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पाकिस्तान – 200 साल पुराने गुरुद्वारे के बाद अब 125 साल पुराना मंदिर जमींदोज

VSK Bharat

क्वेटा (बलूचिस्तान) में लगभग 200 साल पुराने श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे को गिराए जाने के दो दिन बाद ही अब पंजाब प्रांत में 125 साल पुराने मंदिर को कट्टरपंथियों ने ध्वस्त कर दिया। ताजा घटना पंजाब प्रांत के नारोवाल की है।

पंजाब के नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित हिन्दू मंदिर लगभग 100 से 125 साल पुराना बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 1,000 वर्ग मीटर में फैले मंदिर को 21 अगस्त को गिराए जाने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों और अल्पसंख्यक समुदाय के संगठनों का आरोप है कि मंदिर की जमीन को पास के मदरसे के विस्तार के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से जानबूझकर ध्वस्त किया गया।

घटना से ठीक पहले बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में करीब 200 साल पुराने श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे को गिराए जाने का मामला सामने आया था। ऐतिहासिक गुरुद्वारे की जमीन पर मॉल बनाने की तैयारी की जा रही है। 1947 में बंटवारे के बाद गुरुद्वारे के परिसर में लगभग 1953 से सेंट गैब्रिएल स्कूल संचालित होने लगा था।

पाकिस्तान में कितने हिन्दू-सिक्ख धार्मिक स्थल बचे?

दिसंबर 2025 में पाकिस्तान की माइनॉरिटी कॉकस की संसदीय समिति को पेश की गई एक रिपोर्ट में सामने आया था कि पाकिस्तान में 1947 के दौरान कुल 1,817 हिन्दू मंदिर और गुरुद्वारे मौजूद थे। जहां पूजा पाठ से लेकर धार्मिक गतिविधियाँ होती थीं। हालाँकि, वर्तमान समय में 28 धार्मिक स्थल शेष बचे हैं। अन्य सभी मंदिर और गुरुद्वारे कट्टरपंथियों की हिंसा के भेंट चढ़ गए। इन धार्मिक स्थलों को या तो उपेक्षा के कारण खंडहर होने दिया गया या अवैध कब्जों और दंगों के दौरान तोड़ दिया गया।

इनमें से सैकड़ों ऐतिहासिक मंदिरों और गुरुद्वारों को सरकारी स्कूलों, मदरसों, होटलों, दुकानों और रेस्तरां में तब्दील कर दिया गया। वहीं, एक आर्थिक जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 6 लाख से अधिक मस्जिदें सक्रिय हैं। लेकिन हिन्दुओं व अन्य अलप्संख्यकों से जुड़े धार्मिक स्थलों को पाकिस्तानी चुन चुनकर मिटाने में लगी है।

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के अपने ऐतिहासिक फैसले में सरकार को अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। लेकिन 12 साल बीत जाने के बाद भी इस आदेश को जमीन पर लागू नहीं किया गया। नतीजा यह है कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक विरासत लगातार असुरक्षित बनी हुई है। अब नारोवाल की ताजा घटना हो या बलूचिस्तान में 200 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को विध्वंस का मामला, यह घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है।

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करता है। लेकिन नारोवाल के मंदिर से लेकर क्वेटा के गुरुद्वारे तक सामने आ रहे मामले पूछ रहे हैं कि जिन मंदिरों और गुरुद्वारों की जिम्मेदारी पाकिस्तान के पास है, उनकी सुरक्षा आखिर कब सुनिश्चित होगी?

मंदिर को गिराए जाने के पीछे प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान’ (TLP) से जुड़े कट्टरपंथियों का हाथ बताया जा रहा है।

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September 3rd 2026, 12:20 pm
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