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कौन सी करवट ले रही पहाड़ की राजनीति, क्या दिखेगा कांग्रेस का पंच या फिर सजेगा बीजेपी का मंच

Navbharat Times

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सत्ता को लेकर हमेशा से यह कहा जाता है कि यहां हर पांच साल में बाबू मंत्रियों की बात सुनना बंद कर देते हैं, फाइलों की आवाजाही और सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है। क्योंकि, इस पहाड़ी राज्य में ऐसा होने के पीछे जो सबसे स्थिर कारण रहा है, वह है परिवर्तन। यानी कि कुल मिलाकर कहा जाए तो बीते पिछले तीस सालों में सत्ता कांग्रेस और भाजपा के बीच बारी-बारी से आई है। भले ही राज्य में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। बावजूद इसके इस बार हालात के मिजाज कुछ अलग ही दिख रहे हैं। सचिवालय में काम उतना ही सलीके से चलता देखा जा सकता है, जितना कि हो सकता है। शिमला में हिमाचल प्रदेश सचिवालय में काम करने वाले एक वरिष्ठ सरकारी कर्मचारी की मानें तो कर्मचारी सब कुछ पहले की ही तरह सुन रहे हैं और बीते सालों की कहानी दोहराने जैसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर मृदुला शारदा बीजेपी और कांग्रेस की सत्ता का लगातार रोटेशन का कारण बताते हुए कहती हैं कि "भाजपा और कांग्रेस के कैडर वोट कमोवेश यहां बरकरार हैं। साथ ही यहां फ्लोटिंग वोट ज्यादा नहीं हैं।" अक्टूबर 2021 में चार उपचुनावों में भाजपा की हार हुई थी। कमोवेश सीएम जय राम ठाकुर के गृह क्षेत्र मंडी में विशेष रूप से ऐसा होना भगवा पार्टी के लिए चेताने वाला है। सीएम ठाकुर का इसको लेकर कहना था कि हमसे चूक हुई क्योंकि हमने सोचा था कि हम सत्ताधारी पार्टी हैं, इसलिए यह आसान होगा । सीएम ठाकुर का कहना है कि बीजेपी ने काम किया है और फिर से जीत को लेकर हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं। कांग्रेस का पतन निश्चित है। हम हिमाचल में पार्टी की जीत को दोहराते हुए देख रहे हैं और पूरी तरह से निश्चिंत हैं, क्योंकि देश भर में प्रवृत्ति बदल चुकी है। ठाकुर ने कहा कि उत्तराखंड में सरकार 37 साल बाद दोहराई गई है। हरियाणा में बीजेपी को दोबारा जनादेश मिला, जहां हमारे उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाया करती थी। जयराम ठाकुर ने कहा कि बीजेपी के लिए ठीक ऐसा ही गोवा और मणिपुर में भी हुआ। हिमाचल में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है और आप देखिएगा कि निश्चित तौर पर रिवाज बदलेगा।' विशेषज्ञों का कहना है कि सत्ता में पार्टियों का सत्ता पर काबिज होने का रोटेशन कांग्रेस के लिए एक फायदा हो सकता था, अगर केवल उसने अपने आंतरिक विभाजन को सुलझा लिया होता और एक नेता को राज्य-व्यापी अपील के साथ पेश किया गया होता। पार्टी ने हाल ही में अपने राज्य प्रभारी आनंद शर्मा को 'तुष्टीकरण और अपमान' का हवाला देते हुए संचालन समिति से इस्तीफा देते देखा है। राजनीतिकारों का कहना है कि नेतृत्व चुनाव जीतने के लिए खासा महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस चरमरा रही है, जबकि सीएम ठाकुर और पीएम नरेंद्र मोदी को देखा जाए तो अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। हिमाचल के लोग समझते हैं कि अगर मोदी 2024 या उससे आगे तक पीएम हैं, तो यहां बीजेपी शासन की निरंतरता राज्य की बेहतरी के लिए केंद्रीय सहायता प्राप्त करने में ज्यादा आसान रहेगी। हिमाचल प्रदेश के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह के निधन से कांग्रेस पहले से ही आहत है। एचपी कांग्रेस अध्यक्ष और दिवंगत सीएम की पत्नी प्रतिभा सिंह कहती हैं, "यह हमारे लिए कठिन है, लेकिन लोग कांग्रेस को वोट देते समय पारिवारिक विरासत और उनके जरिए किए गए विकास कार्यों को जरूर ध्यान में रखेंगे। लेकिन ऐसे में मृदुला शारदा का यह सवाल है कि क्या पारिवारिक विरासत एक बाधा बन सकती है? इसको लेकर के हिमाचल के लोग क्यों चाहेंगे कि सत्ता फिर से एक परिवार के पास जाए?" कांग्रेस पार्टी की मानें तो जमीनी स्तर पर नौकरियों की कमी, महंगाई और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग प्रमुख मुद्दे हैं। इसे भांपते हुए कांग्रेस ने 5 लाख नौकरियों, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 18-60 आयु वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और नकदी की तंगी में मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी "10 गारंटियों" के हिस्से के रूप में ओपीएस की वापसी का वादा किया है। राज्य भर में "रोजगार संघर्ष यात्रा" निकाली जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि लोग बीजेपी के खराब प्रदर्शन से तंग आ चुके हैं। प्रतिभा सिंह का दावा है कि कांग्रेस पार्टी आसानी से 68 विधानसभा में 45 सीटें जीतेगी। कांग्रेस के लिए एक जन नेता की अनुपस्थिति और आंतरिक मतभेद एक समस्या पैदा करेंगे, लेकिन इसकी चिंताओं को जोड़ने के लिए एक नया कारक राज्य में राजनीतिक जमीन बनाने निकली आम आदमी पार्टी का प्रवेश है। आप पार्टी भाजपा विरोधी वोटों को छीन सकती है। पंजाब में अपनी जीत से आप आश्वस्त दिख रही है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिरी हुई है। भारत में रुपया-डॉलर विनिमय दर 80 के निचले स्तर पर पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी का मत है कि कांग्रेस और भाजपा के नाले,पुल ,सड़क तक ही सीमित हैं। अगर हम सत्ता में आए तो हम विश्वस्तरीय शिक्षा देंगे और हर पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करेंगे।

September 11th 2022, 6:07 am
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