैं। मंदिर परिसर में ज्यादातर मुस्लिमों को शरण भाग नारी तहसील के 55 वर्षीय दुकानदार रतन कुमार इस समय मंदिर के प्रभारी हैं। वह डॉन को बताते हैं, ‘मंदिर में सौ से अधिक कमरे हैं, क्योंकि हर साल बलूचिस्तान और सिंध से बड़ी संख्या में लोग तीर्थयात्रा के लिए यहां आते हैं।’ ऐसा नहीं है कि मंदिर ने असामान्य बारिश का खामियाजा नहीं उठाया। रतन के बेटे सावन कुमार ने डॉन को बताया कि कुछ कमरे क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन कुल मिलाकर ढांचा सुरक्षित रहा। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में कम से कम 200-300 लोगों में ज्यादातर मुस्लिम और उनके पशुओं को शरण दी गई और उनकी देखभाल हिंदू परिवारों द्वारा की जाती थी। शुरुआत में यह क्षेत्र शेष जिले से पूरी तरह से कट गया था। विस्थापितों ने कहा कि उन्हें हेलीकॉप्टर से राशन उपलब्ध कराया गया था, लेकिन जब वे मंदिर में चले गए तो उन्हें हिंदू समुदाय द्वारा खिलाया जा रहा है। इसरार मुघेरी जलाल खान में एक डॉक्टर हैं। यहां आने के बाद से ही उन्होंने मंदिर के अंदर मेडिकल कैंप लगा रखा है। उन्होंने डॉन को बताया, ‘स्थानीय लोगों के अलावा हिंदुओं ने अन्य पालतू जानवरों के साथ-साथ बकरियों और भेड़ों को भी रखा है।’ उन्होंने आगे बताया, ‘स्थानीय हिंदुओं द्वारा लाउडस्पीकर पर घोषणाएं की गईं, मुसलमानों को शरण लेने के लिए मंदिर जाने के लिए कहा गया।’ वहां शरण लेने वालों का कहना है कि इस मुश्किल घड़ी में उनकी सहायता के लिए आने और उन्हें भोजन और आश्रय प्रदान करने के लिए वे स्थानीय समुदाय के ऋणी हैं। डॉन की रिपोर्ट बताती है, स्थानीय लोगों के लिए बाढ़ पीड़ितों के लिए मंदिर खोलना मानवता और धार्मिक सद्भाव का प्रतीक था, जो सदियों से उनकी परंपरा रही है।

September 11th 2022, 6:55 am

मदरसों के सर्वे पर असम जैसे अंजाम का डर क्यों सता रहा, मौलाना मदनी ने बताई वो बात

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराए जाने के राज्य सरकार के फैसले से विवाद पैदा हो गया है। मुस्लिम संगठन सर्वे के उद्देश्य और समय को लेकर संदेह जता रहे हैं। इस संबंध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम समूह) के प्रमुख और दारुल उलूम देवबंद संस्थान के प्रिंसिपल से कुछ सवाल पूछे गए। उन सवालों के जवाब में मौलाना मदनी का कहना है कि देश में अलगाववादी ताकतें हावी हैं जो मुसलमानों के दिलों में यह घर करने में कामयाबी हासिल कर ली है कि बीजेपी की सरकारों में उनके लिए कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। ऐसे में सरकार को मदरसों का सर्वे कराने से मुस्लिम संगठनों से बातचीत करनी चाहिए थी। आइए जानते हैं मौलाना मदनी से पूछे गए सवालों के जवाब... सवाल: मुस्लिम संगठनों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण कराए जाने से क्या ऐतराज है? सरकार पाठ्यक्रम, बुनियादी ढांचे आदि की जानकारी लेना चाहती है। जवाब: मेरे ख्याल में इस वक्त यह काम नहीं होना चाहिए था। एक तरफ तो मुल्क में फिरकापरस्त ताकतों ने ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि मानो सरकार की हर नीति उसके (मुसलमान के) खिलाफ है, मगर हकीकत ऐसी नहीं है। माहौल ऐसा बना दिया गया है कि मुसलमान यह समझ रहा है कि हुकूमत उसकी बेहतरी की कोई चीज सामने नहीं ला रही है। दूसरी बात यह है कि इसी वक्त असम में मदरसों पर बुलडोजर चल रहे हैं और कहा जा रहा है कि भारत के मदरसे देश विरोधी ताकतों का केंद्र बन गए हैं। इसने मुसलमानों को बेवजह बदनाम कर दिया है, लेकिन हमें नहीं लगता कि मदरसों का सर्वे करने में कोई गलत बात है और इससे मदरसों का कोई नुकसान होगा, लेकिन हालात की वजह से मुसलमानों को अंदेशा है। सवाल: मुसलमानों के नुमाइंदों को सरकार की मंशा पर शक क्यों है? जवाब: मुसलमान शक के दायरे में हैं। असम में मदरसों पर बुलडोजर चला दिए गए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने बुलडोजर चलवाए हैं। शर्मा एक जमाने से असम में मंत्री रहे। वह तरुण गोगोई की सरकार में मंत्री थे। इसके बाद भाजपा की सरकार में मंत्री रहे और अब वह मुख्यमंत्री हैं। उन्हें आज तक मदरसों का ताल्लुक गैर-मुल्की एजेंसियों के साथ नजर नहीं आया? इसे देखकर मुसलमान यह समझ रहा है कि मदरसों को लेकर जो रुख असम में अख्तियार किया गया है, कहीं ऐसा ही रुख उत्तर प्रदेश में भी अख्तियार न कर लिया जाए, क्योंकि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। इसलिए सर्वेक्षण अभी न कराके बाद में कराया जाता तो इसमें कोई मसला नहीं था। सवाल: सर्वेक्षण के ऐलान से पहले अगर मुस्लिम संगठनों को भरोसे में लिया जाता तो क्या यह ऐतराज नहीं होता? जवाब: सर्वेक्षण के ऐलान से पहले मुस्लिम तंजीमों को भरोसे में लिया जाना चाहिए था। यह बता दिया जाता कि सर्वेक्षण से कोई नुकसान नहीं है। करीब 16 हजार मदरसे इलाहाबाद बोर्ड से संबद्ध हैं। मिसाल के तौर पर हमें यह बता दिया जाता कि सरकार यह जानना चाहती है कि कितने ऐसे मदरसे हैं जो बोर्ड से संबद्ध नहीं हैं, बच्चे क्या पढ़ रहे हैं, मदरसे की जमीन किन लोगों की है। इन तमाम चीजों को मालूम किया जाए तो इसमें कोई ऐतराज नहीं है। पहले दिलों को संतुष्ट करना चाहिए। इस वक्त मुसलमान का दिल पूरे मुल्क में संतुष्ट नहीं है। सवाल: इल्जाम लगाया जाता है कि मदरसों में आतंकवाद सिखाया जाता है। इस इल्जाम को आप कैसे देखते हैं? जवाब: हम मदरसों में कुरान और हदीस (पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाएं) पढ़ाते हैं। हमारे कुरान और हदीस में कोई आतंकवाद नहीं सिखाया जाता है। मदरसों में आतंकवाद से संबंधित कुछ नहीं सिखाया जाता है। मदरसों में दीन (इस्लामी शिक्षा) पढ़ाया और सिखाया जाता है। मदरसों में पढ़ने वालों ने अगर मुल्क के खिलाफ कोई कदम उठाया हो तो हमें बताएं। उन्होंने जान हथेली पर रखकर मुल्क की आजादी के लिए काम किया है। सवाल: मदरसे चलाने वाले कुछ लोगों का आतंकवाद से कथित रूप से रिश्ते निकलने पर असम में हाल में कई मदरसों पर बुलडोजर चलाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि सभी तोड़े गए मदरसे अलकायदा के दफ्तर थे। इस पर आप क्या कहेंगे? जवाब: यह अजीबोगरीब बात है। उनके प्रशासन के लोगों में से कोई कहता है कि ये सरकार से बिना मंजूरी लिए बने थे और कोई कहता है कि यह जंगल की जमीन पर बने थे। कोई कहता है कि इन मदरसों के नक्शे पास नहीं थे और फिर मुख्यमंत्री ने इस पर बहुत बड़ा इल्जाम लगा दिया कि इनका अलकायदा से ताल्लुक था। किसी सूबे का मुख्यमंत्री जब कोई बात कहे तो वह सबूत के साथ कहे। वह कयामत तक सबूत पेश नहीं कर सकते कि इन मदरसों को चलाने वालों का संबंध अलकायदा से था और कहने को तो कोई भी व्यक्ति कुछ भी कह सकता है। ये तो पुराने मदरसे हैं। शर्मा पहले कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में मंत्री थे तथा अब मुख्यमंत्री हैं। पहले तो उन्हें मदरसों में अलकायदा नजर नहीं आया? मेरा यह दावा है कि कोई मदरसा अलकायदा से नहीं जुड़ा है।

September 11th 2022, 6:37 am

मूसेवाला मर्डर केस में आतंकी एंगल आया सामने, गैंगस्टर की ISI से मिलीभगत, सलमान खान भी थे निशाने पर!

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चंडीगढ़: पंजाबी गायक में आतंकी एंगल का खुलासा हुआ है। पंजाब के डीजीपी ने गैंगस्टर्स और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के कनेक्शन का खुलासा किया है। डीजीपी ने बताया कि मूसेवाला मर्डर केस में शामिल लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर अभिनेता सलमान खान भी थे। डीजीपी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर आरोपी दीपक और उसके साथी ने रेकी भी की। मूसेवाला मर्डर केस में अब तक 23 लोगों की गिरफ्तारी हुई। कुल 35 नामजद हैं और 2 की मुठभेड़ में मौत भी हुई। मूसेवाला मर्डर केस में गिरफ्तार तीन नए आरोपी दीपक मुंडी, राजेंदर और कपिल पंडित को 6 दिन की रिमांड पर भेजा गया है। डीजीपी गौरव यादव ने बताया, शुरुआत जांच में सामने आया है कि कपिल पंडित को लॉरेंस बिश्नोई ने अभिनेता सलमान खान को टारगेट करने का टास्क दिया गया था। कपिल पंडित ने पूछताछ में बताया कि संतोष यादव और सचिन बिश्नोई भी उसके साथ थे। तीनों ने मुंबई जाकर रेकी भी की थी। पंजाब में शांति भंग करने की पाकिस्तानी साजिश सूत्रों के अनुसार, पंजाब डीजीपी ने बताया कि मूसेवाला मर्डर केस में शामिल गैंगस्टर और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच कनेक्शन था। आईएसआई पंजाब के गैंगस्टर और खालिस्तान समर्थकों का इस्तेमाल पंजाब में शांति भंग करने के लिए कर रही है। इसके अलावा बीते दिनों पंजाब में आरडीएक्स की बरामदगी भी बढ़ गई है। डीजीपी ने बताया, 'अब तक 23 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। 2 की मौत हुई और 35 नामजद हैं। गोल्डी बराड़ को केंद्रीय एजेंसियों की मदद से इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है।' शनिवार को हुई थी तीन की गिरफ्तारी एक दिन पहले दी पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के साथ एक संयुक्त अभियान में शनिवार को शार्पशूटर दीपक मुंडी और उसके दो अन्य सहयोगियों को मूसेवाला मर्डर केस में पश्चिम बंगाल-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया। एक खुफिया-आधारित ऑपरेशन के बाद, डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि हत्या में शामिल छठे और अंतिम फरार शार्पशूटर मुंडी को उसके दो सहयोगियों कपिल पंडित और राजिंदर के साथ पंजाब पुलिस के एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने पश्चिम बंगाल में नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया था।

September 11th 2022, 6:29 am

नर्मदा डैम के विस्थापित करोड़पति हो गए लेकिन मेधा पाटकर आज भी उन्हें पीड़ित बताती हैं, क्यों?

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पिछले हफ्ते के में मैंने सरदार सरोवर बांध पर की सोच को तर्कों के साथ गलत साबित किया था। उस पर कई आक्रोशपूर्ण प्रतिक्रियाएं आईं। मसलन- आपकी हिम्मत कैसे हुई इतने महान सामाजिक कार्यकर्ता पर हमला करने की; बड़े बांध ठीक नहीं हैं; बांधों के लिए स्थानीय आबादी को हटाने का बड़ा भयावह इतिहास है; आदिवासी विस्थापन के सबसे बड़े शिकार रहे हैं आदि आदि। हालांकि, कोई भी व्यक्ति मेधा पाटकर के झूठे प्रपंच को खारिज नहीं कर सका कि नर्मदा का पानी कच्छ और राजस्थान तक कभी नहीं पहुंच पाएगा; ऊंची ब्याज दरों से गुजरात सरकार खस्ताहाल हो जाएगी; विस्थापन के कारण अद्भुत संस्कृति वाले आदिवासी कर्ज के जाल में फंस जाएंगे, जमीन के लिए मिलने वाले मुआवजे की राशि वो कर्ज चुकाने में खो देंगे, फिर झुग्गी-झोपड़ियों में उनका गुजारा होगा और उनकी महिलाएं वेश्या बन जाएंगी। मेधा के प्रशंसक चाहते हैं कि मैं आदिवासी अधिकारों के लिए उनके संघर्ष पर गौर करें ना कि उनके बयानों पर। दरअसल, उन्होंने डैम का विरोध सिर्फ आदिवासी हितों के लिए नहीं किया था, मकसद उससे इतर कुछ और भी था। सरदार सरोवर डैम का मामला एक ट्राइब्यूनल के पास गया तब आदिवासी अधिकारों का अभियान न सिर्फ मेधा के (NBA) बल्कि ऐक्शन रिसर्च इन कम्यूनिटी हेल्थ एंड डेवलपमेंट (ARCH) जैसे दूसरे एनजीओज की तरफ से भी छेड़ा गया था। उन्होंने इस बात पर काफी जोर दिया कि मुआवजे में जमीन भी अनिवार्य रूप से दी जाए। एनजीओज ने ट्राइब्यूनल को भी इस बात के लिए राजी कर लिया कि मुआवजे में नकद रकम के साथ-साथ प्रत्येक व्यस्क पुरुष को पांच एकड़ के हिसाब से जमीन दी जाए। गुजरात सरकार ने इस पर आपत्ति की तो उसके खिलाफ धरना-प्रदर्शन होने लगे और अदालत में याचिकाएं डाली जाने लगीं। आखिरकार तय हुआ कि आदिवासियों को जमीन दी जाएगी और उन्हें अतिक्रमणकारी नहीं माना जाएगा। मेधा पाटकर का यू-टर्न इस जीत का जश्न मनाने की जगह मेधा पाटकर ने यू-टर्न ले लिया और डैम को नहीं बनने देने पर अड़ गईं। उन्होंने विश्व बैंक के मोर्स आयोग से भी अपनी बात मनवा ली। मेधा और दुनियाभर के एनजीओज ने दावा किया कि आदिवासी मुआवजा लेने के बजाय जहां रह रहे हैं वहीं डूब मरना पसंद करेंगे। उधर, ऐक्शन रिसर्च इन कम्यूनिटी हेल्थ एंड डेवलपमेंट (ARCH) ने ज्यादातर आदिवासियों को समझाने में सफलता पा ली कि मुआवजा उनके हित में है और इस लड़ाई में उनकी जीत हुई है। एआरसीएच ने मुआवजे की व्यवस्था को बेतरीन तरीके से लागू करवाया। लेकिन मेधा का नर्मदा बचाओ अभियान आंदोलन लगातार इसमें रोड़ा बनने की कोशिश करता रहा। तब तक ट्राइब्यूनल का फैसला आया कि स्थानीय आदिवासी समुदाय दूसरी जगह बसने के लिए एनजीओ की मदद से जमीन का चयन करेगा। ट्राइब्यूनल ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वो चयनित जमीन खरीदकर आदिवासियों को मुहैया कराए। तब मेधा ने कहा कि पटेल समुदाय अपनी जमीन कभी नहीं बेचेंगे। लेकिन एआरसीएच ने आदिवासियों की मदद से पटेलों की 7 हजार एकड़ जमीन का सौदा कर लिया। दरअसल, आदिवासी पटेलों की जमीन पर पीढ़ियों से काम कर रहे थे। इसलिए पटेल उनकी मांगों को ठुकरा नहीं सके। आदिवासियों का पुनर्वास शुरू हो गया। तब मेधा के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर आदिवासियों पर हमला बोल दिया। हालांकि, आदिवासी इससे डरे नहीं और नई जगह का रुख करते रहे। सरदार सरोवर बांध से विस्थापित हुए महाराष्ट्र के आदिवासियों ने दोबारा जंगल के आसपास बसने की इच्छा जताई। लेकिन मेधा के संगठन ने यहां भी विरोध किया और कहा कि आदिवासियों को जंगल के आसपास नहीं बल्कि जंगल में ही बसाया जाए। एआरसीएच और कई आदिवासी मेधा के इस रुख से सख्ते में थे। उन्हें अच्छे से अहसास हो गया था कि आदिवासी अधिकारों की बात करने वाले ये लोग दरअसल उनके हितों की अनदेखी करने में जुट गए हैं। मेधा ने शहरी बुद्धिजीवियों को इस बात के लिए मनाया कि आदिवासियों का पुनर्वास भयावह होगा। वो राष्ट्रीय नायक बन गईं। लेकिन सरदार सरोवर बांध परियोजना को रोकने के उनके सारे प्रयास विफल हो गए। हर विस्थापन पीड़दायक होता है, लेकिन... हर विस्थापन पीड़ादायक होता है। शुरुआती अध्ययनों में पता चला कि पुनर्वासित आदिवासियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन सवाल है कि क्या यह तात्कालिक समस्या नहीं बल्कि सांगठनिक समस्या थी जैसा कि मेधा पाटकर ने दावा किया? जैसा कि मैंने पिछले हफ्ते लिखा कि नीरज कुशल और मैंने एक रिसर्च स्टडी में पाया कि पुनर्वासित आदिवासी अभी दर्जनों पैमानों पर पूर्व में जंगल में रह रहे अपने पड़ोसियों के मुकाबले बेहतर जिंदगी जी रहे हैं। क्या उनकी जमीन चली गई और वो दरिद्र हो गए? नहीं, 85 प्रतिशत आदिवासियों के पास जमीन है। जो 18 वर्ष से कम उम्र के थे, उन्हें जमीन नहीं मिली थी। अब उस जमीन की कीमत 30 लाख रुपये प्रति एकड़ हो गई है। ऐसे में 5-5 एकड़ जमीन के मालिक हजारों आदिवासी आज करोड़पति हो गए हैं। 61 प्रतिशत पुनर्वासित आदिवासियों के पास अपनी मोटरसाइकल, 88 प्रतिशत के पास सेलफोन, 95 प्रतिशत का अपना बैंक खाता और 46 प्रतिशत के पास टीवी है। अब 95 प्रतिशत को बिजली मुहैया हो रही है और 99 प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पटेलों के साथ वो काफी हिल-मिलकर रह रहे हैं। उनकी संस्कृति में भी कोई घालमेल नहीं हुई है और उन्होंने सिंचाई आधारित खेती भी कर रहे हैं। मेधा पाटकर आदिवासी अधिकारों के लिए अपनी शुरुआती लड़ाई के लिए प्रशंसा की हकदार हैं, लेकिन बाद के यू-टर्न पर यू-टर्न लेने के लिए नहीं। वो खुद को आदिवासी हितों का संरक्षक बताती तो हैं लेकिन उन्होंने आदिवासियों को आधुनिक सुविधाओं से दूर जंगलों में ही रखने की भरपूर कोशिशें कीं। यहां तक कि उन्होंने गरीब आदिवासियों को शिक्षा तक पहुंच और जमीन मालिक के तौर पर करोड़पति बनने से रोकने में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। क्या ये सारे कदम आदिवासियों के हित में थे या फिर विरोध में? जब मेधा का नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रॉजेक्ट रोकने में नाकामयाब रहा तब उसने ट्रैक ही चेंज कर दिया। उसने एआरसीएच एवं दूसरे संगठनों से रिश्ता जोड़ लिया जो आदिवासियों के पुनर्वास की व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे हुए थे। यह एक अच्छा कदम था। मुआवजे को लेकर कई विवाद हुए। हमने अपने रिसर्च के दौरान पाया कि 7 प्रतिशत मामले विवादों के घेरे में आए थे। आज नर्मदा बचाओ आंदोलन का ध्यान इन्हीं विवादों पर है। वो अब लोगों को यह बताने में जुटा है कि आदिवासियों के साथ बहुत बुरा हुआ। वह बड़ी चालाकी से यह बात छिपाने में लगा रहता है कि हजारों आदिवासी करोड़पति बन गए। उसे डर लगा रहता है कि इसका पता लगते ही उसका प्रॉपगैंडे पर कोई विश्वास नहीं करेगा। मेधा का संगठन हमेशा विस्थापितों को पीड़ित के तौर पर पेश करना चाहता है जबकि सच्चाई यह है कि ज्यादातर विस्थापितों को बड़ी जीत हासिल हुई है। वो खुद भी ये मानते हैं। इससे दूसरे बांधों के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर बड़ी सीख मिलती है। इस पूरी कहानी का सच्चा हीरो एआरसीएच है। उसके शीर्ष अधिकारियों ने वाकई बेजोड़ काम किया है जिनमें अनिल पटेल, अंबरीश मेहता और तृप्ति पारेख हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य सा अपना अभियान शुरू करते हुए वो बिना प्रचार के दशकों से आदिवासियों की जिंदगी बेहतर करने में जुटे हैं। उन्हें मेधा पाटकर के नर्मदा बचाओ आंदोलन की तरह न कभी वैसा नाम हुआ और न कभी पुरस्कार मिला। वो इन सबके के हकदार हैं।

September 11th 2022, 6:25 am

बरेली में शख्‍स ने धारदार हथियार से काट दिया 'दोस्‍त' का प्राइवेट पार्ट, समझिए पूरा माजरा

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बरेली: यूपी के बरेली में सिविल लाइंस इलाके के एक होटल में 32 वर्षीय एक व्यक्ति ने गुस्से में आकर अपने 30 वर्षीय दोस्त का गुप्तांग काट दिया। गंभीर हालत में एक निजी अस्‍पताल में उसका इलाज चल रहा है। आरोपी और पीड़ित दोनों बरेली नगर निगम (बीएमसी) में संविदा कर्मचारी हैं। घटना शनिवार को हुई। आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह एक साल पहले ही इस युवक के संपर्क में आया था। उसने पुलिस को दिए बयान में कहा, 'कुछ महीने पहले वह मुझे एक होटल में ले गया, वहां गंदी हरकतें की और आपत्तिजनक स्थिति में मेरा वीडियो शूट किया, फिर मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी दी। तब से उसने कई मौकों पर पैसे लिए हैं। शनिवार को दोनों व्यक्ति एक होटल में मिले थे, जहां आरोपी ने पीड़ित से अपने मोबाइल फोन से उस वीडियो को हटाने के लिए कहा, लेकिन उसने नहीं माना। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़ित ने पहले आरोपी पर हमला किया और बाद में जवाबी कार्रवाई में किसी धारदार चीज से उसका गुप्तांग काट दिया। थाना प्रभारी (एसएचओ) कोतवाली थाना हिमांशु निगम ने कहा कि इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि दोनों घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसएचओ ने कहा, 'जांच जारी है और आगे की जांच के लिए होटल के सीसीटीवी फुटेज को स्कैन किया जा रहा है। जल्द ही संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।' इस बीच, बरेली जिला अस्पताल के अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीश चंद्र ने कहा कि पीड़ित की हालत गंभीर होने पर उसे एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया है, जबकि आरोपी का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है।

September 11th 2022, 6:07 am

हफ्ते में 3 दिन छुट्टी, ओवरटाइम और बढ़ा हुआ पीएफ, आखिर कब से लागू होंगे नए लेबर कोड्स?

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नई दिल्ली : मोदी सरकार जल्द ही कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने वाली है। हम नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) की बात कर रहे हैं। अधिकतर राज्य इन लेबर कोड्स को लागू करने के लिए तैयार हैं। सरकार इन चार नए लेबर कोड्स को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले वेतन से जुड़े कोड और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कोड को लागू किया जा सकता है। इसके बाद बचे हुए दो कोड्स को लागू किया जा सकता है। इनमें एक औद्योगिक संबंधों से जुड़ा कोड और दूसरा काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर है। हालांकि, नए लेबर कोड्स कब लागू होंगे, इसकी कोई तय तारीख सामने नहीं आई है। नए लेबर कोड्स लोगू होने से कर्मचारियों को काफी फायदा होने वाला है। पीएम मोदी ने दिए थे संकेत सरकार कर्मचारियों को काम का बेहतर माहौल देने के पक्ष में है। पीएम मोदी ने हाल में एक कार्यक्रम में कहा था कि वर्क फ्रॉम होम इकोसिस्टम, फ्लेक्सिबल वर्क प्लेसेज और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स भविष्य की जरूरतें हैं। पीएम ने कहा, "बदलते हुए समय के साथ जिस तरह जॉब की प्रकृति बदल रही है, वो आप भी देख रहे हैं। दुनिया तेजी से बदल रही है और इसका लाभ लेने के लिये हमें भी उसी गति से तैयार होना होगा।" कर्मचारियों को है बेसब्री से इंतजार देश में लंबे समय से 4 श्रम संहिताओं (Labour Codes) के लागू होने का इंतजार किया जा रहा है। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) ने पिछले साल इन लेबर कोड्स के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया था। पहले कहा जा रहा था कि वित्त वर्ष 2022-23 यानी एक अप्रैल से ये लेबर कोड्स लागू हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कहा गया कि ये लेबर कोड्स एक जुलाई से लागू हो सकते हैं। लेकिन कई राज्यों द्वारा ड्राफ्ट तैयार नहीं करने के चलते ये लागू नहीं हो पाए। आइए जानते हैं कि इन चार श्रम संहिताओं में क्या-क्या शामिल हैं। ये हैं चार लेबर कोड्स सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं में वेतन/मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंधों पर संहिता, काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर संहिता और सामाजिक व व्यावसायिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय ने श्रम कानूनों (Labour Laws) में सुधार के लिए 44 तरह के पुराने श्रम कानूनों को चार वृहद संहिताओं में समाहित किया है। ऐसा माना जा रहा है कि इन लेबर कोड्स के लागू होने से कर्मचारियों को काफी फायदा होगा। घट जाएंगे हफ्ते में काम के दिन नए लेबर कोड्स लागू होने के बाद कर्मचारियों के हफ्ते में काम के दिन घट जाएंगे। नए नियम से कर्मचारियों के हफ्ते में काम के दिन पांच से घटकर चार रह सकते हैं। अर्थात कर्मचारियों को हफ्ते में तीन दिन छुट्टी मिलेगी। लेकिन कर्मचारियों के रोजाना के काम के घंटे बढ़ जाएंगे। नियम के अनुसार एक हफ्ते में 48 घंटे काम करना होगा। इसका मतलब है कि एक वर्किंग डे में 12 घंटे काम करना होगा। मिलेगा ओवरटाइम नियम के अनुसार, एक कर्मचारी को हफ्ते में 48 घंटे काम करना होगा। हफ्ते में चार वर्किंग डे के हिसाब से एक दिन में 12 घंटे काम करना होगा। अब अगर किसी कर्मचारी से हफ्ते में 12 घंटे से अधिक काम कराया जाता है, तो उसे ओवर टाइम दिया जाएगा। लेकिन कर्मचारी 3 महीने में 125 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम पर भी काम नहीं कर सकते। नए लेबर कोड्स के अनुसार, किसी भी कर्मचारी से लगातार 5 घंटे से अधिक काम नहीं करवाया जा सकता है। लगातार 5 घंटे काम करने के बाद कर्मचारी को आधे घंटे का ब्रेक देना होगा। बढ़ जाएगा बेसिक वेतन नए वेज रूल से कर्मचारी की सीटीसी में भी काफी बदलाव आने वाले हैं। नए वेज रूल के तहत सारे भत्ते कुल सैलरी के 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकते। इसके चलते कर्मचारी की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में कंपनियां सीटीसी का 25-30 फीसदी हिस्सा ही बेसिक सैलरी में रखती हैं। ऐसे में सभी तरह के अलाउंस 70 से 75 फीसदी तक होते हैं। इन अलाउंस के कारण कर्मचारियों के खाते में अधिक सैलरी आती है, क्योंकि तमाम तरह के डिडक्शन बेसिक सैलरी पर होते हैं। बेसिक सैलरी बढ़ने से कर्मचारी की इन हैंड सैलरी या टेक होम सैलरी कम हो जाएगी। लेकिन ग्रेच्युटी, पेंशन और कर्मचारी व कंपनी दोनों का ही पीएफ में योगदान बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारी की बचत बढ़ जाएगी। बढ़ेंगी पार्ट टाइम जॉब्स कम काम के घंटे और बढ़े हुए पार्ट टाइम जॉब्स के बीच एक मजबूत संबंध है। इसका कारण यह है कि जिन कंपनियों के पूर्णकालिक कर्मचारी अपने काम के घंटे कम करते हैं, तो उन्हें उत्पादन में गिरावट रोकने के लिए पार्ट टाइम कर्मचारी ढूंढ़ने पड़ते हैं, खासकर सेवा क्षेत्र में। हालांकि, पार्ट टाइम जॉब्स "कम वेतन और अस्थायी अनुबंध" से जुड़ी हैं। इसलिए पार्ट टाइम जॉब्स में इजाफे से कुल आय में कमी आएगी।

September 11th 2022, 6:07 am

कौन सी करवट ले रही पहाड़ की राजनीति, क्या दिखेगा कांग्रेस का पंच या फिर सजेगा बीजेपी का मंच

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शिमला: हिमाचल प्रदेश की सत्ता को लेकर हमेशा से यह कहा जाता है कि यहां हर पांच साल में बाबू मंत्रियों की बात सुनना बंद कर देते हैं, फाइलों की आवाजाही और सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है। क्योंकि, इस पहाड़ी राज्य में ऐसा होने के पीछे जो सबसे स्थिर कारण रहा है, वह है परिवर्तन। यानी कि कुल मिलाकर कहा जाए तो बीते पिछले तीस सालों में सत्ता कांग्रेस और भाजपा के बीच बारी-बारी से आई है। भले ही राज्य में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। बावजूद इसके इस बार हालात के मिजाज कुछ अलग ही दिख रहे हैं। सचिवालय में काम उतना ही सलीके से चलता देखा जा सकता है, जितना कि हो सकता है। शिमला में हिमाचल प्रदेश सचिवालय में काम करने वाले एक वरिष्ठ सरकारी कर्मचारी की मानें तो कर्मचारी सब कुछ पहले की ही तरह सुन रहे हैं और बीते सालों की कहानी दोहराने जैसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर मृदुला शारदा बीजेपी और कांग्रेस की सत्ता का लगातार रोटेशन का कारण बताते हुए कहती हैं कि "भाजपा और कांग्रेस के कैडर वोट कमोवेश यहां बरकरार हैं। साथ ही यहां फ्लोटिंग वोट ज्यादा नहीं हैं।" अक्टूबर 2021 में चार उपचुनावों में भाजपा की हार हुई थी। कमोवेश सीएम जय राम ठाकुर के गृह क्षेत्र मंडी में विशेष रूप से ऐसा होना भगवा पार्टी के लिए चेताने वाला है। सीएम ठाकुर का इसको लेकर कहना था कि हमसे चूक हुई क्योंकि हमने सोचा था कि हम सत्ताधारी पार्टी हैं, इसलिए यह आसान होगा । सीएम ठाकुर का कहना है कि बीजेपी ने काम किया है और फिर से जीत को लेकर हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं। कांग्रेस का पतन निश्चित है। हम हिमाचल में पार्टी की जीत को दोहराते हुए देख रहे हैं और पूरी तरह से निश्चिंत हैं, क्योंकि देश भर में प्रवृत्ति बदल चुकी है। ठाकुर ने कहा कि उत्तराखंड में सरकार 37 साल बाद दोहराई गई है। हरियाणा में बीजेपी को दोबारा जनादेश मिला, जहां हमारे उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाया करती थी। जयराम ठाकुर ने कहा कि बीजेपी के लिए ठीक ऐसा ही गोवा और मणिपुर में भी हुआ। हिमाचल में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है और आप देखिएगा कि निश्चित तौर पर रिवाज बदलेगा।' विशेषज्ञों का कहना है कि सत्ता में पार्टियों का सत्ता पर काबिज होने का रोटेशन कांग्रेस के लिए एक फायदा हो सकता था, अगर केवल उसने अपने आंतरिक विभाजन को सुलझा लिया होता और एक नेता को राज्य-व्यापी अपील के साथ पेश किया गया होता। पार्टी ने हाल ही में अपने राज्य प्रभारी आनंद शर्मा को 'तुष्टीकरण और अपमान' का हवाला देते हुए संचालन समिति से इस्तीफा देते देखा है। राजनीतिकारों का कहना है कि नेतृत्व चुनाव जीतने के लिए खासा महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस चरमरा रही है, जबकि सीएम ठाकुर और पीएम नरेंद्र मोदी को देखा जाए तो अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। हिमाचल के लोग समझते हैं कि अगर मोदी 2024 या उससे आगे तक पीएम हैं, तो यहां बीजेपी शासन की निरंतरता राज्य की बेहतरी के लिए केंद्रीय सहायता प्राप्त करने में ज्यादा आसान रहेगी। हिमाचल प्रदेश के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह के निधन से कांग्रेस पहले से ही आहत है। एचपी कांग्रेस अध्यक्ष और दिवंगत सीएम की पत्नी प्रतिभा सिंह कहती हैं, "यह हमारे लिए कठिन है, लेकिन लोग कांग्रेस को वोट देते समय पारिवारिक विरासत और उनके जरिए किए गए विकास कार्यों को जरूर ध्यान में रखेंगे। लेकिन ऐसे में मृदुला शारदा का यह सवाल है कि क्या पारिवारिक विरासत एक बाधा बन सकती है? इसको लेकर के हिमाचल के लोग क्यों चाहेंगे कि सत्ता फिर से एक परिवार के पास जाए?" कांग्रेस पार्टी की मानें तो जमीनी स्तर पर नौकरियों की कमी, महंगाई और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग प्रमुख मुद्दे हैं। इसे भांपते हुए कांग्रेस ने 5 लाख नौकरियों, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 18-60 आयु वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और नकदी की तंगी में मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी "10 गारंटियों" के हिस्से के रूप में ओपीएस की वापसी का वादा किया है। राज्य भर में "रोजगार संघर्ष यात्रा" निकाली जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि लोग बीजेपी के खराब प्रदर्शन से तंग आ चुके हैं। प्रतिभा सिंह का दावा है कि कांग्रेस पार्टी आसानी से 68 विधानसभा में 45 सीटें जीतेगी। कांग्रेस के लिए एक जन नेता की अनुपस्थिति और आंतरिक मतभेद एक समस्या पैदा करेंगे, लेकिन इसकी चिंताओं को जोड़ने के लिए एक नया कारक राज्य में राजनीतिक जमीन बनाने निकली आम आदमी पार्टी का प्रवेश है। आप पार्टी भाजपा विरोधी वोटों को छीन सकती है। पंजाब में अपनी जीत से आप आश्वस्त दिख रही है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिरी हुई है। भारत में रुपया-डॉलर विनिमय दर 80 के निचले स्तर पर पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी का मत है कि कांग्रेस और भाजपा के नाले,पुल ,सड़क तक ही सीमित हैं। अगर हम सत्ता में आए तो हम विश्वस्तरीय शिक्षा देंगे और हर पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करेंगे।

September 11th 2022, 6:07 am

अगली गेंद होगी नो-बॉल, स्टीव स्मिथ को पहले से था पता, अंपायर को करना पड़ा फ्री हिट का इशारा

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केर्न्स (ऑस्ट्रेलिया): ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड (AUS vs NZ) के बीच केर्न्स में वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला खेला जा रहा है। यह ऑस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच का आखिरी वनडे मैच भी है। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 5 विकेट पर 267 रन बनाए। टीम के लिए प्रमुख बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने शतकीय पारी खेली, लेकिन उनके शतक के ज्यादा चर्चा उनकी खेल को लेकर जागरुकता की हो रही है। अंपायर को बताया नो-बॉलस्टीव स्मिथ ने बल्लेबाजी करने के दौरान कुछ ऐसा किया, जिससे सभी हैरान रह गए। न्यूजीलैंड की कसी गेंदबाजी के खिलाफ वह खुलकर नहीं खेल पा रहे थे। लेकिन 37वें ओवर की दूसरी गेंद पर स्मिथ ने ऑफ स्टंप के बाहर जाकर छक्का जड़ दिया। छक्का लगाने के बाद वह फ्री हिट का इशारा करने लगे। जबकि न तो गेंदबाज ने ओवर स्टेप किया था और ना ही गेंद सीधे कमर के ऊपर आई थी। बाउंड्री पर थे 5 फील्डरवनडे में 11 से 40 ओवर के बीच बाउंड्री पर 4 ही फील्डर हो सकते हैं। लेकिन न्यूजीलैंड ने भूल बस 5 फील्डर को बाउंड्री पर लगा दिया। स्मिथ ने गेंद डाले जाने से पहले ही फील्डर्स की गिनती कर ली थी। उन्होंने छक्का मारने के साथ ही अंपायर का फील्डर गिनाने लगे। उनके इस फैसले को मान भी लिया गया और अंपायर ने नो-बॉल का इशारा किया। हालांकि फ्री हिट को वह फायदा नहीं उठा सके। जिमी नीशम ने धीमा बाउंसर मारा और स्मिथ इसपर रन नहीं बना सके। 12वां वनडे शतक जड़ास्टीव स्मिथ ने वनडे क्रिकेट में अपना 12वां शतक जड़ा। उन्होंने 131 गेंदों पर 11 चौकों और एक छक्का लगाकर 105 रन बनाए। मार्नस लाबुशेन ने भी 52 रनों की पारी खेली। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 118 रनों की साझेदारी हुई। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 16 रन पर दो विकेट खो दिए थे। अपना आखिरी मैच खेल रहे आरोन फिंच सिर्फ 5 रन बनाकर टीम साउदी की गेंद पर बोल्ड हो गए।

September 11th 2022, 6:07 am

48 घंटे.. 50 डॉक्टरों की टीम, मैराथन सर्जरी करके महिला को मौत के मुंह से खींच लाए 'देवदूत'

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लखनऊ: धरती पर डॉक्टर्स को यूं ही नहीं भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, इसकी बानगी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देखने को मिली है। यहां के में डॉक्टर्स ने एक गंभीर सर्जरी करके मरीज को न सिर्फ मौत के मुंह से खींचे लाए बल्कि उसे आंखों की रोशनी के साथ नई जिंदगी दी। अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल के 50 डॉक्टर्स की टीम ने 48 घंटों तक लगातार सर्जरी करके ये कारनामा कर दिखाया है। दरअसल एमआरआई के जरिए 40 साल की स्केच आर्टिस्ट महिला के दिमाग में एन्यूरिज्म की पुष्टि हुई, जिससे उनकी आंखों की रोशनी तक चली गई थी। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते ये सर्जरी नहीं होती तो एन्यूरिज्म कभी भी मस्तिष्क में फटकर महिला के जीवन के लिए खतरा बन सकता था। क्या है ? ब्रेन एन्यूरिज्म मस्तिष्क में रक्त वाहिका में एक उभार या गुब्बारा है। जो कि एक काफी जटिल बीमारी मानी जाती है। इसमें आखों से दिखना बंद हो जाता है और जान जाने का खतरा भी बना रहता है। ज्यादातर मामलों में आकार आमतौर पर छोटा होता है, उसका आकार गोल्फ की गेंद के आकार का था और कभी भी फट सकता था। 48 घंटे तक चली दिमाग की सर्जरी न्यूरो सर्जन और कार्डियक सर्जन एक साथ चार चरणों वाली मैराथन सर्जरी करने में 48 घंटे से ज्यादा का समय लग गया। डॉ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि एन्यूरिज्म को फटने से रोकने के लिए दोनों तरफ से क्लिप करने की जरूरत थी। लेकिन विशाल आकार ने इसे बहुत जोखिम भरा बना दिया। इसके लिए मरीज के शरीर के ब्लड सरकुलेशन अंदर को रोकना आवश्यक था। इसके लिए कार्डिएक सर्जन डॉ भरत दुबे को शामिल किया गया। बॉडी से निकाला गया पूरा खून डॉ. भरत दुबे ने बताया कि ब्लड सरकुलेशन रोकने के लिए मरीज के शरीर को डीप हाइपोथर्मिक सर्कुलेटरी अरेस्ट की स्थिति में लाया गया। फिर पेशेंट की बॉडी से पूरा खून बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान मरीज के हृदय और फेफड़ों को हार्ट एंड लंग मशीन के जरिये ब्लड की सप्लाई जारी रखी गई। सर्जरी के बाद ठीक है महिला डॉक्टर दुबे ने बताया कि एन्यूरिज्म की इस स्थिति में बॉडी डेड हो जाती है लेकिन ऐसा करना जरूरी था। सर्जरी के बाद महिला ठीक है। महिला की 48 घंटे की लंबी और जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है। 'चमत्कार नहीं..बढिया टीम वर्क' अस्पताल के सीईओ और एमडी डॉ मयंक सोमानी ने कहा कि ये रिकॉर्ड और उपलब्धि कोई चमत्कार नहीं है ये सिर्फ बढ़िया टीम वर्क है। हमने एक महिला की जान बचाई, जो एक स्केच आर्टिस्ट है। वह न केवल अपनी जानलेवा स्थिति से उबर गई, बल्कि उसकी आंखों की रोशनी भी वापस आ गई।

September 11th 2022, 6:05 am

एक ओर उदई एक ओर भान, न उनके चुरकी न इनके कान...निरहुआ ने लिए अखिलेश, नीतीश के मजे

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आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के से सांसद अब अपनी भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग आजमगढ़ में ही करने का फैसला किया है। आजमगढ़ में कसते हुए निरहुआ ने एक गाना गाया और कहा कि 'एक ओर उदई एक ओर भान, न उनके चुरकी न उनके कान'। अगर अखिलेश और नीतीश को लगता है कि साथ में मिलकर चुनाव जीतेंगे तो यह उनकी गलतफहमी है। शनिवार से आजमगढ़ सदर क्षेत्र में स्थित किशुंदासपुर में रिश्तो के बटवारा फिल्म की शूटिंग की शुरूआत की। निरहुआ ने कहा कि उन्होंने सभी डायरेक्टर और प्रोड्यूसर से कह दिया है कि जिसको भी फिल्म बनवानी है वह आजमगढ़ आकर अलग-अलग लोकेशन पर फिल्म की शूटिंग करें। रिश्तो के बटवारा फिल्म की शूटिंग 1 महीने तक चलेगी। निरहुआ ने कहा कि आजमगढ़ उनका संसदीय क्षेत्र है। यहां पर रहकर व लोगों की समस्या से रूबरू होंगे और उसका हल निकालेंगे। इसके साथ ही अपनी फिल्मों की शूटिंग का कार्य भी यही करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने भी इस मामले में उनको राय दी थी कि आजमगढ़ में शूटिंग करने से यहां पर लोगों को रोजगार मिलेगा। लोगों की आमदनी का स्रोत बढ़ेगा। अखिलेश पर निरहुआ ने कसा तंज वहीं दूसरी तरफ निरहुआ ने कहा कि अभी भी मानसिक रूप से अपने को मुख्यमंत्री ही मानते हैं। केशव मौर्य को ऑफर देने के मामले पर निरहुआ ने कटाक्ष किया कि अखिलेश यादव खुद मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने पिता के सामने से माइक छीन ली। अपने चाचा को घर से बाहर कर दिया। भाई को बलि पर चढ़ा दिया। वह कुछ भी कर सकते हैं। सपने में भी मुख्यमंत्री बने रहते हैं। उनको खुद सपना आता है कि वह किसी से ऑफर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के लिए इसीलिए वह दूसरे के लिए कहते हैं। जबकि वह खुद चाहते हैं। निरहुआ ने नीतीश कुमार पर क्या बोल गए नीतीश कुमार के दिल्ली में पोस्टरों के सवाल पर कहा कि वह तो पिछले चुनाव में ही हार मान चुके थे और अपना आखिरी चुनाव बता रहे थे। अखिलेश व नीतीश पर तंज करते हुए निरहुआ ने गाना गाया एक ओर उदई एक ओर भान, न उनके चुरकी ने उनके कान। अगर अखिलेश और नीतीश को लगता है कि साथ में मिलकर चुनाव जीतेंगे तो यह उनकी गलतफहमी है। पूरे विश्व में मोदी की लोकप्रियता का कोई नहीं है। अगर यह लोग ऊपर की तरफ मुंह करके थूकते हैं तो इन्हीं पर गिरेगा।

September 11th 2022, 6:05 am

नाटो के खिलाफ 'पूर्वी नाटो' बन रहा रूस-चीन का SCO? भारत के रुख पर टिकीं दुनिया की नजरें

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बीजिंग: यूक्रेन युद्ध और ताइवान में जंग जैसे हालात के बीच चीन-रूस के नेतृत्‍व वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 15 सितंबर को उज्‍बेकिस्‍तान के समरकंद शहर में शिखर बैठक होने जा रही है। इस आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े गठबंधन की दो दिवसीय बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्‍सा लेंगे। एससीओ के कुल 8 सदस्‍य देश हैं जिसमें भारत, पाकिस्‍तान, रूस, चीन, कजाखस्‍तान, किर्गिस्‍तान, उज्‍बेकिस्‍तान और ताजिकिस्‍तान शामिल हैं। बताया जा रहा है इसमें ईरान और बेलारूस भी शामिल हो सकते हैं। कई पश्चिमी विश्‍लेषकों का कहना है कि एससीओ अमेरिका के नेतृत्‍व वाले नाटो के खिलाफ चीन और रूस का एक सैन्‍य गठबंधन है जिसे ताजा तनाव के बीच पुतिन और जिनपिंग बढ़ावा दे रहे हैं। कई विश्‍लेषक इसे नया 'वॉरसा पैक्‍ट' या 'पूर्वी देशों का नाटो' बता रहे हैं। एससीओ की इस बैठक में पीएम मोदी और चीनी राष्‍ट्रपति के बीच मुलाकात की अटकलें लगाई जा रही हैं। आइए जानते हैं कि शंघाई सहयोग संगठन किस ओर बढ़ रहा है और भारत के रुख पर क्‍यों दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.... दरअसल, एससीओ की यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और चीन के बीच लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक तनाव चरम पर है। दोनों ही देशों के 50-50 हजार से ज्‍यादा सैनिक सीमा पर जमे हुए हैं। लद्दाख के कई इलाकों में चीनी सेना ने अपनी घुसपैठ की है और कई दौर की बातचीत के बाद अब जाकर पीपी-15 को लेकर समझौता हुआ है। अभी देपासांग समेत कई इलाकों में तनाव जस का तस बना हुआ है। चीन की सेना ने अक्‍साई चिन को सैन्‍य किले के रूप में बदलना शुरू कर दिया है और बड़े पैमाने पर हथियारों की तैनाती की है। इस तनाव के बीच भारत और अमेरिका की सेनाएं एससीओ की बैठक के बीच औली में एक बड़ा युद्धाभ्‍यास करने जा रही हैं जो चीन की सीमा से मात्र 100 किमी की दूरी पर होगा। यही नहीं यूक्रेन युद्ध को लेकर भी एससीओ देशों के रुख में मतभेद है। यूक्रेन युद्ध में जहां किर्गिस्‍तान ने पुतिन का समर्थन किया है, वहीं ताजिकिस्‍तान जो रूस पर बुरी तरह से निर्भर है, वह दुविधा में है। इस बीच कजाखस्‍तान ने खुलकर रूस के यूक्रेन पर हमले का विरोध किया है। भारत-चीन संग दुनिया को संदेश देना चाहता है रूस इस बीच अमेरिका को झटका देने के लिए चीन ईरान को सदस्‍य बनाने पर पूरा जोर दिए हुए है। माना जा रहा है कि बैठक के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्‍ट्रपति के बीच मुलाकात हो सकती है। चीनी पक्ष इसकी तैयारी कर रहा है लेकिन भारत ने कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। शुक्रवार को भारत ने ऐलान किया कि गोगरा-हॉट स्प्रिंग इलाके के पेट्रोलिंग प्‍वाइंट 15 से दोनों ही देशों की सेनाएं हट रही हैं। भारत ने कहा कि यह प्रक्रिया 12 सितंबर तक पूरी होगी। ऐसी अटकलें हैं कि यह सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया अगर पूरी हो जाती है तो समरकंद में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हो सकती है। रूस की कोशिश है कि एससीओ के जरिए भारत और चीन को एक साथ लाकर पश्चिमी देशों के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया जाए। यूक्रेन युद्ध के बीच जहां पश्चिमी देशों में एकजुटता बढ़ी है, वहीं रूस अलग-थलग पड़ा है और केवल चीन ही उसकी खुलकर मदद कर रहा है। जानें क्‍या है शंघाई सहयोग संगठन शंघाई सहयोग संगठन की स्‍थापना साल 2001 में हुई थी। कई विश्‍लेषक इसे पश्चिमी देशों के खिलाफ 'पूर्वी' देशों का ब्‍लॉक बताते हैं जो 'नया वॉरसा पैक्‍ट' या 'पूर्वी नाटो' बताते हैं। एससीओ खुद को आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद के खिलाफ बनाया गया संगठन बताता है। अमेरिका में 11 सितंबर के आतंकी हमले के बाद यह संगठन अस्तित्‍व में आया था और उसकी भाषा में चीनी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को सता रहा खतरा छिपा हुआ है। एससीओ का मुख्‍य लक्ष्‍य है कि सदस्‍य देशों के बीच आपसी भरोसा और सच्‍चे पड़ोसी की भावना विकसित करना। राजनीति, व्‍यापार, अर्थव्‍यवस्‍था, शोध, तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और संस्‍कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी सहयोग करना। क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए संयुक्‍त प्रयास करना और उसे बनाए रखना। एक लोकतांत्रिक, निष्‍पक्ष और विवेकपूर्ण नई अंतरराष्‍ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्‍यवस्‍था की ओर बढ़ना शामिल है। नाटो के खिलाफ बना है एससीओ ? एससीओ को पश्चिमी देशों के सैन्‍य संगठन नाटो के खिलाफ पूर्वी देशों की ओर से बनाए गए संगठन के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भारत की सदस्‍यता से आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का प्रभावी तरीके से समाधान हो सकेगा। इस संगठन में दुनिया की दो सबसे ज्‍यादा आबादी वाले देश चीन और भारत शामिल हैं जिससे यह संगठन विश्‍व में सबसे ज्‍यादा आबादी को अपने दायरे में लाता है। भारत ने साल 2020 में पहली बार राष्‍ट्राध्‍यक्षों की बैठक को आयोजित किया था। भारत साल 2017 में इस संगठन का सदस्‍य बना था। भारत के लिए एससीओ का महत्‍व मुख्‍य तौर पर आर्थिक और भूराजनीतिक है। एससीओ एक ऐसा संगठन है जिसके जरिए भारत ऊर्जा से समृद्ध मध्‍य एशियाई देशों में अपनी नीतियों को बढ़ा सकता है। विश्‍लेषकों का कहना है कि एससीओ नाटो के खिलाफ खड़ा नहीं हो सकता है। इसके पीछे वे कई वजहें बताते हैं। इसकी बड़ी वजह एसीसीओ का चार्टर है और उसमें भी आर्टिकल 2 है जो साफतौर पर कहता है कि एससीओ किसी दूसरे देश या अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों के खिलाफ नहीं है। इसके अलावा नाटो की तरह से एससीओ देशों के बीच कोई 'सामूहिक सुरक्षा संधि' नहीं है। इसके तहत नाटो के एक देश पर विदेशी हमला पूरे संगठन पर हमला माना जाता है। भारत के रुख पर दुनिया की नजरें भारत एक ऐसा देश है जो रूस और अमेरिका दोनों के ही प्रमुख संगठनों का हिस्‍सा है। भारत क्‍वॉड का सदस्‍य देश है तो एससीओ का भी है। दोनों ही खेमा भारत को अपने पाले में बनाए रखने की कोशिश में है। इससे भारत की अहमियत दोनों ही गुटों में काफी बढ़ गई है। हालांकि चीन के साथ तनाव को देखते हुए भारत पश्चिमी देशों के साथ रिश्‍ते को पूरी मजबूती देने में जुट गया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह भी साफ कर दिया है कि 'एशियाई सदी' का सपना तब तक साकार नहीं होगा जब कि भारत और चीन हाथ नहीं मिलाते हैं। भारत चीन की दादागिरी को नाकाम करने के लिए क्‍वॉड देशों के साथ अपने रिश्‍ते को मजबूत कर रहा है। भारत का लक्ष्‍य अमेरिका, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर दक्षिण चीन सागर से लेकर लद्दाख तक चीनी ड्रैगन की दादागिरी पर लगाम लगाना है। एससीओ और क्‍वॉड के बीच भारत को बनाना होगा संतुलन चीन इन दिनों न केवल भारत के पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका, मालदीव को बल्कि दुनिया के कई छोटे द्वीपीय राष्‍ट्रों को सस्‍ते कर्ज के जाल में फंसा चुका है। वहीं दूसरी ओर रूस यूक्रेन युद्ध में बुरी तरह से फंसा हुआ है और पश्चिमी देशों की ओर से बेहद कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। पुतिन का लक्ष्‍य रूस को ग्रेटर यूरेशिया देशों के समूह का लीडर बनाना चाहते हैं और यही वजह है कि उन्‍हें बीजिंग और नई दिल्‍ली दोनों की ही जरूरत है। अब भारत को यह तय करना है कि वह किस तरह से एससीओ और क्‍वॉड के बीच संतुलन बनाता है। भारत रूसी हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है, इसलिए वह पुतिन को नाराज नहीं कर सकता है। वहीं कई विश्‍लेषकों का कहना है कि पुतिन इस समय शी जिनपिंग को नाराज नहीं कर सकते हैं और अगर भारत-चीन युद्ध हुआ तो वह हथियारों की सप्‍लाइ करेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। उधर, पुतिन इस दुविधा को देखते हुए भारत और चीन के रिश्‍ते को पटरी पर लाना चाहते हैं ताकि पूरा फोकस नाटो पर किया जा सके।

September 11th 2022, 6:03 am

चीन ने ताइवान के खिलाफ छेड़ा नया युद्ध, ड्रोन से ताइवानी मिलिट्री को डराने में जुटे ड्रैगन के सैनिक

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ताइपे: अगस्‍त में जब अमेरिकी कांग्रेस स्‍पीकर नैंसी पेलोसी ने ताइवान दौरे का ऐलान किया तो उसके बाद से ही चीन की आक्रामकता का अनुमान लगाया जाने लगा। पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद मिलिट्री ड्रिल के जरिए चीन ने अपनी आक्रामकता दुनिया को दिखाई। अब ताइवान को अलग तरह से परख रही है। ताइवान की सीमा पर लगातार मंडराते ड्रोन के साथ ही चीनी मिलिट्री इस देश की जवाब देने की क्षमता का अंदाजा लगाने में लगी है। हाल ही में ताइवान की सेना ने एक चीनी ड्रोन को ढेर किया है और साथ ही उसने अपनी सुरक्षा को भी बढ़ा दिया है। ताइवान की तरफ आए 30 ड्रोन ताइवान के सैनिकों ने शुरुआत में तो चीनी ड्रोन्‍स को नजरअंदाज कर दिया था। इसके बाद ताइवान की सीमा की तरफ आने वाले चीनी ड्रोन्‍स की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ। ताइवान की तरफ से कई बार इन ड्रोन्‍स को दूर करने के लिए वॉर्निंग शॉट्स तक फायर किए गए। एक चीनी ड्रोन तो फायरिंग की वजह से समंदर में जा गिरा। पिछले एक महीने में ही करीब 30 ड्रोन्‍स उन दो द्वीपों की तरफ आए हैं जो ताइवान के हिस्‍से में हैं और चीन के दक्षिणी-उत्‍तरी तट की तरफ स्थित हैं। ज्‍यादातर ड्रोन्‍स या तो असैन्‍य थे या फिर इनकी पहचान नहीं हो सकी। लेकिन इतना तो तय था कि ये सभी ड्रोन्‍स उन मिलिट्री स्‍टेशंस को निशाना बनाने की कोशिशों में थे जहां पर ताइवानी सैनिक मौजूद हैं। इन ड्रोन्‍स की वजह से ताइवान और चीन के बीच तनाव और बढ़ गया है। चीन अक्‍सर यह दावा करता है कि ताइवान उसकी सीमा में आता है। अब इसने ताइवान स्‍ट्रैट में अपनी मौजूदगी को और बढ़ा दिया है। चीनी जेट्स ताइवान के करीब लगातार उड़ान भर रहे हैं। चीन ने युद्ध की आशंका के बीच ही ताइवान के सामने अलग तरह से चुनौती पेश करनी शुरू कर दी है। इसके बाद संघर्ष का खतरा भी बढ़ गया है। ताइवान स्थित नेशनल पॉलिसी फाउंडेशन में विशेषज्ञ चीह चुंगु की मानें तो चीन इस तरह का उत्‍पीड़न करके दबाव बढ़ाना चाहता है और वह जान-बूझकर ताइवान के करीब टेंशन बढ़ा रहा है। कैसे जवाब देगा ताइवान ताइवान के रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि चीनी सेना की तरफ से पिछले हफ्ते चार ड्रोन्‍स उसकी तरफ भेजे गए हैं। सवाल यह उठता है कि चीन के ड्रोन्‍स को आने वाले समय में ताइवान कैसे जवाब देगा और क्‍या वाकई उसमें इतनी ताकत है कि वह चीनी ड्रोन्‍स का मुकाबला कर सके। चीन ने अभी तक टीबी-001, कॉम्‍बेट ड्रोन को भेजा है। इस ड्रोन को स्‍कॉर्पियन के नाम से भी जानते हैं। इसके अलावा रेकी करने वाले दो ड्रोन्‍स भी चीन की तरफ से भेजे गए हैं। चीनी ड्रोन्‍स अपनी सेना के लिए प्रमुख तौर पर इंटेलीजेंस इकट्ठा करने का काम करते हैं। दूसरी तरफ से चीन के असैन्‍य ड्रोन उसके प्रपोगेंडा को फैलाने का नया हथियार बन गए हैं। चीन का मकसद इन ड्रोन्‍स की वजह से ताइवान की इमेज को कमजोर करना है। चीनी सोशल मीडिया पर अक्‍सर ऐसी तस्‍वीरें वायरल हो जाती हैं जिनमें ताइवानी सैनिक चीन के ड्रोन्‍स को देखने के बाद एकदम मजबूर नजर आते हैं। कुछ तस्‍वीरों में तो चीन के शहरों में ताइवानी सैनिकों की स्थिति को दिखाया जाता है। चीन के मीडिया विशेषज्ञ अक्‍सर इन तस्‍वीरों को देखकर ताइवान का मजाक उड़ाते हैं। ताइवान का कहना है कि चीन ने ऐसा करके उसके खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया है। उसकी मंशा ताइवान को डराने की है। ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन ने चीन को चेतावनी दी है कि ताइवानी मिलिट्री चीन की आक्रामकता का जवाब देने में सक्षम है। क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ पेंटागन के पूर्व अधिकारी ड्रयू थॉम्‍पसन की मानें तो ताइवान की सेना चीनी के फाइटर जेट्स का जवाब तो दे सकती है लेकिन उसके पास उसकी इन हरकतों का जवाब देने की कोई रणनीति नहीं है। थॉम्‍पसन चीन के मामलों के जानकार हैं। जब पहली बार चीनी ड्रोन नजर आया तो पता लग गया कि ताइवान के पास इनसे निबटने के जरूरी उपकरण नहीं हैं। ताइवान की सेना को भी समझ नहीं आ रहा था कि वह क्‍या करें। थॉम्‍पसन की मानें तो 21वीं सदी में भी ताइवान 20वीं सदी का युद्ध लड़ रहा है। चीनी ड्रोन को गिराने के बाद ताइवान की मिलिट्री ने एक्‍स्‍ट्रा ड्रोन जैमर्स तैनात कर दिए हैं। ये जैमर्स ताइवान के किनमैन और मात्‍सू द्वीप की तरफ आने वाले ड्रोन्‍स के सिग्‍नल को कमजोर कर सकते हैं। इन दोनों द्वीपों पर अच्‍छी खासी संख्‍या में ताइवानी सैनिक मौजूद हैं। यहां से दो छोटे द्वीपों श्‍यू या लॉयन की तरफ सैनिकों को रवाना किया गया जहां पर चीनी ड्रोन को गिराया गया था।

September 11th 2022, 6:03 am

सोनाली की हत्‍या की जांच करे सीबीआई, नहीं तो जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन, खाप महापंचायत का फैसला

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चंडीगढ़: भाजपा नेता की मौत के मामले में चल रही जांच के बीच रविवार को हिसार में खाप महापंचायत आयोजित कर मामले की जांच की मांग की गई। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने कहा था कि मामले की वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा की जा रही है और आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। बिग बॉस के पूर्व प्रतियोगी के परिवार के सदस्य कई बार सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं। सोनाली फोगट के भतीजे विकास सिंह ने बताया कि परिवार सीबीआई जांच के लिए गोवा हाई कोर्ट याचिका दायर करेगा। उन्होंने कहा कि परिवार ने इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित को पहले ही पत्र लिखा है।महापंचायत में फैसला लिया कि अगर सरकार सीबीआई जांच नहीं करेगी तो वह सभी जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करेंगे। महापंचायत में सोनाली की बेटी और परिजनों को सुरक्षा देने की भी मांग की। सोनाली फोगाट के परिवार ने की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी मुलाकात कर केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने भी आश्वासन दिया था। शुक्रवार को गोवा पुलिस की एक टीम ने हरियाणा के हिसार जिले में फोगाट के संत नगर स्थित आवास का दौरा किया और तीन डायरियां जब्त कीं। पुलिस सर्च टीम ने सोनाली के बेडरूम, अलमारी और पासवर्ड से सुरक्षित लॉकर की तलाशाी ली थी। पुलिस ने सोनाली फोगट के आवास पर लगे लॉकर को भी सील कर दिया। सोनाली फोगाट को 23 अगस्त को उत्तरी गोवा के अंजुना में सेंट एंथोनी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। एक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चोट का पता चला, जिसके बाद गोवा पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। इससे पहले गोवा पुलिस ने कहा था कि सोनाली फोगट को उसके दो सहयोगियों ने जबरन नशीला पदार्थ पिलाया था, जिन्हें मामले में आरोपी के रूप में नामित करने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

September 11th 2022, 6:03 am

शिवराज टेंशन फ्री! चुनाव का 'चीता' आ रहा मध्य प्रदेश, दहाड़ के साथ होगी मिशन 2023 की शुरुआत

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भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को अपने जन्मदिन (Narendra Modi MP Tour) के मौके पर मध्य प्रदेश आ रहे हैं। इस दौरान पालपुर कूनो नेशनल पार्क () में नामीबिया से आ रहे चीतों के दल को प्रवेश कराएंगे। साथ ही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री इस दौरे के जरिए मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव () का शंखनाद भी करेंगे। इसके बाद राहुल गांधी भी राज्य में पदयात्रा पर आने वाले हैं। प्रधानमंत्री के इस दौरे को सियासी तौर पर काफी अहम माना जा रहा, क्योंकि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और 2024 में लोकसभा चुनाव है। 17 सितंबर को पीएम मोदी का बर्थडे, MP का करेंगे दौरापीएम मोदी इस दौरे के जरिए राज्य की जनता को सीधे संदेश देंगे। प्रदेश में चुनाव प्रधानमंत्री के चेहरे पर ही लड़े जाने वाले हैं। पीएम मोदी का यह दौरा राहुल गांधी की एमपी में होने वाली पदयात्रा से पहले हो रहा है इसलिए इसे सियासी तौर पर काफी अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद राज्य के कई और प्रवास संभावित हैं। इनमें इंदौर में होने वाली इन्वेस्टर सम्मिट है तो वहीं उज्जैन के कॉरिडोर की उद्घाटन का कार्यक्रम भी हो सकता है। मोदी के दौरे को लेकर तैयारियां तेजप्रधानमंत्री के दौरे से सत्ता और संगठन दोनों उत्साहित हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की तैयारियों से जुड़े सभी पहलुओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की। साथ ही कई जरूरी निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा में मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क में चीतों के प्रवेश करवाने और करहल में स्व-सहायता समूह की बहनों के सम्मेलन का कार्यक्रम निर्धारित है। इस मौके पर विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। अफ्रीकी चीतों को पीएम देंगे नया घरइसके साथ ही मध्यप्रदेश के जिलों में ओडीओपी में किए जा रहे कार्यों की प्रस्तुति भी शामिल रहेगी। मुख्य रूप से मुरैना जिले में सरसों तेल, शिवपुरी जिले में मूंगफली तेल, चंदेरी में तैयार अंगवस्त्र को पेश किया जाएगा। शिवपुरी में बनाए गए जैकेट, डिंडौरी की गोंडी चित्रकला और मिलेट उत्पाद की गतिविधियों और इनके उत्पादन और निर्माण आदि से जुड़े कार्यों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी जाएगी। बीजेपी ने तेज की तैयारी, मिशन 2023 का होगा आगाजप्रदेश बीजेपी संगठन भी पीएम मोदी के इस प्रवास को खास बनाना चाहता है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा, यह मध्यप्रदेश के कार्यकर्ताओं के लिए गौरव की बात है कि देश के प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में आठ अफ्रीकन चीतों की शिफ्टिंग के लिए आ रहे हैं। उनके इस दौरे से पार्टी के सभी कार्यकर्ता उत्साहित हैं और उनके स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिन से महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर तक बीजेपी सेवा पखवाड़ा मनाएगी। इसके अंतर्गत रक्तदान शिविर समेत सेवा के अनेक अभियान चलाए जाएंगे। पीएम मोदी की एंट्री के साथ MP में मिशन 2023 का शंखनादराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस दौरे से राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो जाएगा। बीजेपी का चुनावी रोडमैप भी नजर आने लगेगा। कुल मिलाकर पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मोड में होगी और राहुल गांधी की पदयात्रा राज्य में आने से पहले अपना सियासी दांव चलने में पीछे नहीं रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि साल 2018 के चुनावी नतीजों को बीजेपी अब तक भूल नहीं पाई है।

September 11th 2022, 5:07 am

मस्क ने ट्विटर डील तोड़ने की बताई एक नई वजह, जानिए अब क्या है मामला

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नई दिल्ली : एलन मस्क (Elon Musk) और ट्विटर डील (Twitter Deal) का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति मस्क ने ट्विटर डील तोड़ने के पीछे एक और बड़ा कारण बताया है। टेस्ला के सीईओ मस्क ने कहा कि ट्विटर का व्हिसल ब्लोअर को पेमेंट डील को तोड़ने का बड़ा कारण है। मस्क ने कहा कि ट्विटर का एक पूर्व कर्मचारी जो व्हिसल ब्लोअर बन गया था, उसे लाखों डॉलर का भुगतान किया था। यह एक बड़ा कारण था, जिसके चलते मस्क ने ट्विटर को खरीदने की 44 अरब डॉलर की डील को रद्द कर दिया। मस्क का यह बयान वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के बाद आया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्विटर ने एक विवाद के निपटारे के लिए व्हिसल ब्लोअर को सात मिलियन डॉलर भुगतान करने का फैसला लिया है। भुगतान से पहले नहीं ली सहमति ट्विटर को लिखे एक पत्र में एलन मस्क के वकीलों ने कहा,‘पीटर जटको (व्हिसलब्लोअर) और उनके वकीलों को 7.75 मिलियन डॉलर का भुगतान करने से पहले ट्विटर ने उनकी सहमति नहीं ली। इससे मर्जर एग्रीमेंट का उल्लंघन हुआ है। जटकों को हुए 7 मिलियन डॉलर सहित इस भुगतान के कदम को ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए मस्क के लिए इस डील को पूरा करना जरूरी नहीं था। फर्जी अकाउंट्स भी एक बड़ा कारण टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ ने एलन मस्क ने ट्विटर के साथ डील तोड़ने की घोषणा करते हुए कहा था कि ट्विटर पर ‘बॉट्स, स्पैम और फर्जी अकाउंट’ हैं, जिस कारण उन्हें यह डील तोड़नी पड़ रही है। मस्क ने मंगलवार को यह भी कहा था कि उनके ट्वीट पर 90 फीसदी कमेंट्स असल में बॉट या स्पैम रिप्लाई हैं। डील तोड़ने के पीछे बताया था भारत कनेक्शन इससे पहले एलन मस्क ने ट्विटर डील तोड़ने के पीछे भारत कनेक्शन का भी जिक्र किया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ट्विटर भारत सरकार के खिलाफ जोखिम भरे मुकदमे का खुलासा करने में विफल रही। मस्क ने साथ ही यह दावा भी किया कि ट्विटर ने भारत सरकार के खिलाफ जाकर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े बाजार को खतरे में डाल दिया था। मस्क ने डेलावेयर अदालत में एक काउंटरसूट में यह दावा भी किया था कि ट्विटर ने उन्हें कई चीजों के बारे में अंधेरे में रखा। डील के समय उन्हें भारत में चल रहे डेवलपमेंट के बारे में नहीं बताया गया था। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, मस्क ने कहा कि ट्विटर को भारत में स्थानीय कानून का पालन करना चाहिए। वहीं, ट्विटर ने कोर्ट को बताया है कि मस्क के पास कंपनी के बारे में पूरी जानकारी थी। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

September 11th 2022, 4:28 am

लखीमपुर खीरी में दलित किशोरी से गैंगरेप, हालत गंभीर...लखनऊ रेफर

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लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार महिला अपराध को लेकर सख्त है। इसके बावजूद महिलाओं के प्रति अपराध कम नहीं हो रहे हैं। ताजा मामला यूपी के लखीमपुर खीरी से सामने आया है। यहां शनिवार देररात एक दलित किशोरी गैंगरेप किया गया। किशोरी की हालत गंभीर होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया है। घटना मोहम्मदी थाना क्षेत्र की है। शनिवार रात किशोरी अपनी दादी के लिए खाना लेकर एक घर से दूसरे घर जा रही थी। रास्ते में चार युवकों ने किशोरी को खेत में खींच लिया और उसके साथ गैंगरेप किया। जिसके बाद किशोरी की हालत नाजुक हो गई। किसी तरह किशोरी घर पहुंची और परिजनों को सारी घटना बताई। परिजनों किशोरी को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने किशोरी की हालत को देखते हुए लखनऊ रेफर कर दिया। वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि किशोरी से गैंगरेप की सूचना मिली थी। किशोरी को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल में भेजा गया था। जहां उसका मेडिकल कराया गया है। चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

September 11th 2022, 4:07 am

ब्रिटेन की महारानी का निधन के 11 दिन बाद होगा अंतिम संस्कार, ताबूत में एक साल तक रखा जा सकता है शव,

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लंदन : ब्रिटेन पर सबसे लंबे समय तक राज करने वाली क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का पिछले गुरुवार को बाल्मोरल कैसल में निधन हो गया था। आने वाले दिनों में उनका शव स्कॉटलैंड में उनके मृत्यु स्थान से लंदन में उनके अंतिम संस्कार स्थल तक, बीच में कई बार रुकता हुआ, यात्रा करेगा। उनकी अंतिम यात्रा को 'ऑपरेशन यूनिकॉर्न' नाम दिया गया है जिसके आखिर में 19 सितंबर को क्वीन का अंतिम संस्कार होगा। 8 सितंबर को एलिजाबेथ का निधन 96 साल की आयु में हो गया था जिससे कुछ दिन पहले बकिंघम पैलेस ने बयान जारी करते हुए उनके स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने अपनी आखिरी सांस स्कॉटलैंड स्थित बाल्मोरल कैसल में ली जहां वह मेडिकल देखरेख में थीं। खबरों के मुताबिक महारानी का ताबूत सीधे लंदन उनके अंतिम स्थल तक नहीं जाएगा। ऑपरेशन यूनिकॉर्न के तहत अपनी अंतिम यात्रा में ताबूत कई जगहों पर रुकेगा। द टाइम्स के अनुसार बाल्मोरल कैसल से एलिजाबेथ का शव एक रथ पर निकलेगा और उसे लगभग 200 किमी दूर स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में ले जाया जाएगा। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार महारानी की अंतिम यात्रा का रथ तीन जगहों पर रुकेगा, बैलेटर, एबरडीन और डंडी में, जहां जनता उन्हें श्रद्धांजलि देगी। 13 सितंबर को लंदन आएगा क्वीन का शवएडिनबर्ग में एलिजाबेथ के ताबूत को एक दिन के लिए स्कॉटलैंड की संसद के पास होलीरूड पैलेस में रखा जाएगा। यहां कुछ चुनिंदा लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे जिनमें ज्यादातर सरकारी अधिकारी होंगे। यह पैलेस स्कॉटलैंड में ब्रिटिश सम्राट का आधिकारिक आवास है। होलीरूड से महारानी का शव एडिनबर्ग के रॉयल माइल से सेंट जाइल्स कैथेड्रल तक एक जुलूस निकाला जाएगा। इस दौरान जनता को उनका ताबूत देखने और उन्हें श्रद्धांजलि देने की अनुमति होगी। 13 सितंबर को महारानी का ताबूत लंदन के लिए रवाना होगा। पति फिलिप के बगल में दफन होंगी एलिजाबेथरिपोर्ट के अनुसार लंदन में बकिंघम पैलेस से वेस्टमिंस्टर हॉल तक एक शवयात्रा निकाली जाएगी जहां ताबूत अगले पांच दिनों तक रहेगा। यहां जनता महारानी को श्रद्धांजलि दे सकती है। वेस्टमिंस्टर एब्बे में उनकी अंतिम शवयात्रा निकाली जाएगी जो हाइड पार्क कॉर्नर पर खत्म होगी। यहां एलिजाबेथ के ताबूत को विंडसर कैसल में उनके अंतिम स्थल तक ले जाया जाएगा और सेंट जॉर्ज में उन्हें उनके पति फिलिप के पास दफना दिया जाएगा। क्वीन एलिजाबेथ को उनके पति फिलिप के ही जैसे एक ताबूत में रखा गया है। लेड की परत वाला ताबूत अद्भुतफिलिप को उनके निधन से 30 साल पहले बनाए गए एक लेड-लाइन्ड (Lead-Lined) लकड़ी के ताबूत में रखा गया था। यह एक शाही परंपरा है। एक लेड-लाइन्ड ताबूत का इस्तेमाल शरीर को लंबे समय तक संरक्षित करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए अगर ताबूत पर लेड की परत चढ़ी है तो यह शव को एक साल तक संरक्षित कर सकता है। यह शरीर को सूखा रखता है और नमी को प्रवेश करने से रोकता है।

September 11th 2022, 4:07 am

सोसाइटी के गार्ड पर बरसाए चांटे, नोएडा में एक और थप्‍पड़बाज महिला का वीडियो वायरल

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नोएडा: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में पिछले महीने गालीबाज महिला का वीडियो वायरल होने के बाद अब एक और नया मामला सामने आया है। नोएडा की क्लियो काउंटी सोसायटी में एक महिला सोसायटी के गार्ड पर थप्पड़ की बरसात करते नजर आ रही है। घटना का सीसीटीवी फुटेज अब वायरल हो गया है।

September 11th 2022, 4:07 am

शाहिद अफरीदी की बेटी क्यों तिरंगा फहराने के लिए हुई मजबूर, एशिया कप के दौरान की घटना

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नई दिल्ली: एशिया कप 2022 (Asia Cup) में 28 अगस्त और फिर 4 सितंबर को भारत और पाकिस्तान (IND vs PAK) का मुकाबला हुआ था। पहले मैच में टीम इंडिया को जीत मिली लेकिन दूसरे में पाकिस्तान ने बाजी मार ली। इन दोनों मैचों के लिए दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में फैंस भारी संख्या में पहुंचे थे। सुपर-4 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले को लेकर पाकिस्तानी टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने बड़ा खुलासा किया है। अफरीदी की बेटी के हाथ में तिरंगाशाहिद अफरीदी ने इस मैच को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर बात करते हुए बताया कि इस मैच के दौरान उनकी छोटी बेटी के हाथ में तिरंगा था। एंकर ने कहा कि भारत-पाकिस्तान मैच में अधिकांश फैंस इंडिया के थे। इसपर अफरीदी ने बोला, 'हां मुझे बता रहे थे, मेरी फैमिली वहां बैठी थी। वीडियो भिजवाई जा रही थी मुझे और मैं देख रहा था और वाइफ मेरी बता रही थी कि सिर्फ 10 प्रतिशत ही पाकिस्तानी यहां हैं। बाकी 90 प्रतिशत इंडियन ही इंडियन हैं।' शाहिद अफरीदी ने आगे कहा, 'यहां तक कि वहां पाकिस्तानी झंडा भी नहीं मिल रहा था। मेरी छोटी बेटी ने इंडिया का झंडा हाथ में उठाया था।' अफरीदी ने हंसते हुए बताया कि उनके पास इसका वीडियो भी है लेकिन वह समझ नहीं पा रहे हैं कि इसे ट्वीट करना है या नहीं। अंतिम ओवर में हारा था भारतसुपर 4 के मुकाबले में विराट कोहली की फिफ्टी की मदद से भारतीय टीम ने 7 विकेट पर 181 रन बनाए थे। कोहली के बल्ले से 60 रनों की पारी निकली थी। पाकिस्तान ने एक गेंद बाकी रहते मुकाबले को 5 विकेट से अपने नाम कर लिया था। टीम के लिए सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 51 गेंदों पर 71 रनों की पारी खेली। मध्यक्रम में मोहम्मद नवाज ने 20 गेंदों पर 42 रन बनाकर मैच का रुख बदल दिया।

September 11th 2022, 3:32 am

33 लोगों का परिवार, लेकिन 19 की आंखों में रोशनी ही नहीं, असम में इस पर‍िवार के साथ ऐसा क्‍यों?

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गुवाहाटी: असम के एक परिवार में पीढ़ियों से दृष्टिहीनता चली आ रही है। इसके बावजूद इस साल जन्मे नए सदस्य को उस परिवार ने बधाई दी है। परिवार के मुखिया अब्दुल वाहिद के लिए जन्मजात अंधापन एक बार-बार आने वाला दु:खद स्वप्न रहा है। 33 लोगों के भरे पूरे परिवार में 19 दृष्टिहीन सदस्य हैं। वाहिद गरीब और अशिक्षित हैं, जो कि असम के नगांव जिले के रूपहिहाट शहर की गलियों में भीख मांगकर अपनी आजीविका कमाते हैं। इसको लेकर सालों से वाहिद अंधेपन को अपने परिवार का भाग्य मान रहे थे। साल 2018 में वाहिद के परिवार की कहानी असम के लखीमपुर मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गायत्री गोगोई तक पहुंची। जिसके बाद सावधानीपूर्वक विश्लेषण के बाद डॉक्टर गोगोई और उनकी टीम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वाहिद के परिवार में लोग आनुवंशिक दोष के शिकार हैं। वाहिद का परिवार अकेला ऐसा नहीं है, जो कि वंशानुगत अंधेपन से पीड़ित है। दुनिया भर के वैज्ञानिकों को कम से कम तीन अन्य लोगों के बारे में पता था, लेकिन इनमें से पहले कभी भी किसी परिवार में 19 मामले नहीं मिले थे। डॉक्टर गोगोई और पांच चिकित्सा सलाहकारों ने परिवार के प्रारंभिक प्रयोगशाला परीक्षण के लिए एक परियोजना विकसित की। साल 2018 के आखिरी में वैज्ञानिकों ने उन जीनों को शॉर्टलिस्ट किया, जो कि वाहिदों के वंशानुगत अंधेपन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। कार्डिफ विश्वविद्यालय के एक नैदानिक आनुवंशिकीविद प्रोफेसर धवेंद्र कुमार की मौजूदगी में दिसंबर 2018 में नमूने लिए गए थे। नमूनों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने परीक्षण में GJA8 जीन का एक अत्यंत दुर्लभ उत्परिवर्तन पाया, जो कि पीढ़ी दर पीढ़ी अंधेपन का कारण बनता है। अब्दुल वाहिद, खैरुल इस्लाम और सोमाला खातून (परिवार के सदस्य) में एक समान रोगजनक संस्करण (जीजेए 8 जीन) का सकारात्मक परीक्षण किया गया, जिसका मतलब साफ था कि यह एक आनुवंशिक उत्परिवर्तन है। जो कि पिछली चार पीढ़ियों में अंधेपन के लिए जिम्मेदार है। डॉ. गोगोई का कहना है कि इस तरह यह चौथा मामला है कि जब कोई परिवार इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। उनका कहना है कि सिडनी विश्वविद्यालय की आनुवंशिक प्रयोगशाला के जरिए की गई जांच में ऐसी ही बीमारी पाई गई। डॉक्टर्स का कहना है कि “हमने जांच के दौरान पाया कि संरचना के विकास के तहत – एनोफ्थेल्मिया और माइक्रोफथाल्मिया नामक चिकित्सा स्थिति में प्रभावित सदस्यों के पास सॉकेट में पूरी तरह से विकसित नेत्रगोलक नहीं है या फिर उन्हें बिना किसी अन्य न्यूरोलॉजिकल या शारीरिक कमी की अलग-अलग ओकुलर समस्याएं हैं। यानी कि कुल मिलाकर कहा जाए तो इसका मतलब यह नहीं है कि वाहिद परिवार में हर बच्चा अंधा पैदा होता है। गर्भावस्था की शुरुआत में ही आनुवंशिक जांच यह दिखा सकती है कि क्या भ्रूण में GJA8 उत्परिवर्तन होता है। डॉ. गोगोई कहते हैं कि हर गर्भावस्था का परीक्षण जीन में समान दोष की उपस्थिति के लिए किया जाना चाहिए। वहीं अजन्मे सदस्यों के चयन से कुछ दशकों के बाद धीरे-धीरे यह बोझ कम होगा। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर परीक्षण सकारात्मक आता है और वो गर्भपात कानूनी बाधाओं से मुक्त है तो पहले 12 हफ्तों के भीतर गर्भावस्था को समाप्त करने की सिफारिश की जाती है। इसलिए डॉ. गोगोई ने वाहिद के परिवार की महिलाओं को गर्भधारण के समय स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी। वहीं साल 2018 के बाद, उनकी टीम ने अगले कुछ वर्षों तक परिवार में हर गर्भावस्था की सख्ती से निगरानी की और दो अनुवर्ती अनुवांशिक जांच की गईं। इस दौरान असामान्यता वाले एक भ्रूण का गर्भपात कर दिया गया, जबकि दूसरे का जन्म सामान्य दृष्टि से हुआ। गुवाहाटी की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ पंकज डेका, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में पैदा हुए परिवार के 19वें दृष्टिबाधित सदस्य का पता लगाया था। उनका कहना है कि इस साल पैदा हुए बच्चे की स्क्रीनिंग बहुत देर से की गई। मां पहले से ही छह महीने की गर्भवती थी और हमने अल्ट्रासाउंड के माध्यम से अंधेपन की पुष्टि की। लेकिन तब तक गर्भपात का समय बीत चुका था और इसकी अनुमति नहीं थी। आसानी से नहीं उठाया जा सकता टेस्ट का खर्च समाज कल्याण विभाग वाहिद परिवार के नेत्रहीन सदस्यों को प्रति माह 1,000 रुपये का भुगतान करता है, लेकिन आनुवंशिक जांच पर सब्सिडी होने के बाद भी प्रति गर्भावस्था लगभग 10,000 रुपए का खर्च आता है। यह परिवार के लिए दुर्भाग्य की बात है कि GJA8 उत्परिवर्तन उन स्थितियों में से एक नहीं है, जिसके लिए असम सरकार मुफ्त निदान प्रदान करती है। डॉ. गोगोई कहते हैं कि "दुर्लभ विकार का पता लगाना ही परिवार में अंधेपन को खत्म करने का कोई समाधान नहीं है, "जब तक कि परिवार से अंधापन पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इस बात की पूरी संभावना है कि नेत्रहीन संतान पैदा होती ही रहेगी।

September 11th 2022, 3:32 am

तंग गलियों में पुतिन की सेना को कसाई की तरह काट रही यूक्रेनी आर्मी, 6 महीने बाद यह शहर आजाद

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कीव: यूक्रेन के युद्ध में जेलेंस्‍की की सेना को 6 महीने बाद शनिवार को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। यूक्रेन की सेना ने देश के पूर्वोत्‍तर इलाके में स्थित इजियूम शहर से रूसी सेना को मार भागाया है। यूक्रेन की सेना लगातार इस इलाके में आगे बढ़ती जा रही है और युद्ध का एक नया नाटकीय चरण अ‍ब शुरू हो गया है। इजियूम शहर के मेयर वालेरिय ने ऐलान किया, 'शहर को आज आजाद करा लिया गया है।' इस शहर में अब आपातकालीन सेवाएं काम कर रही हैं ताकि वहां यूक्रेनी लोग फिर से वापस लौट सकें। पूरे खारकीव इलाके में रूसी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और उसके सैनिक एक गांव से दूसरे गांव में भागने को मजबूर हो गए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक दिन पहले ही कहा था कि वह इस इलाके में अपने रक्षात्‍मक चौकियों पर फिर से सेना को भेज रहा है। उसने अब शनिवार को पुष्टि की है कि उसकी सेना इजियूम शहर से लौट गई है। रूस ने दावा किया है कि उसकी सेना एक योजना के तहत पीछे हटी है ताकि पूर्व में अपनी स्थिति को मजबूत किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के दौरान शहरों पर कब्‍जा और फिर उसका पतन होना आम बात है और अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं कि इजियूम पर यूक्रेन का नियंत्रण कितना सुरक्षित है। यह भी नहीं पता है कि रूस इस पर दोबारा कब्‍जा करने के लिए क्‍या कदम उठा रहा है। रूसी सेना ने 'सफेद झंडा' दिखाया विशेषज्ञों के मुताबिक इजियूम शहर का रूस के हाथों से निकल जाना यूक्रेन की जंग में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। इसकी तुलना यूक्रेन की राजधानी कीव के पास से रूसी सेना के खाली हाथ लौटने से की जा रही है। खबरों के मुताबिक इस जीत का गवाह रहे एक यूक्रेनी अधिकारी ने बताया कि इस इलाके में रूसी सेना की हार के पहले संकेत शुक्रवार को उस समय मिले जब रूसी सेना ने एक रेलवे स्‍टेशन के पास सफेद झंडा दिखाया। उन्‍होंने बताया कि पूरी रात इस इलाके में सड़कों पर भारी लड़ाई हुई थी। यूक्रेन का कहना है कि देश के पूर्वोत्तर इलाके में जोरदार आक्रामक लड़ाई चल रही है। पिछले कुछ दिनों रूस के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और वे एक गांव से दूसरे गांव की ओर भाग रहे हैं। इस जीत से उत्‍साहित यूक्रेन के राष्‍ट्रपति जेलेंस्‍की ने कहा क‍ि हम धीरे-धीरे फिर से अपना इलाका वापस हासिल कर रहे हैं। अमेरिका के एक थिंक टैंक का दावा है कि खारकीव इलाके में हालिया कार्रवाई में 2500 वर्ग किमी इलाके से रूसी सैनिकों को मार भगाया गया है।

September 11th 2022, 3:32 am

श्रीनगर से फ्लाइट लेकर बेटी का इलाज कराने दिल्‍ली आया, वापसी में चोरी की कार ले जाते हुआ अरेस्‍ट

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नई दिल्ली: श्रीनगर से फ्लाइट लेकर अपनी बेटी का इलाज कराने दिल्ली आया एक शख्स यहां से चोरी की कार खरीदकर श्रीनगर ले जा रहा था। इसी दौरान पुलिस ने इसे पकड़ लिया। इसकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की दो और कारें इससे बरामद की हैं। पुलिस का दावा है कि पहले भी यह इस तरह के मामलों में शामिल रह चुका है। साउथ-वेस्ट दिल्ली के डीसीपी मनोज ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी का नाम आदिल इरशाद भट्ट है। 32 साल का आदिल श्रीनगर के बटवारा चौक का रहने वाला है। इसके पास से पुलिस ने चोरी की तीन कारें, एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह जम्मू-कश्मीर में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता है। पुलिस ने बताया कि श्रीनगर से यह अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ फ्लाइट में 4 सितंबर को दिल्ली आया था। यहां यह लाजपत नगर के एक गेस्ट हाउस में रुका था। इसे यहां अपनी 6 साल की बेटी का इलाज कराना था। इसी दौरान यह ओखला के रहने वाले संदीप नाम के शख्स से मिला। संदीप से इसकी मुलाकात अमरनाथ यात्रा के दौरान हुई थी। संदीप से इसने चोरी की एक आई-20 कार खरीदी। जिसकी नंबर प्लेट बदलकर यह इसे श्रीनगर ले जा रहा था। जहां यह कार को टूर एंड ट्रैवल्स के बिजनेस में इस्तेमाल करता, लेकिन इससे पहले ही इसे एएटीएस ने सूचना मिलने पर महिपालपुर बाइपास के पास चोरी की कार के साथ पकड़ लिया। चोरी की तीन कारों में एक आई-20, दूसरी होंडा सिटी और तीसरी मारुति ईको है। यह कार गीता कॉलोनी और मोती नगर थाना इलाके से चोरी की गईं थीं।

September 11th 2022, 3:17 am

हाथ जोड़े, पांव पकड़ा, गिड़गिड़ाया मगर नहीं माने दरिंदे, वैशाली में बॉयफ्रेंड के सामने लड़की से गैंग

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पटना : वैशाली में एक प्रेमी जोड़े को अकेले देखकर मनचलों ने पहले तो दोनों को बंधक बनाकर छेड़खानी की। फिर गैंग की वारदात को अंजाम दिया। इतने से भी दिल नहीं भर तो रेप का वीडियो वायरल कर दिया। और वैशाली को शर्मसार करने वाली ये रेप की घटना वैशाली के थाने की है। जहां 15 साल की नाबालिग के साथ रेप की घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया की 15 साल की नाबालिग लड़की अपने गांव के एक लड़के साथ थी। कुछ लड़कों ने उन्हें देख लिया और बंधक बनाकर रेप की वारदात को अंजाम दिया। लड़की के बयान पर रेप की FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं, वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान की जा रही है। इसके लिए पुलिस की ओर से ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है। दरिंदों से रहम की भीख मांगता रहा युवक पूरी वारदात वैशाली जिले के जंदाहा की है। जहां 10 सितम्बर को थाने के एक गांव की 15 साल की नाबालिग लड़की पास के ही गांव के एक लड़के के साथ सुनसान इलाके में थी। तभी गांव के 4-5 लड़कों ने उन्हें देख लिया और बंधक बना लिया। लड़की के साथ छेड़खानी की। उसके कपड़े उतार डाले। बंधक बना लड़का दरिंदों के सामने लगातार हाथ जोड़ता रहा तो कभी पांव पकड़ता रहा। लड़का अर्धनग्न हालत में लड़की को छेड़खानी से बचाने की कोशिश करता रहा। लड़की जमीन पर बैठी सुबकती रही। लफंगों ने कभी पुलिस बुलाने तो कभी गांव वालों के सामने उन्हें बदनाम करने की धमकी देते हुए उसके साथ बदसलूकी करते रहे। थोड़ी देर बाद दरिंदों ने बंधक बनी लड़की के साथ गैंगरेप किया। उसका वीडियो भी बनाया और छेड़खानी और रेप का वीडियो वायरल कर दिया। लड़की ने दर्ज कराई FIR देर शाम लड़की ने जंदाहा थाने में जाकर खुद के साथ हुई छेड़खानी और गैंगरेप की FIR दर्ज कराई। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। लड़की ने 4-5 लड़कों के खिलाफ छेड़खानी और रेप की FIR दर्ज कराई है। जिसके बाद पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी में जुट गई है। रिपोर्ट- चंद्रमणि कुमार

September 11th 2022, 3:13 am

'किंग चार्ल्स'... वह नाम जिससे जुड़ा है शाही परिवार का काला इतिहास, कहानी उस दौर की जब ब्रिटेन से खत

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लंदन : ब्रिटेन की राजगद्दी पर 70 साल बाद नया सम्राट बैठा है। पिछले गुरुवार को 96 साल की क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हो गया था। शनिवार को किंग चार्ल्स तृतीय का औपचारिक ताजपोशी हुई। लेकिन नए राजा 'किंग चार्ल्स III' के नाम के साथ एक काला इतिहास जुड़ा हुआ है। इतिहास के उन पन्नों को शाही परिवार का कोई भी सदस्य दोबारा पढ़ना नहीं चाहता। यह वह दौर था जब ब्रिटेन से राजशाही से अस्तित्व कुछ समय के लिए खत्म हो गया था और इसकी कहानी नए राजा के नाम यानी किंग चार्ल्स से जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं 'किंग चार्ल्स' से जुड़ा शाही परिवार का काला इतिहास क्या था। ब्रिटेन के नए सम्राट का नाम किंग चार्ल्स तृतीय रखा गया है लेकिन यह अनिवार्य नहीं था। चार्ल्स फिलिप आर्थर जॉर्ज सिंहासन पर बैठते समय कोई दूसरा शाही नाम भी चुन सकते थे। कुछ ऑब्जर्वर्स को उम्मीद थी कि चार्ल्स नाम के दो पिछले ब्रिटिश सम्राटों से जुड़े 'ऐतिहासिक बोझ' के कारण नए राजा कोई अलग नाम पसंद कर सकते हैं। किंग चार्ल्स प्रथम इकलौते ब्रिटिश सम्राट हैं जिनके शासन में क्रांति हुई और राजशाही अस्थायी रूप से खत्म हो गई। वह 1625 में सिंहासन पर बैठे थे। उनके शासनकाल में राजगद्दी और संसद के बीच एक शक्ति संघर्ष देखा गया जिसने राजा की शक्तियों को सीमित कर दिया। जब ब्रिटेन में शुरू हो गया गृहयुद्धसाल 1642 में जब राजा ने हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसदों को गिरफ्तार करने की कोशिश की इंग्लिश सिविल वॉर की शुरुआत हो गई। इस गृहयुद्ध का अंत ओलिवर क्रॉमवेल की संसदीय सेना की जीत के साथ हुआ। चार्ल्स को उच्च राजद्रोह का दोषी ठहराया गया और 1649 में लंदन में बैंक्वेटिंग हाउस के बाहर सड़क पर ही उनका सिर काट दिया गया। किंग चार्ल्स द्वितीय चार्ल्स प्रथम के पुत्र थे जिन्होंने अपनी युवावस्था क्रॉमवेल के 11 साल के शासनकाल के दौरान विदेश में बिताई। ...और लौट आई राजशाहीसाल 1660 में जब राजशाही दोबारा बहाल हुई तो वह गद्दी पर बैठे। हालांकि उनके पास चार्ल्स प्रथम की तुलना में काफी कम शक्तियां थीं। संसद की सहमति के बिना कानून बनाने की शक्ति सम्राट से छीन ली गई थी। चार्ल्स द्वितीय के 25 साल के शासनकाल में सार्वजनिक मनोरंजन की वापसी हुई क्योंकि क्रॉमवेल के कठोर राज में थिएटर बंद कर दिए गए थे और क्रिसमस समारोह पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

September 11th 2022, 3:13 am

बाघ के हमले में पति को खोया, सरकारी मदद के लिए लंबा इंतजार... सुंदरबन की 4000 टाइगर विडो का दर्द

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कोलकाता: मंतोष मंडल अपनी पत्नी कौशल्या (40) के साथ के मध्य में स्थित पीरखली गाजी वन में केकड़े इकट्ठा थे। अप्रैल 2015 में एक बंगाल टाइगर ने उनकी नाव पर हमला बोल दिया और मंतोष को मार डाला। मंतोष का शव खींचकर बाघ घने जंगल में ले गया और असहाय कौशल्या कुछ न कर सकीं। अपनी आंखों के सामने पति की दर्दनाक मौत ने उन्हें हिलाकर रख दिया लेकिन परिवार चलाने के लिए वह अभी भी जोखिम भरे इलाके में जाकर केकड़े पकड़ती हैं। सुंदरवन एक जटिल इलाका है। जंगलों में बाघ रहते हैं और दलदल-नदियों में मगरमच्छ का डर। कौशल्या बताती हैं, यहां तक कि दोपहर में भी जब नदी के बीच में नाव होती है तब भी हम बाघों की मौजूदगी को सुन सकते हैं। मानव-पशु के संघर्ष के चलते सुंदरवन में करीब 4,000 विधवाएं हैं जिन्हें टाइगर विडो भी बोलते हैं। इन महिलाओं के पति मछली, केकड़े या शहद इकट्ठा करते वक्त बाघों का शिकार बन गए। कौशल्या की तरह ही गीता मृधा के पति गौतम भी फरवरी 2012 में बाघ का शिकार बन चुके हैं। उनके अलावा एकादशी सरदार भी हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल अब तक इन विधवाओं को कोई सरकारी मदद नहीं मिली थी लेकिन अब उम्मीद की एक किरण नजर आई है। फरवरी महीने में कलकत्ता हाई कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की गई है जिसमें टाइगर अटैक के पीड़ितों की आबादी और उनके परिजनों को सरकारी अनुदान के उचित विवरण की मांग की गई। जान जोखिम में डालकर कोर एरिया में जाने को मजबूरसुंदरवन में 885 वर्ग किमी का बफर एरिया (पर्यावरण संरक्षण के लिए नामित क्षेत्र) है जबकि कोर एरिया यानी प्राकृतिक क्षेत्र तकरीबन 1,700 वर्ग किमी है। वन विभाग ने बोट लाइंसेस सर्टिफिकेट (बीएलसी) परमिट के साथ बफर एरिया में जीविकोपार्जन की कुछ गतिविधियां जैसे मछली और केकड़े पकड़ना, लकड़ी और शहद इकट्ठा करने की अनुमति दे दी थी। लेकिन कोर एरिया में प्रवेश के लिए जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही बाघ के हमले से मौत होने पर मुआवजे का भी कोई प्रावधान नहीं है। दक्षिणबंगा मतस्यजीवी फोरम के असिस्टेंट सेक्रेटरी अबदार मलिक कहते हैं, 'हालांकि क्लाइमेट चेंज और मैकेनाइज्ड फिशिंग के चलते गरीब मछुआरों के पास कोर एरिया में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। बफर जोन में नदियों में मछली और केकड़े कम होते जा रहे हैं।' वह कहते हैं, 'यहां के लोग बाघ और मगरमच्छ से अपनी जान जोखिम में डालकर कोर एरिया में जाने को मजबूर हैं।' उत्पीड़न के डर के चलते बाघ से जुड़ी मौतों का नहीं होता जिक्र जन श्रमजीवी मंच फोरम के मुख्य आयोजक तपस मंडल बीएलसी परमिट की सीमाओं की व्याख्या करते हैं। वह कहते हैं, '5 लाख से अधिक लोग जीविकोपार्जन के लिए वन पर निर्भर हैं लेकिन सुंदरवन टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में सिर्फ 923 परमिट हैं जिनमें से 700 ऐक्टिव हैं और प्रत्येक परमिट पर सिर्फ 3-4 मछुआरे को अनुमति है।' मंडल ने बताया कि परमिट निषेधात्मक रूप से महंगे हैं। उन्होंने कहा, 'कुछ सक्रिय मछुआरों ने अपना पेशा छोड़ दिया और दूसरे को उच्च दरों पर किराये पर दे दिया।' बाघ से जुड़ी कई मौतों का जिक्र भी नहीं होता क्योंकि गरीब मछुआरों को पता है कि उनका उत्पीड़न किया जाएगा। जबकि उनके पास एक परमिट भी है। पुलिस भी कभीकभार सहयोग करने से इनकार कर देती है। गीता कहती हैं, 'मेरे पति के पास एक परमिट था लेकिन जब हम रिपोर्ट दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने इनकार कर दिया।' 10 साल से खुद को टाइगर विडो साबित करने में जुटी गौतम की डेथ सर्टिफिकेट में प्राकृतिक मौत का जिक्र किया और पिछले 10 सालों में यह साबित करने में तुली है कि वह बाघ बिधोबा या टाइगर विडो हैं। मनयाबर की विधवा एकादशी के पास भी एक सर्टिफिकेट है जिसमें उनकी मौत की जगह गहरा जंगल बताया गया है लेकिन बाघ के हमले का जिक्र नहीं है। बिना किसी कागजात के ये महिलाएं 5 लाख रुपये के प्राइवेट और सरकारी मुआवजे के लिए अयोग्य हैं। लेकिन जब डेथ सर्टिफिकेट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बाघ के हमले से मौत की पुष्टि है फिर भी मुआवजा पाना आसान नहीं है। पीड़ितों की मदद करने वाले को भी बाघ ने शिकार बनाया पुष्पा मंडल के पति अर्जुन एक कार्यकर्ता थे जो टाइगर विडो को मुआवजा दिलाने में मदद करते थे। 2019 में उनकी भी टाइगर अटैक से मौत हो गई और शव भी नहीं मिला। पुष्पा ने अपने सारे कागजात तैयार कर लिए क्योंकि वह पेपरवर्क में होने वाली मुश्किलों को जानती हैं। बावजूद इसके उन्हें मुआवजा नहीं मिला और चक्रवात अम्फान और कोविड लॉकडाउन ने उन्हें वित्तीय संकट में डाल दिया। अब हाई कोर्ट के पाले में गेंद दक्षिणबंगा मतस्यजीवी फोरम से जुड़े वकील अभिषेक सिकदर ने बताया, 'फरवरी महीने में दाखिल पीआईएल में टाइगर अटैक पीड़ितों की सही आबादी और उन्हें उचित सरकारी अनुदान दिए जाने की मांग की गई है।' पश्चिम बंगाल कमीशन फॉर वुमन की चेयरपर्सन लीना गंगोपाध्याय ने कहा, हम पहले इस महीने बाघ बिधोबा गांव का दौरा करेंगे और विस्तृत सर्वे निकालेंगे ताकि हम अपना प्रोजेक्ट उनके साथ शुरू कर सकें। कार्यकर्ता अमल नायक कहते हैं कि इस मामले में दखल जरूरी है क्योंकि बाघ के हमले के जान जाने पर पूरे परिवार पर विपदा आती है। विधवा को तमाम परेशानियों से गुजरना होता है। उनके बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लड़कियों की कम उम्र में ही शादी हो जाती है और अक्सर वह ट्रैफिकिंग का शिकार हो जाती हैं।

September 11th 2022, 3:13 am

1947 में बिछड़े भाई-बहन 75 साल बाद करतारपुर में मिले, जिसने भी देखा, खुद को रोने से रोक नहीं पाया

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चंडीगढ़: करतारपुर कॉरिडोर ने एक और परिवार को जोड़ने का काम किया है। कई बार दोनों देशों में रहने वाले एक ही परिवार के लोगों के मिलने की खबरें आती रहती हैं। अब 1947 में बिछड़े भाई-बहन कई साल बाद फिर मिले हैं। इस बार अमरजीत सिंह और उनकी बहन कुलसुम 75 साल बाद एक-दूसरे से मिले हैं। जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर में भाई-बहन के पुनर्मिलन के पलों को देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। अमरजीत सिंह अपनी मुस्लिम बहन से मिलने और उनके मेहमान के रूप में रहने के लिए वीजा के साथ वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे। उनकी बहन 65 वर्षीय कुलसुम अख्तर अमरजीत को देखकर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं। दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर रोते रहे। वह अपने बेटे शहजाद अहमद और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपने भाई से मिलने के लिए फैसलाबाद आई थीं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि कुलसुम ने कहा कि उनका परिवार 1947 में भारत के राज्य पंजाब के जालंधर शहर से पाकिस्तान आया था। लेकिन उनके एक भाई और एक बहन पंजाब में रह गए थे। कुलसुम ने कहा कि वह पाकिस्तान में पैदा हुई थी और अपनी मां से अपने खोए हुए भाई और एक बहन के बारे में सुनती थी। उन्होंने कहा कि उनकी मां हमेशा भारत में रहने वाले उनके भाई-बहन को याद करते हुए रोने लगती थीं। कुलसुम ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह कभी अपने भाई और बहन से मिल पाएंगी। हालांकि कुछ साल पहले उनके पिता सरदार दारा सिंह का एक दोस्त भारत से पाकिस्तान आया और अपने बच्चों के बारे में बात करने लगा। इस दौरान इस उनका पता लगा। कुलसुम की मां ने सिंह को अपने बेटे और बेटी के बारे में बताया, जिन्हें वह भारत में छोड़ गई है। उन्होंने उसे अपने गांव का नाम और पड़ोसी देश में अपने घर का पता भी बताया। इसके बाद अमरजीत ने जालंधर के पडावां गांव में उसके घर का दौरा किया और उसे बताया कि उसका बेटा जिंदा है, लेकिन उसकी बेटी मर चुकी है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, उनके बेटे का नाम अमरजीत सिंह है, जिसे 1947 में एक सिख परिवार ने गोद लिया था। भाई की जानकारी के बाद अमरजीत और कुलसुम अख्तर ने व्हाट्सएप पर संपर्क किया और करतारपुर कॉरिडोर के जरिए मुलाकात की। अमरजीत ने कहा कि जब उन्हें पहली बार पता चला कि उनके असली माता-पिता पाकिस्तान में हैं और मुसलमान हैं, तो यह उनके लिए एक सदमा था। हालांकि, उन्होंने अपने दिल को दिलासा दिया कि उनके अपने परिवार के अलावा कई परिवार एक-दूसरे से अलग हो गए थे। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कई मुस्लिम बच्चे सिख बने और कई सिख बच्चे मुसलमान बने। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से अपनी सगी बहन और भाइयों से मिलना चाहते थे। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि उनके तीन भाई जीवित हैं। हालांकि, एक भाई जो जर्मनी में था, का निधन हो गया है। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार को भारत ले जाएंगे ताकि वे अपने सिख परिवार से मिल सकें। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे के लिए ढेर सारे तोहफे लाए थे। शहजाद ने कहा कि उन्हें खुशी है कि 75 साल बाद उनकी मां ने अपना खोया हुआ भाई पाया है।

September 11th 2022, 3:13 am

यूं ही नहीं कहते वडोदरा को टैलेंट की खान... पंड्या ब्रदर्स ही नहीं, इन भाइयों ने भी क्रिकेट में मचाय

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नई दिल्ली: जब हार्दिक पंड्या ने एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ छक्का मारकर भारत को जीत दिलाई, तो उनके भाई क्रुणाल का सीना गर्व से भर गया। हार्दिक के इस शॉट से पहले दिखाए गए कॉन्फिडेंस से हर कोई सरप्राइज था, लेकिन क्रुणाल नहीं। वह लंबे समय से एक छोर पर खड़े होकर दूसरे छोर पर हार्दिक को ऐसे विध्वंसक शॉट लगाते देख रहे हैं। हार्दिक और क्रुणाल एक साथ बड़ौदा की घरेलू टीम में खेलते हैं और लंबे समय तक मुंबई इंडियंस का भी हिस्सा रहे। यही नहीं, उन्होंने टीम इंडिया में भी एक साथ कई मैच खेले हैं। यूं ही नहीं कहते बड़ौदा को टैलेंट की खानयह जानकर हालांकि आश्चर्य होगा कि जिस शहर से वे आते हैं, वहां से कई धाकड़ भाइयों को जोड़ी हुई, जिन्होंने न केवल घरेलू टूर्नामेंट में साथ खेला, बल्कि कइयों ने तो लंबे समय तक इंटरनेशनल लेवल पर टीम इंडिया का लोहा भी मनवाया। भारत के महान क्रिकेटर विजय हजारे और उनके भाई विवेक ने 1940 के दशक में बड़ौदा के लिए रणजी खेला था। लेस्ली फर्नांडीस और उनके भाई एंथनी फर्नांडिस भी 1970 के दशक में बड़ौदा के लिए खेले। विक्रम हजारे और उनके बड़े भाई रंजीत 1972 से 1983 तक रणजी टीम का हिस्सा थे। इरफान-युसूफ ने तो वर्ल्ड कप साथ खेलाहाल के वर्षों में सबसे पहले पठान भाइयों का नाम आता है। जहां इरफान पठान ने 2000 में प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया, वहीं यूसुफ 2001 में रणजी टीम में शामिल हो गए। वे अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने वाले क्रिकेट भाइयों की दुर्लभ जोड़ी में से थे। दोनों ने मेहेंदी शेख के क्लब में प्रशिक्षण लिया और फिर बड़ौदा रणजी टीम में भी शामिल हो गए। पठान बंधुओं ने 2007 और 2009 में टी20 विश्व कप में भी भारत के लिए खेला था। उनका कहना है कि वे हमेशा एक साथ खेलने में सहज थे क्योंकि वे एक-दूसरे के खेल को जानते थे। हार्दिक-क्रुणाल की तरह ही केदार-मृणाल की जोड़ीहार्दिक 2013 में बड़ौदा रणजी टीम में शामिल हुए और फिर 2016 में भारत के लिए खेले। कुणाल ने 2018 में भारतीय टीम में के लिए डेब्यू किया। वे आईपीएल का भी हिस्सा हैं। पिछले सीजन कुछ मैचों में एक-दूसरे के खिलाफ खेले हैं। एक और ऐसी ही शानदार जोड़ी है, केदार और मृणाल देवधर की, जो बड़ौदा टीम के लिए एक साथ खेले हैं। बड़ौदा रणजी टीम में एंट्री पाने वाले केदार का कहना है कि मृणाल और वह क्लब स्तर पर भी एक साथ खेले। उन्होंने कहा- हम मैदान और मैदान के बाहर भी एक बहुत अच्छी बॉन्डिंग शेयर करते हैं। हम एक साथ बड़े हुए हैं। सौरिन और स्मित से विरोधी खा जाते हैं धोखा2017 में वडोदरा जुड़वां सौरिन और स्मित ठक्कर ने अंडर -19 कूच बिहार ट्रॉफी में ध्यान आकर्षित किया। वे इतने समान दिखते हैं कि विरोधी टीमें अक्सर धोखा खा जाती है। अब 23 साल के सौरिन बड़ौदा अंडर-25 टीम में खेलते हैं जबकि स्मित अंडर-23 टीम में हैं। सोरिन कहते हैं- विरोधियों को धोखा खाते देखने कई बार मजेदार होता है। लेकिन हम मैदान पर एक साथ अपने आउटिंग का आनंद लेते हैं। किरण मोरे कहते हैं- यहां के पानी में ही कुछ ऐसा हैभारत के क्रिकेटर दीपक हुड्डा और उनके भाई आशीष ने भी लगभग पांच साल पहले आशीष के खेल छोड़ने से पहले वडोदरा में क्रिकेट खेला था। राजस्थान टीम में जाने से पहले दीपक बड़ौदा रणजी टीम के लिए खेलते रहे। भारत के पूर्व क्रिकेटर किरण मोरे स्टार क्रिकेट भाइयों को एक अनोखी घटना के रूप में देखते हैं। वह कहते हैं- मुझे लगता है कि यह इस शहर की खेल संस्कृति ही कुछ ऐसा है। जब एक भाई ने क्रिकेट खेलना शुरू करता है तो दूसरा से फॉलो करता है। साथ ही क्लब कल्चर की वजह से उन्हें ज्यादा मौके मिलते हैं। अंशुमान गायकवाड़ के बेटों ने भी साथ खेलाभारत के पूर्व क्रिकेटर और राष्ट्रीय टीम के पूर्व कोच अंशुमान गायकवाड़ अपने साथी किरण मोरे से सहमत हैं और कहते हैं, 'यहां अवसर बेहतर हैं और भाई-बहनों के लिए इस छोटे से शहर में एक साथ यात्रा करना और एक साथ क्रिकेट खेलना भी आसान है।' उनके बेटे शत्रुंजय और अनिरुद्ध गायकवाड़ ने 1990 के दशक में वडोदरा में एक साथ क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया था। वे एम एस यूनिवर्सिटी टीम में भी एक साथ खेले, लेकिन अनिरुद्ध ने बाद में क्रिकेट से अलग कर लिया। दूसरी ओर, शत्रुंजय ने क्रिकेट को आगे बढ़ाया और बड़ौदा रणजी टीम के लिए खेले। वह कहते हैं- इस शहर में क्रिकेट से लगाव जबरदस्त है। मैं अपने पिता दत्ताजीराव गायकवाड़ से क्रिकेट के बारे में सुनकर और सीखता हुआ बड़ा हुआ हूं, जो एक टेस्ट खिलाड़ी थे। मेरे बेटे भी उसी माहौल में बड़े हुए और खेल से प्यार हो गया क्योंकि हम हर समय क्रिकेट पर चर्चा करते थे।

September 11th 2022, 3:13 am

गवाह की कोरोना से मौत, कोर्ट ने कहा-सबूत नहीं, हत्‍या के आरोपी को बरी कर दिया

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गुरुग्राम: एक हत्या के मामले में मुकदमे में एक व्यक्ति को इस सप्ताह एक स्थानीय अदालत ने बरी कर दिया। वजह यह रही है क‍ि दस हत्‍या के मामला के एक मात्र गवाह की कोरोना की वजह से मौत हो गई। उसने बयान दिया था क‍ि उसने हत्‍या होते हुए देखा था। लेकिन कोर्ट में पेशी से पहले ही उसकी मौत हो गई। ऐसे कोर्ट सबूतों के अभाव में आरोप आरोपी को बरी कर दिया। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी और मृतक के बीच पैसे के लेन देन को लेकर व‍िवाद हुआ था। ढाई हजार रुपये के लिए हुई थी लड़ाई26 अगस्त 2020 को महावीर चौक पर एक फार्मेसी के सामने एक शख्स का शव मिला था। उसकी पहचान फल विक्रेता बबलू के रूप में हुई। उसके दोस्त गौरव ने पुलिस को बताया कि बबलू और कुछ अन्य फल विक्रेता फार्मेसी के सामने फुटपाथ पर सोते थे। उनमें से एक ओम प्रकाश था जिसने मार्च 2020 में समूह से कथित तौर पर 2,500 रुपये की राशि उधार ली थी, जब महामारी के कारण पहला राष्ट्रीय तालाबंदी लागू किया गया था। वह अपने गृहनगर लुधियाना जाना चाह रहा था। वह अगस्त में शहर लौटा। 23 अगस्त को पैसे लौटाने को लेकर बबलू, गौरव और ओम प्रकाश में तीखी नोकझोंक हुई। बबलू ने कथित तौर पर ओम प्रकाश को थप्पड़ मारा, जिसने उन्हें मारने के लिए एक ईंट उठाई। लेकिन अन्य लोगों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें शांत किया। तीन दिन बाद बबलू मृत पाया गया। गौरव ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा क‍ि ओम प्रकाश ने हमें जान से मारने की धमकी दी थी। उसने ईंट से बबलू की हत्या की। सेक्टर 14 पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 323 (चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और उसी दिन ओम प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पास के गौशाला मैदान से खून से सना एक शर्ट और खून से सना एक ईंट भी बरामद किया। पुलिस ने पाया कि हत्या का एकमात्र चश्मदीद एक अन्य फल विक्रेता था जो उसी फुटपाथ पर सोता था। उसने पुलिस को बताया कि ओम प्रकाश ने बबलू और उस पर ईंट से हमला किया था। बयान दर्ज कराने के बाद वह अपने गृहनगर बिहार चले गए। 2021 में उसकी कोविड से मौत हो गई। जब अदालत ने उसे सम्मन जारी किया तो नोटिस बिना तामील किए वापस कर दिया गया। इस रिपोर्ट के साथ कि उनकी मौत हो चुकी है। इस साल 25 फरवरी को उनका नाम हटा दिया गया था। बचाव पक्ष के वकील अभिमन्यु ने तर्क दिया कि कोई अन्य चश्मदीद गवाह नहीं था और खून से सने शर्ट को सार्वजनिक स्थान से बरामद किया गया था, ओम प्रकाश से नहीं। 8 सितंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वेद प्रकाश सिरोही ने कहा कि अदालत ने अभियोजन पक्ष की किसी भी दलील में कोई दम नहीं पाया।

September 11th 2022, 2:47 am

अगले महीने तय होगा पार्टी का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष मगर तेजस्‍वी की राह में रोड़ा कौन?

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पटना : राष्ट्रीय जनता दल का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा? इसका फैसला जल्‍द हो जाएगा। अगले महीने राजद की दिल्‍ली में एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगेगी। हालांकि इस बीच तेजस्‍वी यादव का एक अहम बयान भी आया है। उन्‍होंंने दो बातें ही। उन्‍होंने कहा कि जनता ने उन्‍हें जो जिम्‍मेदारी दी है उसे निभाने के लिए लगातार काम कर रहा हूं। दूसरा उन्‍होंंने ने राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के सवाल के जवाब में कहा कि उन्‍हें राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनने की कोई इच्‍छा नहीं है। उन्‍होंने आगे कहा कि हमारे लिए और पार्टी के लोगों के लिए यह गौरव की बात है कि लालू प्रसाद यादव हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। तेजस्‍वी ने साबित की अपनी दावेदारी बताते चलें कि अगले महीने आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में होनी है। इसमें नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन चुनाव किया जाना है। माना जा रहा है इस बार लालू यादव तेजस्‍वी के सिर पर पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का ताज भी सजा देंगे। इस बात की चर्चा लंबे समय से चल रही है। लेकिन तेजस्वी की ओर से बैठक के पहले यह बड़ा बयान दिया है कि वे अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि लालू यादव का अध्यक्ष रहना उनके लिए और पार्टी के लिए गौरव की बात है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अक्टूबर महीने में होने वाली राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में क्या निर्णय होता है। वैसे बताते चलें कि लंबे समय से तेजस्‍वी यादव को राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। इसके पीछे लालू यादव का स्‍वास्‍थ्‍य कारण कारण बताया जा रहा है। हालांकि राजद सुप्रीमो ने पहले ही तेजस्‍वी यादव को पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए अधिकारिक रूप से घोषणा कर दी है। राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के रूप में अब केवल तेजस्‍वी यादव के नाम का औपचारिक ऐलान होना है। वैसे भी तेजस्‍वी यादव ने एक बार फिर से बिहार की सत्‍ता में राजद की वापसी करा कर यह तो साबित कर ही दिया है कि वो पार्टी के दायित्‍वों को पूरा करने में सक्षम हैं। लालू लंबे समय से इच्‍छा जाहिर कर चुके हैं वहीं, 2020 के विधान चुनाव के बाद आए नतीजों से ही उत्साहित हैं। वो उप-मुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव को पार्टी का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष घोषित करना चाहते हैं। इस बात की इच्‍छा वो काफी पहले जाहिर कर चुके हैं। अब जब तेजस्‍वी यादव ने एक बार फिर से बिहार की सत्‍ता पर राजद की वापसी कराई है। ऐसे में लालू यादव यकीनी तौर पर पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का ताज तेजस्‍वी के सर पर सजाना चाहेंगे। पारिवारिक कारण तेजस्‍वी की ताजपोशी में रोड़ा माना जा रहा है लालू परिवार का अंदरूनी मसला ही तेजस्‍वी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनाए जाने के रास्‍ते में रोड़ा है। ऐसा माना जा रहा है तेजस्‍वी यादव के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनाए जाने पर सबसे बड़ा ऐतराज वन्‍य एवं पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव ही जताएंगे। इससे पहले भी वो यह बात कह चुके हैं कि पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव हैं। वहीं रहेंगे। वहीं, उम्र के लिहाज से लालू के बड़े लाल तेज प्रताप की अपनी दावेदारी साबित होती है। वहीं, पार्टी में तेज प्रताप और तेजस्‍वी यादव की बड़ी बहन मीसा भारती जो दोनों मां की भूमिका में भी रही हैं। उनकी दावेदारी भी बनती है।

September 11th 2022, 2:45 am

श्रीलंका को 8 तो पाकिस्तान को 10 साल से एशिया कप की ट्रॉफी का इंतजार, जानिए फाइनल में किसका पलड़ा भा

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दुबई: एशिया कप 2022 (Asia Cup) के शुरू होने से पहले किसी ने नहीं सोचा होगा कि श्रीलंका और पाकिस्तान (SL vs PAK) के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। श्रीलंका को पहले मैच में अफगानिस्तान से हार भी मिली। लेकिन उसके बाद लगातार 4 मैच जीतकर टीम फाइनल में उतरने के लिए तैयार है। उसका मुकाबला पाकिस्तान से होगा। रिकॉर्ड को देखें तो पाकिस्तान का पलड़ा भारी है, लेकिन श्रीलंका को कोई भी नजरअंदाज नहीं कर सकता है। पाकिस्तान ने आखिरी बार 2012 में और श्रीलंका ने 2014 में एशिया कप का खिताब जीता था। आईसीसी रैंकिंगआईसीसी रैंकिंग में पाकिस्तान दुनिया की नंबर दो टीम है। वहीं श्रीलंका 8वें नंबर पर है। इसे से दोनों टीमों के बीच का अंतर साफ हो जाता है। इस साल श्रीलंका ने 16 टी20 मैच खेले हैं। इसमें टीम को सिर्फ 6 जीत मिली है। उसे 9 मुकाबलों में हार मिली और एक मैच टाई रहा। यानी इस साल एशिया कप से पहले टीम को 11 मैचों में सिर्फ दो जीत मिली थी। लेकिन टूर्नामेंट में टीम अलग स्तर का क्रिकेट खेल रही है। हेड टू हेड में भी पाकिस्तान आगेपाकिस्तान और श्रीलंका के बीच अभी तक 22 टी20 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इसमें बाबर आजम की टीम को 13 जीत मिली है। वहीं दासुन शनाका की श्रीलंका सिर्फ 9 ही मैच जीत पाई है। हालांकि पिछले तीनों मैचों में श्रीलंका को जीत मिली है। सुपर-4 के आखिरी मुकाबले में भी दमदार गेंदबाजी के बूते श्रीलंका ने पाकिस्तान को हराया था। टॉस सबसे बड़ा फैक्टरफाइनल मुकाबले दुबई के मैदान पर खेला जाएगा और यहां टॉस की भूमिका काफी अहम होती है। दुबई में टीमें टॉस जीतने के बाद बिना कुछ सोचे गेंदबाजी लेती है और उसकी जीत लगभग तय होती है। टी20 वर्ल्ड कप 2021 से लेकर अभी तक सिर्फ तीन बार ही बाद में खेलने वाली टीम यूएई में हारी है। इसमें स्कॉटलैंड, हॉन्गकॉन्ग और अफगानिस्तान शामिल है। श्रीलंका को टूर्नामेंट में मिली सभी जीत बाद में बल्लेबाजी करते हुए ही मिली है। पाकिस्तान की गेंदबाज बनाम श्रीलंका की बल्लेबाजी श्रीलंका के बल्लेबाज बेहतरीन फॉर्म में हैं। वहीं पाकिस्तान के पास लगातार 145+ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले गेंदबाज हैं। इन दोनों के मुकाबले से ही फाइनल का नतीजा तय हो सकता है। पाकिस्तान की बल्लेबाजी पिछले दोनों मैचों में फेल रही थी।

September 11th 2022, 2:45 am

पाकिस्तान के F-16 के लिए पैकेज क्यों वह भी बिना बताए, अमेरिका से भारत ने जताया कड़ा ऐतराज

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नई दिल्ली: पाकिस्तान को F-16 विमानों के लिए दिए पैकेज पर भारत ने अमेरिका से कड़ा विरोध जताया है। दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू से भारत ने विरोध जताया है साथ ही इस फैसले की टाइमिंग को लेकर भी सवाल किया है। पाकिस्तान के लिए यह पैकेज ट्रम्प प्रशासन के फैसले को पलटते हुए किया गया है। अमेरिका की ओर यह फैसला किया गया है कि वह पाकिस्‍तान एयरफोर्स (PAF) के पास मौजूद फाइटर जेट एफ-16 को अपग्रेड करेगा। भारत सरकार का यह मानना है कि इससे दोनों देशों के संबंधों कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन दोनों देशों के संबंधों में असहजता आएगी। भारत के लिए परेशान करने वाली बात यह है कि अमेरिका ने भारत को इस महत्वपूर्ण फैसले के बारे में पहले से नहीं बताया। अमेरिका की घोषणा के बाद लू के साथ हुई सभी बैठकों में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया गया। उन्हें यह बताया गया कि सरकार को उम्मीद है कि अमेरिका भारत के सुरक्षा हितों का ध्यान रखेगा। भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। वहीं अमेरिका की ओर से कहा गया है कि इस पैकेज में नई क्षमताएं, हथियार या युद्ध सामग्री शामिल नहीं होगी। सरकार का मानना है पाकिस्तान के F-16 टारगेट पर भारत रहेगा। भले ही कुछ विमान बहुत पुराने हैं या ऑपरेशनल नहीं है। वहीं तालिबान का दावा है कि अल-जवाहिरी को मारने के लिए अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग की अनुमति देने के लिए पाकिस्तान को यह तोहफा अमेरिका की ओर से मिला है। 2018 में ट्रम्प प्रशासन ने आतंकी समूहों के खिलाफ एक्शन नहीं लिए जाने के कारण पाकिस्तान को सैन्य सहायता निलंबित कर दी थी। बाइडेन प्रशासन की ओर से इस फैसले को पलट दिया गया है। यह फैसला ऐसे वक्त हुआ है जब यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत के रुख को लेकर अमेरिका से कुछ मतभेद भी पैदा हुए हैं। अमेरिका के दबाव बनाए जाने के बाद भी भारत अपने स्टैंड पर कायम रहा।

September 11th 2022, 2:45 am

12 साल की लड़की को प्रेम जाल में फंसाया, गर्भवती होने पर खुला लव जिहाद का केस... सोनभद्र में हैरान क

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सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में लव जिहाद की घटना सामने आई है। यहां के पन्नूगंज थाना क्षेत्र के गांव में सरफराज नाम के आरोपी युवक ने परिचित परिवार के घर पर पारिवारिक दोस्ती की आड़ में 12 साल की नाबालिग लड़की को पहले तो प्रेम जाल में फंसाया और फिर संबंध बनाए। चौंका देने वाले इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब ननिहाल में रह रही पीड़िता गर्भवती हो गई। मामले को लेकर हंगामा मचा तो पहले गांव के स्तर पर ही पूरे केस को दबाने का प्रयास किया गया। लेकिन परिवार ने दबाव को किनारे हटाते हुए केस दर्ज कराया और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। सोनभद्र में लव जिहाद का शिकार हुई लड़की के माता-पिता नहीं थे। वह पन्नूगंज थाना क्षेत्र के में अपने ननिहाल में रहती थी। उसके मामा का दोस्त सरफराज अक्सर घर में आता-जाता रहता था। धीरे धीरे उसने लड़की को प्यार के जाल में फंसाया, जिससे वह गर्भवती हो गई। जब घरवालों को पता चला कि लड़की 8 महीने की गर्भवती हो गई है तो हंगामा मच गया। पूछने पर बच्ची ने सारी बात बताई। मामले का खुलासा होने पर परिचितों और ग्रामीणों में चर्चाएं होने लगीं। इस मसले को गांव के स्तर पर ही दबाने का प्रयास किया गया। दोनों पक्षों में समझौता करवाने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं बनी। पीड़िता के परिजन ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा दी। 376 एबी पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी सरफराज को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता के गर्भवती हो जाने पर आरोपी युवक के परिजन ने धर्म परिवर्तन का दबाव डालकर शादी कराने का प्रस्ताव भी रखा। पीड़ित परिवार के आर्थिक तौर पर कमजोर होने की वजह से गांव स्तर पर केस को दबाए रखा। हालांकि लव जिहाद और फिर धर्म परिवर्तन के दबाव की वजह से मामला बढ़ गया। हिंदू संगठनों ने भी न्याय नहीं मिलने पर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।

September 11th 2022, 1:58 am

गुड्डू बनकर इरशाद ने फंसाया फिर की शादी, पीड़िता का आरोप- इस्लाम कबूल करवाने के लिए की बर्बरता, आरोप

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नई दिल्ली: देशभर में के विवाद बढ़ते दिख रहे हैं। करीब-करीब हर दिन देश के किसी-न-किसी कोने से लव जिहाद आरोपों वाले मामले सामने आ ही जाते हैं। ताजा मामला देश की राजधानी दिल्ली का है जहां नाम के एक शख्स पर धोखे से हिंदू लड़की को फांसने और उसका धर्म बदलवाने के लिए बर्बरता करने का संगीन आरोप लगा है। इरशाद पेशे से वकील है। दिल्ली के शहादरा जिला स्थित ज्योति नगर थाने में महिला ने इरशाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है जिसके बाद इरशाद अली खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, महिला का कहना है कि उसे जान का खतरा है क्योंकि इरशाद ने उसे कह रखा है कि अगर उसे जेल जाना पड़ा तो अपने रसूख का इस्तेमाल करके जल्द ही छूट जाएगा और फिर उसे देख लेगा। महिला पुलिस और अदालत से गुहार लगा रही है कि उसके जान की रक्षा सुनिश्चित की जाए। 2011 में प्यार का जाल फेंका, 2015 में की शादी पीड़िता के मुताबिक, उसने वर्ष 2011 में बतौर इंटर्न इरशाद अली खान के अधीन ट्रेनिंग लेने पहुंची। तब इरशाद ने उसे अपना नाम गुड्डू चौधरी बताया था। आरोप है कि उसने लड़की के साथ प्यार की पींगे बढ़ाने लगा और खुद को हिंदू साबित करने के लिए मां शेरोवाली का टैटू भी बनवा लिया। दोनों के बीच चार साल तक प्यार का सिलसिला चला और 2015 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद लड़की जब कथित गुड्डी चौधरी के घर गई तो उसे कुछ दिनों बाद ही पता चल गया कि उसका पति गुड्डू चौधरी दरअसल इरशाद अली खान है जिसने उसके साथ धोखे से शादी की है। कुछ दिन बीतने पर पीड़िता को यह भी पता चला कि इरशाद पहले से शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे भी हैं। फिर वह डरी-सहमी रहने लगी तो इरशाद को थोड़ी भनक हो गई कि लगता है उसकी पत्नी को उसकी हकीकत का पता चल गया है। फिर उसने पत्नी को कलमा और नमाज पढ़ने को कहने लगा। आरोप है कि इनकार करने पर वह महिला को मारने-पीटने लगा। धर्म परिवर्तन करवाने के लिए बर्बरता का आरोप दिन बीतते गए और महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बढ़ने लगा। इरशाद अब उसके साथ बर्बरता करने लगा। फिर उसने महिला को मध्य प्रदेश के भोपाल ले गया और वहां मुस्लिम बहुल इलाके के एक मकान में शिफ्ट कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इरशाद ने उसे एक कमरे में कैद कर दिया और उससे बाहरी दुनिया के सारे संपर्क काट दिए। इरशाद वहां भी महिला के साथ मारपीट करता करता रहा, फिर भी वह नहीं मानी तो उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाते हुए वीडियो बना लिया। आरोप है कि इरशाद उसे यह वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करता था कि वो इस्लाम अपना ले वरना वह यह वीडियो सार्वजनिक कर देगा। महिला का कहना है कि मर्जी से शादी करने के कारण घरवाले और मुहल्ले के लोग उससे पहले से ही घृणा कर रहे थे। इसलिए उसके पास किसी से मदद मांगने का चारा ही नहीं बचा था। इरशाद भी महिला की इस मजबूरी से वाकिफ था, इसलिए वह बेखौफ होकर अत्याचार कर रहा था। उसने महिला को यहां तक कहा कि अगर किसी तरह मामला पुलिस तक पहुंच भी गया तो वो तीन दिन में जेल से निकल आएगा और फिर उसका क्या हश्र करेगा, उसके बारे में वह सोच नहीं सकती है। भोपाल में किया कैद, भागकर पहुंची मेरठ एक कमरे में कैद घुट-घुटकर जिंदगी बिता रही पीड़िता को एक दिन वहां से निकलने का मौका मिल गया। वह भागकर उत्तर प्रदेश के मेरठ पहुंच गई। वहां वह एक पीजी में रहने लगी। उसने मेरठ पुलिस से भी संपर्क किया। बाद में महिला दिल्ली आई और ज्योति नगर थाने में इरशाद के कारनामों की पोल खोल दी। पुलिस वाले उसके बयान और शरीर पर चोट के निशान देखकर दंग रह गए। उसकी मेडिकल जांच करवाई जिसमें पता चला कि महिला के शरीर पर 28 जगह जख्म हैं और मारपीट से उसकी हड्डी भी टूट गई है। पीड़िता के दोनों पैर काफी सूजे हुए हैं जिससे लगता है कि उसके साथ काफी बर्बरता की गई है। पुलिस ने महिला की हालत देखकर उसके बयान के आधार पर 7 सितंबर को मुकदमा दर्ज किया और अगले ही दिन 8 सितंबर को आरोपी इरशाद अली खान को गिरफ्तार कर लिया। महिला को जान का डर नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी संजय जैन ने कहा कि हिंदू लड़की को शादी के बाद पता चला कि जिस लड़के से उसने शादी की वो पहले से ही शादीशुदा और तीन बच्चों की पिता है। साथ ही, वह हिंदू नहीं मुसलमान है। बाद में पीड़िता मेरठ में जाकर छिप गई। वहां भी उसने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने इरशाद के खिलाफ रेप, उत्पीड़न, मारपीट समेत कई मामलों में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, पीड़िता को एक नारी निकेतन में रखकर उसे सुरक्षा दी गई है। वो मीडिया के सामने अपने डर का इजहार कर रही हैं। उनका कहना है कि उनकी जान को खतरा है। इरशाद बेल पर जेल से निकलते ही उनकी हत्या की कोशिश करेगा। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि इरशाद को बेल नहीं दी जाए वरना उनकी जान पर आफत आ जाएगी। ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में भी लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। वहां सरफराज ने एक मुस्लिम युवक पर आरोप है कि उसने एक हिंदू नाबालिग लड़की को धोखे से फंसाया और उसका यौन शोषण किया।

September 11th 2022, 1:58 am

1000 लो-फ्लोर बसें खरीदने में AAP ने किया भ्रष्‍टाचार? जांच के लिए एलजी ने सीबीआई को भेजी शिकायत

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नई दिल्‍ली: आबकारी नीति के बाद दिल्‍ली की आम आदमी पार्टी सरकार को एक और सीबीआई जांच का सामना करना पड़ सकता है। उपराज्यपाल ने डीटीसी द्वारा 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए सीबीआई को शिकायत भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। इस साल जून में सक्सेना को संबोधित एक शिकायत में दावा किया गया था कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने 'पूर्व नियोजित तरीके से' परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि इस निविदा के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में डीआईएमटीएस की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई थी। सूत्रों ने बताया कि शिकायत में कहा गया कि 1,000 लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली और मार्च 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव के अनुबंध के लिए लगाई गई दूसरी बोली में अनियमितताएं हुईं। गत 22 जुलाई को शिकायत पर दिल्ली सरकार के विभागों की प्रतिक्रिया लेने के लिए मुख्य सचिव के पास भेजा गया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने 19 अगस्त को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कुछ ‘अनियमितताओं’ की ओर इशारा किया गया था। इसके बाद सक्सेना ने शिकायत सीबीआई को भेज दी है।

September 11th 2022, 1:52 am

बर्थडे: हिट डेब्यू के बाद फिल्मों से गायब हो गईं ट्यूलिप जोशी, अब संभाल रहीं 600 Cr की कंपनी

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क्या आपको फिल्म 'मेरे यार की शादी है' याद है? यह ट्यूलिप जोशी की पहली फिल्म थी, जिसमें वह उदय चोपड़ा के ऑपोजिट नजर आई थीं। ट्यूलिप जोशी ने यशराज फिल्म्स से हिंदी फिल्मों में कदम रखे थे, लेकिन वह फिल्मों में नहीं चल पाईं। ट्यूलिप जोशी का डेब्यू तो सुपरहिट रहा था, पर वह खास पहचान नहीं बना पाईं। बाद में ट्यूलिप जोशी ने फिल्में ही छोड़ दीं। अब ट्यूलिप जोशी कहां हैं और क्या काम करती हैं, जानते हैं? आदित्य चोपड़ा की पहली पत्नी की दोस्त ट्यूलिप जोशी इस बारे में जानने से पहले उनकी फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत के बारे में थोड़ा सा जान लेते हैं। Tulip Joshi की फिल्मों में एंट्री बाय चांस हुई थी। दरअसल वह Aditya Chopra की पहली पत्नी पायल खन्ना की दोस्त थीं। आदित्य चोपड़ा और पायल की शादी में फैमिली की नजरें ट्यूलिप जोशी (Happy Birthday Tulip Joshi) पर पड़ीं और उन्हें तुरंत ही ऑडिशन के लिए बुला लिया। इस तरह ट्यूलिप जोशी को पहली फिल्म 'मेरे यार की शादी है' मिल गई। ट्यूलिप जोशी को चूंकि हिंदी नहीं आती थी, इसलिए उन्हें हिंदी भाषा की ट्यूशन भी लेनी पड़ी। 'मेरे यार की शादी है' से मिली पहचान पर नहीं चला एक्टिंग करियर 'मेरे यार की शादी है' हिट रही और इससे ट्यूलिप जोशी को भी पहचान मिली। लेकिन बाद में ट्यूलिप जोशी एक अदद को तरसती रह गईं। इंडस्ट्री के लोगों ने डेब्यू से पहले ट्यूलिप को उनका नाम बदलने की भी सलाह दी। इसके बाद एक्ट्रेस ने नाम बदलकर अंजलि भी रख लिया था। लेकिन नाम बदलने का भी कोई फायदा नहीं हुआ। ट्यूलिप जोशी ने को तेलुगु, कन्नड़ और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में जाकर भी सफलता नहीं मिली। हर फिल्म के साथ ट्यूलिप जोशी का स्ट्रगल बढ़ता ही गया। साल 2015 में ट्यूलिप जोशी ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी। फिल्में छोड़ कैप्टन से शादी, अब 600 करोड़ की कंपनी की डायरेक्टर ट्यूलिप जोशी ने बाद में कैप्टन और बिजनसमैन विनोद नायर से शादी कर ली। फिल्मों में काम करने के दौरान ट्यूलिप जोशी की मुलाकात विनोद नायर से हुई और फिर शादी कर ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी से पहले ट्यूलिप जोशी और विनोद नायर 4-5 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में भी रहे थे। विनोद नायर 1989 से 1995 तक इंडियन आर्मी में रहे थे। बाद में उन्होंने आर्मी छोड़ दी और फिर अपने बिजनस की शुरुआत की। 600 करोड़ की कंपनी विनोद नायर की एक कंसल्टिंग फर्म है, जिसका नाम KIMMAYA है। इसकी शुरुआत उन्होंने साल 2007 में की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कंपनी करीब 600 करोड़ की है, जिसकी डायरेक्टर ट्यूलिप जोशी हैं।

September 11th 2022, 1:23 am

पहली बार यूएस ओपन चैंपियन बनीं इगा स्वियातेक, ट्रॉफी के अंदर मिला सरप्राइज गिफ्ट

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न्यूयॉर्क: दुनिया की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी इगा स्वियातेक (Iga Swiatek) ने यूएस ओपन (US Open) का खिताब जीत लिया है। साल के अंतिम टेनिस ग्रैंड स्लैम के फाइनल में स्वियातेक की टक्कर ट्यूनीशिया की ओंस जेबूर से थी। 21 साल की स्वियातेक ने फाइनल मुकाबले को 6-2, 7-6 से अपने नाम किया। उन्होंने इस मुकाबले को जीतने में एक घंटे और 51 मिनट का समय लिया। 5वीं सीड जेबूर ने लगातार दूसरे ग्रैंड स्लैम के फाइनल में हार मिली है। पहला यूएस ओपन खिताबपोलैंड की इगा स्वियातेक ने पहली बार यूएस ओपन का खिताब जीता है। वह चौथी बार टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही थीं। 2019 में वह दूसरे, 2020 में तीसरे और 2021 में चौथे राउंड तक पहुंची थीं। वहीं यह उनका कुल तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है। स्वियातेक ने 2020 में फ्रेंच ओपन के रूप में अपना पहला महिला सिंगल्स ग्रैंड स्लैम खिताब जीता था। इस साल भी उन्होंने फ्रेंच ओपन की ट्रॉफी जीती थी। 9वें नंबर से वर्ल्ड नंबर-1 बनीं2022 की शुरुआत में इगा स्वियातेक रैंकिंग में 9वें स्थान पर थीं। अप्रैल में वह दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बन गईं। फरवरी से जुलाई के बीच तक इगा ने लगातार 37 मैचों में जीत हासिल की। 21वीं सदी में यह लगातार सबसे ज्यादा जीत का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी है। 2022 में इगा ने अभी तक 64 मैच खेले हैं और इसमें उन्हें 57 जीत मिली। वह दो ग्रैंड स्लैम समेत कुल 7 खिलाब भी जीत चुकी हैं। ट्रॉफी के अंदर था सरप्राइजयूएस ओपन के आयोजकों ने इगा को ट्रॉफी के अंदर सरप्राइज रखकर दिया। इगा को इटैलियन मिठाई तिरामिसू का पसंद है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आखिरी सवाल के बाद मॉडरेटर ने इगा स्वियातेक को सलाह दी कि अगर आप ट्रॉफी को खोलते हैं तो उसके अंदर कुछ हो सकता है। जब चैंपियन खिलाड़ी ने ट्रॉफी को खोला तो उसके अंदर तिरामिसू रखा था।

September 11th 2022, 1:07 am

अमेठी के बाद अब सोनिया से रायबरेली 'छीनने' को BJP ने तैयार किया ब्लू प्रिंट! पवार, अखिलेश की भी उड़े

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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी राजनीतिक दलों की ओर से तैयारी शुरू हो गई है। एक ओर जहां विपक्षी दल गठबंधन बनाने पर जोर दे रहे हैं तो वहीं बीजेपी का फोकस 'स्पेशल 144' पर है। यह लोकसभा की वह सीटें हैं जहां हाल के चुनावों बीजपी को हार मिली है और पार्टी का फोकस इन सीटों पर बढ़ गया है। इन सीटों के साथ ही बीजेपी की नजर विपक्ष की उन सीटों पर भी हैं जो उनका गढ़ मानी जाती हैं। यूपी की रायबरेली, मैनपुरी, महाराष्ट्र की बारामती समेत कई और सीटें हैं जिन पर पार्टी ने खास रणनीति तैयार की है। हाल ही में बीजेपी नेताओं की इसको लेकर एक बैठक भी हुई। बीजेपी उन 144 लोकसभा सीटों में से कम से कम आधी सीटें जीतने के लिए अलग-अलग योजना पर काम कर रही है, जो उसने हाल के चुनावों में नहीं जीती है। रायबरेली, मैनपुरी, बारामती... विपक्ष की मजबूत सीटों पर नजर 2019 के आम चुनाव में बीजेपी 2014 की तुलना में 21 सीटें अधिक जीती थीं। 144 सीटों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना के पीछे विचार यह है कि यदि पार्टी कुछ सीटें हारती है, तो उसे कम से कम नई सीटें जीतकर उस कमी को पूरा किया जाए। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष ने लोकसभा चुनाव के दो साल पहले पार्टी नेताओं के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया जिसमें उत्तर प्रदेश में रायबरेली और मैनपुरी, महाराष्ट्र में बारामती, पश्चिम बंगाल में जादवपुर, तेलंगाना में महबूबनगर और मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा विपक्ष की इन मजबूत सीटों का जिक्र था। इन सीटों पर पार्टी को जीत दिलाने के लिए योजना बनाई गई है और इसकी जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है। 18 महीनों का मास्टर प्लान तैयार, केंद्रीय मंत्रियों को जिम्मेदारी पार्टी की नजर जिन 144 सीटों पर है उसके लिए बीजेपी ने अगले 18 महीनों तक काम करने की एक योजना बनाई है। इन सीटों पर तीन लेवल पर काम करने की योजना है और इसके लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। सबसे पहले, राष्ट्रीय नेताओं से बनी एक केंद्रीय समिति जो पूरे कार्यक्रम की निगरानी करेगी। गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और बीएल संतोष कार्यक्रम की निगरानी करने वाली केंद्रीय समिति के नेता हैं। दूसरी राज्य समिति है जिसमें राज्यों के वरिष्ठ नेता हैं जो जमीनी स्तर पर निर्देशों का पालन करेंगे। तीसरी एक क्लस्टर समिति है, जहां केंद्रीय मंत्री सीधे तौर पर गतिविधियों की देखरेख और केंद्रीय और राज्य समितियों के बीच समन्वय का काम देखेंगे। लगभग 40 केंद्रीय मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है जिसमें किसी के पास दो तो किसी के पास तीन लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी है। संगठन से ही सरकार है, अमित शाह ने कहा- लापरवाही नहीं अभी छह सितंबर को बीजेपी कार्यालय में समीक्षा बैठक हुई जहां पहले फेज की प्रगति का जायजा लिया गया। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कुछ राज्यों को छोड़कर बाकी जगहों पर तेजी से कार्य प्रगति पर है। गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्रियों से कहा कि संगठन से ही सरकार है। पार्टी के काम को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जिन मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है उनमेंअधिकांश मंत्रियों ने रात्रि प्रवास पूरा कर लिया है। अपने प्रवास के दौरान मंत्रियों ने मंडल स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत की। हाल ही में जब रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने सहारनपुर का दौरा किया तो उन्हें दिल्ली से सहारनपुर के लिए एक ट्रेन की लंबे समय से लंबित मांग के बारे में पता चला। इसी महीने रूट पर नई ट्रेन चलने वाली है। मंत्रियों को अपने प्रवास के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के आवास पर दोपहर का भोजन करने की भी सलाह दी गई है। उम्मीदवारों के चयन के लिए अभी से जिम्मेदारी 6 सितंबर को हुई बैठक में अधिकांश मंत्रियों का विचार था कि एससी और अन्य पिछड़े वर्ग तक पहुंचने से इन लोकसभा सीटों पर पार्टी को काफी फायदा होगा। अगले चरण में, पार्टी ने मंत्रियों को 144 लोकसभा सीटों के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों की पहचान करने का काम सौंपा है। इन सीटों में स्थानीय मुद्दों को उजागर करते हुए पार्टी नियमित रूप से विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए स्थानीय नेतृत्व से भी संवाद करेगी। प्रत्येक लोकसभा सीट पर विशेष मीडिया प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे जो मीडिया संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। सोशल मीडिया टीम को भी इस काम की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के नेताओं को ऐसा लगता है कि यदि योजना पूरी तरह कारगर रही तो कम से कम 70 से अधिक सीटें पार्टी जीत सकती है। योजना का दूसरा चरण अक्टूबर से शुरू होगा।

September 11th 2022, 12:53 am

नो नॉनवेज, शराब और स्‍मोकिंग भी बैन... 'भारत जोड़ो यात्रा' में नेगेटिव पब्लिसिटी से बचने के लिए कांग

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कन्याकुमारी: कांग्रेस की ‘’ केरल में प्रवेश कर चुकी है। 150 दिन की इस यात्रा में अनुशासन बनाए रखने के लिए बाकायदा यात्रियों के लिए ‘क्या करें’ और ‘क्या ना करें’ की हिदायतें और निर्देश जारी किए गए हैं। यात्रा की संयोजन समिति का मानना है कि गरिमा बनाए रखने के लिए अनुशासन का होना जरूरी है। इसे लेकर यात्रा से पहले बाकायदा यात्रियों का ओरिएंटेशन किया गया, जिसमें यात्रियों को इनके बारे में बताया गया। अहम नियमों में है कि यात्रा के दौरान सिर्फ शाकाहारी भोजन ही मिलेगा। इस दौरान शराब और स्मोकिंग जैसी चीजों से यात्रियों को दूर रहना है। उन्हें सादगीपूर्ण तरीके से ही रहना है। यात्रियों से कहा गया है कि इस दौरान वे खाने, बिस्तर की सुविधाओं सहित किसी भी चीज को लेकर कोई शिकायत और असंतोष जाहिर नहीं करेंगे। यात्रा में सफेद कपड़े ही पहनेंगे। हालांकि, कपड़ों का नियम भारत यात्रियों के साथ-साथ प्रदेश यात्रियों और अतिथि यात्रियों पर लागू होगा। वॉलंटियर्स यात्री पर यह लागू नहीं होगा। यात्रियों से अपेक्षा है कि वो यात्रा के दौरान किसी लग्जरी, सुख-सुविधाओं और विशेष आवभगत की अपेक्षा ना करें। उनसे कहा गया है कि यात्रा के दौरान जो भी मिले, उससे पूरी विनम्रता, प्रेम और धैर्य से मिलना है। उनकी बात सुननी है। फीडबैक लेते समय इन चीजों का खास ख्याल रखना है। भारत यात्रियों को कड़ाई से करना होगा पालनपार्टी की ओर से इन नियम कायदों की फेहरिस्त इसलिए तैयार की गई है, ताकि अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ यात्रा को नकारात्मक पब्लिसिटी ना मिले। पार्टी नहीं चाहती कि यात्रा को लेकर बेवजह कोई विवाद हो। हालांकि, नियमों का कड़ाई से पालन भारत यात्रियों के लिए है। बाकी प्रदेश और अतिथि यात्री यात्रा के दौरान इनका पालन करेंगे। यात्रियों के लिए भोजन वगैरह की व्यवस्था जिस प्रदेश में यात्रा होती है, वहां की लोकल प्रदेश कमिटी जिम्मा उठाती है। भारत यात्रियों के ठहरने के लिए जहां कंटेनरों की व्यवस्था की गई है तो अतिथि और प्रदेश यात्रियों के रहने-खाने की व्यवस्था प्रदेश कांग्रेस कमिटी देख रही है। यात्रा में दिन में ब्रेक के दौरान चटाई और दरियों पर लोग बैठ कर आराम करते हैं। दिन की समाप्ति पर शाम को दिन भर के कार्यक्रम का फीडबैक लिया जाता है। फिलहाल शाम को किसी तरह के मनोरंजन वगैरह की व्यवस्था नहीं है। एक यात्री का कहना था कि हमारी सुबह साढ़े चार बजे होती है। छह बजे तक हमें नाश्ता कर पूरी तरह तैयार रहना होता है। भारत यात्रियों के लिए एक अलग किचन टीम है, जो खाना नाश्ता तैयार करती है। यह टीम साथ ही चल रही है। जिसमें कुक, शेफ, प्रबंधक और सुपरविज़न की टीम होती है। हर शाम एक बड़ा-सा पंडाल लगता है, जहां 400-500 लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है। भोजन में स्थानीय व्यंजन भी होते हैं। यात्रा के काफिले में लगभग 250 लोगों का लॉजिस्टिक स्टाफ है, जो साफ-सफाई, हाउसकीपिंग, भोजन, लॉन्ड्री, जेनरेटर की व्यवस्था देखता है। ड्राइवर भी इसमें शामिल हैं। हर शाम दो एकड़ में नया गांव बसता है और सुबह समेट दिया जाता है। गांव को बसाने में पांच घंटे लगते हैं, वही उखाड़ने में लगभग ढाई घंटे।

September 11th 2022, 12:53 am

कर्नाटक में खौफनाक वारदात, कक्षा दो के छात्र पर डाला खौलता पानी, 40 फीसदी तक जला मासूम

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रायचुर: कर्नाटक के रायचुर जिले में खौफनाक घटना सामने आई है। जिले के संते कल्लुर गांव में पैंट में शौच करने पर कक्षा 2 के छात्र पर गर्म पानी फेंक दिया गया। इस घटना में छात्र 40 फीसदी तक जल गया। पुलिस ने ग्रामीणों के बयान के आधार पर कहा कि शिक्षा विभाग को इसमें एक शिक्षक की संलिप्तता का संदेह है, जो घटना के बाद से गायब है। शिकायत के अनुसार, पुलिस ने बताया कि यह घटना दो सितंबर को जिले के मस्की तालुक के संते कल्लूर गांव में हुई। शिक्षा अधिकारियों के एक दल ने अस्पताल में उपचाराधीन छात्र से इस बारे में पूछा, लेकिन वह बोलने की स्थिति में नहीं है और उसके माता-पिता को भी इस बारे में पता नहीं है। ग्रामीण हालांकि, इस बारे में बातचीत कर रहे हैं कि यह काम एक शिक्षक का है, जो घटना के बाद से गायब है। घटना एक प्राइमरी स्कूल की है जिसे श्रीगनमठेश्वर ग्रामीण सम्सठे नाम की एक संस्था चलाती है। 7 साल के छात्र को लिंगासगुरु तालुक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। रायचुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा कि यह पता चला है कि छात्र ने स्कूल यूनीफॉर्म में ही शौच कर दिया था जिससे शिक्षक ने नाराज होकर उन पर खौलता पानी उड़ेल दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी शिक्षक की पहचान हुलीगेप्पा के रूप में हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स को नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, 'हमारे पास घटना को लेकर सूचना है लेकिन हमें मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। हमारे कर्मियों ने स्कूल का दौरा किया लेकिन यह शिक्षा विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए स्वत: संज्ञान की शिकायत भी वहीं से आनी चाहिए।'

September 11th 2022, 12:53 am

टीम इंडिया की सबसे बड़ी टेंशन खत्म, टी20 वर्ल्ड कप में वापसी को तैयार दो स्टार खिलाड़ी!

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नई दिल्ली: भारतीय टीम इस समय चोट से जूझ रही है। एशिया कप (Asia Cup) में टीम को सुपर-4 में पाकिस्तान और फिर श्रीलंका से हार मिली। इस हार की बड़ी वजह चोट के कारण प्रमुख खिलाड़ियों का नहीं खेलना भी था। ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) ग्रुप स्टेज के बाद चोटिल होकर बाहर हो गए। उससे पहले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) और हर्षल पटेल (Harshal Patel) चोट के कारण काफी समय से टीम से बाहर चल रहे हैं। दोनों ने जुलाई में भारत के लिए आखिरी मैच खेला था। एनसीए में शुरू की गेंदबाजीजसप्रीत बुमराह और हर्षल पटेल ने बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में गेंदबाजी शुरू कर दी है। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पूरी तरह फिट हैं। भारतीय टीम में शामिल किए जाने से पहले दोनों को फिटनेस टेस्ट पास करना होगा और उन्हें देकर माना जा रहा है कि वो इसे पास कर लेंगे। बुमराह की पीठ में परेशानी थी। वहीं हर्षल की पसली में चोट लगी थी। एक स्पिनर और एक पेसर की होगी छुट्टीएशिया कप टीम में भारतीय टीम 3 तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह और आवेश खान के साथ उतरी थी। आवेश के अनफिट होने के बाद दीपक चाहर टीम से जुड़े थे। वहीं स्पिनर के रूप में युजवेंद्र चहल, आर अश्विन और रवि बिश्नोई थे। माना जा रहा है कि आवेश खान को वर्ल्ड कप टीम से बाहर किया जा सकता है। स्पिन गेंदबाजों में रवि बिश्नोई को बाहर किया जा सकता है लेकिन चयनकर्ता अंतिम फैसला टीम मैनेजमेंट से विचार करने के बाद लेंगे। 15 सितंबर को चयन समिति की मीटिंग15 सितंबर को टी20 वर्ल्ड कप की टीम चुनने के लिए चयन समिति की बैठक होगी। रविंद्र जडेजा के घुटने की सर्जरी हुई है और माना जा रहा है कि वह टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेल पाएंगे। ऐसे में अक्षर पटेल स्पिन ऑलराउंडर के रूप में टीम का हिस्सा हो सकते हैं। वर्ल्ड कप की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में 16 अक्टूबर को होगी। फाइनल मुकाबला 13 नवंबर से खेला जाएगा।

September 11th 2022, 12:07 am

NHEV ट्रायल: गुड़गांव से जयपुर तक ई बसों में फ्री में आने-जाने का मौका, बस एक काम करना है

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निरंजन कुमार, गुड़गांव: नैशनल हाइवे फॉर इलेक्ट्रिक वीकल यानी एनएचईवी ने ई हाइवे के ट्रायल के दौरान आम पब्लिक को गुड़गांव से जयपुर तक फ्री राइडिंग का मौका दिया है। सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को गुड़गांव से और शनिवार को जयपुर से ई बस में सफर किया जा सकता है। ट्रायल में शामिल होने वाले यात्री को एक दिन पहले NHEV.in पोर्टल पर जाकर खुद को रजिस्टर करना होगा और अपनी सीट बुक करनी होगी। गुड़गांव के यात्री इफ्को चौक व राजीव चौक से बसों में सफर कर सकते हैं। वहीं एनएचईवी ने ट्रायल में शामिल टैक्सियों के लिए किराया भी तय कर दिया गया है। दिल्ली व गुड़गांव से किराया 3500 से 4500 रुपये रखा गया है। यह डीजल की इनोवा से 30 से 50 फीसदी तक सस्ता है। टैक्सी सरहौल बॉर्डर के पास एंबियंस मॉल, शंकर चौक, साइबर सिटी, इफको चौक, राजीव चौक समेत अपने घर और कंपनी के बाहर से भी बुक की जा सकती है। फिलहाल 25 बसें और 100 से ज्यादा कैब को ट्रायल के दौरान चलाया जा रहा है। डीआरआईआईवी करेगी रिपोर्ट तैयारट्रायल पार्टनर के रूप में दिल्ली आईआईटी की दिल्ली रिसर्च एम्पलेमेंटेशन एंड एनोवेशन यानी डीआरआईआईवी विंग ने भी अपने 4 इलेक्ट्रिक वाहन ट्रायल में शामिल किए हैं। यह विंग सिटी नॉलेज इनोवेशन क्लस्टर के रूप में काम करती है। जो ई हाइवे के परिचालन को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और भारत सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार एनएचईवी को लेकर अगला फैसला लेगी। वहीं, एक महीने के इस ट्रायल के दूसरे दिन शनिवार को भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार की टीम भी शामिल हो गई है। जो पूरे ट्रायल के दौरान विशेषज्ञों के साथ रहेंगे। कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही निगरानीट्रायल के दौरान पैसेंजर की सेफ्टी के लिए कमांड कंट्रोल सेंटर से ईवी की निगरानी की जा रही है। अधिकारी ड्राइवर और पैसेंजर से विडियो कॉल पर बात कर फीडबैक ले रहे हैं। वहीं बस व कैब की रनिंग कोस्ट, प्रति पैसेंजर किराया, ब्रेक डाउन पर मिलने वाली हेल्प और प्रतिदिन कितना खर्च बचेगा और प्रदूषण की कमी का भी डाटा बनाया जा रहा है। 2 दिन कोई दिक्कत नहीं हुईएनएचईवी के अधिकारियों का कहना है कि पहले व दूसरे दिन कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई। तय समय से पहले ही हेल्पलाइन टीम पहुंच गई। इसके अलावा चार्जिंग में लगने वाले समय में भी कमी दर्ज की गई। बस व कैब अपनी तय स्पीड पर चलाई जा रही है। जो इस दौरान लगने वाले समय का डेटा भी बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ई हाईवे बनाने के लिए अभी 50 लाख रुपये प्रति किमी का खर्चा आ रहा है। इस ट्रायल के दौरान इसे कम करने की भी प्लानिंग है। ताकि कम समय में ज्यादा से ज्यादा ई हाइवे बनाए जा सकें।

September 11th 2022, 12:07 am

पाक के जिस F-16 को अभिनंदन ने चटाई थी धूल, उसको 'सुपरपावर्स' देगा US, भारत के लिए बुरी खबर!

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वॉशिंगटन: अमेरिका ने फैसला कर लिया है कि वह पाकिस्‍तान एयरफोर्स (PAF) के पास मौजूद फाइटर जेट एफ-16 को अपग्रेड करेगा। भारत सरकार की तरफ से अभी तक अमेरिका के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बुधवार को अमेरिका की तरफ से इस फैसले का ऐलान किया गया। पीएएफ के पास एफ-16 की तीन स्‍क्‍वाड्रन हैं और कुल 65 जेट्स हैं। इन जेट्स को फाइटिंग फाल्‍कन्‍स के नाम से भी जानते हैं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन और उनका प्रशासन चाहता है कि पाकिस्‍तान की काउंटर-टेररिज्‍म क्षमताओं में इजाफा हो सके। अभी तक इस बात की जानकारी भी नहीं है कि भारत को इस फैसले से अमेरिका ने अवगत कराया था या नहीं। अभिनंदन ने किया था ढेर अमेरिका का यह कदम भारत के लिए एक बुरी खबर हो सकता है। साल 2019 में बालाकोट एयरस्‍ट्राइक के बाद जम्‍मू कश्‍मीर में पाकिस्‍तान एयरफोर्स के जेट्स ने घुसपैठ की थी। उस समय भारत की तरफ से मुंहतोड़ जवाब दिया गया था। भारतीय वायुसेना (IAF) के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने अपने मिग-21 से पाकिस्‍तान के एक एफ-16 को ढेर कर दिया था। अमेरिका का यह फैसला, भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल की स्‍क्‍वाड्रन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्‍तान के अखबार द डॉन ने लिखा है कि अमेरिकी अधिकारी से पूछा गया कि भारत की तरफ से उस आलोचना का सामना कैसे करेगा जो इस कदम के बाद उसे झेलने पड़ सकती है? इस पर अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्‍ते अपने दम पर खड़े हैं और किसी प्रस्‍ताव पर नहीं टिके हैं। क्‍या-क्‍या शामिल होगा अपग्रेड में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के अनुसार एफ-16 के अपग्रेड में इंजन और इलेक्‍ट्रॉनिक वॉरफेरयर की क्षमता बढ़ाना है। इसके अलावा इसके प्लेटफॉर्म के लक्ष्‍यीकरण और इलेक्‍ट्रॉनिक वॉरफेयर पॉड्स जिसके बाद ये जेट न सिर्फ बिना रुके इलेक्‍ट्रॉनिक रेकी कर सकेगा बल्कि कम्‍युनिकेशन और रडार जैमिंग जैसे रोल भी अदा कर पाएगा। साथ ही फाइटर के सॉफ्टवेयर जिसमें कुछ और वग्रीकृत और गैर-वग्रीकृत हैं, उन्‍हें भी अपग्रेड किया जाएगा। अमेरिका के विदेशी सैन्‍य बिक्री मार्ग के जरिए पाकिस्‍तान वायुसेना को 450 मिलियन डॉलर का पैकेज मिला है। इसमें एफ-16 के लिए भी मदद दी गई थी लेकिन इस मदद में फाइटर जेट को नई क्षमताओं जैसे कि हथियार नहीं मुहैया कराए गए थे। भारत पर कितना असर भारत के रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका की तरफ से होने वाले इस अपग्रेड के बाद एफ-16 की क्षमता में इजाफा हो जाएगा जो कि पिछले कुछ सालों से भारत के लिए कोई महत्‍व नहीं रख रहे थे। मगर उनकी मानें तो यह पूरी प्रक्रिया बूढ़े हो चुके एफ-16 के लिए मेकअप से कहीं ज्‍यादा है। इसके बाद पीएएफ की ऑपरेशनल क्षमताएं भारतीय वायुसेना की तुलना में कहीं ज्‍यादा हो जाएंगी। आईएएफ पहले ही कम होती लड़ाकू स्‍क्‍वाड्रन की संख्‍या से परेशान है। क्‍यों लिया गया फैसला यूएस इंस्‍टीट्यूट ऑफ पीस में दक्षिण एशिया मामलों के सलाहकार डैनियल मार्के ने डॉन से बातचीत में कहा है कि 450 मिलियन डॉलर का पैकेज एक जरूरी फैसला था जो कि तकनीकी जरूरतों के चलते उठाया गया था। इसका मकसद एफ-16 को ऑपरेशनल रखना था। उन्‍होंने यह बात भी कही कि इसके बाद अमेरिका और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते एक बार फिर से बेहतर हो सकेंगे। दोनों देश आने वाले समय में समान हितों पर साथ काम कर सकेंगे। दूसरी तरफ अमेरिका में पाकिस्‍तान के विशेषज्ञ को मानें तो यह मदद फ्री में नहीं है। यह फैसला दरअसल उस कदम के तहत उठाया गया है जिसमें दूसरे देशों के साथ राजनीतिक, राजनयिक और सुरक्षा संबंधों में बदलाव की पहल शामिल है। जवाहिरी की मौत का इनाम वॉशिंगटन स्थित जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में सुरक्षा मामलों की प्रोफेसर क्रिस्‍टीन फेयर की मानें तो अमेरिका ने पाकिस्‍तान को 450 मिलियन डॉलर का पैकेज देकर अलकायदा सरगना अयमान अल जवाहिरी की मौत का इनाम दिया है। जवाहिरी को 31 जुलाई को अमेरिकी मिलिट्री ने एक ड्रोन स्‍ट्राइक में काबुल में ढेर कर दिया था। जवाहिरी की मौत से पहले पाक इंटेलीजेंसी एजेंसी आईएसआई के डायरेक्‍टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम ने मई में अमेरिका का दौरा किया था। ट्रंप का फैसला बाइडेन ने बदला साल 1980 के दशक में पाकिस्‍तान को अमेरिका से एफ-16 जेट्स मिले थे। पहले ब्‍लॉक-15 वैरियंट की डिलीवरी हुई तो इसके बाद 1990 के दशक में ब्‍लॉक 52 मॉडल पाकिस्‍तान को दिया गया। साल 2018 में तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पाकिस्‍तान को मिलने वाली 2 अरब डॉलर की सुरक्षा मदद रोक दी थी। इसके तहत एफ-16 को अपग्रेड किया जाना था। ट्रंप ने वह फैसला अफगान-तालिबान और हक्‍कानी आतंकी संगठन की वजह से उठाया था जो पाक सरजमीं से अपना काम करते हैं। उनका कहना था कि पाकिस्‍तान इन संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगार बना हुआ है और इसकी वजह से अफगानिस्‍तान में अमेरिकी अगुवाई वाले सुरक्षा बलों पर हमले हो रहे हैं। भारत हुआ निराश ट्रंप के उत्‍तराधिकारी बाइडेन ने उनका फैसला पलट दिया और इससे भारतीय मिलिट्री अधिकारी खासे निराश हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत कई तरह के मिलिट्री हार्डवेयर अमेरिका से खरीदने की कोशिशें कर रहा है। इसमें 30 एमक्‍यू रीपर ड्रोन के अलावा 26 बोइंगF/A-18 E/ ब्‍लॉक III सुपर हॉर्नेट ड्यूल इंजन जेट भी शामिल हैं। इन जेट्स में से आठ को भारतीय नौसेना के नए कमीशंड एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाना है। भारत ने साल 2001-2002 से अब तक 20 अरब डॉलर की कीमत वाले अमेरिकी सैन्‍य उपकरण खरीदे हैं।

September 11th 2022, 12:07 am

यूरोप में सुलग रही एक और जंग की आग, एर्दोगन की धमकी पर ग्रीस का जवाब- यूक्रेन 2.0 के लिए तैयार रहें!

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एथेंस : दुनिया पहले से एक जंग के दुष्परिणाम भुगत रही है और पूर्वी भूमध्यसागर में एक नया तनाव बढ़ रहा है। ग्रीस और तुर्की के बीच तनाव इतना बढ़ चुका है कि औपचारिक भाषा का पर्दा हटाते हुए दोनों एक-दूसरे को खुली धमकियां दे रहे हैं। ग्रीस ने कहा है कि क्षेत्र में यूक्रेन जैसा एक युद्ध शुरू हो सकता है। इससे पहले तुर्की ने अपने पड़ोसी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का खतरा जाहिर किया था। तुर्की और ग्रीस दोनों ही नाटो के सदस्य है। लेकिन दोनों के बीच तनातनी सैन्य गठबंधन में फूट के संकेत दे रही है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ग्रीस को 'भारी कीमत चुकाने' की धमकी दे चुके हैं। तुर्की और ग्रीस के बीच तनाव के कई कारण हैं। इनमें एजियन द्वीप समूह की संप्रभुता, समुद्री अधिकार, प्राकृतिक गैस और हवाई क्षेत्र की सीमाएं शामिल हैं। रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद भी दोनों देशों के संबंध अच्छे थे लेकिन हालिया हफ्तों में इनमें बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मंगलवार को एर्दोगन ने धमकी देते हुए कहा कि तुर्की 'अचानक एक रात को आ सकता है'। एक प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने कहा, 'मैं जिस बारे में बात कर रहा हूं वह कोई सपना नहीं है। अगर मैं कहता हूं कि हम अचानक एक रात को आ सकते हैं तो इसका मतलब है कि जब समय आएगा तो हम अचानक एक रात को आएंगे।' एर्दोगन दे रहे खुली धमकियांएर्दोगन की धमकी ने ग्रीस के गुस्से को भड़का दिया है। इस साल ग्रीस और तुर्की की 1919-1922 की जंग के 100 साल पूरे हो गए। 30 अगस्त को तुर्की ने विक्ट्री डे मनाया जब उसने अनातोलिया से ग्रीस की सेना को खदेड़ दिया था। शनिवार को एर्दोगन ने कहा, 'ग्रीस, इतिहास की तरफ देखो, समय में वापस जाओ, अगर आगे बढ़े तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।' इसके जवाब में ग्रीस ने नाटो, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र को पत्र भेजे और एर्दोगन के 'भड़काऊ' बयानों और 'खुली धमकी' की निंदा की। 'मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी'ग्रीस ने अपने पत्रों में संस्थानों से एर्दोगन के बयानों की निंदा करने की अपील की। यूक्रेन युद्ध की ओर इशारा करते हुए पत्र में लिखा था, 'मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करके, हम फिर से ऐसी स्थिति देखने का जोखिम उठा सकते हैं जो वर्तमान में हमारे महाद्वीप के एक अन्य हिस्से में देखी जा रही है।' कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बयानबाजी ने ग्रीस और तुर्की के बीच 2020 के तनाव जैसी स्थिति पैदा कर दी है जब दोनों के युद्धपोत आपस में टकरा गए थे और दोनों संघर्ष की कगार पर आ गए थे।

September 11th 2022, 12:07 am

जिनके बाप दादाओं ने भारत के टुकड़े करा दिए वे... कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर साक्षी महाराज का ह

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उन्नाव: बीजेपी के फायर ब्रांड नेता और उन्नाव के () ने कांग्रेस (Congress) और राहुल गांधी () की () पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को चुल्लूभर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए। जिनके बाप दादाओं ने भारत को तोड़ा और उसके टुकड़े करा दिए, वो आज भारत जोड़ो की बात किस मुंह से कर रहे हैं। उनको तो शर्म आनी चाहिए। भारत जोड़ने का काम कोई कर रहा है तो वह केवल नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। 'यूपी की जीतेंगे सभी सीटें' उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज शनिवार को अपनी एक दिन की यात्रा पर उन्नाव पहुंचे थे। जहां उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम 2024 के चुनाव में यूपी की सभी सीटें जीतने जा रहे हैं। सभी सीट बीजेपी की झोली में जाएंगी। नीतीश को बताया बरसाती मेंढक साक्षी महाराज ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि बरसात जब आती है तो बरसाती मेढंक टर्र टर्र करने लगते हैं। ऐसे ही 2024 का लोकसभा चुनाव आ रहा है तो बरसाती मेंढकों को टर्र टर्र कर लेने दीजिए। मदरसों का सर्वे कराना सही साक्षी महाराज ने मदरसों के सर्वे को लेकर ओवैसी पर पलटवार करते हुए कहा कि सीएम योगी का यह निर्णय सही है। उनका मैं धन्यवाद करूंगा। मैं पहले भी कहता आ रहा हूं कि मदरसे आतंकियों के अड्डे हैं, लेकिन मेरे बयान को उस समय विवादित कहा गया था, जबकि उसकी जांच सही तरीके से होना चाहिए|

September 10th 2022, 11:53 pm

9/11 हमले के 21 साल: भारत में बढ़ रही अल कायदा की हरकत, 8 साल में 100 आतंकी अरेस्ट

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मुंबई: आतंकवादी संगठन अल कायदा 9/11 के अमेरिकी हमले की वजह से सुर्खियों में आया था। यह हमला 11 सितंबर, 2001 को किया गया था। उस हमले के पहले और बाद में भारत में कई आतंकवादी गतिविधियां हुईं। उनमें अलग-अलग आतंकवादी संगठनों के नाम आए, लेकिन अल कायदा का नहीं। अब अल कायदा की भारत में भी गतिविधियां बढ़ रही हैं। पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल पुलिस ने बांद्रा में निर्मल नगर इलाके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। 18 अगस्त से अब तक इस संगठन के चार लोग पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से देश के अलग-अलग शहरों से अरेस्ट हुए हैं। साल 2014 में अल जवाहिरी ने भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा का प्रभाव बढ़ाने के लिए अल कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS का गठन किया था। पिछले आठ साल में इस आतंकवादी संगठन के 100 से ज्यादा लोग भारत में अरेस्ट हुए हैं। कुछ के खिलाफ एनआईए ने चार्जशीट तक दाखिल की है। दाऊद के अलकायदा से संबंध ऐसा कहा जाता है कि AQIS में अंडरवर्ल्ड के लोग भी हैं। फरवरी में जब एनआईए ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, तो बताया था कि उसका अन्य आतंकवादी संगठनों के अलावा अल कायदा से भी कनेक्शन है। पिछले सप्ताह एनआईए ने दाऊद इब्राहिम की सूचना देने वाले को 25 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की। पिछले हफ्ते ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मुंबई आए थे और उन्होंने मुंबई पुलिस के टॉप अधिकारियों के साथ मुलाकात भी की थी। 9/11 के लिए भारत से भी गया था पैसा 9/11 हमला अल कायदा ने करवाया था। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने अपनी किताब ‘डायल डी फार डॉन’ में लिखा है कि 9/11 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के लिए भारत से भी पैसा भेजा गया था। सीबीआई के लिए भी काम कर चुके नीरज कुमार ने हरकत उल मुजाहिदीन के आतंकी आसिफ रजा खान से मिली जानकारी के आधार पर यह खुलासा किया था। नीरज कुमार के मुताबिक, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले मोहम्मद अता को आतंकी उमर शेख ने यह धनराशि उपलब्ध कराई थी। उमर शेख 1999 में विमान अपहरण कांड के समय छोड़े गए आतंकियों में एक है। शेख को यह पैसा आफताब अंसारी ने दिया, जो कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हमले का दोषी है। अता से लिंक के बारे में तब पता चला, जब इंडिया और दुबई के बीच ई-मेल इंटरसेप्ट किए गए। आसिफ रजा कोलकाता के बेनियापुकुर इलाके का रहनेवाला था। कई साल पहले राजकोट में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। पुलिस का दावा है कि वह पुलिस हिरासत से भाग रहा था। आसिफ रजा ने पुलिस हिरासत जांच टीम को बताया था कि उसे पता है कि फिरौती की रकम अता तक पहुंचाई गई और अल कायदा के लोगों ने न्यूयॉर्क में इस्तेमाल की।

September 10th 2022, 11:53 pm

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम घटाएंगी तेल कंपनियां? जानिए आपको कब मिल सकती है राहत

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नई दिल्ली : कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बड़ी तेजी देखने को मिली। शुक्रवार को तेल की कीमतें 4 फीसदी से अधिक चढ़ गईं। कच्चे तेल की सप्लाई में कटौती की चिंताओं के चलते कीमतों में यह तेजी आई है। ब्रेंट ऑयल की कीमत शुक्रवार को 3.67 फीसदी या 3.27 डॉलर की बढ़त लेकर 92.42 पर बंद हुई। हालांकि, तेल की वायदा कीमतों में दूसरी साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई। दुनिया भर के केंद्रीय बैकों द्वारा तेजी से ब्याज दरों में बढ़ोतरी और चीन में कोविड लॉकडाउन के चलते यह गिरावट आई है। पिछले काफी समय से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के भाव यथावत बने हुए हैं। दाम घटाने को तैयार नहीं तेल कंपनियां तेल कंपनियां रिटेल में पेट्रोल और डीजल के दाम करने को तैयार नहीं हैं। इसका कारण है कि तेल कंपनियां पुराने घाटे की भरपाई में लगी हुई हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि भारतीय तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की दामों में ज्यादा कटौती नहीं करने वाली है। तेल कंपनियों को अपने नुकसान की भरपाई के लिए अभी और समय चाहिए। एक कार्यक्रम के दौरान पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि विकसित देशों में जहां जुलाई-अगस्त के बीच ईंधन की कीमतों में 40 फीसदी तक का इजाफा हुआ, वहीं भारत में करीब 2.12 फीसदी दाम कम हुए। ऐसे में तेल कंपनियों को नुकसान हुआ। अब कंपनियां नुकसान की भरपाई करने के लिए दामों को बढ़ाने का काम जारी रख सकती हैं। घाटे में बेचा था पेट्रोल-डीजल एक रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती महंगाई के कारण सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने घाटे में पेट्रोल-डीजल बेचा। कंपनी ने 10 रुपये प्रति लीटर के घाटे से पेट्रोल और 15 रुपये प्रति लीटर घाटे से डीजल बेचा था। हालांकि अब कंपनी घाटे से उबर गई है। लेकिन माना जा रहा है कि नुकसान की भरपाई करने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं कम की जाएंगी। दिल्ली में पेट्रोल-डीजल देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये और डीजल की कीमत 89.62 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है। मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.27 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं, कोलकाता में रविवार को पेट्रोल 106.03 रुपये में मिल रहा है और डीजल 92.76 रुपये में मिल रहा है। इसके अलावा चेन्नई में पेट्रोल का भाव 102.63 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94.24 रुपये प्रति लीटर है।
शहर का नाम पेट्रोल रुपये/लीटर डीजल रुपये/लीटर
नई दिल्ली 96.72 89.62
मुंबई 106.31 94.27
कोलकाता 106.03 92.76
चेन्नई 102.63 94.24
नोएडा 96.79 89.96
लखनऊ 96.57 89.76
जयपुर 108.48 93.72
पटना 107.24 94.04
भोपाल 108.65 93.90
चंडीगढ़ 96.20 84.26
गुरुग्राम 97.18 90.05
रांची 99.84 94.65
भोपाल 108.65 93.90
गांधीनगर 96.63 92.38
बेंगलुरु 101.94 87.89
(स्रोत- IOC SMS) बड़े शहरों में तेल के भाव दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के नोएडा में पेट्रोल 96.57 रुपये और डीजल 89.96 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। चंडीगढ़ में पेट्रोल 96.20 रुपये और डीजल 84.26 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा है। इसके अलावा गुरुग्राम में पेट्रोल का भाव 97.18 रुपये और डीजल का भाव 90.05 रुपये प्रति लीटर पर है। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल का भाव 96.57 रुपये और डीजल की कीमत 89.76 रुपये प्रति लीटर पर है। अपने शहर में इस तरह जानें भाव पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) के भाव रोजाना बदलते हैं और सुबह 6 बजे अपडेट हो जाते हैं। पेट्रोल-डीजल का रोज का रेट आप SMS के जरिए भी जान सकते हैं (How to check diesel petrol price daily)। इंडियन ऑयल (Indian Oil) के कस्टमर RSP स्पेस पेट्रोल पंप का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर और बीपीसीएल (BPCL) के ग्राहक RSP लिख कर 9223112222 नंबर पर भेज जानकारी हासिल कर सकते हैं। वहीं, एचपीसीएल (HPCL) के ग्राहक HPPrice लिख कर 9222201122 नंबर पर भेजकर भाव पता कर सकते हैं।

September 10th 2022, 11:23 pm

'न मैं मुसलमान हूं, न हिंदू हूं... मैं सिर्फ इंसान हूं.... अरमान के इतना कहते ही उन्‍होंने चाकुओं से

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मंगोलपुरी: मंगोलपुरी में चाकूबाजी की घटना में अरमान नाम के युवक की हत्या के केस में तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों पर हत्या और हत्या की कोशिश के तहत दो एफआईआर दर्ज की हैं। दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि दोनों परिवारों में वर्चस्व को लेकर पहले से विवाद है। फिलहाल पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में है। मृतक अरमान के पिता हाकिम का दावा है कि, गणेश विसर्जन से लौटने के दौरान फरदीन को गुलाल लगा दिया था। जिसको लेकर अरोपियों से कहासुनी हुई थी। अरमान बीच बचाव के लिए पहुंचा था। हाकिम का कहना है कि, हमलावरों ने पूछा था कि तुम कैसे मुसलमान हो। जिस पर अरमान ने कहा था कि न मैं मुसलमान हूं, न हिंदू हूं। मैं सिर्फ इंसान हूं। बस, इसी पर विवाद बढ़ा और आरोपियों ने घेर कर चाकू से उनके बेटे को गोद डाला। अरमान डीयू का स्टूडेंट था। अरमान के चचेरे भाई फरदीन ने कहा कि अरमान अखाड़े में भी जाते थे। वह बजरंगबली को भी मानते थे। दिल्‍ली पुलिस का क्‍या कहना है?पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार शाम 4:36 बजे मंगोलपुरी स्थित के ब्लॉक से चाकूबाजी की कॉल मिली। पता चला कि घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है। तुरंत पुलिस की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची। जबकि एसीपी रिक्षपाल सिंह के सुपरविजन में एक टीम संजय गांधी अस्पताल पहुंची। जहां अरमान, मोंटी उर्फ मोइन खान और फरदीन को ले जाया गया था। डॉक्टरों ने अरमान को मृत बताया, जबकि बाकी दोनों खतरे से बाहर थे। फरदीन ने बयान दिया कि दोपहर 2:15 वह बाइक से जा रहे थे। जब वह पड़ोस के शातिर अपराधी शाहरुख के घर के सामने से जा रहे थे, तभी सड़क पर खड़े शाहरुख के साथियों को उन्होंने हॉर्न दिया। जब वे सड़क से नहीं हटे तो वह साइड से बाइक ले जाने लगे। इस दौरान शाबिर नाम के लड़के के हाथ से बाइक टच हो गई। जिसे लेकर उसकी शाहरुख और शाबिर से कहासुनी हुई थी। फरदीन के अनुसार उन्होंने अपने भाई मोंटी को सारी बात बताई। मोंटी के साथ वह भी विवाद सुलझाने पहुंचे। शाहरुख ने मोंटी को गाली दी। इसके बाद उनमें तीखी बहस हुई। फरदीन ने कहा कि इस बीच उनका चचेरा भाई अरमान भी आ गया। शाहरुख और शबीर ने अपने साथियों को चाकू लाने और तीनों भाइयों को खत्म करने को उकसाया। इसके बाद सभी चाकू से हमला कर भाग गए। दूसरे ब्‍लॉक में जाकर भी चाकूबाजीमोंटी, अरमान और फरदीन को अस्पताल ले जाया गया, जहां अरमान को डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद शाहरुख अपने भाई और दोस्तों के साथ मंगोलपुरी के ओ ब्लॉक पहुंचा। वहां मट्ठी नाम के लड़के की तलाश करने लगा। कुछ दिनों पहले शाहरुख के दोस्त सैफ के भाई का मट्ठी से झगड़ा हुआ था। उन्हें अनुराग और रवि मिले, जो मट्ठी के दोस्त थे। आरोपियों ने अनुराग और रवि पर भी चाकू से हमला कर दिया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं। शाहरुख, सैफ और विनीत को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

September 10th 2022, 11:23 pm

जेलेंस्की का जश्न और पुतिन की उदासी, खारकीव से लौट रहे रूसी सैनिक, दिखने लगे यूक्रेन युद्ध के नतीजे?

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कीव : करीब साढ़े छह महीने से चल रहे युद्ध में रूस को एक बड़ा झटका लगा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि वह यूक्रेन के खारकीव में दो जगहों से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है। गौरतलब है कि इन दोनों क्षेत्रों में पिछले सप्ताह यूक्रेन के सैनिकों ने काफी बढ़त हासिल कर ली है। रूसी सेना युद्ध शुरू होने के कुछ हफ्तों बाद ही कीव से हटकर पूर्वी क्षेत्र में सिमट गई थी। खारकीव इस क्षेत्र में लड़ाई का केंद्र बन गया था जहां रूसी सेनाओं ने कई इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया था। अब पुतिन के सैनिकों का लौटना स्पष्ट तौर पर क्रेमलिन के लिए अच्छी खबर नहीं है। रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनशेंकोव ने बताया कि बालक्लीया और इज्यूम इलाकों में सैनिकों की डोनेत्स्क क्षेत्र में फिर से तैनाती की जाएगी। गौरतलब है कि खारकीव में इज्यूम रूसी सेना का महत्वपूर्ण ठिकाना था। प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व यूक्रेन के एक हिस्से 'डोनबास को मुक्त कराने के लिए विशेष सैन्य अभियान के लक्ष्य को प्राप्त करने के मकसद से' यह कदम उठाया गया है। गौरतलब है कि रूस इस क्षेत्र पर अपना सम्प्रभु अधिकार होने का दावा करता है। 'जवाबी हमले से भागने का फैसला सही'सैनिकों को वापस बुलाने और उनके डोनेत्स्क में उनकी फिर से तैनाती के पीछे बताया गया यह कारण बिलकुल वैसा ही है जैसा कि रूस ने कहव से सैनिकों को वापस बुलाते समय इस साल की शुरूआत में दिया था। यूक्रेन के अधिकारियों ने शनिवार को दावा किया कि देश के उत्तर-पूर्व में रूसी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में कीव को बड़ी सफलता मिली है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि रूसी सेना उनके देश के जवाबी हमले से भागकर 'एक अच्छा निर्णय' ले रही है। यूक्रेनी सेना के लिए बड़ी सफलतायूक्रेनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओलेह निकोलेंको ने बताया कि यूक्रेनी सैनिकों ने पूर्वी यूक्रेन के कुपियांस्क शहर को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया है। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव के दक्षिण में यूक्रेन के सफलता हासिल करने के कई दिनों के बाद यह खबर सामने आई है। लगभग सात महीने पहले युद्ध की शुरुआत में राजधानी कीव पर कब्जा करने संबंधी रूसी प्रयास को विफल करने के बाद यूक्रेनी सेना के लिए यह एक बड़ी सफलता हो सकती है।

September 10th 2022, 11:17 pm

सूरत में कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली फैक्ट्री में बॉयलर फटा, 8 मजदूर घायल

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सूरत: गुजरात के सूरत की एक फैक्ट्री में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हुआ है। यहां एक ब्रांडेड कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनी में ब्लास्ट हुआ जिसमें 7 से 8 लोगों के घायल होने की खबर है। दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूरत की फैक्ट्री में रविवार तड़के बॉयलर फटने से धमाका हुआ। धमाका होने के बाद चारों ओर आग की लपटें देखने को मिल रही हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश हो रही है।

September 10th 2022, 11:11 pm

इतना भी क्‍या सोचना! अगर बीमार बन गई है ओवरथिंकिंग तो एक्‍सपर्ट्स से जानें हल

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संजय (बदला हुआ नाम) 35 बरस के हैं। एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर मैनेजर। आजकल परेशान हैं। उन्हें लगता है कि वह बहुत ज्यादा सोचते हैं। खासकर तब, जब वह रात को सोने के लिए बेड पर जाते हैं। तब दिनभर के काम, उनसे जुड़ी बातें याद आती हैं। विशेषकर, उन बातों का सिलसिला जरूर शुरू होता है जो काम वह पूरे नहीं कर पाए। उन कामों के बारे में सोचते हुए वह सोचने लगते हैं कि कल बॉस ने पूछ लिया तो क्या होगा? हालांकि, संजय को यह पता है कि बॉस उनसे इस बारे में नहीं पूछेंगे क्योंकि वह किसी प्रोजेक्ट के काम से बाहर गए हुए हैं, फिर भी संजय इस बात को लेकर सोचे जा रहे हैं। इसी तरह की बातें अमूमन हर दिन होती हैं। हालांकि, इस तरह की सोच की वजह से उनके सामान्य काम प्रभावित नहीं होते। उनकी नींद भी सामान्य है, उनके ऑफिस का काम प्रभावित नहीं होता। लेकिन ओवरथिंकिंग की वजह से वह परेशान रहते हैं। उन्होंने अपनी परेशानी अपने एक रिश्तेदार को बताई जो जनरल फिजिशन हैं। डॉक्टर ने कहा कि आप किसी सायकायट्रिस्ट से बात कर लीजिए। सायकायट्रिस्ट का कहना था कि यह कोई ऐसी समस्या नहीं है कि जिसके लिए अभी आपको किसी इलाज या काउंसलिंग की जरूरत हो। हां, अपनी रुटीन में कुछ चीजों को शामिल करें और कुछ चीजों को बाय-बाय कर देंगे तो फौरन ही फायदा हो जाएगा। 10 सवालों से जांचें, आप ओवरथिंकिंग के शिकार तो नहीं
  • क्या आप छोटी-छोटी बातों पर भी बहुत देर तक सोचते हैं? मसलन: कल ऑफिस में खाने में क्या लेकर जाना है या फिर मेरी पत्नी या पति ने मुझे उलटा जवाब क्यों दिया?
  • कई बार दूसरे के हिस्से का भी खुद ही सोचते हैं? मसलन: किसी दोस्त ने या फिर किसी संबंधी ने मेरे बारे में क्या कहा होगा?
  • वर्तमान के बारे में बहुत कम, भविष्य के बारे में ज्यादा और अतीत के बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं?
  • कल्पना करते हुए बार-बार यह सोचना कि अगर ऐसा हो गया तो क्या होगा?
  • अपने बीते दिनों के बारे में यह सोचते हैं कि काश यह न किया होता तो अच्छा होता यानी खुद पर बार-बार पछतावा होता है?
  • किसी की कोई बात बार-बार दिमाग में आना। किसी शख्स ने मजाक में कोई बात बोल दी, फिर भी क्या उसके बारे में सोचते रहते हैं?
  • दिमाग में किसी बात को लेकर खुद को बार-बार शर्मिंदा महसूस करते हैं? अतीत की किसी घटना को लेकर शर्मिंदा महसूस करते हैं?
  • उन चीजों के बारे में क्या ज्यादा सोचते हैं जिन घटनाओं पर आपका कोई कंट्रोल नहीं है? मसलन: अगर चीन या पाकिस्तान से भारत की लड़ाई हो गई तो कहां जाकर रहेंगे। अगर मंदी आई और जॉब चली गई तो क्या करेंगे आदि?
  • सहवास से दूर रहते हैं? बेड पर पार्टनर से संबंध बनाने के दौरान किसी सोच में गुम होकर उत्तेजना खो देते हैं, मूड ऑफ हो जाता है और सहवास से भाग जाते हैं?
  • ऊपर के सवालों के जवाब 'हां' में होने की वजह से गहरी नींद न आना, लगातार 6 से 8 घंटे की नींद पूरी न होना, सुबह उठने पर बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना, चिड़चिड़ापन होना, बिना मतलब परिवार या फिर ऑफिस में गुस्सा करना, अपने काम में बार-बार गलतियां करना, जैसी समस्याएं हैं? अगर 'हां' तो फिर आप ओवरथिंकिंग से परेशान हैं और कुछ उपाय की जरूरत है।
जानें अपने जवाबों का मतलबज्यादातर मामलों में ओवरथिंकिंग परेशानी पैदा नहीं करती। हां, यह लोगों को महसूस हो सकता है कि वे ज्यादा सोचते हैं। ओवरथिंकिंग किसी शख्स के लिए परेशानी का कारण बन रही है या नहीं, यहां दिए गए 10 सवालों के जवाब के उत्तर से पता चलेगा। इनके जवाब 'हां' या 'न' में ही होने चाहिए। अगर कोई शख्स 8 से 10 सवालों का जवाब ' न' में देता है तो मान लें कि वह शख्स ओवरथिंकिंग नहीं कर रहा। अगर 5 से 7 सवालों का जवाब ' न' में देता है तो मान लें कि वह शख्स ओवरथिंकिंग की ओर बढ़ रहा है और अगर 5 से कम सवालों के जवाब 'न' में हैं तो यह मान लेना चाहिए कि वह ओवरथिंकिंग का शिकार है। इनमें 10वां सवाल सबसे खास है। अगर इस सवाल को छोड़कर बाकी 9 सवालों के जवाब 'हां' में हैं तो वह शख्स ओवरथिंकिंग करता है, लेकिन इसका बुरा असर उस पर नहीं हो रहा है। मुमकिन है कि बाद में, भविष्य में असर पड़े। अगर 10वें सवाल का जवाब भी 'हां' में है तो मामला गंभीर है। एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। ...तो क्या सोचना गलत है?सोचना गलत कैसे हो सकता है। हमारे यहां तो कहावत है-बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताए, काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय। सोचने से ही क्रिएटिविटी आती है। नई खोजें होती हैं। समस्याओं का समाधान होता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन पर हमारा काबू रहता है। हम कुछ नया सीखने के लिए सोचते हैं। ऐसे कामों में अगर हम ज्यादा भी सोचते हैं तो वह समस्या का समाधान खोजने के लिए, न कि आशंकित होकर कि अगर ऐसा न हुआ तो क्या होगा या फिर काश हमने ऐसा किया होता। कोरोना के बाद से लोगों में इस तरह की परेशानी ज्यादा देखी गई है। दरअसल, वे खुद को ज्यादा असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। इस वजह से स्ट्रेस, डिप्रेशन या एंग्जाइटी का शिकार हो सकते हैं। भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए ज्यादा सोचना शुरू कर दिया है। उसकी योजना बनानी शुरू कर दी है। कोरोना के बाद सेहत से जुड़े इश्यू भी ज्यादा होने लगे हैं। ऐसे में लोग इसको लेकर भी चिंतित रहने लगे हैं। सीधे कहें तो ओवरथिंकिंग की कई वजहें हो सकती हैं पर काउंसलिंग या इलाज की जरूरत कम मामलों में होती है। ये होते हैं ओवरथिंकिंग के कारण पर्सनैलिटी ज्यादा सोचना किसी के व्यक्तित्व (पर्सनैलिटी) का हिस्सा हो सकता है। कई लोग हर काम में खूब सोच-विचार करते हैं। अमूमन ऐसे लोगों की संख्या 60 से 70 फीसदी होती है। -इनमें से कई लोग ऐसे होते हैं जो जाने-अनजाने ज़िंदगी को शतरंज की बिसात की तरह जीने लगते हैं। ऐसे लोगों को ज्यादा सोचने से कभी भी परेशानी नहीं होती। -कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें ज्यादा सोचने की वजह से कोई शारीरिक या मानसिक परेशानी नहीं होती, लेकिन उन्हें ऐसा महसूस होता है कि वे परेशान हैं क्योंकि वे ज्यादा सोचते हैं। स्ट्रेस वैसे स्ट्रेस में तो हर कोई होता है, लेकिन स्ट्रेस जब किसी के लिए उसके सामान्य काम में भी रुकावट खड़ी कर दे यानी उस शख्स का रुटीन डिस्टर्ब हो जाए तो परेशानी की बात है। स्ट्रेस की स्थिति में शख्स बहुत ज्यादा सोचता है। यह स्ट्रेस किसी भी वजह से हो सकता है। कोई अपनी जॉब को लेकर परेशान तो, कोई बीमारी को लेकर। ऐसे में स्ट्रेस में रहने वाला शख्स जब तन्हाई में होता है तो ज्यादा सोचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। स्ट्रेस का निपटारा खोजने पर ज्यादा सोचने की स्थिति में कमी हो जाती है। एंग्जाइटी किसी भी चीज के होने या न होने की एंग्जाइटी हमें ओवरथिंकिंग की तरफ ले जाती है। वैसे चिंता होना आम बात है। हर शख्स किसी न किसी चीज को लेकर चिंतित होता है। अगर चिंता वाजिब वजह से हो और चंद क्षणों तक डिस्टर्ब करे, फिर धीरे-धीरे खत्म हो जाए तो इसे सामान्य ही कहेंगे। लेकिन जब यही चिंता घबराहट के रूप में हो, छोटी वजहों से या फिर बिना किसी कारण के इस कदर परेशान करे कि नींद ही उड़ जाए। काम में उसका मन न लगे, हमेशा कुछ न कुछ सोचने की जरूरत महसूस हो तो यह एंग्जाइटी की ओवरथिंकिंग है। जब एंग्जाइटी का उपाय करेंगे तो ओवरथिंकिंग का भी निदान हो जाएगा। एंग्जाइटी में ओवरथिंकिंग की स्थिति तब भी बनती है जब हम किसी चीज की सबसे बुरी संभावना के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं। डिप्रेशन तनाव, घबराहट, मूड ऑफ होना ये सब लक्षण ज़िंदगी में एक बार नहीं आते। ये हर दिन आते-जाते रहते हैं। इनके आने और जाने का सिलसिला चलता रहता है। लेकिन इन वजहों से हमारे काम, हमारी रुटीन, हमारी बॉडी लैंग्वेज अमूमन ज्यादा प्रभावित नहीं होता। जब ऐसे इमोशंस आकर ठहर जाएं और मन में अपना घर बनाने लगें तो दिक्कत है। मन के भीतर से ऐसी आवाज आने लगे कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता। इस स्थिति में यह ओवरथिंकिंग का अहम कारण बन जाता है। गंभीर मानसिक बीमारियों में भी होती है ओवरथिंकिंगअगर ओवरथिंकिंग गंभीर मानसिक परेशानियों, जैसे: बाइपोलर डिसऑर्डर, मेनिया, सिजोफ्रेनिया आदि बीमारियों की वजह से हो रही है तो फिर इसके लिए किसी सायकायट्रिस्ट की मदद लेनी चाहिए। अमूमन इस तरह की ओवरथिंकिंग की वजह न्यूरोट्रांसमीटर (सेरेटोनिन, डोपामाइन आदि) की कमी हो सकती है। इसलिए इनमें दवा और काउंसलिंग की जरूरत हो सकती है। अहम बात यह कि स्ट्रेस, डिप्रेशन या फिर एंग्जाइटी की ओवरथिंकिंग में शख्स को पता होता है कि उसे यह परेशानी हो रही है। अगर कोई उसकी ओवरथिंकिंग के बारे में पूछता है तो वह बताता है कि हां, आजकल मैं कुछ ज्यादा ही सोचने लगा हूं, लेकिन गंभीर मानसिक बीमारों की स्थिति में उस शख्स को यह पता नहीं होता कि वह बहुत ज्यादा सोचने लगा है। उसे इस बात का एहसास ही नहीं होता। जब इन बीमारियों की वजह से किसी को ओवरथिंकिंग होती है तो वह किसी शक के पीछे पड़े रहने की वजह से या फिर भ्रम आदि में रहने की वजह से। OCD के मरीज यही सोचते रहते हैं कि उनका हाथ तो ज्यादा गंदा नहीं हो गया। सीधे कहें तो इनकी ओवरथिंकिंग में इलाज की जरूरत होती है। परेशानी है, इनसे बना लें दूरी ज्यादा अपेक्षाएं उम्मीद लगाना अच्छी बात है, पर उसे दिल से नहीं लगाना चाहिए। एक कहावत बड़ी पुरानी है: 'मन का हो तो अच्छा, न हो तो और भी अच्छा'। इस वाक्य को अपनी ज़िंदगी में जरूर शामिल करना चाहिए। 100 फीसदी न सही, 50 फीसदी भी शामिल करने से ज़िंदगी काफी आसान हो जाती है। दरअसल, जब हम किसी की मदद करते हैं, किसी के लिए अच्छा बोलते हैं तो उम्मीद रहती है कि वह भी मेरी मदद करे और मेरे लिए अच्छा बोले। जब इस तरह की हमारी अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं तो फिर ओवरथिंकिंग शुरू हो जाती है। गुजरी ज़िंदगी में ज्यादा जीना जो बीत गया है, वह दौर दोबारा नहीं आता। वह दौर किसी शख्स का अच्छा भी हो सकता है किसी का बुरा। उस दौर को बार-बार याद करते हुए हम अक्सर अपना आज खराब कर लेते हैं। इसलिए समझदार इंसान कभी भी अपनी गुजरी ज़िंदगी को खुद पर ज्यादा हावी नहीं होेने देता। नशा जब कोई शख्स स्ट्रेस या डिप्रेशन में होता है तो वह तंबाकू, शराब या ड्रग्स की ओर झुकने लगता है। इससे ओवरथिंकिंग बढ़ जाती है। मेडिटेशनअगर किसी को ओवरथिंकिंग की परेशानी है तो उसे मेडिटेशन से बचना चाहिए या एक्सपर्ट के साथ या उसकी सलाह पर ही मेडिटेशन करना चाहिए। कारण यह है कि जब भी वह मेडिटेशन के लिए बैठेगा, उसका दिमाग ओवरथिंकिंग के ट्रैप में फंस जाएगा। हां, योग के आसन, प्राणायाम और वॉक- एक्सरसाइज जरूर करे। एक ही माहौल में रहनाचाहे घूमना हो, मूवी जाना हो, बेडरूम बदलना हो, ऐसे काम करते रहें। कुछ मुमकिन न हो तो बेडशीट ही बदल दें, तकिया बदल दें या उसके कवर बदल दें। रात में आइसक्रीम खाने की इच्छा हो तो निकल जाएं खाने के लिए। दरअसल, जब एक ही तरह की चीजें होती रहती हैं तो हमारे दिमाग में पुराने विचार ही जगह बना लेते हैं। हमारे अंदर नयापन नहीं आता। पुराने विचारों के द्वंद्व में ही फंसे रहते हैं। वही चीजें बार-बार आती हैं। इसी तरह कई बार ऑफिस से घर और फिर घर से ऑफिस के सिलसिले को तोड़ना जरूरी हो जाता है। कुछ नया करें ताकि पुरानी सोच की जगह नई सोच उभरे। इन उपायों से तोड़ें ओवरथिंकिंग का सिलसिला जब हों खाली, सिर्फ कॉल कर लेंअगर यह महसूस हो कि खाली हूं। करने के लिए कुछ भी नहीं है मेरे पास। संकेत मिलने लगे कि अब ओवरथिंकिंग की तरफ जाने ही वाला हूं तो खुद को किसी ऐसी चीज से जोड़ लें जहां आपका मन भी लगे और ध्यान भी कुछ केंद्रित हो। मसलन: किसी को फोन लगा दिया। अगर वह फोन न उठाए या वह बिजी हो तो किसी दूसरे को कॉल कर लें। वह भी न उठाए तो तीसरे को कॉल कर लें। मुमकिन है कि वह भी आपको फोन करने में हिचक रहा हो। सीधे कहें तो किसी से बातों का सिलसिला जोड़कर ओवरथिंकिंग का सिलसिला को तोड़ दें। अति महत्वाकांक्षा से बचें यह स्थिति भी ओवरथिंकिंग का एक बहुत बड़ा कारण है। जब हम अपनी कमाई से ज्यादा खर्च बढ़ा लेते हैं तो हमेशा आर्थिक रूप से दबाव में रहते हैं। हमें हर वक्त किसी न किसी चीज की कमी रहती है। कई बार हम कर्ज लेने लगते हैं। फिर कर्ज चुकाने की बारी आती है। यहीं से हमारी ओवरथिंकिंग शुरू हो जाती है। इसलिए कोशिश यह जरूर हो कि हम ज्यादा से ज्यादा कमाई करें, लेकिन खर्च और अपनी जरूरतों को भी उसी के अनुसार तैयार करें। इसलिए अति महत्वाकांक्षा से बचना भी जरूरी है। अपनी पसंद का म्यूजिक सुनेंजो भी सुनने का मन करे, म्यूजिक सुनें। गीत-संगीत का साथ पकड़ लें। कई लोगों को सोते समय ओवरथिंकिंग का सिलसिला जो शुरू होता है वह खत्म ही नहीं होता। इससे नींद खराब हो जाती है। नींद पूरी नहीं होती। अगर ऐसे शख्स को संगीत से लगाव हो तो कानों में ईयरफोन या हेडफोन लगाकर गाना लगाकर धीमी आवाज में सुनें। दरअसल, सोते वक्त यह बच्चों की लोरी की तरह काम करता है। कभी- कभी ईयरफोन या हेडफोन नींद में खलल पैदा कर सकता है। खासकर जब नींद आने वाली हो और यह चिंता हो कि इन्हें कानों से हटाकर रखना है। ऐसे में म्यूजिकल पिलो (ऐसे पिलो जिसमें गाने सुनने के लिए स्पीकर लगे हों) पर सो सकते हैं। एकदम धीमी आवाज में ये कानों को संगीत पहुंचाते रहते हैं। हमें ओवरथिंकिंग से बचाते रहते हैं। साथ ही बगल में सोने वालों को परेशान भी नहीं करते। म्यूजिकल पिलो की कीमत: 500 रुपये से शुरू, कहां उपलब्ध: ये ऑनलाइन उपलब्ध हैं। musical pillow सर्च करने पर कई ऑप्शन मिल जाएंगे। अच्छी नींद के लिए ये भी काम के उपाय यह समझना जरूरी है कि नींद में खलल क्यों पैदा होता है: वजहें कई हो सकती हैं। इनमें मोबाइल, लैपटॉप, टीवी के साथ देर रात तक जागने की आदत, डिप्रेशन, तनाव, शरीर कमजोर होना, विटामिन-डी की कमी, सही और तय समय पर खाना न खाना, अल्कोहल और स्मोकिंग की आदत, जंक फूड, खर्राटे, बेड की क्वॉलिटी, मोटे तकिए पर सोना और स्लीप एप्नीया (सोते वक्त सांस लेने में रुकावट) जैसी समस्या को नजरअंदाज करना। गहरी नींद के बारे में विस्तार से जानकारी चाहते हैं तो हमारे फेसबुक पेज SundayNbt पर जाएं और #Sleep टाइप करें। लेख सामने आ जाएगा। डीप ब्रीदिंग करेंजब भी ओवरथिंकिंग हावी हो तो उस स्थिति से बाहर निकलने के लिए डीप ब्रीदिंग करें। चाहे बेड पर लेटे हों। लेटे-लेटे ही गिनती करते हुए: 1, 2, 3, 4, 5.....15 तक जाएं और साथ में गहरी सांस लें। गहरी सांस लेने के लिए सांस को अंदर खींचें, फिर 2 से 3 सेकंड के लिए रोकें और फिर बाहर निकाल दें। इससे विचारों का आवेग भी दूर होगा और फेफड़ों की क्षमता भी बढ़ेगी। योग, वॉक, एक्सरसाइज करें अगर हम हर दिन या सप्ताह में 4 से 5 दिन भी योग करते हैं तो मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं। इससे शरीर में स्ट्रेस कम होता है। इसी तरह हर दिन या हफ्ते में 4-5 दिन 40 मिनट ब्रिस्क वॉक करें। इनके अलावा 10 मिनट की एक्सरसाइज भी जरूर करें। शरीर से पसीना जरूर निकालें। सांसों की गति तेज हो। इन कोशिशों से पॉजिटिव थिंकिंग ज्यादा उभरती है। न सोचें कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता हैजब हम किसी चीज को करने में सफल नहीं होते तो हम यह मान लेते हैं कि इस तरह की नाकामी मुझे ही मिली है जबकि वह सामान्य चीजें होती हैं। ऐसा बाकी लोगों के साथ भी होता रहता है। मसलन: अगर हमारी ट्रेन छूट जाए या फिर किसी ऐसी कंपनी का शेयर खरीदा जिसकी वैल्यूशन बढ़ रही थी। जिस दिन से मैंने खरीदा यह नीचे जाने लगा। इसके बाद हम यह सोचने लगते हैं कि जब भी मैं अपने लिए अच्छा करने की कोशिश करता हूं, नुकसान हो जाता है। ऐसा लगता है कि सभी मेरे ही पीछे पड़े हुए हैं, इसके बाद शुरू होता है ओवरथिंकिंग का सिलसिला। सचाई यह है कि उस शेयर को हजारों लोगों ने खरीदा होगा। लाखों लोग अपनी पहली कोशिश में ही सफल नहीं हो जाते। निगेटिव विचारों को लिखें, फेंक दें जो भी निगेटिव थॉट्स आएं और जिनसे ओवरथिंकिंग का सिलसिला शुरू होने की स्थिति बने, कॉपी-पेन लें और उन्हें लिख लें। चाहें तो लिखने के साथ, उससे संबंधित कोई स्केच भी बना लें। फिर उन्हें कचरे के डब्बे में बंद कर दें या फिर जला दें। यह काम आपको सुकून देगा। दूसरों से तुलना न करेंखुद की या फिर अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करने से सिर्फ समस्या ही पैदा होती है। इससे तनाव, एंग्जाइटी और कई बार डिप्रेशन का भी कारण बनता है। ये सभी चीजें ओवरथिंकिंग के लिए बेहतरीन प्लैटफॉर्म देती हैं। इसलिए तुलना न करें। न ही तुलना करके इस मुद्दे को ज्यादा तूल दें। काम हमारे बस में, नतीजा नहींवैसे तो सही तरीके से काम करने का नतीजा सही ही होता है और गलत या बुरे तरीके से काम करने का तरीका बुरा। फिर भी यह सच है कि रिजल्ट हमारे बस में नहीं होता। लेकिन हम रिजल्ट को भी अपने हिसाब से देखना चाहते हैं। सच तो यह है कि हम कोशिश कर सकते हैं, न कि रिजल्ट पैदा कर सकते हैं। शेयर करेंजिस बात को लेकर बार-बार सोचने की जरूरत पड़ रही है, उसके बारे में किसी करीबी से बात जरूर करें। शेयर करने से ओवरथिंकिंग पर कुछ लगाम लगती है। मन हल्का होता है। वैसे, ओवरथिंकिंग स्वभाव का ही एक हिस्सा है। इसलिए इस बात को सोचकर परेशान नहीं होना चाहिए कि मैं ओवरथिंकिंग करता हूं तो बीमार हूं। जब किसी शख्स को ओवरथिंकिंग परेशान करने लगे तो उस शख्स को निदान जरूर खोजना चाहिए। अधूरे कामों को पूरा करेंऑफिस में जब हम कामों को लटका कर रखते हैं, उसे समय पर पूरा नहीं करते, घर आने से पहले अगर वे पूरे हो सकते हैं तो जरूर पूरा करें। इसी तरह घर के ऐसे काम जो आसानी से किए जा सकते हैं, उन्हें समय पर पूरा कर लें। जब हमारे पास अधूरे कामों की लिस्ट लंबी होती है तो ओवरथिंकिंग की स्थिति बन जाती है। हम यह सोचने लगते हैं कि कितना काम बचा हुआ है, इन्हें कैसे पूरा करूं, कहीं बॉस इसके लिए डांट तो नहीं देंगे? एक्सपर्ट पैनल डॉ. निमेष जी. देसाई, वरिष्ठ मनोचिकत्सक, पूर्व निदेशक, IHBAS डॉ. रूप सिडाना, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रुति श्रीवास्तव, प्रफेसर, सायकायट्री, GTB हॉस्पिटल डॉ. विवेक अग्रवाल, HOD, सायकायट्री, KGMU डॉ. समीर पारिख, सीनियर सायकायट्रिस्ट डॉ. कुंवर वैभव, कंसल्टेंट सायकायट्रिस्ट अगली बार पढ़ें एडिक्शन के बारे में में पिछली बार हमने मेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर आदि विषय पर लिया था। अब यह पांचवां भाग है। आज का विषय है, ओवरथिंकिंग (ज्यादा सोचने की परेशानी) जिस पर हमने पाठकों से सवाल भी मंगाए थे। कुछ खास सवालों के आधार पर हमने यहां सामग्री दी है। सीरीज का छठा भाग अगले संडे आएगा। इसका विषय होगा- 'एडिक्शन' (लत)। एडिक्शन से जुड़ा अगर आपका भी कोई सवाल हो तो हमें हिंदी या अंग्रेजी में सोमवार तक वॉट्सऐप नंबर 89298-16941 या sundaynbt@gmail.com पर भेजें। ईमेल के सब्जेक्ट में Mental Health-6 जरूर लिखें। आप हमें यह भी बता सकते हैं कि इस सीरीज़ के तहत आप मन की किस समस्या के बारे में पढ़ना चाहते हैं। आपके सवालों और आपकी राय का हमें इंतजार रहेगा।

September 10th 2022, 11:09 pm

5 साल में 930% से ज्‍यादा रिटर्न, क्‍या आपके पास है यह शेयर?

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नई दिल्‍ली: कुछ कंपनियों के शेयर निवेशकों को मालामाल कर देते हैं। ऐसे शेयरों के कारण ही निवेशकों की दिलचस्पी स्‍टॉक मार्केट (Stock Market) में बढ़ती है। ये शेयर निवेशकों को दिन-दोगुना रात-चौगुना रिटर्न देते हैं। 5 साल में ऐसे कई शेयर हैं जिन्होंने निवेशकों को बंपर मुनाफा दिया है। ऐसे ही शेयरों में (.) भी शामिल है। शुक्रवार को इस शेयर ने अपने 52 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर 331.40 रुपये छुआ था। पिछले 5 सालों में इस शेयर ने 931.62 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, इस साल अब तक इसने 413.41 फीसदी की छलांग लगाई है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने इस शेयर में इस साल की शुरुआत में 1 लाख रुपये का निवेश किया होता तो वह आज बढ़कर 5.13 लाख रुपये हो चुका होता। पिछले हफ्ते इस शेयर ने बार-बार अपना अपर सर्किट छुआ है। लॉर्ड्स क्लोरो अल्कली का मार्केट कैपिटलाइजेशन 833 करोड़ रुपये है। सिर्फ एक महीने में यह शेयर 63.73 फीसदी चढ़ा है। इस कंपनी की शुरुआत 1979 में हुई थी। यह कंपनी कई तरह के केमिकल का उत्‍पादन और निर्यात करती है। अभी यह कॉस्टिक सोडा और अन्‍य केमिकल का निर्माण करती है। राजस्‍थान के अलवर में कंपनी का शानदार प्‍लांट है। इसमें रोजना 275 टन कॉस्टिक सोडा निर्माण करने की क्षमता है। कंपनी ने जारी क‍िए हैं शानदार त‍िमाही नतीजे कंपनी ने हाल में अपने तिमाही नतीजे घोषित किए हैं। वित्‍त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में कंपनी की बिक्री में 89.39 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह पिछले वित्‍त वर्ष में इसी अवधि में 44.56 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 84.39 करोड़ रुपये हो गई है। पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी बढ़ा है। इसमें 498.18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। नेट प्रॉफिट 2.04 करोड़ रुपये बढ़कर 22.04 करोड़ रुपये हो गया है। लॉर्ड्स क्लोरो के पक्ष में जाती हैं कई बातें लॉर्ड्स क्लोरो का शेयर इस साल अब तक 413.41 फीसदी चढ़ा है। पांच साल में इसने 931.62 फीसदी रिटर्न दिया है। इसका मतलब हुआ कि इस साल के शुरू में किसी ने इसमें 1 लाख रुपये का निवेश किया होता तो वह आज बढ़कर 5.13 लाख रुपये हो चुका होता। कंपनी ने इस साल नया सोडियम हाइपोक्‍लोराइट प्‍लांट भी लगाया है। कंपनी की कॉस्टिक सोडा की क्षमता को भी बढ़ाने की योजना है। कंपनी के पास कैश की कमी नहीं है। सेल्‍स और ग्रोथ (Sales & Growth) पर भी किसी तरह का दबाव नहीं दिख रहा है। कंपनी में प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 74.72 फीसदी है। वहीं, 25.24 फीसदी होल्डिंग पब्लिक की है।

September 10th 2022, 11:04 pm

एक पैर दूसरे से छोटा, 15 सर्जरी... शशि थरूर के साथ खड़ी इस लड़की ने अंगारों पर चलकर छुई हैं बुलंदिया

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नई दिल्‍ली: सुरश्री रहाणे (Surashri Rahane) 'स्पेशल' हैं। उनकी हर बात अलग है। अंगारों पर चलकर उन्‍होंने सफलता का स्‍वाद चखा है। जन्म के महज 15 दिन बाद उनकी पहली सर्जरी हुई थी। फिर सर्जरी पर सर्जरी। उनका एक पैर दूसरे से छोटा है। इसके कारण उन्हें चलने में तकलीफ थी। घर वाले इस दिक्‍कत को दूर करना चाहते थे। इस कारण उन्‍हें एक नहीं, बल्कि 15 सर्जरी से गुजरना पड़ा। हालांकि, इसमें थोड़ी सफलता ही मिल सकी। तब किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इतनी समस्याओं के बावजूद सुरश्री वो कर गुजरेंगी जो शायद कई लोगों का सिर्फ सपना होता है। वह स्कूल में टॉपर (School Topper) रहीं। उन्‍होंने पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (College of Engineering) से ग्रेजुएशन (इंजीनियरिंग) किया। नई दिल्ली के बेहद प्रतिष्ठित बिजनस स्‍कूल, दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्‍टी ऑफ मैनेजमेंट स्‍टडीज (FMS) से उनका पोस्‍ट ग्रेजुएशन यानी मास्‍टर्स हुआ। वह सर्टिफाइड स्कूबा ड्राइवर और प्रशिक्षित भरतनाट्यम डांसर हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) के साथ उनकी यह तस्‍वीर इस साल मई की है। थरूर अलायंस लिट्रेचर फेस्टिवल में पहुंचे थे। इस दौरान उन्‍हें थरूर से मिलने का मौका मिला। थरूर ने उनसे वादा किया कि अगली बार जब दोनों मिलेंगे तो वह आंत्रप्रेन्‍योरशिप और क्रिएटिविटी पर बातचीत करेंगे। हर कदम पर थीं कठिनाइयां महाराष्‍ट्र के नाशिक में रहने वाली सुरश्री की जिंदगी में हर कदम पर कठिनाइयां खड़ी थीं। लेकिन, वह इनमें से हर एक को पार करती गईं। उनके हर बढ़ते कदम ने उन्‍हें मजबूत किया। आगे बढ़ने का हौंसला दिया। उन्‍होंने मन में गांठ बांध ली थी कि उन्‍हें पीछे मुड़कर नहीं देखना है। सुरश्री ने पेप्‍सीको और एचपी जैसी प्रति‍ष्ठित कंपनियों के साथ काम किया। अपनी 30 साल की जिंदगी में वह 15 सर्जरी से गुजर चुकी हैं। लेकिन, वह इनसे बिल्‍कुल भी बेचैन नहीं हुईं। स्‍कूल में ब्रिलिएंट स्‍टूडेंट थीं अपने स्‍कूल में वह सबसे मेधावी छात्रों में थीं। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्‍होंने पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। यहां उनकी मुलाकात अमोल बगुल से हुई। दोनों बहुत अच्‍छे दोस्‍त बन गए। 22 साल की उम्र में उन्‍होंने शादी कर ली। हालांकि, दोनों की पढ़ाई जारी रही। बीटेक करने के बाद सुरश्री और अमोल दोनों को प्रतिष्ठित संस्‍थानों में दाखिला मिला। सुरश्री ने दिल्‍ली के एफएमएस में जगह बनाई। वहीं, अमोल को आईआईएम-इंदौर में एडमिशन मिला। यह अलग बात है कि अमोल को लगा कि वह 2 साल तक सुरश्री से अलग नहीं रह सकते। लिहाजा, उन्‍होंने आईआईएम को छोड़कर दिल्‍ली के एक संस्‍थान से एमबीए किया। उद्यमी बनने का सपना किया पूरा सुरश्री हमेशा से उद्यमी बनना चाहती थीं। उनका फैमिली बिजनस है। उनकी मां नाशिक में सुरश्री के नाम पर ही साड़ी स्‍टोर चलाती हैं। अपना वेंचर शुरू करने के लिए सुरश्री की एक निवेशक से बात भी हो गई थी। हालांकि, पहली मुलाकात के बाद वह सुरश्री से दोबारा कभी नहीं मिले। शायद उन्‍हें लगा कि सुरश्री बिजनस के लिए 'फ‍िज‍िकली फिट' नहीं हैं। लेकिन, सुरश्री इस बात से निराश नहीं हुईं। नौकरी करते हुए वह लगातार थोड़ी-थोड़ी बचत कर रही थीं। कुछ साल बाद वह अपना वेंचर शुरू करने के लिए तैयार थीं। उन्‍होंने Yearbook Canvas नाम की कंपनी शुरू कर दी। 2018 में बनाई थी कंपनी इस कंपनी की नींव 2018 में रखी गई थी। कुछ ही सालों में यह बेहद सफल हो गई। यह कंपनी शिक्षण संस्‍थानों और कॉरपोरेट्स की सोशल नेटवर्क, इयरबुक और मर्चेंडाइज को बनाने में मदद कर रही है। अपने वेंचर के जरिये सुरश्री को-फाउंडर अभिनव के साथ देश में सबसे बड़ा एलुमिनी इकोसिस्‍टम बनाने की भी कोशिश कर रही हैं। उनके क्‍लाइंटों में आईएमएम अहमदाबाद (IIM Ahemdabad), एफएमएफ दिल्‍ली (FMS Delhi) और आईआईटी बॉम्‍बे (IIT Bombay) जैसे संस्‍थान हैं। उनकी योजना है कि वह 2023 तक अपनी वर्कफोर्स में 30 फीसदी तक जगह दिव्‍यांगों को जगह दें।

September 10th 2022, 11:04 pm

'लालू बिना चालू ई विपक्ष ना होई', नीतीश को फ्रंट पर कर बैक से बैटिंग कर रहे आरजेडी प्रमुख

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पटना: लगभग एक साल पहले भोजपुरी के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव ( Khesari Lal Yadav ) का एक गाना आया था। गाने के बोल थे ''। तब कहा जा रहा था कि उस वक्त विधान परिषद के चुनाव लड़ रहे अनिल सम्राट के लिए भोजपुरी गायक ने यह गाना गाया था। लेकिन इस गाने की प्रासंगिकता आज भी है। अगर ऐसा नहीं होता तो महागठबंधन की सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार ( Nitish Kumar ) बार-बार लालू यादव ( Lalu Yadav ) के पास नहीं जाते। बिहार में महागठबंधन की सरकार बने एक महीने हो गए। इस एक महीने में नीतीश कुमार, लालू यादव के पास 4 बार गए। मिले और सियासी रणनीति पर चर्चा की। बीजेपी विरोध के सबसे बड़े चेहरे हैं लालू एनडीए से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। नीतीश ने पटना-दिल्ली एक कर दिया है। बावजूद इसके एक बात तो साफ है कि विपक्ष को एकजुट करने में लालू यादव की भूमिका अहम हो गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नीतीश कुमार 22 दिन में चार बार लालू यादव से मिल चुके हैं। यही नहीं, दिल्ली जाने से पहले और लौटने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री ने लालू यादव से मुलाकात की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। दरअसल, लालू हों या नीतीश, दोनों एक ही समाज से आते है। यानी दोनों समाजवादी हैं और जेपी आंदोलन की उपज हैं। लालू शुरू से ही बीजेपी विरोध के सबसे बड़े चेहरे रहे हैं। नीतीश कुमार का मन समय-समय पर बदलता रहा है। कभी बीजेपी के साथ, तो कभी बड़का भैया के साथ। फिलहाल दोनों इन दिनों बीजेपी को रोकने में लगे हैं। 17 अगस्त से पहले लालू दिल्ली में थे। बीमारी का इलाज करा रहे थे। बिहार में पार्टी सत्ता में आई, तो लालू वापस पटना आ गए। तब से वे पटना में ही कैंप किए हुए हैं और लगातार पटना से लेकर दिल्ली तक की सियासत पर नजर बनाए हुए हैं। लालू के बिना नीतीश की सियास चाल संभव नहीं नीतीश कुमार जब से NDA से अलग हुए हैं, तब से बीजेपी के खिलाफ हैं। 2024 आम चुनाव में बीजेपी को रोकने का बीड़ा उठाया है। इस काम के लिए वे कांग्रेस समेत संपूर्ण विपक्ष का मेन फ्रंट बनाना चाह रहे हैं। सबसे पहले उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के साथ पटना में मीटिंग की। बैठक के माध्यम से नीतीश कुमार ने विपक्ष की गोलबंदी का मैसेज देने की कोशिश की। इसके बाद नीतीश कुमार दिल्ली पहुंच गए। सोमवार को दिल्ली जाने से पहले नीतीश कुमार ने राबड़ी आवास जाकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद से मुलाकात की। दोनों के बीच बातचीत हुई, फिर मुख्यमंत्री दिल्ली के लिए निकल गए। बताया जाता है कि पटना में रहकर लालू यादव ने दिल्ली में नीतीश कुमार के फील्डिंग तैयार की थी। राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं को फोन कर नीतीश कुमार के साथ मीटिंग सेट किया था। 3 दिन में 10 नेताओं से मुलाकात सीएम नीतीश कुमार पांच सितंबर को राहुल गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा के बेटे कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात की। दोनों की मुलाकात की तस्वीर भी जारी की गई। अगले दिन यानी 6 सितंबर को नीतीश कुमार सीताराम येचूरी और डी राजा के साथ बैठक की। उसी दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। मंगलवार को ही नीतीश कुमार ने हरियाणा के पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला, मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव से भी मिले। इसके बाद शरद यादव से भी नीतीश कुमार ने मुलाकात की। वहीं, सात सितंबर को नीतीश कुमार ने सीपीआई (माले) के राष्ट्रीय महसाचिव दीपांकर भट्टाचार्य के साथ भी बैठक की। इसके बाद विपक्ष के बड़े चहेरे और एनसीपी चीफ शरद पवार के साथ मुलाकात की। पीएम की रेस में नहीं... दिल्ली हो या पटना, नीतीश कुमार बार-बार एक ही बात कह रहे हैं वो पीएम की रेस में नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है, सियासत में जो कहा जाए, लोग इसका मतलब उल्टा समझते हैं। कुछ दिन पहले HAM प्रमुख जीतनराम मांझी के बयान से भी यही लगा। जब उन्होंने गया में कहा कि अब पीएम नीतीश कहिए। मतलब समझ जाइये। वहीं, लालू यादव एक दशक से तमाम तरह की राजनीतिक झंझावत झेले, जेल गए, लेकिन बीजेपी से नहीं मिले। साफ है नीतीश कुमार विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास जरूर कर रहे हैं लेकिन बैक से बैटिंग तो लालू यादव ही कर रहे हैं। साफ है नीतीश लाख कोशिश कर लें, लेकिन लालू के बिना विपक्ष चालू ना होई।

September 10th 2022, 10:56 pm

धरती पर चांद उतारने की तैयारी में UAE, दुबई में बनाएगा Moon Resort, लागत उड़ा देगी होश

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दुबई: संयुक्त अरब अमीरात अपनी गगनचुंबी और खूबसूरत इमारतों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इसी में से एक है बुर्ज खलीफा, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग दुबई आते हैं। लेकिन, अब इस शहर की खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ाने के लिए यूएई ने आसमान से चांद को धरती पर उतारने का फैसला किया है। इसके लिए पैसा पानी की तरह बहाने का प्लान भी तैयार किया जा चुका है। दरअसल, दुबई में एक विशाल बनाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सबसे पहले चंद्रमा के जैसे नजर आने वाली एक बिल्डिंग का निर्माण किया जाएगा। बाद में इसे एक रिसॉर्ट का शक्ल दिया जाएगा। इस रिसॉर्ट को बनाने में 4.2 बिलियन पाउंड (लगभग 38 हजार करोड़ रुपये) का खर्च आने की संभावना है। इस विचित्र और बेहद महंगी प्रोजेक्ट का काम जल्द ही शुरू किया जा सकता है। हर साल 25 लाख पर्यटकों को करेगा आकर्षित चंद्रमा के आकार के इस मेगा-रिसॉर्ट में आधुनिक सुख सुविधाओं के साथ एक नाइट क्लब और वेलनेस सेंटर भी बनाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि मून रिसॉर्ट हर साल 25 लाख मेहमानों को आकर्षित करने में सफल होगा। इसके लिए रिसॉर्ट की बिल्डिंग को विशाल आकार दिया जाएगा। चांद जैसे दिखने वाले गोले की परिधि 622 मीटर बनाने की योजना है। इससे एक साल में 1.5 बिलियन यूरो (13 हजार करोड़ रुपये) से अधिक की कमाई होने की संभावना है। मून शटल पर सवार होकर घूमेंगे मेहमान इस रिसॉर्ट में मेहमान मून शटल पर सवार होकर नजारों का लुफ्त उठा सकेंगे। यह मून शटल लोगों को रिसॉर्ट के आसपास एक ट्रैक पर घुमाने में सक्षम होगा। इसके ट्रैक को रिसॉर्ट के स्ट्रक्टर के सेंटर में गोल आकार में बनाया जाएगा। इस डिस्क के सबसे ऊपरी मंजिला का 23 फीसदी हिस्सा कैसीनो, 9 फीसदी नाइट क्लबों और चार फीसदी रेस्टोरेंट्स के लिए दिया जाएगा। इस रिसॉर्स के लग्जरी छत का एक तिहाई हिस्सा बीच क्लब, दूसरा एक तिहाई लैगून और चार फीसदी हिस्सा भव्य एम्फीथिएटर के लिए होगा। दुबई की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर पहुंचाएगा इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग मून वर्ल्ड रिसॉर्ट्स ने तैयार की है। इसके को फाउंडर सैंड्रा जी मैथ्यूज और माइकल आर हेंडरसन हैं। उन्होंने अरेबियन वर्ल्ड को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मून दुबई पर्यटन सहित यूएई की अर्थव्यवस्था के हर पहलू को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा। इसके अलावा यह टॉरगेटेड ट्रांसपोर्ट, कॉमर्स और रेजिडेंशियल रियल इस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंशियल सर्विसेज, एविएशन और स्पेस, एनर्जी, एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे कोर एरिया को टॉरगेट करेगा। पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का दावा इसके संस्थापकों ने यह भी कहा कि यह मध्य पूर्व औ उत्तरी अफ्रीका के क्षेत्र में सबसे बड़ी और सबसे सफल आधुनिक पर्यटन परियोजना साबित होगी। उन्होंने दावा किया कि यह दुबई में पर्यटकों के आने की तादाद को दोगुना कर देगी। हालांकि, इस परियोजना के निर्माण के लिए अथॉरिटी और प्लानर अभी भी सटीक स्थान की तलाश कर रहे हैं। इसे बनाने में चार साल का समय लग सकता है। ऐसे में पर्यटकों के लिए यह साइल 2026 या 2027 से पहले नहीं खोली जा सकती है।

September 10th 2022, 9:36 pm

कहानी सतीश की: गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते हैं, इनके होनहार आज बड़ी कंपनियों में करते हैं काम

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मथुरा : झुग्गी झोपड़ी में शिक्षा की अलख जागाने निकले समाज सेवी आज सैकड़ों बच्चों के जीवन को रौशन करने का काम कर रहे हैं। इस को चलाने वाले को न तो किसी तरह का अनुदान मिलता है और न ही सरकारी सहायता। खुले आसमान के नीचे चल रहे स्ट्रीट स्कूल में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। फिलहाल ये स्कूल समाज सेवी और दानियों के सहयोग से चल रहा है। सतीश के पढ़ाए बच्चे कई कंपनियों में हैं कार्यरत मथुरा में झोपड़ी झुग्गी में रहने वाले परिवारों के बच्चों को समाजसेवी सतीश शर्मा पिछले 14 वर्षों से शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खाने पीने की चीजें और कपड़े भी उपलब्ध कराते हैं। 15 बच्चों से शुरू किया चिल्ड्रन स्टीट स्कूल अब 300 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। एक लंबे अंतराल के बाद भी समाजसेवी सतीश शर्मा का हौसला बरकरार है। बच्चों की बढ़ती हुई संख्या शर्मा को एक ऊर्जा देती है। समाजसेवी और स्ट्रीट स्कूल संचालक सतीश शर्मा से जब बात की तो उन्होंने बताया कि 2008 में मैंने पहला स्कूल नवादा गांव में शुरू किया था। आज 3 सेंटर मथुरा में अलग-अलग संचालित हैं। सतीश शर्मा ने अपने पिताजी कैलाश चंद शर्मा को प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने यह भी बताया कि गरीबों के बच्चों को मेरे पिताजी नि:शुल्क शिक्षा देते थे। शिक्षा के लिए जागरूक करते थे। पिताजी की प्रेरणा से उन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और आज कई ऐसे छात्र हैं जो कि अच्छी-अच्छी कंपनियों में कार्यरत हैं। झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे सतीश शर्मा स्ट्रीट स्कूल संचालक ने बताया कि कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलता है। सामाजिक संस्थाएं बच्चों के लिए कुछ दान देना चाहती हैं तो वह स्वयं आकर दान दे जाती हैं। किसी का बर्थडे होता है या किसी की शादी की सालगिरह होती है तो वह अपने अनुसार बच्चों को बैग, जूते, चप्पल, बुक और स्टेशनरी आदि का सामान दान दे जाता है। उसी से बच्चों का भरण पोषण और शिक्षा का कार्य चल रहा है। एक दर्जन वॉलिंटियर्स बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा सामाजिक कार्य की भावना से देते हैं। बच्चों को शिक्षा देने में जो भी वॉलिंटियर्स लगे हैं वह सेवा भावना से लगे हुए हैं। कोई भी पैसा वे नहीं लेते हैं। 15 बच्चों से शुरू किया था स्कूल स्ट्रीट सतीश शर्मा ने जब स्ट्रीट स्कूल की शुरुआत की तो महज उनके पास 15 बच्चे थे। वह अकेले ही इन बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का कार्य करते रहे। मन में बच्चों को पढ़ाने की लगन को देख कारवां बनता चला गया और आज एक बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और छोटे बच्चे यहां शिक्षा नि:शुल्क ग्रहण करते हैं। झोपड़ी झुग्गियों में रहने वाले बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट हैं सामाजिक कार्यकर्ता सतीश शर्मा सतीश शर्मा मूल रूप से नौहझील के गांव पचहैरा के रहने वाले हैं। सतीश शर्मा की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई। हाई स्कूल और इंटर क्षेत्र में ही बने इंटर कॉलेजों से हुई। मथुरा के बीएसए डिग्री कॉलेज से उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। आगरा दयालबाग से सतीश शर्मा इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कर चुके हैं। इतना ही नहीं आगरा विश्वविद्यालय से एमए सोशलॉजी की पढ़ाई भी कर चुके हैं। सतीश शर्मा को ऐसे सैकड़ों मेडल समाज सेवा के लिए मिल चुके हैं। बता दें कि समाजसेवी इन तीनों स्कूलों में करीब 300 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं। डेढ़ सौ परिवार के बच्चे इन स्कूल में पढ़कर शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। रिपोर्ट- निर्मल राजपूत

September 10th 2022, 9:30 pm

हरिद्वार: पंचायत चुनाव से पहले नेता ने बंटवाई 'जहरीली' शराब, पीकर दो गांवों के सात लोगों की मौत

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हरिद्वार: पंचायत चुनाव के एक उम्मीदवार द्वारा कथित रूप से बांटी गई शराब पीने से शनिवार को सात लोगों की मौत हो गई। दो गांवों के कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने बताया कि घटना के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि पथरी थाने के एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है। घटना से प्रभावित दोनों गांव... फूलगढ़ और शिवगढ़- इसी थाना क्षेत्र के तहत आते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती जांच में पीने को मौत की वजह नहीं बताया गया है। राज्य सरकार ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने के आदेश दिये हैं। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र यादव ने कहा कि शराब की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता करने का भी प्रयास किया जा रहा है कि मौत की वजह जरूरत से ज्यादा शराब पीना तो नहीं है। यादव ने कहा कि ऐसी सूचना है कि पंचायत चुनाव के उम्मीदवार ने ग्रामीणों को शराब बांटी थी, उम्मीदवार की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि घटना के संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और पथरी थाने के एसएचओ रवीन्द्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है। हरिद्वार के जिला मजिस्ट्रेट विनय शंकर पांडेय के हवाले से मुख्यमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि इस मामले में अवैध शराब का सेवन मौत का कारण नहीं है। पांडेय ने कहा कि मौत के सही कारण का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट आने पर चलेगा।

September 10th 2022, 9:30 pm

9/11 : आतंक ने अमेरिका के सीने पर ऐसा जख्‍म दिया, जब तक दुनिया है तब तक कायम रहेगी टीस

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नई दिल्ली: इतिहास में 11 सितंबर का दिन एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के सीने पर इस दिन हुए घातक आतंकी हमले ने एक ऐसा जख्म दिया, जिसकी टीस रहती दुनिया तक कायम रहेगी। 2001 को 11 सितंबर के दिन आतंकवादियों ने यात्री विमानों को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध वर्ल्ड ट्रेड टॉवर और पेंटागन को निशाना बनाया। इसे अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े आतंकी हमले के तौर पर देखा जाता है। इसके अलावा 11 सितंबर की तारीख को स्वामी विवेकानंद के एक चर्चित भाषण से जोड़कर देखा जाता है, जो उन्होंने 1893 को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर यह बुराइयां न होतीं तो दुनिया आज से कहीं बेहतर जगह होती। देश दुनिया में 11 सितंबर की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:- 1893 : अमेरिका के शिकागो क्षेत्र में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता और हिंसा पर ऐतिहासिक भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने सभी धर्मों की अच्छाइयों का भी जिक्र किया। 1895 : महान स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता विनोबा भावे का जन्म। 1906 : महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह आन्दोलन आरंभ किया। 1919 : अमेरिकी नौसेना ने होंडुरास पर आक्रमण किया। 1922 : आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में सचित्र दैनिक समाचार पत्र द सन न्यूज पेक्टोरियल की शुरूआत। 1939 : इराक और सऊदी अरब ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1948 : ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख नेता और 'मुस्लिम लीग' के अध्यक्ष मुहम्मद अली जिन्ना का निधन। 1951 : फ्लोरेंस चैडविक ने इंग्लिश चैनल तैरकर पार किया। उन्हें इंग्लैंड से फ्रांस पहुंचने में 16 घंटे और 19 मिनट लगे। ऐसा करने वाली वह पहली महिला। 1961 : विश्व वन्यजीव कोष की स्थापना। 1968 : एयर फ्रांस का विमान नाइस के निकट दुर्घटनाग्रस्त। हादसे में 89 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्यों की मौत। 2001: अमेरिका में आतंकवादियों ने विमान अपहरण कर न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड टावर की दो इमारतों, वर्जीनिया स्थित पेंटागन और पेन्सिलवेनिया पर हमला किया। 2003 : चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा से मिले। 2005 : गाजा पट्टी में 38 साल से जारी सैन्य शासन समाप्त करने की घोषणा। 2019 : अमेरिका ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सरगना नूर वली महसूद पर प्रतिबंध लगाया और उसे वैश्विक आतंकवादी करार दिया। 2020 : सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का निधन।

September 10th 2022, 9:30 pm

इस बार दिल्‍ली से रूठा मॉनसून... औसत से 38% कम बारिश हुई, सर्दी भी कुछ देर से आएगी

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नई दिल्ली: इस साल राजधानी में लोगों को गर्मी अधिक सता रही है। लेकिन आकलन बताता है कि मॉनसून सीजन में गर्मी का रेकॉर्ड नहीं टूटा है। दरअसल, इस अहसनीय गर्मी की वजह यह है कि मॉनसून सीजन में बारिश काफी कम होने से लंबे समय से लोग उमस भरी चिपचिपी गर्मी सह रहे हैं। सितंबर आते-आते लोग गर्मी से परेशान हो गए हैं। मॉनसून सीजन में दिल्ली और आसपास के इलाकों में अब तक औसत से 38% कम बारिश हुई है। जानकारों का कहना है कि ऐसे में सर्दियों की शुरुआत भी कुछ देरी से होगी। स्काईमेट के महेश पलावत के अनुसार, 15 नवंबर के आसपास सर्दियों की आहट शुरू होती है। इस बार दिल्ली-एनसीआर की कम बारिश से लग रहा है कि सर्दियां देर से आएंगी। जिस तरह बारिश का सूखा दिख रहा है, ऐसे में गर्मी से राहत की बड़ी उम्मीद भी नहीं दिखती है। महेश पलावत के अनुसार, 12 और 13 सितंबर को राजधानी के कुछ हिस्सों में बारिश होगी। इससे तापमान में दो से तीन डिग्री की कमी आ सकती है। इससे ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि तापमान में कमी तभी संभव है, जब तेज बारिश हो और वह भी राजधानी और आसपास के हर हिस्से में हो। इस मॉनसून में 90% बारिश तो छिटपुट इलाकों में हुई है। तापमान में कमी तभी संभव है, जब तेज बारिश हो और वह भी दिल्ली के हर हिस्से में हो। इस मॉनसून में 90 प्रतिशत से अधिक बारिश ऐसी हुई है, जो स्थानीय जगहों पर हुई है। इसलिए उस बारिश ने गर्मी से राहत दिलाने का काम नहीं किया। 9 में से 6 जिलों में 30% कम बारिशआईएमडी ने राजधानी को 9 जिलों में बांटा है। इस मॉनसून में 9 में से 6 जिलों में बारिश 30 प्रतिशत से कम हुई है। दो जिलों उत्तर पूर्वी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली में तो बारिश की कमी 60 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है। सामान्य परिस्थिति में मॉनसून की विदाई देश से 17 सितंबर से शुरू हो जाती है, जबकि दिल्ली में मॉनसून 20 सितंबर को विदा होता है। इस बार अभी तक मॉनसून के जाने की कोई संभावना व्यक्त नहीं की गई है। एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की वजह से मॉनसून जाने के आसार हाल-फिलहाल के दिनों में नहीं हैं। लगातार उमस भरी गर्मी में रहने का क्या होता है नतीजाउमस भरी गर्मी की वजह से वेट बल्ब टेंपरेचर बढ़ता है। वेट बल्ब टेंपरेचर अधिकतम तापमान और नमी के स्तर को मिलकर बनता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सामान्य आदमी के लिए 32 डिग्री वेट बल्ब में रहना काफी अहसनीय हो जाता है। सामान्य व्यक्ति 45 डिग्री तापमान सह सकता है, बशर्ते हवा में नमी कम हो। लेकिन 35 डिग्री तापमान में नमी का स्तर 50 से 55 डिग्री तक हो तो व्यक्ति के लिए ऐसा मौसम असहज हो जाता है। ऐसे मौसम में व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता के साथ इम्युनिटी कम होती है। व्यक्ति को गुस्सा अधिक आने लगता है। सांस की समस्या के साथ स्किन प्रॉब्लम होने लगती है।

September 10th 2022, 9:30 pm

दिल्‍ली नगर निगम में अब अधिकतम 250 वार्ड, 42 SC के लिए रिजर्व, केंद्र ने जारी की अधिसूचना

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नई दिल्‍ली: दिल्‍ली नगर निगम (MCD) में अधिकतम 250 सीटें होंगी। केंद्र सरकार ने शनिवार देर रात अधिसूचना जारी की। इसके अनुसार, एकीकृत नगर निगम की अधिकतम 250 सीटों में से 42 अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व रहेंगी। यह आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है। इससे पहले एमसीडी तीन अलग-अलग निगमों में बंटा था जिसमें कुल मिलाकर 272 वार्ड थे। केंद्र ने तीनों निगमों को फिर से एक करने का फैसला किया। उसके बाद पहली बार दिल्‍ली में निकाय चुनाव होंगे। नगर निगम वार्डों के परिसीमन के लिए जुलाई में तीन सदस्‍यीय आयोग बना था। बीजेपी ने कहा था कि इससे निकाय चुनाव का रास्‍ता प्रशस्‍त होगा। वहीं, आम आदमी पार्टी का आरोप था कि बीजेपी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार एमसीडी चुनाव टालने के लिए दांव चल रही है। कांग्रेस ने AAP और बीजेपी दोनों पर चुनाव टालने का आरोप मढ़ा। मई में एक हुए थे तीनों नगर निगमकेंद्र सरकार ने मई 2022 में राजधानी के नगर निकायों को मिलाकर नया एकीकृत दिल्ली नगर निगम बनाया था। 19 मई को, केंद्र ने दिल्ली के तीन नगर निकायों के विलय के लिए एक अधिसूचना जारी की, क्योंकि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का कार्यकाल 18 मई को समाप्त हो गया, जबकि उत्तरी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी डीएमसी ने क्रमश: 19 और 22 मई को कार्यकाल पूरा कर लिया।

September 10th 2022, 9:30 pm

राज्यसभा के लिए जम्मू-कश्मीर से गुलाम अली मनोनीत, गुर्जर मुस्लिम समुदाय से है नाता

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के गुर्जर मुस्लिम समुदाय के को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। यह संभवत: पहली बार है, जब क्षेत्र के गुर्जर मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति को मनोनीत सदस्य के रूप में उच्च सदन में भेजा गया है। केंद्र सरकार के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने से पहले इस समुदाय का विधायी निकायों में बहुत कम प्रतिनिधित्व था। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है क‍ि भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के सेक्‍शन (एक) के सब सेक्‍शन (ए) की ओर से म‍िली शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जो उसी अनुच्छेद के सेक्‍शन (3) में शामिल है, राष्ट्रपति एक मनोनित सदस्य के र‍िटायर होने से खाली हुई जगह को भरने के लिए गुलाम अली को राज्यसभा के लिए नामित करती हैं। इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने से पहले इस समुदाय का विधायी निकायों में बहुत कम प्रतिनिधित्व था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद-370 को निरस्त कर दिया था और तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था। अनुच्छेद-370 में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया था।

September 10th 2022, 5:54 pm

सचिन तेंदुलकर की अगुवाई में स्टुअर्ट बिन्नी ने गेंदबाजों का उतारा बुखार, इंडिया लीजेंड्स ने साउथ अफ्

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कानपुर: स्टुअर्ट बिन्नी के बेहतरीन अर्धशतक और राहुल शर्मा के तीन विकटों से रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज के पहले मैच में इंडिया लीजेंड्स ने साउथ अफ्रीका लीजेंड्स को 61 रन से हरा दिया। इस मैच में इंडिया लीजेंड्स के कप्तान सचिन तेंदुलकर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। टीम ने निर्धारित 20 ओवर के खेल में 4 विकेट के नुकसान पर 217 रन का स्कोर खड़ा किया जिसके जवाब में साउथ अफ्रीका लीजेंड्स की टीम अपनी पारी में 9 विकेट पर 156 रन ही बना सकी। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में खेला गया। मैच में भारत के लिए सचिन तेंदुलकर और नमन ओझा ने पारी की शुरुआत की थी और दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 46 रनों की साझेदारी हुई। इस दौरान सचिन 16 रन बनाकर आउट हुए जबकि ओझा ने 21 रनों की पारी खेली। इसके बाद बल्लेबाजी के सुरेश रैना आए और उन्होंने स्टुअर्ट बिन्नी के साथ मिलकर पारी को संभला। हालांकि रैना 22 गेंद में 33 रन बनाकर आउट हो गए। रोड सेफ्टी में रैना का यह डेब्यू मैच था। वहीं बिन्नी ने एक छोड़ से बल्लेबाजों की खबर लेना जारी रखा। बिन्नी अंत तक नाबाद रहते हुए 42 गेंद में 82 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 6 छक्के और पांच चौके भी लगाए। बिन्नी के अलावा बल्लेबाजी में टीम के लिए यूसुफ पठान ने दमदार खेल दिखाया। उन्होंने चार छक्के और एक चौके की मदद से 15 गेंद में 35 रनों की तूफानी पारी खेली। इसके अलावा युवराज सिंह सिर्फ 6 रन बनाकर आउट हुए। इस दौरान गेंदबाजी में साउथ अफ्रीका लीजेंड्स के लिए जोहान वैन डेर वाथो ने सबसे अधिक दो विकेट लिए जबकि मखाया नतीनी और एडी ली ली को एक-एक सफलता हासिल हुई। इंडिया लीजेंड्स के द्वारा दिए 218 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीकी एंड्रयू पुटिक और मोर्ने वैन वायको के लिए सधी हुई शुरुआत की। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 43 रनों की साझेदारी हुई। पुटिक ने 23 और मोर्ने वैन 26 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कप्तान जोंटी रोड्स ने 27 गेंद में 38 रनों का योगदान दिया। हालांकि इनके अलावा और कोई साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज कमाल नहीं दिखा सके। वहीं भारत की तरफ से गेंदबाजी में टीम के लिए सबसे अधिक राहुल शर्मा ने तीन विकेट हासिल किए। इसके अलावा मुनाफ पटेल और प्रज्ञान ओझा ने भी दो-दो विकेट लिए जबकि इरफान पठान और युवराज सिंह ने भी एक-एक विकेट लिया।

September 10th 2022, 5:54 pm

क्या गिलहरी भी उड़ती है? इनके किचन का प्लान जान हैरान रह जाएंगे

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नई दिल्ली: छोटी सी, प्यारी सी, नन्ही सी गिलहरी आपने नीम के पेड़ पर चढ़ती शायद देखी होगी। गांवों से जुड़े लोगों के लिए इसमें कोई एडवेंचर नहीं। लेकिन शायद कम लोगों को पता होगा कि गिलहरी उड़ती भी है? जी हां, 200 प्रजाति की कुल तीन तरह की गिलहरी दुनिया में पाई जाती है। इनकी शारीरिक संरचना, आकार, आदतों और व्यवहारों में काफी अंतर होता है। जमीन पर चलने वाली गिलहरी, पेड़ पर रहने वाली गिलहरी और तीसरी होती है उड़ने वाली गिलहरी। आज 'जंगल न्यूज' की इस कड़ी में बात इन्हीं उड़ने वाली गिलहरियों की। गिलहरी स्तनधारी जीव है। जानकार बताते हैं कि अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर गिलहरी हर महाद्वीप में पाई जाती हैं। इन्हें चूहे की बिरादरी का कुतर कर खाने वाला जानवर कह सकते हैं। ये बेहतरीन प्लानर होती हैं। इसे यूं समझिए कि जब ठंडी का मौसम आने वाला होता है तो ये खाना इकट्ठा करना शुरू कर देती हैं और अपने जीवन को बचाने की रणनीति के तहत अलग-अलग जगहों पर खाना स्टोर करती हैं। इन्हें काफी इंटेलिजेंट जानवर माना जाता है, ये दूसरी गिलहरियों से संवाद करने के लिए अलग-अलग आवाज निकालती हैं। इन्हें मिर्च, लहसुन और काली मिर्च की गंध पसंद नहीं है। उड़ने वाली गिलहरी से पहले यह जान लीजिए अपने देश में पुदुचेरी का स्टेट एनिमल गिलहरी ही है। उड़ने वाली गिलहरी जिन लोगों ने नहीं देखी है, उन्हें यह समझना जरूरी है कि तकनीकी रूप से वे उड़ती नहीं है बल्कि उछलती या जंप करती हैं। भारत सहित दुनिया के अनेक हिस्सों में ऐसी गिलहरियां पाई जाती हैं जो उड़ने वाले सापों की तरह उड़ती हैं। वह अपनी स्पीड और पोजीशन को सेट कर सकती हैं। दो साल पहले 2020 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी के जंगल में दुर्लभ प्रजाति की गिलहरी देखी गई थी। इन्हें विलुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया है। अपने देश में उड़न गिलहरी भूरे रंग की पाई जाती है और ऊन की तरह दिखाई देती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इन उड़न गिलहरियों के आगे और पीछे के पंजों के बीच एक झिल्ली होती है। जब ये एक जगह से दूसरे जगह कूदने की कोशिश करती हैं तो झिल्ली किसी पैराशूट की तरह खुल जाती है। देखने में ऐसा लगता है जैसे ग्लाइडर उड़ रहा है। बताते हैं कि ये एक बार में 40 फीट तक उड़ सकती हैं। गिलहरियों को बादाम, बीज, फल, हरी सब्जियां पसंद हैं। कुछ गिलहरियां मांस भी खाती हैं। ये कीडे़, अंडे, छोटी चिड़िया को भी खा सकती हैं।

September 10th 2022, 5:54 pm

तब तो राजस्थान का नाम कर्तव्यस्थान कर दीजिए... मोदी सरकार पर थरूर का तीखा तंज

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नई दिल्ली: राजपथ का नाम बदल कर कर्तव्यपथ करने को लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार पर तंज कसा है। शनिवार को उन्होंने पूछा कि क्या सभी राजभवनों का नाम बदल कर कर्तव्य भवन नहीं कर दिया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि राजस्थान का नाम बदल कर कर्तव्यस्थान कर दिया जाना चाहिए। थरूर ने ट्वीट किया, ‘अगर राजपथ का नाम बदल कर कर्तव्यपथ कर दिया गया है, तो क्या सभी राजभवनों का नाम बदल कर कर्त्तव्य भवन नहीं कर दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘यहीं क्यों रुकें। राजस्थान का नाम बदल कर कर्तव्यस्थान कर दीजिए।’ दरअसल, हाल में सरकार ने राजपथ का नाम बदल कर कर्तव्यपथ कर दिया है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी शुक्रवार को इसी तरह का प्रश्न करते हुए ट्वीट किया था, ‘क्या सभी राजभवनों को अब कर्तव्य भवन के तौर पर जाना जाएगा।’ शनिवार को महुआ ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘इस बीच, पश्चिम बंगाल के नए भाजपा प्रभारी कर्तव्यधानी एक्सप्रेस से सियालदह तक की यात्रा में कर्तव्य कचौरी का आनंद ले सकते हैं, उसके बाद कर्त्तव्यभोग का स्वाद ले सकते हैं। स्वादिष्ट।’ भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के पूर्व मंत्री मंगल पांडे को पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी का प्रभारी नियुक्त किया है। इतिहासकार इरफान हबीब ने भी कर्तव्य पथ नाम पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि सड़कों या इमारतों का नाम बदलने से शासन नहीं बदलेगा। उन्होंने आरोप लगाया, 'भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजनीति कर रही है। इस सरकार को ऐसा कुछ करने की ‘सनक’ है जो यह छाप छोड़ सके कि यह एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया था जो एक ‘महान नेता’ था।'

September 10th 2022, 5:54 pm

PFI 'आतंकी' के साथ CM नीतीश के मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल

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पटना: राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में एक आतंकी मामले में आरोपी के साथ बिहार के एक मंत्री की कथित तस्वीर शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसका संबंध (PFI) से है। फोटो में दिख रहे मंत्री राष्ट्रीय जनता दल ( RJD ) के विधायक मोहम्मद इसराइल मंसूरी हैं, जो हाल ही में गया में विष्णुपद मंदिर के अंदर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जाने के बाद चर्चा में थे, जिसने एक बड़े विवाद को जन्म दिया। मंदिर के अधिकारी एक गैर-हिंदू व्यक्ति को मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं देते हैं। ताजा विवाद तब पैदा हुआ जब मुजफ्फरपुर जिले के मादीपुर के रहने वाले एक कोचिंग सेंटर संचालक मोहम्मद इकराम को तस्वीर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंसूरी के साथ खड़ा देखा गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( NIA ) ने हाल ही में फुलवारी शरीफ आतंकी मामले के सिलसिले में इकराम के कोचिंग सेंटर और मुजफ्फरपुर स्थित उनके घर पर छापा मारा था और कुछ दस्तावेज और एक लैपटॉप जब्त किया था। लैपटॉप की जांच के दौरान मंसूरी के साथ इकराम की फोटो मिली। वहीं, इस बाबत जब मोहम्मद इसराइल मंसूरी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि मेरे साथ कौन खड़ा है। जब मैं बिहार सरकार में मंत्री बना, तो बहुत सारे लोग मेरे साथ तस्वीरें क्लिक कर रहे थे। कई अन्य लोगों ने भी सेल्फी ली। उनमें से कुछ ने अनुरोध भी किया कि मैं उनके कंधों पर हाथ रखूं। मुझसे मिलने वाले हर शख्स की पहचान करना मेरे लिए संभव नहीं है। मेरा उससे कोई संबंध नहीं है।

September 10th 2022, 5:54 pm

हिंदू बनकर शादी, रेप के वीडियो से ब्लैकमेल, दिल्ली के इस वकील की करतूत जान उड़ जाएंगे होश

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नई दिल्ली: नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के ज्योति नगर इलाके में एक महिला ने वकील पर धर्म छिपाकर जबरन शादी करने का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि पहले जबरन रेप किया और अश्लील विडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। फिर जबरन शादी कर ली। इसके बाद मारपीट और अननेचरल सेक्स करता था। पीड़िता परेशान होकर मेरठ के पीजी में रहने लगी, जहां आरोपी भी पहुंच गया। पीड़िता ने बुधवार को ज्योति नगर थाने में शिकायत दी। पुलिस ने बंधक बनाकर मारपीट, छेड़छाड़, रेप, अननेचरल सेक्स, जान से मारने की धमकी समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया। आरोपी इरशाद अली खान उर्फ गुड्डू को ‌गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता ने पुलिस को क्या बताया पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह परिवार के साथ नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में रहती है। वो 2011 में एलएलबी करने के बाद इंटर्नशिप के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट गई थी। वहां आरोपी ने गुड्डू नाम बताकर दोस्ती कर ली। पहली बार 2012 में जबरन रेप किया। इसके बाद अश्लील विडियो दिखाकर ब्लैकमेल कर रेप करने लगा। अननेचरल सेक्स को अंजाम देता। आरोपी ने 2015 में खुद को पीड़िता के धर्म का बताकर जबरन शादी कर ली। शादी के बाद पीड़िता को उसके धर्म का पता चला। इस बारे में बात करने पर बुरी तरह पीटता था। परिजन पीड़िता को जबरन अपने घर ले गए, लेकिन आरोपी दोबारा उसे अपने घर ले आया। आरोपी के अत्याचार जानिए आरोपी ने पीड़िता का जीवन और नरक बना दिया। कमरे में बंद कर पीटता था। कई बार पीड़िता ने पुलिस से शिकायत दी, लेकिन आरोपी ने अपने वकील होने का फायदा उठाकर शिकायत को वापस करवा दिया। परेशान होकर पीड़िता ‌किसी को बिना कुछ बताए 25 अक्टूबर 2021 को मेरठ चली गई। यहां एक पीजी में रहने लगी। आरोप है कि यहां भी उसने ढूंढ निकाला। दोस्तों के साथ मेरठ आकर पीछा करने लगा। मार्च 2022 में पीड़िता ने डाक से पुलिस को शिकायत दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पीड़िता ने दिल्ली आकर बुधवार को पुलिस से शिकायत की। तफ्तीश के बाद पुलिस ने आरोपी इरशाद अली उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार कर लिया।

September 10th 2022, 5:54 pm

2024 करीब और भाजपा की मुसीबत बढ़ा रहे गवर्नर मलिक? अब क्या करेगा भगवा दल

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नई दिल्ली : वो कहते हैं मेरा दिल्ली में डेढ़ कमरे का मकान है। इस्तीफा हमेशा मेरी जेब में रहता है। मेरे पास कुछ नहीं है। अगर कुछ होता तो ईडी, इनकम टैक्स आ जाती। लेकिन हां, रिटायर होने के बाद औरों की जांच कराउंगा। मेरे पास बहुत मसाला है। राज्यपाल का कोई काम नहीं होता, वो बस दारू पीते हैं और गोल्फ खेलते हैं। प्रधानमंत्री को घमंडी बता चुके हैं। उनमें पीएम मोदी से पंगा लेने का जज्बा है। वे सिर्फ पांच-कुर्ते पजामे के साथ चले जाने की बात करते हैं। सरकार के तीन कृषि कानूनों का खुलकर विरोध के साथ ही अग्निपथ योजना को शर्मनाक बता चुके हैं। इन सब के बावजूद वह मेघालय के राज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। यह तो अब स्पष्ट है कि बात जाट नेता सत्यपाल मलिक की हो रही है। वह मलिक जिन्हें पार्टी ने बिहार, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, गोवा के बाद मेघालय का राज्यपाल बनाया। आखिर ऐसा क्या हो गया है कि वह लगातार अपनी पार्टी के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। वह खुलकर अडाणी की मुखालफत करते हैं। पीएम मोदी को उनका दोस्त बताते हैं। कई मौकों पर अपनी ही पार्टी की सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं। रविवार को राजस्थान पहुंचे सत्यपाल मलिक ने कहा कि मुझे भी इशारे किए गए थे कि मैं सच बोलना बंद कर दूं तो मुझे उप-राष्ट्रपति बना देंगे लेकिन मैंने कह दिया, मैं ऐसा नहीं कर सकता। अब जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव करीब हैं क्या पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है। आखिर ऐसा क्या है कि बीजेपी की तरफ से उनके खिलाफ किसी तरह का कोई ऐक्शन नहीं हो रहा है। जाटों को नाराज नहीं करना चाहती सरकारराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसानों के मुद्दे पर सरकार पहले ही बैकफुट पर है। वहीं, सत्यपाल मलिक खुलकर किसानों का साथ दे रहे हैं। ऐसे में यदि पार्टी की तरफ से उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई होती है तो इससे जाट बीजेपी से नाराज हो सकते हैं। यूपी में बीजेपी भले ही सत्ता में वापसी करने में कामयाब रही हो लेकिन जाटो की पार्टी के प्रति नाराजगी दूर नहीं हुई है। ऐसे में पार्टी सीधे तौर पर सत्यपाल मलिक पर किसी तरह का ऐक्शन लेकर एक महत्वपूर्ण तबके की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। हालांकि, पार्टी ने जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति बना कर जाटों की नाराजगी को कम करने का प्रयास तो जरूर किया है। लेकिन इसका असर कितना हुआ है यह आने वाले चुनाव में पता लगेगा। राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। वहां भी जाट वोट काफी निर्णायक हैं। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है। समाजवाद से प्रभावित होकर राजनीति की शुरुआतजाट परिवार से आने वाले सत्यपाल मलिक के पूर्वज हरियाणा के हैं, लेकिन उनकी पैदाइश वेस्ट यूपी की है। सत्यपाल मलिक देश की राजनीति की लगभग हर विचारधारा के हिस्सेदार रहे हैं। मलिक ने लोहिया के समाजवाद से प्रभावित होकर बतौर छात्र नेता अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। मलिक ने 70 के दशक में कांग्रेस विरोध की बुनियाद पर यूपी में नई ताकत बनकर उभर रहे चौधरी चरण सिंह का साथ पकड़ा। चरण सिंह कहते थे कि इस नौजवान में कुछ कर गुजरने का जज्बा दिखता है।’ उन्होंने 1974 में भारतीय क्रांति दल से सत्यपाल मलिक को टिकट दिया। 28 साल की उम्र में सत्यपाल विधायक चुन लिए गए। बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। 1984 में मलिक राज्यसभा पहुंच गए। बाद में वीपी सिंह के कहने पर जनता दल में शामिल हो गए। इसके बाद सांसद चुने गए। वीपी सिंह सरकार में मंत्री भी रहे। 2004 में मलिक बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह के खिलाफ ही बागपत से चुनाव लड़ा। हालांकि, मलिक को हार का सामना करना पड़ा। 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद पार्टी ने इन्हें बिहार का राज्यपाल बना दिया। इसके बाद ये जम्मू-कश्मीर, गोवा, और फिर मेघालय के राज्यपाल हैं। पांच मिनट के भीतर पीएम से लड़ाई सत्यपाल मलिक केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ भी खुल कर विरोध जता चुके हैं। महीने उन्होंने कहा था कि सरकार ने पिछले साल दिसंबर में किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। जनवरी में मलिक ने कहा था कि जब वह किसानों के मुद्दे पर मोदी से मिलने गए, तो वह ‘अहंकार’ में थे। उनकी 5 मिनट के भीतर प्रधानमंत्री से लड़ाई हुई थी। मलिक का कहना है कि (सरकार ने) किसानों से आधा-अधूरा समझौता कर उन्हें (धरने से) उठा दिया गया, लेकिन मामला जस का तस है। इस साल जून में ही सत्यपाल मलिक ने कहा था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून नहीं बना तो देश में किसानों की सरकार के साथ बहुत भयानक लड़ाई होगी। उन्होंने कहा था कि धरना खत्म हुआ है, आंदोलन खत्म नहीं हुआ। उन्होंने कहा था कि मेरे तो 4 महीने रह गए हैं (राज्यपाल के पद पर)... मैं तो छोड़कर उसी (एमएसपी को लेकर किसानों के आंदोलन में) में कूद पडूंगा। सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब किसान आंदोलन कर रहे थे, तो वह प्रधानमंत्री के पास गये थे। उन्होंने कहा था कि देखिये साहब इनके (किसानों के) साथ बहुत ज्यादती हो रही है। मलिक ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सुझाव दिया कि इनको कुछ ले देकर निपटा दीजिये तो उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) कहा चले जायेंगे... क्यों चिंता करते हो... मैंने कहा, साहब आप इनको जानते नहीं हो... ये तब जायेंगे जब आप (प्रधानमंत्री) चले जायेंगे। सतपाल मलिक ने कहा कि जब कोई कुतिया भी मरती है तो शोक संदेश जाता है। 700 किसान मर गए लेकिन किसी के लिए शोक संदेश नहीं दिया। 3 साल के लिए कौन सीने पर गोली खाएगा सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार की तरफ से सेना भर्ती की नई 'अग्निपथ’ योजना का भी विरोध किया था। मलिक का कहना था कि सरकार को इस योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए। मलिक ने कहा था कि छह माह जवान ट्रेनिंग लेगा, छह माह की छुट्टी और तीन साल की नौकरी करने के बाद जब वह घर लौट आएगा तो उसका ब्याह भी नहीं होगा। राज्यपाल मलिक ने कहना था कि अग्निपथ योजना जवानों के खिलाफ है, यह उनकी उम्मीदों के साथ धोखा है। मलिक ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर मिलने का वक्त दें तो उनके साथ इस पर चर्चा करेंगे। मलिक का कहना था कि यह योजना बहुत शर्मनाक है, युवाओं को नीचा दिखाएगी। इस योजना से युवाओं का कोई लाभ नहीं होने वाला है। मलिक ने यह भी कहा था कि सरकार चाहे तो पूरे देश पर रोलर चलवा सकती है। मगर यह योजना गलत है और इसे सरकार को वापस लेना चाहिए। मलिक का कहना है कि तीन साल के लिए कौन अपने सीने पर गोली खाएगा। एक मिनट में कुर्सी छोड़ दूंगासत्यपाल मलिक पहले ही कह चुके हैं कि मैं एक मिनट में कुर्सी छोड़ दूंगा अगर जिसने मुझे बनाया है वह कह दे। सेवानिवृत्ति के बाद की योजना के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सत्यपाल मलिक यह कह चुके हैं कि मेरा इरादा राजनीति करने और चुनाव लड़ने का नहीं है। किसानों और जवानों के लिए जहां जरूरत होगी संघर्ष करुंगा। मलिक कश्मीर पर किताब लिखने की बात भी कह चुके हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या सेवानिवृत्त होने के बाद केन्द्र सरकार के खिलाफ खुलकर आंदोलन की अगुवाई करेंगे? मलिक ने कह चुके हैं कि बात सरकार के विरोध की नहीं है, मैं जो मुद्दा उठा रहा हूं, वह अगर मान लिया जाये तो वह सरकार के पक्ष की ही बात होगी। एक कार्यक्रम के दौरान मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री से अगर मैं आज लड़ गया तो वो यही बूता था कि मेरे पास कुछ नहीं था। मैं श्रीनगर के दो मामलों के लिए प्रधानमंत्री के पास गया था। दोनों गलत थे, कैंसिल कर दिए। मुझे डेढ़-डेढ़ सौ करोड़ रुपए रिश्वत की पेशकश हुई थी। मुझे कुछ नहीं चाहिए। पांच कुर्ते-पायजामे में आया था, उसी में चला जाउंगा। मलिक कह चुके हैं कि मैं दिल्ली में डेढ़ कमरे के मकान में रहता हूं। इसलिए मैं किसानों के मुद्दे पर मोदी से पंगा ले सकता हूं।’ अडानी पर भी साधा था निशाना, पीएम से मांगा जवाबइस साल जून में ही सत्यपाल मलिक ने अडानी कंपनी पर निशाना साधते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री कुछ तो बतायें ये कैसे मालदार हो रहे हैं, जबकि लोग बबार्द हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इनको (कॉरपोरेट के लोगो) को कोई इज्जत मत दीजिये... इनको सेठ भी मत कहिये और जब तक इनपर हमला नहीं होगा तब तक यह क्लास रुकेगी नहीं... हम नीचे जाते रहेंगे ये ऊपर जाते रहेंगे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के एक दोस्त पानीपत में 50 एकड़ क्षेत्र में गोदाम बनाकर सस्ते भाव में गेहूं खरीदने का सपना पाले हुए हैं। 22 अगस्त को हरियाणा के नूंह में एक कार्यक्रम में सत्यपाल मलिक ने नरेंद्र मोदी सरकार को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एमएसपी लागू नहीं करने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दोस्त अडानी है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में अडानी एशिया का सबसे अमीर आदमी बन गया है। इसके इशारे पर ही सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अडानी को एयरपोर्ट, बंदरगाह, प्रमुख योजनाएं दी गई हैं...एक तरह से देश को बेचने की तैयारी है, लेकिन हम ऐसा न होने देंगे।' कश्मीर में आतंकवाद को लेकर सरकार पर निशानासत्यपाल मलिक ने पिछले साल अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मुद्दे पर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके राज्यपाल रहते श्रीनगर में तो क्‍या उसके 50-100 किमी के आसपास भी आतंकी नहीं फटक पाते थे। वहीं, अब राज्‍य में वो हत्‍याओं को अंजाम दे रहे हैं। मलिक का बयान कश्‍मीर में आतंकी वारदातों पर अंकुश लगा पाने में बीजेपी सरकार की नाकामी पर सीधा हमला था। गोवा सरकार पर भी उठाए थे सवालगोवा का राज्‍यपाल रहते हुए मलिक ने कोविड के कुप्रबंधन का मुद्दा उठाया था। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार के एक नए राजभवन के निर्माण के फैसले पर भी आपत्ति जताई थी। इसके चलते सत्यपाल मलिक और गोवा के मुख्यमंत्री के बीच संबंध खराब हुए थे। इसे देखते हुए ही उन्‍हें मेघालय का राज्‍यपाल बनाया गया था। पिछले साल अक्टूबर में मलिक ने न केवल गोवा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे बल्कि यह भी कहा था कि इस वक्त सच तो कोई भी बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है।

September 10th 2022, 5:54 pm

महाराष्ट्र सरकार ने ऐसी क्या लापरवाही की, अब देना होगा 12000 करोड़

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नई दिल्ली : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महाराष्ट्र सरकार को ठोस और तरल अपशिष्ट का ठीक से प्रबंधन नहीं करने के लिए पर्यावरण मुआवजे के रूप में 12,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एनजीटी कानून की धारा 15 के तहत मुआवजा अपशिष्ट प्रबंधन में कमियों के कारण पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए आवश्यक है। पीठ में जस्टिस सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य सेंथिल वेल भी शामिल थे। पर्यावरण को हो रहे नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए निर्णय पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आदेश पारित किया, जिसमें अधिकरण को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों के क्रियान्वयन की निगरानी करने की आवश्यकता थी। पीठ ने कहा कि ‘‘पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए यह निर्णय आवश्यक हो गया है।’’ एनजीटी ने कहा कि दायित्व तय करना नुकसान की भरपाई के लिए महत्वपूर्ण है। पीठ ने कहा, ‘‘आवश्यक दायित्व तय किए बिना, यहां तक कि वैधानिक/ निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी केवल आदेश पारित करने से पिछले आठ वर्षों (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए) और पांच वर्षों (तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए) में कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा है।’ 1,200 करोड़ रुपये के मुआवजे का निर्धारण पीठ ने कहा कहा कि भविष्य में किसी भी तरह की क्षति को रोकने की आवश्यकता है, और पिछले नुकसान की भरपाई करनी होगी। एनजीटी ने तरल अपशिष्ट के निस्तारण में अंतर के संबंध में लगभग 10,840 करोड़ रुपये और गैर-उपचारित पुराने अपशिष्ट के संबंध में लगभग 1,200 करोड़ रुपये के मुआवजे का निर्धारण किया, तथा यह राशि कुल 12,000 करोड़ रुपये निर्धारित की। एक अलग खाते में राशि जमा करे पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुसार संचालित होने वाले एक अलग खाते में राशि जमा करे और क्षतिपूर्ति उपायों के लिए इस्तेमाल करे। सीवेज प्रबंधन के लिए नुकसान भरपाई के उपायों में सीवेज निस्तारण और उपयोग प्रणाली की स्थापना, पूर्ण क्षमता उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रणाली/ संचालन को उन्नत करना, मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में उचित तरीके से जल-मल निस्तारण तथा कीचड़ प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना शामिल है। 84 स्थान के लिए कदम उठाने होंगे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संदर्भ में एनजीटी ने कहा कि कार्य योजना में आवश्यक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ उन 84 स्थान के लिए कदम उठाने होंगे जिनकी अनदेखी की गई है। पीठ ने आदेश में कहा कि ‘बायोरेमेडिएशन/बायोमाइनिंग’ प्रक्रिया को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए, और ‘बायोमाइनिंग’ के साथ-साथ कम्पोस्ट प्लांट से जैविक अपशिष्ट का निपटारा निर्धारित निर्देशों के हिसाब से पूरा करना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि क्षतिपूर्ति योजना को समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाना चाहिए, और आगाह किया कि यदि उल्लंघन जारी रहा तो राज्य के खिलाफ अतिरिक्त हर्जाने पर विचार किया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘अनुपालन की जिम्मेदारी मुख्य सचिव की होगी।’’

September 10th 2022, 5:54 pm

मोदी सरकार किसान विरोधी, रोजगार पर फेल... शरद पवार बोले, संकट में है देश

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नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में आने वाले महीनों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भाजपा विरोधी ताकतों की एकता का आह्वान किया है। कहा गया है कि पार्टी प्रमुख शरद पवार इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दिल्ली में NCP की विस्तारित कार्य समिति को संबोधित करते हुए पवार ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ‘किसान विरोधी’ है और बेरोजगारी के मुद्दे से निपटने में भी ‘फेल’ रही है। उन्होंने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषियों की रिहाई पर भी भाजपा की आलोचना की। बिलकिस बानो केस पर घेरा पवार ने कहा, ‘मुझे आश्चर्य है कि प्रधानमंत्री महिलाओं की गरिमा को बनाए रखने की बात करते हैं और दो दिन बाद उनके गृह राज्य में भाजपा सरकार ने बिलकिस बानो और उनके परिवार पर अत्याचार करने वालों की सजा कम कर दी।’ एनसीपी की विस्तारित कार्य समिति ने पवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में फिर से चुना। वरिष्ठ नेता ने कहा कि किसान अपनी धान की फसल की अच्छी कीमत पाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन सरकार ने चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया और टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। देश गहरी पीड़ा में है... पवार ने कहा, ‘देश गहरी पीड़ा में है और हमें इन मुद्दों को हर मंच पर जोरदार तरीके से उठाना होगा।’ बैठक के दौरान पेश किए गए एक राजनीतिक मसौदा प्रस्ताव में भाजपा और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ने के लिए समान विचारधारा वाले दलों की एकता का आह्वान किया गया। राजनीतिक प्रस्ताव पर एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर पवार की सलाह लेते हैं और अनुभवी नेता आने वाले समय में राजनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बैठक को संबोधित करते हुए एनसीपी के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने पुरानी मानसिकता बनाए रखने और बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य को पहचानने में विफल रहने के लिए कांग्रेस की आलोचना की। गुजरात, हिमाचल में इसी साल चुनाव भाजपा शासित गुजरात और हिमाचल प्रदेश में दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि राजस्थान और कर्नाटक सहित नौ अन्य राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पवार के साथ बातचीत की है और वे भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी एकता पर जोर दे रहे हैं।

September 10th 2022, 5:54 pm

बिहार : कबाब मंत्री कौन है? लालू कनेक्शन भी जानिए, नीतीश के 'जनता राज' पर बरसे सुशील मोदी

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नील कमल, पटना : बिहार में लॉ एंड ऑर्डर का मसला सियासत के सेंटर में आ गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी के निशाने पर नीतीश कुमार हैं। उन्होंने कहा कि 'लालू के 'कबाब मंत्री' को पुलिस ने पीरबहोर थाने से छोड़ दिया। आरजेडी समर्थकों ने थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों की पिटाई की यही 'जनता राज' है? नीतीश कुमार सत्ता के लिए ऐसे दल से मिल गए, जिसके आधा दर्जन से ज्यादा विधायक हत्या, अपहरण, बलात्कर और भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में अभियुक्त या सजायाफ्ता हैं।' सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'जनता राज' वाली टिप्पणी पर कहा कि 'जहां कानून की नजर में वंछित अभियुक्त को कानून मंत्री बनाया गया, फिर उसे इस्तीफा देते ही गिरफ्तार करने के बजाय फरार होने का मौका दिया गया, वहां क्या 'जनता राज' हो सकता है?' ये कैसा 'जनता राज' है?- सुशील मोदी सुशील मोदी ने नीतीश कुमार और जेडीयू से सवाल किया है। उन्होंने कहा कि राजद विधायक रीतलाल यादव के गुर्गों का खनन विभाग के अधिकारियों को खुलेआम हत्या की धमकी देना क्या जनता राज है? सुशील मोदी ने कहा भ्रष्टाचार के मामले में सजा होने के बाद राजद विधायक अनिल सहनी की विधानसभा सदस्यता जाने वाली है। इससे पहले एके-47 बरामद होने के मामले में अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त हुई। नाबालिग छात्रा से बलात्कार मामले में राजद के राजबल्लभ यादव को भी विधायकी से वंचित होना पड़ा था। अब अरुण यादव ऐसे ही मामले में फरार बताए जा रहे हैं। सुशील मोदी ने कहा कि जो दल बलात्कारियों को बचाता हो, उसके समर्थन से चलने वाली सरकार को क्या जनता राज कहेंगे? 'जनता तो छोड़िए, पुलिस भी सुरक्षित नहीं' सम्राट चौधरी ने कहा कि पत्रकारों ने जब मुख्यमंत्री से बिहार में जंगलराज का सवाल पूछा तो उन्होंने जिस झल्लाहट और चिड़चिड़ेपन से कहा कि बिहार में जंगलराज नहीं बल्कि जनता का राज है। नीतीश कुमार के बयान में चिड़चिड़ापन इसलिए था कि उन्हें भी ये पता है कि बिहार में एक महीने के भीतर ही अपराधियों ने तांडव करना शुरू कर दिया है। लेकिन ये मुख्यमंत्री की कुर्सी की मोह ही है कि जंगलराज भी आज नीतीश कुमार को जनता का राज दिखाई देने लगा है। 'राजधानी में भी पुलिस वालों की पिटाई' बीजेपी नेता का कहना है कि नीतीश कुमार के जनता राज का आलम ये है कि पहले बिहार के दूरदराज के जिलों में पुलिस की पिटाई अपराधी कर रहे थे। पुलिसकर्मियों की हत्या तक करने जैसी वारदात को अंजाम दे रहे थे। अब तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि राजधानी पटना के बीचोबीच एक खास समुदाय के इलाके में पुलिस के ऊपर हमला किया जा रहा है। दौड़ा-दौड़ाकर उन्हें पीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये तुष्टीकरण का ही नतीजा है कि एक खास समुदाय के लोग अपराधी को बचाने के लिए पुलिस पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे। सुशील मोदी के बयान पर आरजेडी की सफाई RJD प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव का कहना है कि पूर्व विधान पार्षद अनवर अहमद राजद के सदस्य नही हैं। शक्ति यादव ने कहा कि आठ साल पहले ही राजद ने पार्टी विरोधी आचरण के लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। लेकिन देखा जा रहा है कि मीडिया में इसे RJD से जोड़ कर खबरें चलाई जा रही है। बिहार में कानून का राज है, यहां कोई भी कानून तोड़ेगा तो उसे शासन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ने इस खबर को बड़ी ही गम्भीरता से लिया है। उन लोगों के खिलाफ भी कानूनी रूख अख्तियार करेंगे, जो सत्यता की जांच किए बगैर राजद के खिलाफ खबर चला रहे हैं। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने, दो दिन पहले पटना में पुलिस वालों की हुई पिटाई पर नीतीश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में लालू के 'कबाब मंत्री' को पुलिस ने पीरबहोर थाने से छोड़ दिया। राजद समर्थकों ने थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों की पिटाई की यही 'जनता राज' है? पटना के पीरबहोर में क्या हुआ था? पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र में गुरुवार की रात असामाजिक तत्वों ने पुलिस टीम पर हमला कर न केवल पकड़े गए दो बदमाशों को पुलिस से छुड़ा ले गए बल्कि पुलिसकर्मियों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा। इस घटना में तीन पुलिस जवान (कांस्टेबल) घायल हो गए। पुलिस अब हमला करने वाले लोगों को चिन्हित कर गिरफ्तार करने में जुटी है। पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि पीरबहोर थाना पुलिस टीम गुरुवार की रात छापेमारी कर लौट रही थी कि पटना मार्केट के पास चार खड़े संदिग्ध लोग पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिस की टीम ने भी दौड़कर इनमें से दो लोगों को पकड़ लिया और उन्हें थाने ले जा रही थी। इसी बीच, डेंटल कॉलेज के सामने आसामजिक तत्व इकट्ठा हो गए और पुलिस टीम पर हमला बोल दिया। पीरबहोर के थाना प्रभारी मोहम्मद शबीउल हक ने बताया कि असामजिक तत्वों ने पकड़े गए युवकों को पुलिस की हिरासत से छुड़ाकर ले गए और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी की। कौन हैं 'कबाब मंत्री' अनवर अहमद? सुशील मोदी ने बयान जारी कर कहा कि 'यही जनता का राज है? पीरबहोर थाने में राजद समर्थक घुसकर DSP से मारपीट करते हैं। Ex MLC अनवर अहमद को थाने से छोड़ देती है।' एक दूसरे बयान में उन्होंने कहा कि 'लालू के 'कबाब मंत्री' को पुलिस ने पीरबहोर थाने से छोड़ दिया। राजद समर्थकों ने थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों की पिटाई की यही 'जनता राज' है। दरअसल, पूर्व पार्षद अनवर अहमद का घर सब्जी बाग इलाके में है। अनवर अहमद पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में मदर इंटरनेशनल स्कूल भी चलाते हैं। 2015 में अनवर अहमद उस समय काफी चर्चा में आए, जब मोतिहारी के एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने हाथ से लालू यादव को जूते पहनाए। 90 के दशक में लालू जब मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब अनवर अहमद लालू के किचन कैबिनेट का हिस्सा हुआ करते थे। सियासी हलकों में उन्हें कबाब मंत्री के नाम से जाना जाता था। तब लालू यादव को मांसाहारी भोजन का काफी शौक हुआ करता था। अनवर अहमद की जिम्मेदारी होती थी कि वो लालू यादव के लिए स्वादिष्ट मांसाहारी भोजन का इंतजाम करें।

September 10th 2022, 5:58 am

TRS से BRS...विपक्षी एकता को KCR का झटका, दशहरे पर लॉन्च करेंगे नैशनल पार्टी!

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हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव अपने राष्ट्रीय दल को लॉन्च करने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। पार्टी का नाम संभवत: भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, केसीआर 5 अक्टूबर को दशहरा के मौके पर हैदराबाद में होने वाली सार्वजनिक सभा में नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं। इसी के साथ इसे केसीआर का 2024 के लिए प्रधानमंत्री उम्मीदवारी का अनौपचारिक ऐलान भी माना जाएगा हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि केसीआर अगले विधानसभा चुनाव तक सीएम बने रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, नई पार्टी चुनाव में अकेले उतरेगी। केसीआर बीते काफी समय से बीजेपी पर हमलावर हैं, उन्होंने अप्रैल महीने में पहली बार नैशनल पार्टी की लॉन्चिंग पर बयान दिया था। उसके बाद से, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह 2024 चुनाव से पहले अपना लक्ष्य कैसे पूरा करेंगे क्योंकि तेलंगाना राष्ट्र समिति का दूसरे राज्यों में कोई चयनित प्रतिनिधित्व नहीं है। लॉन्चिंग के बाद भी बने रहेंगे सीएम टीआरएस के सूत्रों का कहना है कि केसीआर नैशनल पार्टी की लॉन्चिंग के बाद भी कम से कम अगले चुननाव तक तेलंगाना के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उसके बाद संभवत: वह लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। टीआरएस राज्य कार्यकारिणी अगले कुछ एक दो हफ्तों में मीटिंग कर टीआरएस का नए संगठन में विलय या परिवर्तन करने का फैसला केसीआर को देगी। अप्रैल में किया था पार्टी लॉन्च करने का ऐलान केसीआर ने इसी साल अप्रैल महीने में राष्ट्रीय पार्टी लॉन्च करने का ऐलान किया था। उसके बाद से ही चर्चा है कि तीसरे मोर्चे की संभावना में दम न दिखने के बाद केसीआर ने यह फैसला लिया है। पिछले दिनों केसीआर ने बिहार जाकर सीएम नीतीश कुमार और डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। इस दौरान भी उन्होंने अपनी भावनाओं जाहिर कर दी थीं। नीतीश की पीएम पद की उम्मीदवारी पर वह चुप्पी साध गए। केसीआर ने विपक्षी नेताओं से की थी मुलाकात कुछ महीने पहले ही केसीआर ने अलग-अलग राज्यों का दौरा कर विपक्षी पार्टी के नेताओं से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व यूपी सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इसके अलावा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर मोहल्ला क्लीनिक का दौरा भी किया था। इसके अलावा केसीआर ने पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के चीफ एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की थी। केसीआर को इनसे मिल सकती है चुनौती हालांकि केसीआर को पीएम उम्मीदवारी का ख्वाब पूरा करने के लिए तीन राज्यों से चुनौती मिल सकते हैं। बिहार से नीतीश कुमार, बंगाल से ममता बनर्जी और दिल्ली से अरविंद केजरीवाल। तीनों ही नेता प्रधानमंत्री पद के दावेदारी के लिए खुद को प्रोजेक्ट कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने पिछले दिनों दिल्ली जाकर विपक्ष के नेताओं से मुलाकात की थी।

September 10th 2022, 5:25 am

अफगानिस्तान की वायरल मिस्ट्री गर्ल, जिसकी खूबसूरती की हो रही थी तारीफ, उसने खोला बड़ा राज

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दुबई: एशिया कप 2022 (Asia Cup) में अफगानिस्तान ने धमाकेदार शुरुआत की थी। पहले ग्रुप मैच में टीम ने श्रीलंका और फिर बांग्लादेश को हराया। सुपर-4 में सभी को टीम से काफी उम्मीदें थीं लेकिन वह एक भी मैच नहीं जीत पाई। पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ उसे करीबी हार मिली। भारत के खिलाफ मुकाबले को अफगानिस्तान 101 रनों से हार गया। इसके बाद भी स्टेडियम में उनके समर्थकों की कमी नहीं दिखी। एक अफगानी मिस्ट्री गर्ल की फोटो टूर्नामेंट की शुरुआत में वायरल हुई थी, जिनका नाम वाजमा अयूबी है। इंटरनेट पर छाईंजैसे ही वाजमा अयूबी पहली बार स्टेडियम में देखी गईं, उनकी फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल होने लगी। हर कोई उनकी ही चर्चा कर रहा था। बला की खूबसूरत वाजमा अयूबी अफगानिस्तान की बिजनसवुमेन और सोशल एक्टिविस्ट हैं। वह अपना फैशन ब्रांड चलाती हैं। 28 साल की अयूबी अपना करियर बनाने के लिए अफगानिस्तान से दुबई शिफ्ट हो गई थीं। भारत को बताया फेवरेट टीमअफगानिस्तान का एशिया कप में आखिरी मुकाबला भारत के साथ था। इस मैच से पहले वाजमा अयूबी अस्वस्थ थी, फिर भी मैच देखने के लिए स्टेडियम पहुंचीं। उन्होंने भारत को अपनी फेवरेट टीम भी बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हमारे ब्लू टाइगर्स और एशिया कप 2 022 को हमारे खूबसूरत झंडे के साथ एक अंतिम ट्रिब्यूट, मैं अस्वस्थ थी, लेकिन मैं अपनी दो फेवरेट टीमों का आखिरी मैच देखने से नहीं चूकती।' भारत को मिली जीतइस मुकाबले में भारत ने अफगानिस्तान को 101 रनों से हराया। विराट कोहली ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में पहला शतक पूरा किया। उनकी 71वीं शतकीय पारी की मदद से भारत ने 2 विकेट पर 212 रन बनाए। जवाब में अफगानिस्तान की टीम सिर्फ 111 रन ही बना सकी। हालांकि भारत को भी इस जीत का फायदा नहीं मिला, क्योंकि दोनों टीमें पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थीं। रविवार को श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2022 फाइनल मुकाबला होगा।

September 10th 2022, 5:25 am

तुम काहे के मुसलमान हो... गणेश पूजा में गया था इसलिए मारा गया अरमान? दिल्ली के मंगोलपुरी में चाकूबाज

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नई दिल्‍ली: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के इलाके में दो हमलों में एक व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या कर दी गई और चार अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब चार बजकर 36 मिनट पर मंगोलपुरी के के-ब्लॉक में चाकू घोंपने की घटना हुई। पुलिस ने कहा कि पीड़ितों की पहचान अरमान, मोंटी उर्फ मोइन खान और फरदीन के रूप में हुई है और उन्हें पास के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने अरमान को 'मृत' घोषित कर दिया। मृतक के पिता का दावा है कि उनके बेटे को गणेश विसर्जन में जाने की वजह से मारा गया। उन्‍होंने एक चैनल से बातचीत में कहा कि हमलावरों ने पूछा था कि 'तुम किस बात के मुसलमान हो जो गुलाल लगा रखा है।' हालांकि, पुलिस कह रही है कि झगड़ा बाइक को लेकर हुआ। बाद में इसी ग्रुप ने दूसरे ब्‍लॉक में जाकर दो और पर हमला किया। पुलिस का क्‍या बयान है?पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मामूली रूप से घायल फरदीन ने बताया कि दोपहर करीब सवा दो बजे वह अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहा था और शाहरुख के घर के बाहर उसकी बाइक को लेकर उसके भाई शाहबीर से कहा-सुनी हो गई। फरदीन अपने घर वापस चला गया, जहां उसके भाई मोंटी ने उससे कहा कि वह शाहरुख के साथ शांति से बात कर मामले को सुलझाएगा। मोंटी घर से निकल गया और फरदीन भी उसके पीछे चल पड़ा। जब मोंटी शाहरुख से मिला तो शाहरुख ने मोंटी को गाली दी और उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई। इतने में उनका चचेरा भाई अरमान भी वहां पहुंच गया और बहस का हिस्सा बन गया। पुलिस ने कहा कि इस बीच शाहरुख और उसके भाई शाहबीर ने अपने सहयोगियों से चाकू लाने को कहा। पुलिस ने बताया कि दोनों भाइयों ने अपने साथियों सैफ, समीर, विनीत, करण और अजय मलिक के साथ मिलकर अरमान, फरदीन और मोंटी को चाकू मार दिया। अरमान के पिता ने क्‍या बताया? झगड़ा किस बात पर हो रहा था?अरमान के पिता ने एक न्‍यूज चैनल से बातचीत मे कहा, 'फरदीन को भी गुलाल वगैरह लग गया था। तो उससे पूछते हैं कि तुम काहे के मुसलमान हो... तुम गणेश पूजा में जा रहे हो.. इस वजह से तूतू-मैंमैं हुई।। जिन्‍होंने मारा है, उनके यहां 10-12 चाकूबाज लड़के चौबीसों घंटै रहते हैं। वो नीचे उतर के आए और चाकू से गोद दिए।' पुलिस ने बताया कि घटना के बाद यह समूह ओ-ब्लॉक में किसी मट्ठी से बदला लेने के लिए पहुंचा, जिसने कुछ दिन पहले सैफ के भाई कैफ को पीटा था। ओ-ब्लॉक में उन्हें मट्ठी के दो दोस्त अनुराग और रवि मिले। उन्होंने उनसे मट्ठी का ठिकाना पूछा और उन दोनों को चाकू मार दिया। पुलिस ने कहा कि अनुराग को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि रवि को प्रारंभिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। एक अधिकारी ने बताया कि मंगोलपुरी थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास के दो मामले दर्ज किए गए हैं।

September 10th 2022, 5:25 am

सिक्कों से लेकर नोट तक... ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में बहुत कुछ बदलने वाला है, लगें

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लंदन : ब्रिटेन के बैंक नोट और सिक्कों पर दशकों से महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की तस्वीर लगी है। उनका चित्र दुनियाभर में दर्जनों अन्य देशों की मुद्राओं पर भी है जो कि ब्रिटिश साम्राज्य के औपनिवेशिक प्रभाव का द्योतक है। महारानी के निधन के बाद ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अन्य देशों को अपनी मुद्रा में परिवर्तन करने में समय लगेगा लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि एलिजाबेथ के चित्र वाले नोट और सिक्के नहीं चलेंगे। मुद्रा पर अब महारानी की जगह राजा चार्ल्स तृतीय की तस्वीर होगी मगर यह तत्काल संभव नहीं। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा, 'वर्तमान में महारानी के चित्र वाली मुद्रा कानूनी तौर पर मान्य रहेगी।' आधिकारिक तौर पर दस दिवसीय राष्ट्रीय शोक के बाद ब्रिटेन के 'केंद्रीय बैंक' द्वारा मुद्रा के संबंध में घोषणा की जाएगी। ब्रिटेन में आधिकारिक तौर पर सिक्कों का निर्माण करने वाले रॉयल मिंट ने कहा कि महारानी के चित्र वाले सभी सिक्के कानूनी तौर पर चलन के लिए मान्य रहेंगे। रॉयल मिंट की वेबसाइट पर कहा गया, 'हम शोक के इस काल में पहले की तरह ही सिक्के बनाते रहेंगे।' वर्तमान में ब्रिटेन के 4.7 अरब नोट चलन में हैं जिनका मूल्य 95 अरब डॉलर है। इसके अलावा 29 अरब सिक्के भी लेनदेन और व्यापार में इस्तेमाल किये जाते हैं जिनके कई वर्षों तक चलन में रहने की उम्मीद है। कई साल तक चलन में रहेंगे पुराने नोट और सिक्के ब्रिटेन के सिक्कों की विशेषज्ञ वेबसाइट 'कॉइन एक्सपर्ट' के मुताबिक, 'सभी सिक्कों और नोटों को वापस लिए जाने की बजाय, यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी और महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के चित्र वाली मुद्रा आने वाले कई वर्षों तक चलन में रहेगी।' वेबसाइट के अनुसार, राजा चार्ल्स की ताजपोशी के बाद उनकी नई तस्वीर ली जाएगी जिसमें चेहरा बाईं ओर से होगा और यही तस्वीर सिक्कों पर अंकित की जाएगी। दूसरे देशों में तस्वीर बदलने में लगेगा अधिक समय गौरतलब है कि महारानी के चित्र में उनका चेहरा दाहिनी ओर देखते हुए था। यह 17वीं शताब्दी से चली आ रही प्रथा है जिसके अनुसार नए शासक के चित्र को पिछले शासक की तुलना में विपरीत दिशा से लिया जाता है। अन्य देशों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया और कनाडा आदि देशों की मुद्रा पर भी महारानी का चित्र अंकित है। वेबसाइट के अनुसार, इन देशों में मुद्रा पर तस्वीर बदलने में अधिक समय लग सकता है क्योंकि मूल देश में किसी डिजाइन में परिवर्तन करना आसान होता है मगर दूसरे देश में इसे लागू करने में कठिनाई होती है। महारानी के चित्र वाले सारे सिक्के जारी करेगा न्यूजीलैंड बैंक ऑफ कनाडा ने कहा है कि उसके 20 डॉलर के नोट, जो कि सिन्थेटिक पॉलीमर से बने हैं, आने वाले कई वर्षों तक चलन में रहेंगे। बैंक ऑफ कनाडा ने कहा, 'शासक के बदलने पर किसी समयसीमा के भीतर डिजाइन में परिवर्तन करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।' न्यूजीलैंड के रिजर्व बैंक ने कहा कि वह चार्ल्स की तस्वीर वाली नई मुद्रा जारी करने से पहले महारानी के चित्र वाले सारे सिक्के जारी कर देगा। बैंक ने कहा कि 20 डॉलर के नोट पर भी महारानी का चित्र अंकित है और केवल इसलिए इन नोटों को नष्ट नहीं किया जा सकता कि उनपर महारानी का चित्र है। न्यूजीलैंड के रिजर्व बैंक ने कहा, 'राजा चार्ल्स तृतीय के चित्र वाले सिक्के जारी करने की जरूरत से पहले कई साल तक 20 डॉलर के नोट चलन में रहेंगे।'

September 10th 2022, 5:25 am

केंद्र में मंत्री से लेकर एमएलसी कुर्सी...उद्धव के करीबी ने ठुकरा दिया शिंदे का ऑफर, क्या है पूरी कह

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मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में द्वारा (Uddhav Thackeray) को एक के बाद एक झटका देने का काम शुरू है। इसी कड़ी में उद्धव खेमे के एक और सांसद को तोड़ने की पूरी प्लानिंग एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) कर चुके थे लेकिन आखिरी वक्त में यह प्लान फेल हो गया। बात दें कि उद्धव गुट के (Gajanan Kirtikar) शिंदे गुट में शामिल होने का पूरा मन बना चुके थे। हालांकि उनके बेटे और शिवसेना नेता अमोल कीर्तिकर ने अपने सांसद पिता को ऐसा करने से रोक दिया। गजानन कीर्तिकर मुंबई के उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कीर्तिकर का हाल-चाल लेने उनके घर पर पहुंचे थे। माना जा रहा है कि इसी मुलाकात के दौरान यह तय हो गया था कि कीर्तिकर उद्धव को छोड़ एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो जाएंगे। हालांकि अमोल कीर्तिकर के समझाने पर उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। अमोल कीर्तिकर को उद्धव ने बनाया उपनेता अमोल कीर्तिकर ने अपने पिता गजानन कीर्तिकर के शिवसेना छोड़ने वाले फैसले का विरोध किया। साथ ही उन्हें इस बात के लिए राजी किया कि ऐसा करना, ठाकरे परिवार के साथ गद्दारी होगी। इस वक्त शिवसेना और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे मुश्किल में हैं। ऐसे में उनका साथ छोड़ना ठीक नहीं होगा। ऐसा करने पर भगवान भी हमें माफ नहीं करेगा। इन दलीलों के बाद कीर्तिकर ने शिंदे कैंप को जॉइन करने का मन बदल लिया। बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल में अमोल कीर्तिकर को शिवसेना का उप नेता भी बनाया है। दरअसल, बीते कुछ दिनों से महाराष्ट्र में यह चर्चा हुई थी कि उद्धव गुट का एक और सांसद शिंदे कैंप में शामिल होने जा रहा है। यह भी कहा जा रहा था कि आगामी दशहरा रैली में एकनाथ शिंदे इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे। केंद्र में मंत्रिपद का ऑफर जानकारी के मुताबिक शिंदे कोर्ट की तरफ से गजानन कीर्तिकर को केंद्र सरकार में मंत्री पद और उनके बेटे को विधान परिषद में मौका देने की पेशकश की गई थी। हालांकि इसी बीच उद्धव ठाकरे ने गजानन कीर्तिकर के बेटे अमोल को शिवसेना का उपनेता नियुक्त कर दिया। साथ ही अगले लोकसभा चुनाव में मौका देने का भरोसा भी दिया गया। इस आश्वासन के बाद अमोल कीर्तिकर ने भी शिंदे समूह का समर्थन करने से साफ इंकार कर दिया था। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शिवसेना के सांसद गजानन कीर्तिकर के पैर की सर्जरी के बाद उनके घर गए थे। वहां उनकी लंबी बातचीत भी हुई थी। जिसके बाद गजानन कीर्तिकर ने मुख्यमंत्री के सरकारी निवास स्थान वर्षा बंगले का भी दौरा किया था। इसलिए यह तय माना जा रहा था कि कीर्तिकर उद्धव ठाकरे को छोड़ जल्द ही शिंदे गुट में शामिल होंगे। कौन हैं गजानन कीर्तिकर शिवसेना के दिग्गज और कद्दावर नेताओं में गजानन कीर्तिकर का शुमार होता है। वह मुंबई के उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से फिलहाल सांसद हैं। कीर्तिकर इसके पहले साल 1990 से लेकर 2009 तक वह 4 बार विधायक रह चुके हैं। वो मायानगरी मुंबई के मलाड इलाके से विधायक थे। युति यानी शिवसेना-बीजेपी की सरकार में गृह राज्य मंत्री भी राह चुके हैं। हालांकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के गुरुदास कामत भारी मतों से पराजित किया था। कीर्तिकर लगातार दो बार सांसद चुने गए हैं।

September 10th 2022, 5:25 am

UP+बिहार= गई मोदी सरकार! इस फॉर्म्युले का BJP के लिए क्या है मतलब, समझिए

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लखनऊ: बिहार के मुख्यमंत्री (Nitish Kumar) की तरफ से केंद्र की राजनीति में नरेंद्र मोदी () सरकार को चुनौती देने की कोशिश परवान चढ़ती नजर आ रही है। बीते दिनों राजधानी दिल्ली में नीतीश कुमार ने मुलायम सिंह यादव का हालचाल लिया और (Akhilesh Yadav) के भी मुलाकात हुई। भविष्य की चुनावी रणनीति पर वह स्पष्ट तौर पर कुछ कहने से बचते नजर आए। हालांकि यह जरूर स्वीकार किया कि यूपी राजनीतिक लिहाज से बड़ा राज्य है और अखिलेश वहां नेतृत्व करेंगे। वहीं अखिलेश यादव भी 2024 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी प्रत्याशी पर दांव खोलने से बचते दिखे। इन सब के बीच आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी ऑफिस की दीवार पर एक पोस्टर लगा पाया गया। पोस्टर में नीतीश कुमार और अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ लिखा है- यूपी+बिहार= गयी मोदी सरकार। इस पोस्टर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब के करीब डेढ़ साल के बाद देश में आम चुनाव होने हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी की तरफ से नरेंद्र मोदी ही एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद की कुर्सी के दावेदार के तौर पर नजर आ रहे हैं। ऐसे में विपक्षी खेमे में भी सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। एक तरफ जहां देश की सबसे पुरानी और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा निकाल रही है। वहीं विपक्षी गठबंधन में भी कवायद शुरू हो गई है। ऐसे कई बड़े चेहरे हैं जिन्हें संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि बीते करीब एक महीने से जिस राजनेता का नाम सबसे अधिक सक्रियता से सामने आ रहा है, वह हैं नीतीश कुमार। बिहार में बीजेपी का साथ छोड़कर लालू यादव की पार्टी आरजेडी के साथ मिलकर फिर से सत्ता की कुर्सी पर बैठ गए सीएम नीतीश कुमार नए फ्रंट का गठन करते नजर आ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के दौरे पर उन्होंने आम आदमी पार्टी के सीएम अरविंद केजरीवाल, हरियाणा में इनेलो नेता ओमप्रकाश चौटाला, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, एनसीपी चीफ शरद यादव, कर्नाटक के पूर्व सीएम एच डी कुमारस्वामी, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा से मुलाकात की।। नीतीश के इस दौरे और मुलाकात के सिलसिले से कयासों का बाजार गरमा गया है। पोस्टर से चर्चा का बाजार तेज इन सभी हलचल के बीच यूपी की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी दफ्तर की दीवार पर लगे एक पोस्टर से सियासी चर्चा शुरू हो गई। नीतीश कुमार और अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ लिखा है कि यूपी+बिहार= गयी मोदी सरकार। पोस्टर से सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या 2024 में मोदी की अगुवाई में बीजेपी के खिलाफ नीतीश और अखिलेश की मोर्चेबंदी हो गई है। नीतीश ने जिस तरह बिहार में एनडीए से गठबंधन तोड़कर आरजेडी के साथ सरकार बनाई, उससे उनकी छवि ऐसे नेता की बन गई है जो बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्‍ता दिखा सकता है। दिल्ली में मिले थे नीतीश-अखिलेश लखनऊ में पोस्टर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह की तरफ से लगवाया गया है। हालांकि नीतीश और अखिलेश दोनों ही अभी पीएम पद और एक-दूसरे की उम्मीदवारी पर खुलकर स्पष्ट कुछ कह नहीं सके हैं। नीतीश इस हफ्ते मंगलवार को दिल्ली दौरे के दौरान गुरुग्राम के मेदांता अस्‍पताल में मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद जब बाहर निकले तो उनके साथ अखिलेश भी थे। जब मीडिया ने अखिलेश की भूमिका पर सवाल किया तो उन्‍होंने भी कमोबेश वही कहा जो अखिलेश यादव ने इस इंटरव्‍यू में कहा। नीतीश बोले थे, 'यही सब यूपी का आगे और नेतृत्‍व करेंगे।' मतलब नीतीश भी अखिलेश यादव में विपक्ष का संभावित पीएम पद का उम्‍मीदवार नहीं देखते, या कम से कम अभी खुले तौर पर मान नहीं पाए। क्या अखिलेश को मिल गया पिरोने वाला धागा! ठीक इसके एक दिन के बाद इंटरव्‍यू में अखिलेश यादव भी महज इतना ही कहकर रह गए कि नीतीश जी ने बिहार में लंबे समय से काम किया है। समूह का काम किया है, साइकिलें बांटीं हैं, अपने संसाधन के दम पर बिहार को आगे ले जाने का काम किया है। लगे हाथ अखिलेश ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की भी तारीफ कर दी। हालांकि विपक्ष का मुखिया कौन होगा इस पर भी अखिलेश ने कोई एक नाम नहीं लिया, बल्कि यही कहा हमारे पास चेहरों की कमी नहीं है जबकि बीजेपी के पास ले देकर एक ही चेहरा है। विपक्ष का उम्‍मीदवार कौन होगा इस पर अखिलेश ने किसी एक चेहरे का नाम न लेकर कहा, हमारे पास कई मोती हैं, उनको एक साथ पिरोने वाला धागा चाहिए। इधर अखिलेश भी खुद केंद्रीय राजनीति की तरफ मुड़ते दिख रहे हैं। बीते कुछ समय से वह केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुई दिखाई पड़ रहे हैं। इसका कारण है, यूपी में अगला विधानसभा चुनाव 5 साल बाद होना है। लोकसभा चुनाव 2024 में होना है। आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की हार के बाद से ऐसे ही उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश सपा को 5 सीटों पर जीत के आंकड़े से आगे बढ़ाने में कामयाब नहीं हुए हैं। ऐसे में अखिलेश के सामने प्रदेश में सपा को फिर से ताकतवर बनाने के साथ-साथ केंद्र की राजनीति में दखल बढ़ाने की है। UP-बिहार का समीकरण समझ लीजिए उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं। बिहार की 40 लोकसभा सीटों के मुकाबले दोगुनी। अखिलेश यादव की तैयारी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की है। नीतीश कुमार अगर गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरते हैं तो 15-16 सीटों से अधिक लोकसभा चुनाव 2024 में जेडीयू के पाले में नहीं आएगा। पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को ही आधार मानें और जेडीयू की 16 सीटों पर जीत को तय मान कर चलें तो भी विपक्ष के बहुमत के 273 के आंकड़े के पार करने के बाद नीतीश कुमार की 16 सीटों के दम पर उनकी पीएम पद पर उम्मीदवारी की संभावना कम ही है। वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी खुद चुनावी मैदान में उतरते हैं। इस स्थिति में अगर उनके सामने कोई विकल्प नहीं खड़ा होगा तो फिर दिक्कत दूसरी पार्टी की बढ़ेगी। अब अखिलेश और उनके समर्थकों के सामने चुनौती है कि विपक्षी एकता को बरकरार रखते हुए दावेदारी को मजबूती से कैसे पेश किया जाए। पीएम मोदी के खुद वाराणसी से चुनाव लड़ने का सीधा फायदा 2014 और 2019 में भाजपा को मिला है। आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद स्थापित वोट बैंक यादव और मुस्लिम में भी टूट देखने को मिली। अगर अखिलेश विपक्ष या तीसरा मोर्चा के पीएम उम्मीदवार घोषित होते हैं तो इस वोट बैंक को एकजुट करना संभव होगा। साथ ही, भाजपा से नाराज वोट बैंक को भी सपा अपने पाले में लाने में कामयाब हो सकती है।

September 10th 2022, 5:25 am

बीजेपी का 'Y' मॉडल से मोहभंग, बिहार में बिखरे वोट बैंक को एक करने के लिए नया दांव

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पटना: आज भी आप आरजेडी समर्थकों या फिर ज्यादातर यादव बहुल इलाकों के लोगों से पूछेंगे कि उनका नेता कौन है तो उनका जवाब यही होगा- 'जादो (यादव) माने लालू जादो, बाकी सब सावन-भादो'। बिहार में बीजेपी ने इसी वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए भूपेंद्र यादव और नित्यानंंद राय को आगे किया। सूत्र बताते हैं कि उस दौरान बीजेपी को पूरा भरोसा था कि ये दोनों नेता लालू के जातीय तिलिस्म को तोड़ देंगे। इसके बाद बीजेपी ने दूसरा दांव बनिया समुदाय पर लगाया और संजय जायसवाल को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। 2020 में जीत के बाद उपमुख्मंत्री के चुनाव में भी बीजेपी ने अपनी रणनीति की झलक दिखा दी। सत्ता जाने से पहले ही बीजेपी को मिल गया था बड़ा इशारा नीतीश बीजेपी का साथ छोड़ महागठबंधन के साथ 9 अगस्त 2022 को गए। लेकिन इस नई सरकार आने से काफी पहले बीजेपी को ये अहसास हो गया था कि उसका असल वोट बैंक अब दरक गया है। बोचहां उपचुनाव में जिस तरह से बीजेपी को अपने परंपरागत और कोर वोटरों यानि भूमिहार-ब्राह्मणों (सवर्ण भी कह सकते हैं) की नाराजगी झेलनी पड़ी। उसी वक्त ये तय हो गया था कि केंद्रीय आलाकमान का यादव नेताओं से मोहभंग हो गया है। यही वजह थी कि बिहार में पार्टी के अंदर ओवरहॉलिंग शुरू कर दी गई। बिखरे वोट बैंक को एक करने के लिए पहला दांव सवाल ये था कि बीजेपी ऐसा करे कैसे, इसके लिए सत्ता जाते ही बीजेपी को सबसे पहले बोचहां की हार याद आई। इसके बाद NBT ने आपको पहले ही बता दिया था कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ही बनेंगे। हुआ भी बिल्कुल वही, बीजेपी ने भूमिहार समुदाय से आनेवाले और विधानसभा के पूर्व स्पीकर विजय सिन्हा को नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया। इसके बाद बीजेपी ने कुशवाहा वोट बैंक को पाले में करने के लिए विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष के लिए सम्राट चौधरी का नाम घोषित कर दिया। फिर भूपेंद्र का पत्ता साफ भूपेंद्र यादव को केंद्र में मंत्री बनाए जाने के बाद से ही बिहार प्रभारी का पद खाली था। बीजेपी चाहती तो इस पर किसी यादव नेता को बिठा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। OBC समाज से आने वाले विनोद तावड़े को बिहार बीजेपी की कमान सौंपी गई। इस दौरान आप एक बात पर गौर करेंगे तो काफी कुछ साफ हो जाएगा। भूपेंद्र यादव तो बिहार आना बंद ही कर चुके थे। महागठबंधन की सरकार बनने के बाद कुछ दिन तक नित्यानंद राय ने तेजस्वी पर खूब हमला बोला, लेकिन विजय सिन्हा को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद वो सीन से आउट हो गए। उनकी जगह सुशील मोदी, विजय सिन्हा और थोड़ा बहुत संजय जायसवाल ने ले ली। यूं समझिए कि बीजेपी ने विपक्ष में आते ही पार्टी में ऊपर से नीचे तक जातीय समीकरण दुरुस्त कर दिया। बीजेपी को कितनी कामयाबी के आसार?लेकिन सवाल ये कि बीजेपी अपने इस मिशन में कितना कामयाब हो पाएगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में डेढ़ साल के करीब ही समय बाकी है। उससे पहले बीजेपी को 2015 की तरह ही लालू-नीतीश से चुनौती मिलेगी। इस बार तो हालात काफी अलग हैं, पिच भले ही बिहार की होगी, लेकिन बीजेपी के खिलाफ सारा विपक्ष ग्लब्स-पैड बांध बल्ला लिए खड़ा है। सूत्रों ने NBT को जानकारी दी है कि बिहार में बीजेपी सीएम के चेहरे के लिए भी एक ऐसी रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है जो पहले भी हिट हुआ है। इसके बारे में भी आपको नवभारत टाइम्स जल्द ही बताने जा रहा है।

September 10th 2022, 5:25 am
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