एशिया कप : मजा तो भारत-पाक टक्कर में ही आता...हफीज की 'लाडला' थ्योरी की कुढ़न समझिए
Navbharat Times
नई दिल्ली: एशिया कप 2022 (Asia Cup 2022) में भारतीय क्रिकेट टीम ने प्रशंसकों की तमाम उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सुपर 4 में वह पाकिस्तान और श्रीलंका से हारकर बाहर हो गई। शर्मा जी के ब्वॉय्ज ग्रुप की सबसे कमजोर टीम अफगानिस्तान को ही हरा सके। इसने पाकिस्तान और श्रीलंका के लिए फाइनल में खेलने का रास्ता खोल दिया। आज दोनों देश खिताबी जंग के लिए आमने-सामने हैं। ज्यादातर का रिऐक्शन यही है कि मजा तो भारत और पाकिस्तान की टक्कर में आता। फाइनल में भारत नहीं तो क्या मजा। लेकिन, सच यह है कि भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) ने वो खेल ही नहीं खेला जिससे वह अंतिम दो में जगह बना पाती। यह और बात है कि आईसीसी से लेकर बीसीसीआई तक हर कोई यही चाहता है कि भारत हर फाइनल खेले। इसकी वजह है कि जब भारतीय क्रिकेट टीम फाइनल में होती है तो वह रनों की ही नहीं, कमाई की भी मशीन बन जाती है। हाल में पाकिस्तान के पूर्व ऑल राउंडर मोहम्मद हफीज (Mohammad Hafeez) की यह कुढ़न सामने भी आई थी। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को 'लाडला' करार दिया था। वह बोले थे कि टीम इंडिया अच्छा खेलने की वजह से नहीं बल्कि कमाई कराने के कारण लाडली है। बेशक, हफीज ने जल-भुनकर यह बात कही हो। लेकिन, यह सच है कि क्रिकेटिंग रेवेन्यू में भारत की बादशाहत है। इस बात को एशिया कप 2022 में खेले गए मैचों की व्यूवरशिप से समझने की कोशिश करते हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए एशिया कप के पहले मैच को टीवी पर 12.5 करोड़ लोगों ने देखा। यह मैच 28 अगस्त को खेला गया था। 2018 में हुए एशिया कप के मुकाबले इसे 30 फीसदी ज्यादा लोगों ने देखा। एशिया कप के पहले एक हफ्ते के दौरान 20 करोड़ लोगों ने मैच का लुत्फ लिया। भारत में क्रिकेट की दीवानगी को हर कोई जानता है। भारत के हर मैच में दर्शकों की संख्या इसका सबूत होती है।
भारत के नहीं खेलने पर कैसे पड़ता है कमाई पर असर?
भारत जब कोई मैच नहीं खेलता है तो कमाई पर कैसे असर पड़ता है, अब इसे समझने की कोशिश करते हैं। टीम इंडिया के किसी मैच में नहीं खेलने पर 10 सेकेंड के एडवर्टाइजिंग स्पॉट की कॉस्ट घटकर 5 लाख रुपये से कम रह जाती है। भारतीय क्रिकेट टीम के सीन में आते ही सारा गणित बदल जाता है। ऐसा होने पर ऐड स्पॉट की कॉस्ट बढ़कर 18-20 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं, अगर भारत-पाकिस्तान का मुकाबला हो तो यह कीमत 10 सेकेंड के लिए 23-25 लाख रुपये तक हो जाती है। इस तरह क्रिकेटिंग इवेंट में भारत का फाइनल में नहीं पहुंचना ब्रॉडकास्टर के रेवेन्यू पर बेहद खराब असर डालता है। यही कारण है कि आईसीसी, बीसीसीआई से लेकर ब्रॉडकास्टर और प्रशंसक तक हर कोई चाहता है कि फाइनल में कोई भी पहुंचे, लेकिन उनमें से एक टीम भारत जरूर हो। भारत के फाइनल में रहने भर से सबकुछ बदल जाता है।
हफीज का तंज पूरी तरह बेबुनियाद नहीं
ऐसे में मोहम्मद हफीज के तंज को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। उसमें थोड़ा सच भी है। हालांकि, उनका यह कहना बिल्कुल फिजूल है कि भारतीय टीम को सिर्फ इसलिए तवज्जो मिलती है कि वह रिकॉर्ड रेवेन्यू पैदा करने का दमखम रखती है। लगता है कि हफीज ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बिना देखे ही ऐसा मूर्खतापूर्ण बयान दे दिया।
पूर्व ऑल राउंडर ने क्या कहा था?
एक शो में मोहम्मद हफीज ने कहा था कि हमारे यहां कमाऊ पूत सबसे प्यारा होता है। वह सबसे ज्यादा लाडला होता है। उसकी चुम्मियां सबसे ज्यादा ली जाती हैं। इंडिया एक रेवेन्यू मेकिंग कंट्री है। जब बाइलेट्रल सीरीज भी होती हैं तो उसमें भी सभी को फायदा होता है। जब एंकर ने उनसे पूछा कि वो लाडले सिर्फ इस वजह से हैं कि अच्छा खेलते हैं या इसलिए कि वो अच्छा कमा कर देते है तो हफीज ने कहा था कि इसकी वजह दूसरी वाली है। उनके मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को धुआंधार कमाई कराती है। बीसीसीआई दुनिया का सबसे दौलतमंद बोर्ड है। यह प्रमुख आईसीसी मेंबर्स में खासा शक्तिशाली है।
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