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पाक के जिस F-16 को अभिनंदन ने चटाई थी धूल, उसको 'सुपरपावर्स' देगा US, भारत के लिए बुरी खबर!

Navbharat Times

वॉशिंगटन: अमेरिका ने फैसला कर लिया है कि वह पाकिस्‍तान एयरफोर्स (PAF) के पास मौजूद फाइटर जेट एफ-16 को अपग्रेड करेगा। भारत सरकार की तरफ से अभी तक अमेरिका के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बुधवार को अमेरिका की तरफ से इस फैसले का ऐलान किया गया। पीएएफ के पास एफ-16 की तीन स्‍क्‍वाड्रन हैं और कुल 65 जेट्स हैं। इन जेट्स को फाइटिंग फाल्‍कन्‍स के नाम से भी जानते हैं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन और उनका प्रशासन चाहता है कि पाकिस्‍तान की काउंटर-टेररिज्‍म क्षमताओं में इजाफा हो सके। अभी तक इस बात की जानकारी भी नहीं है कि भारत को इस फैसले से अमेरिका ने अवगत कराया था या नहीं। अभिनंदन ने किया था ढेर अमेरिका का यह कदम भारत के लिए एक बुरी खबर हो सकता है। साल 2019 में बालाकोट एयरस्‍ट्राइक के बाद जम्‍मू कश्‍मीर में पाकिस्‍तान एयरफोर्स के जेट्स ने घुसपैठ की थी। उस समय भारत की तरफ से मुंहतोड़ जवाब दिया गया था। भारतीय वायुसेना (IAF) के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने अपने मिग-21 से पाकिस्‍तान के एक एफ-16 को ढेर कर दिया था। अमेरिका का यह फैसला, भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल की स्‍क्‍वाड्रन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्‍तान के अखबार द डॉन ने लिखा है कि अमेरिकी अधिकारी से पूछा गया कि भारत की तरफ से उस आलोचना का सामना कैसे करेगा जो इस कदम के बाद उसे झेलने पड़ सकती है? इस पर अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्‍ते अपने दम पर खड़े हैं और किसी प्रस्‍ताव पर नहीं टिके हैं। क्‍या-क्‍या शामिल होगा अपग्रेड में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के अनुसार एफ-16 के अपग्रेड में इंजन और इलेक्‍ट्रॉनिक वॉरफेरयर की क्षमता बढ़ाना है। इसके अलावा इसके प्लेटफॉर्म के लक्ष्‍यीकरण और इलेक्‍ट्रॉनिक वॉरफेयर पॉड्स जिसके बाद ये जेट न सिर्फ बिना रुके इलेक्‍ट्रॉनिक रेकी कर सकेगा बल्कि कम्‍युनिकेशन और रडार जैमिंग जैसे रोल भी अदा कर पाएगा। साथ ही फाइटर के सॉफ्टवेयर जिसमें कुछ और वग्रीकृत और गैर-वग्रीकृत हैं, उन्‍हें भी अपग्रेड किया जाएगा। अमेरिका के विदेशी सैन्‍य बिक्री मार्ग के जरिए पाकिस्‍तान वायुसेना को 450 मिलियन डॉलर का पैकेज मिला है। इसमें एफ-16 के लिए भी मदद दी गई थी लेकिन इस मदद में फाइटर जेट को नई क्षमताओं जैसे कि हथियार नहीं मुहैया कराए गए थे। भारत पर कितना असर भारत के रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका की तरफ से होने वाले इस अपग्रेड के बाद एफ-16 की क्षमता में इजाफा हो जाएगा जो कि पिछले कुछ सालों से भारत के लिए कोई महत्‍व नहीं रख रहे थे। मगर उनकी मानें तो यह पूरी प्रक्रिया बूढ़े हो चुके एफ-16 के लिए मेकअप से कहीं ज्‍यादा है। इसके बाद पीएएफ की ऑपरेशनल क्षमताएं भारतीय वायुसेना की तुलना में कहीं ज्‍यादा हो जाएंगी। आईएएफ पहले ही कम होती लड़ाकू स्‍क्‍वाड्रन की संख्‍या से परेशान है। क्‍यों लिया गया फैसला यूएस इंस्‍टीट्यूट ऑफ पीस में दक्षिण एशिया मामलों के सलाहकार डैनियल मार्के ने डॉन से बातचीत में कहा है कि 450 मिलियन डॉलर का पैकेज एक जरूरी फैसला था जो कि तकनीकी जरूरतों के चलते उठाया गया था। इसका मकसद एफ-16 को ऑपरेशनल रखना था। उन्‍होंने यह बात भी कही कि इसके बाद अमेरिका और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते एक बार फिर से बेहतर हो सकेंगे। दोनों देश आने वाले समय में समान हितों पर साथ काम कर सकेंगे। दूसरी तरफ अमेरिका में पाकिस्‍तान के विशेषज्ञ को मानें तो यह मदद फ्री में नहीं है। यह फैसला दरअसल उस कदम के तहत उठाया गया है जिसमें दूसरे देशों के साथ राजनीतिक, राजनयिक और सुरक्षा संबंधों में बदलाव की पहल शामिल है। जवाहिरी की मौत का इनाम वॉशिंगटन स्थित जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में सुरक्षा मामलों की प्रोफेसर क्रिस्‍टीन फेयर की मानें तो अमेरिका ने पाकिस्‍तान को 450 मिलियन डॉलर का पैकेज देकर अलकायदा सरगना अयमान अल जवाहिरी की मौत का इनाम दिया है। जवाहिरी को 31 जुलाई को अमेरिकी मिलिट्री ने एक ड्रोन स्‍ट्राइक में काबुल में ढेर कर दिया था। जवाहिरी की मौत से पहले पाक इंटेलीजेंसी एजेंसी आईएसआई के डायरेक्‍टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम ने मई में अमेरिका का दौरा किया था। ट्रंप का फैसला बाइडेन ने बदला साल 1980 के दशक में पाकिस्‍तान को अमेरिका से एफ-16 जेट्स मिले थे। पहले ब्‍लॉक-15 वैरियंट की डिलीवरी हुई तो इसके बाद 1990 के दशक में ब्‍लॉक 52 मॉडल पाकिस्‍तान को दिया गया। साल 2018 में तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पाकिस्‍तान को मिलने वाली 2 अरब डॉलर की सुरक्षा मदद रोक दी थी। इसके तहत एफ-16 को अपग्रेड किया जाना था। ट्रंप ने वह फैसला अफगान-तालिबान और हक्‍कानी आतंकी संगठन की वजह से उठाया था जो पाक सरजमीं से अपना काम करते हैं। उनका कहना था कि पाकिस्‍तान इन संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगार बना हुआ है और इसकी वजह से अफगानिस्‍तान में अमेरिकी अगुवाई वाले सुरक्षा बलों पर हमले हो रहे हैं। भारत हुआ निराश ट्रंप के उत्‍तराधिकारी बाइडेन ने उनका फैसला पलट दिया और इससे भारतीय मिलिट्री अधिकारी खासे निराश हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत कई तरह के मिलिट्री हार्डवेयर अमेरिका से खरीदने की कोशिशें कर रहा है। इसमें 30 एमक्‍यू रीपर ड्रोन के अलावा 26 बोइंगF/A-18 E/ ब्‍लॉक III सुपर हॉर्नेट ड्यूल इंजन जेट भी शामिल हैं। इन जेट्स में से आठ को भारतीय नौसेना के नए कमीशंड एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाना है। भारत ने साल 2001-2002 से अब तक 20 अरब डॉलर की कीमत वाले अमेरिकी सैन्‍य उपकरण खरीदे हैं।

September 11th 2022, 12:07 am
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