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विवादों में रहे स्वामी? राम मंदिर से लेकर बेटियों के तर्पण और पीएम मोदी तक, बयानों पर मचता था हंगामा

Navbharat Times

अयोध्या: द्वारकाशारदापीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में उनका निधन हुआ। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पास बद्री आश्रम और द्वारकापीठ की जिम्मेदारी थी। अपने आश्रम में ही उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को उनके बयानों को लेकर खूब चर्चा मिली। राम मंदिर से लेकर बेटियों के तर्पण के मामले में उनके बयान खासे चर्चा में रहे थे। उन्होंने कई बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को भी घेरा था। आरएसएस के स्वरूप को बिगाड़ने पर भी करारा हमला बोला था। साथ ही, ताजमहल के नीचे शिवलिंग होने की बात कही है। राम मंदिर पर दिया था बड़ा बयान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया था। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के लिए पहुंचे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने 6 फरवरी 2021 को बयान दिया था। इस पर खूब विवाद गहराया था। मनकामेश्वर मंदिर में मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर नहीं बन रहा है। वहां आने वाले दिनों में विश्व हिंदू परिषद का कार्यालय बनेगा। मंदिर वह बनाते हैं, जो राम को मानते हैं। राम को आराध्य मानते हैं। राम को महापुरुष मानने वाले लोग मंदिर नहीं बनाते। शंकराचार्य ने कहा था कि भगवान राम महापुरुष नहीं, भगवान हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन पर भी सवाल उठाया था। पैसे जमा करने से लेकर आंदोलन की बात लिखने तक पर विश्व हिंदू परिषद को घेरा था। उन्होंने कहा था कि केवल भगवा पहन लेने मात्र से कोई सनातन धर्म को मानने वाला नहीं बन जाता है। किसान आंदोलन पर सुनाई थी खरी-खरी स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने किसान आंदोलन पर भी अपनी राय रखी थी। इसको लेकर उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को हल निकालने का संदेश दिया था। नोटबंदी से लेकर किसान बिल तक को उन्होंने सरकार का एक पक्षीय फैसला करार दिया था। कोरोना पर भी दिया था बयान कोरोना संक्रमण को लेकर भी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि जहां पर भी दूषित खाना और दूषित जल है, वहां बीमारी का प्रसार हुआ है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे कार्यक्रम पर वे लगातार निशाना साधते थे। उन्होंने कहा कि केवल विभाग बना देने से काम नहीं चलेगा। गंगा जल को शुद्ध करने पर काम नहीं हुआ है। कल्पवासी क्षेत्र में गंगा के किनारे रहने वाले लोग अब बोतलबंद पानी पी रहे हैं। बेटियों को तर्पण का अधिकार देने के थे खिलाफ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बेटियों को तर्पण का अधिकार दिए जाने के खिलाफ थे। एक बार उन्होंने कहा था कि लड़कियां अपने माता- पिता की संपत्ति पर अपना हक जताने के लिए उनका दाह संस्कार और पिंडदान करती हैं। लड़कियों के लिए ऐसे कर्मकांड हिंदू धर्म शास्त्रों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा था कि बेटियों की ओर से इस प्रकार के कर्मकांड से घरों में विवाद बढ़ा है। उन्होंने कहा था कि पितरों को तृप्ति तब मिलती है, उनका पुत्र या पौत्र या फिर पुत्री का बेटा उनका दाह संस्कार और तर्पण करता है। वैसे माता-पिता, जिनकी बेटियां अंतिम संस्कार करती हैं, उन्हें तृप्ति नहीं मिलती। मोक्ष नहीं मिलता है। पीएम मोदी पर साधा था निशाना शंकराचार्य पीएम नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर खूब लेते थे। उन्होंने कहा था कि जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से वे आरएसएस के मूल स्वरूप को बिगाड़ने में लगे हुए हैं। आरएसएस के हिंदुओं की बात करने और ईद मिलन समारोह के आयोजन जैसे मसलों पर करारा हमला बोला था। ताजमहल के नीचे शिवलिंग की कही थी बात शंकराचार्य ने 2015 में आगरा में ताजमहल के नीचे शिवलिंग होने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि ताजमहल के नीचे भगवान शिव का मंदिर है। इसे भक्तों के लिए खोला जाना चाहिए। उन्होंने ताजमहल के नीचे के दो मंजिलों को खोलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिंदू भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकें, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।

September 11th 2022, 8:37 am
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