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हफ्ते में 3 दिन छुट्टी, ओवरटाइम और बढ़ा हुआ पीएफ, आखिर कब से लागू होंगे नए लेबर कोड्स?

Navbharat Times

नई दिल्ली : मोदी सरकार जल्द ही कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने वाली है। हम नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) की बात कर रहे हैं। अधिकतर राज्य इन लेबर कोड्स को लागू करने के लिए तैयार हैं। सरकार इन चार नए लेबर कोड्स को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले वेतन से जुड़े कोड और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कोड को लागू किया जा सकता है। इसके बाद बचे हुए दो कोड्स को लागू किया जा सकता है। इनमें एक औद्योगिक संबंधों से जुड़ा कोड और दूसरा काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर है। हालांकि, नए लेबर कोड्स कब लागू होंगे, इसकी कोई तय तारीख सामने नहीं आई है। नए लेबर कोड्स लोगू होने से कर्मचारियों को काफी फायदा होने वाला है। पीएम मोदी ने दिए थे संकेत सरकार कर्मचारियों को काम का बेहतर माहौल देने के पक्ष में है। पीएम मोदी ने हाल में एक कार्यक्रम में कहा था कि वर्क फ्रॉम होम इकोसिस्टम, फ्लेक्सिबल वर्क प्लेसेज और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स भविष्य की जरूरतें हैं। पीएम ने कहा, "बदलते हुए समय के साथ जिस तरह जॉब की प्रकृति बदल रही है, वो आप भी देख रहे हैं। दुनिया तेजी से बदल रही है और इसका लाभ लेने के लिये हमें भी उसी गति से तैयार होना होगा।" कर्मचारियों को है बेसब्री से इंतजार देश में लंबे समय से 4 श्रम संहिताओं (Labour Codes) के लागू होने का इंतजार किया जा रहा है। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) ने पिछले साल इन लेबर कोड्स के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया था। पहले कहा जा रहा था कि वित्त वर्ष 2022-23 यानी एक अप्रैल से ये लेबर कोड्स लागू हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कहा गया कि ये लेबर कोड्स एक जुलाई से लागू हो सकते हैं। लेकिन कई राज्यों द्वारा ड्राफ्ट तैयार नहीं करने के चलते ये लागू नहीं हो पाए। आइए जानते हैं कि इन चार श्रम संहिताओं में क्या-क्या शामिल हैं। ये हैं चार लेबर कोड्स सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं में वेतन/मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंधों पर संहिता, काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर संहिता और सामाजिक व व्यावसायिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय ने श्रम कानूनों (Labour Laws) में सुधार के लिए 44 तरह के पुराने श्रम कानूनों को चार वृहद संहिताओं में समाहित किया है। ऐसा माना जा रहा है कि इन लेबर कोड्स के लागू होने से कर्मचारियों को काफी फायदा होगा। घट जाएंगे हफ्ते में काम के दिन नए लेबर कोड्स लागू होने के बाद कर्मचारियों के हफ्ते में काम के दिन घट जाएंगे। नए नियम से कर्मचारियों के हफ्ते में काम के दिन पांच से घटकर चार रह सकते हैं। अर्थात कर्मचारियों को हफ्ते में तीन दिन छुट्टी मिलेगी। लेकिन कर्मचारियों के रोजाना के काम के घंटे बढ़ जाएंगे। नियम के अनुसार एक हफ्ते में 48 घंटे काम करना होगा। इसका मतलब है कि एक वर्किंग डे में 12 घंटे काम करना होगा। मिलेगा ओवरटाइम नियम के अनुसार, एक कर्मचारी को हफ्ते में 48 घंटे काम करना होगा। हफ्ते में चार वर्किंग डे के हिसाब से एक दिन में 12 घंटे काम करना होगा। अब अगर किसी कर्मचारी से हफ्ते में 12 घंटे से अधिक काम कराया जाता है, तो उसे ओवर टाइम दिया जाएगा। लेकिन कर्मचारी 3 महीने में 125 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम पर भी काम नहीं कर सकते। नए लेबर कोड्स के अनुसार, किसी भी कर्मचारी से लगातार 5 घंटे से अधिक काम नहीं करवाया जा सकता है। लगातार 5 घंटे काम करने के बाद कर्मचारी को आधे घंटे का ब्रेक देना होगा। बढ़ जाएगा बेसिक वेतन नए वेज रूल से कर्मचारी की सीटीसी में भी काफी बदलाव आने वाले हैं। नए वेज रूल के तहत सारे भत्ते कुल सैलरी के 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकते। इसके चलते कर्मचारी की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में कंपनियां सीटीसी का 25-30 फीसदी हिस्सा ही बेसिक सैलरी में रखती हैं। ऐसे में सभी तरह के अलाउंस 70 से 75 फीसदी तक होते हैं। इन अलाउंस के कारण कर्मचारियों के खाते में अधिक सैलरी आती है, क्योंकि तमाम तरह के डिडक्शन बेसिक सैलरी पर होते हैं। बेसिक सैलरी बढ़ने से कर्मचारी की इन हैंड सैलरी या टेक होम सैलरी कम हो जाएगी। लेकिन ग्रेच्युटी, पेंशन और कर्मचारी व कंपनी दोनों का ही पीएफ में योगदान बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारी की बचत बढ़ जाएगी। बढ़ेंगी पार्ट टाइम जॉब्स कम काम के घंटे और बढ़े हुए पार्ट टाइम जॉब्स के बीच एक मजबूत संबंध है। इसका कारण यह है कि जिन कंपनियों के पूर्णकालिक कर्मचारी अपने काम के घंटे कम करते हैं, तो उन्हें उत्पादन में गिरावट रोकने के लिए पार्ट टाइम कर्मचारी ढूंढ़ने पड़ते हैं, खासकर सेवा क्षेत्र में। हालांकि, पार्ट टाइम जॉब्स "कम वेतन और अस्थायी अनुबंध" से जुड़ी हैं। इसलिए पार्ट टाइम जॉब्स में इजाफे से कुल आय में कमी आएगी।

September 11th 2022, 6:07 am
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