भारत पर युद्ध थोपने वाले और करोड़ों लोगों की मौत के जिम्मेदार नेता को ‘महान’ बता रही CPI(M)…!!
VSK Bharat
इतिहास में देश पर युद्ध थोपने वालों की प्रशंसा करना एक अत्यंत संवेदनशील, विवादास्पद विषय़ है। ऐसे में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी अर्थात CPI(M) ने माओ जेदोंग की 50वीं बरसी पर जो किया, वह सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं है। वह भारतीय राजनीति में उस वैचारिक सच्चाई का प्रदर्शन है, जिसे वर्षों से लोकतंत्र, संविधान, असहमति और मानवाधिकार की भाषा के पीछे छिपाया जाता रहा है।
09 सितंबर को CPI(M) के आधिकारिक अकाउंट से लिखा गया – “We salute the great revolutionary Mao Zedong, the main leader and strategist of the Chinese revolution.” यानी भारत की एक प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टी ने माओ को “महान क्रांतिकारी” बताते हुए उसे सलाम किया। इसमें न कोई आलोचनात्मक टिप्पणी थी, न माओ के शासन की भयावह मानवीय कीमत का उल्लेख था और न ही भारत के खिलाफ 1962 के युद्ध का कोई संदर्भ था।
यही वह एक वाक्य है, जिसे राजनीतिक विमर्श के सामने रखकर देखने की आवश्यकता है। क्योंकि उसी माओ के नेतृत्व में चीन ने भारत के खिलाफ 1962 का युद्ध लड़ा था और भारत के सैकड़ों सैनिक बलिदान हुए थे। यह उसी माओ की प्रशंसा है, जो चीन में करोड़ों लोगों की मौत से जुड़ा है।
ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान मौतों के अनुमान करोड़ों में हैं। The China Quarterly में प्रकाशित 2025 के शोध में माओ की नीतियों से जुड़े ग्रेट लीप फॉरवर्ड अकाल में 45 मिलियन तक मौतों का अनुमान दिया गया है। सांस्कृतिक क्रांति के ग्रामीण चीन पर प्रभाव का अध्ययन करने वाले Andrew Walder और Yang Su ने 7.5 लाख से 15 लाख मौतों और लगभग 3.6 करोड़ लोगों के राजनीतिक उत्पीड़न का अनुमान दिया था।
फिर भी भारत की एक कम्युनिस्ट पार्टी और विपक्षी गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल CPI(M) को माओ में सबसे पहले और सबसे प्रमुख रूप से क्या दिखाई देता है? “महान क्रांतिकारी।”
जब एक राजनीतिक पार्टी अपने आधिकारिक मंच से माओ को “great revolutionary” (महान क्रांतिकारी) कहती है, तो वह इतिहास नहीं पढ़ा रही होती, वह अपनी वैचारिक निष्ठा प्रदर्शित कर रही होती है। और इस वैचारिक निष्ठा की सबसे बड़ी बात यह है कि माओ की विरासत में चीनी क्रांति नहीं, बल्कि सत्ता के लिए निर्मम राजनीतिक हिंसा है, और सबसे महत्वपूर्ण भारत के खिलाफ युद्ध है।
1962 में चीन ने भारत पर हमला किया। उस समय चीन का सर्वोच्च नेता माओ जेडोंग था। अब 1962 का युद्ध कोई ऐसा सैन्य घटनाक्रम नहीं था, जिसे माओ से अलग करके देखा जा सके। माओ ने ही भारत पर हमला करने की रणनीति बनाई थी और सेना को हमला करने के लिए भेजा था। अध्ययन के अनुसार माओ का उद्देश्य भारत को दबाव में लाना और व्यापक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों में चीन की स्थिति मजबूत करना था। अक्टूबर 1962 में माओ ने युद्ध का फैसला किया तथा 20 अक्टूबर को चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्रों पर समन्वित हमला शुरू किया।
इसलिए जब एक राजनीतिक दल माओ को “महान क्रांतिकारी” कहकर सलाम करता है, तो वह किसी ऐसे विदेशी नेता को सम्मान नहीं दे रहा, जिसका भारत से कोई लेना देना नहीं था। वह उस व्यक्ति की प्रशंसा कर रहा है, जिसने शत्रु के रूप में भारत के खिलाफ युद्ध किया। यह तथ्य भारतीय राजनीतिक विमर्श में गायब क्यों हो जाता है? यह प्रश्न जितना CPI(M) से है, उतना ही उन लोगों से भी है जो CPI(M) के साथ राजनीतिक मंच साझा करते हैं और लोकतंत्र की नैतिकता पर बड़े बड़े भाषण देते हैं।
The post भारत पर युद्ध थोपने वाले और करोड़ों लोगों की मौत के जिम्मेदार नेता को ‘महान’ बता रही CPI(M)…!! appeared first on VSK Bharat.
تحميل تطبيق نبأ للآندرويد مجانا
اقرأ على الموقع الرسمي

تحميل تطبيق نبأ للآندرويد مجانا