9/11 हमले के 21 साल: भारत में बढ़ रही अल कायदा की हरकत, 8 साल में 100 आतंकी अरेस्ट
Navbharat Times
मुंबई: आतंकवादी संगठन अल कायदा 9/11 के अमेरिकी हमले की वजह से सुर्खियों में आया था। यह हमला 11 सितंबर, 2001 को किया गया था। उस हमले के पहले और बाद में भारत में कई आतंकवादी गतिविधियां हुईं। उनमें अलग-अलग आतंकवादी संगठनों के नाम आए, लेकिन अल कायदा का नहीं। अब अल कायदा की भारत में भी गतिविधियां बढ़ रही हैं। पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल पुलिस ने बांद्रा में निर्मल नगर इलाके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। 18 अगस्त से अब तक इस संगठन के चार लोग पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से देश के अलग-अलग शहरों से अरेस्ट हुए हैं।
साल 2014 में अल जवाहिरी ने भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा का प्रभाव बढ़ाने के लिए अल कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS का गठन किया था। पिछले आठ साल में इस आतंकवादी संगठन के 100 से ज्यादा लोग भारत में अरेस्ट हुए हैं। कुछ के खिलाफ एनआईए ने चार्जशीट तक दाखिल की है।
दाऊद के अलकायदा से संबंध
ऐसा कहा जाता है कि AQIS में अंडरवर्ल्ड के लोग भी हैं। फरवरी में जब एनआईए ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, तो बताया था कि उसका अन्य आतंकवादी संगठनों के अलावा अल कायदा से भी कनेक्शन है। पिछले सप्ताह एनआईए ने दाऊद इब्राहिम की सूचना देने वाले को 25 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की। पिछले हफ्ते ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मुंबई आए थे और उन्होंने मुंबई पुलिस के टॉप अधिकारियों के साथ मुलाकात भी की थी।
9/11 के लिए भारत से भी गया था पैसा
9/11 हमला अल कायदा ने करवाया था। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने अपनी किताब ‘डायल डी फार डॉन’ में लिखा है कि 9/11 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के लिए भारत से भी पैसा भेजा गया था। सीबीआई के लिए भी काम कर चुके नीरज कुमार ने हरकत उल मुजाहिदीन के आतंकी आसिफ रजा खान से मिली जानकारी के आधार पर यह खुलासा किया था।
नीरज कुमार के मुताबिक, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले मोहम्मद अता को आतंकी उमर शेख ने यह धनराशि उपलब्ध कराई थी। उमर शेख 1999 में विमान अपहरण कांड के समय छोड़े गए आतंकियों में एक है। शेख को यह पैसा आफताब अंसारी ने दिया, जो कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हमले का दोषी है। अता से लिंक के बारे में तब पता चला, जब इंडिया और दुबई के बीच ई-मेल इंटरसेप्ट किए गए।
आसिफ रजा कोलकाता के बेनियापुकुर इलाके का रहनेवाला था। कई साल पहले राजकोट में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। पुलिस का दावा है कि वह पुलिस हिरासत से भाग रहा था। आसिफ रजा ने पुलिस हिरासत जांच टीम को बताया था कि उसे पता है कि फिरौती की रकम अता तक पहुंचाई गई और अल कायदा के लोगों ने न्यूयॉर्क में इस्तेमाल की।
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