NHEV ट्रायल: गुड़गांव से जयपुर तक ई बसों में फ्री में आने-जाने का मौका, बस एक काम करना है
Navbharat Times
निरंजन कुमार, गुड़गांव: नैशनल हाइवे फॉर इलेक्ट्रिक वीकल यानी एनएचईवी ने ई हाइवे के ट्रायल के दौरान आम पब्लिक को गुड़गांव से जयपुर तक फ्री राइडिंग का मौका दिया है। सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को गुड़गांव से और शनिवार को जयपुर से ई बस में सफर किया जा सकता है। ट्रायल में शामिल होने वाले यात्री को एक दिन पहले NHEV.in पोर्टल पर जाकर खुद को रजिस्टर करना होगा और अपनी सीट बुक करनी होगी। गुड़गांव के यात्री इफ्को चौक व राजीव चौक से बसों में सफर कर सकते हैं। वहीं एनएचईवी ने ट्रायल में शामिल टैक्सियों के लिए किराया भी तय कर दिया गया है। दिल्ली व गुड़गांव से किराया 3500 से 4500 रुपये रखा गया है। यह डीजल की इनोवा से 30 से 50 फीसदी तक सस्ता है। टैक्सी सरहौल बॉर्डर के पास एंबियंस मॉल, शंकर चौक, साइबर सिटी, इफको चौक, राजीव चौक समेत अपने घर और कंपनी के बाहर से भी बुक की जा सकती है। फिलहाल 25 बसें और 100 से ज्यादा कैब को ट्रायल के दौरान चलाया जा रहा है।
डीआरआईआईवी करेगी रिपोर्ट तैयारट्रायल पार्टनर के रूप में दिल्ली आईआईटी की दिल्ली रिसर्च एम्पलेमेंटेशन एंड एनोवेशन यानी डीआरआईआईवी विंग ने भी अपने 4 इलेक्ट्रिक वाहन ट्रायल में शामिल किए हैं। यह विंग सिटी नॉलेज इनोवेशन क्लस्टर के रूप में काम करती है। जो ई हाइवे के परिचालन को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और भारत सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार एनएचईवी को लेकर अगला फैसला लेगी। वहीं, एक महीने के इस ट्रायल के दूसरे दिन शनिवार को भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार की टीम भी शामिल हो गई है। जो पूरे ट्रायल के दौरान विशेषज्ञों के साथ रहेंगे।
कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही निगरानीट्रायल के दौरान पैसेंजर की सेफ्टी के लिए कमांड कंट्रोल सेंटर से ईवी की निगरानी की जा रही है। अधिकारी ड्राइवर और पैसेंजर से विडियो कॉल पर बात कर फीडबैक ले रहे हैं। वहीं बस व कैब की रनिंग कोस्ट, प्रति पैसेंजर किराया, ब्रेक डाउन पर मिलने वाली हेल्प और प्रतिदिन कितना खर्च बचेगा और प्रदूषण की कमी का भी डाटा बनाया जा रहा है।
2 दिन कोई दिक्कत नहीं हुईएनएचईवी के अधिकारियों का कहना है कि पहले व दूसरे दिन कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई। तय समय से पहले ही हेल्पलाइन टीम पहुंच गई। इसके अलावा चार्जिंग में लगने वाले समय में भी कमी दर्ज की गई। बस व कैब अपनी तय स्पीड पर चलाई जा रही है। जो इस दौरान लगने वाले समय का डेटा भी बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ई हाईवे बनाने के लिए अभी 50 लाख रुपये प्रति किमी का खर्चा आ रहा है। इस ट्रायल के दौरान इसे कम करने की भी प्लानिंग है। ताकि कम समय में ज्यादा से ज्यादा ई हाइवे बनाए जा सकें।
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