गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय – 108 देशों की 1200 छात्राएं मिलकर बनाएंगी दो सैटेलाइट
VSK Bharat
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर अंतरिक्ष में महिला शक्ति का उदाहरण बनने जा रहा है। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में नौ दिवसीय मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में भारत सहित 108 देशों की 1200 छात्राएं एक साथ मिलकर दो सेटेलाइट तैयार कर रही हैं। इसमें से एक सेटेलाइट शक्तिसैट-लियो (लो अर्थ आर्बिट) को श्रीहरिकोटा से और दूसरे शक्तिसैट-मून को जापान की निजी अंतरिक्ष कंपनी आई-स्पेस से चंद्रमा के लिए लॉंच किया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर में 23 अगस्त से शुरू हुए कार्यक्रम में देश-विदेश की छात्राओं का संगम देखने को मिल रहा है। 108 देशों में से 61 देशों की 142 छात्राएं कैंपस में पहुंची हैं, शेष देशों की छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से मिशन से जुड़ी हैं।
आयोजकों के अनुसार, मिशन में शामिल होना आसान नहीं था। इसके लिए एक विशेष स्पेस डिप्लोमा कोर्स तैयार किया गया था। कोर्स को 20 विशेषज्ञों की टीम ने दो वर्ष की मेहनत से तैयार किया। यह कोर्स 1500 पन्नों का है, जिसमें 550 प्रैक्टिकल गतिविधियां और 120 घंटे की थ्योरी शामिल है।
यह पूरा कोर्स जोवो प्लेटफार्म पर उपलब्ध था। दुनिया भर के स्कूलों, विज्ञान शिक्षकों और स्पेस टेक्नोलाजी से जुड़े इंजीनियरों से संपर्क कर छात्राओं को कोर्स के लिए प्रेरित किया गया। कोर्स पूरा करने के बाद परीक्षा के माध्यम से 1200 छात्राओं का चयन किया गया, जो अब सेटेलाइट असेंबलिंग का प्रशिक्षण ले रही हैं। यह कोर्स अंग्रेजी, फ्रेंच, पुर्तगाली और स्पेनिश भाषा में है।
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में 24 से 27 अगस्त तक टेक्निकल सत्र चलेंगे। इसमें छात्राओं को वैज्ञानिकों की देखरेख में सेटेलाइट डिजाइन, असेंबलिंग, प्रोग्रामिंग और लॉंचिंग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इसके बाद 28 अगस्त को एक फाइनल परीक्षा आयोजित होगी, जिसके बाद सभी छात्राओं को सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्पेस टेक्नोलाजी में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें कम उम्र में ही अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ना है। शक्तिसैट-लियो लो अर्थ आर्बिट में स्थापित होगा, जो पृथ्वी से जुड़े डेटा कलेक्ट करेगा, जबकि शक्तिसैट-मून चंद्रमा की कक्षा के लिए भेजा जाएगा। 28 से 31 अगस्त तक सेटेलाइट बनाने पर कार्य किया जाएगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आने वाला समय केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि आइडिया, नवाचार, उद्यमिता और तकनीक का है। भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। भारत की अंतरिक्ष यात्रा केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों की यात्रा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, नवाचार और युवा शक्ति की यात्रा है।
ऑनलाइन माध्यम से जुड़े विंग कमांडर राकेश शर्मा ने कहा कि युवा पृथ्वी ग्रह के भविष्य के संरक्षक हैं। हमें अपने ज्ञान एवं क्षमताओं का उपयोग पृथ्वी तथा मानवता के बेहतर भविष्य के लिए करना चाहिए।
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