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33 लोगों का परिवार, लेकिन 19 की आंखों में रोशनी ही नहीं, असम में इस पर‍िवार के साथ ऐसा क्‍यों?

Navbharat Times

गुवाहाटी: असम के एक परिवार में पीढ़ियों से दृष्टिहीनता चली आ रही है। इसके बावजूद इस साल जन्मे नए सदस्य को उस परिवार ने बधाई दी है। परिवार के मुखिया अब्दुल वाहिद के लिए जन्मजात अंधापन एक बार-बार आने वाला दु:खद स्वप्न रहा है। 33 लोगों के भरे पूरे परिवार में 19 दृष्टिहीन सदस्य हैं। वाहिद गरीब और अशिक्षित हैं, जो कि असम के नगांव जिले के रूपहिहाट शहर की गलियों में भीख मांगकर अपनी आजीविका कमाते हैं। इसको लेकर सालों से वाहिद अंधेपन को अपने परिवार का भाग्य मान रहे थे। साल 2018 में वाहिद के परिवार की कहानी असम के लखीमपुर मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गायत्री गोगोई तक पहुंची। जिसके बाद सावधानीपूर्वक विश्लेषण के बाद डॉक्टर गोगोई और उनकी टीम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वाहिद के परिवार में लोग आनुवंशिक दोष के शिकार हैं। वाहिद का परिवार अकेला ऐसा नहीं है, जो कि वंशानुगत अंधेपन से पीड़ित है। दुनिया भर के वैज्ञानिकों को कम से कम तीन अन्य लोगों के बारे में पता था, लेकिन इनमें से पहले कभी भी किसी परिवार में 19 मामले नहीं मिले थे। डॉक्टर गोगोई और पांच चिकित्सा सलाहकारों ने परिवार के प्रारंभिक प्रयोगशाला परीक्षण के लिए एक परियोजना विकसित की। साल 2018 के आखिरी में वैज्ञानिकों ने उन जीनों को शॉर्टलिस्ट किया, जो कि वाहिदों के वंशानुगत अंधेपन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। कार्डिफ विश्वविद्यालय के एक नैदानिक आनुवंशिकीविद प्रोफेसर धवेंद्र कुमार की मौजूदगी में दिसंबर 2018 में नमूने लिए गए थे। नमूनों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने परीक्षण में GJA8 जीन का एक अत्यंत दुर्लभ उत्परिवर्तन पाया, जो कि पीढ़ी दर पीढ़ी अंधेपन का कारण बनता है। अब्दुल वाहिद, खैरुल इस्लाम और सोमाला खातून (परिवार के सदस्य) में एक समान रोगजनक संस्करण (जीजेए 8 जीन) का सकारात्मक परीक्षण किया गया, जिसका मतलब साफ था कि यह एक आनुवंशिक उत्परिवर्तन है। जो कि पिछली चार पीढ़ियों में अंधेपन के लिए जिम्मेदार है। डॉ. गोगोई का कहना है कि इस तरह यह चौथा मामला है कि जब कोई परिवार इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। उनका कहना है कि सिडनी विश्वविद्यालय की आनुवंशिक प्रयोगशाला के जरिए की गई जांच में ऐसी ही बीमारी पाई गई। डॉक्टर्स का कहना है कि “हमने जांच के दौरान पाया कि संरचना के विकास के तहत – एनोफ्थेल्मिया और माइक्रोफथाल्मिया नामक चिकित्सा स्थिति में प्रभावित सदस्यों के पास सॉकेट में पूरी तरह से विकसित नेत्रगोलक नहीं है या फिर उन्हें बिना किसी अन्य न्यूरोलॉजिकल या शारीरिक कमी की अलग-अलग ओकुलर समस्याएं हैं। यानी कि कुल मिलाकर कहा जाए तो इसका मतलब यह नहीं है कि वाहिद परिवार में हर बच्चा अंधा पैदा होता है। गर्भावस्था की शुरुआत में ही आनुवंशिक जांच यह दिखा सकती है कि क्या भ्रूण में GJA8 उत्परिवर्तन होता है। डॉ. गोगोई कहते हैं कि हर गर्भावस्था का परीक्षण जीन में समान दोष की उपस्थिति के लिए किया जाना चाहिए। वहीं अजन्मे सदस्यों के चयन से कुछ दशकों के बाद धीरे-धीरे यह बोझ कम होगा। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर परीक्षण सकारात्मक आता है और वो गर्भपात कानूनी बाधाओं से मुक्त है तो पहले 12 हफ्तों के भीतर गर्भावस्था को समाप्त करने की सिफारिश की जाती है। इसलिए डॉ. गोगोई ने वाहिद के परिवार की महिलाओं को गर्भधारण के समय स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी। वहीं साल 2018 के बाद, उनकी टीम ने अगले कुछ वर्षों तक परिवार में हर गर्भावस्था की सख्ती से निगरानी की और दो अनुवर्ती अनुवांशिक जांच की गईं। इस दौरान असामान्यता वाले एक भ्रूण का गर्भपात कर दिया गया, जबकि दूसरे का जन्म सामान्य दृष्टि से हुआ। गुवाहाटी की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ पंकज डेका, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में पैदा हुए परिवार के 19वें दृष्टिबाधित सदस्य का पता लगाया था। उनका कहना है कि इस साल पैदा हुए बच्चे की स्क्रीनिंग बहुत देर से की गई। मां पहले से ही छह महीने की गर्भवती थी और हमने अल्ट्रासाउंड के माध्यम से अंधेपन की पुष्टि की। लेकिन तब तक गर्भपात का समय बीत चुका था और इसकी अनुमति नहीं थी। आसानी से नहीं उठाया जा सकता टेस्ट का खर्च समाज कल्याण विभाग वाहिद परिवार के नेत्रहीन सदस्यों को प्रति माह 1,000 रुपये का भुगतान करता है, लेकिन आनुवंशिक जांच पर सब्सिडी होने के बाद भी प्रति गर्भावस्था लगभग 10,000 रुपए का खर्च आता है। यह परिवार के लिए दुर्भाग्य की बात है कि GJA8 उत्परिवर्तन उन स्थितियों में से एक नहीं है, जिसके लिए असम सरकार मुफ्त निदान प्रदान करती है। डॉ. गोगोई कहते हैं कि "दुर्लभ विकार का पता लगाना ही परिवार में अंधेपन को खत्म करने का कोई समाधान नहीं है, "जब तक कि परिवार से अंधापन पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इस बात की पूरी संभावना है कि नेत्रहीन संतान पैदा होती ही रहेगी।

September 11th 2022, 3:32 am
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