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गवाह की कोरोना से मौत, कोर्ट ने कहा-सबूत नहीं, हत्‍या के आरोपी को बरी कर दिया

Navbharat Times

गुरुग्राम: एक हत्या के मामले में मुकदमे में एक व्यक्ति को इस सप्ताह एक स्थानीय अदालत ने बरी कर दिया। वजह यह रही है क‍ि दस हत्‍या के मामला के एक मात्र गवाह की कोरोना की वजह से मौत हो गई। उसने बयान दिया था क‍ि उसने हत्‍या होते हुए देखा था। लेकिन कोर्ट में पेशी से पहले ही उसकी मौत हो गई। ऐसे कोर्ट सबूतों के अभाव में आरोप आरोपी को बरी कर दिया। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी और मृतक के बीच पैसे के लेन देन को लेकर व‍िवाद हुआ था। ढाई हजार रुपये के लिए हुई थी लड़ाई26 अगस्त 2020 को महावीर चौक पर एक फार्मेसी के सामने एक शख्स का शव मिला था। उसकी पहचान फल विक्रेता बबलू के रूप में हुई। उसके दोस्त गौरव ने पुलिस को बताया कि बबलू और कुछ अन्य फल विक्रेता फार्मेसी के सामने फुटपाथ पर सोते थे। उनमें से एक ओम प्रकाश था जिसने मार्च 2020 में समूह से कथित तौर पर 2,500 रुपये की राशि उधार ली थी, जब महामारी के कारण पहला राष्ट्रीय तालाबंदी लागू किया गया था। वह अपने गृहनगर लुधियाना जाना चाह रहा था। वह अगस्त में शहर लौटा। 23 अगस्त को पैसे लौटाने को लेकर बबलू, गौरव और ओम प्रकाश में तीखी नोकझोंक हुई। बबलू ने कथित तौर पर ओम प्रकाश को थप्पड़ मारा, जिसने उन्हें मारने के लिए एक ईंट उठाई। लेकिन अन्य लोगों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें शांत किया। तीन दिन बाद बबलू मृत पाया गया। गौरव ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा क‍ि ओम प्रकाश ने हमें जान से मारने की धमकी दी थी। उसने ईंट से बबलू की हत्या की। सेक्टर 14 पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 323 (चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और उसी दिन ओम प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पास के गौशाला मैदान से खून से सना एक शर्ट और खून से सना एक ईंट भी बरामद किया। पुलिस ने पाया कि हत्या का एकमात्र चश्मदीद एक अन्य फल विक्रेता था जो उसी फुटपाथ पर सोता था। उसने पुलिस को बताया कि ओम प्रकाश ने बबलू और उस पर ईंट से हमला किया था। बयान दर्ज कराने के बाद वह अपने गृहनगर बिहार चले गए। 2021 में उसकी कोविड से मौत हो गई। जब अदालत ने उसे सम्मन जारी किया तो नोटिस बिना तामील किए वापस कर दिया गया। इस रिपोर्ट के साथ कि उनकी मौत हो चुकी है। इस साल 25 फरवरी को उनका नाम हटा दिया गया था। बचाव पक्ष के वकील अभिमन्यु ने तर्क दिया कि कोई अन्य चश्मदीद गवाह नहीं था और खून से सने शर्ट को सार्वजनिक स्थान से बरामद किया गया था, ओम प्रकाश से नहीं। 8 सितंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वेद प्रकाश सिरोही ने कहा कि अदालत ने अभियोजन पक्ष की किसी भी दलील में कोई दम नहीं पाया।

September 11th 2022, 2:47 am
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