कनाडा के ऑटो बाजार में सुस्ती, तो भारतीय ऑटो सेक्टर में आठ साल की सबसे तेज रफ्तार
Janoduniya.tv
आरबीसी (RBC) के सबाहत खान का मानना है कि ऑटो-कनाडा (AutoCanada) फिलहाल एक बड़े ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है और इस साल की दूसरी छमाही तक ऐसा कुछ खास नजर नहीं आ रहा जो कंपनी के स्टॉक को कोई नई रफ्तार दे सके। असल में, वहां रिटेल का माहौल काफी सुस्त पड़ा है। गाड़ियां महंगी हो गई हैं और ग्राहक बड़े खर्चों से हाथ खींच रहे हैं। इसका सीधा असर नई और पुरानी, दोनों तरह की गाड़ियों की सेल पर पड़ रहा है। मैनेजमेंट को भी लग रहा है कि दूसरी तिमाही की शुरुआत में कनाडाई मार्केट ठंडा ही रहेगा, भले ही मार्च और अप्रैल में पुरानी गाड़ियों के प्रॉफिट मार्जिन में थोड़ा सुधार दिखा हो। खान के मुताबिक, अंदरूनी कमियों को सुधारने का काम चल रहा है, लेकिन हालात को पूरी तरह नॉर्मल होने में अभी भी 9 से 12 महीने लग सकते हैं। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म आउटलुक काफी फीका है और शेयर्स मुश्किल से 0.3% के आसपास ही ट्रेड कर रहे हैं।
लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्से में, खासकर हमारे यहां भारत में, कहानी बिल्कुल उलट है। जहां पश्चिमी बाजार महंगाई और सुस्ती की मार झेल रहे हैं, वहीं भारतीय ऑटो रिटेल मार्केट मई 2026 में एक अलग ही गियर में दौड़ रहा है। वाहन (VAHAN) पोर्टल के 1 से 25 मई तक के डेटा को ही देख लें, तो साफ समझ आता है कि इंडस्ट्री 2018 के बाद से अपने सबसे बेहतरीन दौर की तरफ बढ़ रही है। इस दौरान गाड़ियों का कुल रजिस्ट्रेशन करीब 19.75 लाख यूनिट्स रहा, जो पिछले साल के 17.7 लाख के मुकाबले 11.6% की सीधी छलांग है। कई कंपनियों ने तो महीना खत्म होने से पहले ही मई 2025 के रजिस्ट्रेशन के आंकड़े पार कर लिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह ग्रोथ किसी एक सेगमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताओं के बावजूद हर तरह की गाड़ियों में डिमांड सॉलिड बनी हुई है।
पैसेंजर व्हीकल्स (PV) तो इस बार असली शो-स्टॉपर साबित हुए हैं। इनके रजिस्ट्रेशन में 23% का भारी उछाल आया है और आंकड़ा 2.95 लाख से बढ़कर सीधे 3.62 लाख यूनिट्स पर पहुंच गया है। यूटिलिटी व्हीकल्स, खासतौर पर एसयूवी (SUV) और कॉम्पैक्ट सेगमेंट की गाड़ियों की मांग ने इस रैली को लीड किया है। सप्लाई चेन की दिक्कतें अब काफी हद तक सुलझ गई हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर रिटेल सेल्स में दिख रहा है।
टू-व्हीलर सेगमेंट हमेशा से हमारे मार्केट की रीढ़ रहा है और 14.53 लाख यूनिट्स (9% की ग्रोथ) के साथ इसने अपना दबदबा कायम रखा है। हालांकि, यहां कंपनियों के बीच मार्केट शेयर को लेकर दिलचस्प रस्साकशी चल रही है। प्रीमियम मोटरसाइकिल्स की डिमांड थोड़ी ऊपर-नीचे रही है, लेकिन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (EVs) अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सेमी-अर्बन इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। एथर एनर्जी (Ather Energy) का मोमेंटम बरकरार है, वहीं ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) लगातार तीसरे महीने 10 हजार मंथली रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा पार करने जा रही है। यह इस बात का सबूत है कि शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद अब ईवी मार्केट काफी स्टेबल हो रहा है। पेट्रोल वाले टू-व्हीलर्स की बात करें तो टीवीएस मोटर (TVS Motor) और बजाज ऑटो (Bajaj Auto) मजबूत ग्रामीण मांग और अपने बेहतरीन लाइनअप के दम पर मार्केट शेयर हथिया रहे हैं। वहीं इस कड़ी टक्कर में हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) को थोड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
कमर्शियल व्हीकल्स का सेगमेंट भी अपनी रफ्तार पकड़ चुका है। फ्रेट मूवमेंट के स्टेबल होने और पुरानी गाड़ियों को रिप्लेस करने की मांग के चलते इसके रजिस्ट्रेशन 14% बढ़कर 62,598 यूनिट्स हो गए हैं। टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड जैसे दिग्गजों ने भी अपने पिछले साल के नंबर्स को पार कर लिया है, जो इंडस्ट्री की मजबूत सेहत का इशारा है। एक तरफ जहां ऑटो-कनाडा जैसी कंपनियां स्ट्रगल कर रही हैं, वहीं भारतीय ऑटो सेक्टर का यह बुल रन दिखाता है कि कंज्यूमर सेंटिमेंट का रुख कब और कैसे पलट जाए, यह तय कर पाना किसी भी एनालिस्ट के लिए टेढ़ी खीर है। शायद यही ग्लोबल मार्केट के डायनेमिक्स की असलियत है।
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